DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Wednesday, April 1, 2026

CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

नई दिल्ली, 30 मार्च 2026।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) फरवरी 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने भाग लिया।

जारी आंकड़ों के अनुसार, पेपर-1 में कुल 12,11,611 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 10,65,410 परीक्षार्थी उपस्थित हुए। इनमें से 3,58,937 अभ्यर्थी सफल रहे, जो कुल 33.69 प्रतिशत है। वहीं, पेपर-2 में 21,56,459 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 18,67,428 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए और 3,46,738 अभ्यर्थी सफल हुए, जिसकी सफलता दर 18.56 प्रतिशत रही।

दोनों पेपरों को मिलाकर कुल 26,49,129 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 23,24,625 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें कुल 5,97,061 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए, जिससे कुल सफलता प्रतिशत 25.68 रहा।

सीबीएसई ने बताया कि अभ्यर्थी अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर देख सकते हैं। साथ ही, मार्कशीट और पात्रता प्रमाण पत्र भी शीघ्र ही डिजिलॉकर पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिन्हें अभ्यर्थी अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से डाउनलोड कर सकेंगे। 




CBSE ने जारी किया CTET का रिजल्ट, जानिए!  कितने नंबर वाला होगा पास? इस लिंक से करें चेक


🔴 इस लिंक से देखें अपना परिणाम 

CBSE ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) पेपर-1 और पेपर-2 का रिज्लट जारी कर दिया है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर चेक कर सकते हैं।


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) 2026 का रिजल्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने लॉगिन डिटेल्स डालकर आसानी से अपना रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं। लाखों छात्रों को इस परीक्षा के रिजल्ट का इंतजार था। 


इस परीक्षा में देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 25 लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। अब यह सभी उम्मीदवार सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। आप सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट जारी कर सकते हैं क्योंकि सीबीएसई ने सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट एक साथ जारी कर दिया है। 

 

कैसे चेक करें रिजल्ट?

सबसे पहले CTET की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाएं।

लेटेस्ट न्यूज सेक्शन में 'CTET February Result 2026' का विकल्प दिखेगा।

इस लिंक पर क्लिक करने से आप रिजल्ट लॉगिन पेज पर पहुंच जाएंगे।

अपना रोल नंबर और पासवर्ड डालें।

सबमिट करते ही आपका CTET रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।

इसके बाद आप अपना स्कोर कार्ड डाउनलोड कर लें। 


कितने नंबर वाला होगा पास?
CTET पास करने के लिए जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों को कम से कम 60 प्रतिशत नंबर लाने होते हैं। इसका मतलब है कि कुल 150 नंबरों में से कैंडिडेट्स को कम से कम 90 नंबर हासिल करने होते हैं। रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को CTET एग्जाम क्लियर करने के लिए 55 प्रतिशत स्कोर करना होता है। अगर आपका स्कोर इतना है तो आप इस परीक्षा में सफल हो गए हैं। इसके बाद आपका यह रिजल्ट लाइफ टाइम वैलिड रहेगा यानी इस रिजल्ट के आधार पर आप आगे परीक्षाएं दे सकते हैं। 


पेपर-1 और पेपर-2 क्या है?
सीबीएसई सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट के पेपर-1 और पेपर-2 आयोजित किया था। पेपर 1 पास करने वाले अभ्यर्थी कक्षा 1 से लेकर 5वीं तक और पेपर 2 एग्जाम क्वालीफाई करने पर उम्मीदवार कक्षा 6 से लेकर 8 तक पढ़ाने के लिए पात्र हो जाते हैं।

माध्यमिक शिक्षा : शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रवेश, पंजीकरण एवं ऑनलाइन उपस्थिति के संबंध में निर्देश

यूपी बोर्ड का नया सत्र आज से, ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य, परिषद ने दिए निर्देश- कक्षा नौवीं से 12वीं तक का संचालन एक अप्रैल से अनिवार्य रूप से किया जाए

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत बुधवार से हो जाएगी। इसके साथ ही प्रवेश, पंजीकरण और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।

इस बार विशेष व्यवस्था के तहत सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति परिषद के पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। परिषद ने सभी विद्यालयों को निर्देशित किया है कि कक्षा नौवीं से 12वीं तक का संचालन एक अप्रैल से अनिवार्य रूप से किया जाए।

बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने निर्देश दिए हैं कि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के वार्षिक परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी, इसलिए इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

सचिव ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौवीं व 11वीं के विद्यार्थियों के अग्रिम पंजीकरण और परीक्षा वर्ष 2027 में कक्षा 10वीं व 12वीं के छात्रों के परीक्षा आवेदन से संबंधित समय सारिणी अलग से जारी की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि नए सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों का पंजीकरण और पूरा विवरण उसी दिन परिषद के पोर्टल पर दर्ज किया जाए।

ताकि ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में उनका नाम प्रदर्शित हो सके और उपस्थिति अंकित की जा सके। साथ ही अभिभावकों और छात्रों से कहा गया है कि वे किसी के बहकावे में आकर अनधिकृत या महंगी किताबें न खरीदें। परिषद द्वारा अधिकृत प्रकाशकों की पुस्तकों की सूची और निर्धारित दरें वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।



माध्यमिक शिक्षा : शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रवेश, पंजीकरण एवं ऑनलाइन उपस्थिति के संबंध में निर्देश


भारत में भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर सख्ती की तैयारी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उम्र आधारित नियमों की सिफारिश

भारत में भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर सख्ती की तैयारी,  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उम्र आधारित नियमों की सिफारिश


नई दिल्ली। बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाने की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सुझाव दिया है कि बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार ही सोशल मीडिया तक पहुंच दी जाए और इसके लिए एक स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया जाए।


आयोग के अनुसार, 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के स्वतंत्र उपयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वहीं, 13 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य हो और 15 से 18 वर्ष के किशोरों को सीमित और निगरानी के साथ उपयोग की छूट दी जाए। आयोग का मानना है कि इससे बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की बेहतर रक्षा की जा सकेगी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय अधिक जोखिम वाले फीचर्स पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। साथ ही, बच्चों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि उनके अधिकार सुरक्षित रह सकें।

आयोग ने उम्र सत्यापन प्रणाली को अनिवार्य बनाने की भी सिफारिश की है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे तय नियमों के अनुसार ही सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, एक केंद्रीय नियामक संस्था के गठन का सुझाव दिया गया है, जो इन नियमों के पालन की निगरानी करेगी।

रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वहां बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं, जहां नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के बढ़ते डिजिटल एक्सपोजर को देखते हुए इस तरह के नियम समय की मांग हैं। यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो यह बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

संविदा प्रवक्ताओं को प्रमोशन में राहत लेकिन आर्थिक लाभ नहीं, व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई

संविदा प्रवक्ताओं को प्रमोशन में राहत लेकिन आर्थिक लाभ नहीं, व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई


 लखनऊ: राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत ऐसे प्रवक्ता जो पहले संविदा पर कार्यरत थे और बाद में नियमित हुए, उनकी पुरानी संविदा सेवा को करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत प्रमोशन में जोड़ा जाएगा। हालांकि यह लाभसिर्फ कागजी (नोशनल) होगा और इससे कोई आर्थिक लाभनहीं मिलेगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा निदेशक करेंगे। समिति 15 दिन में रिपोर्ट देगी।


यह व्यवस्था उन प्रवक्ताओं पर लागू होगी, जो वर्ष 2005-06, 2006-07 और 2008-09 में संविदा पर नियुक्त हुए थे और बाद में 26 दिसंबर 2016 के शासनादेश के तहत नियमित किए गए। उनकी सेवाएं पहले ही बिना अंतराल के निरंतर मानी जा चुकी हैं। यह निर्णय यूजीसी 2010 और 2018 के नियमों के आधार पर लिया गया है। 

इन नियमों में शर्तों के साथ संविदा या अस्थायी सेवा को प्रमोशन में जोड़ने का प्राविधान है। यह भी स्पष्ट है कि सेवा सरकारी, निजी या स्थानीय संस्थान में की गई हो, उसमें भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, इस निर्णय के तहत संविदा सेवा को केवल रिकार्ड में जोड़ा जाएगा। इससे न तो वरिष्ठता तय होगी, न पेंशन में लाभ मिलेगा और न ही कोई एरियर या अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। प्रमोशन के बाद वेतन केवल वास्तविक प्रमोशन की तारीख से ही लागू होगा। 

यह निर्णय डा. रजत गंगवार समेत कई सहायक आचार्यों द्वारा पांच जुलाई 2025 को किए गए अनुरोध के बाद लिया गया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व अध्यक्ष डा. दीनानाथ सिंह और पूर्व संयुक्त महामंत्री डा. जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि यह मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों को भी यही लाभ दिया जाए।

अटल आवासीय विद्यालयों में भी लागू होगा प्रोजेक्ट प्रवीण, आईटी, हेल्थकेयर, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक कोर्स से छात्र होंगे सशक्त

अटल आवासीय विद्यालयों में भी लागू होगा प्रोजेक्ट प्रवीण, आईटी, हेल्थकेयर, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक कोर्स से छात्र होंगे सशक्त

सरकार की पहल से 18 विद्यालयों के 3447 विद्यार्थियों को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण


लखनऊ। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से अब प्रदेश के 18 अटल आवासीय विद्यालयों में प्रोजेक्ट प्रवीण लागू किया जाएगा। इसके तहत कक्षा 6 से 12 तक संचालित इन विद्यालयों के 3447 विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों को आईटी, आईटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें सॉफ्ट स्किल्स और इंडस्ट्रियल विजिट भी शामिल हैं।


एआई फॉर ऑल मॉड्यूल को भी जोड़ा गया है, जिससे विद्यार्थी तकनीकी रूप से सशक्त बन सकें। अब तक यह कार्यक्रम केवल सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में संचालित था।

व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में मिशन निदेशक पुलकित खरे द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर विद्यालयों को चयनित किया गया है। आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, आजमगढ़, बस्ती, बांदा, गोंडा, झांसी, कानपुर नगर, लखनऊ, बुलंदशहर, मिर्जापुर, प्रयागराज, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, बरेली और मुरादाबाद स्थित 18 अटल आवासीय विद्यालयों के कुल 3447 छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण के लिए पात्र पाया गया है। अटल आवासीय विद्यालय में श्रमिकों, प्रवासी कामगारों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभावान बच्चों को निशुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान की जाती है।

यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के मूल्यांकन की अवधि बढ़ी, परिणाम में हो सकती है देरी

यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के मूल्यांकन की अवधि बढ़ी, परिणाम में हो सकती है देरी

31 मार्च 2026
प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं हो सकेगा। लगभग 50 लाख से अधिक छात्रों की कॉपियों की जांच एक अप्रैल तक पूरी होना संभव नहीं है। बोर्ड ने मूल्यांकन अवधि को तीन से चार दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे परीक्षा परिणाम घोषित होने में भी देरी की संभावना जताई जा रही है। 

प्रदेश के 254 मूल्यांकन केंद्रों में से अब तक 117 केंद्रों पर मूल्यांकन का कार्य पूरा हो चुका है। करीब 80 प्रतिशत कॉपियों का मूल्यांकन संपन्न हो गया है, जबकि शेष कॉपियों की जांच चार अप्रैल तक पूरी होने की उम्मीद है। मंगलवार को 192 केंद्रों पर 47,804 परीक्षकों ने मूल्यांकन कार्य किया। इस दौरान हाईस्कूल की 5,80,800 और इंटरमीडिएट की 5,98,996 समेत कुल 11,79,796 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की गई।

हाल के दिनों में मूल्यांकन कार्य में तेजी आई है। 30 मार्च को 17,56,851, 29 मार्च को 25,41,361 और 28 मार्च को 33,91,506 कॉपियों का मूल्यांकन किया गया। बुलंदशहर समेत कई जिलों में कॉपियों की जांच पूरी हो चुकी है। ईद और रामनवमी के अवकाश के कारण मूल्यांकन कार्य तीन दिन प्रभावित रहा। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं हो सकेगा, इसलिए इसे तीन से चार दिन आगे बढ़ाया गया है। 






यूपी बोर्ड मूल्यांकन में 2% गलती तो 3 साल के लिए डिबार, परीक्षक के मानदेय में से 85 प्रतिशत की कटौती की जाएगी

यूपी बोर्ड के सचिव ने सभी केंद्रों के उपनियंत्रक को भेजे निर्देश

अंकेक्षण के बावजूद गलती तो नकल अधिनियम में होगी कार्रवाई

15 मार्च 2026
प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू हो रहा है। कॉपियों के मूल्यांकन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए, इसके लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी 250 केंद्रों के उपनियंत्रकों (प्रधानाचार्यों) को सख्त निर्देश दिए हैं। मूल्यांकन के लिए भेजे निर्देश में लिखा है कि मूल्यांकन में दो प्रतिशत तक त्रुटि पाए जाने पर परीक्षक के मानदेय में से 85 प्रतिशत की कटौती की जाएगी तथा संबंधित परीक्षक को तीन वर्ष के लिए डिबार कर दिया जाएगा। एक प्रतिशत तक त्रुटि मिलने पर मानदेय में 50 प्रतिशत की कटौती होगी तथा दशमलव पांच प्रतिशत तक त्रुटि होने पर 25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।

अंकेक्षण (दोबारा जांच) के बाद भी यदि किसी उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन में त्रुटि पाई जाएगी तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अंकेक्षक की होगा। कॉपी जांचने या अंकेक्षण में लापरवाही पर बोर्ड के नियम /विनियम एवं उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के नियमानुसार संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। अंकेक्षक की व्यवस्था का उद्देश्य है कि मूल्यांकन कार्य शुद्ध और त्रुटिविहीन हो तथा त्रुटि/लापरवाही के कारण छात्रों के साथ अन्याय न हो। अंक सावधानी पूर्वक चढ़ाए जाएं क्योंकि कटिंग होने पर कम्प्यूटर अंक स्वीकार नहीं करेगा और परीक्षार्थी का परीक्षाफल अपूर्ण रह जाएगा।

विज्ञान-सोशल की कॉपियों का पैनल मूल्यांकन
हाईस्कूल की सामाजिक विज्ञान एवं विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाओं का पैनल मूल्यांकन होगा। सामाजिक विज्ञान के प्रथम खंड को इतिहास एवं राजनीति शास्त्र के साथ स्नातक प्रशिक्षित तथा द्वितीय खंड अर्थशास्त्र एवं भूगोल के साथ स्नातक प्रशिक्षित योग्यताधारी परीक्षक मूल्यांकन करेंगे। विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रथम खंड को भौतिक विज्ञान के साथ बीएससी प्रशिक्षित स्नातक तथा द्वितीय एवं तृतीय खंड को रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान विषयों के साथ बीएससी प्रशिक्षित परीक्षक मूल्यांकन करेंगे।




किसी भी प्रश्न का न हो गलत मूल्यांकन : भगवती सिंह
यूपी बोर्ड के सचिव ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर जारी किए निर्देश

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 में मूल्यांकन को लेकर सचिव भगवती सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा कि उप नियंत्रक और सभी मूल्यांकन केंद्र ध्यान रखें कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह जाए और किसी भी उत्तर का गलत मूल्यांकन न हो। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पूरी सजगता और जिम्मेदारी के साथ किए जाएं। इसके लिए उप प्रधान परीक्षक और परीक्षक समुचित व्यवस्था कर लें। 

बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रयागराज सहित प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। शिक्षक संगठनों के विरोध के बावजूद मूल्यांकन कार्य 18 मार्च से शुरू करने की तैयारी है। जो एक अप्रैल तक चलेगा। इसके लिए परीक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है।

सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अगर कोई परीक्षक अनुपस्थित रहता है तो उप नियंत्रक स्वयं किसी की नियुक्ति नहीं करेंगे। परिषद की प्रतीक्षा सूची से ही विषयवार और केंद्रवार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।


भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच भाषा विषयों में ही की जाए

हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा में से 20 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर दर्ज कराए गए हैं। जबकि शेष 50 अंकों की परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं पर हुई है। निर्देश दिया गया कि भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच केवल भाषा विषयों में ही की जाए। परिषद ने मूल्यांकन को निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाने के लिए कई जरूरी निर्देश दिए हैं।

निर्देश में यह भी कहा गया है कि अगर परीक्षार्थियों ने गणित, विज्ञान या अन्य किसी विषय में उत्तर बाएं पृष्ठ पर भी लिखे हैं तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। गणित और विज्ञान विषय की उत्तर पुस्तिकाओं में स्टेप मार्किंग लागू की जाएगी।


यूपी बोर्ड मूल्यांकन के संबंध में जारी निर्देश, मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो, बाएं पन्ने पर उत्तर हो तो उसे भी जांचें, गणित-विज्ञान में स्टेप मार्किंग, भाषा में ही जांचें शाब्दिक त्रुटि

प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त होने के बाद 18 मार्च से उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होगा। मूल्यांकन के लिए पूरे प्रदेश में 249 केंद्र बनाए गए हैं। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने मूल्यांकन के संबंध में सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, डीआईओएस व मूल्यांकन केंद्र प्रभारियों को शनिवार को निर्देश भेजे हैं। सचिव ने परीक्षकों को सलाह दी है कि गणित एवं विज्ञान विषय की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में स्टेप मार्किंग की जाए।

गणित, विज्ञान अथवा अन्य किसी भी विषय में यदि परीक्षार्थियों ने बाएं पृष्ठ पर भी उत्तर लिखे हों तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। भाषाई त्रुटि की जांच हिन्दी, अंग्रेजी जैसे भाषा के विषय में ही की जाए। अन्य विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में उदार दृष्टिकोण अपनाएं। हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा के तहत 20 अंकों की वस्तुनिष्ठ परीक्षा ओएमआर शीट पर हुई है। शेष 50 अंकों की परीक्षा लिखित उत्तरपुस्तिकाओं पर कराई गई है। जांची जा रही उत्तरपुस्तिका में निर्धारित पूर्णांक 50 से अधिक प्राप्तांक किसी भी दशा में न हो। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कोई भी प्रश्नोत्तर न तो अमूल्यांकित रहे और न ही किसी प्रश्नोत्तर का गलत मूल्यांकन हो।

मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो

सचिव ने केवल पारिश्रमिक बढ़ाने के उद्देश्य से अत्यधिक कॉपियां जांचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के निर्देश दिए है। लिखा है कि मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो। विद्यालयों के शिक्षकों के लिए प्रति दिन उत्तरपुस्तिकाओं की न्यूनतम संख्या (जैसे हाईस्कूल में 50 और इंटरमीडिएट में 45) अनिवार्य रूप से निर्धारित की जाए। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उप प्रधान परीक्षक प्रतिदिन दस से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्वयं नहीं करेंगे। प्रत्येक केन्द्र पर मूल्यांकन कार्य सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हों एवं वेब कास्टिंग के माध्यम से राज्य एवं जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम पर लाइव फीड सुनिश्चित कराई जाए। उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की गोपनीयता भंग होने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय अधिनियम/विनियम और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की जाएगी।



18 मार्च से शुरू होगा यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन, प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए

प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू होकर एक अप्रैल तक प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।

परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होगा। किसी भी स्तर पर मौखिक, लिखित, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्तर पुस्तिका अथवा मूल्यांकन से संबंधित किसी भी सूचना को साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। गोपनीयता भंग होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मूल्यांकन कार्य की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। वहीं, प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर जिलाधिकारी द्वारा स्टैटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की जाएगी। मूल्यांकन कार्य वॉयस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराया जाएगा। इसकी कनेक्टिविटी जनपद तथा राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से होगी।

मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों और कर्मचारियों को मोबाइल फोन या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मूल्यांकन कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

मूल्यांकन केंद्रों की सुरक्षा के लिए अवांछनीय तत्वों पर नजर रखने हेतु एलआईयू और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी। मूल्यांकन कार्य समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के बंडलों को परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक ट्रक के साथ दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।

परिषद के अनुसार, 17 मार्च को सभी मूल्यांकन केंद्रों पर उप नियंत्रक द्वारा मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 



हाईस्कूल की 700, इंटरमीडिएट की 600 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे यूपी बोर्ड परीक्षक

प्रयागराजः हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं। अब शेष बचे विषयों की पांच दिवसों में परीक्षाएं संपन्न कराए जाने की तैयारी के बीच यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की रूपरेखा तय कर दी है। गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन के लिए पूरे मूल्यांकन अवधि में हाईस्कूल के परीक्षकों को अधिकतम 700 तथा इंटरमीडिएट के परीक्षकों को 600 से अधिक उत्तरपुस्तिकाएं आवंटित नहीं की जाएंगी। कला विषय के परीक्षक पूरी अवधि में अधिकतम 800 उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकेंगे। इस तरह एक परीक्षक एक दिन में हाईस्कूल की 50 तथा इंटरमीडिएट की 45 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे।

18 फरवरी से आरंभ हुईं यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च को संपन्न होंगी। इसके बाद उत्तरपुस्तिकाओं को मूल्यांकन के लिए 249 केंद्रों पर भेजा जाएगा। परीक्षा संपन्न होने के एक सप्ताह में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू कराया जाएगा। इस तरह 19 मार्च से मूल्यांकन शुरू कराया जा सकता है। उत्तरपुस्तिकाओं के जांचने क कार्य 15 दिन चलेगा। इसके लिए पिछले वर्ष की तरह करीब 1.48 लाख परीक्षक नियुक्त किए जाएंगे



1.40 लाख से अधिक शिक्षक करेंगे बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन, यूपी बोर्ड ने तेज की तैयारी

ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत चुने जाएंगे परीक्षक

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की लगातार निगरानी की जाएगी

10वीं की एक कॉपी पर 14 और 12वीं की कॉपी पर 15 रुपये मानदेय

सचिव ने बताया कि मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को हाईस्कूल की एक कॉपी को जांचने के एवज में 14 रुपये और इंटर की कॉपी जांचने पर 15 रुपये मानदेय दिया जाएगा। एक परीक्षक 10वीं की रोजाना 50 और 12वीं की 45 कॉपियां जांच सकेगा।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर बोर्ड ने तैयारी तेज कर दी है। प्रदेश भर के 1.40 लाख से ज्यादा शिक्षक कॉपियों का मूल्यांकन करेंगे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा 12 मार्च को समाप्त होगी।

बताया गया कि संकलन केंद्रों से मूल्यांकन केंद्रों तक उत्तर पुस्तिकाएं ट्रकों से भेजी जाएंगी। ट्रक के साथ ड्यूटी पर लगाए गए कर्मचारियों के लिए अलग से वाहन की व्यवस्था रहेगी। ट्रक में किसी भी कर्मचारी के बैठने की अनुमति नहीं होगी।

उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये परीक्षकों की नियुक्ति होगी। आवश्यकता पड़ने पर मूल्यांकन - केंद्रों के उप नियंत्रक परिषद के पोर्टल पर उपलब्ध प्रतीक्षा सूची से भी परीक्षकों की ऑनलाइन नियुक्ति की जा सकेगी। परीक्षा केंद्रों के स्ट्रॉन्ग रूम की तरह ही कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की भी लगातार निगरानी की जाएगी।

कॉपियों के हर पृष्ठ पर दर्ज हैं गोपनीय न्यूमेरिक नंबरः परिषद ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी किया है। पहली बार सभी विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रत्येक पृष्ठ पर केंद्रवार गोपनीय न्यूमेरिक नंबर दर्ज किए गए हैं। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि मूल्यांकन अवधि में कला वर्ग का एक परीक्षक अधिकतम 800 कॉपियां जांच सकेगा। वहीं, विज्ञान वर्ग के इंटरमीडिएट में 600 और हाईस्कूल में 700 कॉपियां जांचने की सीमा तय की गई है। परीक्षकों के मानदेय में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि वर्ष 2019 और 2023 में पहले ही मानदेय बढ़ाया जा चुका है।



यूपी बोर्ड : 18 मार्च से कॉपियों के मूल्यांकन शुरू होने के आसार, शासन को भेजा प्रस्ताव

मंजूरी मिलने के बाद तिथि घोषित होगी, 249 केंद्रों पर मूल्यांकन शुरु होने की संभावना, 12 मार्च को समाप्त होंगी परीक्षाएं

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद 18 मार्च से प्रदेश के 249 केंद्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होने की संभावना है। इस संबंध में बोर्ड के सचिव ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया की तिथि घोषित की जाएंगी।


प्रदेश के 8033 केंद्रों पर हो रही अधिकांश मुख्य विषयों की परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं। होली के बाद नौ मार्च से परीक्षाएं फिर से शुरू होंगी। उस दिन प्रथम पाली में हाईस्कूल उर्दू तथा द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट के मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र और तर्कशास्त्र विषय की परीक्षाएं होंगी।

बोर्ड का लक्ष्य है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा कर 15 अप्रैल तक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाए। इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में 52 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, हालांकि इनमें से बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है।

पिछले वर्ष के आंकड़ों के अनुसार हाईस्कूल में 27,32,165 और इंटरमीडिएट में 27,05,009 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। वर्ष 2025 में बोर्ड परीक्षा 24 फरवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक मूल्यांकन प्रक्रिया चली थी। इसके बाद 25 अप्रैल को परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था। उस वर्ष हाईस्कूल में 90.11 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 81.15 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए थे।