टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक की पाती अभियान एक सप्ताह बढ़ाया गया
लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता के विरोध में चलाए जा रहे अभियान में काफी शिक्षक जुड़ रहे हैं। इसे देखते हुए महासंघ ने पाती लिखने के अभियान को एक सप्ताह बढ़ाने का निर्णय लिया है।
महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि आरटीई एक्ट 2009 तथा एनसीटीई की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के लिए चलाए जा रहे शिक्षक की पाती अभियान में शिक्षकों की व्यापक सहभागिता हुई है। एक सप्ताह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, नेता प्रतिपक्ष व मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड और ई-मेल से अपनी मांगों को भेजा है।
अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने शिक्षकों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा दे। ताकि टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान शिक्षक समाज के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा हुआ विषय है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी हरिशंकर राठौर ने बताया कि शिक्षक की पाती अभियान 9 से 15 मार्च तक घोषित था। शिक्षकों के उत्साह को देखते हुए अभियान को 16 मार्च से अगले एक सप्ताह तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। शिक्षकों की सेवा सम्मान को देखते हुए महासंघ में अब तक 23 संगठन जुड़कर संघर्ष कर रहे हैं।
तीन लाख शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में लिखी पाती
लखनऊ। देश भर में 8वीं कक्षा तक में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से पाती लिखने का अभियान जारी है। इसके तहत तीन दिन में सवा तीन लाख से ज्यादा शिक्षकों ने टीईटी से राहत देने के लिए राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखा है।
महासंघ ने कहा है कि आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं उनके साथ यह अन्यायपूर्ण निर्णय है। इससे उनको राहत दी जानी चाहिए। पूर्व में शिक्षा मंत्री ने इसके लिए सकारात्मक पहल की बात कही थी लेकिन आज तक केंद्र सरकार द्वारा इस पर कुछ नहीं किया गया। इससे देश भर के शिक्षकों में नाराजगी है। यदि जल्द इस पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो शिक्षक अपने आंदोलन को तेज करेंगे।
टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों ने लिखी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्य न्यायाधीश को पाती
प्राथमिक शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के खिलाफ अभियान शुरू किया। शिक्षकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और अन्य को ई-मेल और पोस्टकार्ड भेजकर टीईटी को समाप्त करने की मांग की है।
लखनऊ। प्राथमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्य के खिलाफ सोमवार को प्रदेश भर के शिक्षकों ने शिक्षक पाती लिखने का अभियान शुरू किया। इसके तहत शिक्षकों द्वारा राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखकर जबरन थोपे जा रहे टीईटी को समाप्त करने की गुहार लगाई जा रही है।अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को प्रदेश के करीब 1,07000 शिक्षकों ने पत्र भेजकर टेट से राहत देने की अपील की। महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने बताया कि यह कार्यक्रम 15 मार्च तक अनवरत चलेगा।
आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं, उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करना पूर्णतया गलत व अन्यायपूर्ण है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पूर्व में शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मिला था और उन्होंने इस बारे में सकारात्मक आश्वासन भी दिया था लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल केंद्र द्वारा नहीं किया गया है। इससे प्रदेश के एक लाख 86हजार शिक्षक उदास एवं हताश है। उन्होंने बताया कि एनसीटीई के गलत फैसले पूरे देश से 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इसमें सबसे अधिक यूपी के 1.86 लाख शिक्षक भी शामिल हैं।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का अभियान आज से, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से लिखी जाएगी पाती
लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार से एक सप्ताह तक प्रदेश व देश के शिक्षक पाती लिखने का अभियान चलाएंगे। राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखकर जबरन थोपे जा रहे टीईटी को समाप्त करने की गुहार लगाएंगे।
महासंघ ने कहा कि आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करना पूर्णतया गलत व अन्यायपूर्ण है। बता दें कि टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आंदोलन के लिए एक दर्जन शिक्षक संगठनों ने महासंघ का गठन किया है।
जोर पकड़ रहा TET अनिवार्यता का विरोध, उत्तर प्रदेश में अब चरणबद्ध आंदोलन करेंगे अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ से जुड़े 20 संगठन
तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा।
नौ मार्च से ‘शिक्षक की पाती’ अभियान से होगी शुरुआत
लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने सभी संबद्ध संगठनों को साथ लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार की है। महासंघ में कुल 20 संगठन जुड़े हुए हैं।
आंदोलन के पहले चरण में नौ मार्च से 15 मार्च तक ‘शिक्षक की पाती’ अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से शिक्षक अपनी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। दूसरे चरण में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
तीसरे चरण में तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद चौथे चरण में संसद का घेराव करने की योजना है।
महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से अधिक हो चुकी है, उनके लिए सेवा में बने रहने या पदोन्नति हेतु टीईटी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किया गया है।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 23 शिक्षक संगठनों की 3 मई को लखनऊ कूच की तैयारी
लखनऊ । शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़क से सदन तक देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है। इसके लिए लखनऊ में संयुक्त मोर्चा के सभी शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ बनाया है जिसमें उत्तर प्रदेश के कई शिक्षक संगठन सम्मिलित है।
ऑल इंडिया प्राइमरी टीचर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय के आह्वान पर हुई सभी शिक्षक संगठनों की बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, जूनियर शिक्षक संघ, विशिष्ट BTC शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश BTC शिक्षक संघ, TSCT सहित 23 शिक्षक संगठन सम्मिलित है और सभी संगठनों ने सर्वसहमति से TET अनिवार्यता के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष का ऐलान किया है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने एकजुट संघर्ष को शिक्षकों की सेवा शर्तों व सम्मान की लड़ाई बताया साथ ही उन्होंने कहा कि कोई नियम आदेश आने के बाद लागू होता है न कि पूर्व से। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अव्यावहारिक एकतरफा बताया वही अटेवा प्रमुख विजय कुमार बंधु ने टीईटी अनिवार्यता को सरकार की तानाशाही बताकर गरीबों की शिक्षा पर कुठाराघात करार देते हुए निजीकरण को बढ़ावा करार दिया।
प्राथमिक शिक्षक संघ मीडिया प्रभारी हरि शंकर राठौर ने जानकारी दी कि टीईटी आंदोलन कों चार चरणों में करने का निर्णय लिया गया जिसमें 3 मई को प्रदेश के लाखों शिक्षक लखनऊ के ईको गॉर्डन में ऐतिहासिक विशाल धरना प्रदर्शन करेंगे और उसके बाद शाम को शिक्षक विधानसभा की ओर कूच करेंगे। इससे पहले दिनांक 9 मार्च से 15 मार्च तक शिक्षकों की पाती अभियान चलेगा व 13 अप्रैल कों सभी जिला मुख्यालयों पर सायं 4 बजे से विरोध प्रदर्शन कर मशाल जुलुस निकालते हुए जिलाधिकारी के माध्यम प्रधानमंत्री भारत सरकार कों ज्ञापन भेजा जायेगा।
टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में तीन मई को लखनऊ में रैली करेंगे शिक्षक, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ तेज करेगा आंदोलन
लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से राहत दिलाने के लिए शिक्षकों का आंदोलन तेज हो रहा है। इसके तहत गठित अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने तीन मई को राजधानी लखनऊ में रैली व विधानसभा तक मार्च करने की घोषणा की है।
महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा । कि इसके तहत पहले चरण में नौ से 15 मार्च के बीच शिक्षक की पाती लिखने का कार्यक्रम होगा। इसमें प्रदेश के सभी शिक्षक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष को ई मेल, पोस्टकार्ड से टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में पत्र लिखेंगे। इसके बाद 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकालेंगे।
तब भी मांगे नहीं मानी गई तो तीन मई को राजधानी के ईको गार्डन में एकत्र होकर रैली करेंगे। साथ ही विधानसभा तक मार्च भी करेंगे। महासंघ के संयोजक अनिल यादव ने कहा कि यदि फिर भी इसका समाधान नहीं हुआ तो मानसून सत्र में दिल्ली में संसद भवन का शिक्षक घेराव करेंगे। जल्द ही इसके लिए एक बैठक फिर से राजधानी में सभी संगठनों की होगी।
धर्मेंद्र प्रधान के बयान से नाराजगी
शिक्षक-कर्मचारी नेताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान शिक्षकों से कहा कि पहले आप मेरी सरकार बनाओ, फिर हम टीईटी की अनिवार्यता पर विचार करेंगे। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय एवं विजय कुमार बंधु ने कहा कि केंद्रीय मंत्री द्वारा दिया गया यह बयान सौदेबाजी है।
महासंघ के समर्थन में आए कई संघ
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के समर्थन में कई और शिक्षक संगठन आए हैं। महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने बताया कि टीईटी की इस लड़ाई में उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह, वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश सिंह, एससीएसटी टीचर्स संघ के प्रदेश महामंत्री वेद प्रकाश सरोज ने पत्र लिखकर समर्थन दिया है।
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