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Thursday, March 26, 2026

एनसीईआरटी की नई किताबों का फिर इंतजार, 9वीं के छात्र बदले सिलेबस का कर रहे इंतजार लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई

एनसीईआरटी की नई किताबों का फिर इंतजार, 9वीं के छात्र बदले सिलेबस का कर रहे इंतजार लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई


 लखनऊ : नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर एनसीईआरटी की किताबों की कमी ने सीबीएसई स्कूलों की पढ़ाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कक्षा 9वीं के छात्र नई शिक्षा नीति के तहत बदले सिलेबस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई हैं। पिछले वर्ष कक्षा आठ के छात्रों को सितंबर तक किताबों के लिए इंतजार करना पड़ा था और अब वही स्थिति दोहराने की आशंका गहराने लगी है। इससे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच असमंजस का माहौल बन गया है।


प्रदेश में 11 हजार से अधिक सीबीएसई स्कूल और 122 केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं, जहां एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई होती है। ऐसे में इस देरी का असर बड़ी संख्या में छात्रों पर पड़ना तय माना जा रहा है। इस बीच एनसीईआरटी ने एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि नई शिक्षा नीति के तहत किताबें और सिलेबस चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। कक्षा एक से आठवीं तक की किताबें तैयार कर ली गई हैं और प्रिंट व डिजिटल दोनों रूपों में उपलब्ध हैं, जबकि कक्षा नौवीं की किताबें तैयार की जा रही हैं और इन्हें सत्र 2026-27 में लागू किया जाएगा। इसके लिए ड्राफ्ट सिलेबस जारी कर सुझाव भी मांगे गए हैं। 


एनसीईआरटी ने शिक्षकों को सलाह दी है कि नए सिलेबस से पहले छात्रों की बुनियादी समझ मजबूत की जाए, ताकि उन्हें बदलाव को समझने में आसानी हो। वहीं कक्षा 10 और 11 में फिलहाल पुराने सिलेबस से ही पढ़ाई जारी रहेगी और नई किताबें 2027-28 से लागू होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ साल शिक्षा व्यवस्था के लिए संक्रमण काल साबित होंगे, जहां पुरानी और नई व्यवस्था साथ-साथ चलेगी। इस दौरान किताबों की देरी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने और भ्रम की स्थिति बनने की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में स्कूलों और शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे बच्चों की पढ़ाई को बिना रुकावट आगे बढ़ाएं।

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