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Monday, March 9, 2026

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात, जल्द मानदेय बढ़ाने की घोषणा भी की

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात,  जल्द मानदेय बढ़ाने की घोषणा भी की

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात दी। डीबीटी के जरिये कुल 38.49 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी गई। सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का वादा भी किया।


सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी-यूनिफॉर्म के लिए डीबीटी के माध्यम से 29.59 करोड़ रुपये की धनराशि स्थानांतरित की। उन्होंने मंच पर नेहा दुबे, मानसी साहू, पूनम तिवारी, मनोरमा मिश्रा को साड़ी भेंट की तो सेवा मित्र आकांक्षा (ब्यूटीशियन) और रत्ना भारती को यूनिफॉर्म सौंपी। इसके अलावा बीमा प्रीमियम की 8.90 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्थानांतरित की। 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ा। इसके तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं की मृत्यु होने पर परिजनों को 2 लाख रुपये मिला है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 436 रुपये है।

वहीं 18 से 59 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता होने पर 2 लाख रुपये तथा आंशिक स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 20 रुपये है। इसके अलावा सीएम ने पांच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं गुड़िया सिंह, प्रियंका सिंह, सुधा अवस्थी, उमा सिंह और लालावती को मंच पर बुलाकर आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। 

Saturday, February 28, 2026

सूबे में बनेंगे 76 हजार आंगबाड़ी केंद्र के नए भवन, सुविधाओं से होंगे लैस

सूबे में बनेंगे 76 हजार आंगबाड़ी केंद्र के नए भवन, सुविधाओं से होंगे लैस

सीएम ने दिए निर्देश- 1.89 लाख केंद्रों का हो रहा संचालन, 76 हजार केंद्रों के पास अपना भवन नहीं


लखनऊ। प्रदेश के हर एक आंगनबाड़ी केंद्र का स्वयं का भवन होगा। इसके लिए 76 हजार नये भवनों का निर्माण कराया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं। जल्द से जल्द कार्य योजाना तैयार करने को कहा है। खुद के भवनों में आंगनबाडी केंद्रों का संचालन होने से तमाम सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी।


प्रदेश में 1.89 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें से लगभग 76 हजार केंद्र अभी अपने भवनों के बिना चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन से छह वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र प्री-प्राइमरी शिक्षा का आधार हैं, इसलिए सुरक्षित, आकर्षक और बाल-मित्र वातावरण सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है।

भवन निर्माण के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) से सहयोग लेने के निर्देश दिए गए हैं। अगर और जरूरत पड़ेगी तो राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रस्तावित भवनों में पेयजल, विद्युत व्यवस्था, बाल-मित्र शौचालय, किचन शेड, खेल क्षेत्र, लो-हाइट वॉश यूनिट, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण कक्ष, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और पोषण वाटिका जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।


ये दिए सुझाव : मुख्यमंत्री ने कहा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल अपनाया जाए। एक मानक डिजाइन तैयार की जाए। जहां संभव हो, प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में ही आंगनबाड़ी भवन बनाया जाए। जिससे ताकि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

Monday, March 17, 2025

यूपी में 9,448 आंगनबाड़ी केंद्रों का जल्द पूरा होगा निर्माण

यूपी में 9,448 आंगनबाड़ी केंद्रों का जल्द पूरा होगा निर्माण


लखनऊ : प्रदेश में 9,448 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जा रहे हैं जिनका निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा। बच्चों को बेहतर पोषाहार उपलब्ध कराने के साथ गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए हर ग्राम पंचायत में एक आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। बीते आठ वर्षों में राज्य सरकार 19 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कर चुकी है।


वर्ष 2024-25 में 3,020 ग्राम पंचायतों में इनका निर्माण कराया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के खेलने की सुविधाएं, शौचालय व शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्र को एक समग्र विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।


Sunday, November 10, 2024

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्थायी कर्मियों के समान माना जाए : हाईकोर्ट

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्थायी कर्मियों के समान माना जाए : हाईकोर्ट

गुजरात हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को दिया निर्देश कहा-दोनों में बड़ा भेदभाव

फैसले से देश भर में लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को होगा लाभ


अहमदाबाद : गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के साथ नियमित रूप से चयनित स्थायी सिविल कर्मचारियों के समान व्यवहार करें। हाई कोर्ट के इस फैसले से देश भर में लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को लाभ होगा।


जस्टिस निखिल एस केरियल ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के मामले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के बीच भेदभाव अधिक है। इसे देखते हुए राज्य और केंद्र सरकार को सरकारी सेवा में उक्त दोनों पदों को समाहित करने के लिए संयुक्त रूप से नीति बनानी चाहिए। 


अदालत ने कहा कि इसके साथ ही उन्हें नियमितीकरण का लाभ भी प्रदान किया जाए। अदालत ने 1983 और 2010 के बीच केंद्र की एकीकृत बाल विकास सेवा (आइसीडीएस) योजना के तहत नियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व आंगनबाड़ी सहायिकाओं द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया। 


आइडीसीएस योजना में छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए आंगनबाड़ी केंद्र बनाने की परिकल्पना की गई थी, जिन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सहायिकाओं संचालित किया जाता है। द्वारा याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि 10 साल से अधिक समय तक और दिन में छह घंटे से अधिक काम करने के बावजूद उन्हें मामूली राशि दी जा रही। उन्होंने अपने वाजिब अधिकार के लिए अदालत से निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था। 


याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें एक नियमित प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती किया गया था, लेकिन उन्हें एक योजना माना के तहत काम करने वाला गया, न कि सरकारी कर्मचारी। अदालत ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सहायिकाओं को क्रमशः 10 हजार रुपये और पांच हजार रुपये के मासिक मानदेय से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार सिविल पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों की तुलना में भेदभाव कर रही है। अदालत ने राज्य और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि स्थायी सिविल कर्मचारियों के समान व्यवहार के हकदार होंगे।

Wednesday, October 16, 2024

एजुकेटर भर्ती रद्द करने और शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन

एजुकेटर भर्ती रद्द करने और शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन


लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मंगलवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए शासकीय कर्मचारी का दर्जा और एजुकेटर भर्ती को रद्द करने की मांग की। प्रदेश भर से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता ईको गार्डेन में जुटीं, जहां आंगनबाड़ी अधिकार संयुक्त मोर्चा के बैनर तले यह विरोध प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांग थी कि उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, और तब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 18,000 रुपये व सहायिकाओं को 9,000 रुपये प्रति माह मानदेय सुनिश्चित किया जाए।


प्रदर्शन की अध्यक्षता मोर्चा की संयोजक सरिता सिंह और सह संयोजक प्रभावती देवी ने की। उन्होंने आक्रामक स्वर में एजुकेटर भर्ती को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर एजुकेटर की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहले से ही बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं। 

सरिता सिंह ने कहा, "सरकार की नीतियों में यह विरोधाभास स्पष्ट है कि जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियों को निभा रही हैं, तो अलग से एजुकेटर की भर्ती क्यों की जा रही है?" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह भर्ती रद्द नहीं की गई, तो कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन और अधिक उग्र हो सकता है। 


सरकार पर दबाव बढ़ा
वहीं, प्रदर्शनकारियों का कहना था कि एजुकेटर की नियुक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को कमजोर करने की साजिश है। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी हालत में इस भर्ती को स्वीकार नहीं करेंगी, और अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आगे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने के लिए तैयार हैं। 

प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने "एजुकेटर भर्ती बंद करो", "हम भी शिक्षक हैं, हमें हमारा हक दो" जैसे नारे लगाए, और जोर दिया कि शासकीय कर्मचारी का दर्जा उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने का सबसे उचित समाधान है।

Monday, September 16, 2024

आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील रसोईया को सम्मानजनक मानदेय के लिए संगठनों ने बनाई रणनीति, मांग को लेकर 26 नवंबर को रैली

आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील रसोईया को सम्मानजनक मानदेय के लिए संगठनों ने बनाई रणनीति, मांग को लेकर 26 नवंबर को रैली 


लखनऊ। आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील सहित सभी स्कीम वर्कर्स को सम्मानजनक मानदेय देने, 5000 पेंशन व ग्रेच्युटी, रसोइयों को न्यूनतम वेतन देने और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ग्रेच्युटी देने के हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने करने की मांग की गई है।


मांग को लेकर 26 नवंबर को रैली निकाली जाएगी। श्रम विभाग के हॉल में आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील कर्मियों की यूनियनों की रविवार को हुई संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया। 


एटक की उषा शर्मा ने कहा कि सरकार का तर्क है कि आंगनबाड़ी, आशा, रसोइया, शिक्षामित्र और रोजगार सेवक जैसी स्कीम वर्करों को सम्मानजनक मानदेय देने के लिए संसाधन नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कॉरपोरेट घरानों की संपत्ति पर समुचित टैक्स लगाए तो सम्मानजनक मानदेय व पेंशन दी जा सकती है। संवाद