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Wednesday, September 2, 2026

हाईकोर्ट ने हरदोई के बीएसए का निलंबन आदेश रद्द किया

हाईकोर्ट ने हरदोई के बीएसए का निलंबन आदेश रद्द किया

02 सितंबर 2026
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डा अजीत सिंह के निलबन आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने साथ ही अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा को छूट भी दी कि बीएसए का चार सप्ताह में कहीं और जगह तबादला कर सकते हैं। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने मंगलवार को यह फैसला डा अजीत सिंह की याचिका पर दिया। 

याची ने 2 जुलाई 2026 के निलंबन आदेश समेत इसके परिणामी आदेशों को चुनौती दी थी। इनके तहत याची को निलंबित करके उन्हें बेसिक शिक्षा निदेशक, यूपी, लखनऊ के दफ्तर से अटैच कर दिया गया था। याची का कहना था कि निलंबन संबंधी पूरी कार्यवाही का ताना बाना, हरदोई के जिलाधिकारी द्वारा दुर्भावना से बुना गया। जो कानून की मंशा के खिलाफ था। 

कोर्ट ने फैसले में कहा कि मामले के तथ्यों और चर्चा के मद्देनजर अदालत का मत है कि याची के खिलाफ शुरू की गई सभी कार्यवाहियां बदले की भावना से की गईं थीं। ऐसे में समिति की 20 जून 2026 की रिपोर्ट समेत परिणामी कार्यवाही रद्द किए जाने योग्य है। तदनुसार, इसे निरस्त किया जाता है। 


हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह निलंबित, भर्ती में हेरफेर के गंभीर आरोप, जांच जारी

02 जुलाई 2026
हरदोई। शिकायतों और अनियमितताओं के जाल में फंसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह को आखिरकार शासन ने निलंबित कर दिया। बीएसए पर लगे आरोपों की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई। डॉ. अजित को बेसिक शिक्षा निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया था। उनके खिलाफ विभागीय जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक (षष्ठ मंडल) करेंगे।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कुछ गंभीर शिकायतें जिलाधिकारी अनुनय झा को मिली थीं। इस पर उन्होंने जांच के लिए नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। एसडीएम सदर, संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रमेंद्र सिंह इसमें सदस्य थे। जांच टीम ने 61 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पत्रावली गायब होने, ईसीसीई एजुकेटर भर्ती परीक्षा में शासनादेश का पालन न करने, सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन और अन्य देयताओं से संबंधित पत्रावलियों को लंबित रखने की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट डीएम को 20 जून को सौंपी थी।

इसी रिपोर्ट पर डीएम अनुनय झा ने बीएसए डॉ. अजित सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय जांच कराए जाने की संस्तुति की थी। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को बीएसए को निलंबित कर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि निलंबन अवधि में बीएसए निदेशायल से संबद्ध रहेंगे। मामले की विस्तृत जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक करेंगे।
 



हरदोई बीएसए के निलंबन की संस्तुति के साथ उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश, डीएम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत

पदेन दायित्वों में गंभीर लापरवाही बरतने और कार्यशैली पर सवाल

23 जून 2026
हरदोई: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डाक्टर अजित सिंह के खिलाफ रिश्वत मांगने और लेनदेन से जुड़े आरोपों की एफआईआर की पुलिस जांच जारी रहने के बीच जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर डीएम ने बीएसए के निलंबन और शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की संस्तुति की है।

जांच समिति, जिसमें नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्रवक्ता डाक्टर रामेंद्र सिंह शामिल थे, ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीएसए पर न केवल नियुक्ति पत्र वितरण में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, बल्कि पेंशन पत्रावलियों से जुड़े मामलों में भी 20 हजार रुपये मांगने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि डाक्टर अजित सिंह द्वारा अपने पदेन दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया गया। उनकी कार्यशैली और आचरण को पद एवं गरिमा के प्रतिकूल पाया गया है। समिति ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायालय, शासन और निदेशालय के निर्देशों के मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह इस संवेदनशील पद पर रहने योग्य नहीं हैं। 

समिति ने अपने निष्कर्ष में यह भी कहा है कि जांच के दौरान सामने आए सीमित मामलों के आधार पर यह आशंका मजबूत होती है कि मृतक आश्रितों की नियुक्ति, सेवा संबंधी निलंबन-बहाली, वित्तीय स्वीकृतियों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में भी व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हो सकती हैं। ऐसे सभी प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है। 

जांच रिपोर्ट में उच्च स्तर पर यह भी संस्तुति की गई है कि बीएसए डाक्टर अजित सिंह के पूरे कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र और व्यापक जांच कराई जाए, ताकि सभी लंबित और विवादित मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। डीएम की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इन सभी तथ्यों को गंभीर प्रशासनिक चूक और संभावित अनियमितताओं के रूप में दर्ज किया गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई अब शासन स्तर पर तय की जाएगी।

रची गई साजिश, आरोप फर्जीः बीएसए डाक्टर अजित सिंह पर लगे आरोपों के बारे में उनका पक्ष लेने का प्रयास किया, जिसमें सोमवार की शाम बीएसए का प्राइवेट नंबर बंद आता रहा। सीयूजी नंबर पर फोन किया तो वह उठा नहीं। पूर्व में बीएसए डाक्टर अजित सिंह से हुई वार्ता में उन्होंने रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों को पूरी तरह से फर्जी बताया था। बीएसए डाक्टर अजित सिंह के अनुसार उन्हें प्रशासन की तरफ से पूरी साजिश कर फंसाया जा रहा है, जिसके लिए फर्जी रिपोर्ट बनाई गई है। इसमें कई लोग शामिल हैं, जोकि उन्हें किसी भी तरह से हटवाना चाहते हैं।

प्रशासन ने आरोपों को नकारा
बीएसए डाक्टर अजित सिंह द्वारा प्रशासन पर साजिश रचे जाने के आरोप में प्रशासन का कहना है कि बीएसए ने खुद अनियमितता की। फाइलों को गायब कराया। पेंशन पत्रावलियों में हस्ताक्षर नहीं किए। बिना किसी कारण के पत्रावलियों को लंबित रखा। बीएसए के लिपिकों ने ही बयान दिए हैं। अब बीएसए फंस रहे तो साजिश बता रहे हैं।



हरदोई BSA पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप पर FIR दर्ज, जानिए पूरा मामला  

20 जून 2026
हरदोई ।  बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजीत सिंह पर शुक्रवार रात 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि अजीत सिंह ने एजुकेटर भर्ती से जुड़ी एक संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर 5 लाख रुपए की मांग की थी। संस्था अध्यक्ष ने 2 लाख रुपए ले भी लिए थे। 

हालांकि बीएसए ने आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा- डीएम अनुनय झा ने जाल बिछाकर मुझे फंसाया है। वह मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, लेकिन साबित नहीं कर पाए। 


एक दिन पहले 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल दस्तावेज गायब मिले थे। डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

जानिए पूरा मामला 
गोंडा के तरबगंज स्थित उज्ज्वला सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी की शिकायत पर बीएसए डॉ. अजित सिंह के खिलाफ हरदोई में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ओम प्रकाश तिवारी ने बताया- यूपी के कई जिलों में ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर के 210 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के लिए हमारी संस्था को अधिकृत किया गया था।

उनका दावा है कि उसने सेवायोजन पोर्टल से मिले 4,590 आवेदनों में से जिला चयन समिति द्वारा किए गए रैंडमाइजेशन के माध्यम से 630 अभ्यर्थियों का चयन संबंधी डेटा प्राप्त कर लिया था। इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया। अनुबंध के लगभग 6 महीने बाद जब उन्होंने कार्य को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क किया तो बीएसए ने उन्हें कार्यालय बुलाया और 5 लाख रुपए रिश्वत मांगी।

आरोप है कि रुपए न देने पर संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और जमानत राशि जब्त कराने की धमकी दी। संस्था अध्यक्ष का यह भी आरोप है कि दबाव में आकर उन्होंने 2 लाख रुपए दे दिए, लेकिन इसके बाद भी बाकी रुपए मांगे जाते रहे। लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा।


बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने बताया- यह जिलाधिकारी का ट्रैप है, जिसमें मुझे फंसाया गया है। वह लगातार मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे। मैंने उनसे कहा था कि यदि कोई भ्रष्टाचार हुआ है तो उसे साबित करें। इसके बाद मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। मुझे अपशब्द कहे गए और यहां तक कहा गया कि मैं जिले में न रहूं और यहां से चला जाऊं।

एडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने भी मुझे प्रताड़ित किया। मेरे कार्यालय के दो बाबुओं को अपने यहां अटैच कर लिया गया और अपने यहां के दो बाबुओं को मेरे कार्यालय में भेज दिया गया, ताकि मेरी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।

एजुकेटर भर्ती परीक्षा से संबंधित जो भी कार्रवाई हुई, वह जिलाधिकारी के निर्देशों पर की गई। पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में संपन्न हुई। इसके बावजूद अब मुझे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। बैठकों में मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया गया और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। जिलाधिकारी ने फर्म संचालक को बुलाकर मेरे खिलाफ षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

यदि मैंने किसी प्रकार का भ्रष्टाचार किया है तो एजुकेटर पदों पर भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों से पूछताछ कर ली जाए। यह पता कर लिया जाए कि क्या मैंने किसी से कोई धनराशि मांगी है या किसी प्रकार की अवैध मांग की है। यह मेरे खिलाफ रची गई एक सुनियोजित साजिश है। मैं इसका कानूनी तरीके से सामना करूंगा। इस साजिश में एडीएम की भी भूमिका है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूं।


डीएम के निर्देश पर टीम ने आकर की जांच बेसिक शिक्षा विभाग में 29 हजार शिक्षक भर्ती से संबंधित 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां गायब मिली थीं। विवाद बढ़ने के बाद डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

जांच के दौरान कुछ जरूरी पत्रावलियां रिकॉर्ड से गायब मिलीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

जांच में नहीं मिले 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख जांच में यह भी सामने आया कि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया का दायित्व भी उनके पास था।

Wednesday, February 18, 2026

वर्ष 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षाओं में अनुचित साधन प्रयोग करते हुए पकड़े गये परीक्षार्थियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं कराये जाने के सम्बन्ध में

वर्ष 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षाओं में अनुचित साधन प्रयोग करते हुए पकड़े गये परीक्षार्थियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं कराये जाने के सम्बन्ध में।

Tuesday, December 23, 2025

शाहजहांपुर के BEO व ARP पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार, स्कूल से गैरहाजिर रहने पर मामले को निपटाने के लिए मांगे थे रुपये

शाहजहांपुर के BEO व ARP पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार, स्कूल से गैरहाजिर रहने पर मामले को निपटाने के लिए मांगे थे रुपये


शाहजहांपुर। बरेली की एंटी करप्शन टीम ने कलान के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सतीश कुमार मिश्रा व एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) सुशील सिंह को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा है। दोनों ने स्कूल से गैरहाजिर रहने के मामले को निपटाने के लिए एक शिक्षक से रिश्वत मांगी थी।


मथुरा के थाना राया के मोहल्ला पठानपाड़ा निवासी डब्ल्यू कुमार कलान विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं। गत दिनों बीईओ के निरीक्षण में स्कूल से गैरहाजिर मिलने पर उन्हें नोटिस जारी किया गया था। आरोप है कि मामले को निस्तारित करने के लिए पांच हजार रुपये की मांग की गई। 

डब्ल्यू कुमार ने मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन बरेली से की। सोमवार को टीम के प्रभारी जितेंद्र सिंह कलान पहुंचे। दोपहर 2:13 बजे डब्ल्यू कुमार ने जैसे ही धनराशि दी, एंटी करप्शन टीम ने बीईओ व एआरपी को दबोच लिया। उन्हें कार में बैठाकर कटरा थाने ले जाया गया। आरोपियों के खिलाफ मीरानपुर कटरा थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। 




Friday, November 28, 2025

MDM में 11 करोड़ के घोटाले में 45 पर केस दर्ज, स्कूल व मदरसों संग मिलकर DC ने डकारा बजट, स्कूल व मदरसा के आठ प्रधानाध्यापक व चार ग्राम प्रधानों पर भी कार्रवाई

बलरामपुर : 11 करोड़ के एमडीएम घोटाले में डीसी समेत पांच गिरफ्तार

डीसी बर्खास्त, पकड़े गए लोगों में प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक और दो प्रधान शामिल

बलरामपुर। 11 करोड़ के एमडीएम घोटाले में पुलिस ने जिला समन्वयक (डीसी) फिरोज अहमद खान समेत पांच लोगों को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया। घोटाले की पुष्टि होने पर डीसी को सेवा से भी बर्खास्त कर दिया गया है। इस मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला की तहरीर पर 44 के खिलाफ बुधवार को नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई थी।

घोटाले के मास्टर माइंड जिला समन्वयक फिरोज अहमद के साथ प्रधानाध्यापक अशोक कुमार गुप्ता, सहायक अध्यापक मलिक मुन्नवर के अलावा दो ग्राम प्रधान नसीम अहमद और अहमदुल कादरी को भी गिरफ्तार किया गया है। 

प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक को निलंबित कर दिया गया है। एसपी विकास कुमार ने बताया कि मामले में कई लोगों की भूमिका संदिग्ध है। धन निकासी, बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों की गहन पड़ताल जारी है। आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। 

राशि का विद्यालयवार आवंटन नहीं

पुलिस की पूछताछ में फिरोज ने बताया कि आईवीआरएस पोर्टल से प्राप्त छात्र संख्या के आधार पर बनाई गई एक्सेल शीट में हेराफेरी की जाती थी। जिलाधिकारी द्वारा अनुमोदित कुल राशि को बिना बदले, विद्यालयवार आवंटन में भी गोलमाल किया जाता था।



MDM में 11 करोड़ के घोटाले में 45 पर केस दर्ज, स्कूल व मदरसों संग मिलकर DC ने डकारा बजट, स्कूल व मदरसा के आठ प्रधानाध्यापक व चार ग्राम प्रधानों पर भी कार्रवाई

45 लोग नामजद, जिसमें डीसी भी, बलरामपुर में छह वर्ष से हो रही थी धांधली


बलरामपुर : मध्यान्ह भोजन योजना में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के एमडीएम सेल से पांच-छह वर्षों के भीतर कनवर्जन कास्ट में कूटरचित दस्तावेजों के सहारे 11 करोड़ रुपये से अधिक का गबन कर लिया गया। इसमें 17 वर्षों से एमडीएम सेल के जिला समन्वयक पद पर जमे फिरोज अहमद खान, तीन मदरसों और पांच परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व चार ग्राम प्रधानों की संलिप्तता उजागर हुई है। 


गबन की पुष्टि होने पर बीएसए शुभम शुक्ला की तहरीर पर 45 नामजद व अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। नौनिहालों के निवाले पर डाका डालने के खेल में अभी कई और चेहरे सामने आ सकते हैं। इसमें कई सफेदपोश भी हैं। नामजद डीसी समेत कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।

बीएसए ने नगर कोतवाली में दी गई तहरीर में कहा कि विभिन्न विद्यालयों द्वारा शिकायतें की जा रही थीं कि एमडीएम सेल के डीसी फिरोज अहमद खान द्वारा पर्याप्त कन्वर्जन कास्ट का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायत पर वित्त एवं लेखाधिकारी के साथ एमडीएम कन्वर्जन कास्ट पत्रावली का परीक्षण किया गया। डीसी ने ई-मेल के माध्यम से प्रिंटेड पेमेंट

एडवाइस (पीपीए) उपलब्ध कराए, तो उसमें गड़बड़ी का संदेह हुआ। जांच में पाया गया कि डीसी ने जो अभिलेख उपलब्ध कराए थे, वे कूटरचित थे। वास्तविक रूप से भेजी धनराशि को कम करके दिखाया गया था, फिरोज अहमद वर्ष 2008 से कार्यरत हैं और पांच से छह वर्षों के अंतराल में गबन में सहभागी विद्यालयों में शिक्षारत छात्रों की संख्या के प्रतिकूल बहुत अधिक धनराशि आवंटित कर प्रधान, प्रधानाध्यापक व समिति के अध्यक्ष के साथ मिलकर गबन कर लिया। नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एमडीएम सेल के डीसी फिरोज अहमद खान समेत 44 अन्य लोगों के विरुद्ध केस दर्ज किया गया है।


एमडीएम की शिकायत विभिन्न पत्रावलियों का सत्यापन किया गया। जिसमें लगभग 11 करोड़ रुपये के सरकारी बजट गबन का मामला सामने आने पर डीसी समेत 45 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
- शुभम शुक्ला, बीएसए, बलरामपुर

डीसीम समेत 45 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच हो रही है। दर्जनों लोगों के नाम सामने आ रहे है। आरोपितों को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
- विकास कुमार, एसपी, बलरामपुर

Monday, November 3, 2025

सवा दो करोड़ रिश्वत मांगने में फंसे गोंडा के बीएसए, भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने केस दर्ज करने का दिया आदेश, फर्नीचर सप्लाई में कमीशन मांगने का आरोप

सवा दो करोड़ रिश्वत मांगने में फंसे गोंडा के बीएसए, भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने केस दर्ज करने का दिया आदेश, फर्नीचर सप्लाई में कमीशन मांगने का आरोप


गोंडा। फर्नीचर आपूर्ति के ठेके में 2.25 करोड़ की रिश्वत मांगने और 30 लाख रुपये एडवांस लेने के आरोप में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अतुल कुमार तिवारी व दो जिला समन्वयक फंस गए हैं। कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

मोतीगंज क्षेत्र के किनकी गांव निवासी मनोज पांडेय नीमन सीटिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के एमडी हैं। उन्होंने गोरखपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में अपील की है कि उनकी कंपनी गोंडा के 564 उच्च प्राथमिक और संकुल विद्यालयों के लिए फर्नीचर सप्लाई के टेंडर में एल-1 (सबसे कम दर देने वाली फर्म) घोषित की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएसए अतुल कुमार तिवारी, जिला समन्वयक (जेम) प्रेमशंकर मिश्र और जिला समन्वयक (सिविल) विद्याभूषण मिश्र ने 15% कमीशन के रूप में 2.25 करोड़ की मांग की।


चार जनवरी 2025 को बीएसए ने अपने राजकीय हाउसिंग कॉलोनी स्थित आवास पर बुलाकर उनसे 30 लाख रुपये (22 लाख बीएसए को और चार-चार लाख दोनों समन्वयकों को) लिए। बाद में शेष रकम न देने पर फर्म को दो वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।

मनोज ने अदालत में व्हाट्सएप चैट व अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि जब दिए गए रुपये वापस मांगे तो प्रेमशंकर मिश्र ने एक लाख रुपये लौटा दिए, लेकिन बीएसए और डीसी सिविल ने मना कर दिया।

अदालत में बीएसए व समन्वयक ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कंपनी ने टेंडर में फर्जी दस्तावेज लगाए। अनुभव प्रमाणपत्र में दर्शाई गई राशि 5.91 करोड़ के बजाय 9.86 लाख थी। इसी तरह कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में टर्नओवर 19.54 करोड़ दिखाया। असल टर्नओवर 14.54 करोड़ रहा। इन अनियमितता के कारण फर्म को ब्लैकलिस्ट किया गया।

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विपिन कुमार तृतीय ने माना कि आवेदक के आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं।

अदालत ने 31 अक्तूबर 2025 को आदेश पारित करते हुए कोतवाली नगर गोंडा के प्रभारी निरीक्षक को तीनों अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। 


फर्नीचर आपूर्ति के लिए कंपनी ने जो दस्तावेज लगाए थे, वे फर्जी थे। इसलिए टेंडर निरस्त किया था। पेशबंदी में कंपनी के एमडी भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट गए हैं। - अतुल तिवारी, बीएसए-गोंडा

Friday, August 15, 2025

आय से अधिक संपत्ति में सेवानिवृत्त हो चुके पूर्व बीएसए पर मुकदमा

आय से अधिक संपत्ति में सेवानिवृत्त हो चुके पूर्व बीएसए पर मुकदमा
 

वाराणसी । उप्र सतर्कता अधिष्ठान वाराणसी इकाई ने वाराणसी के पूर्व बीएसए जय सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति पाए जाने पर मुकदमा दर्ज किया है। उनके पास एक करोड़ 21 लाख 61 हजार 921 रुपये की संपत्ति अधिक मिली है।


शासन की ओर से तीन जून 2022 को जांच के लिए निर्देश मिला था। इस क्रम में पूर्व बीएसए जय सिंह के खिलाफ उप्र सतर्कता अधिष्ठान वाराणसी इकाई ने जांच शुरू की। फतेहपुर जिले के बसंत खेड़ा निवासी जय सिंह के खिलाफ खुली जांच में पाया गया कि वह लोक सेवक के रूप में कार्यरत रहते हुए अपनी आय के सभी ज्ञात एवं वैध श्रोतों से कुल 1 करोड़ 05 लाख 61 हजार 334.5 रुपये अर्जित की।


जबकि इस अवधि में इनकी ओर से कुल 2 करोड़ 27 लाख 23 हजार 256 रुपये खर्च किया गया। इस प्रकार जय सिंह अपनी आय के सापेक्ष 1 करोड़ 21 लाख 61 हजार 921 रुपये अधिक खर्च किया। जय सिंह वाराणसी में 2019 में बीएसए थे। इस समय सेवानिवृत्त हो चुके हैं।