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Wednesday, September 30, 2026

विशेष टीईटी पर प्रधानाध्यापक असमंजस में, प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सिर्फ प्राइमरी टीईटी का विकल्प

विशेष टीईटी पर प्रधानाध्यापक असमंजस में, प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सिर्फ प्राइमरी टीईटी का विकल्प

पदोन्नति के लिए उच्च प्राथमिक टीईटी की पात्रता पर सवाल

 लखनऊ : विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आवेदन को लेकर कुछ शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है। खासकर प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि उन्हें प्राथमिक स्तर की टीईटी देनी है या उच्च प्राथमिक स्तर की। आवेदन की अंतिम तिथि चार अक्टूबर है और परीक्षा तीन नवंबर को होनी है। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने बेसिक शिक्षा विभाग से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना में प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी का विकल्प दिया गया है। इससे प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक असमंजस में हैं। उनका कहना है कि उनका पद उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक के समकक्ष माना जाता है। ऐसे में उन्हें उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी में आवेदन का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है?

 शिक्षकों का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए वर्तमान पद पर बने रहने को संबंधित स्तर की टीईटी और पदोन्नति के लिए उच्च स्तर की टीईटी जरूरी है। ऐसे में प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए केवल प्राथमिक टीईटी का विकल्प रखने से पदोन्नति की पात्रता प्रभावित हो सकती है। कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत प्राथमिक संवर्ग के प्रधानाध्यापकों की स्थिति भी इसी तरह की है। शिक्षकों की मांग है कि उन्हें दोनों स्तर की टीईटी में आवेदन की अनुमति दी जाए, ताकि वर्तमान पद की पात्रता के साथ भविष्य की पदोन्नति का रास्ता भी खुला रहे। आवेदन की अंतिम तिथि से पहले स्पष्ट निर्देश जारी करने व आवश्यक पर संशोधित अधिसूचना जारी करने की मांग की है।



पद समकक्ष तो जूनियर TET देने का मौका क्यों नहीं? प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल से कंपोजिट स्कूल में तैनात शिक्षक परेशान

प्राइमरी और अपर प्राइमरी के शिक्षकों के लिए अलग-अलग होनी है स्पेशल टीईटी की परीक्षा


लखनऊः विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आवेदन को लेकर बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में तैनात शिक्षकों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। सबसे अधिक परेशानी प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और कंपोजिट स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को हो रही है, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे प्राथमिक स्तर की टीईटी दें या उच्च प्राथमिक (जूनियर) स्तर की।


क्या है विवाद?: बेसिक शिक्षा विभाग के कैडर स्ट्रक्चर के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक का पहला प्रमोशन 'प्राथमिक का हेडमास्टर' या 'जूनियर का सहायक अध्यापक' के तौर पर होता है। दोनों पद समान वेतनमान और समकक्ष है, जबकि अगला प्रमोशन जूनियर विद्यालय के प्रधानाध्यापक के तौर पर होता है।

अब शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि जब प्राथमिक हेडमास्टर का पद जूनियर के सहायक अध्यापक के समकक्ष है, तो उन्हें केवल प्राथमिक टीईटी का ही विकल्प क्यों दिया जा रहा है? उन्हें उच्च प्राथमिक (जूनियर) टीईटी में भी मौका मिलना चाहिए। कंपोजिट स्कूलों में प्राथमिक हेडमास्टरों का पद 'मानव संपदा पोर्टल' पर प्रधानाध्यापक/जूनियर सहायक अध्यापक दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत वर्तमान पद पर बने रहने और भविष्य में पदोन्नति पाने के लिए संबंधित और उच्च स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। शिक्षकों का कहना है कि यदि उन्हें अभी सिर्फ प्राथमिक टीईटी का विकल्प मिला, तो कल को जूनियर स्तर पर होने वाली पदोन्नति की पात्रता पर संकट खड़ा हो जाएगा।


स्पष्ट गाइडलाइन की मांगः शिक्षकों को दोनों स्तरों (प्राथमिक और उच्च प्राथमिक) की टीईटी में आवेदन करने की छूट दी जाए। कंपोजिट विद्यालयों के शिक्षकों और प्राथमिक प्रधानाध्यापकों के संबंध में संशोधित अधिसूचना व स्पष्ट निर्देश जारी किए जाए।

Tuesday, September 29, 2026

शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मांगी व्यवस्था और आदेश, 11508 शिक्षक भर्ती का मामला

शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मांगी व्यवस्था और आदेश,  11508 शिक्षक भर्ती का मामला
 
29 सितंबर 2026
प्रयागराज । नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक और कंपोजिट स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अब तक की गई कार्यवाही के बारे में पूछताछ की है। चयन आयोग के उपसचिव डॉ. संजय कुमार सिंह ने 24 सितंबर को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा पार्थसारथी सेनशर्मा को इस संबंध में पत्र लिखा है।

चयन आयोग का कहना है कि 15 सितंबर को सहायक अध्यापकों के 11508 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने 17 सितंबर को यह अवगत कराया है कि उच्चतम न्यायालय के 25 जुलाई 2017 के आदेश के अनुपालन में शिक्षामित्रों को 68500 एवं 69000 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में उनके प्रत्येक अध्यापन वर्ष के लिए 2.5 अंक, अधिकतम 25 अंक तक (जो भी कम हो) का भारांक तथा आयु में छूट प्रदान की गयी है।

उच्चतम न्यायालय ने राम शरण मौर्या के मामले में 18 नवंबर 2020 को शिक्षामित्रों को आगामी भर्ती में एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करने के आदेश दिए हैं। सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी के पत्र के संबंध में चयन आयोग ने लिखा है कि इस भर्ती में शिक्षामित्रों को आयु सीमा में 60 वर्ष तक छूट प्रदान की गयी है। हालांकि शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 की धारा 30 में उल्लिखित है कि अध्यापकों या अनुदेशकों के चयन के संबंध में बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972 के नियमों, विनियमों या परिनियमों में किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी चयन आयोग का अधिनियम प्रभावी होगा। आयोग के अधिनियम एवं विनियमावली में मात्र लिखित परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों के चयन की व्यवस्था है।

वहीं आयोग को यह सूचना नहीं दी गई है कि उच्चतम न्यायालय के 18 नवंबर 2020 के आदेश के क्रम में शिक्षामित्रों को आगामी भर्ती में एक अवसर प्रदान करने संबंधी राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी किसी आदेश का उल्लेख नहीं है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के क्रम में राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग ने क्या निर्णय लिया व शिक्षामित्रों को भारांक किस प्रकार दिए जाने की व्यवस्था तय की गयी है। लिहाजा बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों से आयोग को अवगत कराएं ताकि चयन प्रक्रिया की कार्यवाही सम्पादित की जा सके।



टीईटी पास शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी, प्रदेश में टीईटी पास 75 हजार शिक्षामित्रों को मिलेगा लाभ

26 सितम्बर 2026
प्रयागराज। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती में भारांक (वेटेज) दिए जाने की सौगात मिल सकती है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से शुक्रवार को शासन को पत्र भी भेज दिया गया है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2020 के आदेश का हवाला देते हुए भारांक दिए जाने की अनुमति मांगी है।

वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जनपदों के परिषदीय स्कूलों में 1,43,470 शिक्षामित्र कार्यरत हैं जिसमें 75 हजार से ज्यादा ऐसे शिक्षामित्र हैं जिन्होंने टीईटी पास कर ली है। भारांक मिलने से सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में इन्हें सीधे तौर पर बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल, प्रदेश सरकार पिछली दो भर्तियों 68,500 और 69,000 में भारांक दे चुकी है। इसमें काम के अनुभव के हिसाब से प्रतिवर्ष 2.5 अंक या अधिकतम 25 अंक का भारांक मिले थे। उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के उप सचिव संजय सिंह का कहना है कि शासन स्तर से अनुमति मिलने का इंतजार है।

2017 में निरस्त हो गया था शिक्षामित्रों का समायोजन
उप्र शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम अहमद कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बगैर टीईटी पास प्रदेश भर के शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया गया था और उन्हें 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलने लगा था। इसमें 1.37 हजार शिक्षामित्र शामिल थे।

स्पेशल टीईटी में शामिल होने की कर रहे मांग
कुछ महीने पहले ही परिषदीय स्कूलों के सहायक अध्यापकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता की बात कही गई थी। बाद में सरकार ने सहायक अध्यापकों की सहूलियत के लिए स्पेशल टीईटी कराए जाने की घोषणा की थी। अब प्रदेश भर के ऐसे शिक्षामित्र भी इस स्पेशल टीईटी में आवेदन करने का मौका मांग रहे हैं जो अभी टीईटी पास नहीं हैं।




शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी, बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षा सेवा चयन आयोग को लिखा पत्र

चयन आयोग ने गठित की चार सदस्यीय कमेटी, मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों को भारांक देने का दिया था आदेश

आज होने वाली चयन आयोग की बैठक में हो सकता है निर्णय

22 सितंबर 2026
प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी है।  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भर्ती के विज्ञापन में भारांक का जिक्र नहीं होने संबंधी समाचार प्रकाशित होने के बाद अफसर बैकफुट पर हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव मनोज कुमार को पत्र लिखकर उच्चतम न्यायालय के 18 नवंबर 2020 के उस आदेश की जानकारी दी है, जिसमें शिक्षामित्रों को आगामी शिक्षक भर्ती में एक अतिरिक्त अवसर प्रदान किए जाने के आदेश पारित दिए गए थे।


सचिव का पत्र मिलने के बाद इस मामले में निर्णय लेने के लिए चयन आयोग ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। माना जा रहा है कि मंगलवार को होने वाली आयोग की बैठक में इस पर भी विचार किया जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर शिक्षामित्रों को भारांक देने की उम्मीद जगी है क्योंकि भारांक नहीं मिलने पर शिक्षामित्र कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं और ऐसा होने पर पूरी भर्ती ही फंस जाएगी। शासन स्तर पर भी शिक्षामित्रों के भारांक की अनदेखी, नियमावली में संशोधन और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आरक्षण नहीं देने पर विचार हो रहा है। शासन में भी इसी सप्ताह इन मुद्दों पर बैठक होने की उम्मीद है।


अधियाचन भेजते समय नहीं दी आदेश की सूचना

इस पूरे मामले में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही सामने आई है। 11508 सहायक अध्यापक के पदों पर चयन एवं नियुक्ति के लिए बेसिक शिक्षा निदेशक ने 17 मई को चयन आयोग को अधियाचन भेजा था। उसके चार महीने बाद 15 सितंबर को चयन आयोग ने भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया। वैसे तो बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को अधियाचन के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सूचना देनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही नहीं अधियाचन भेजने के चार महीने बाद तक बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को इस आदेश की सूचना देने की चिंता नहीं हुई। भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद जब शिक्षामित्रों को भारांक नहीं देने का समाचार प्रकाशित हुआ तब जाकर बेसिक के अफसर नींद से जागे और उच्चतम न्यायालय के आदेश की सूचना भेजी।



नियमावली में संशोधन नहीं, खत्म कर दी मेरिट,  प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती का मामला

बेसिक शिक्षा परिषद की नियमावली में एकेडमिक मेरिट मौजूद, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के विज्ञापन में नहीं है जिक्र

18 सितम्बर 2026
प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में नियमावली संशोधन की अड़चन आ सकती है। बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 में अभी भी 40 प्रतिशत शैक्षिक मेरिट का प्रावधान है जिसे हटाए बगैर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने केवल लिखित परीक्षा के आधार पर चयन का विज्ञापन जारी कर दिया है। भर्ती के विज्ञापन में चयन पूरी तरह 360 अंकों की लिखित परीक्षा (120 बहुविकल्पीय प्रश्न) की मेरिट पर करने की बात लिखी है। शैक्षिक योग्यता (हाईस्कूल, इंटर, स्नातक प्रशिक्षण) के अंकों को मेरिट में शामिल नहीं किया गया है। अंक समान होने की स्थिति में सिर्फ स्नातक, प्रशिक्षण प्रतिशत व उम्र को आधार बनाया है।


यह व्यवस्था सेवा नियमावली के विपरीत है। नियमावली में हाईस्कूल, इंटर, स्नातक और डीएलएड (बीटीसी) / प्रशिक्षण के अंकों को (दस-दस कुल 40 प्रतिशत) वेटेज (भारांक) गुणवत्ता बिंदुओं के रूप में जोड़ा जाता है, जबकि सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के अंकों को 60 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है। जानकारों की मानें तो नियमावली में बिना संशोधन चयन का आधार बदलना नियम विरुद्ध है। यदि लिखित परीक्षा के आधार पर भर्ती करनी थी तो पहले सरकार को कैबिनेट से नियमावली में 26वां संशोधन कर शैक्षिक मेरिट समाप्त करनी चाहिए थी और चयन का आधार पूर्णतया लिखित परीक्षा करना चाहिए था।

2017 से 2019 तक नियमावली में हुए छह संशोधन

बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 में 2017 से 2019 तक हुए 20वें से 25वें संशोधनों में एटीआरई परीक्षा, बीएड योग्यता और अपेंडिक्स में कई बदलाव किए गए थे, लेकिन शैक्षिक मेरिट का प्रावधान आज भी कायम है। एकेडमिक मेरिट के आधार पर ही 68500 और 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती की गई थी। यदि चयन प्रक्रिया बदलना है तो नियमावली में संशोधन अनिवार्य है, अन्यथा भर्ती प्रक्रिया में विधिक अड़चन आ सकती है।

चयन की प्रक्रिया परीक्षा लेने वाली संस्था (उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग) ही तय करती है। ऐसे में 11508 भर्ती का जो विज्ञापन जारी हुआ है वह नियम संगत है। - डॉ. संजय कुमार सिंह, पीआरओ चयन आयोग



11508 भर्ती में शिक्षामित्रों को नहीं मिलेगा भारांक, चयन आयोग के विज्ञापन में जिक्र नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने भारांक देने का दिया था आदेश

16 सितंबर 2026
प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में साढ़े सात साल बाद शुरू हुई 11508 सहायक अध्यापकों की भर्ती से प्रदेश के लगभग 1.42 लाख शिक्षामित्रों को निराशा हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी विज्ञापन में शिक्षामित्रों को सेवानिवृत्ति की आयु (60 साल) तक आवेदन के लिए अर्ह माना है, लेकिन भारांक का कोई जिक्र नहीं है। राम शरण मौर्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 18 नवंबर 2020 को आदेश दिया था कि शिक्षामित्रों को अगली चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा करने का एक और अवसर प्रदान किया जाएगा।


शीर्ष अदालत ने यह राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ा था कि इस अवसर का लाभ शिक्षामित्र किस प्रकार और किन प्रक्रियाओं व्यवस्थाओं के तहत उठा सकेंगे। यही नहीं 69000 शिक्षक भर्ती के कटऑफ विवाद के मामले में सरकार ने 12 जून 2020 को दाखिल इंटरक्यूलेटरी एप्लीकेशन में सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी थी कि उस समय शिक्षकों के रिक्त 51112 पदों की भर्ती में शिक्षामित्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।

इससे पहले जुलाई 2017 में 1.37 लाख शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त होने शिक्षामित्रों को अनुभव के आधार पर दस से 25 अंक तक का भारांक मिला था।

15 हजार शिक्षामित्रों को ही मिली नौकरी

बिना टीईटी सहायक अध्यापक पद पर समायोजित 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2017 में निरस्त कर दिया था। शीर्ष अदालत के आदेश पर प्रदेश सरकार ने 68500 और 69000 भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक दिया था। क्रमशः लगभग सात और आठ हजार शिक्षामित्रों को ही नौकरी मिल सकी थी।

सरकार बनी तो पुरानी पेंशन बहाल करेंगे, वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय और शिक्षामित्रों को बनायेंगे शिक्षक, बोले अखिलेश यादव

सरकार बनी तो पुरानी पेंशन बहाल करेंगे, वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय और शिक्षामित्रों को बनायेंगे शिक्षक, बोले अखिलेश यादव 

लखनऊ। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश सपा मुख्यालय पर विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक चुनाव की तैयारी को लेकर पार्टी विधायकों और प्रत्याशियों के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें सपा के प्रत्याशियों को जिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में समाजवादी सरकार बनने जा रही है। कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी नेताजी के समय से शिक्षकों के लिए काम करती रही है।


अखिलेश ने कहा कि जब भी मौका मिला, समाजवादी पार्टी ने शिक्षकों के हित में फैसले लिए। वित्तविहीन शिक्षकों के लिए बजट में मानदेय के लिए व्यवस्था करेंगे। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और तदर्थ प्रधानाचार्यों के वेतन संबंधी धारा 12,18 व 21 को बहाल किया जाएगा। आधुनिक मदरसा शिक्षकों का वेतन बहाल किया जाएगा। संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं का समाधान होगा। 

शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाकर सम्मान देने का काम किया जाएगा। डिग्री कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम खत्म करेंगे। अनुदेशक, रोजगार और आंगनबाड़ी की समस्याओं का समाधान करेंगे।

Monday, September 28, 2026

यूपी में 7867 उच्च शिक्षण संस्थान नैक मूल्यांकन से दूर, 8021 उच्च शिक्षण संस्थानों में केवल 154 का नैक मूल्यांकन

यूपी में 7867 उच्च शिक्षण संस्थान नैक मूल्यांकन से दूर, 8021 उच्च शिक्षण संस्थानों में केवल 154 का नैक मूल्यांकन

नैक की नई प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं संस्थान

 लखनऊ: प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करने वाली राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की पहुंच अधिकांश संस्थानों तक नहीं हो सकी है। यूपी के 8021 उच्च शिक्षण संस्थानों में केवल 154 संस्थान नैक से मूल्यांकित हैं, जिससे 7867 संस्थान अभी नैक के मूल्यांकन से बाहर हैं। बड़ी संख्या में संस्थान मूल्यांकन की प्रक्रिया में शामिल होने के इंतजार में हैं। नैक ने पुरानी ग्रेड आधारित व्यवस्था को बदल दिया है, लेकिन नई प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।


24 राज्य विश्वविद्यालयों और एक डीम्ड विश्वविद्यालय में 13 संस्थान नैक से मान्यता प्राप्त हैं। निजी विश्वविद्यालयों में 52 में 11 संस्थान नैक से मूल्यांकित हैं और 41 अभी इस प्रक्रिया से बाहर हैं। महाविद्यालयों की संख्या अधिक है, और सरकारी, सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की बड़ी संख्या के कारण नैक मूल्यांकन का दायरा बढ़ाना चुनौतीपूर्ण है। 

उच्च शिक्षा के अधिकांश संस्थानों के पास नैक के निर्धारित मानकों पर बाहरी मूल्यांकन का प्रमाण नहीं है। नैक में संस्थान की पढ़ाई, शिक्षण व्यवस्था, शोध, आधारभूत सुविधाएं, विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाएं, प्रशासन और अन्य शैक्षिक गतिविधियों का मूल्यांकन किया जाता है। इससे संस्थान को अपनी कमियों और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलती है।

डीएलएड में एक विषय में तीन बार फेल अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन होगा समाप्त, परिषदीय स्कूलों में शिक्षक भर्ती से पहले अभ्यर्थी कर रहे पुनर्परीक्षा की मांग

डीएलएड में एक विषय में तीन बार फेल अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन होगा समाप्त, परिषदीय स्कूलों में शिक्षक भर्ती से पहले अभ्यर्थी कर रहे पुनर्परीक्षा की मांग


प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में 11,508 पदों पर शिक्षक भर्ती से पहले डीएलएड करने वाले कई अभ्यर्थी पुनर्परीक्षा की अनुमति मांग रहे हैं। वहीं, परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव राजेंद्र प्रताप ने एक विषय में तीन बार अनुत्तीर्ण अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।


उन्होंने कहा कि दो बार सेमेस्टर बैक वाले अभ्यर्थियों को भी परीक्षा में शामिल होने का अवसर नहीं मिलेगा। कार्यालय के चक्कर लगाने से नियमों में बदलाव संभव नहीं है। सचिव ने बताया कि यह आदेश डीएलएड प्रशिक्षण के नियमों के अनुरूप है।

उच्च न्यायालय के आदेश पर नियम का पालन किया जा रहा है। उच्च न्यायालय ने 20 फरवरी 2026 को इस संबंध में आदेश दिया था।

कक्षा एक और दो के बच्चे भी सीखेंगे संस्कृत का मौलिक ज्ञान, एससीईआरटी तैयार कर रहा इसके लिए अलग मॉड्यूल

कक्षा एक और दो के बच्चे भी सीखेंगे संस्कृत का मौलिक ज्ञान,  एससीईआरटी तैयार कर रहा इसके लिए अलग मॉड्यूल

बैगलेस डे में होगी पढ़ाई

लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक व दो के बच्चों को भी संस्कृत का मौलिक ज्ञान दिया जाएगा। अतिरिक्त कक्षाओं व बैगलेस डे में इन्हें संस्कृत का पढ़ने में कठिनाई न हो। इसके आधारभूत ज्ञान दिया जाएगा जिससे इन्हें कक्षा तीन से विषय के रूप में संस्कृत पढ़ने में कठिनाई न  हो इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने तैयारी पूरी कर ली है।


परिषदीय स्कूलों में कक्षा तीन से पांच तक के बच्चों को संस्कृत पढ़ाई जाती है। संस्कृत के कठिन पाठ उन्हें समझाने में शिक्षकों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में अब कक्षा एक-दो के बच्चों को शैक्षिक सत्र 2027-28 से संस्कृत की समझ विकसित की जाएगी। एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने बताया कि मौलिक ज्ञान उन्हें मौखिक रूप से पढ़ाया जाएगा। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कक्षा एक-दो के बच्चों को संस्कृत में गिनती, फलों व वस्तुओं के नाम सहित आधारभूत ज्ञान दिया जाएगा। इसका मॉडयूल तैयार कर शिक्षकों को मुहैया कराया जाएगा।

Sunday, September 27, 2026

सड़कों पर बेरोजगार, बेसिक शिक्षको के 27713 रिक्त पद दबाए बैठे हैं अधिकारी

सड़कों पर बेरोजगार, बेसिक शिक्षको के 27713 रिक्त पद दबाए बैठे हैं अधिकारी

प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सात साल बाद आई भर्ती में पदों की संख्या को लेकर लाखों बेरोजगारों में असंतोष पनप रहा है। एक तरफ डीएलएड और टीईटी पास बेरोजगार पदों की संख्या बढ़ाकर कम से कम 60 हजार करने को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर हजारों रिक्त पद दबाए बैठे हैं।


 बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने नगर क्षेत्र के स्कूलों में सहायक अध्यापकों के केवल 11,508 रिक्त पदों की सूचना उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजी है।

आठ साल पहले शुरू हुई 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती में रिक्त 27,713 पदों पर चयन की कार्रवाई दो साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 33/30 कटऑफ विवाद को खारिज करते हुए अगस्त 2024 के अंत में बेसिक शिक्षा विभाग को दो महीने में रिक्त 27,713 पदों पर नए सिरे से भर्ती शुरू करने के आदेश दिए थे। 

इस बीच शिक्षामित्र, बीटीसी और डीएलएड अभ्यर्थियों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले विशेष अनुज्ञा याचिका खारिज की। उसके बाद दाखिल क्यूरेटिव पेटीशन को पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सात अक्तूबर 2025 को खारिज कर दी थी। 

उसके बाद से 27713 पदों पर भर्ती को लेकर कोई अड़चन नहीं बची है। इसके बावजूद अधिकारियों ने इन पदों की सूचना चयन आयोग को नहीं भेजी।

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब जरूरत देखकर तय होंगे विकास कार्य

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब जरूरत देखकर तय होंगे विकास कार्य

लखनऊः राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब विकास कार्य किसी तय भारांक के आधार पर नहीं, बल्कि स्कूल की वास्तविक जरूरत देखकर तय होंगे। शासन ने प्रोजेक्ट अलंकार में लागू भारांक आधारित प्राथमिकता व्यवस्था खत्म कर दी है। 


नई व्यवस्था में प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक स्कूल की जरूरत का आकलन कर जर्जर भवन के पुनर्निर्माण, मरम्मत और अन्य सुविधाओं के लिए प्रस्ताव सीधे जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) को भेजेंगे। इससे जरूरी कामों के प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें मंजूरी मिलने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले सरल होने की उम्मीद है।

 डीआइओएस प्रस्ताव के आधार पर संबंधित कार्यदायी संस्था से एस्टीमेट तैयार कराएंगे। इसके बाद प्रस्ताव जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति के सामने रखा जाएगा। समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष, मुख्य विकास अधिकारी उपाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता तकनीकी सदस्य और डीआइओएस सदस्य सचिव होंगे।

माध्यमिक विद्यालयों के नामांकन में भिन्नता को सही कराने के सम्बन्ध में।

माध्यमिक विद्यालयों के नामांकन में भिन्नता को सही कराने के सम्बन्ध में।


Saturday, September 26, 2026

माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की तैयारी, मांगी गई जानकारी

माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की तैयारी, मांगी गई जानकारी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त, अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत, स्ववित्तपोषित माध्यमिक तथा स्ववित्तपोषित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-8 की ओर से महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजकर आवश्यक सूचनाएं तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अनु सचिव रचना जायसवाल की ओर से 24 सितंबर 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि यह प्रकरण शीघ्र ही मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाना प्रस्तावित है। शासन ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए प्रति कार्मिक अनुमानित 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से संभावित वार्षिक वित्तीय व्ययभार की जानकारी मांगी है।

शासन ने संबंधित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की पात्र अनुमानित संख्या तथा उनके आधार पर अनुमानित वार्षिक व्ययभार निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने को कहा है। यह सूचना शासन को उसी दिन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।

प्रस्ताव लागू होने पर संबंधित शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सकेगा। फिलहाल यह मामला मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तावित है, इसलिए सुविधा लागू होने की अंतिम स्थिति मंत्रिपरिषद के निर्णय के बाद स्पष्ट होगी।


बारिश के बीच शिक्षक-कर्मचारियों का पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने और निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन

बारिश के बीच शिक्षक-कर्मचारियों का पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने और निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन

26 सितम्बर 2026
लखनऊ। लगातार बारिश के बावजूद शुक्रवार को अटेवा की महारैली में बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी ईको गार्डन पहुंचे। पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने और निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी की। प्रदेश के विभिन्न जिलों से से आए आए कर्मचारियों ने बारिश के बीच अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता, एनपीएस और निजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो तीन माह बाद लखनऊ में 'डेरा डालो घेरा डालो' आंदोलन के तहत क्रमिक अनशन किया जाएगा। महारैली में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। 




पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी से राहत के लिए अटेवा की रैली आज 

25 सितंबर 2026
लखनऊ। अटेवा पेंशन बचाओ मंच द्वारा 25 सितंबर को पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी से राहत के लिए लखनऊ के ईको गार्डेन में रैली की जा रही है। इसमें प्रदेश भर के शिक्षक-कर्मचारी शामिल होंगे। विभिन्न शिक्षक कर्मचारी, अधिकारी संगठनों ने रैली का समर्थन किया है।

अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु ने कहा कि कई सालों से प्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा पुरानी पेंशन की बहाली की मांग की जा रही है। क्योंकि एनपीएस या यूपीएस से शिक्षको, कर्मचारियों का कोई लाभ नहीं है। सामाजिक सुरक्षा यदि कोई है तो पुरानी पेंशन ही है। इसके साथ ही निजीकरण, टीईटी की अनिवार्यता की समाप्ति की मांग की जा रही है। किंतु सरकार द्वारा कोई निर्णय न लेने के कारण इस रैली के माध्यम से शिक्षक-कर्मचारी मुख्यमंत्री से निवेदन करेंगे।

अटेवा के प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी ने कहा कि अटेवा के संघर्ष के कारण ही राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाल हो चुकी है। इसलिए कल होने वाली रैली में सभी शिक्षक-कर्मचारी एकजुट होकर एकता का परिचय देते हुए सरकार से पुरानी पेंशन की बहाली की गुहार करेगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महासंघ के महामंत्री अशोक कुमार ने कहा कि सभी शिक्षक और कर्मचारी अटेवा की इस रैली में शामिल होकर सरकार से पुरानी पेंशन की मांग करें।



पुरानी पेंशन बहाली के लिए 25 को होगी रैली, अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने की तैयारियां तेज

अटेवा की अगुवाई में हुई बैठक में बनी रणनीति

14 सितम्बर 2026
लखनऊ। अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने 25 सितंबर को लखनऊ में होने वाली रैली की तैयारियों के सिलसिले में रविवार को स्व. डॉ. रामाशीष स्मृति भवन पारा में बैठक की। इसमें रैली की सफलता के लिए पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।


अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण की समाप्ति और टीईटी की अनिवार्यता की समाप्ति के लिए होने वाली इस रैली से प्रदेश के शिक्षकों, कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण की समाप्ति और टेट की अनिवार्यता का रास्ता साफ होगा। प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी ने सभी शिक्षक, कर्मचारी संगठनों का आह्वान किया कि पुरानी पेंशन बहाली की लड़ाई हम सब की लड़ाई है। इसलिए 25 सितंबर को सभी संघ इस लड़ाई में अटेवा का साथ दें। 

प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि पुरानी पेंशन राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश में बहाल हो चुकी है, अब उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली का समय आ गया है। बैठक को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महासंघ के अशोक कुमार, अटेवा के प्रदेशीय उपाध्यक्ष चंद्रहास सिंह, राकेश रमन, ओमप्रकाश कन्नौजिया और जनार्दन शुक्ला ने भी संबोधित किया।

हर जिले में बनाएं स्कूल वाहन सुरक्षा समिति : हाईकोर्ट

हर जिले में बनाएं स्कूल वाहन सुरक्षा समिति : हाईकोर्ट 

कोर्ट ने हर जिले की स्कूल वाहन सुरक्षा समिति की नियमित बैठक कराने के भी दिए निर्देश

डीएम एक माह में देंगे अनुपालन रिपोर्ट, सीबीएसई व आइसीएसई को भी बनाया जाए पक्षकार

लखनऊ : स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि हर जिले में जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों को नियमित रूप से सक्रिय किया जाए और सभी स्कूलों में स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों का गठन कराया जाए। कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन नियमों में स्कूली वाहनों की सुरक्षा के लिए विस्तृत प्रविधान पहले से मौजूद हैं, लेकिन इनका प्रभावी पालन कराया जाना जरूरी है।


न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृज राज सिंह की पीठ ने यह आदेश गोमतीनगर रिवर बैंक रेजिडेंट्स एसोसिएशन के सचिव गिरधर गोपाल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों की नियमित बैठकें सुनिश्चित करें और प्रत्येक स्कूल में गठित होने वाली परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन तथा उनके कामकाज की निगरानी के लिए आवश्यक आदेश जारी करें।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियमावली के अध्याय 9-ए में स्कूली बच्चों के परिवहन और उनकी सुरक्षा के लिए विशेष प्रविधान किए गए हैं। नियम 222-ए के तहत सार्वजनिक स्थानों पर स्कूली बच्चों को ले जाने वाले परिवहन वाहनों के लिए निर्धारित परमिट जरूरी है। स्कूल बसों और निजी बसों के लिए नियम 222-बी में अलग व्यवस्था की गई है। अधिकांश स्कूल वैन के पास आवश्यक परमिट नहीं हैं। 

हाई कोर्ट ने जिलाधिकारियों को समितियों के गठन और उनके दायित्वों के निर्वहन की निगरानी का निर्देश दिया है। प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी को एक माह में आदेश के अनुपालन की जानकारी देनी होगी। इसके आधार पर सभी जिलों की रिपोर्ट संकलित कर सरकारी अधिवक्ता अनुपालन हलफनामा दाखिल करेंगे। कोर्ट ने सीबीएसई और आइसीएसई को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है, ताकि उनके संबद्ध स्कूलों में भी सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

अब मोबाइल की लत छुड़ाएंगे, चुने जाएंगे टॉप-5 स्टूडेंट रीडर, परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र और किताबें पढ़ने पर दिया जाएगा जोर

अब मोबाइल की लत छुड़ाएंगे,  चुने जाएंगे टॉप-5 स्टूडेंट रीडर, परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र और किताबें पढ़ने पर दिया जाएगा जोर

लखनऊ। बच्चों में मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग की आदत कम करने और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग नया कदम उठाएगा। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में अब टॉप-5 स्टूडेंट रीडर चुने जाएंगे। इसके अलावा हर विद्यालय में 'रीडर ऑफ द वीक' भी चुना जाएगा। स्कूलों में समाचार पत्र और प्रेरक पुस्तकें पढ़ने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को दस खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की समीक्षा बैठक हुई। इसमें उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल, आत्मरक्षा, कला और क्राफ्ट जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों को इन गतिविधियों में दक्ष बनाने के लिए प्रोफेशनल कोच की मदद ली जाएगी। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को खेलों में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र खरीदने के लिए बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विद्यार्थी नियमित रूप से समाचार पत्र और किताबें पढ़ें। बैठक में बताया गया कि 25,790 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं।

मंत्री ने इनके प्रभावी उपयोग के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए। छात्रों के संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक और शारीरिक विकास की निगरानी के लिए समग्र प्रगति पत्र लागू किया गया है, जिसे अपार आईडी और प्रेरणा पोर्टल से जोड़ा जा रहा है।

पॉक्सो पर विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान शुरू, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, स्कूलों में विस्तार से दी जाएगी अधिनियम की जानकारी

पॉक्सो पर विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान शुरू,  राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, स्कूलों में विस्तार से दी जाएगी अधिनियम की जानकारी


लखनऊ। उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने शुक्रवार से लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो) के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रदेशव्यापी विशेष अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पॉक्सो के विधिक प्रावधानों, अधिकारों, दायित्वों और उल्लंघन के कानूनी परिणामों की जानकारी देना है। 


अभियान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश व राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के नेतृत्व और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं वरिष्ठ न्यायाधीश व कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। 


अभियान के तहत विद्यार्थियों, विशेषकर किशोरों व युवाओं को बताया जा रहा है कि कानून में 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चा माना गया है और उसकी सहमति को कानूनी मान्यता नहीं है। 

सरकारी कार्यालय से रिकॉर्ड गायब होने पर नियुक्ति को अमान्य घोषित नहीं कर सकते, शिक्षकों ने नियुक्ति को अमान्य घोषित करने पर हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

सरकारी कार्यालय से रिकॉर्ड गायब होने पर नियुक्ति को अमान्य घोषित नहीं कर सकते,  शिक्षकों ने नियुक्ति को अमान्य घोषित करने पर हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सरकारी कार्यालय से रिकॉर्ड या फाइल न मिलने के आधार पर किसी की नियुक्ति को अमान्य या फर्जी घोषित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने बिना पक्ष सुने वेतन रोकने के आदेश को रद्द कर दिया।


यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने मऊ के रजनीश उपाध्याय और 14 अन्य सहायक शिक्षकों की याचिका पर दिया है। याची शिक्षक समाज कल्याण विभाग से सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत थे। इनकी नियुक्तियां 2010 से 2016 के दौरान नियमानुसार अनुमोदन प्राप्त कर की गई थीं। हालांकि, बाद में 2014 में जांच में बीएसए कार्यालय में अनुमोदन संबंधी दस्तावेज नहीं मिले तो विभाग ने जुलाई 2025 में नियुक्तियों को फर्जी बताकर वेतन रोकने और कानूनी कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया।

इसके खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता ने दलील दी कि 2018 में याचियों की नियुक्ति के संबंध में जांच की गई थी, जिसमें गड़बड़ी नहीं पाई गई थी। दर्ज एफआईआर में भी पुलिस ने एफआर लगा दी थी। बीएसए ने शिक्षकों का पक्ष सुने बिना नियुक्ति रद्द कर दी है। राज्य की ओर से कहा गया कि अनुमोदन को कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इससे साबित होता है कि गलत तथ्य पेश कर अनुमोदन प्राप्त किया गया।

कोर्ट ने पाया कि मामले में पूर्व में की गई जांच और पुलिस विवेचना में शिक्षकों को पहले ही क्लीनचिट मिल चुकी थी। इसके बावजूद न कोई नया साक्ष्य प्रस्तुत किया गया और न ही शिक्षकों को सुनवाई का मौका दिया गया। एक एकतरफा कार्रवाई कर दी गई। कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना। कहा कि फाइलों के न मिलने के लिए सीधे तौर पर कर्मचारियों को दोषी ठहराना अनुचित है।

Friday, September 25, 2026

मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में अनिश्चितकालीन संविदा नियुक्ति कर्मचारियों का शोषण : हाईकोर्ट, कहा-नियमित भर्ती करे सरकार

मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में अनिश्चितकालीन संविदा नियुक्ति कर्मचारियों का शोषण : हाईकोर्ट, कहा-नियमित भर्ती करे सरकार

महानिदेशक से खाली पड़े प्रोफेसरों के पदों का मांगा ब्योरा, कोर्ट ने कहा-नियमित भर्ती करे सरकार


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती किए बिना सालों से संविदा के चलाने की व्यवस्था को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने कहा कि बिना किसी वैधानिक ढांचे के संविदा कर्मचारियों को अनिश्चितकाल तक बनाए रखना उनके शोषण की संभावना को बढ़ाता है, जो न्याय व संविधान की भावना के खिलाफ है।


इस प्रकार की तदर्थ और संविदा प्रथा समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन करती है।

बदायूं निवासी याची श्रीनिवासन की प्रिंसिपल-सह-प्रोफेसर के रूप में संविदा आधार पर नियुक्ति हुई थी। तीन जून 2025 के आदेश से उनकी नियुक्ति को इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि संविदा को तीन वर्ष से अधिक के लिए लिए नहीं बढ़ाया जा सकता है। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

कोर्ट के आदेश के अनुपालन में चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के महानिदेशक की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया। कोर्ट ने पाया कि पूरे प्रदेश में 500 से अधिक पद संविदा के आधार पर भरे गए हैं। महज दो से तीन प्रतिशत पद ही नियमित हैं। इसके अलावा 25 प्रतिशत मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों का संचालन कार्यवाहक प्राचार्यों के भरोसे चल रहा है।

इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम परमादेश जारी कर कहा है कि नियमित चयनों के लिए प्रस्तावित 'उत्तर प्रदेश नर्सिंग कॉलेज, शिक्षक, सेवा नियमावली, 2026' के ड्राफ्ट को जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए। साथ ही तत्काल अधिसूचित किया जाए ताकि जल्द से जल्द पारदर्शी एवं नियमित भर्तियां शुरू की जा सकें।

कोर्ट ने अगली सुनवाई 13 अक्तूबर 2026 तय करते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग से विस्तृत ब्योरा मांगा है। महानिदेशक को अगले हलफनामे में राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़े प्रोफेसरों के पदों का ब्योरा, विभागाध्यक्षों के रूप में काम कर रहे असिस्टेंट या एसोसिएट प्रोफेसरों की जानकारी, भर्ती के लिए भेजे गए अधियाचन और जारी विज्ञापनों की वर्तमान स्थिति पेश करने का आदेश दिया गया है।


कंपोजिट विद्यालयों का हुआ विस्तार 225 से बढ़कर 24605 हुए, बालवाटिका से लेकर कक्षा 8 तक की शिक्षा एक कैंपस में

कंपोजिट विद्यालयों का हुआ विस्तार 225 से बढ़कर 24605 हुए, बालवाटिका से लेकर कक्षा 8 तक की शिक्षा एक कैंपस में


लखनऊ। प्रदेश में बालवाटिका से कक्षा आठ तक एक ही परिसर में शिक्षा उपलब्ध कराने वाले कंपोजिट विद्यालयों का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2017-18 में 225 विद्यालयों से शुरू हुई योजना 2025-26 में बढ़कर 24605 विद्यालयों तक पहुंच गई है।


 इन विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा के साथ आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लास, डिजिटल पुस्तकालय और खेलकूद जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। एक ही परिसर में शिक्षा की सुविधा से बच्चों का ड्रॉपआउट कम करने में भी मदद मिल रही है। 

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकारी विद्यालयों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया कि करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से 150 सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं।

Wednesday, September 23, 2026

नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण कराने के नाम पर प्रबंधकों ने पैसे मांगे तो जाना पड़ेगा जेल, सीएम योगी का ऐलान

नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण कराने के नाम पर प्रबंधकों ने पैसे मांगे तो जाना पड़ेगा जेल, सीएम योगी का ऐलान 


लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चयनित शिक्षकों को नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण कराने के नाम पर पैसे मांगने वालों को जेल जाना पड़ेगा। 


मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या सहायक अध्यापक को कार्यभार ग्रहण करने में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। किसी प्रबंधक को कोई समस्या है तो वह शासन को बताए, लेकिन नियुक्ति के बाद किसी भी स्तर पर लेनदेन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समारोह में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता (पीजीटी) और 2372 सहायक अध्यापक (टीजीटी) शामिल रहे। 

मुख्यमंत्री ने 12 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। कहा कि चार दिनों में तीन बड़े नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रमों के जरिये 5297 युवाओं को सरकारी सेवा से जोड़ा गया है। पिछले नौ वर्षों में करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। अगले छह माह में एक लाख और सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य है। 

एडेड संस्कृत विद्यालयों में कौन करेगा भर्ती आखिर? तीन साल पहले चयन बोर्ड समाप्त, नए आयोग को अधिकार नहीं

एडेड संस्कृत विद्यालयों में कौन करेगा भर्ती आखिर? तीन साल पहले चयन बोर्ड समाप्त, नए आयोग को अधिकार नहीं

सरकार ने 2018 में शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था अधिकार

2022 से संविदा शिक्षकों के सहारे संस्कृत स्कूलों में पढ़ाई

प्रयागराज। संस्कृत अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए एक तरफ तो सरकार ने प्रत्येक विद्यार्थी को छात्रवृत्ति देने जैसी योजना शुरू की है, वहीं संस्कृत अध्यापन को लेकर कोई ठोस पहल होती नजर नहीं आ रही है। प्रदेश के 403 सहायता प्राप्त संस्कृत महाविद्यालय और 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में रिक्त सहायक अध्यापकों के 1300 से अधिक पदों पर चयन के लिए अब तक किसी भर्ती संस्था को अधिकृत नहीं किया जा सका है।


सरकार ने 28 मार्च 2018 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद (संस्थानों के प्रधानों, अध्यापकों एवं संस्थानों के अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्ते) विनियमावली-2009 में संशोधन के बाद सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के चयन का अधिकार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था। 


2019 में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में 1282 शिक्षकों की नियुक्ति का अधियाचन भेजा था। इसी  प्रकार महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को दी गई थी। इन दोनों ही संस्थाओं का 2023 में गठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में विलय हो चुका है। 

हालांकि नए आयोग को संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी नहीं मिली है। ऐसे में सवाल है कि एडेड संस्कृत
कॉलेजों में नियमित शिक्षकों का चयन किस माध्यम से होगा। नियमित शिक्षकों की नियुक्ति में देरी के कारण ही संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संविदा पर शिक्षकों का चयन हो रहा है।

बढ़ावा देने के लिए सहायता प्राप्त संस्कृत संस्थाओं में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। - सुरेश कुमार त्रिपाठी पूर्व एमएलसी व प्रदेश अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ।

Monday, September 21, 2026

माध्यमिक विद्यालयों में लगेगी युवा संसद, मंत्री और सांसद बनेंगे विद्यार्थी, राष्ट्रीय युवा संसद योजना के तहत होगा पंजीकरण

माध्यमिक विद्यालयों में लगेगी युवा संसद,  मंत्री और सांसद बनेंगे विद्यार्थी, राष्ट्रीय युवा संसद योजना के तहत होगा पंजीकरण

21 सितंबर 2026
प्रयागराज। माध्यमिक विद्यालयों में युवा संसद प्रतियोगिता कराई जाएगी। इसमें विद्यार्थी मंत्री, सांसद और विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। विपक्ष के विद्यार्थी सामाजिक मुद्दे पर सवाल उठाएंगे। मंत्री व सांसद बने विद्यार्थी उसका जवाब देंगे। अध्यक्ष की भूमिका में रहने वाले विद्यार्थी सदर की कार्रवाई संचालित करेंगे। विद्यार्थियों को संसदीय कार्यप्रणाली का अनुभव मिलेगा।

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने डीआईओएस को नोडल अधिकारी नामित किया है। विद्यालयों को राष्ट्रीय युवा संसद योजना के तहत पोर्टल पर किशोर सभा के तहत पंजीकरण कराना होगा। एक सप्ताह तक विद्यार्थियों को प्रतियोगिता का अभ्यास कराया जाएगा ताकि वह बेहतर ढंग से प्रश्न पूछ सकें। विद्यार्थी सवालों का बेहतर जवाब दे सकें।

सदन की कार्रवाई संचालित करने की प्रक्रिया शिक्षक विद्यार्थियों को बताएंगे। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों तर्क-वितर्क करने की समझ विकसित होगी। अभिव्यक्ति कौशल में भी निखार आएगा। 



विद्यालयों में लगेगी संसद पक्ष-विपक्ष की भूमिका में होंगे छात्र, कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे

9 सितम्बर 2026
लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब युवा संसद प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। वे सदन में अपना पक्ष रखने के साथ विपक्ष को भी घेरेंगे। 50 से 55 विद्यार्थियों वाले सदन में छात्रों को ही अध्यक्ष, मंत्री, विपक्ष के नेता और अन्य भूमिकाएं दी जाएंगी। उन्हें संसदीय कार्यवाही के संचालन, सवाल पूछने, जवाब देने, चर्चा करने और प्रस्ताव रखने का पूर्वाभ्यास कराया जाएगा।


युवा संसद के जरिये विद्यार्थियों को संसद और संसदीय प्रक्रियाओं के साथ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। इससे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, अनुशासन और दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर रहेगा। युवा संसद के लिए राज्य स्तर पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और जिला स्तर पर डीआईओएस को नोडल बनाया गया है। एससीईआरटी आयोजन के लिए मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएगा।


विवादरहित विषयों पर होगी चर्चा : युवा संसद में सामाजिक न्याय, सामाजिक सुधार, आर्थिक विकास, सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, छात्र अनुशासन, कल्याणकारी योजनाएं, स्वच्छता, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण विकास जैसे विवादरहित विषयों पर चर्चा होगी। किसी राजनीतिक दल या वर्तमान अथवा पूर्व नेता पर टिप्पणी नहीं की जाएगी। कार्यक्रम में शिष्टाचार और अनुशासन का विशेष ध्यान होगा।


डीआईओएस विद्यालयों को निर्देश देने के साथ आयोजन का पर्यवेक्षण करेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने निर्देश दिए हैं कि युवा संसद विद्यालय या छात्रों की सुविधा वाले स्थल पर हो। आयोजन एक घंटे से अधिक का नहीं होगा। छात्रों को वास्तविक संसदीय कार्यप्रणाली का अनुभव कराने पर विशेष जोर रहेगा। कार्यक्रम में सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक या एमएलसी को मुख्य अतिथि बनाया जा सकता है। वे विद्यार्थियों को संसदीय कार्यप्रणाली की जानकारी देंगे। 

Sunday, September 20, 2026

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के द्वारा भेजे जा रहे पैनल में अंकित चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराये जाने के सम्बन्ध में शिक्षा निदेशक माध्यमिक का आदेश

शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश देते हुए 21 सितंबर तक मांगी रिपोर्ट

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा भेजे जा रहे पैनल में अंकित चयनित अभ्यर्थियों को अब संबंधित संस्थाओं में कार्यभार ग्रहण कराया जाएगा। शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

आदेश के अनुसार आयोग से प्राप्त पैनल के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों के प्रकरणों का नियमानुसार परीक्षण कर उन्हें कार्यभार ग्रहण कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। चयन के बाद संस्था आवंटन और कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया शिक्षा निदेशालय के स्तर से पूरी की जाएगी।

इस आदेश से आयोग की ओर से चयनित होकर पैनल में शामिल अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया का अगला चरण स्पष्ट हो गया है। संबंधित अभ्यर्थियों को पैनल और विभागीय निर्देशों के अनुसार निर्धारित संस्था में कार्यभार ग्रहण करना होगा।


उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के द्वारा भेजे जा रहे पैनल में अंकित चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराये जाने के सम्बन्ध में शिक्षा निदेशक माध्यमिक का आदेश 


प्रदेश में 14429 स्मार्ट स्कूल के लिए 300 करोड़ रुपये जारी

प्रदेश में 14429 स्मार्ट स्कूल के लिए 300 करोड़ रुपये जारी 

लखनऊ। प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी के बाद 14429 परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। शुक्रवार को शासनादेश जारी होने के बाद कार्य जल्द शुरू होंगे। प्रत्येक विद्यालय को 2.07 लाख रुपये मिलेंगे।

 बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी के आदेशानुसार, श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड कार्यदायी संस्था है। स्मार्ट क्लास में 65 इंच का इंटरेक्टिव फ्लैट पैनल, पावर बैकअप और ऑडियो-विजुअल सामग्री होगी। कक्षा एक से पांच तक का पूरा डिजिटल कंटेंट भी इसमें शामिल है। 

लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (ई-दीक्षा व ई-विद्या), इंटरेक्टिव वीडियो और सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध रहेंगे। शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल भी इन स्कूलों में रहेगा। इन स्मार्ट क्लास के संचालन व समस्या समाधान के लिए राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट भी स्थापित की जाएगी। 



14429 प्राथमिक स्कूल बनेंगे स्मार्ट, परिषदीय विद्यालयों में ऑडियो-विजुअल माध्यम से हो सकेगी पढ़ाई, बेसिक शिक्षा विभाग 300 करोड़ के प्रस्ताव को कैबिनेट की हरी झंडी


लखनऊ। प्रदेश के 14429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग इस परियोजना पर 300 करोड़ रुपये खर्च करेगा। हर स्कूल में 2.07 लाख रुपये से डिजिटल संसाधन लगाए जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी।


प्रस्ताव के अनुसार परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल में तब्दील कर बच्चों को रोचक ढंग से पढ़ाई कराई जाएगी। स्कूलों में स्कूलों में स्मार्ट क्लास स्थापित होने से ऑडियो-विजुअल से छात्र बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सकेंगे। वह कठिन से कठिन पाठ को आसानी से समझ सकेंगे। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। 

संस्था विद्यालयों में 65 इंच की इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, ओपीएस स्लॉट, पॉवर बैकअप सिस्टम, ऑडियो-विजुअल सहायक सामग्री, कक्षा एक से पांच तक के पूरे पाठ्यक्रम का डिजिटल कंटेंट, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम जिसमें ई-दीक्षा व ई-विद्या भी मौजूद रहेंगी, की सुविधा विकसित करेगी। स्मार्ट क्लास का क्रय व क्रियान्वयन एकीकृत मॉडल के रूप में किया जाएगा। इसमें हार्डवेयर, साफ्टवेयर और पाठ्यक्रम आधारित डिजिटल कंटेंट उपलब्ध रहेगा।


बनाई गई समिति : बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा, संयुक्त शिक्षा निदेशक बेसिक (कैंप कार्यालय) व बेसिक शिक्षा के वित्त नियंत्रक की एक समिति गठित की गई है। जो परियोजना के निविदा, चयन, संचालन आदि का काम देखेगी। स्मार्ट क्लास को बेहतर ढंग से स्थापित करने, उसके संचालन और किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट भी स्थापित की जाएगी। नोडल एजेंसी श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड हेल्प डेस्क, डिवाइस मैनेजमेंट सिस्टम और व्यापक अनुरक्षण की व्यवस्था करेगी।


सभी जिला मुख्यालयों पर 28 सितंबर से धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे शिक्षामित्र, जानिए क्यों?

सभी जिला मुख्यालयों पर 28 सितंबर से धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे शिक्षामित्र, जानिए क्यों?


लखनऊः उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ 28 सितंबर से सभी जिला मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने शिक्षामित्रों के प्रति सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। साथ ही यह असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षामित्रों के स्थानांतरण आदेश का अब तक अनुपालन नहीं हुआ है।


विभागीय टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किया गया। अन्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने के बावजूद शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु नहीं बढ़ाई गई है। संघ की मांग है कि टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को नई शिक्षक भर्ती में पूर्व की भर्तियों की तरह 25 अंक का भारांक या वरीयता दी जाए।

स्कूलों में छठी से लेकर 12वीं कक्षा तक की सभी छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, माहवारी स्वास्थ्य नीति बनेगी

स्कूलों में छठी से लेकर 12वीं कक्षा तक की सभी छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, माहवारी स्वास्थ्य नीति बनेगी

विभिन्न विभागों में तालमेल के लिए गठित राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की बैठक 


लखनऊ। राज्य सरकार यूपी के सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली छात्राओं के स्वास्थ्य हितों को देखते हुए माहवारी स्वास्थ्य व स्वच्छता नीति बना रही है। इससे किशोरियों के माहवारी स्वास्थ्य व स्वच्छता से जुड़ी सेवाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा। इनके साथ स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराई जाएगी। किशोरियों के माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल के लिए गठित राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की शनिवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में हुई बैठक में किशोरियों तक स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर मंथन किया गया। सरकारी व एडेड विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन दिए जाएंगे।


भ्रांतियां दूर करने पर जोर

विद्यालयों में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन के साथ किशोरावस्था से जुड़ी शिक्षा और जागरूकता सत्रों को नियमित शैक्षिक गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाएगा। किशोरियों को इसके बारे में जरूरी जानकारी देने और मानसिक रूप से तैयार करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। सुरक्षित और स्वच्छ माहवारी व्यवहार को बढ़ावा देने के साथ इससे जुड़े मिथकों, भ्रांतियों और सामाजिक झिझक को दूर करने पर भी जोर रहेगा।

Saturday, September 19, 2026

SCERT तैयार करेगा दो लाख सवालों का प्रश्न बैंक, हर DIET तैयार करेगी दो हजार सवाल, परख, निपुण आकलन और यूनिट टेस्ट की तैयारी में होगा उपयोग

SCERT तैयार करेगा दो लाख सवालों का प्रश्न बैंक, हर DIET तैयार करेगी दो हजार सवाल, परख, निपुण आकलन और यूनिट टेस्ट की तैयारी में होगा उपयोग

हिंदी, गणित, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान व विज्ञान विषयों के होंगे प्रश्न


लखनऊ। प्रदेश में दक्षता आधारित शिक्षण व्यवस्था और बच्चों के आईक्यू स्तर को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) नई पहल कर रहा है। परिषद की ओर से दो लाख सवालों का प्रश्न बैंक तैयार किया जा रहा है। इसे ऑनलाइन ओपन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि छात्र और शिक्षक जरूरत के अनुसार इसका अध्ययन और रिवीजन कर सकें।


प्रदेश में छात्र-छात्राओं के शैक्षिक स्तर के आकलन के लिए समय-समय पर परख, निपुण आकलन, यूनिट टेस्ट समेत विभिन्न परीक्षाएं और सर्वे आयोजित किए जाते हैं। प्रश्न बैंक का उद्देश्य इन आकलनों के लिए पूर्व अभ्यास उपलब्ध कराना और गुणवत्तापूर्ण आकलन व्यवस्था को मजबूत करना है। इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के सर्वे के पूर्व अभ्यास के साथ डायट की स्थानीय परीक्षाओं में भी किया जा सकेगा।

एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने बताया कि बच्चों और शिक्षकों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्रश्न बैंक तैयार कराया जा रहा है। फिलहाल हिंदी, गणित,अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान विषयों के सवाल तैयार किए जा रहे हैं।


हर डायट तैयार करेगी दो हजार सवाल : प्रदेश की 70 डायट के माध्यम से कुल दो लाख सवाल तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक डायट को दो-दो हजार सवाल तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ, प्रयोग, तार्किक चिंतन और उच्चतर चिंतन कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी। डॉ. सचान ने बताया कि सवालों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए डायट प्रवक्ताओं को सवाल तैयार करने, पियर रिव्यू, विश्लेषण, स्पष्टता और कठिनाई स्तर से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें एआई आधारित सवाल तैयार करने वाले टूल का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रवक्ताओं को प्रक्रिया से परिचित कराने के साथ उनकी शंकाओं का समाधान करना भी है। इससे प्रश्न बैंक को मजबूत बनाने और विद्यालय स्तर तक इसके प्रभावी इस्तेमाल में मदद मिलेगी।


नहीं हुई डीएलएड-2023 बैक परीक्षा भर्ती के लिए कैसे करें आवेदन

नहीं हुई डीएलएड-2023 बैक परीक्षा भर्ती के लिए कैसे करें आवेदन

प्रयागराज। डीएलएड-2023 बैच के अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को पीएनपी (परीक्षा नियामक प्राधिकारी) के बाहर धरना प्रदर्शन किया। छात्रों की मांग है कि तृतीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर की फाइनल बैक परीक्षा जल्द कराई जाए।


परिणाम घोषित न होने से वे प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। हजारों छात्र भर्ती प्रक्रिया से वंचित हो सकते हैं, जबकि उनकी शैक्षणिक प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। संयुक्त प्रतियोगी छात्र हुंकार मंच के पंकज पांडेय ने परीक्षा और परिणाम में देरी को अभ्यर्थियों के लिए नुकसानदेह बताया।

उन्होंने ऐसी व्यवस्था की मांग की जिससे छात्र समय पर परीक्षा पूरी कर आवेदन कर सकें। रजत सिंह ने भी परीक्षा कराने की मांग का समर्थन किया। संयुक्त प्रतियोगी छात्र हुंकार मंच शनिवार को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपेगा। 

प्रदेश में खराब गुणवत्ता वाले विश्वविद्यालयों की लगातार होगी निगरानी, उच्च शिक्षा विभाग शैक्षिक गुणवत्ता को लेकर करेगा सख्ती

प्रदेश में खराब गुणवत्ता वाले विश्वविद्यालयों की लगातार होगी निगरानी, उच्च शिक्षा विभाग शैक्षिक गुणवत्ता को लेकर करेगा सख्ती

लखनऊ। प्रदेश में राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के लिए चल रही कवायद के बाद उच्च शिक्षा विभाग कमजोर व खराब प्रदर्शन विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों की लगातार निगरानी करेगा। शैक्षिक कैलेंडर के अनुपालन में कमी, परीक्षा व परिणाम में देरी, केपीआई में कमी मिलने पर विभाग इनकी हर महीने समीक्षा करेगा। साथ ही इसकी रिपोर्ट शासन को भी देगा।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि नोडल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों का निर्धारित मानक के अनुसार पर्यवेक्षण करेंगे। स्थलीय निरीक्षण में मिलने वाली कमियों को दूर कराने का प्रयास करेंगे। साथ ही इसमें मिलने वाली गंभीर अनियमितता, प्रवेश परीक्षा संबंधी अव्यवस्था, शिक्षण कार्य न होने, पोर्टल पर सही सूचना न देने, प्रशासनिक व शैक्षिक कमी मिलने पर नोडल तत्काल ऐसे मामले उच्च शिक्षा सचिव के संज्ञान में लाएंगे।

सचिव उच्च शिक्षा जोनल अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर हर महीने विभागीय समीक्षा करेंगे। समीक्षा में शैक्षिक कैलेंडर के अनुपालन, परीक्षा व परिणाम में देरी, अच्छे व कमजोर प्रदर्शन वाले संस्थान, पिछले महीने की रिपोर्ट, गुणवत्तापरक सुधार की स्थिति का पर्यवेक्षण करके इसका प्रतिवेदन उच्च शिक्षा मंत्री के सामने प्रस्तुत करेंगे।

उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव राम जन्म चौहान ने कहा है कि नोडल अधिकारी अपने कार्य निर्वहन में निदेशक उच्च शिक्षा, कुलसचिव, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी व मंडलायुक्त डीएम से संपर्क कर समन्वय भी स्थापित करेंगे। वहीं ऐसे उच्च शिक्षण संस्थान, विश्वविद्यालयों पर विशेष ध्यान देंगे, जिनमें दो या अधिक समीक्षा अवधि में अपेक्षित सुधार नहीं होता है। उनका केपीआई प्रदर्शन लगातार कमजोर रहता है। इस पर नोडल अधिकारी विशेष ध्यान देंगे।



शैक्षिक गुणवत्ता के आधार पर विश्वविद्यालयों की होगी रेटिंग, एकेडमिक कैलेंडर, शोध नैक, प्लेसमेंट समेत छह क्षेत्रों की होगी निगरानी

नोडल अधिकारी करेंगे डाटा व अभिलेखों का भौतिक सत्यापन

लखनऊ। उच्च शिक्षा विभाग अब विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी के साथ उनकी रेटिंग भी करेगा। यूपी प्रमाण पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों और स्थलीय निरीक्षण के आधार पर संस्थानों को लाल, पीला व हरा (रेड, अंबर व ग्रीन) श्रेणी में रखा जाएगा। हालांकि, फिलहाल इसका डिजिटल स्तर पर प्रयोग नहीं किया जाएगा।

उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव राम जन्म चौहान ने बताया है कि विभाग ने इसके लिए नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। वे समय-समय पर संस्थानों का स्थलीय भ्रमण कर उपलब्ध कराए गए डेटा और अभिलेखों का भौतिक सत्यापन करेंगे। प्रदर्शन के आधार पर रेटिंग तय होगी। ग्रीन श्रेणी में बेहतर व्यवस्था वाले संस्थान, अंबर में अपेक्षित योजना के अनुरूप काम न करने वाले और रेड में गंभीर कमियों वाले संस्थान रखे जाएंगे। लगातार निम्न प्रदर्शन करने वाले संस्थानों की समस्याओं का परीक्षण कर सुधार कराया जाएगा और अगली समीक्षा में अनुपालन भी देखा जाएगा। इसके लिए सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और उच्च शिक्षा निदेशक को निर्देश दिए गए हैं।

इतना ही नहीं की परफॉर्मेंस इंडिकेटर (केपीआई) आधारित पर्यवेक्षण के लिए विभाग ने छह प्रमुख क्षेत्र तय किए हैं। इनमें स्टूडेंट आउटकम एंड एकेडमिक डिलेवरी, डिजिटल आइडेंटिटी, एबीसी व क्रेडेंशियल, रिसर्च इनोवेशन एंड इंडस्ट्री लिंकेज, क्वालिटी एंड एक्रीडिटेशन, गवर्नेस-कम्प्लायंस एंड सर्विस डिलीवरी तथा फाइनेंस, पीपुल एंड ऑपरेशन शामिल हैं।

इन क्षेत्रों की भी देखी जाएगी गुणवत्ता

इनके तहत छात्र उपस्थिति, शैक्षणिक सहभागिता, एकेडमिक कैलेंडर, टाइम टेबल व शिक्षण कार्य, नैक, आईक्यूएसी, एनआईआरएफ, शोध प्रकाशन व परियोजनाएं, ई-कंटेंट, एलएमएस, डिजिटल शिक्षण, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम, एमओयू, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट, छात्र सहायता और छात्रवृत्ति की प्रगति भी जांची जाएगी।



अब यूपी प्रमाण पोर्टल से होगी शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी, तीन विशेष सचिव व एक संयुक्त सचिव को बनाया नोडल अधिकारी

लखनऊ। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी के लिए नई व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में प्रवेश, पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम की नियमित निगरानी की जाएगी। विभाग ने परफॉरमेंस, रैंकिंग, इवैलुएशन एंड मॉनिटरिंग ऑफ यूपी हायर एजुकेशन एकेडमिक नेटवर्क (यूपी प्रमाण) पोर्टल लॉन्च किया है।

प्रदेश को चार भागों में बांटकर तीन विशेष सचिव और एक संयुक्त सचिव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। विभाग हर साल शैक्षिक कैलेंडर जारी करता है, पर राज्य विश्वविद्यालय इसका अनुपालन नहीं करते। शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के लिए नियमित मॉनिटरिंग का निर्णय लिया गया है। विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली के पर्यवेक्षण के लिए केपीआई आधारित डैशबोर्ड समीक्षा व्यवस्था लागू हुई है। इससे प्रवेश प्रक्रिया, शिक्षण, शैक्षणिक कैलेंडर, परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम का पर्यवेक्षण होगा। छात्र व शिक्षक उपस्थिति और गुणवत्ता सुधार भी इसमें शामिल हैं। सभी राज्य, राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित महाविद्यालय इसके दायरे में आएंगे।



हर महीने विभाग को देंगे अपनी रिपोर्ट

उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव राम जन्म चौहान ने कुलसचिवों को पत्र भेजा है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को यूपी प्रमाण पोर्टल पर सक्रिय रहने को कहा। निर्धारित सूचना समय से अपलोड करने और सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। नोडल अधिकारी अपने जोन की मासिक रिपोर्ट तैयार करेंगे। यह रिपोर्ट सचिव उच्च शिक्षा को सौंपी जाएगी। सचिव उच्च शिक्षा इस रिपोर्ट को उच्च शिक्षा मंत्री के सामने प्रस्तुत करेंगे। रिपोर्ट में पोर्टल के बिंदुओं और 26 केपीआई के आधार पर आकलन होगा। नोडल अधिकारी अपने जोन के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण भी करेंगे। वे आवश्यक सुधार सुनिश्चित कराने का काम भी देखेंगे।


इन अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारी

निधि श्रीवास्तव, विशेष सचिव : लखनऊ, अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर और बस्ती मंडल।

बीएन सिंह, विशेष सचिव : अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ और सहारनपुर मंडल।

सर्वेश कुमार सिंह, विशेष सचिव : वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज और चित्रकूट मंडल।

शकील अहमद सिद्दीकी, संयुक्त सचिव : कानपुर, झांसी, आगरा और आजमगढ़ मंडल।


Friday, September 18, 2026

प्रदेश के 14 जिलों में खुलेंगे नए नर्सिंग कॉलेज, बीएससी नर्सिंग में 840 सरकारी सीटें बढ़ जाएंगी

प्रदेश के  14 जिलों में खुलेंगे नए नर्सिंग कॉलेज, बीएससी नर्सिंग में 840 सरकारी सीटें बढ़ जाएंगी


लखनऊ। प्रदेश में 14 नए राजकीय नर्सिंग कॉलेज खुलेंगे। इन्हें स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में संचालित किया जाएगा। हर कॉलेज में बीएससी नर्सिंग की 60-60 सीटें होंगी। इससे प्रदेश में बीएससी नर्सिंग की करीब 840 सीटें बढ़ेंगी।


प्रदेश सरकार ने हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर हर जिले में एक नर्सिंग कॉलेज खोलने की रणनीति बनाई है। प्रदेश में अभी 23 कॉलेजों में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई हो रही है। इनमें करीब 1400 सीटें हैं। 235 निजी नर्सिंग कॉलेजों में करीब 11 हजार सीटें हैं। प्रदेश सरकार की ओर से अगस्त माह में नर्सिंग कॉलेज बढ़ाने की योजना तैयार की गई। शासन ने 14 जिलों में राजकीय नर्सिंग कॉलेज खोलने की मंजूरी दे दी है।

हर कॉलेज में बीएससी नर्सिंग की 60-60 सीटें होंगी। इनका संचालन शैक्षिक वर्ष 2027 28 से शुरू होगा। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जल्द ही अन्य स्वशासी महाविद्यालयों में भी नर्सिंग कॉलेजों खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।


स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में होगा संचालन 

नए खुलने वाले नर्सिंग कॉलेजों के संचालन की जिम्मेदारी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के प्रधानाचार्यों को सौंपी गई है। सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे पाठ्यक्रम संचालन के लिए नियामक संस्थाओं के आदेश एवं निर्देश और मानकों का अध्ययन कर लें। उनका हर हाल में पालन किया जाए।

इन जिलों में खुलेंगे : मिर्जापुर, हरदोई, प्रतापगढ़, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, अमेठी, सुल्तानपुर, एटा, गाजीपुर, सोनभद्र, कौशांबी, ललितपुर, लखीमपुर खीरी और बिजनौर के चिकित्सा महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को नर्सिंग कॉलेज खोलने की मंजूरी दी गई है। 

Thursday, September 17, 2026

यूपी में डीएलएड की 58 फीसदी सीटें फिर रह गईं खाली, 100918 अभ्यर्थियों को सीट आवंटित, प्रवेश लेने वालों की संख्या और कम होगी

यूपी में डीएलएड की 58 फीसदी सीटें फिर रह गईं खाली,  100918 अभ्यर्थियों को सीट आवंटित,  प्रवेश लेने वालों की संख्या और कम होगी

17 सितंबर 2026
प्रयागराज। डीएलएड प्रवेश के लिए कॉलेज आवंटन में ही 58 फीसदी सीटें खाली रह गईं। प्रवेश की अंतिम तिथि 25 सितंबर तक दाखिले के आंकड़े और कम होने की उम्मीद है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने प्रदेश के 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की 10600 व 3,304 निजी एवं अल्पसंख्यक कॉलेजों की 2,28,900 कुल 2,39,500 सीटों पर प्रवेश के लिए आवेदन मांगे थे। ऑनलाइन आवेदन मात्र 152202 अभ्यर्थियों ने किया था।

बुधवार को जारी दूसरे चरण के अंतिम संस्था आवंटन में 33299 अभ्यर्थियों में से 33188 का आवंटन हुआ है। सभी चरणों में कुल 100918 (93339 निजी कॉलेज व 7579 डायट) सीटें ही भरी जा सकी हैं। पिछले साल भी महज 95817 (10309 अल्पसंख्यक) सीटें ही भरी जा सकी थीं। यह स्थिति तब है जबकि पिछले साल से दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों के लिए प्रवेश के रास्ते खोल दिए गए हैं। साफ है कि बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान आदि के बेरोजगारों ने भी डीएलएड प्रवेश में रुचि नहीं दिखाई है।



यूपी डीएलएड : खोजे नहीं मिल रहे छात्र, 25 से ज्यादा कॉलेज मान्यता छोड़ने को तैयार, कई प्राइवेट कॉलेज ऐसे जहां शून्य प्रवेश, एक लाख से अधिक सीटें खाली रहने का अनुमान

12 सितम्बर 2026
प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य डीएलएड कोर्स के प्रति छात्र-छात्राओं की रुचि साल दर साल कम होती जा रही है। इस बार कई कॉलेजों को अभी तक एक भी विद्यार्थी नहीं मिला है। ऐसे में गौतमबुद्धनगर, आगरा, उन्नाव, कानपुर समेत अन्य जिलों के 25 से ज्यादा प्राइवेट कॉलेजों ने मान्यता खत्म करने के लिए आवेदन कर दिया है।


इस वर्ष प्रदेश में एक लाख से ज्यादा सीटों के खाली रहने का अनुमान है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में डीएलएड की कुल 2,39,500 सीटें हैं जिनमें महज 1,70,332 अभ्यर्थियों ने प्रवेश के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें भी 18130 अभ्यर्थियों ने फीस नहीं जमा की है। इससे अब 1,52,202 अभ्यर्थी ही बचे हैं। इस स्थिति में करीब एक लाख सीटों पर दाखिला नहीं हो पाएगा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि छात्रों को डीएलएड कोर्स नहीं भा रहा है।

दरअसल, पहले बीटीसी करने के बाद प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनना आसान होता था। मौजूदा समय में प्रदेश भर में लाखों की संख्या में छात्र डीएलएड करने के बाद नौकरी की राह देख रहे हैं।


पिछले वर्ष भी खाली रह गई थीं 1.43 लाख सीटें

वर्ष 2025 में भी यही स्थिति रही। 2,39,500 सीटों के सापेक्ष 1,38, 860 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किए थे। इनमें 1.25 लाख अभ्यर्थियों ने फीस जमा की। लेकिन, 95,769 अभ्यर्थियों ने ही कॉलेज में प्रवेश लिया। ये सभी प्रवेश प्रदेश के कुल 3103 प्राइवेट, 66 डायट व राजकीय कॉलेज तथा 253 अल्पसंख्यक कॉलेजों में हुए थे

पहले की अपेक्षा डीएलएड में कम छात्र प्रवेश ले रहे हैं। यही कारण है कि करीब 25 डीएलएड कॉलेज संचालकों ने आवेदन कर कॉलेज से इस कोर्स की मान्यता खत्म करने की बात कही है। - राजेंद्र प्रताप सचिव, उप्र परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज

एडेड माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा में 19 सितंबर तक दूर होंगी डाटा की दिक्कतें

एडेड माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा में 19 सितंबर तक दूर होंगी डाटा की दिक्कतें

लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाने के लिए पोर्टल पर डाटा संबंधी कमियां 19 सितंबर तक दूर की जाएंगी। शिक्षकों की शिकायतों के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश दिए हैं।

स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के पोर्टल पर 4,658 एडेड माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का विवरण उपलब्ध कराया गया है। इसके बावजूद कई जिलों में विद्यालयों और शिक्षकों के नाम पोर्टल पर नहीं दिख रहे हैं। इससे शिक्षक कैशलेस इलाज की सुविधा से वंचित हैं।

विभाग अब 4,658 विद्यालयों की सूची का जिलों से मिलान कराएगा। इसमें पोर्टल पर नहीं दिख रहे विद्यालयों के साथ उन विद्यालयों का डाटा भी दुरुस्त किया जाएगा, जिनके यू-डायस कोड, विद्यालय व प्रधानाचार्य के नाम, मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी में त्रुटियां हैं। कुछ विद्यालयों के नाम सूची में हैं, लेकिन उनकी यूजर आईडी उपलब्ध नहीं है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने डीआईओएस को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी विद्यालयों की संशोधित जानकारी निदेशालय को भेजी जाए। 

डीएलएड प्रशिक्षित महिलाएं उत्तराखंड में शादी के बाद बन सकेंगी शिक्षक, शिक्षा विभाग ने दी राहत, लेकिन ऐसे अभ्यर्थी को उत्तराखंड में लागू आरक्षण नहीं मिलेगा

डीएलएड प्रशिक्षित महिलाएं उत्तराखंड में शादी के बाद बन सकेंगी शिक्षक, शिक्षा विभाग ने दी राहत, लेकिन ऐसे अभ्यर्थी को उत्तराखंड में लागू आरक्षण नहीं मिलेगा

उत्तराखंड में विवाह के बाद निवास प्रमाण पत्र को लेकर चल रहा था विवाद

देहरादूनः उत्तराखंड में बेसिक शिक्षक बनने की तैयारी कर रही अन्य राज्यों से दो वर्षीय डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) करने वाली विवाहित महिला अभ्यर्थियों को शिक्षा विभाग ने राहत दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश अथवा किसी अन्य राज्य के मान्यता प्राप्त संस्थान से डीएलएड करने वाली महिला, जिसका विवाह उत्तराखंड में हुआ है, प्रदेश में बेसिक शिक्षक पद के लिए पात्र मानी जाएगी। हालांकि, ऐसी अभ्यर्थियों को उत्तराखंड में लागू आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।


 शिक्षा विभाग के अनुसार, मूल राज्य में आरक्षित वर्ग की होने के बावजूद उत्तराखंड में विवाह के बाद नौकरी के लिए आवेदन करने वाली इन महिलाओं को सामान्य श्रेणी का अभ्यर्थी माना जाएगा। इसके लिए डीएलएड प्रमाण पत्र संबंधित राज्य के मान्यता प्राप्त संस्थान का होना आवश्यक है। 

यह मामला वर्ष 2024 में बेसिक शिक्षकों के 2906 पदों पर निकली भर्ती के बाद सामने आया था। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात बाहरी राज्यों से डीएलएड करने वाली और उत्तराखंड में विवाह करने वाली करीब 95 महिला समेत 152 अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच शुरू कर दी गई थी। जिनमें कुछ ऐसे मामले भी थे कि विवाहिता ने बेसिक शिक्षक बनने के लिए पूर्व से मिल रहे आरक्षण का दावा किया था। जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Wednesday, September 16, 2026

माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन सरकारी गजट में हुआ प्रकाशित

माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन सरकारी गजट में हुआ प्रकाशित 

15 सितंबर 2026




माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन, प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50% के साथ बीएड किया गया शामिल

लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रधानाचार्य (इंटर स्तर) व प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर) की अर्हता में संशोधन किया गया है। इसमें जहां पीजी स्तर पर राहत देते हुए 50 फीसदी अंक तय किए गए हैं। वहीं बीएड को शामिल किया गया है। जबकि अनुभव का नियम पूर्व की भांति रहेगा।


विशेष सचिव संदीप परमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार उप्र माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 के अध्याय 2 के विनियम-1 के परिशिष्ट क में संस्था प्रधान की अर्हता में संशोधन किया गया है। इसके तहत प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50 फीसदी अंक होने चाहिए। एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में बीएड होना चाहिए। साथ ही पूर्व की भांति राज्य सरकार की उच्चतर कक्षाओं (नौ से 12 में) प्रवक्ता व सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार साल का शिक्षण अनुभव, हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कम से कम चार साल का अनुभव, 30 साल से कम आयु आयु नहीं होना चाहिए।

इसी क्रम में प्रधानाध्यापक के लिए पीजी 50 फीसदी अंकों के साथ, एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में बीएड व बीपीएड होना होगा। साथ ही केंद्र-राज्य सरकार की मान्यता प्राप्त संस्थाओं में कक्षा नौ से 12 में प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार साल का शिक्षक अनुभव, जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कम से कम चार साल का अनुभव, 30 वर्ष से कम आयु नहीं होनी चाहिए। बता दें, अब तक दोनों पद के लिए लगभग एक जैसी अर्हता थी।