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Friday, November 28, 2025

MDM में 11 करोड़ के घोटाले में 45 पर केस दर्ज, स्कूल व मदरसों संग मिलकर DC ने डकारा बजट, स्कूल व मदरसा के आठ प्रधानाध्यापक व चार ग्राम प्रधानों पर भी कार्रवाई

बलरामपुर : 11 करोड़ के एमडीएम घोटाले में डीसी समेत पांच गिरफ्तार

डीसी बर्खास्त, पकड़े गए लोगों में प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक और दो प्रधान शामिल

बलरामपुर। 11 करोड़ के एमडीएम घोटाले में पुलिस ने जिला समन्वयक (डीसी) फिरोज अहमद खान समेत पांच लोगों को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया। घोटाले की पुष्टि होने पर डीसी को सेवा से भी बर्खास्त कर दिया गया है। इस मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला की तहरीर पर 44 के खिलाफ बुधवार को नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई थी।

घोटाले के मास्टर माइंड जिला समन्वयक फिरोज अहमद के साथ प्रधानाध्यापक अशोक कुमार गुप्ता, सहायक अध्यापक मलिक मुन्नवर के अलावा दो ग्राम प्रधान नसीम अहमद और अहमदुल कादरी को भी गिरफ्तार किया गया है। 

प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक को निलंबित कर दिया गया है। एसपी विकास कुमार ने बताया कि मामले में कई लोगों की भूमिका संदिग्ध है। धन निकासी, बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों की गहन पड़ताल जारी है। आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। 

राशि का विद्यालयवार आवंटन नहीं

पुलिस की पूछताछ में फिरोज ने बताया कि आईवीआरएस पोर्टल से प्राप्त छात्र संख्या के आधार पर बनाई गई एक्सेल शीट में हेराफेरी की जाती थी। जिलाधिकारी द्वारा अनुमोदित कुल राशि को बिना बदले, विद्यालयवार आवंटन में भी गोलमाल किया जाता था।



MDM में 11 करोड़ के घोटाले में 45 पर केस दर्ज, स्कूल व मदरसों संग मिलकर DC ने डकारा बजट, स्कूल व मदरसा के आठ प्रधानाध्यापक व चार ग्राम प्रधानों पर भी कार्रवाई

45 लोग नामजद, जिसमें डीसी भी, बलरामपुर में छह वर्ष से हो रही थी धांधली


बलरामपुर : मध्यान्ह भोजन योजना में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के एमडीएम सेल से पांच-छह वर्षों के भीतर कनवर्जन कास्ट में कूटरचित दस्तावेजों के सहारे 11 करोड़ रुपये से अधिक का गबन कर लिया गया। इसमें 17 वर्षों से एमडीएम सेल के जिला समन्वयक पद पर जमे फिरोज अहमद खान, तीन मदरसों और पांच परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व चार ग्राम प्रधानों की संलिप्तता उजागर हुई है। 


गबन की पुष्टि होने पर बीएसए शुभम शुक्ला की तहरीर पर 45 नामजद व अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। नौनिहालों के निवाले पर डाका डालने के खेल में अभी कई और चेहरे सामने आ सकते हैं। इसमें कई सफेदपोश भी हैं। नामजद डीसी समेत कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।

बीएसए ने नगर कोतवाली में दी गई तहरीर में कहा कि विभिन्न विद्यालयों द्वारा शिकायतें की जा रही थीं कि एमडीएम सेल के डीसी फिरोज अहमद खान द्वारा पर्याप्त कन्वर्जन कास्ट का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायत पर वित्त एवं लेखाधिकारी के साथ एमडीएम कन्वर्जन कास्ट पत्रावली का परीक्षण किया गया। डीसी ने ई-मेल के माध्यम से प्रिंटेड पेमेंट

एडवाइस (पीपीए) उपलब्ध कराए, तो उसमें गड़बड़ी का संदेह हुआ। जांच में पाया गया कि डीसी ने जो अभिलेख उपलब्ध कराए थे, वे कूटरचित थे। वास्तविक रूप से भेजी धनराशि को कम करके दिखाया गया था, फिरोज अहमद वर्ष 2008 से कार्यरत हैं और पांच से छह वर्षों के अंतराल में गबन में सहभागी विद्यालयों में शिक्षारत छात्रों की संख्या के प्रतिकूल बहुत अधिक धनराशि आवंटित कर प्रधान, प्रधानाध्यापक व समिति के अध्यक्ष के साथ मिलकर गबन कर लिया। नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एमडीएम सेल के डीसी फिरोज अहमद खान समेत 44 अन्य लोगों के विरुद्ध केस दर्ज किया गया है।


एमडीएम की शिकायत विभिन्न पत्रावलियों का सत्यापन किया गया। जिसमें लगभग 11 करोड़ रुपये के सरकारी बजट गबन का मामला सामने आने पर डीसी समेत 45 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
- शुभम शुक्ला, बीएसए, बलरामपुर

डीसीम समेत 45 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच हो रही है। दर्जनों लोगों के नाम सामने आ रहे है। आरोपितों को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
- विकास कुमार, एसपी, बलरामपुर

Thursday, January 18, 2024

25 जिलों से NPS घोटाले की रिपोर्ट तलब

प्रयागराज समेत 25 जिलों से NPS घोटाले की रिपोर्ट तलब 


प्रयागराज। सूबे के विभिन्न जिलों में एनपीएस घोटाले के मामले सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट तलब की है। प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों की न्यू पेंशन स्कीम की रकम बगैर उनकी सहमति के ही मनमाने ढंग से निवेश करने का मामला सामने आने के बाद 25 जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों से रिपोर्ट मांगी गई है।


शिक्षा निदेशालय में माध्यमिक शिक्षा विभाग के वित्त नियंत्रक पवन कुमार ने इस संबंध में 12 जनवरी को ही पत्र भेजकर संबंधित जिलों के डीआईओएस से अनियमित रूप से फंड, बीमा कंपनी और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस में निवेशित रकम और प्रभावित शिक्षकों, कर्मचारियों का ब्योरा मांगा है। इसके लिए अलग से प्रारूप भी निर्धारित किया गया है। 


डीआईओएसो से कहा गया है कि निर्धारित प्रारूप में ही सभी जानकारियां भेजें। इसके साथ ही मूल पेंशन फंड मैनेजर में वापस की गई धनराशि की रिपोर्ट भी देने का निर्देश दिया है। इसमें प्रयागराज के साथ ही इटावा, गौतम बुद्ध नगर आदि जिलों के नाम शामिल हैं। 

Friday, December 1, 2023

अटेवा की मांग, न्यू पेंशन स्कीम घोटाले की जांच हो

अटेवा की मांग, न्यू पेंशन स्कीम घोटाले की जांच हो


लखनऊ। अटेवा-पेंशन बचाओ मंच की ओर से न्यू पेंशन स्कीम की जांच कराने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग प्रदेश सरकार से की गई है।


मंच के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि न्यू पेंशन स्कीम के पैसों को मनमाने ढंग से निजी कंपनियों में लगाने की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर सीएम, वित्त मंत्री और मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। इसमें न्यू पेंशन स्कीम में बड़े घोटाले की आंशका अटेवा ने जताई है। साथ ही मांग की है कि न्यू पेंशन स्कीम को समाप्त कर पुरानी पेंशन बहाल करें।


अटेवा के प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी और प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि पुरानी पेंशन शिक्षकों व कर्मचारियों के बुढ़ापे की लाठी है। इसलिए पुरानी पेंशन बहाल करनी चाहिए।

Wednesday, November 29, 2023

NPS घोटाले की होगी समयबद्ध SIT जांच

NPS घोटाले की होगी समयबद्ध SIT जांच



लखनऊ । शिक्षा विभाग में एनपीएस घोटाले की समयबद्ध एसआईटी जांच होगी। विधान परिषद में मंगलवार को नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को आश्वस्त करते हुए यह जानकारी दी कि इस मामले में सरकार गंभीर है। निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने एसआईटी जांच के आदेश कर दिए हैं। 


न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के तहत एडेड माध्यमिक शिक्षकों की धनराशि कटौती का पैसा उनकी जानकारी के बिना निजी कंपनियों में निवेश करने का मुद्दा शिक्षक दल के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने विधान परिषद में उठाया। उन्होंने कहा कि दो दर्जन से ज्यादा जिलों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। शिक्षक समुदाय अपनी गाढ़ी कमाई से हुई कटौती की खुली लूट से बेबस है। शिक्षा विभाग में आजादी के बाद इससे बड़ा घोटाला नहीं हो सकता।

Wednesday, November 22, 2023

शिक्षक-कर्मचारियों का पैसा निजी बीमा कंपनियों में निवेश पर अधिकारी भी शक के घेरे में

NPS घोटाला : बिना अनुमति निजी बैंकों में पैसा जमा करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग


लखनऊ : माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की नई पेंशन योजना (एनपीएस) से संबंधित धनराशि निजी बैंकों में बगैर उनके अनुमति के जमा कर दिया गया। इसके दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने मंगलवार को इस संदर्भ में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी, शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी, महामंत्री नरेंद्र कुमार वर्मा ने ऐसी धनराशि को नियमानुसार ब्याज सहित एनएसडीएल खाते में जमा कराए जाने की मांग की है। संघ के प्रादेशिक उपाध्यक्ष डा. आरपी मिश्र और प्रदेशीय मंत्री डा. आरके त्रिवेदी ने बताया कि निजी बैक में निवेश करने पर पांच प्रतिशत तक कमीशन मिलता है। इसलिए कुछ लोग कमीशन खोरी के चक्कर में अनियमित रूप से निजी संस्थाओं में शिक्षकों और कर्मचारियों की सहमति के बगैर उनकी कटौती की धनराशि निजी बैंक में निवेशित कराते हैं।

शिक्षक नेताओं ने कहा कि शिक्षा निदेशक ने एक अप्रैल 2022 से सात नवंबर 2023 तक की सूचनाओं के आधार पर 25 जिलों के 4257 शिक्षकों और कर्मचारियों के अनियमित निवेश पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था, लेकिन एक अप्रैल 2022 से पूर्व की जांच के लिए आदेश नहीं दिए गए।


शिक्षक-कर्मचारियों का पैसा निजी बीमा कंपनियों में निवेश पर अधिकारी भी शक के घेरे में 

लखनऊ। प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के मामले शासन की ओर से दिए गए जांच के निर्देश पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एनपीएस के पैसे का आहरण-वितरण अधिकारी डीआईओएस होता है और उसके पास इसकी आईडी-पासवर्ड होती है। वहीं शासन ने डीआईओएस समेत चार अधिकारियों को ही इस मामले में जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


 माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से इस मामले की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब विभाग इस मामले में कर्मचारियों, बाबुओं की जांच करा रहा है। जबकि इसमें बड़े अधिकारी भी शक के घेरे में आ रहे हैं। 



NPS का पैसा बिना सहमति के निजी कंपनियों में लगाने को लेकर शिक्षक संगठनों में नाराजगी, मांगी NPS men निवेशित धन की जानकारी 

सभी कॉलेजों की जांच की मांग


लखनऊ। बिना सहमति शिक्षक- कर्मचारियों के एनपीएस का पैसा निजी बीमा कंपनियों में जमा करने से शिक्षक संगठनों में काफी नाराजगी है। राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद पांडेय ने कहा कि अभी यह मामला सिर्फ एडेड कॉलेजों का सामने आया है। शासन राजकीय कॉलेजों की भी जांच कराए।

उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के प्रांतीय संयोजक संजय द्विवेदी ने कहा कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाए। इसमें विभागीय अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आएगी। बिना अधिकारियों की मिलीभगत के नीचे का कर्मचारी पैसे को निजी कंपनियों में निवेश नहीं कर सकता है।

25 जिलों में गड़बड़ी : लखनऊ, बाराबंकी, अंबेडकरनगर, बुलंदशहर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, कुशीनगर, गौतमबुद्ध नगर, इटावा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, बलरामपुर, काशगंज, बिजनौर, झांसी, रामपुर, देवरिया, गाजियाबाद, अलीगढ़, चित्रकूट, फतेहपुर, मेरठ, आगरा, सोनभद्र।


क्या है नियम

एक अप्रैल, 2005 के बाद नियुक्त/कार्यरत शिक्षक- कर्मचारियों के मूल वेतन का 10 फीसदी और सरकार का 14 फीसदी अंश एनएसडीएल के माध्यम से निर्धारित एसबीआई, एलआईसी या यूटीआई में जमा किया जाएगा। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को लिंक व पासवर्ड दिया गया है। संबंधित अंशधारक की सहमति से इसे अन्य निजी बीमा कंपनियों में जमा कर सकते हैं। संबंधित कर्मी अपने परमानेंट रिटायरमेंट एकाउंट नंबर (प्रान) से इसकी जानकारी कर सकेंगे।




निजी बीमा कंपनियों में लगा दी गई 4257 शिक्षकों की ‘पेंशन’

• सबसे ज्यादा प्रकरण कुशीनगर में सात जिलों में दो-दो मामले

• कई जिलों में दोषियों पर मुकदमा दर्ज, अन्य में कार्रवाई तेज


प्रयागराज : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मचारियों की अंशदायी पेंशन योजना (एपीएस) की धनराशि बिना संबंधित से अनुमति लिए निजी बीमा कंपनियों में लगाने का मामला तूल पकड़ गया है। प्रदेश के 25 जिलों के कुल 4257 शिक्षकों शिक्षणेतर कर्मचारियों की पेंशन राशि को निर्धारित तीन बीमा कंपनियों से हटाकर दूसरी निजी बीमा कंपनियों में लगाने के मामले में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव के निर्देश पर एफआइआर दर्ज कराने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। प्रयागराज सहित कुछ जिलों में पहले ही एफआइआर दर्ज कराई जा चुकी है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, मंडलीय उप शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों, वित्त एवं लेखाधिकारी को भेजे पत्र में बताया है कुल 4257 प्रान नंबरों की पेंशन की राशि निजी बीमा कंपनी में लगाए जाने का प्रकरण सामने आया है। कासगंज में 38, बिजनौर में 21, झांसी में 20, रामपुर में चार शिक्षकों/कर्मचारियों की पेंशन की धनराशि निजी बीमा कंपनी में लगाई गई है। देवरिया, गाजियाबाद, गोरखपुर, अलीगढ़ में दो-दो तथा आंबेडकरनगर, चित्रकूट, फतेहपुर, मेरठ, आगरा, बाराबंकी और सोनभद्र में एक-एक प्रकरण प्रकाश में आए हैं।

एक फीसदी कमीशन का लालच

उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशिक उपाध्यक्ष डॉ. आरपी मिश्रा ने कहा कि यह पूरा मामला कमीशनखोरी का है। निजी कंपनियों में एक फीसदी कमीशन मिलता है। सिर्फ लखनऊ की बात करें तो 25 करोड़ का एक फीसदी कमीशन संबंधित को मिला होगा। मामले की एसटीएफ से जांच हो व दोषियों पर कार्रवाई हो। यह भी देखा जाए कि इससे पहले तो गड़बड़ी नहीं हुई है।


NPS मामले में दोषी कर्मचारियों पर FIR कराने का आदेश

लखनऊ : बगैर अनुमति के नई पेंशन स्कीम (एनपीएस) के तहत फंड ट्रांसफर करने का मामला गंभीर हो गया है। माध्यमिक शिक्षा के जिन दो कर्मचारियों को इसका दोषी ठहराते हुए निलंबित किया गया था अब उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने का आदेश निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने दिया है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के दो कर्मचारियों ने बगैर अनुमति लिए 287 शिक्षकों व कर्मचारियों की एनपीएस की धनराशि निजी बैंकों में जमा करा दी थी। इस मामले को पेंशन निदेशालय ने पकड़ा। जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार की रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त शिक्षा निदेशक डा. प्रदीप कुमार ने वरिष्ठ सहायक सर्वेश निगम और कनिष्ठ सहायक आशीष कुमार को शनिवार को निलंबित कर दिया था। साथ ही जांच कमेटी भी गठित की थी। उधर, इस तरह की गड़बड़ी लखनऊ के अलावा प्रदेश के 25 जिलों में भी हुई है।



NPS घोटाला : शिक्षक मांगे हिसाब–निदेशक पेंशन ने शुरू की जांच,  अब तक प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ में हो चुकी है FIR 

16 अन्य जिलों के भी डीआईओएस से मांगी सूचना बिना सहमति के पेंशन की रकम निवेश का मामला


प्रयागराज । अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों-कर्मचारियों के एनपीएस घोटाले की जांच निदेशक पेंशन ने शुरू कर दी है।


एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों-कर्मचारियों के पेंशन की रकम बिना उनकी सहमति के निजी कंपनियों में निवेशित करने का खुलासा होने के बाद शासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस पूरे मामले की जांच पेंशन निदेशालय के निदेशक को दी गई है। इस मामले में प्रयागराज, वाराणसी व लखनऊ में एफआईआर हो चुकी है। इसके अलावा 16 और जिलों इटावा, बलरामपुर, कासगंज, बिजनौर, रामपुर, देवरिया, गाजियाबाद, गोरखपुर, अलीगढ़, अम्बेडकरनगर, चित्रकूट, फतेहपुर, मेरठ, आगरा, बाराबंकी व सोनभद्र में पेंशन की धनराशि में हेराफेरी की शिकायत मिली है। 


अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने सभी 16 जिला विद्यालय निरीक्षकों से निर्धारित प्रोफॉर्मा पर डिफॉल्ट फंड मैनेजर के स्थान पर अन्य फंड मैनेजर में पेंशन की कटौती निवेशित करने की सूचना मांगी है। डीआईओएस से कर्मचारी का पैन नंबर, नाम, फंड मैनेजर परिवर्तन की तारीख, अभिदाता की सहमति या असहमति, फंड मैनेजर परिवर्तन का कारण, डिफॉल्ट फंड मैनेजर परिवर्तन की जानकारी मांगी है।


निजी कंपनी में निवेश करने की हो जांच

प्रयागराज। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के एनपीएस कटौती में घोटाले को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव और मंत्री शिव बहादुर सिंह ने वित्त एवं लेखाधिकारी को पत्र लिखा है। परिषदीय शिक्षकों के एनपीएस कटौती की धनराशि बिना उनकी सहमति के निजी कम्पनी (एचडीएफसी एवं मैक्स) में लगा दी गई है। इसकी जांच होनी चाहिए। इसके अलावा एनपीएस कटौती को समय से निवेशित करने और दूसरे विभागों से आए शिक्षकों का प्रान शिफ्ट करने की मांग की है।

Thursday, November 9, 2023

परिषदीय शिक्षकों की पेंशन में भी घोटाले की आहट, एनपीएस कटौती की रकम निजी कंपनी में लगाई, प्रयागराज के सैकड़ों शिक्षकों के लाखों रुपये ट्रांसफर

परिषदीय शिक्षकों की पेंशन में भी घोटाले की आहट,  एनपीएस कटौती की रकम निजी कंपनी में लगाई, प्रयागराज के सैकड़ों शिक्षकों के लाखों रुपये ट्रांसफर 


प्रयागराज जिले के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के सैकड़ों शिक्षकों-कर्मचारियों की पेंशन की 80 करोड़ से अधिक रकम निजी कंपनी में निवेशित करने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त सैकड़ों शिक्षकों की पेंशन में घोटाले का खुलासा हुआ है।  एनपीएस घोटाले की खबर प्रकाशित होने के बाद परिषदीय शिक्षकों ने अपने खाते खंगाले तो उनके होश उड़ गए।


परिषदीय शिक्षकों ने भी एडेड कॉलेजों की तरह राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) की अपनी रकम एसबीआई, एलआईसी और यूटीआई में निवेशित करने की सहमति दी थी। लेकिन बगैर सहमति सैकड़ों शिक्षकों की धनराशि निजी कंपनियों के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। उदाहरण के तौर पर एक शिक्षक नरेंद्र कुमार सिंह का एनपीएस अप्रैल 2022 से कटना शुरू हुआ। बिना उनकी सहमति के सितंबर 2022 को उनकी धनराशि एचडीएफसी में निवेशित कर दी गई। 


दोबारा बगैर उनके अनुरोध या सहमति के जून 2023 में उनकी धनराशि एचडीएफसी से हटाकर मैक्स लाइफ में कर दी गई। शिक्षकों का कहना है कि वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय से सम्पर्क करने पर बताया जाता है कि उनके स्तर से कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यह परिवर्तन एनएसडीएल (नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड) ने किया है। एनएसडीएल के टोल फ्री नंबर पर बात करने पर बताया गया कि यह परिवर्तन आहरण वितरण अधिकारी (डीडीओ), जो बेसिक के वित्त एवं लेखाधिकारी होते हैं, कार्यालय से हुआ है।