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Wednesday, October 19, 2022

स्कूलों में जमेगा गिल्ली-डंडा का रंग - उड़ेंगे कागज के विमान, खिलौने और खेलों को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने का फैसला

स्कूलों में जमेगा गिल्ली-डंडा का रंग - उड़ेंगे कागज के विमान, खिलौने और खेलों को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने का फैसला



खिलौने और खेलों से बच्चों में बौद्धिक विकास की वैज्ञानिक प्रामाणिकता सिद्ध होने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने अब इसे स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने का फैसला लिया है। इसके तहत न सिर्फ पारंपरिक खेल और खिलौनों से उन्हें जोड़ने की पहल की गई है, बल्कि ऐसे खिलौने और खेलों की मैपिंग भी की गई है जो बच्चों को स्कूली स्तर पर विज्ञान और गणित जैसे विषयों में मदद भी करेंगे। पारंपरिक खेलों में गिल्ली-डंडा, कंचा, लट्टू व कागज के विमान, गुड्डा-गुड़िया और गाड़ी आदि शामिल हैं। लेकिन राज्यों के हिसाब यह अलग-अलग हैं। इन पारंपरिक खेलों से बच्चों में एकाग्रता, संख्या ज्ञान, कौशल आदि का विकास हो सकता है।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार देश में अब बच्चों को स्कूली स्तर पर खिलौना और खेल आधारित शिक्षा दी जाएगी। इसमें आइआइटी गांधीनगर की मदद ली गई है। यह सझाव भी दिया है कि स्कलों के  किस स्तर पर या किसी आयु वर्ग के बच्चे को कौन से खिलौनों और खेलों से जोड़ा जाए। पूरे पाठ्यक्रम में तीन साल से दसवीं तक के बच्चों के लिए खेल और खिलौने का सुझाव है। पीएम श्री स्कूलों से इसकी शुरुआत होगी।


एनसीईआरटी की ओर से तैयार किए गए खिलौना आधारित इस पाठयक्रम को सभी राज्यों को भेज दिया गया है। सभी से अपनी जरूरत और उपलब्धता के हिसाब से खिलौनों को चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। इस पूरी पहल का मकसद स्कूली शिक्षा को रुचिकर बनाने सहित बच्चों का बौद्धिक विकास करना है।


इस बीच मंत्रालय ने राज्यों और स्कूलों को सिर्फ ऐसे खिलौनों को शामिल करने का सुझाव दिया है जो पूरी तरह से देश में बने हैं। साथ ही भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) से प्रमाणित हों। गौरतलब है कि इस पहल को भारतीय खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि देश में भारतीय खिलौनों का एक बड़ा बाजार भी तैयार होगा। मौजूदा समय  खिलौनों के बाजार में चीन का काफी दखल है।



विज्ञान व गणित में बच्चा कमजोर है तो इन खिलौनों से जोड़ें 

स्कूली स्तर यदि किसी का बच्चा गणित और विज्ञान जैसे विषयों में कमजोर है, या फिर उसका रुझान नहीं है, तो इसके लिए आइआइटी गांधीनगर ने कुछ ऐसे खिलौनों की मैपिंग भी की है जिसके जरिये उनमें उन विषयों से जुड़ी रुचि को बढ़ाया जा सकता है। या फिर वह उनकी मदद से उन विषयों में दक्ष हो सकते हैं। इनमें गणित के क्यूब, नंबर स्ट्रिप, फ्लेक्स 2डी, 3 डी, टावर पजल और विज्ञान के लिए अर्जुन का लक्ष्य आदि जैसे इनोवेटिव खिलौने सुझाए हैं। इसी तरह इतिहास के लिए हड़प्पा कालीन खिलौनों से जोड़ने आदि जैसे सुझाव शामिल हैं। इसके साथ ही बच्चों में अंकों की समझ को विकसित करने के लिए भी खिलौने सुझाए गए हैं।

Thursday, September 8, 2022

यूनेस्को को माने तो कोरोना के चलते 82 करोड़ बच्चों की पढ़ाई हुई प्रभावित

यूनेस्को को माने तो कोरोना के चलते 82 करोड़ बच्चों की पढ़ाई हुई प्रभावित


 
न्यूयॉर्क : दुनिया तेजी से प्रगति कर रही है लेकिन अभी भी पूरे विश्व में 77.1 करोड़ लोग निरक्षर हैं। यूनेस्को के अनुसार 77.1 करोड़ लोगों में से अधिकतर महिलाएं हैं जिन्हें न तो लिखने आता है और न ही पढ़ने।


कोरोना महामारी के कारण शिक्षण व्यवस्था को गहरी चोट पहुंची है। महामारी के कारण 2.4 करोड़ बच्चों की शिक्षा बीच में ही छूट गई है। इसमें से 1.1 करोड़ लड़किया हैं। यूनेस्को 1967 से अंतरराष्ट्रीय साक्षता दिवस मना रहा है। हालांकि 55 साल के इस सफर में दुनिया की साक्षरता दर 67 फीसदी से बढ़कर 86 हो गई है।


26.2 करोड़ बच्चों का छूटा स्कूल यूनेस्को सांख्यिकी संस्थान (यूआईएस) के अनुसार कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर में 82.6 करोड़ बच्चों की पढ़ाई मोबाइल और कंप्यूटर न होने के कारण प्रभावित हुई है।