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Tuesday, April 14, 2026

जन्मतिथि की विसंगति मात्र सेवा समाप्ति का आधार नहीं– हाईकोर्ट

जन्मतिथि की विसंगति मात्र सेवा समाप्ति का आधार नहीं– हाईकोर्ट 

मऊ निवासी याची ने आदेश को को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती, शिक्षक का निलंबन रद्द

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में दर्ज जन्मतिथि की भिन्नता को धोखाधड़ी या जानबूझकर की गई गलतबयानी नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने मऊ के सहायक अध्यापक विजय यादव की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि अभ्यर्थी ने गलत जन्मतिथि का सहारा लेकर किसी प्रकार का अनुचित लाभ प्राप्त किया है, तब तक ऐसी विसंगति को सेवा समाप्ति का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने दिया है।


याची की 2014 में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति की गई थी। सेवा के कई साल बाद एक शिकायत पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने जांच शुरू की, जिसमें यह पाया गया कि उनकी आठवीं क्लास के रिकॉर्ड और हाईस्कूल गजट में जन्मतिथि दो जुलाई 1984 दर्ज थी। वहीं, नियुक्ति के लिए प्रस्तुत 'पूर्व मध्यमा' प्रमाणपत्र में यह तिथि सात जुलाई 1987 अंकित थी। इसी विसंगति को तथ्यों को छिपाना और धोखाधड़ी मानते हुए विभाग ने 27 जून 2019 को याची को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश भी दिया था। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

अधिवक्ता ने दलील दी कि याची ने कभी भी हाईस्कूल के उस प्रमाणपत्र का उपयोग नहीं किया, जिसमें 1984 की जन्मतिथि दर्ज थी। स्पष्ट किया कि याची की पूरी शैक्षणिक यात्रा और नियुक्ति पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा और शास्त्री की डिग्री पर आधारित थी, जो पूर्णतः वैध है।


दस्तावेज फर्जी मिलते हैं तो कार्रवाई को स्वतंत्र

कोर्ट ने पाया कि विभाग ने याची के किसी भी प्रमाणपत्र को फर्जी या जाली नहीं पाया गया है। यदि हाईस्कूल वाली जन्मतिथि (1984) को भी सही मान लिया जाए तो भी वह निर्धारित आयु व पात्रता के दायरे में ही है। ऐसी स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि याची ने किसी गलत मंशा से इस जानकारी को छिपाया था। कोर्ट ने याची को तत्काल प्रभाव से बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही विभाग को छूट भी दी है कि यदि भविष्य में याची के प्रस्तुत मूल दस्तावेज कभी फर्जी या जाली पाए जाते हैं तो अधिकारी कानून के अनुसार पुनः कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

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