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Sunday, May 18, 2025
कंपोजिट ग्रांट में हिस्सा मांगना पड़ा भारी, भ्रष्टाचार की शिकायत पर प्रयागराज जिले के खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित
कंपोजिट ग्रांट में हिस्सा मांगना पड़ा भारी, भ्रष्टाचार की शिकायत पर प्रयागराज जिले के खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित
घूस लेने के मामले में तीन अप्रैल को आरोपी से मांगा गया था स्पष्टीकरण
प्रयागराज/मेजा। भ्रष्टाचार के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी उरुवा राजेश यादव को निलंबित कर दिया गया। कार्रवाई अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने की है। इससे पहले प्राथमिक विद्यालय मिश्रपुर के प्रभारी प्रधानाध्यापक प्रदीप पाल ने शिक्षा निदेशक (बेसिक) को शपथ पत्र देकर खंड शिक्षा अधिकारी उरुवा राजेश यादव पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।
यही नहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय कुंवरपट्टी, उच्च प्राथमिक विद्यालय जेरा, प्राथमिक विद्यालय पकरी की ओर से भी खंड शिक्षा अधिकारी पर भ्रष्टाचार के अलावा कई आरोप लगाए गए थे।
अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामता राम पाल ने पदीय दायित्वों के निर्वहन न करने, भ्रष्टाचार करने, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने, अनुशासनहीनता बरतने, शिक्षकों का उत्पीड़न करने आदि आरोपों में खंड शिक्षा अधिकारी राजेश यादव को प्रथम दृष्टया दोषी पाया है। मामले में खंड शिक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। यह भी कहा गया है कि निलंबन की अवधि में कार्यालय मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) प्रयागराज मंडल प्रयागराज से संबद्ध रहेंगे।
दरअसल, शिकायतों के संबंध में शिक्षा निदेशालय ने बीईओ राजेश यादव से तीन अप्रैल को स्पष्टीकरण मांगा था। इस पर बीईओ ने 12 अप्रैल को प्रार्थना पत्र देकर शिकायतों के सापेक्ष साक्ष्य दिखाने का अनुरोध किया। इसके बाद 28 अप्रैल को सभी शिकायतकर्ताओं से सबूत मांगा गया था।
सभी शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्कूल में मरम्मत व साफ-सफाई के लिए मिली 25 से 50 हजार की कम्पोजिट ग्रांट में से राजेश यादव पांच-पांच हजार रुपये ले चुके हैं। इसके बाद भी वेतन और इंक्रीमेंट रुकवाने के साथ निलंबित करवाने की धमकी देकर और रुपयों की मांग करते हैं।
आय-व्यय का ब्योरा मांगा, की 50 हजार की डिमांड
प्रभारी प्रधानाध्यापक प्रदीप कुमार पाल ने पांच मई को सबूत देते हुए बताया कि 17 जनवरी 2025 को सहायक अध्यापक आशीष कुमार संतोषी के सामने पांच हजार रुपये बीईओ को दिए। इसके बाद बीईओ ने मार्च 2025 को उनसे पांच वर्ष का आय-व्यय का ब्यौरा मांगा। इसके बाद एक वर्ष के लिए दस हजार रुपये की दर से कुल 50 हजार रुपये की मांग की।
Friday, November 1, 2024
बिना पक्ष सुने वेतन रोकने के बीएसए के मनमाने आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, जानें पूरा मामला
बिना पक्ष सुने वेतन रोकने के बीएसए के मनमाने आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, जानें पूरा मामला
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रयागराज ने कंपोजिट विद्यालय दारागंज की प्रधानाध्यापिका रुकैया अब्बासी का वेतन रोकने का आदेश वापस ले लिया।
न्यायमूर्ति अजय भनोट ने यह आदेश बीएसए के वकील कूष्मांडेय साही के वेतन रोकने के आदेश को वापस लेने की जानकारी देने के बाद दिया। याची के अधिवक्ता लक्ष्मीकांत त्रिगुणायत का कहना था कि याची का पक्ष सुने बगैर शिकायत पर बीएसए ने जांच कमेटी की संस्तुति पर वेतन रोकने का मनमाना आदेश जारी किया है।
ज्योति कैनवास, गुंजन श्रीवास्तव व मीनू श्रीवास्तव ने आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत कर आरोप लगाया कि रुकैया अब्बासी ने अध्यापिका रहते हुए परास्नातक व पीएचडी की डिग्री हासिल की है। इस पर गठित कमेटी के वेतन रोकने की संस्तुति पर बीएसए ने एक सप्ताह का समय दिया।
Saturday, March 16, 2024
Saturday, January 20, 2024
513 शिक्षकों के करोड़ों रुपए NPS मूल खाते में वापस आए, 25 जिलों के 4257 शिक्षकों और कर्मचारियों के पेंशन के करोड़ों रुपये निजी कंपनियों में ट्रांसफर किए गए थे
513 शिक्षकों के करोड़ों रुपए NPS मूल खाते में वापस आए, 25 जिलों के 4257 शिक्षकों और कर्मचारियों के पेंशन के करोड़ों रुपये निजी कंपनियों में ट्रांसफर किए गए थे
बिना सहमति एनपीएस के करोड़ों निजी कंपनी को ट्रांसफर किए
सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों- बाबुओं का मामला
प्रयागराज । जिले के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के 513 शिक्षकों व कर्मचारियों के न्यू पेंशन स्कीम के करोड़ों रुपये उनके मूल खाते में ट्रांसफर कर दिए गए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के वरिष्ठ सहायक आलोक गुप्ता ने शिक्षकों-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के फंड मैनेजर एसबीआई, यूटीआई और एलआईसी में निवेशित करोड़ों रुपये बिना सहमति के निजी कंपनियों को ट्रांसफर कर दिया था।
जानकारी होने के बाद शिक्षकों ने आंदोलन शुरू कर दिया। बाद में मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक दिब्यकांत शुक्ल ने आरोपी बाबू आलोक गुप्ता को निलंबित कर दिया था और उसके बाद डीआईओएस पीएन सिंह ने सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
तकरीबन ढाई महीने के अंतराल के बाद शिक्षकों-कर्मचारियों के करोड़ों रुपये मूल फंड मैनेजर को भेज दिए गए हैं। गौरतलब है कि प्रयागराज में एनपीएस घोटाले का खुलासा होने के बाद अन्य जिलों में भी इस तरह के मामले सामने आए थे। कुल 25 जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों से रिपोर्ट मांगी गई है। इन 25 जिलों के 4257 शिक्षकों और कर्मचारियों के पेंशन के करोड़ों रुपये निजी कंपनियों में ट्रांसफर किए गए थे।
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