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Thursday, January 7, 2021
Wednesday, July 29, 2020

चित्रकूट मण्डल : चार फीसदी पर अटकी राशन और कन्वर्जन कास्ट की योजना, छह लाख में से 24 हजार बालकों को ही मिल पाया लाभ
चित्रकूट मण्डल : चार फीसदी पर अटकी राशन और कन्वर्जन कास्ट की योजना, छह लाख में से 24 हजार बालकों को ही मिल पाया लाभ।
बांदा : लॉकडाउन के दौरान बंद परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को घर बैठे राशन व पैसा देने की योजना चित्रकूट धाम मंडल में परवान नहीं चढ़ पाई। महज चार फीसदी बच्चों को ही योजना का लाभ मिला है। चारों जनपदों में छह लाख बच्चों में सिर्फ 24 हजार बच्चों को ही पैसा और राशन मिला है। अधिकारी बजट का अभाव बता रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन के दौरान 24 मार्च से 26 जून तक बंद रहे परिषदीय स्कूलों के पहली कक्षा से 8वीं तक के बच्चों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत 76 दिन के मिड-डे मील का राशन और कन्वर्जन कास्ट का पैसा देने के निर्देश दिए थे। चित्रकूट धाम मंडल के चारों जनपदों में 9,684 विद्यालय हैं। इनमें 6,03,880 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल बंद रहने के दौरान मिड-डे मील के राशन और कन्वर्जन कास्ट का लाभ सिर्फ 24,603 बच्चों को मिल पाया है। यह मात्र चार फीसदी है। 5,79,277 बच्चे राशन व पैसा पाने से वंचित हैं। परिषदीय व प्राइमरी स्कूल के प्रत्येक बच्चे को 76 दिन का राशन कुल 7 किलो 600 ग्राम और कन्वर्जन कास्ट प्रति बालक 4.14 रुपये की दर से तथा जूनियर में 11 किलो 400 ग्राम राशन और कन्वर्जन कास्ट प्रति बालक 5.66 रुपये की दर से दी जानी है। राशन कोटे की दुकान से मिलेगा। कन्वर्जन कास्ट का पैसा खाते में भेजा जाएगा।
लॉकडाउन में स्कूलों के बंद रहने की अवधि के मिड-डे मील के लिए शासन ने फिलहाल कुल 40 फीसदी बजट दिया है। यह खर्च किया जा चुका है। शेष बजट के लिए शासन को पत्र भेजकर अनुरोध किया गया है।
गंगा सिंह राजपूत, अपर निदेशक (बेसिक शिक्षा) चित्रकूट धाम मंडल, बांदा
बांदा : लॉकडाउन के दौरान बंद परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को घर बैठे राशन व पैसा देने की योजना चित्रकूट धाम मंडल में परवान नहीं चढ़ पाई। महज चार फीसदी बच्चों को ही योजना का लाभ मिला है। चारों जनपदों में छह लाख बच्चों में सिर्फ 24 हजार बच्चों को ही पैसा और राशन मिला है। अधिकारी बजट का अभाव बता रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन के दौरान 24 मार्च से 26 जून तक बंद रहे परिषदीय स्कूलों के पहली कक्षा से 8वीं तक के बच्चों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत 76 दिन के मिड-डे मील का राशन और कन्वर्जन कास्ट का पैसा देने के निर्देश दिए थे। चित्रकूट धाम मंडल के चारों जनपदों में 9,684 विद्यालय हैं। इनमें 6,03,880 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल बंद रहने के दौरान मिड-डे मील के राशन और कन्वर्जन कास्ट का लाभ सिर्फ 24,603 बच्चों को मिल पाया है। यह मात्र चार फीसदी है। 5,79,277 बच्चे राशन व पैसा पाने से वंचित हैं। परिषदीय व प्राइमरी स्कूल के प्रत्येक बच्चे को 76 दिन का राशन कुल 7 किलो 600 ग्राम और कन्वर्जन कास्ट प्रति बालक 4.14 रुपये की दर से तथा जूनियर में 11 किलो 400 ग्राम राशन और कन्वर्जन कास्ट प्रति बालक 5.66 रुपये की दर से दी जानी है। राशन कोटे की दुकान से मिलेगा। कन्वर्जन कास्ट का पैसा खाते में भेजा जाएगा।
लॉकडाउन में स्कूलों के बंद रहने की अवधि के मिड-डे मील के लिए शासन ने फिलहाल कुल 40 फीसदी बजट दिया है। यह खर्च किया जा चुका है। शेष बजट के लिए शासन को पत्र भेजकर अनुरोध किया गया है।
गंगा सिंह राजपूत, अपर निदेशक (बेसिक शिक्षा) चित्रकूट धाम मंडल, बांदा
Tuesday, July 28, 2020

बांदा : 1868 स्कूलों का नहीं हो पाया कायाकल्प, समन्वयक ने उजागर किए कायाकल्प के अधूरे कार्य
बांदा : 1868 स्कूलों का नहीं हो पाया कायाकल्प, समन्वयक ने उजागर किए कायाकल्प के अधूरे कार्य।
बांदा :: नए शिक्षा सत्र में जिले के 1868 विद्यालयों के बच्चों को बुनियादी सुविधाओं से जूझना पड़ेगा। कहीं पीने का नहीं तो कहीं शौचालय नदारद हैं। तमाम स्कूलों में रसोईघर और बिजली कनेक्शन का अभाव है। विभागीय जिला समन्वयक द्वारा उप निदेशक (बेसिक) को भेजी गई रिपोर्ट में ये खामियां उजागर हुई हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 124 स्कूल सभी सुविधाओं से संतृप्त और लैस हैं। शासन ने मार्च 2019 में परिषदीय स्कूलों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी 'ऑपरेशन कायाकल्प के तहत ग्राम पंचायतों को दी थीं, लेकिन ग्राम पंचायतों ने सभी स्कूलों के बुनियादी सुविधाओं से लैस नहीं किया। स्कूलों की ताजा हालत सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक (निर्माण) द्वारा दो दिन पूर्व बेसिक शिक्षा उप निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट से उजागर हुई है।
समन्वयक की रिपोर्ट में बताया गया है कि जिले के 1992 परिषदीय स्कूलों में मात्र 124 स्कूलों में ही 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत कार्य कराए गए हैं। 1868 स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1992 परिषदीय विद्यालयों में 620 में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। 844 स्कूलों में बालक व बालिकाओं के अलग-अलग शौचालय नहीं हैं। 692 स्कूलों में रसोईघर, 1925 स्कूलों में हैंडवाशिंग यूनिट, 1217 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन और बाउंड्रीवाल नहीं है। 1947 स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय व रैप नहीं बने हैं। 120 विद्यालयों में श्यामपट्ट (ब्लैक बोर्ड) नहीं हैं। 1198 स्कूलों की कक्षाओं में फर्श या टायल्स नहीं हैं।
पहले शौचालय और पंचायत भवन बनेंगे : जिला समन्वयक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि जिला पंचायत राज विभाग का कहना है कि ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवनों के निर्माण को शासन के निर्देशानुसार पहले कराया जा रहा है।
शासन ने ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय स्कूलों में 14 बिंदुओं पर संतृप्त करने का कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपा है। उन्हें ही सभी स्कूलों में यह कार्य कराना है। अधूरे कार्यों के बारे में शासन को पत्राचार किया गया है। -हरिश्चंद्र नाथ, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बांदा।
शासन ने 125 दिनों में प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय और पंचायत घर बनाए जाने के आदेश दिए हैं। इसलिए पहले ये दोनों कार्य कराए जा रहे हैं। इसी के बाद ऑपरेशन कायाकल्प' से स्कूलों में काम होंगे। -संजय यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी बांदा।

बांदा :: नए शिक्षा सत्र में जिले के 1868 विद्यालयों के बच्चों को बुनियादी सुविधाओं से जूझना पड़ेगा। कहीं पीने का नहीं तो कहीं शौचालय नदारद हैं। तमाम स्कूलों में रसोईघर और बिजली कनेक्शन का अभाव है। विभागीय जिला समन्वयक द्वारा उप निदेशक (बेसिक) को भेजी गई रिपोर्ट में ये खामियां उजागर हुई हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 124 स्कूल सभी सुविधाओं से संतृप्त और लैस हैं। शासन ने मार्च 2019 में परिषदीय स्कूलों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी 'ऑपरेशन कायाकल्प के तहत ग्राम पंचायतों को दी थीं, लेकिन ग्राम पंचायतों ने सभी स्कूलों के बुनियादी सुविधाओं से लैस नहीं किया। स्कूलों की ताजा हालत सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक (निर्माण) द्वारा दो दिन पूर्व बेसिक शिक्षा उप निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट से उजागर हुई है।
समन्वयक की रिपोर्ट में बताया गया है कि जिले के 1992 परिषदीय स्कूलों में मात्र 124 स्कूलों में ही 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत कार्य कराए गए हैं। 1868 स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1992 परिषदीय विद्यालयों में 620 में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। 844 स्कूलों में बालक व बालिकाओं के अलग-अलग शौचालय नहीं हैं। 692 स्कूलों में रसोईघर, 1925 स्कूलों में हैंडवाशिंग यूनिट, 1217 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन और बाउंड्रीवाल नहीं है। 1947 स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय व रैप नहीं बने हैं। 120 विद्यालयों में श्यामपट्ट (ब्लैक बोर्ड) नहीं हैं। 1198 स्कूलों की कक्षाओं में फर्श या टायल्स नहीं हैं।
पहले शौचालय और पंचायत भवन बनेंगे : जिला समन्वयक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि जिला पंचायत राज विभाग का कहना है कि ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवनों के निर्माण को शासन के निर्देशानुसार पहले कराया जा रहा है।
शासन ने ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय स्कूलों में 14 बिंदुओं पर संतृप्त करने का कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपा है। उन्हें ही सभी स्कूलों में यह कार्य कराना है। अधूरे कार्यों के बारे में शासन को पत्राचार किया गया है। -हरिश्चंद्र नाथ, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बांदा।
शासन ने 125 दिनों में प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय और पंचायत घर बनाए जाने के आदेश दिए हैं। इसलिए पहले ये दोनों कार्य कराए जा रहे हैं। इसी के बाद ऑपरेशन कायाकल्प' से स्कूलों में काम होंगे। -संजय यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी बांदा।

Sunday, March 29, 2020
Friday, December 13, 2019
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