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Wednesday, April 1, 2026

यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के मूल्यांकन की अवधि बढ़ी, परिणाम में हो सकती है देरी

यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के मूल्यांकन की अवधि बढ़ी, परिणाम में हो सकती है देरी

31 मार्च 2026
प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं हो सकेगा। लगभग 50 लाख से अधिक छात्रों की कॉपियों की जांच एक अप्रैल तक पूरी होना संभव नहीं है। बोर्ड ने मूल्यांकन अवधि को तीन से चार दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे परीक्षा परिणाम घोषित होने में भी देरी की संभावना जताई जा रही है। 

प्रदेश के 254 मूल्यांकन केंद्रों में से अब तक 117 केंद्रों पर मूल्यांकन का कार्य पूरा हो चुका है। करीब 80 प्रतिशत कॉपियों का मूल्यांकन संपन्न हो गया है, जबकि शेष कॉपियों की जांच चार अप्रैल तक पूरी होने की उम्मीद है। मंगलवार को 192 केंद्रों पर 47,804 परीक्षकों ने मूल्यांकन कार्य किया। इस दौरान हाईस्कूल की 5,80,800 और इंटरमीडिएट की 5,98,996 समेत कुल 11,79,796 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की गई।

हाल के दिनों में मूल्यांकन कार्य में तेजी आई है। 30 मार्च को 17,56,851, 29 मार्च को 25,41,361 और 28 मार्च को 33,91,506 कॉपियों का मूल्यांकन किया गया। बुलंदशहर समेत कई जिलों में कॉपियों की जांच पूरी हो चुकी है। ईद और रामनवमी के अवकाश के कारण मूल्यांकन कार्य तीन दिन प्रभावित रहा। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं हो सकेगा, इसलिए इसे तीन से चार दिन आगे बढ़ाया गया है। 






यूपी बोर्ड मूल्यांकन में 2% गलती तो 3 साल के लिए डिबार, परीक्षक के मानदेय में से 85 प्रतिशत की कटौती की जाएगी

यूपी बोर्ड के सचिव ने सभी केंद्रों के उपनियंत्रक को भेजे निर्देश

अंकेक्षण के बावजूद गलती तो नकल अधिनियम में होगी कार्रवाई

15 मार्च 2026
प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू हो रहा है। कॉपियों के मूल्यांकन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए, इसके लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी 250 केंद्रों के उपनियंत्रकों (प्रधानाचार्यों) को सख्त निर्देश दिए हैं। मूल्यांकन के लिए भेजे निर्देश में लिखा है कि मूल्यांकन में दो प्रतिशत तक त्रुटि पाए जाने पर परीक्षक के मानदेय में से 85 प्रतिशत की कटौती की जाएगी तथा संबंधित परीक्षक को तीन वर्ष के लिए डिबार कर दिया जाएगा। एक प्रतिशत तक त्रुटि मिलने पर मानदेय में 50 प्रतिशत की कटौती होगी तथा दशमलव पांच प्रतिशत तक त्रुटि होने पर 25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।

अंकेक्षण (दोबारा जांच) के बाद भी यदि किसी उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन में त्रुटि पाई जाएगी तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अंकेक्षक की होगा। कॉपी जांचने या अंकेक्षण में लापरवाही पर बोर्ड के नियम /विनियम एवं उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के नियमानुसार संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। अंकेक्षक की व्यवस्था का उद्देश्य है कि मूल्यांकन कार्य शुद्ध और त्रुटिविहीन हो तथा त्रुटि/लापरवाही के कारण छात्रों के साथ अन्याय न हो। अंक सावधानी पूर्वक चढ़ाए जाएं क्योंकि कटिंग होने पर कम्प्यूटर अंक स्वीकार नहीं करेगा और परीक्षार्थी का परीक्षाफल अपूर्ण रह जाएगा।

विज्ञान-सोशल की कॉपियों का पैनल मूल्यांकन
हाईस्कूल की सामाजिक विज्ञान एवं विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाओं का पैनल मूल्यांकन होगा। सामाजिक विज्ञान के प्रथम खंड को इतिहास एवं राजनीति शास्त्र के साथ स्नातक प्रशिक्षित तथा द्वितीय खंड अर्थशास्त्र एवं भूगोल के साथ स्नातक प्रशिक्षित योग्यताधारी परीक्षक मूल्यांकन करेंगे। विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रथम खंड को भौतिक विज्ञान के साथ बीएससी प्रशिक्षित स्नातक तथा द्वितीय एवं तृतीय खंड को रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान विषयों के साथ बीएससी प्रशिक्षित परीक्षक मूल्यांकन करेंगे।




किसी भी प्रश्न का न हो गलत मूल्यांकन : भगवती सिंह
यूपी बोर्ड के सचिव ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर जारी किए निर्देश

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 में मूल्यांकन को लेकर सचिव भगवती सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा कि उप नियंत्रक और सभी मूल्यांकन केंद्र ध्यान रखें कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह जाए और किसी भी उत्तर का गलत मूल्यांकन न हो। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पूरी सजगता और जिम्मेदारी के साथ किए जाएं। इसके लिए उप प्रधान परीक्षक और परीक्षक समुचित व्यवस्था कर लें। 

बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रयागराज सहित प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। शिक्षक संगठनों के विरोध के बावजूद मूल्यांकन कार्य 18 मार्च से शुरू करने की तैयारी है। जो एक अप्रैल तक चलेगा। इसके लिए परीक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है।

सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अगर कोई परीक्षक अनुपस्थित रहता है तो उप नियंत्रक स्वयं किसी की नियुक्ति नहीं करेंगे। परिषद की प्रतीक्षा सूची से ही विषयवार और केंद्रवार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।


भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच भाषा विषयों में ही की जाए

हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा में से 20 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर दर्ज कराए गए हैं। जबकि शेष 50 अंकों की परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं पर हुई है। निर्देश दिया गया कि भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच केवल भाषा विषयों में ही की जाए। परिषद ने मूल्यांकन को निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाने के लिए कई जरूरी निर्देश दिए हैं।

निर्देश में यह भी कहा गया है कि अगर परीक्षार्थियों ने गणित, विज्ञान या अन्य किसी विषय में उत्तर बाएं पृष्ठ पर भी लिखे हैं तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। गणित और विज्ञान विषय की उत्तर पुस्तिकाओं में स्टेप मार्किंग लागू की जाएगी।


यूपी बोर्ड मूल्यांकन के संबंध में जारी निर्देश, मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो, बाएं पन्ने पर उत्तर हो तो उसे भी जांचें, गणित-विज्ञान में स्टेप मार्किंग, भाषा में ही जांचें शाब्दिक त्रुटि

प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त होने के बाद 18 मार्च से उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होगा। मूल्यांकन के लिए पूरे प्रदेश में 249 केंद्र बनाए गए हैं। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने मूल्यांकन के संबंध में सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, डीआईओएस व मूल्यांकन केंद्र प्रभारियों को शनिवार को निर्देश भेजे हैं। सचिव ने परीक्षकों को सलाह दी है कि गणित एवं विज्ञान विषय की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में स्टेप मार्किंग की जाए।

गणित, विज्ञान अथवा अन्य किसी भी विषय में यदि परीक्षार्थियों ने बाएं पृष्ठ पर भी उत्तर लिखे हों तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। भाषाई त्रुटि की जांच हिन्दी, अंग्रेजी जैसे भाषा के विषय में ही की जाए। अन्य विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में उदार दृष्टिकोण अपनाएं। हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा के तहत 20 अंकों की वस्तुनिष्ठ परीक्षा ओएमआर शीट पर हुई है। शेष 50 अंकों की परीक्षा लिखित उत्तरपुस्तिकाओं पर कराई गई है। जांची जा रही उत्तरपुस्तिका में निर्धारित पूर्णांक 50 से अधिक प्राप्तांक किसी भी दशा में न हो। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कोई भी प्रश्नोत्तर न तो अमूल्यांकित रहे और न ही किसी प्रश्नोत्तर का गलत मूल्यांकन हो।

मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो

सचिव ने केवल पारिश्रमिक बढ़ाने के उद्देश्य से अत्यधिक कॉपियां जांचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के निर्देश दिए है। लिखा है कि मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो। विद्यालयों के शिक्षकों के लिए प्रति दिन उत्तरपुस्तिकाओं की न्यूनतम संख्या (जैसे हाईस्कूल में 50 और इंटरमीडिएट में 45) अनिवार्य रूप से निर्धारित की जाए। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उप प्रधान परीक्षक प्रतिदिन दस से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्वयं नहीं करेंगे। प्रत्येक केन्द्र पर मूल्यांकन कार्य सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हों एवं वेब कास्टिंग के माध्यम से राज्य एवं जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम पर लाइव फीड सुनिश्चित कराई जाए। उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की गोपनीयता भंग होने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय अधिनियम/विनियम और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की जाएगी।



18 मार्च से शुरू होगा यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन, प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए

प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू होकर एक अप्रैल तक प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।

परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होगा। किसी भी स्तर पर मौखिक, लिखित, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्तर पुस्तिका अथवा मूल्यांकन से संबंधित किसी भी सूचना को साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। गोपनीयता भंग होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मूल्यांकन कार्य की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। वहीं, प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर जिलाधिकारी द्वारा स्टैटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की जाएगी। मूल्यांकन कार्य वॉयस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराया जाएगा। इसकी कनेक्टिविटी जनपद तथा राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से होगी।

मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों और कर्मचारियों को मोबाइल फोन या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मूल्यांकन कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

मूल्यांकन केंद्रों की सुरक्षा के लिए अवांछनीय तत्वों पर नजर रखने हेतु एलआईयू और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी। मूल्यांकन कार्य समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के बंडलों को परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक ट्रक के साथ दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।

परिषद के अनुसार, 17 मार्च को सभी मूल्यांकन केंद्रों पर उप नियंत्रक द्वारा मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 



हाईस्कूल की 700, इंटरमीडिएट की 600 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे यूपी बोर्ड परीक्षक

प्रयागराजः हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं। अब शेष बचे विषयों की पांच दिवसों में परीक्षाएं संपन्न कराए जाने की तैयारी के बीच यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की रूपरेखा तय कर दी है। गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन के लिए पूरे मूल्यांकन अवधि में हाईस्कूल के परीक्षकों को अधिकतम 700 तथा इंटरमीडिएट के परीक्षकों को 600 से अधिक उत्तरपुस्तिकाएं आवंटित नहीं की जाएंगी। कला विषय के परीक्षक पूरी अवधि में अधिकतम 800 उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकेंगे। इस तरह एक परीक्षक एक दिन में हाईस्कूल की 50 तथा इंटरमीडिएट की 45 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे।

18 फरवरी से आरंभ हुईं यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च को संपन्न होंगी। इसके बाद उत्तरपुस्तिकाओं को मूल्यांकन के लिए 249 केंद्रों पर भेजा जाएगा। परीक्षा संपन्न होने के एक सप्ताह में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू कराया जाएगा। इस तरह 19 मार्च से मूल्यांकन शुरू कराया जा सकता है। उत्तरपुस्तिकाओं के जांचने क कार्य 15 दिन चलेगा। इसके लिए पिछले वर्ष की तरह करीब 1.48 लाख परीक्षक नियुक्त किए जाएंगे



1.40 लाख से अधिक शिक्षक करेंगे बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन, यूपी बोर्ड ने तेज की तैयारी

ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत चुने जाएंगे परीक्षक

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की लगातार निगरानी की जाएगी

10वीं की एक कॉपी पर 14 और 12वीं की कॉपी पर 15 रुपये मानदेय

सचिव ने बताया कि मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को हाईस्कूल की एक कॉपी को जांचने के एवज में 14 रुपये और इंटर की कॉपी जांचने पर 15 रुपये मानदेय दिया जाएगा। एक परीक्षक 10वीं की रोजाना 50 और 12वीं की 45 कॉपियां जांच सकेगा।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर बोर्ड ने तैयारी तेज कर दी है। प्रदेश भर के 1.40 लाख से ज्यादा शिक्षक कॉपियों का मूल्यांकन करेंगे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा 12 मार्च को समाप्त होगी।

बताया गया कि संकलन केंद्रों से मूल्यांकन केंद्रों तक उत्तर पुस्तिकाएं ट्रकों से भेजी जाएंगी। ट्रक के साथ ड्यूटी पर लगाए गए कर्मचारियों के लिए अलग से वाहन की व्यवस्था रहेगी। ट्रक में किसी भी कर्मचारी के बैठने की अनुमति नहीं होगी।

उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये परीक्षकों की नियुक्ति होगी। आवश्यकता पड़ने पर मूल्यांकन - केंद्रों के उप नियंत्रक परिषद के पोर्टल पर उपलब्ध प्रतीक्षा सूची से भी परीक्षकों की ऑनलाइन नियुक्ति की जा सकेगी। परीक्षा केंद्रों के स्ट्रॉन्ग रूम की तरह ही कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की भी लगातार निगरानी की जाएगी।

कॉपियों के हर पृष्ठ पर दर्ज हैं गोपनीय न्यूमेरिक नंबरः परिषद ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी किया है। पहली बार सभी विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रत्येक पृष्ठ पर केंद्रवार गोपनीय न्यूमेरिक नंबर दर्ज किए गए हैं। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि मूल्यांकन अवधि में कला वर्ग का एक परीक्षक अधिकतम 800 कॉपियां जांच सकेगा। वहीं, विज्ञान वर्ग के इंटरमीडिएट में 600 और हाईस्कूल में 700 कॉपियां जांचने की सीमा तय की गई है। परीक्षकों के मानदेय में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि वर्ष 2019 और 2023 में पहले ही मानदेय बढ़ाया जा चुका है।



यूपी बोर्ड : 18 मार्च से कॉपियों के मूल्यांकन शुरू होने के आसार, शासन को भेजा प्रस्ताव

मंजूरी मिलने के बाद तिथि घोषित होगी, 249 केंद्रों पर मूल्यांकन शुरु होने की संभावना, 12 मार्च को समाप्त होंगी परीक्षाएं

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद 18 मार्च से प्रदेश के 249 केंद्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होने की संभावना है। इस संबंध में बोर्ड के सचिव ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया की तिथि घोषित की जाएंगी।


प्रदेश के 8033 केंद्रों पर हो रही अधिकांश मुख्य विषयों की परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं। होली के बाद नौ मार्च से परीक्षाएं फिर से शुरू होंगी। उस दिन प्रथम पाली में हाईस्कूल उर्दू तथा द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट के मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र और तर्कशास्त्र विषय की परीक्षाएं होंगी।

बोर्ड का लक्ष्य है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा कर 15 अप्रैल तक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाए। इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में 52 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, हालांकि इनमें से बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है।

पिछले वर्ष के आंकड़ों के अनुसार हाईस्कूल में 27,32,165 और इंटरमीडिएट में 27,05,009 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। वर्ष 2025 में बोर्ड परीक्षा 24 फरवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक मूल्यांकन प्रक्रिया चली थी। इसके बाद 25 अप्रैल को परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था। उस वर्ष हाईस्कूल में 90.11 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 81.15 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए थे।

Thursday, March 26, 2026

रामनवमी पर आज व कल यूपी बोर्ड उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन रहेगा स्थगित

रामनवमी पर आज व कल यूपी बोर्ड उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन रहेगा स्थगित

प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाई स्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रदेश के 254 केंद्रों पर चल रहा है। यह कार्य एक अप्रैल तक पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है। यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने रामनवमी पर्व (सार्वजनिक अवकाश) पर 26 मार्च को मूल्यांकन स्थगित करने के निर्देश 20 मार्च को दिए थे। अब शासन की ओर से 27 मार्च को भी रामनवमी का सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने पर बोर्ड सचिव ने इस दिन भी मूल्यांकन स्थगित करने का निर्णय लिया है। 

इस तरह अब दो दिन मूल्यांकन कार्य स्थगित रहने के बाद 28 मार्च से पुनः शुरू होगा। बुधवार को 80,462 परीक्षकों ने हाईस्कूल की 18.96 लाख तथा इंटरमीडिएट की 14.95 लाख उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया। 




यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियां ईद व रामनवमी के दिन नहीं जांची जाएंगी, स्थगित रहेगा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य

यूपी बोर्ड ने शिक्षकों को राहत देते हुए ईद और रामनवमी के दिन उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्थगित कर दिया है। बोर्ड के सचिव ने शिक्षकों की मांग पर यह फैसला लिया है। जिन मूल्यांकन केंद्रों पर प्रतियोगी परीक्षाएं हैं, वहां परीक्षा के बाद दोपहर एक बजे से मूल्यांकन शुरू होगा।


यूपी बोर्ड सचिव ने कॉपियों के मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों को राहत दी

शिक्षकों की मांग पर यूपी बोर्ड सचिव ने जारी किया आदेश

प्रतियोगी परीक्षा वाले केंद्र पर उस दिन एक बजे से मूल्यांकन


प्रयागराज। हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बीच कुछ प्रतियोगी परीक्षाएं होने के साथ-साथ ईद और रामनवमी पर्व भी है। कुछ मूल्यांकन केंद्रों पर मूल्यांकन के दिन प्रतियोगी परीक्षा प्रस्तावित होने से भी संकट है। इसके अलावा मूल्यांकन कार्य कर रहे कुछ परीक्षक प्रतियोगी परीक्षा में कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी लगने से परेशान हैं।

21 व 26 मार्च को मूल्यांकन स्थगित
इन सभी मामलों में शिक्षकों व शिक्षक संगठनों की मांग पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के सचिव भगवती सिंह ने ईद पर 21 मार्च को तथा रामनवमी पर 26 मार्च को मूल्यांकन स्थगित किए जाने का आदेश जारी कर दिया है।

बोर्ड सचिव ने अन्य समस्याओं का भी समाधान किया
उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य एक अप्रैल तक चलना है। इस बीच पर्वों के दिन मूल्यांकन स्थगित करने की शिक्षक संगठनों की मांग का समाधान करते हुए बोर्ड सचिव ने अन्य समस्याओं का भी समाधान कर दिया है। कहा है कि जिन मूल्यांकन केंद्रों पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की एपीओ परीक्षा प्रस्तावित है, उन केंद्रों पर उस दिन मूल्यांकन कार्य परीक्षा संपन्न होने के बाद दोपहर एक बजे से शुरू कराया जाएगा।

मूल्यांकन अवधि में ही वह दोनों कार्य पूर्ण हो सकेंगे
बोर्ड सचिव ने कहा कि ऐसे में जिन शिक्षकों की ड्यूटी परीक्षा में कक्ष निरीक्षक के रूप में लगी है, वह वहां से ड्यूटी पूर्ण करने के बाद मूल्यांकन केंद्र पर उपस्थित होकर काॅपियां जांचेंगे। इस तरह मूल्यांकन अवधि के समय में ही वह दोनों कार्य पूर्ण कर सकेंगे। उन्होंने सभी परीक्षकों, अंकेक्षकों, उप प्रधान परीक्षकों से शुचितापूर्ण और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं।


Sunday, July 27, 2025

nipun plus app : हफ्ते में पांच बच्चों का निपुण एप से करना होगा मूल्यांकन, हर बच्चे के लिए अलग-अलग रैंडम आधार पर पूछे जाएंगे प्रश्न, विषयवार बनाया गया है प्रश्न बैंक

हफ्ते में पांच बच्चों का निपुण एप से करना होगा मूल्यांकन, हर बच्चे के लिए अलग-अलग रैंडम आधार पर पूछे जाएंगे प्रश्न, विषयवार बनाया गया है प्रश्न बैंक




लखनऊ । परिषदीय स्कूलों के शिक्षक को हर हफ्ते अपनी कक्षा के कम से कम पांच बच्चों का मूल्यांकन निपुण एप से करना  होगा। इससे शिक्षकों, अभिभावकों  और शैक्षिक अधिकारियों को बच्चों ' के पढ़ाई के स्तर की रियल टाइम जानकारी मिल सकेगी। 

परिषदीय स्कूलों में बच्चों के सीखने का स्तर बेहतर करने के लिए समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से निपुण एप को अपग्रेड किया गया है। एप अपग्रेड होने के बाद राज्य परियोजना की ओर से बीएसए को निर्देश मिले हैं। परियोजना से मिले निर्देशों से बीएसए ने बीईओ को अवगत कराया है। साथ ही पालन कराने का आदेश दिया है।


परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को निपुण एप पर 25 सप्ताह की शिक्षण योजना का मूल्यांकन करना होगा। एआरपी, डायट मेंटर और स्टेट रिसोर्स ग्रुप को 10 से 30 स्कूलों में सहयोगात्मक पर्यवेक्षण करना होगा। इन निरीक्षणों के दौरान कक्षा एक और दो के 40 प्रतिशत, कंक्षा तीन से पांच के 30 प्रतिशत और कक्षा छह और आठ के 20 प्रतिशत बच्चों का मूल्यांकन किया जाएगा। निपुण एप' रविवार और छुट्टियों में बंद रहेगा। एक बार में दो विद्यालयों का मूल्यांकन होने के बाद एप स्वतः ही लाक हो जाएगा।


पर्यवेक्षण के बाद शिक्षकों को जरूरी फीडबैक और रेमेडियल प्लान देना भी अनिवार्य किया गया है। एप का डाटा बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारियों की बैठकों में समीक्षा का आधार बनेगा। 


विषयवार बनाया गया है प्रश्न बैंक

निपुण एप पर परिषदीय शिक्षकों को हर हफ्ते पांच बच्चों का मूल्यांकन करना होगा। मूल्यांकन के लिए कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए विषयवार प्रश्न बैंक बनाया गया है, जिसमें बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता आंकने के लिए प्रश्न शामिल हैं। एप में शिक्षक, पर्यवेक्षक और मास्टर ट्रेनर शामिल किए गए हैं। इसमें हर बच्चे के लिए अलग-अलग रैंडम आधार पर प्रश्न पूछे जाएंगे और उसके प्रदर्शन के आधार पर तुरंत सहयोग भी किया जाएगा।

Saturday, May 24, 2025

हाईस्कूल की तर्ज पर इंटर में भी लागू होगा आंतरिक मूल्यांकन, शासन को भेजा गया प्रस्ताव

हाईस्कूल की तर्ज पर इंटर में भी लागू होगा आंतरिक मूल्यांकन, शासन को भेजा गया प्रस्ताव


प्रयागराज । यूपी बोर्ड अब हाईस्कूल की तर्ज पर इंटरमीडिएट स्तर पर कक्षा 11 और 12 के गैर प्रायोगिक विषयों में आंतरिक मूल्यांकन लागू करेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुपालन में प्रस्तावित बदलाव को लेकर बोर्ड की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद 2026-27 शैक्षणिक सत्र से इसे लागू करने की तैयारी चल रही है।

वर्तमान में बोर्ड की ओर से इंटरमीडिएट में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गृह विज्ञान जैसे विषयों में 30-30 नंबर की प्रायोगिक परीक्षा कराई जाती हैं। इन विषयों में बोर्ड की ओर से 70 नंबर की लिखित परीक्षा होती है। वहीं हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, अर्थशास्त्र जैसे गैर प्रायोगिक विषयों में 100-100 नंबर की लिखित परीक्षा कराई जाती है। 


बोर्ड की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में गैर प्रायोगिक विषयों में भी 20-20 नंबर का आंतरिक मूल्यांकन कराने की बात कही गई है। साथ ही प्रायोगिक परीक्षा के 30-30 अंकों को घटाकर 20-20 नंबर की प्रयोगात्मक परीक्षा कराने का प्रस्ताव दिया गया है। यानि अगले सत्र से इंटर में 20 नंबर की प्रायोगिक परीक्षा और 20 नंबर का आंतरिक मूल्यांकन होगा जबकि लिखित परीक्षा सभी विषयों में 80-80 नंबर की होगी। 

हाईस्कूल में भी 30 नंबर के आंतरिक मूल्यांकन को घटाकर 20 नंबर करने का प्रस्ताव है। कुछ समय पहले बोर्ड की ओर से सीमैट में आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने 20 नंबर का प्रयोगात्मक/आंतरिक मूल्यांकन और 80 नंबर की लिखित परीक्षा कराने का सुझाव दिया था। उसी के अनुरूप प्रस्ताव भेजा गया है।

यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह का कहना है कि इंटरमीडिएट के गैर प्रायोगिक विषयों में 20 नंबर के आंतरिक मूल्यांकन का प्रस्ताव भेजा गया है। शासन की मंजूरी के बाद अगले सत्र से लागू करेंगे।


हाईस्कूल में 14 साल पहले हुआ था बदलाव

यूपी बोर्ड ने कक्षा नौ और 10 के सभी विषयों में 2011-12 शैक्षणिक सत्र से 30 अंकों की प्रायोगिक (प्रोजेक्ट व सृजनात्मक कार्य) और आंतरिक मूल्यांकन पद्धति लागू की थी। उससे पहले 100 नंबर की बोर्ड परीक्षा होती थी। 2012 की हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में सभी विषयों में 70 अंकों की लिखित परीक्षा कराई गई थी।


एक करोड़ से अधिक परीक्षार्थियों पर असर

बोर्ड के इस बदलाव का असर कक्षा नौ से 12 तक के एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में हर साल 50 लाख से परीक्षार्थी शामिल होते हैं तो वहीं कक्षा नौ और 11 में भी छात्र-छात्राओं की संख्या 50 लाख से अधिक रहती है।

Friday, May 23, 2025

सीबीएसई ने बदली प्रक्रिया, पहले मिलेगी उत्तर पुस्तिका की कॉपी, अंकों से संतुष्ट नहीं तो दोबारा चेक करा सकते हैं काॅपियां

सीबीएसई ने बदली प्रक्रिया, पहले मिलेगी उत्तर पुस्तिका की कॉपी,  अंकों से संतुष्ट नहीं तो दोबारा चेक करा सकते हैं काॅपियां




सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2024 के परिणामों से असंतुष्ट विद्यार्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया की घोषणा कर दी है। इस बार प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब छात्र पहले उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त कर सकेंगे। इससे वे जान सकेंगे कि किस उत्तर पर कितने अंक मिले, मूल्यांकनकर्ता की टिप्पणी क्या रही और कोई गलती तो नहीं हुई।


12वीं के छात्रों के लिए उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी के लिए आवेदन 21 मई से 27 मई 2025 तक होंगे। शुल्क 700 रुपये प्रति विषय तय किया गया है। अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन 28 मई से तीन जून 2025 तक किए जा सकेंगे। अंकों के सत्यापन का शुल्क 500 रुपये प्रति विषय और पुनर्मूल्यांकन का शुल्क 100 रुपये प्रति प्रश्न रहेगा। पुनर्मूल्यांकन केवल थ्योरी भाग में ही मान्य होगा।

10वीं के छात्रों के लिए उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी के लिए आवेदन 27 मई से दो जून 2025 तक किए जा सकेंगे। शुल्क 500 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका रहेगा। अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन तीन जून से सात जून 2025 तक किए जा सकेंगे। सत्यापन का शुल्क 500 रुपये प्रति विषय और पुनर्मूल्यांकन का शुल्क 100 रुपये प्रति प्रश्न रहेगा। यह सुविधा भी केवल थ्योरी भाग के लिए ही होगी।

बोर्ड ने साफ किया है कि सभी आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ऑफलाइन आवेदन मान्य नहीं होंगे। छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।



विद्यार्थियों को सीबीएसई ने एक और मौका दिया

कक्षा दस और 12 की परीक्षा में मिले अंकों से असंतुष्ट विद्यार्थियों को सीबीएसई ने एक और मौका दिया है। ऐसे विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिकाओं को दोबारा चेक करा सकते हैं। इसके लिए 21 मई से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सीबीएसई ने पिछले दिनों कक्षा दस और 12 की परीक्षा का परिणाम जारी किया था। रिजल्ट की घोषणा के बाद अब सीबीएसई ने ऐसे विद्यार्थियों को एक और मौका दिया है, जो अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं। 

सीबीएसई ने कक्षा दस और 12 बोर्ड परीक्षा 2025 के बाद की प्रक्रिया का शेड्यूल जारी कर दिया है। यदि किसी छात्र को लगता है कि उसके अंक सही से नहीं दिए गए हैं, तो वह स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त करने, अंकों के सत्यापन और री-वैल्यूएशन के लिए निर्धारित समय सीमा में आवेदन कर सकता है।

12वीं का छात्रों के लिए सात सौ रुपये शुल्क
सीबीएसई के अनुसार कक्षा 12 के विद्यार्थियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 27 मई तक 700 रुपये प्रति विषय शुल्क के साथ स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद वे 28 मई से तीन जून 2025 तक अंकों का सत्यापन (500 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका) और री-वैल्यूएशन (100 रुपये प्रति प्रश्न) के लिए आवेदन कर सकते हैं।


10वीं के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण तिथियां
सिटी कोआर्डिनेटर नीरज तिवारी के मुताबिक सीबीएसई 10वीं के छात्र 27 मई से दो जून 2025 तक 500 रुपये प्रति विषय शुल्क के साथ स्कैन की गई आंसर शीट्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद तीन जून से सात जून 2025 तक वेरिफिकेशन और री-वैल्यूएशन की प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। इस दौरान वेरिफिकेशन के लिए 500 रुपये और प्रत्येक प्रश्न के री-वैल्यूएशन के लिए 100 रुपये का शुल्क निर्धारित है।



ऐसे कर सकते हैं आवेदन

-सबसे पहले सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा।
-होम पेज पर दिए गए री-वैल्युएशन और री-वेरिफिकेशन लिंक पर क्लिक करें।
-इसके बाद आपको अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा।
-अब आपको अपने अकाउंट में लॉग इन करना होगा।
-इससे बाद आपको एप्लीकेशन फॉर्म को भरना होगा और आवेदन शुल्क को जमा करना होगा।
-आपको सबमिट पर क्लिक करना होगा और पेज को डाउनलोड कर लीजिए।
-भविष्य के लिए इस पेज का प्रिंट आउट निकाल निकाला जा सकता है।



Friday, May 9, 2025

NAAC मूल्यांकन वाले कॉलेजों के शिक्षकों को रिसर्च फंड में मिलेगी वरीयता

NAAC मूल्यांकन वाले कॉलेजों के शिक्षकों को रिसर्च फंड में मिलेगी वरीयता


लखनऊ। प्रदेश में ऐसे डिग्री कॉलेज जिन्होंने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से अपना मूल्यांकन कराया है, इन कॉलेज के शिक्षकों को रिसर्च फंड देने में वरीयता दी जाएगी। इसके तहत उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों से 26 मई तक शोध प्रस्ताव मांगे हैं।


विभाग का यह प्रयास है कि इसके माध्यम से डिग्री कॉलेजों को रिसर्च के साथ ही नैक मूल्यांकन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसी क्रम में यह पहल की गई है। इसमें जिन कॉलेजों ने नैक मूल्यांकन नहीं कराया है, वह यह लिखकर देंगे कि एक साल में वह अपना मूल्यांकन करा लें। ऐसे कॉलेजों को भी रिसर्च ग्रांट देने में वरीयता दी जाएगी। 


कॉलेजों के शिक्षकों को रिसर्च फंड के रूप में पांच से 15 लाख तक दिए जाते हैं। इसमें शिक्षक नए प्रयोगों के साथ आज की जरूरत के अनुसार विषयों पर शोध करते हैं। प्रदेश में सरकारी, एडेड व निजी मिलाकर लगभग 8000 कॉलेज हैं, लेकिन नैक मूल्यांकन कराने वालों की संख्या मात्र 201 ही है।