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Wednesday, April 1, 2026

CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

नई दिल्ली, 30 मार्च 2026।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) फरवरी 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने भाग लिया।

जारी आंकड़ों के अनुसार, पेपर-1 में कुल 12,11,611 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 10,65,410 परीक्षार्थी उपस्थित हुए। इनमें से 3,58,937 अभ्यर्थी सफल रहे, जो कुल 33.69 प्रतिशत है। वहीं, पेपर-2 में 21,56,459 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 18,67,428 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए और 3,46,738 अभ्यर्थी सफल हुए, जिसकी सफलता दर 18.56 प्रतिशत रही।

दोनों पेपरों को मिलाकर कुल 26,49,129 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 23,24,625 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें कुल 5,97,061 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए, जिससे कुल सफलता प्रतिशत 25.68 रहा।

सीबीएसई ने बताया कि अभ्यर्थी अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर देख सकते हैं। साथ ही, मार्कशीट और पात्रता प्रमाण पत्र भी शीघ्र ही डिजिलॉकर पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिन्हें अभ्यर्थी अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से डाउनलोड कर सकेंगे। 




CBSE ने जारी किया CTET का रिजल्ट, जानिए!  कितने नंबर वाला होगा पास? इस लिंक से करें चेक


🔴 इस लिंक से देखें अपना परिणाम 

CBSE ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) पेपर-1 और पेपर-2 का रिज्लट जारी कर दिया है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर चेक कर सकते हैं।


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) 2026 का रिजल्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने लॉगिन डिटेल्स डालकर आसानी से अपना रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं। लाखों छात्रों को इस परीक्षा के रिजल्ट का इंतजार था। 


इस परीक्षा में देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 25 लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। अब यह सभी उम्मीदवार सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। आप सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट जारी कर सकते हैं क्योंकि सीबीएसई ने सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट एक साथ जारी कर दिया है। 

 

कैसे चेक करें रिजल्ट?

सबसे पहले CTET की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाएं।

लेटेस्ट न्यूज सेक्शन में 'CTET February Result 2026' का विकल्प दिखेगा।

इस लिंक पर क्लिक करने से आप रिजल्ट लॉगिन पेज पर पहुंच जाएंगे।

अपना रोल नंबर और पासवर्ड डालें।

सबमिट करते ही आपका CTET रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।

इसके बाद आप अपना स्कोर कार्ड डाउनलोड कर लें। 


कितने नंबर वाला होगा पास?
CTET पास करने के लिए जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों को कम से कम 60 प्रतिशत नंबर लाने होते हैं। इसका मतलब है कि कुल 150 नंबरों में से कैंडिडेट्स को कम से कम 90 नंबर हासिल करने होते हैं। रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को CTET एग्जाम क्लियर करने के लिए 55 प्रतिशत स्कोर करना होता है। अगर आपका स्कोर इतना है तो आप इस परीक्षा में सफल हो गए हैं। इसके बाद आपका यह रिजल्ट लाइफ टाइम वैलिड रहेगा यानी इस रिजल्ट के आधार पर आप आगे परीक्षाएं दे सकते हैं। 


पेपर-1 और पेपर-2 क्या है?
सीबीएसई सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट के पेपर-1 और पेपर-2 आयोजित किया था। पेपर 1 पास करने वाले अभ्यर्थी कक्षा 1 से लेकर 5वीं तक और पेपर 2 एग्जाम क्वालीफाई करने पर उम्मीदवार कक्षा 6 से लेकर 8 तक पढ़ाने के लिए पात्र हो जाते हैं।

Thursday, February 5, 2026

सात / आठ फरवरी को प्रस्तावित सीटीईटी की तैयारियों में जुटे हैं उम्रदराज शिक्षक

सात / आठ फरवरी को प्रस्तावित सीटीईटी की तैयारियों में जुटे हैं उम्रदराज शिक्षक

किसी का बेटा 12वीं बोर्ड परीक्षा में, किसी की बेटी नीट

सुप्रीम कोर्ट ने परिषदीय शिक्षकों के लिए अनिवार्य किया है टीईटी


प्रयागराज। वर्षों से कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पढ़ाने वाले सैकड़ों उम्रदराज शिक्षक आज खुद फिर से परीक्षार्थी बन गए हैं। नौकरी में बने रहने की अनिवार्यता ने उन्हें ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है कि वे दिन में स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं और रात में खुद की पढ़ाई में जुटते हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों के साथ अब उनके शिक्षक भी किताबें खोलकर बैठने को मजबूर हैं।


प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत बड़ी संख्या में शिक्षक, जिनकी सेवा अवधि दो दशक से अधिक हो चुकी है, शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) और अन्य अनिवार्य अर्हताओं को पूरा करने के दबाव में लगातार तैयारी कर रहे हैं। कई शिक्षक ऐसे हैं जिनके बच्चे 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, और घर का माहौल एक साथ दो पीढ़ियों की पढ़ाई का केंद्र बन गया है।

इन शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने जीवन का बड़ा हिस्सा बच्चों को शिक्षित करने में लगा दिया, लेकिन अब उनकी योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाकर उन्हें फिर से परीक्षा की कसौटी पर खड़ा कर दिया गया है। उम्र, स्वास्थ्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद वे सिर्फ इसलिए तैयारी कर रहे हैं ताकि वर्षों की सेवा के बाद नौकरी न छिन जाए।

शिक्षक संगठनों का मानना है कि अनुभव को दरकिनार कर केवल परीक्षा आधारित व्यवस्था थोपना शिक्षा व्यवस्था की विडंबना है। वे कहते हैं कि जो शिक्षक वर्षों से कक्षा में परिणाम दे रहे हैं, उनके लिए सम्मानजनक समाधान होना चाहिए था। मौजूदा स्थिति में शिक्षक मानसिक दबाव, असुरक्षा और अपमान की भावना से गुजर रहे हैं।

शिक्षा जगत में यह तस्वीर चिंताजनक मानी जा रही है, जहां पढ़ाने वाले खुद असुरक्षित भविष्य के डर से फिर से छात्र बन गए हैं। यह सवाल अब और तेज हो गया है कि क्या अनुभव, सेवा और समर्पण की कोई कीमत नहीं, या फिर शिक्षक को जीवन भर परीक्षा देते रहना ही उसकी नियति बना दी गई है।

Sunday, December 14, 2025

मौका ही नहीं मिल रहा तो टीईटी कैसे करें ? यूपी में तीन साल से TET परीक्षा ही नहीं हुई, CTЕТ मे B.Ed और BPEd वालों के विकल्प ही नहीं

मौका ही नहीं मिल रहा तो टीईटी कैसे करें ? यूपी में तीन साल से TET परीक्षा ही नहीं हुई, CTЕТ मे B.Ed और BPEd वालों के विकल्प ही नहीं


लखनऊ : सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि आठवी कक्षा तक पढ़ाने के लिए सभी शिक्षकों को TET पास करना अनिवार्य है। दो साल के अंदर ऐसा न करने पर उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। अब शिक्षकों की दिक्कत ये है कि TET करें तो कैसे ? प्रदेश का हाल ये है कि तीन साल से UPTET परीक्षा ही नहीं हुई। अब CTET उम्मीद थी। वह परीक्षा होने जा रही है, लेकिन उसके लिए आवेदन में B.Ed शिक्षकों के लिए कोई विकल्प ही नहीं है। 

सबके लिए अनिवार्य है TET
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने के लिए हर शिक्षक को बीएड/बीटीसी के साथ ही TET करना अनिवार्य है। यह अधिनियम 2011 में लागू किया गया था। उससे पहले जो शिक्षक पढ़ा रहे है, उनके लिए उस समय TET' अनिवार्य नहीं थी। इसी को आधार बनाकर शिक्षक सुप्रीम कोर्ट तक गए। शिक्षकों का तर्क था कि जब | उनकी नौकरी लगी थी, उस समय TET' की अनिवार्यता नहीं थी। अब उन पर TET कैसे थोपा जा सकता है?

 सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर को आदेश दिया कि NCTE की गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है। सभी को TET करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसमें से सिर्फ उन शिक्षकों को छूट दी है जिनको रिटायर होने में पांच साल से कम वक्त बचा है। बाकी सभी शिक्षकों को दो साल के भीतर TET करना जरूरी होगा।

शिक्षकों का कहना है कि TET का आदेश ही अव्यावहारिक है। दूसरी बात यह कि जो शिक्षक या शिक्षक बनने के इच्छुक अन्य बेरोजगार युवा TET करना चाहते है, तो उसके लिए तो सरकार को व्यवस्था करनी होगी। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि सरकार को TET परीक्षा करवाकर उन्हें मौका देना चाहिए। नियमानुसार साल में दो बार TET परीक्षा होनी चाहिए। प्रदेश में आखिरी बार 2021 में UPTET के लिए आवेदन मांगे गए थे। उसमें भी पेपर लीक हो गया था। वह परीक्षा आखिरी बार 2022 में हुई थी। तब से अब तक UPTET नहीं हुई। प्राथमिक शिक्षक संघ लखनऊ के उपाध्यक्ष निर्भय सिंह कहते हैं कि CTET में भी B.Ed और BPEd वालों को मौका देना चाहिए। पुराने ज्यादातर शिक्षकों के पास यही डिग्रियां है।

कैसे आया नौकरी पर संकट ?
बेसिक शिक्षा परिषद में ही ऐसे करीब डेढ़ लाख शिक्षक है, जिन्होंने अब तक TET नहीं किया है। वे ज्यादातर 2011 के पहले के भर्ती है। कई तो ऐसे है, जब शैक्षिक अर्हता इंटर और BTC होती थी। उनके लिए TET अनिवार्य नहीं थी? वहीं कई मृतक आश्रित है, जिन्होंने TET करें? तीन साल से यूपी में कोई TET परीक्षा नहीं हुई। बेसिक शिक्षा परिषद के अलावा अन्य एडेड और प्राइवेट स्कूलों में भी इन कक्षाओं को पढ़ाने के लिए TET अनिवार्य है। वे भी इंतजार कर रहे है। लाखों की संख्या में युवा TET के इंतजार में है। B.Ed डिग्री वाले भी शिक्षक है। अब CTET का मौका आया तो आवेदन फार्म में उनके लिए विकल्प ही नहीं है।

आयोग नहीं करवा सका परीक्षा 
पहले TET करवाने का जिम्मा परीक्षा नियामक प्राधिकारी का होता था। अब सरकार ने शिक्षा सेवा चयन आयोग गठित कर दिया गया है। यह आयोग 2023 में गठित भी हो गया, लेकिन तब से एक भी परीक्षा नहीं कर पाया है। प्रफेसर कीर्ति पांडेय 1 सितंबर 2024 को आयोग की अध्यक्ष बनाई गई थीं। वह भी 26 सितंबर 2025 को हट गई, लेकिन अब तक कोई परीक्षा नहीं करवा पाया है।



क्या बीएड वाले भी भर सकते हैं CTET का फॉर्म? कंफ्यूजन पर NCTE ने दिया स्पष्टीकरण

BEd Eligibility In CTET 2026: राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने सोशल मीडिया पर चल रही उन सभी "गलत खबरों" को सख्ती से नकार दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि सीटेट 2026 के लिए बीएड फिर से मान्य कर दिया गया है। परिषद ने साफ कहा है कि उसने अपनी वेबसाइट या किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीटेट 2026 के प्राथमिक स्तर (पेपर 1) में बीएड को पात्रता मानदंड में वापस जोड़ने को लेकर कोई नोटिस या आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है।

NCTE ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर लिखा, "NCTE ने अपनी वेबसाइट ncte.gov.in या किसी सोशल मीडिया चैनल NCTE_Official (X अकाउंट) पर पेपर 1 (प्राथमिक स्तर) सीटेट 2026 के लिए बीएड पात्रता की बहाली से संबंधित कोई भी सार्वजनिक नोटिस या आधिकारिक परिपत्र जारी नहीं किया है।"


चालू है सीटेट 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया

सीटेट 2026 एक राष्ट्रीय परीक्षा है, जिसके जरिए केंद्र सरकार के स्कूलों, जैसे केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय तथा अन्य संस्थान जो सीटेट स्कोर मानते हैं, में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता जांची जाती है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सीटेट फरवरी 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। योग्य उम्मीदवार 18 दिसंबर तक सीटेट फरवरी 2026 सत्र के लिए आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।




कम होने का नाम नहीं ले रही बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों की परेशानियां, नहीं भर पा रहे सीटीईटी का आवेदन 

लखनऊ, परिषदीय स्कूलों के बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। टीईटी अनिवार्यता के सुप्रीम आदेश के बाद से जिन शिक्षकों के पास टीईटी नहीं है, उन्हें दो वर्षों में टीईटी उत्तीर्ण करना जरूरी है। प्राइमरी से जूनियर में पदोन्नति के लिए भी टीईटी जरूरी है, लेकिन पिछले दो सालों से प्रदेश में टीईटी के लिए आवेदन तक नहीं लिए गए हैं, जबकि सीटीईटी (केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) के फार्म निकल चुके हैं। इसके लिए 18 दिसंबर अंतिम तिथि निर्धारित है, लेकिन बीएड पास शिक्षक आवेदन भी नहीं भर पा रहे हैं। 


सीटीईटी आवेदन फार्म में प्राइमरी स्तर (कक्षा 1–5) के लिए बीएड डिग्रीधारियों का विकल्प ही नहीं है, क्योंकि एनसीटीई के नियमों के अनुसार प्राइमरी शिक्षक के लिए केवल डीएलएड (बीटीसी) ही मान्य योग्यता है।

इस कारण प्रदेश के करीब पौने दो लाख बीएड शिक्षक, जो पहले से प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं और टीईटी अनिवार्यता के दायरे में आते हैं, लेकिन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। 

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष निर्भय सिंह का कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी अनिवार्य कर रखा है, तो पहले से प्राथमिक विद्यालयों में बीएड के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को आवेदन का विकल्प मिलना चाहिए। 

यूपी टीईटी वर्ष में दो बार होनी चाहिए, लेकिन दो साल से परीक्षा ही नहीं कराई गई है। इसके साथ ही बीएड करने वाले वे शिक्षक जिन्होंने विशिष्ट बीटीसी का छह माह का ब्रिज कोर्स अभी तक नहीं किया है, वे भी संकट में हैं।

Monday, September 1, 2025

केंद्रीय विद्यालयों में सीटीईटी अनिवार्य, एलटी भर्ती में छूट, प्रतियोगी पहुंचे हाईकोर्ट, राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक भर्ती में टीईटी से छूट पर विवाद बढ़ा

केंद्रीय विद्यालयों में सीटीईटी अनिवार्य, एलटी भर्ती में छूट, प्रतियोगी पहुंचे हाईकोर्ट, राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक भर्ती में टीईटी से छूट पर विवाद बढ़ा


कोर्ट ने पूछा, भर्ती नौ-दस के लिए या छह से आठ भी पढ़वाएंगे 


प्रयागराज । राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की गाइडलाइन के अनुसार सहायक अध्यापक भर्ती के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक) भर्ती में टीईटी से छूट देने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।

इस मामले में अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों से सवाल किया है कि एलटी ग्रेड शिक्षकों से केवल कक्षा नी और दस के बच्चों को पढ़वाएंगे या फिर ये शिक्षक कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों को भी पढ़ाएंगे।   


एनसीटीई की गाइडलाइन जारी होने के बाद केंद्रीय विद्यालय संगठन ने टीजीटी (सहायक अध्यापक) भर्ती के लिए उच्च प्राथमिक स्तर की केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) को अनिवार्य कर दिया था क्योंकि टीजीटी शिक्षक ही कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को भी पढ़ाते हैं। हालांकि यूपी के माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। 2018 में जब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने एलटी ग्रेड भर्ती जारी की थी तो उस समय भी टीईटी अनिवार्य किए जाने का मामला उठा था लेकिन तब अफसरों ने हाईकोर्ट में यह कहकर मामला रफा-दफा कर दिया था कि एलटी ग्रेड शिक्षकों से कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को नहीं पढ़वाया जाएगा।

जबकि हकीकत इसके उलट है। राजकीय विद्यालयों में छह से 12 तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। प्रवक्ता कक्षा 11 और 12 के बच्चों को पढ़ाते हैं और एलटी ग्रेड शिक्षक कक्षा छह से दस तक की कक्षाएं लेते हैं। यही कारण है कि हाईकोर्ट में याचिका करने वाले अभ्यर्थियों ने यह मुद्दा उठाया है कि लोक सेवा आयोग की ओर से 28 जुलाई को जारी विज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं है कि भर्ती केवल कक्षा नौ-दस के शिक्षकों के लिए है या फिर कक्षा 6-8 के लिए भी है। हाईकोर्ट ने 26 अगस्त को प्रमुख सचिव (माध्यमिक शिक्षा) को निर्देशित किया है कि वे इस विषय पर दो हफ्तों में काउंटर एफिडेविट दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितम्बर को होगी

Tuesday, March 4, 2025

CTET की अनिवार्यता को लेकर अगली सुनवाई 14 मई 2025 को, NCTE अपनी कार्ययोजना कोर्ट में करेगा पेश

CTET की अनिवार्यता को लेकर अगली सुनवाई 14 मई 2025 को, NCTE अपनी कार्ययोजना कोर्ट में  करेगा पेश 


हाईकोर्ट ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 23(2) का हवाला देते हुए कहा कि यह निर्णय बच्चों के हित में है। मामले की अगली सुनवाई 14 मई 2025 को होगी, जब NCTE अपनी कार्ययोजना कोर्ट में पेश करेगा।


सीटीईटी पास किए बिना नहीं पढ़ा सकेंगे शिक्षक, दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सरकारी और निजी स्कूलों पर होगा लागू

5 लाख शिक्षकों पर कोर्ट के आदेश का असर पड़ेगा14 मई को मामले की अगली सुनवाई करेगा कोर्ट

पहले से नियुक्त शिक्षकों और नई नियुक्तियों में भी इस नियम का पालन किया जाना आवश्यक होगा


■ कोर्ट ने कहा, एनसीटीई चार सप्ताह में देशभर में परीक्षा की योजना तैयार करे

■ सेवारत शिक्षकों के लिए बीएड या समकक्ष डिग्री अथवा शिक्षण संबंधी डिप्लोमा लेना अनिवार्य

■ परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना शिक्षकों की नौकरी बरकरार नहीं रह सकेंगी


नई दिल्ली। बिना कोई दक्षता परीक्षा दिए अरसे से निजी और सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे देशभर के शिक्षकों के लिए अब केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) को पास करना जरूरी होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि कोई भी शिक्षक इस पात्रता परीक्षा को पास किए बगैर अपनी सेवा आगे बरकरार नहीं रख पाएगा।

हाईकोर्ट के आदेशानुसार, नई नियुक्तियों में भी इस नियम का पालन करना जाना जरूरी होगा। हाईकोर्ट का यह आदेश देशभर में तकरीबन पांच लाख शिक्षकों पर असर डाल सकता है। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को कहा कि चार सप्ताह के भीतर देशभर में इस परीक्षा के आयोजन को लेकर योजना तैयार करे। इस कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी एक हलफनामे के तौर पर पीठ के समक्ष पेश की जाए।


एनसीटीई को सख्त कदम उठाने होंगे: पीठ ने कहा कि नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के शिक्षकों की नियुक्ति और पुराने शिक्षकों की सेवा को बरकरार रखने के लिए एनसीटीई को सख्त कदम उठाने ही होंगे। पीठ ने कहा कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के मद्देनजर शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 23(2) को लागू करना जनहित में है। इस मामले में अगली सुनवाई 14 मई 2025 को होगी।

मान्यता प्राप्त संस्थानों से लेनी होगी डिग्री और डिप्लोमा हाईकोर्ट ने इस आदेश में विशेषतौर पर कहा कि जो शिक्षक दशकों से पढ़ा रहे हैं और उन्होंने एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों से बीएड अथवा शिक्षण संबंधी डिग्री व डिप्लोमा नहीं लिया है तो उन्हें दोबारा मान्यता प्राप्त संस्थानों से अपनी बीएड व शिक्षण संबंधी डिप्लोमा करना होगा। इसके लिए उन शिक्षकों को समय दिया जाएगा। यह डिग्री लेने के बाद इन शिक्षकों को सीटीईटी परीक्षा पास करनी होगी। उसके बाद ही वह अपनी सेवा को विद्यालयों में जारी रख सकेंगे। 


जनहित याचिका पर आदेश दिया

इस मामले में गैर सरकारी संगठन जस्टिस फॉर ऑल की ओर से अधिवक्ता खगेश थी. झा और अधिवक्ता शिखा शर्मा बग्गा ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के खंड 4 में संशोधन किया। मगर कक्षा एक से आठवीं तक के लिए शिक्षक की नियुक्त करते समय न्यूनतम योग्यता माफ कर दी जा रही है, यदि उस शिक्षक की नियुक्ति अधिसूचना जारी होने से पहले हुई थी। थी। जनहित याचिका में कहा गया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद का यह निर्णय छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला है। हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और आदेश दिया कि सभी शिक्षकों को सीटीईटी की परीक्षा से गुजरना होगा। उसके बाद ही वे अपनी नौकरी बचा पाएंगे।


2015 में संशोधन के साथ किया लागू

केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) को लेकर वर्ष 2010 में अधिसूचना जारी कर दी गई थी। इसके बाद वर्ष 2015 में इसमें संशोधन किया गया और इसे लागू किया गया। हालांकि, इसके बावजूद निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति बगैर पात्रता परीक्षा के जारी रही।

Sunday, January 19, 2025

CTET परीक्षा : ओएमआर के साथ गणना शीट भी ले सकेंगे उम्मीदवार

CTET परीक्षा : ओएमआर के साथ गणना शीट भी ले सकेंगे उम्मीदवार


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से आयोजित होने वाली केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) में भाग लेने वाले उम्मीदवार ओएमआर शीट के साथ गणना शीट ले सकेंगे।

सीबीएसई ने दिसंबर 2024 में हुई सीटीईटी परीक्षा में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को ओएमआर शीट के साथ गणना शीट देने का फैसला किया है। जो उम्मीदवार यह प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें 500 रुपये शुल्क के साथ 16 फरवरी तक आवेदन करना होगा। इस तिथि के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों के अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा। 

बोर्ड के अनुसार, जिन उम्मीदवारों ने पहले ही आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत या अन्यथा आवेदन कर दिया है, वह पांच रुपये के आवश्यक शुल्क के साथ नए सिरे से निर्धारित तिथि से पहले आवेदन कर सकते हैं।

उम्मीदवारों की ओर से निर्धारित शुल्क सीबीएसई के पक्ष में बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करना होगा। उम्मीदवारों को आवेदन में अपना रोल नंबर, नाम और पता सही ढंग से भरना होगा। इसके साथ ही बैंक ड्राफ्ट के पीछे रोल नंबर, और नाम का उल्लेख करना जरूरी है। ओएमआर शीट की प्रति के साथ गणना शीट उम्मीदवार को केवल स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजी जाएगी।