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Monday, September 7, 2020

हरदोई : लापरवाह बीईओ से बीएसए ने किया जवाब-तलब

सुरसा ब्लॉक के लापरवाह बीईओ से जवाब-तलब

हरदोई  : बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में व्यवस्थाएं सुधारने के लिए तैनात किए गए खंड शिक्षा अधिकारी अपने दायित्वों का पालन करने में घोर लापरवाही बरत रहे हैं। इससे बेलगाम शिक्षक व कर्मचारी मनमानी करके अव्यवस्था फैलाए हैं। इसकी एक झलक शनिवार को स्कूलों के औचक निरीक्षण के दौरान बीएसए ने खुद देखी। नाराजगी जताई। बीईओ से स्पष्टीकरण मांगा। वहीं एक अनुचर का वेतन रोकने के निर्देश दिए।



शनिवार को सुबह 11 बजे बीएसए हेमन्तराव अचानक बीआरसी सुरसा में पहुंच गए। जमीनी हकीकत का निरीक्षण किया तो कमियां देखकर दंग रह गए। अनुचार कुसुमा देवी 21 अगस्त से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित पाई गईं। बीआरसी परिसर में चौतरफा गंदगी फैली मिली। छानबीन करने पर पता चला कि प्राथमिक विद्यालय एवं उच्च प्राथकिम स्कूल तुर्तीपुर, उच्च प्राथमिक स्कूल फर्दापुर, प्राथमिक विद्यालय सुरसा, प्राइमरी स्कूल ओदरा में कार्यरत अध्यापकों ने बालक व बालिकाओ को दो-दो सेट मुफ्त ड्रेस वितरण के लिए कपड़ा के संबंध में निविदा में 9 अगस्त की तिथि प्रकाशित कराई। जबकि इस दिन रविवार था।

बीएसए का कहना है कि खंड शिक्षा अभिकारी भगवान राव को निर्देश दिए गए हैं कि वे उक्त कमियों के संबंध में अपना स्पष्टीकरण समुचित साक्ष्यों के साथ तीन दिन के अंदर बीएसए कार्यालय में दें। ऐसा प्रतीत होता है कि बीईओ की लापरवाहीपूर्ण पर्यवेक्षण के कारण उपरोक्त विज्ञप्ति निविदा खोलने का दिन गलत तरीके से रविवार अंकित किया गया। ऐसा करके टेंडर के नियमों का पालन नहीं किया गया। इस मामले में अभी तक बीईओ ने कोई उचित कार्रवाई नहीं की। न ही उन्हें मामले की जानकारी दी। जिलाधिकारी को भी निरीक्षण आख्या भेजी गई है।

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हरदोई : 15 सितम्बर तक ड्रेस वितरण का काम पूरा होने के नहीं आसार, स्वयं सहायता समूहों को चार लाख से ज्यादा सिलनी हैं ड्रेस पर सिलीं 50 हजार, तो क्या कमीशनखोरी के चक्कर में हो रहा विलंब?

हरदोई : 15 सितम्बर तक ड्रेस वितरण का काम पूरा होने के नहीं आसार, स्वयं सहायता समूहों को चार लाख से अधिक ड्रेस सिलकर करनी है तैयार।

हरदोई : जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के करीब चार हजार स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को मुफ्त ड्रेस वितरण में कोरोना, बजट आवंटन में देरी के बाद अब जिम्मेदारों की लापरवाही बाधक बन गई है। यही वजह है कि जिले में 15 सितंबर तक शत प्रतिशत बच्चों को ड्रेस मिल जाने का लक्ष्य पूरा होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। अभिभावकों ने सांसदों, विधायकों से इस मामले में दखल देने की मांग की है ताकि गुणवत्तायुक्त ड्रेस समय से विद्यार्थियों तक पहुंच सके।

जिले में करीब पौने पांच लाख बच्चों को ड्रेस वितरित की जानी है। एक बच्चे को दो सेट ड्रेस मिलेगी, जिसकी कीमत शासन से 600 रुपये निर्धारित की गई है।




मांग के सापेक्ष 75 फीसदी बजट शासन ने जारी करदिया है। शेष धनराशि सत्यापन के बाद भेजी जाएगी। जो धनराशि आई है उसे पीएफएमएस के जरिए स्कूल प्रबंधन समिति के खातों में भेज दिया गया है।

जिन स्कूलों में 167 या इससे ज्यादा बच्चे अध्ययनरत हैं वहां पर टेंडर प्रक्रिया के जरिए ड्रेस बंटवाई जानी हैं। वहीं जिन स्कूलों में 166 या इससे कम बच्चे हैं वहां पर स्वयं सहायता समूहों से सिलवाकर ड्रेस बांटनी हैं। इसके लिए प्रबंध समिति कपड़ा खरीदकर समूहों को उपलब्ध कराएगी। विभागीय जानकारों के मुताबिक पहले 31 अगस्त तक की समयसीमा ड्रेस वितरण के लिए निर्धारित की गई थी।

शासन-प्रशासन ने दावा किया था कि समय से ड्रेस बंट जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। इसलिए 15 सितंबर तक की समय सीमा और बढ़ा दी गई है।

इसके बावजूद शत प्रतिशत बच्चों को ड्रेस वितरण मिलने की उम्मीदें टूटने लगी हैं क्योंकि ड्रेस वितरण की प्रगति बेहद धीमी है।

मानीटरिंग में भी केवल कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। अब तक कितनी ड्रेस बंट चुकी हैं इसकी जानकारी तक जिम्मेदार नहीं दे पा रहे हैं।

चार से ज्यादा ड्रेस सिलनी हैं पर सिलीं 50 हजार : स्वयं सहायता समूहों को 4 लाख से ज्यादा ड्रेस सिलकर तैयार करनी हैं, लेकिन अब तक 70 हजार ड्रेस तैयार करने का ही आर्डर मिला है। वहीं 50 हजार ड्रेस ही अब तक सिल सकी हैं। इसका भुगतान अभी शून्य है। समितियों को ड्रेस सिलने की जिम्मेदारी मिले दो महीने से भी ज्यादा समय बीत चुका है। अब शेष एक सप्ताह में साढ़े तीन लाख से ज्यादा ड्रेस तैयार कराने की राह भी काफी मुश्किल है।

तो क्या कमीशनखोरी के चक्कर में हो रहा विलंब :  ड्रेस वितरण में राजनीतिक दलों के नेताओं से जुड़े ठेकेदार भी सक्रिय हो गए हैं। चर्चा है कि सियासी पहुंच के कारण वे मनमानी पर उतारू हैं। वहीं ब्लाकों के अधिकारी भी खुश हुए बगैर उन्हें हरी झंडी देने में आनाकानी कर रहे हैं। कमीशनखोरी के इस खेल में सेटिंग के चक्कर में भी विलंब होने की बातें जानकार बता रहे हैं। बीते दिनों बीएसए को भी निरीक्षण के दौरान स्कूल में कपड़ा विभागीय नियमानुसार नहीं मिला था।

95 फीसदी से ज्यादा स्कूल प्रबंधन समितियों के खाते में बजट भेज दिया गया है। कुछ जगहों पर तकनीकी फाल्ट सामने आई है। इसे भी जल्द दूर कर खाते में धनराशि पहुंचा दी जाएगी। हेडटीचरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द धनराशि का आहरण कर बच्चों को ड्रेस वितरित करा दें।
-अमित वर्मा, जिला समन्वयक

कपड़ा खोलने में कोई दिक्कत नहीं है। तेजी से ड्रेस सिलने में समूह की महिलाएं जुटी हुई हैं। ड्रेस सिलाई का रेट भी निर्धारित हो गया है। 140 रुपये एक पैंट-शर्ट सिलने पर मिलेंगे। आपूर्ति होने के बाद भुगतान कराया मिलेगा। समय से समस्त ड्रेस सिलकर तैयार हो जाएंगी। किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हैं। कोरोना के चक्कर में थोड़ा विलम्ब जरुर हुआ लेकिन अब कोई समस्या नहीं है। समय के साथ ड्रेस तैयार है।
-विपिन चौधरी, डीसी एनआरएलएम


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Monday, August 24, 2020

हरदोई : चयन वेतन के नाम पर मांगा जा रहा सुविधा शुल्क

चयन वेतन के नाम पर मांगा जा रहा सुविधा शुल्क

हरदोई। हरपालपुर ब्लाक के दो शिक्षक पिछले कई महीनों से ब्लाक से लेकर बीएसए ऑफिस का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन चयन वेतन का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों ने सिटी मजिस्ट्रेट को शिकायती पत्र सौंप कर मामले में कार्रवाई की मांग की है। हरपालपुर ब्लाक में कन्या प्राथमिक विद्यालय हरपालपुर के प्रधानाध्यापक राधेश्याम सिंह और प्राथमिक विद्यालय भुसेहरा के प्रधानाध्यापक मिस्टर लाल ने आरोप

लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारी हरपालपुर और ब्लाक बाबू बिना रुपये लिए उनका चयन वेतन नहीं दे रहे हैं।

Sunday, August 23, 2020

हरदोई : रसोइयों ने मांगा लॉकडाउन का बकाया मानदेय

हरदोई : रसोइयों ने मांगा लॉकडाउन का बकाया मानदेय
 

हरदोई। रसोइया जन कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को बीएसए हेमंत राव को शिक्षा निदेशक के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।  पदाधिकारियों ने लॉकडाउन के दौरान क्वारंटीन सेंटरों में काम करने वाले रसोइयों के बकाया मानदेय का भुगतान करने की मांग की।


सौंपे गए ज्ञापन में जिलाध्यक्ष रामकुमार गौतम ने कहा कि रसोइयों ने कठिन समय में भी क्वारंटीन सेंटरों में दो माह का तक अपना काम ईमानदारी से किया, लेकिन अब तक का करने वाले रसोइयों को उस अवधि का मानदेय नहीं मिला है। कहा कि मानदेय न मिलने के कारण वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। 


कोरोना काल में लोगों को परेशानी न हो इसके लिए रसोइयों ने क्वारंटीन सेंटर पर बिना किसी संपत्ति के दिन रात काम किया है।
बावजूद इसके उनके बकाया रुपये अभी तक नहीं दिए गए। इससे परेशान होकर पदाधिकारियों ने जल्द से जल्द बकाया मानदेय का भुगतान करने की मांग की। इस मौके पर रामश्री, कमला, रेशमा, सुनीता, श्यामा व सुशीला आदि मौजूद रहीं।

Thursday, August 13, 2020

हरदोई : बीईओ के गालीगलौज करने का ऑडियो वायरल, निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति एक शिक्षक को क्षमादान और दूसरे पर की थी कार्रवाई

बीईओ के गालीगलौज करने का ऑडियो वायरल, निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति एक शिक्षक को क्षमादान और दूसरे पर की थी कार्रवाई।

भरावन : शाहाबाद प्रकरण के बाद अब भरावन बीईओ भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गए हैं। शिक्षा विभाग के एक बाबू को गाली गलौज करते हुए उनका वीडियो वायरल हुआ है। एक ही विद्यालय में निरीक्षण के दौरान एक को क्षमादान व दूसरे पर कार्रवाई की बात पर तनातनी बताई जा रही है। 

भरावन खंड शिक्षा अधिकारी ने 31 जुलाई को क्षेत्र के कई विद्यालयों का निरीक्षण किया था। एक ही विद्यालय में दो शिक्षक उन्हें अनुपस्थित मिले। आरोप है कि एक शिक्षक से बाद में हस्ताक्षर करा लिए गए जबकि दूसरे पर कार्रवाई कर दी गई। इसका विरोध कार्यालय के एक बाबू ने कर दिया। उस दौरान बीईओ ने उन्हें खूब खरी खोटी सुनाई। इधर शिक्षामित्रों व शिक्षकों के मामले में विभाग से सूचनाएं मांगने में सक्रिय प्राथमिक विद्यालय कुकुरी में तैनात शिक्षामित्र ने उसी दिन बीईओ से जब वार्ता की और शिक्षक को अभयदान से लेकर बाबू के संबंध में पूछा। तो बीईओ ने बाबू से फोन पर ही गाली गलौज कर दी। इस गाली गलौज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है। शाहाबाद के बाद ये दूसरा प्रकरण है जब शिक्षा विभाग सुर्खियों में है।


आज सौंपा जाएगा बीडीओ को ज्ञापन

भरावन : जूनियर शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष कमलाकांत ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में लाया गया है। शिक्षकों के साथ लगातार भेदभाव हो रहा है। इसको लेकर जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन 13 अगस्त को खंड विकास अधिकारी को दिया जाएगा।


सुनने में अमर्यादित वीडियो : प्रदेश अध्यक्ष

भरावन : जूनियर शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी का कहना है कि मामला उन तक भी लाया गया है। ऑडियो सुनने में अमर्यादित है। सरकारी सेवारत अधिकारियों को ये कोई शोभा नहीं देता इसके अलावा भरावन में शिक्षकों ने बीईओ के खिलाफ भेदभाव करने के भी आरोप लगाए हैं। कहा कि शीघ्र ही उच्च अधिकारियों के संज्ञान में ये मामला लाएंगे।

शाहाबाद भरखनी बीईओ हो चुकी निलंबित 

हरदोई : पेंशन से रुपये मांगने का वीडियो वायरल होने के बाद भरखनी शाहाबाद बीईओ निलंबित हो चुकी हैं।

Wednesday, August 12, 2020

हरदोई : बीईओ के रिश्वत मामले में कई नेता भी लपेटे में, डायट से किया गया बीईओ को सम्बद्ध

शाहाबाद और भरखनी विकास खंड खंड शिक्षा अधिकारी शुचि गुप्ता के खिलाफ रिटायर शिक्षक से पेंशन पत्रावली को स्वीकृत कराने के एवज में 10 हजार रुपये मांगने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है। इसके बाद पुलिस मामले की खोजबीन में जुट गई है। मामले में कई बड़े नेता भी लपेटे में आ रहे हैं। चर्चा है कि उनकी भी ऊपरी कमाई में हिस्सेदारी रहती थी।

एक महिला नेता ने दिलवाया था शाहाबाद ब्लॉक का चार्ज

बेसिक शिक्षा विभाग के जानकारों के मुताबिक एक महिला नेता ने बीईओ को शाहाबाद विकास खंड का अतिरिक्त चार्ज दिलाया था। इसके बाद उनकी सिफारिशों ने जमकर असर दिखाया। वहीं बीईओ को भी अपने गृह जनपद के नजदीक पोस्टिंग मिल गई। नेता व अफसर का गठजोड़ शिक्षकों के लिए मुसीबत बन गया। यह खेल कई महीने तक चलता। इसके बाद परेशान शिक्षक नेताओं ने योजनाबद्ध तरीके से वीडियो बनवाया। इसके बाद उसे सार्वजनिक किया तो सियासत में ही तहलका मच गया।

बीईओ ने वीडियो में बीएसए द्वारा रुपये लिए जाने की बेबुनियाद बातें कहीं हैं। हो सकता है कि ऐसा रिटायर शिक्षक पर दबाव बनाने के लिए किया हो। मैने कार्यभार ग्रहण करने के बाद पूरी पारदर्शिता से काम किया है। मामले को गंभीरता से लेकर शासन स्तर पर लिखापढ़ी की। इसी के बाद बीईओ के निलंबन की कार्रवाई हुई है। -हेमन्तराव, बीएसए हरदोई

डायट से किया गया है बीईओ को संबद्धः रिपोर्ट दर्ज होने व निलंबित होने के बाद बीईओ को डायट से संबद्ध किया गया है। पुलिस के अलावा विभागीय टीम भी इस मामले में जांच करेगी। सहायक शिक्षा निदेशक माया 1. राम ने भेजे पत्र में लिखा है कि मंडलीय शिक्षा निदेशक बेसिक लखनऊ मंडल को पदेन जांच अधिकारी नामित किया गया है। बीएसए हेमन्तराव को निर्देश दिए गए हैं कि बीईओ शुचि गुप्ता के खिलाफ आरोप पत्र गठित कर साक्ष्यों समेत एक सप्ताह के अंदर निदेशालय को उपलब्ध कराएं।

करीब दस दिन तक यह मामला ठंडे बस्ते में रहने के बाद जब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ तो जिम्मेदार जागे। बेसिक शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो विधानसभा शाहाबाद, सवायजपुर क्षेत्र के साथ ही जिले स्तर के कई नेताओं का बीईओ पर वरदहस्त था। यही वजह थी कि विभाग के अधिकारी भी उनके ऊपर कार्रवाई करने | से कतराते रहे। इस बीच वीडियो शासन स्तर पर पहुंचा तो जमकर फजीहत हुई। भ्रष्टाचार के मामले में लीपापोती को लेकर विपक्षी दलों ने भी निशाना साधा। सत्ता पक्ष पर भ्रष्टाचार से जुड़े केस में बीईओ को बचाने के आरोप लगाए। इसके बाद शासन स्तर से कार्रवाई का रमजान आया तो जनपद स्तर से भी लिखापढ़ी की गई।

वीडियो में भी एक अध्यक्ष का जिक्र कई बार हुआ है। कई बार बीईओ के कार्यक्षेत्र बदले गए लेकिन भरखनी की स्थिति जस की तस रहने की वजह सियासी संरक्षण ही माना गया है। वहीं इस मामले की जांच डिप्टी एसपी अखिलेश राजन को सौंपी गई है। सीओ का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी। तथ्यों के आधार विवेचना होगी। जो दोषी होगा उसके खिलाफ एक्शन होगा।