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Friday, July 3, 2026

हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह निलंबित, भर्ती में हेरफेर के गंभीर आरोप, जांच जारी

हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह निलंबित, भर्ती में हेरफेर के गंभीर आरोप, जांच जारी

02 जुलाई 2026
हरदोई। शिकायतों और अनियमितताओं के जाल में फंसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह को आखिरकार शासन ने निलंबित कर दिया। बीएसए पर लगे आरोपों की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई। डॉ. अजित को बेसिक शिक्षा निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया था। उनके खिलाफ विभागीय जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक (षष्ठ मंडल) करेंगे।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कुछ गंभीर शिकायतें जिलाधिकारी अनुनय झा को मिली थीं। इस पर उन्होंने जांच के लिए नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। एसडीएम सदर, संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रमेंद्र सिंह इसमें सदस्य थे। जांच टीम ने 61 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पत्रावली गायब होने, ईसीसीई एजुकेटर भर्ती परीक्षा में शासनादेश का पालन न करने, सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन और अन्य देयताओं से संबंधित पत्रावलियों को लंबित रखने की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट डीएम को 20 जून को सौंपी थी।

इसी रिपोर्ट पर डीएम अनुनय झा ने बीएसए डॉ. अजित सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय जांच कराए जाने की संस्तुति की थी। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को बीएसए को निलंबित कर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि निलंबन अवधि में बीएसए निदेशायल से संबद्ध रहेंगे। मामले की विस्तृत जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक करेंगे।
 



हरदोई बीएसए के निलंबन की संस्तुति के साथ उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश, डीएम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत

पदेन दायित्वों में गंभीर लापरवाही बरतने और कार्यशैली पर सवाल

23 जून 2026
हरदोई: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डाक्टर अजित सिंह के खिलाफ रिश्वत मांगने और लेनदेन से जुड़े आरोपों की एफआईआर की पुलिस जांच जारी रहने के बीच जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर डीएम ने बीएसए के निलंबन और शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की संस्तुति की है।

जांच समिति, जिसमें नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्रवक्ता डाक्टर रामेंद्र सिंह शामिल थे, ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीएसए पर न केवल नियुक्ति पत्र वितरण में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, बल्कि पेंशन पत्रावलियों से जुड़े मामलों में भी 20 हजार रुपये मांगने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि डाक्टर अजित सिंह द्वारा अपने पदेन दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया गया। उनकी कार्यशैली और आचरण को पद एवं गरिमा के प्रतिकूल पाया गया है। समिति ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायालय, शासन और निदेशालय के निर्देशों के मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह इस संवेदनशील पद पर रहने योग्य नहीं हैं। 

समिति ने अपने निष्कर्ष में यह भी कहा है कि जांच के दौरान सामने आए सीमित मामलों के आधार पर यह आशंका मजबूत होती है कि मृतक आश्रितों की नियुक्ति, सेवा संबंधी निलंबन-बहाली, वित्तीय स्वीकृतियों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में भी व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हो सकती हैं। ऐसे सभी प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है। 

जांच रिपोर्ट में उच्च स्तर पर यह भी संस्तुति की गई है कि बीएसए डाक्टर अजित सिंह के पूरे कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र और व्यापक जांच कराई जाए, ताकि सभी लंबित और विवादित मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। डीएम की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इन सभी तथ्यों को गंभीर प्रशासनिक चूक और संभावित अनियमितताओं के रूप में दर्ज किया गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई अब शासन स्तर पर तय की जाएगी।

रची गई साजिश, आरोप फर्जीः बीएसए डाक्टर अजित सिंह पर लगे आरोपों के बारे में उनका पक्ष लेने का प्रयास किया, जिसमें सोमवार की शाम बीएसए का प्राइवेट नंबर बंद आता रहा। सीयूजी नंबर पर फोन किया तो वह उठा नहीं। पूर्व में बीएसए डाक्टर अजित सिंह से हुई वार्ता में उन्होंने रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों को पूरी तरह से फर्जी बताया था। बीएसए डाक्टर अजित सिंह के अनुसार उन्हें प्रशासन की तरफ से पूरी साजिश कर फंसाया जा रहा है, जिसके लिए फर्जी रिपोर्ट बनाई गई है। इसमें कई लोग शामिल हैं, जोकि उन्हें किसी भी तरह से हटवाना चाहते हैं।

प्रशासन ने आरोपों को नकारा
बीएसए डाक्टर अजित सिंह द्वारा प्रशासन पर साजिश रचे जाने के आरोप में प्रशासन का कहना है कि बीएसए ने खुद अनियमितता की। फाइलों को गायब कराया। पेंशन पत्रावलियों में हस्ताक्षर नहीं किए। बिना किसी कारण के पत्रावलियों को लंबित रखा। बीएसए के लिपिकों ने ही बयान दिए हैं। अब बीएसए फंस रहे तो साजिश बता रहे हैं।



हरदोई BSA पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप पर FIR दर्ज, जानिए पूरा मामला  

20 जून 2026
हरदोई ।  बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजीत सिंह पर शुक्रवार रात 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि अजीत सिंह ने एजुकेटर भर्ती से जुड़ी एक संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर 5 लाख रुपए की मांग की थी। संस्था अध्यक्ष ने 2 लाख रुपए ले भी लिए थे। 

हालांकि बीएसए ने आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा- डीएम अनुनय झा ने जाल बिछाकर मुझे फंसाया है। वह मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, लेकिन साबित नहीं कर पाए। 


एक दिन पहले 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल दस्तावेज गायब मिले थे। डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

जानिए पूरा मामला 
गोंडा के तरबगंज स्थित उज्ज्वला सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी की शिकायत पर बीएसए डॉ. अजित सिंह के खिलाफ हरदोई में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ओम प्रकाश तिवारी ने बताया- यूपी के कई जिलों में ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर के 210 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के लिए हमारी संस्था को अधिकृत किया गया था।

उनका दावा है कि उसने सेवायोजन पोर्टल से मिले 4,590 आवेदनों में से जिला चयन समिति द्वारा किए गए रैंडमाइजेशन के माध्यम से 630 अभ्यर्थियों का चयन संबंधी डेटा प्राप्त कर लिया था। इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया। अनुबंध के लगभग 6 महीने बाद जब उन्होंने कार्य को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क किया तो बीएसए ने उन्हें कार्यालय बुलाया और 5 लाख रुपए रिश्वत मांगी।

आरोप है कि रुपए न देने पर संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और जमानत राशि जब्त कराने की धमकी दी। संस्था अध्यक्ष का यह भी आरोप है कि दबाव में आकर उन्होंने 2 लाख रुपए दे दिए, लेकिन इसके बाद भी बाकी रुपए मांगे जाते रहे। लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा।


बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने बताया- यह जिलाधिकारी का ट्रैप है, जिसमें मुझे फंसाया गया है। वह लगातार मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे। मैंने उनसे कहा था कि यदि कोई भ्रष्टाचार हुआ है तो उसे साबित करें। इसके बाद मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। मुझे अपशब्द कहे गए और यहां तक कहा गया कि मैं जिले में न रहूं और यहां से चला जाऊं।

एडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने भी मुझे प्रताड़ित किया। मेरे कार्यालय के दो बाबुओं को अपने यहां अटैच कर लिया गया और अपने यहां के दो बाबुओं को मेरे कार्यालय में भेज दिया गया, ताकि मेरी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।

एजुकेटर भर्ती परीक्षा से संबंधित जो भी कार्रवाई हुई, वह जिलाधिकारी के निर्देशों पर की गई। पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में संपन्न हुई। इसके बावजूद अब मुझे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। बैठकों में मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया गया और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। जिलाधिकारी ने फर्म संचालक को बुलाकर मेरे खिलाफ षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

यदि मैंने किसी प्रकार का भ्रष्टाचार किया है तो एजुकेटर पदों पर भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों से पूछताछ कर ली जाए। यह पता कर लिया जाए कि क्या मैंने किसी से कोई धनराशि मांगी है या किसी प्रकार की अवैध मांग की है। यह मेरे खिलाफ रची गई एक सुनियोजित साजिश है। मैं इसका कानूनी तरीके से सामना करूंगा। इस साजिश में एडीएम की भी भूमिका है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूं।


डीएम के निर्देश पर टीम ने आकर की जांच बेसिक शिक्षा विभाग में 29 हजार शिक्षक भर्ती से संबंधित 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां गायब मिली थीं। विवाद बढ़ने के बाद डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

जांच के दौरान कुछ जरूरी पत्रावलियां रिकॉर्ड से गायब मिलीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

जांच में नहीं मिले 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख जांच में यह भी सामने आया कि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया का दायित्व भी उनके पास था।

Wednesday, September 17, 2025

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शिक्षा निदेशालय में बीएसए तलब, जानिए! विस्तार से, क्या है पूरा मामला?

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शिक्षा निदेशालय में बीएसए तलब


हरदोई: बेसिक शिक्षा विभाग में खंड शिक्षा अधिकारियों की बातचीत के वायरल हुए ऑडियो बीएसए के लिए मुसीबत बन गए हैं। मामले को शासन नें संज्ञान में लेते हुए उच्चस्तरीय जाँच कराई जा रही है, जिसमें बीएसए को शिक्षा निदेशक नें वायरल ऑडियो के सम्बन्ध में अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया है। 

अपर शिक्षा निदेशक कामता राम पाल नें बीएसए हरदोई को पत्र जारी करते हुए बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी सीमा गौतम द्वारा एक शिक्षक से रिश्वत के पैसे मांगने का ऑडियो, व बीएसए के लिए बीईओ अनिल झा द्वारा सीमा गौतम से रुपये की मांग करने का दूसरा ऑडियो सामने आया है, जिसकी जाँच डीएम हरदोई के निर्देश पर सीडीओ हरदोई से कराई गई है। जाँच के बाद बीएसए की मुसीबत और बढ़ गई है, उन्हें 18 सितंबर को दोपहर 01 बजे शिक्षा निदेशक के प्रयागराज स्थित कार्यालय में तलब किया गया है।


क्या है पूरा मामला, जानिए! विस्तार से

हरदोई।  जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में चल रही साजिशों के ऑडियो वायरल हो रहे हैं। कुछ माह पहले वायरल हुए एक ऑडियों की जांच के बाद एक खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन में की गई।

इसके बाद संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी ने भी ऑडियो वायरल कर दिया। इस ऑडियो में कथित तौर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के नाम पर एक लाख रुपये की मांग दूसरे खंड शिक्षा अधिकारी कर रहे हैं। हालांकि बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी ने इसका खंडन किया है।

सुरसा में खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर सीमा गौतम की तैनाती थीं। लगभग तीन माह पहले कथित रूप से एक ऑडियो वायरल हुआ। दावा है कि सुरसा के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात मुनिंद्र कुमार के निलंबन के कई माह बाद भी न तो जांच पूरी की गई और न ही आरोप पत्र दिया गया। आरोप था कि सीमा गौतम ने दस हजार रुपये लिए थे।

काम न होने पर यही रुपये वापस मांगे जाने का ऑडियो होने का दावा था। मामला डीएम तक पहुंचा, तो उन्होंने जांच कराई। बीएसए विजय प्रताप सिंह ने अगस्त में 13 खंड शिक्षा अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल किया। सीमा गौतम को सुरसा से हटाकर जिला मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया। बीएसए का दावा है कि तीन दिन पहले सीमा गौतम के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई है।

दूसरी ओर बृहस्पतिवार शाम से एक ऑडियो वायरल हो गया। सीमा गौतम का दावा है कि ऑडियो में उनकी और हरियावां के खंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार झा के बीच बातचीत है। सीमा गौतम का दावा है कि अनिल झा बीएसए के नाम पर उनसे एक लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। यह मांग कंपोजिट ग्रांट से मिले बजट को लेकर की जा रही है। उनका दावा यह भी है कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से कंपोजिट ग्रांट के बजट से एक-एक लाख रुपये की वसूली अनिल कुमार झा ने बीएसए के लिए की है।


किसने क्या कहा

ऑडियो पुराना लग रहा है। इसमें कहीं भी रुपये की मांग नहीं की गई है। मेरा नाम या पदनाम इसमें कहीं नहीं आया है। किसी भी खंड शिक्षा अधिकारी से कोई वसूली नहीं की गई है।-विजय प्रताप सिंह, बीएसए 

-जिलाधिकारी महोदय ने प्रत्येक विकास खंड में एक कंपोजिट विद्यालय को मॉडल विद्यालय बनाने के लिए कहा था। इसी क्रम में खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय के रूप में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से बात की थी। इसी क्रम में सुरसा की तत्कालीन बीईओ सीमा गौतम से भी बात हुई थी। रुपये मांगे जाने की बात बिल्कुल गलत है।-अनिल कुमार झा, खंड शिक्षा अधिकारी, हरियावां

बीएसए ने सभी बीईओ मुख्यालय के माध्यम से प्रति ब्लॉक एक लाख रुपये की मांग की थी। जिन्होंने नहीं दिया बारी-बारी से उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। मेरे खिलाफ भी शासन को पत्र लिखा गया है। कई और साजिश कर आईजीआरएस पर भी मेरी शिकायतें कराई गईं। एडिटेड ऑडियो भी वायरल कराए गए। -सीमा गौतम, खंड शिक्षा अधिकारी, (मुख्यालय से संबद्ध)

Saturday, December 21, 2024

शिक्षक के निलंबन के मामले बीएसए हरदोई के खिलाफ जांच कर तीन महीने में रिपोर्ट करें दाखिल : हाईकोर्ट

शिक्षक के निलंबन के मामले बीएसए हरदोई के खिलाफ जांच कर तीन महीने में रिपोर्ट करें दाखिल : हाईकोर्ट

शिक्षक के निलंबन के मामले में कार्रवाई को पाया अनुचित


लखनऊ। हरदोई के एक शिक्षक के निलंबन मामले में बीएसए ने हाईकोर्ट लखनऊ के आदेश की अवहेलना करते हुए आदेश पास करने पर हाईकोर्ट ने बीएसए के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अदालत ने बीएसए के खिलाफ जांच कर तीन महीने में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। साथ ही जांच पूरी होने तक बीएसए को कोई जिम्मेदारी न देने के भी निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की एकल पीठ ने राजीव कुमार मिश्रा की याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई नौ अप्रैल को नियत की है।

याची के अधिवक्ता विजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अदालत ने याची के खिलाफ आदेश पारित करने से पहले याची को जीवन निर्वाह भत्ता देने का आदेश दिया था। संबंधित बीएसए ने अदालत के आदेश की अवहेलना करते हुए पिछली दिनांक में फर्जी आदेश पारित कर दिया।

अदालत ने बीएसए के आदेश पर नाराजगी जताते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। अदालत ने बीएसए द्वारा पारित 10 अप्रैल के आदेश को भी निरस्त कर दिया है।




हरदोई बीएसए को निलंबित करने का हाईकोर्ट का आदेश, निलंबित शिक्षक को बर्खास्त करने और उसके देयकों के भुगतान के बारे में उच्च न्यायालय के अवहेलना पड़ी भारी  

हरदोई। बेसिक शिक्षा अधिकारी वीपी सिंह को मनमानी भारी पड़ गई है, उनके द्वारा निलंबित शिक्षक को टर्मिनेट करने और उसके देयकों के भुगतान के बारे में उच्च न्यायालय के दो निर्देशों की अवहेलना की गाज जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह पर गिरी है। दरअसल हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस अब्दुल मुईन ने बीएसए वीपी सिंह को निलंबित करने का शासन को आदेश दिया है। मामला बावन ब्लॉक के सधई बेहटा परिषदीय विद्यालय में तैनात रहे अध्यापक राजीव कुमार मिश्रा से जुड़ा है। 


जानकारी के अनुसार राजीव को विभाग ने निलंबित और बाद में बर्खास्त कर दिया था। राजीव विभाग की कार्यवाही और देयकों आदि के भुगतान नहीं होने का मामला उच्च न्यायालय लखनऊ ले गए थे। बताते हैं, देयकों के भुगतान को लेकर हाई कोर्ट ने दो मर्तबा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह को दिशा निर्देश जारी किए थे। लेकिन, वीपी सिंह ने हाई कोर्ट के निर्देश पर अमल नहीं किया। न्यायालय की अवमानना से क्षुब्ध जस्टिस अब्दुल मुईन ने हरदोई बीएसए को निलंबित करने का आदेश शासन को दिया है और भविष्य में कभी बीएसए जैसे महत्वपूर्ण पर से इन्हें दूर रखने के दिशा निर्देश सरकार को जारी किए हैं। 


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Tuesday, July 23, 2024

शासन ने गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में बीईओ को किया निलंबित

शासन ने गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में बीईओ को किया निलंबित


हरदोई। शासन ने गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों में संडीला के तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन्हें मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक अयोध्या के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। निलंबित बीईओ इन दिनों बाराबंकी में तैनात हैं। संडीला के बीआईओ के पद पर तैनात रहे दीपेश कुमार को लेकर गंभीर गोपनीय शिकायत बीएसए को मिली थी। उन्होंने इस मामले में गोपनीय जांच कराई तो पता चला कि बीईओ दीपेश कुमार ऑफलाइन निरीक्षण  के जरिए शिक्षकों से धन उगाही करते हैं।

ब्लाक संसाधन केंद्र संडीला के लिपिक और कार्यालय सहायकों के माध्यम से अध्यापकों से कंपोजिट ग्रांट, निर्माण कार्यों, स्पोर्ट ग्रांट आदि में रुपये की मांग करते हैं। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावी होने के बाद भी दीपेश कुमार ने बड़ी संख्या में अनुदेशकों, शिक्षामित्र और शिक्षकों को संबद्ध कर दिया।

आचार संहिता की उलझन के साथ ही निर्वाचन संबंधी कार्यों में भी दीपेश कुमार ने लापरवाही की। आईजीआरएस के प्रकरणों का भी निस्तारण नहीं किया । इसके चलते अपर शिक्षा निदेशक बेसिक कामता रामपाल ने दीपेश कुमार को निलंबित कर दिया है। दीपेश कुमार का हाल ही में जनपद से तबादला हो गया था। इन दिनों वह बाराबंकी जनपद के पूरे ढलई ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात थे।


Thursday, July 11, 2024

सुर्खियों में हरदोई की वर्तमान और पूर्व BSA का विवाद, नई BSA को विभागीय दायित्व न सौंपने पर पत्र लिख DGSE से की गई शिकायत


सुर्खियों में हरदोई की वर्तमान और पूर्व BSA का विवाद, नई BSA को विभागीय दायित्व न सौंपने पर पत्र लिख DGSE से की गई शिकायत

पूर्व बीएसए पर कार्य में बाधा डालने और अफवाह फैलाने का लगा आरोप, शासन तक पहुंचा मामला

पूर्व BSA विजय प्रताप सिंह ने नए BSA को नहीं सौंपा CUG नंबर, आवास और विभाग की गाड़ी


उत्तर प्रदेश का बेसिक शिक्षा विभाग आजकल सुर्खियों में है। पहले शिक्षकों की ऑनलाइन हजारी को लेकर तो अब अपने ही दो जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के बीच के विवाद को लेकर विभाग चर्चा में है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में तबादला नीति के तहत बेसिक शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा अधिकारियों के तबादले किए गए हैं।


जिसके तहत हरदोई के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह का स्थानांतरण हरदोई से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय कर दिया गया। वहीं, हरदोई में रतन कीर्ति को नई तैनाती दी गई और उन्होंने ज्वाइन किया। सरकारी नंबर और विभागीय गाड़ी नए बीएसए को नहीं दिया गया।

दरअसल, हरदोई की नई बेसिक शिक्षा अधिकारी के द्वारा डीजी बेसिक शिक्षा को पत्र लिख पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह की शिकायत की गई। लिखा गया कि विजय सिंह द्वारा विभागीय दायित्वों को सौंपने में सहयोग नहीं किया गया।

फिलहाल शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों के विवाद में पूरे हरदोई जिले के सभी विद्यालयों में शिक्षा प्रभावित है। शासन ने गंभीर मानते हुए विभागीय जांच गठित कर दी 


3 जुलाई को पदभार ग्रहण करने के बाद से पूर्व बीएसए विजय प्रताप सिंह और नई बीएसए रतन कीर्ति के बीच आपसी तनातनी देखने को मिल रही है। बीएसए विजय प्रताप सिंह के तबादले के बाद जनपद में एक बार चर्चा जोरों से हुई कि बीएसए विजय प्रताप सिंह ने अपना तबादला रुकवा लिया है और वही अब हरदोई के बीएसए बने रहेंगे।हालाँकि इस बाबत कोई भी शासनादेश जारी नहीं हुआ जबकि नई बीएसए रतन कीर्ति ने 3 जुलाई को पदभार ग्रहण किया और लगातार स्कूलों का निरीक्षण भी कर रही हैं।

इन सबके बीच रतन कीर्ति ने एक पत्र जारी कर तत्कालीन बीएसए पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रतन कीर्ति ने कहा कि 3 जुलाई को पदभार ग्रहण करने के बाद तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह का रवैया उनके प्रति सहयोगात्मक नहीं रहा।उनके द्वारा लगातार झूठी अफवाहें फैलाई जा रही है कि वह पुनः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरदोई के पद पर आसीन होने वाले हैं साथ ही उनके द्वारा सीयूजी नंबर, विभागीय गाड़ी व विभागीय आवास अब तक उनको नहीं दिया गया है। बीएसए रतन कीर्ति ने तत्कालीन बीएसए विजय प्रताप सिंह पर आरोप लगाया है कि उनके द्वारा विभागीय कर्मचारियों को हिदायत दी गई है कि उन्हें किसी प्रकार से कार्यालय में कोई कार्य सुचारू रूप से न करने दिया जाए।

बीएसए रतन कीर्ति ने कहा कि वह प्रतिदिन सुबह 9:30 पर कार्यालय पहुंच जाती हैं मोबाइल न होने और लगातार तत्कालीन बीएसए के दखल से स्कूल से संबंधित कार्यों को करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और साथ ही मानसिक पीड़ा उठानी पड़ रही है। हरदोई के बेसिक शिक्षा विभाग में दो बेसिक शिक्षा अधिकारियों के बीच चल रही खींचतान का मामला शासन तक पहुंच गया है।

जानकारी के मुताबिक बीएसए रतन कीर्ति ने शासन को तत्कालीन बीएसए विजय प्रताप सिंह की शिकायत की है जिसे शासन ने गंभीर मानते हुए विभागीय जांच गठित कर दी है। हरदोई के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह की कार्यशाली को लेकर पहले भी कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं। 

Thursday, December 21, 2023

विभागीय छवि धूमिल करने के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित

विभागीय छवि धूमिल करने के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित


हरदोई : बेसिक शिक्षा विभाग में विभागीय मिलीभगत से शिकायतों के नाम पर धन वसूली के आरोप में पहली बार इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है। जिलाधिकारी के पूरा मामला संज्ञान में लेने के बाद न केवल इस मामले में तत्कालीन बीईओ समेत पांच पर एफआइआर दर्ज कराई गई थी। बल्कि बीईओ को निलंबित कर उच्च स्तरीय जांच शुरू की गई है। विभाग में ऐसे मामले तो कई बार आए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई थी। अब हुई कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है।


हरदोई : डीएम की संस्तुति और एफआईआर के बाद बीईओ निलंबित, बैठी जांच


20 दिसंबर 2023



10 दिसंबर 2023

बीईओ के खिलाफ शासन से डीएम ने की बर्खास्तगी की संस्तुति, शिक्षा विभाग में मची खलबली

संगठित गिरोह बनाकर शिक्षक व विभागीय अधिकारियों का सूचना के अधिकार के नाम पर कर रहे थे आर्थिक व मानसिक दोहन




हरदोई। डीएम ने बीईओ की बर्खास्तगी की संस्तुति शासन से की है। वहीं, अभी कई अन्य पर भी कार्रवाई हो सकती है। इस मामले के बाद शिक्षा विभाग में खलबली है।


प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग संगठित गिरोह बनाकर शिक्षक व विभागीय अधिकारियों का सूचना के अधिकार के नाम पर आर्थिक व मानसिक दोहन कर रहे है। इस पर जिलाधिकारी ने प्रथम दृष्टया तत्कालीन बीईओ बेंहदर अशोक यादव व कार्यालय लिपिक मधुर पाल का मोबाइल जमा करा लिया था और मोबाइल की साइबर सेल से जांच कराई थी।


जांच टीम ने पाया था कि बीईओ अशोक यादव, पिहानी के कुल्लही निवासी विमलेश शर्मा, सुभाष नगर निवासी अतुल कुमार सिंह, चांद बेहटा निवासी भगत बाबा तेज गिरि और आशा निवासी राम शरण गुप्ता से विभागीय सूचनाएं साक्षा करते हैं और उसी पर विभाग में वह लोग शिकायतें दर्ज कराके अधिकारियों व कर्मचारियों को ब्लैकमेल करते हैं। डीएम के निर्देश पर शहर कोतवाली में पांचों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।


इस मामले में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बीईओ अशोक यादव की बर्खास्तगी की संस्तुति की गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि बीईओ के खिलाफ बर्खास्तगी की संस्तुति शासन से की गई है और पुलिस को इस मामले कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।


बीईओ व विमलेश शर्मा के बीच हुए 150 पेज की चैटिंग

जांच टीम ने पाया कि बीईओ अशोक यादव और विमलेश शर्मा के बीच व्हाट्सएप पर जो चैट की गई, उसमें बीईओ पहले जानकारी देते थे, जिस पर विमलेश शर्मा शिकायत बनाता था। इसमें बाद में बीईओ संसोधन करके वापस करते थे। वहीं, अगले दिन शिकायत सूचना के अधिकारी के रूप में विभाग में दी जाती थी। इस तरह 150 पेज की चैटिंग मिली है। इसके अलावा 32 जीवी में दोनों के बीच के वार्ता का रिकार्ड है। विमलेश ने विभाग में सूचना के अधिकार के 50, अतुल सिंह ने 60, बाबा तेज गिरी ने 30 और रामशरन ने 102 आवेदन किए हैं।


बीईओ समेत पांच पर रिपोर्ट, बर्खास्तगी की संस्तुति

हरदोई। बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ ही विभाग से संंबंधित गोपनीय जानकारियां बाहरी लोगों को देकर वसूली का संगठित गिरोह चलाने के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी समेत पांच लोगों के खिलाफ शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है। जांच समिति ने खंड शिक्षा अधिकारी की बर्खास्तगी की संस्तुति की है।


बीती पांच सितंबर को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के लेटर पैड पर आलाेक कुमार मिश्र ने डीएम एमपी सिंह और बीएसए विजय प्रताप सिंह से शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में कहा था कि पिहानी कोतवाली क्षेत्र के कुल्लही निवासी विमलेश शर्मा, शहर कोतवाली क्षेत्र के सुभाष नगर निवासी अतुल कुमार सिंह और आशा निवासी राम शरण गुप्ता एक संगठित गिरोह चलाते हैं। 


विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों की शिकायत कर आर्थिक शोषण करते हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारियां सूचना का अधिकार के माध्यम से मांगते हैं। डीएम ने इस पत्र पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। जांच समिति में एसडीएम शाहाबाद, सीओ शाहाबाद और बीएसए शामिल थे।


टीम को पता चला कि इस पूरे खेल के पीछे कुछ विभागीय लोग भी शामिल हैं। इस जानकारी पर डीएम ने बेहंदर के तत्कालीन बीईओ अशोक कुमार यादव, कनिष्ठ लिपिक मधुर पाल के मोबाइल फोन जब्त करा लिए और साइबर सेल से इसकी जांच कराई। जांच में पता चला कि अशोक कुमार यादव, विमलेश शर्मा को लगातार विभागीय जानकारियां दे रहा था। अधिकांश शिकायतें विमलेश शर्मा, भगत बाबा तेजगिरि ही तैयार करते थे। सोशल मीडिया में शिकायतों का प्रचार प्रसार कर उगाही की जाती थी।


जांच रिपोर्ट के आधार परखंड शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार यादव के साथ ही कुल्लही निवासी विमलेश शर्मा, सुभाष नगर निवासी अतुल कुमार सिंह, आशा निवासी राम शरण गुप्ता और चांद बेहटा निवासी भगत बाबा तेज गिरि के खिलाफ जालसाजी, भयभीत करके वसूली करने, गोपनीय दस्तावेजों को अवांछित लोगों तक पहुंचाने और दूसरों को नुकसान पहुंचाने की साजिश करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।


शिकायतें लिखते थे दो लोग, दूसरे नामों से की जाती थी शिकायत
शहर कोतवाली में दर्ज कराई एफआईआर में स्पष्ट कहा गया है कि जब अशोक कुमार यादव का मोबाइल जब्त कर जांच साइबर सेल से कराई गई तो कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए। अधिकांश शिकायतें विमलेश शर्मा और भगत बाबा तेजगिरि तैयार करते थे। इन शिकायतों को तैयार करने के लिए अशोक यादव की मदद ली जाती थी। 

लोकायुक्त कार्यालय में शिकायतें मनोज कुमार द्विवेदी, उपेंद्र कुमार राजन, ब्रजेश सिंह, अमित कुमार यादव आदि नामों से की जाती थीं। इसी तरह जनसूचना अधिनियम के तहत जानकारी मांगने के लिए भी प्रश्न विमलेश और भगत बाबा तैयार करते थे, जबकि अन्य नामों से इन सूचनाओं को मांगा जाता था।


हो सकती है आजीवन कारावास तक की सजा
वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी दीक्षित के मुताबिक जिन धाराओं में मामला दर्ज हुआ है, वे संगीन हैं। शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 की धारा पांच के तहत दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। धारा 211 भी आरोपियों पर लगी है। इसमें सात वर्ष तक की सजा का नियम है।