वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा के लिए नई नीति से सरकार का इंकार, 2001 के शासनादेश का दिया हवाला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र में पूछे गए तारांकित प्रश्न संख्या-20 के उत्तर में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु फिलहाल कोई नई नीति या सेवा नियमावली बनाने पर सरकार विचार नहीं कर रही है।
सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा शर्तें 10 अगस्त 2001 के शासनादेश में पहले से निर्धारित हैं। इसके अनुसार अंशकालिक अध्यापकों का पारिश्रमिक विद्यालय प्रबंधन अपने संसाधनों से नियमित रूप से पूरे शिक्षण सत्र के दौरान देगा तथा उसका लेखा-जोखा भी रखा जाएगा। साथ ही यह भी प्रावधान है कि उनका भुगतान न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत कुशल श्रमिकों के लिए समय-समय पर निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होगा।
उत्तर में यह भी कहा गया है कि विद्यालय प्रबंधन ऐसे अंशकालिक शिक्षकों के लिए नियमानुसार भविष्य निधि (EPF) तथा जीवन बीमा जैसी योजनाएं भी लागू करेगा, जिनमें नियोक्ता का अंशदान प्रबंधन अपने निजी संसाधनों से वहन करेगा।
इस प्रकार सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए अलग से नई सेवा नीति बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है और वर्तमान व्यवस्था 2001 के शासनादेश के अनुसार ही संचालित रहेगी।
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