DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Wednesday, November 8, 2023

बहराइच की डीएम का विद्यालय निरीक्षण हुआ वायरल, विद्यालय की समस्याओं के लिए वास्तविक जिम्मेदारों पर कार्यवाही से निरीक्षण बना बेसिक शिक्षकाें के मध्य चर्चा का विषय

बहराइच की डीएम का विद्यालय निरीक्षण हुआ वायरल, विद्यालय की समस्याओं के लिए वास्तविक जिम्मेदारों पर कार्यवाही से निरीक्षण बना बेसिक शिक्षकाें के मध्य चर्चा का विषय


⚫ विद्यालय में गंदगी तो जिम्मेदार - सफाई कर्मचारी (निलंबित)

⚫ विद्यालय में फल नहीं बटा तो जिम्मेदार - ग्राम प्रधान (ग्राम प्रधान के अधिकार सीज)

⚫ विद्यालय परिसर के आंगनबाड़ी में बच्चे कम तो जिम्मेदार - सुपरवाइजर और डीपीओ के विरुद्ध कार्यवाही

⚫ विद्यालय परिसर में हैंडपंप खराब तो जिम्मेदार - सचिव और सहायक विकास अधिकारी (पंचायत)



बहुत दिन बाद ऐसा निरीक्षण देखने को मिला जिसमें निरीक्षण तो विद्यालय का हुआ लेकिन कार्रवाई विद्यालय स्टाफ के अलावा वास्तविक जिम्मेदारों पर हुई।                                        



विद्यालय में गंदगी देख भड़कीं डीएम, सफाई कर्मचारी निलंबित

बहराइच। कैसरगंज तहसील क्षेत्र के दो विद्यालय व परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों का सोमवार को निरीक्षण करने पहुंची डीएम मोनिका रानी गंदगी के बीच बच्चों की कक्षाएं संचालित होने पर कड़ा रुख अपनाया।


सफाई कर्मी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। फल वितरण न होने, पंचायत भवन में तालाबंदी पर एडीओ पंचायत, सचिव, सुपरवाइजर संग ग्राम प्रधान से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। लापरवाह अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों पर कड़ी कार्रवाई करने को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। डीएम सीधे प्राथमिक विद्यालय सौगहना पहुंची। परिसर में चारों ओर फैली गंदगी पर उनकी नजर पड़ी। 


प्रधान शिक्षिका से सफाई न होने की वजह पूछी। सफाई कर्मी के न आने की बात सुनकर डीपीआरओ को तत्काल कर्मचारी को निलंबित करने के निर्देश दिए। एमडीएम के मेन्यू की जांच किया । मेन्यू के अनुसार रोटी व सब्ज़ीयुक्त दाल के स्थान पर दाल व चावल बनाया गया था। दाल की गुणवत्ता भी खराब मिली। बच्चों की ओर से कई माह से फल न बांटे जाने ने का खुलासा किया गया। 


डीएम ने कड़ी नाराज़गी जाहिर किया। डीपीआरओ से ग्राम प्रधान का स्पष्टीकरण प्राप्त के निर्देश दिए। कहा कि जवाब सही न होने पर तत्काल अधिकार सीज कराएं। परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण के दौरान बच्चों की उपस्थिति कम पाए जाने पर सुपरवाइजर के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश डीपीओ को दिया। 


पंचायत भवन बन्द रहा हैण्डपम्प खराब पाया गया। डीएम एडीओ पंचायत व ग्राम सचिव पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। डीएम ने कहा कि किसी भी दशा में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी व कर्मचारी कार्रवाई से नहीं बचेंगे। ऐसे लोगों को चिंहित कर विभागीय कार्रवाई को लेकर शासन को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।


अब तीन साल की सेवा पर ही एडेड महाविद्यालयों के शिक्षकों का तबादला

अब तीन साल की सेवा पर ही एडेड महाविद्यालयों के शिक्षकों का तबादला


लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों की तीन साल की सेवा पर ही अब स्थानांतरण हो सकेगा। शासन के निर्देश पर उच्च शिक्षा विभाग इसके लिए नई नियमावली तैयार कर रहा है। इसके तहत प्रदेश के करीब 350 सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत 12 हजार शिक्षकों का एकल स्थानांतरण पांच साल के बजाय तीन सालों में ही किया जा सकेगा।


सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग को नए सिरे से स्थानांतरण नियमावली बनाने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि नई नियमावली तैयार होते ही प्रस्ताव तत्काल शासन को भेजें। विभाग को भेजे पत्र में शासन की ओर से यह भी कहा गया है कि चयनित शिक्षकों की तैनाती व्यवस्था एवं एकल स्थानांतरण नियमावली दोनों को सम्मिलित कर एकीकृत नियमावली भेेजें। निदेशक उच्च शिक्षा, ब्रह्मदेव ने कहा कि शिक्षकों की सेवा नियमावली में बदलाव पर शासन विचार कर रहा है।

Tuesday, November 7, 2023

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में शौचालय उपलब्ध कराने का राष्ट्रीय मॉडल सुनिश्चित करने को कहा, सैनेटरी नैपकिन बांटने की समग्र नीति तैयार करने का भी निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में शौचालय उपलब्ध कराने का राष्ट्रीय मॉडल सुनिश्चित करने को कहा, सैनेटरी नैपकिन बांटने की समग्र नीति तैयार करने का भी निर्देश 


कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने याचिका दाखिल कर लड़कियों के लिए अलग शौचालय की मांग की है

नई दिल्ली सरकारी : स्कूलों में सैनेटरी नैपकिन बांटने और उसके निस्तारण के बारे में राष्ट्रीय नीति का मसौदा तैयार हो चुका है। इस बात की जानकारी सोमवार को केंद्र सरकार की और से सुप्रीम कोर्ट में दी गई।


सरकार ने कोर्ट से चार सप्ताह का समय मांगते हुए कहा कि तैयार मसौदे पर सभी हित धारकों और आम जनता की राय आनी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय देते हुए निर्देश दिया कि वह सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लड़कियों के लिए उनकी संख्या के अनुपात में शौचालय का राष्ट्रीय माडल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करे। कोर्ट ने सैनेटरी  नैपकिन वितरण योजना पर केंद्र सरकार से कहा कि वह नीति को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न राज्य सरकारों की इस बारे में लागू योजनाओं को भी देखे और उसके बाद एक समग्र नीति बनाए। 


ये निर्देश प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कांग्रेस नेता जया ठाकुर की याचिका पर सुनवाई के दौरान सोमवार को दिए। जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मासिक धर्म स्वच्छता का मुद्दा उठाते हुए स्कूलों में छह से 12 कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं को सैनेटरी नैपकिन बांटने और लड़कियों के लिए अलग शौचालय के निर्माण की मांग की है।


 याचिकाकर्ता का कहना है कि मासिक धर्म स्वच्छता की व्यवस्था न होना लड़कियों की शिक्षा में एक बड़ी बाधा है। बहुत सी लड़कियां मासिक धर्म की स्वच्छता के लिए सैनेटरी नैपकिन और अलग शौचालय नहीं होने के कारण स्कूल छोड़ देती हैं। सोमवार को जब मामला सुनवाई पर आया तो केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि स्कूलों में  सैनेटरी नैपकिन बांटने और उसके निस्तारण के बारे में राष्ट्रीय नीति का मसौदा तैयार हो गया है। 


वकील ने कोर्ट से चार सप्ताह का और समय मांगते हुए कहा कि उस पर सभी हित धारकों और आम जनता की राय आनी है। कोर्ट ने अनुरोध स्वीकारते हुए केंद्र को चार सप्ताह का समय दे दिया। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार नीति को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न राज्यों में सैनेटरी नैपकिन स्कूलों में बांटने की योजनाओं को भी देख ले ताकि एक समग्र राष्ट्रीय नीति तैयार हो जया ठाकुर द्वारा पेश वरिष्ठ वकील विभा दत्त मखीजा ने कोर्ट से स्कूलों में ढांचागत सुविधाएं और लड़कियों के अलग शौचालय का मुद्दा उठाया।

यूपी बोर्ड 10 दिसंबर तक फाइनल करेगा परीक्षा केंद्र

यूपी बोर्ड 10 दिसंबर तक फाइनल करेगा परीक्षा केंद्र



प्रयागराज : यूपी बोर्ड की वर्ष 2024 में होने वाली हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए केंद्र फाइनल करने का समय बढ़ा दिया गया है । विद्यालय छात्र आवंटन के साथ परीक्षा केंद्रों की सूची को अंतिम रूप देते हुए दस दिसंबर तक उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट upmsp.edu.in पर अपलोड करना होगा। 

छात्र / अभिभावक, प्रधानाचार्य / प्रबंधक की ओर से परीक्षा केंद्र के संबंध में आपत्तियों का जिला विद्यालय निरीक्षकों को 26 नवंबर तक निस्तारित करना होगा। आपत्तियों के परीक्षण और निस्तारण के बाद परीक्षा केंद्र की अंतिम सूची विद्यालय छात्र आवंटन के साथ वेबसाइट पर अपलोड करने की अंतिम तिथि 10 दिसंबर निर्धारित की गई है। 

हाईस्कूल और इंटर को मिला 55,08,206 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल निर्विघ्न परीक्षा संपन्न कराने के लिए हाईस्कूल और इंटर की उत्तरपुस्तिकाओं की सुरक्षा को लेकर दो बदलाव पहले कर चुके हैं। उत्तरपुस्तिकाओं के कवर पेज पर अंकित विवरण का रंग परिवर्तित और कवर पेज पर अंकित बार कोड को उत्तरपुस्तिका के मध्य में कर दिया गया है।



भौतिक सत्यापन में देरी ने बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाने की बढ़वा दी तिथि

यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों की सूची 10 दिसंबर को जारी होगी

प्रयागराज : यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्रों के निर्धारण की तिथि शासन की तरफ से बढ़ा दी गई है। परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची अब 10 दिसंबर तक फाइनल करनी है। इसके पीछे बड़ा कारण परीक्षा केंद्रों के भौतिक सत्यापन में देरी है। इसी को देखते हुए शासन की तरफ से भौतिक सत्यापन की तिथि भी बढ़ा दी गई है। सत्यापन में देरी के कारण शासन की तरफ से केंद्र निर्धारण की समय सारिणी में बदलाव कर दिया गया है।

इसके मुताबिक भौतिक सत्यापन के बाद स्कूलों की सूची बोर्ड की वेबसाइट पर जिलाधिकारी की तरफ से डीआईओएस के जरिए 11 नवंबर तक अपलोड करनी है। इसके बाद सभी जिलों के डीआईओएस की तरफ से 16 नंवबर तक ऑनलाइन चयनित परीक्षा केंद्रों की सूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित करानी होगी। जिला विद्यालय निरीक्षकों की तरफ से परीक्षा केंद्रों को लेकर आपित्तयां प्राप्त करने और उनका निस्तारण करने के लिए 22 नंवबर तक का मौका दिया जाएगा। निस्तारण के बाद समिति से अनुमोदित संस्तुति बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन भेजी जाएगी। 28 नंवबर तक जिलाधिकारी की तरफ से गठित समिति द्वारा विद्यालय छात्र आवंटन सहित परीक्षा केंद्रों की सूची वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है।

ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के जरिए निर्धारित परीक्षा केंद्रों की त्रुटि और छात्र, अभिभावक, प्रबंधक की तरफ से मिलीं आपित्तयां के निराकरण के बाद उसे फिर से बोर्ड की वेबसाइट अपलोड करने की अंतिम तिथि 2 दिसंबर रखी गई है। इसके बाद 10 दिसंबर को बोर्ड की तरफ से परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची जारी की जाएगी।



यूपी बोर्ड : परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण अब 10 दिसम्बर तक

लखनऊ। यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्र निर्धारण प्रक्रिया की तारीखें बढ़ा दी गई हैं। अब केंद्र निर्धारण की अंतिम तारीख 28 नवम्बर से बढ़ाकर 10 दिसम्बर कर दी गई है। उससे पहले जिला स्तरीय समिति ऑनलाइन चयनित केंद्रों की सूची को जिलों में प्रकाशित करा करके 16 नवम्बर तक आपत्तियां हासिल करेंगे। आपत्तियों के निस्तारण बाद 22 तक उन्हें यह लिस्ट बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे।



यूपी बोर्ड : सीसीटीवी व वॉयस रिकॉर्डिंग सही नहीं तो परीक्षा केंद्र नहीं

प्रयागराज । यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों के निर्धारण के लिए कवायद तेज हो गई है। बोर्ड के सचिव की तरफ से सभी  जिलों के डीआईओएस को निर्देश दिया गया है कि केंद्रों के निर्धारण में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि स्कूल में सीसीटीवी कैमरा सही हो, वायस रिकॉर्डिंग हो रही हो। 


जिन विद्यालयों में दिक्कत हो, उन्हें केंद्र न बनाएं। यूपी बोर्ड की तरफ से दसवीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए पिछले साल पूरे प्रदेश में 8,656 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां पर 58,85,745 परीक्षार्थियों ने बोर्ड परीक्षा दी थी। इन केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरा और वायस रिकॉर्डिंग से मॉनिटरिंग की जा रही थी। कई केंद्रों पर कैमरे और वायस रिकार्डिंग खराब होने की शिकायत भी मिली थी।


 कई केंद्रों में नेटवर्क की समस्या भी देखने को मिली थी। इस बार बोर्ड की तरफ से केंद्र बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस बार प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले कम है। दसवीं में शामिल होने वाले की संख्या 29,47,324 और इंटरमीडिएट में 25,08,206 है। 

69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने भाजपा कार्यालय का किया घेराव, आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थी कर रहे नियुक्ति की मांग, 6800 चयनितों की सूची में हैं शामिल

69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने भाजपा कार्यालय का किया घेराव, आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थी कर रहे नियुक्ति की मांग, 6800 चयनितों की सूची में हैं शामिल


नियुक्ति देने की मांग को लेकर लखनऊ बीजेपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते 6800 शिक्षक अभ्यर्थी व ओबीसी एसी संगठित मोर्चा बस्ती के सदस्यो को पुलिस ने गिरफ्तार किया।


लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति से वंचित आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों ने सोमवार को भाजपा कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने इसके माध्यम से यह मांग उठाई की जल्द से जल्द शिक्षक भर्ती की संशोधित सूची जारी की जाए और उन्हें नियुक्ति की जाए। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को पुलिस ने पकड़कर, बस से ईको गार्डेन पहुंचा दिया।


अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे विजय यादव ने बताया कि 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति हुई है। इसे पिछड़ा वर्ग आयोग भी सही मान चुका है। इस मामले में वह मुख्यमंत्री व पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री से भी मिल चुके हैं। इसके बाद 6800 अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई लेकिन वह मामला न्यायालय में चला गया। उसके बाद 13 मार्च 2023 को हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने भर्ती की 6800 सूची को रद्द करते हुए पूरी भर्ती की सूची को रिविजिट करने का फैसला सुनाया था।


आदेश के आठ महीने बीतने के बाद भी विभाग ने सूची को रिविजिट नहीं किया है। कुछ अभ्यर्थियों ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट लखनऊ की डबल बेंच में अपील दायर कर 19000 सीटों पर आरक्षण में गड़बड़ी की बात कही गई है। इस मुद्दे की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होनी है, जिसमें विभाग को सूची रिविजिट संबंधित ब्योरा प्रस्तुत करना है।


उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यालय के घेराव की निर्णय इसलिए लिया गया कि आज यहां पर पार्टी की बैठक थी। पार्टी पिछड़े के नाम पर वोट तो लेती है लेकिन उनका हक नहीं दिला रही है। हमारी नियुक्ति संबंधित निर्णय जल्द नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अभ्यर्थियों ने मांग कि बेसिक शिक्षा विभाग इस भर्ती की सूची को रिविजिट कर 6800 सूची में शामिल अभ्यर्थियों को नियुक्त करे। बता दें कि इसी भर्ती में एक नंबर से नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थी 90 दिन से ईको गार्डेन में धरने पर बैठे हैं।

Monday, November 6, 2023

यूपी : संत रविदास शिक्षा योजना के तहत गरीब बच्चों को हर महीने मिलते हैं इतने रुपये, जानें आवेदन का तरीका

यूपी : संत रविदास शिक्षा योजना के तहत गरीब बच्चों को हर महीने मिलते हैं इतने रुपये, जानें आवेदन का तरीका


संत रविदास शिक्षा योजना के तहत गरीब बच्चों को हर महीने मिलते हैं इतने रुपये, जानें आवेदन का तरीकायूपी की राज्य सरकार श्रमिक बच्चों की पढ़ाई के लिए संत रविदास शिक्षा सहायता योजना चलाती है। जिसके तहत 25 साल से कम उम्र के बच्चों पढ़ाई के लिए हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है।


केंद्र से लेकर यूपी की राज्य सरकार छात्रों के लिए कई योजनाएं चालती है। इनमें से ही एक संत रविदास शिक्षा योजना है। जिसके तहत सूबे की सरकार बच्चों की पढ़ाई के लिए कक्षा एक से लेकर हायर एजुकेशन तक आर्थिक मदद करती है। दरअसल यूपी में कई गरीब बच्चे पैसे की कमी के कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं। ऐसे में इस योजना की मदद से वह अपने सपनों को पूरा कर सकेंगे। आज की स्टोरी में हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस योजना का लाभ किसे और कैसे मिलेगा।


सबसे पहले संत रविदास शिक्षा सहायता योजना के पात्रता की बात करें तो इस योजना का लाभ केवल पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों को ही मिलेगा। 25 साल या इससे कम उम्र की बच्चों को किसी भी कक्षा में एडमिशन लेने पर सरकार की तरफ से मासिक सहायता दी जाती है। हालांकि अलग-अलग क्लास के लिए राशि भी अलग अलग है। 


जैसे 1 से 5 तक के बच्चों को हर महीने 100 रुपये, 6 से 8 तक के बच्चों को 150 प्रति महीने, 9वीं और 10वीं की पढ़ाई के समय 200 रुपये प्रति महीने, 11वीं और 12वीं में 250 रुपये, आईटीआई या समकक्ष पढ़ाई करने पर 500 रुपये प्रति महीने, पॉलिटेक्निक  या समकक्ष पढ़ाई पर 800 रुपये प्रति महीने, शासकीय संस्थानों में इंजीनियरिंग या समकक्ष पाठ्यक्रमों के दौरान 3000 रुपये और शासकीय संस्थानों में मेडिकल कोर्स के पाठ्यक्रमों में 5 हजार रुपये हर महीने मिलते हैं। वहीं इंजीनियरिंग और मेडिकल में स्नातकोत्तर करने पर 8 हजार महीने मिलते हैं।


शर्ते

छात्र का न्यूनतम 60 प्रतिशत की उपस्थिति क्लास में होनी चाहिए।
वह किसी अन्य छात्रवृति का लाभ न लिया हो। 
व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में पात्रता तभी मान्य होगी जब वह राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर प्रवेश परीक्षा पास करके एडमिशन लिया हो। 


डॉक्यूमेट्स

आवदेक का आधार कार्ड
आय प्रमाण पत्र 
जाति प्रमाण पत्र
स्कूल का प्रमाण पत्र
 बैंक डिटेल 
फोटो
पंजीकृत श्रमिक की डिटेल


आवेदन करने का तरीका

⚫ संत रविदास शिक्षा सहायता योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले लेबर ऑफिस या तहसील जाएं।
⚫ यहां से आवेदन पत्र लेकर इसे भर दें साथ ही मांगे गए दस्तावेज भी संलग्न कर दें 
⚫ फिर इस फॉर्म को वहीं लेबर ऑफिस या तहसीलदार के पास जमा कर दें। 
⚫ ऐसे में आपके आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। 

यूपी में शुरू होगी योग और प्राकृतिक चिकित्सा की पढ़ाई, आयुर्वेद, होम्योपैथ की तर्ज पर बनेगा योग व नेचुरोपैथी निदेशालय और बोर्ड

यूपी में शुरू होगी योग और प्राकृतिक चिकित्सा की पढ़ाई, आयुर्वेद, होम्योपैथ की तर्ज पर बनेगा योग व नेचुरोपैथी निदेशालय और बोर्ड 


लखनऊ। प्रदेश सरकार योग और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने की तैयारी में है सबकुछ ठीक रहा तो अगले सत्र से विभिन्न कॉलेजों में इस विधा की पढ़ाई भी शुरू हो जाएगी। विभिन्न अस्पतालों में इस विधा से इलाज और शोध की सुविधा भी मिलेगी। इसके लिए आयुर्वेद, होम्योपैथ की तर्ज पर अलग से निदेशालय बनेगा।


 विभिन्न कॉलेजों से इस विधा की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों की डिग्री को मान्यता देने के लिए बोर्ड का भी गठन किया जाएगा। पूरा ढांचा तैयार करने के लिए कमेटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह कमेटी देश- विदेश में चल रही इन विधाओं का अध्ययन कर अत्याधुनिक सुविधायुक्त मॉडल तैयार करेगी। 


सरकार की ओर से आयुष चिकित्सा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयुष में शामिल आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथ के अस्पताल और डिग्री को मान्यता देने के लिए बोर्ड बने हैं, लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा, योग और सिद्धा की डिग्री का पंजीयन नहीं हो पाता है। ऐसे में प्रदेश सरकार की कोशिश है कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय की स्थापना की जाए यह निदेशालय विभिन्न अस्पतालों में शुरू होने वाली इन विधाओं के विशेषज्ञों और अन्य कर्मचारियों और संसाधनों की निगरानी करेगा। इसी तरह बोर्ड डिग्री की मान्यता देगा।



फिलहाल क्या है स्थिति

प्रदेश में लखनऊ सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के जरिए योग और प्राकृतिक चिकित्सा के डिग्री व डिप्लोमा कोर्स चल रहे हैं, लेकिन इनका पंजीयन नहीं हो पाता है। ऐसे में डिग्री लेने वाले छात्र-छात्राएं दूसरे राज्यों में नौकरी हासिल नहीं कर पाते हैं। चिकित्सा पद्धति के रूप में व्यापकता नहीं होने की वजह से रोजगार के साधन सीमित हैं। बोर्ड का गठन होने से इनकी डिग्री का पंजीयन हो सकेगा।


बोर्ड का किया जा रहा है गठन

भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति का लाभ पूरा विश्व उठा रहा है। हमारे प्रदेश में इन चिकित्सा पद्धतियों का व्यापक प्रचार-प्रसार और संचालन नहीं हो पाया है। ऐसे में आयुष विभाग की कोशिश है कि अपनी प्राचीन पद्धति को संवारा जाए। लोगों को सस्ते दर पर इलाज उपलब्ध कराया जाए। इसलिए अलग से निदेशालय और बोर्ड गठन का प्रयास किया जा रहा है। –डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु एफएसडीए एवं आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

Sunday, November 5, 2023

यूपी: अब तक 105 निजी डीएलएड कॉलेजों ने मांगी संबद्धता, प्राथमिक शिक्षक भर्ती से बीएड के बाहर होने का असर, चार साल बाद परीक्षा नियामक ने मांगे थे आवेदन।

यूपी:  अब तक 105 निजी डीएलएड कॉलेजों ने मांगी संबद्धता, प्राथमिक शिक्षक भर्ती से बीएड के बाहर होने का असर,  चार साल बाद परीक्षा नियामक ने मांगे थे आवेदन।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 28 जून 2018 की अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट से खारिज होने के बाद यूपी में डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन (डीएलएड) का क्रेज बढ़ गया है। प्राथमिक स्कूलों की शिक्षक भर्ती से बीएड अभ्यर्थियों के बाहर होने के चलते अचानक से डीएलएड की मांग बढ़ी है। बदली परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश के 105 निजी कॉलेजों ने शैक्षिक सत्र 2024-25 से डीएलएड की संबद्धता प्रदान करने के लिए आवेदन किया है। 



पांच साल बाद नए प्राइवेट कॉलेजों ने प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य डीएलएड प्रशिक्षण के संचालन की अनुमति मांगी है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने निजी कॉलेजों से डीएलएड की संबद्धता प्रदान करने के लिए 20 अक्तूबर तक जिले के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) कार्यालय में आवेदन जमा करने को कहा था। निर्धारित तिथि तक प्रदेश के 31 जिलों से 105 निजी कॉलेजों ने आवेदन किया है जबकि 44 जिलों से आवेदन की संख्या शून्य है। 


इनमें सर्वाधिक 24 कॉलेज गाजीपुर और 16 आजमगढ़ के हैं। प्रयागराज से चार संस्थाएं संबद्धता के लिए आगे आई हैं। डीएलड के लिए मान्यता एनसीटीई जबकि संबद्धता राज्य सरकार प्रदान करती है। सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी के अनुसार इससे पहले आखिरी बार मार्च 2018 में 2018-19 सत्र के लिए संबद्धता आदेश जारी हुए थे। वर्तमान में 2974 निजी डीएलएड कॉलेज में 2,22,750 सीटें हैं। गौरतलब है कि 11 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले इस साल 28 निजी कॉलेजों ने डीएलएड में प्रवेश लेने से इनकार कर दिया था।  


31 जनवरी तक जारी होंगे संबद्धता आदेश 
प्रयागराज में जिला स्तरीय समिति स्थलीय निरीक्षण के बाद परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय को 22 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट भेजेगी। 12 दिसंबर तक राज्य स्तरीय समिति की बैठक होगी और दस जनवरी तक शासन स्तर से निर्णय होगा। उसके बाद 31 जनवरी 2024 तक संबद्धता आदेश जारी होंगे।

यूपी : हिंदी में भी MBBS की पढ़ाई, डीजीएमई ने सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्यों व संस्थानों के निदेशकों को भेजा निर्देश

यूपी : हिंदी में भी MBBS की पढ़ाई, डीजीएमई ने सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्यों व संस्थानों के निदेशकों को भेजा निर्देश


लखनऊ। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों एवं चिकित्सा संस्थानों में इस सत्र में एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में होगी। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक ने सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्य, संस्थानों के निदेशक और केजीएमयू के कुलपति को पत्र भेजा है।


एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में शुरू करने के लिए पिछले साल से ही तैयारी शुरू हो गई थी। मध्य प्रदेश में इसे लागू कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में पिछले साल मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू की गई थी। कॉलेज की ओर से एमबीबीएस प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम से संबंधित किताबें हिंदी में तैयार की गई हैं। इसी तरह अन्य कॉलेजों ने भी अलग-अलग किताबें हिंदी में तैयार की हैं। 


अब इस वर्ष नए सत्र में इसे पूरी तरह से लागू करने का निर्देश दिया गया है। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक किंजल सिंह ने सभी मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों और केजीएमयू को पत्र भेजकर हिंदी में पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि 31 सितंबर को शासन की ओर से मेडिकल कॉलेजों में हिंदी में पढ़ाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है। ऐसे में हिंदी में पठन-पाठन की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। मालूम हो कि एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों को एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायो- केमिस्ट्री पढ़ाई जाती है। इन विषयों की किताबें हिंदी में उपलब्ध हैं।


तकनीकी शब्दावली अंग्रेजी में ही रहेगी

एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो आरसी गुप्ता ने बताया कि हिंदी क किताब में तकनीकी शब्दावली अंग्रेजी में ही रखी गई है। उसे हिंदी में समझाया भी गया। है। ऐसे में छात्रों को समझने में आसानी होगी।


अंग्रेजी में कमजोर छात्रों को मिलेगा फायदा

केजीएमयू के शिक्षक संघ के महासचिव संतोष कुमार का कहना है कि हिंदी माध्यम से पढ़ाई कर एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले छात्रों को इससे सहूलियत मिलेगी। अब पर्याप्त संख्या में हिंदी में किताबें हैं। छात्रों को समझाने के लिए करीब 60 फीसदी से ज्यादा सामग्री हिंदी में है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई शुरू करने से पहले, छात्रों को अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। अगर हिंदी में किताबें उपलब्ध होगी तो वे बेहतर सीखेंगे।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री में दाखिले के लिए अब संस्कृत जरूरी नहीं

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री में दाखिले के लिए अब संस्कृत जरूरी नहीं


 संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय विद्या परिषद की बैठक में हुआ फैसला



वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री में दाखिले के लिए संस्कृत की अनिवार्यता अब खत्म कर दी गई है। शनिवार को कुलपति की अध्यक्षता में हुई विद्यापरिषद की बैठक में इस पर मुहर लग गई। प्रवेश के नियम निर्धारण के लिए विद्या परिषद ने समिति का गठन कर प्रक्रिया को अगले सत्र से शुरू करने और एक नियम तैयार करने का निर्णय लिया है। शास्त्री में सेमेस्टर में तैयार पाठ्यक्रमों की संस्तुति की गई।


शनिवार को योग साधना केंद्र में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में विद्यापरिषद की बैठक हुई। कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का अधिक से अधिक लोगों को लाभ देने, संस्कृत का ज्ञान व व्यापक प्रसार के साथ ही  अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने की पहल की जा रही है। शास्त्री कक्षा में प्रवेश के लिए आधुनिक विषय से (बिना संस्कृत) अध्ययन किए हुए विद्यार्थियों को भी प्रवेश दिया जाएगा।


दाखिले की प्रक्रिया को शिथिल बनाने पर सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। इसके तहत शास्त्री प्रथम सेमेस्टर में एक अतिरिक्त संस्कृत पेपर अध्ययन करना अनिवार्य होगा। अगले सत्र से दाखिले में विद्यार्थियों को यह सुविधा मिलेगी। विद्या परिषद ने ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र द्वारा संचालित 10 पाठ्यक्रमों पर भी अपनी मुहर लगा दी। संचालन कुलसचिव राकेश कुमार ने किया। इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन  पांडेय, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो हरिशंकर पांडेय, प्रो अमित कुमार शुक्ल, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विशाखा शुक्ला मौजूद रहे।


लेखा प्रपत्र पर अवकाश

विद्या परिषद ने विश्वविद्यालय में कार्मिकों को विभिन्न तरह के अवकाश लेने के लिए एक लेखा प्रपत्र तैयार किया है। इस पर आवेदन करने पर इसके माध्यम से अवकाश दिया जाएगा।


ऑनलाइन मिलेगी संबद्धता

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्धता की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन कर दिया गया है। देश- विदेश से कहीं भी संबद्धता के लिए आवेदन किया जा सकेगा। इसके लिए पोर्टल तैयार किया जा रहा है। पोर्टल पर सभी नियम होंगे और समय पर उनके आवेदनों पर विचार कर संबद्धता दी जाएगी।

बेसिक स्कूलों में परीक्षाएं शुरू, पेपर 30 नंबर का है या फिर 50 नंबर का? शिक्षकों से लेकर अफसरों तक को पूर्णांक का पता नहीं

बेसिक स्कूलों में परीक्षाएं शुरू, पेपर 30 नंबर का है या फिर 50 नंबर का? शिक्षकों से लेकर अफसरों तक को पूर्णांक का पता नहीं



लखनऊ : बेसिक शिक्षा विभाग में कॉपी-पेपर के लिए कोई बजट दिए बिना परीक्षाओं के आदेश कर दिए गए। अब शिक्षक इस बात को लेकर परेशान हैं कि एक पेपर 30 नंबर का होगा या फिर 50 नंबर का। बेसिक स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं को लेकर यह भ्रम खुद शिक्षा विभाग के अफसरों के अलग- अलग आदेशों से फैला है। किसी बीएसए ने 50 पूर्णांक के साथ परीक्षा के आदेश कर दिए है तो किसी ने 30 के। वहीं कई बीएसए ऐसे हैं, जिन्होंने इस बारे में कुछ स्पष्ट ही नहीं किया। सिर्फ परीक्षा करवाने आदेश किए हैं।


ये थी पुरानी व्यवस्था
विभाग के ही जो पुराने आदेश हैं, उसके अनुसार साल में दो टर्म परीक्षाएं होनी चाहिए। ये परीक्षाएं 10-10 अंक की होती हैं। एक टर्म परीक्षा अर्द्धवार्षिक परीक्षा से पहले होनी चाहिए और एक उसके बाद में । अर्द्धवार्षिक परीक्षा 30 अंक की होती है। वहीं, वार्षिक परीक्षा 50 अंक की होती है। इस तरह सालभर में 100 अंक की परीक्षा होती है। उसके आधार पर रिजल्ट तैयार किया जाता है। इस दौरान दो साल कोविड के कारण परीक्षाएं ही नहीं हुई। पिछले साल सिर्फ वार्षिक परीक्षाएं ही करवाई गई। वह 100 अंक की करवा ली गई।


बीएसए के अलग-अलग आदेश

इस साल अचानक अर्द्धवर्षिक परीक्षा के आदेश कर दिए गए। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 10 नवंबर तक सभी जिलों में परीक्षाएं करवा ली जाएं। अब सभी बीएसए ने अलग-अलग आदेश जारी कर दिए हैं। कानपुर के बीएसए ने जारी आदेश में कहा है कि सभी विषयों की परीक्षा का पूर्णांक 50 अंक होगा। कहीं सहारनपुर के बीएसए ने जारी आदेश में कहा है कि हर विषय की अर्द्धवार्षिक परीक्षा 30 अंक की होगी। वहीं 20 अंक की दो टर्म परीक्षाएं होंगी जबकि इस बार पहले टर्म की परीक्षा ही नहीं हुई है। कई ऐसे जिले हैं, जहां बीएसए ने इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं किया है। लखनऊ समेत कई जिलों में परीक्षाएं शुरू भी हो गई हैं लेकिन शिक्षक यह तय नहीं कर पा रहे कि अंक 50 पूर्णांक में से देने हैं या फिर 30 में से इस बारे में प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि शिक्षकों को कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया। न कॉपी पर्चे के बारे में कोई निर्देश दिए और न बजट दिया। अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि कितने अंकों की परीक्षा है।


परीक्षाओं की तारीखों को लेकर लचीलापन बरता गया है ताकि अपनी सुविधानुसार जिले परीक्षाएं करवा सकें। यदि अंकों को लेकर किसी तरह का भ्रम है तो इसका निराकरण किया जाएगा।
- विजय किरण आनंद, महानिदेशक- स्कूल शिक्षा

Saturday, November 4, 2023

मांग : पदोन्नति से पहले शिक्षकों के हों आपसी तबादले

मांग : पदोन्नति से पहले शिक्षकों के हों आपसी तबादले


लखनऊ। बेसिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक इन दिनों अजीब पशोपेश में फंसे हुए हैं। एक तरफ विभाग ने जिले के अंदर आपसी तबादले की प्रक्रिया लगभग पूरी करके रोक दी है, तो दूसरी तरफ पदोन्नति प्रक्रिया आठ नवंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसे देखते हुए शिक्षकों ने पदोन्नति से पहले तबादले करने की मांग की है। 


शिक्षकों ने कहा कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया अगर तबादले से पहले पूरी होती है तो काफी शिक्षकों के जोड़े टूट जाएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस सत्र में शासनादेश में ढील देकर रिलीविंग ज्वाइनिंग का आदेश जारी किया जाए। ताकि हजारों जोड़े (पेयर) को टूटने से बचाया जा सके।


 उप्र. बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि शिक्षकों के दूसरे विद्यालय जाने से निपुण लक्ष्य व छात्र शिक्षक अनुपात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन बीच सत्र में पदोन्नति होने से छात्र- शिक्षक अनुपात जरूर गड़बड़एगा। पिछड़े जिलों में तो एकल स्कूल बंद होने की स्थिति आ सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की पहले जिले के अंदर आपसी तबादले हो उसके बाद पदोन्नति की जाए।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा से मिले एक अंक के अभ्यर्थी, नियुक्ति संबंधित लिखित आदेश जारी करने की मांग

महानिदेशक स्कूल शिक्षा से मिले एक अंक के अभ्यर्थी, नियुक्ति संबंधित लिखित आदेश जारी करने की मांग


लखनऊ। प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा में एक अंक से नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को निशातगंज स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय में महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद से मुलाकात की। अभ्यर्थियों को महानिदेशक ने मौखिक आश्वासन दिया लेकिन अभ्यर्थी नियुक्ति के लिए लिखित आदेश जारी करने की मांग कर रहे थे।


अभ्यर्थियों ने कहा कि शैक्षिक परिभाषा के एक सवाल गलत पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नौ नवंबर 2022 को एक अंक बढ़ाते हुए मेरिट के आधार पर कोर्ट में आए अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। लेकिन अब तक विभाग इस पर ठोस निर्णय नहीं ले सका है। इससे अभ्यर्थियों ने नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने महानिदेशक से जल्द इस मामले में ठोस निर्णय लेने की मांग की। 

आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलेगा गर्म भोजन, हॉट कुक्ड फूड के लिए मिड डे मील के मेन्यू को मंजूरी देने की तैयारी

आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलेगा गर्म भोजन, हॉट कुक्ड फूड के लिए मिड डे मील के मेन्यू को मंजूरी देने की तैयारी

🆕
लखनऊ। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ रहे तीन से छह साल के बच्चों को भी गर्म भोजन मिलेगा। प्रदेश सरकार इसके सुचारू संचालन के लिए मिड डे मील की तर्ज पर एक समान मेन्यू रखने की तैयारी कर रही है। यहां भी सप्ताह में बच्चों को वही भोजन परोसा जाएगा, जो मिड डे मील में बेसिक विद्यालयों के बच्चों को परोसा जाता है।

हाल ही में मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की अध्यक्षता में हॉट कुक्ड मील (गर्म पका हुआ भोजन) संबंधी राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा गया है। टास्क फोर्स इस पर निर्णय लेगी, जिस पर सीएम का अनुमोदन लिया जाएगा। प्रदेश में लगभग 65 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में (को-लोकेटेड) स्थित हैं। ऐसे में इन्हीं विद्यालयों की रसोई में भोजन पकाया जाना है। इसलिए पीएम पोषण योजना (मिड डे मील) के समान ही मेन्यू रखने का प्रस्ताव है।

प्रस्ताव के अनुसार मेन्यू में सोमवार को रोटी, सोयाबीन की बड़ी युक्त मौसमी सब्जी व ताजा मौसमी फल होंगे। मंगलवार को चावल व सब्जी युक्त दाल, बुधवार को मौसमी सब्जी व सोयाबीन की बड़ी युक्त तहरी, बृहस्पतिवार को रोटी व सब्जी के साथ दाल, शुक्रवार को मौसमी सब्जी व सोयाबीन की बड़ी युक्त तहरी और शनिवार को चावल व सब्जी के साथ दाल दी जाएगी। इसमें श्री अन्न को प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में निर्देश दिए गए कि आंगनबाड़ी केंद्रों को 200 मीटर की परिधि में स्थित प्राथमिक विद्यालय से संबद्ध किया जाए। आंगनबाड़ी केंद्र तक तैयार भोजन पहुंचाने और बच्चों में वितरित करने का दायित्व आंगनबाड़ी सहायिकाओं को दिया जाए। 200 मीटर की परिधि में दो विद्यालय होने पर पास के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाए। जानकारी के अनुसार इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए बजट भी आवंटित किया जाएगा।



अब 15 नवंबर के बाद आंगनबाडी केंद्रों में बच्चों को मिलेगा गर्म भोजन


• नवरात्र से गर्म भोजन देने के मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पूरा नहीं कर सका विभाग

• सात वर्ष वाद आंगनवाडी केंद्रों में शुरू होने जा रही हाट एंड कुक्ड मील योजना


लखनऊ : आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों को पका हुआ गर्म भोजन मिलने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। नवरात्र से बच्चों को गर्म भोजन परोसने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश को बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग पूरा नहीं कर सका है। अब 15 नवंबर के आस-पास ही यह योजना शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।


सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले तीन से छह वर्ष के बच्चों को बेसिक स्कूलों की तर्ज पर गर्म खाना परोसने का निर्णय लिया है। वर्ष 2016 से बंद चल रही इस योजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिर से शुरू करवाया है। सरकार ने को- लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों तथा नान को - लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाई है। को- लोकेटेड आंगनबाड़ी, ऐसे केंद्र हैं, जो ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रांगण में या फिर उनसे 200 मीटर की दूरी पर हैं। प्रदेश में ऐसे आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 1.21 लाख है।


नान लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं, जो प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित नहीं हो रहे हैं। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में इन आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या लगभग 67,148 है। को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए प्राथमिक विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग किया जाएगा। पीएम पोषण (एमडीएम) की तरह ही आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भी भोजन बनेगा। नान को लोकेटेड  आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन परोसने तथा बच्चों के खाना खाने के लिए बर्तनों की व्यवस्था संबंधित ग्राम सभा या नगरीय निकाय करेंगे।


बच्चों के पोषण से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना को मुख्यमंत्री नवरात्र से ही शुरू करना चाहते थे, यही कारण है कि 10 अक्टूबर को कैबिनेट मीटिंग से इस योजना को पास कराने के बाद उसी दिन शाम को योजना की तैयारियों की बैठक की थी। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विभाग इसे नवरात्र बीतने के बाद भी अभी तक शुरू नहीं कर सका है।


बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की निदेशक सरनीत कौर ब्रोका कहती हैं कि इस योजना को शुरू करने के लिए कई दूसरे विभागों की भी मदद ली जा रही है, इसलिए इसमें समय लग रहा | नवंबर में यह योजना शुरू हो जाएगी, तारीख मुख्यमंत्री से समय मिलने के बाद तय होगी।

प्रदेश में 60,500 स्कूलों का हुआ शैक्षिक उपलब्धि सर्वे, विद्यार्थियों की परखी गई भाषा और गणित में दक्षता, 16 लाख से ज्यादा विद्यार्थी सर्वे में हुए शामिल

प्रदेश में 60,500 स्कूलों का हुआ शैक्षिक उपलब्धि सर्वे


• विद्यार्थियों की परखी गई भाषा और गणित में दक्षता

• 16 लाख से ज्यादा विद्यार्थी सर्वे में हुए शामिल


लखनऊ : प्रदेश के 60,500 से अधिक स्कूलों में शुक्रवार को शैक्षिक उपलब्धि सर्वे परख - 2023 कराया गया। सर्वे के तहत स्कूलों में कक्षा तीन, छह व नौ के विद्यार्थियों की भाषा व गणित में दक्षता को टेस्ट लेकर परखा गया। शिक्षकों व स्कूलों के प्रदर्शन को भी आंका गया। सर्वे में प्राथमिक स्कूल, उच्च प्राथमिक स्कूल व माध्यमिक स्कूलों के करीब 16 लाख विद्यार्थी शामिल हुए। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने पूरे देश में एक साथ सर्वे कराया।


यूपी में हुए इस सर्वे में कक्षा तीन तक के 19,262 स्कूल, कक्षा छह के 23,005 और कक्षा नौ के 18,233 विद्यालय शामिल हुए। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने बताया कि एनसीईआरटी हर वर्ष परख संस्था के माध्यम से यह सर्वे कराता है। विद्यार्थियों ने भाषा व गणित में क्या और कितना सीखा इसका मूल्यांकन किया जाता है। 


छात्र प्रश्नावली के माध्यम से इसे आंका गया। शिक्षकों के लिए शिक्षक प्रश्नावली व स्कूलों के लिए स्कूल प्रश्नावली के माध्यम से यह सर्वे किया गया। नीति आयोग इस सर्वे के आधार पर ही राज्यों की रैकिंग करता है। एनसीईआरटी के पर्यवेक्षक मुजम्मिल हसन की देखरेख में यह सर्वे किया गया।


 विद्यालयों में इस सर्वे के लिए आयोजित हुई परीक्षा की निगरानी विद्या समीक्षा केंद्र के साथ एससीईआरटी में भी कंट्रोल रूम बनाकर की गई। एससीईआरटी के निदेशक पवन सचान के नेतृत्व में टीम ने राजधानी में चिनहट ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय उत्तरधौना, बाराबंकी के बंकी ब्लाक के कंपोजिट विद्यालय संदौली उमापुर व राजकीय बालिका इंटर कालेज सहित पांच विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया।

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल में बेटियों का पंजीकरण पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल में बेटियों का पंजीकरण पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा


प्रयागराज। यूपी के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की लड़कियां भी पढ़ाई-लिखाई में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यूपी बोर्ड के आंकड़ों पर गौर करें तो बालिका शिक्षा की उत्साहवर्धक तस्वीर दिखाई पड़ती है। 


हाईस्कूल में बेटियों का पंजीकरण पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा है। 2024 की हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 29,47,324 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। 13,75,638 (46.67%) छात्राएं जबकि 15,71,686 ( 53.32% ) छात्र हैं। 2021 में छात्राओं की संख्या 44.02 प्रतिशत थी।



Friday, November 3, 2023

चार सदस्यीय कमेटी की जांच के बाद ही निजी स्कूलों पर हो कार्रवाई, प्राइवेट स्कूलों के लिए तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया को लेकर हुई बैठक

चार सदस्यीय कमेटी की जांच के बाद ही निजी स्कूलों पर हो कार्रवाई, प्राइवेट स्कूलों के लिए तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया को लेकर हुई बैठक



लखनऊ : स्कूलों में सुरक्षित परिवेश के लिए तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को लेकर गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक महानिदेशक, स्कूल शिक्षा कार्यालय के सभागार में हुई। एसओपी बनाने के लिए पिछले दिनों गठित की गई दस सदस्यीय कमेटी में शामिल निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने माडल ड्राफ्ट तैयार करने पर बैठक में चर्चा की।


निजी स्कूलों की ओर से शिक्षा विभाग को मांग पत्र सौंपा गया, जिसमें कहा गया कि स्कूल में किसी भी तरह की घटना होने पर चार सदस्यीय कमेटी की प्रारंभिक जांच के बाद ही एफआइआर दर्ज कराई जाए। सीधे प्रधानाचार्य, शिक्षक, कर्मचारी व प्रबंधतंत्र के खिलाफ मुकदमा न दर्ज किया जाए। 


अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि निजी स्कूलों की ओर से सौंपे गए ड्राफ्ट में इस चार सदस्यीय कमेटी में जिलाधिकारी का प्रतिनिधि, एक अपर पुलिस अधीक्षक, जिला विद्यालय निरीक्षक या बेसिक शिक्षा अधिकारी के साथ एक निजी स्कूल का प्रतिनिधि भी शामिल हो। 


यदि इस कमेटी की जांच में स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाए तो तत्काल कार्रवाई हो । यदि स्कूल पर आरोप सही न पाए जाएं तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कार्रवाई हो । स्कूलों में मोबाइल के प्रयोग प्रतिबंध रहे। विद्यार्थी स्कूल में मोबाइल लेकर न आएं व पढ़ाई के दौरान शिक्षकों का मोबाइल भी जमा रहे ।

एनपीएस कटौती की उठी उच्चस्तरीय जांच की मांग

एनपीएस कटौती की उठी उच्चस्तरीय जांच की मांग

🆕
प्रयागराज : शिक्षकों, कर्मचारियों की एनपीएस कटौती की धनराशि को बिना उनकी सहमति से प्राइवेट कंपनियों में निवेश करने सहित अन्य मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद से मुलाकात की। शिक्षक संघ के प्रदेश संरक्षक डॉ. हरि प्रकाश यादव के नेतृत्व में शिक्षकों ने मांग की कि कुशीनगर, कासगंज, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर, प्रयागराज, वाराणसी, इटावा सहित विभिन्न जनपदों में जो इस तरह के प्रकरण प्रकाश में आए हैं उनकी उच्चस्तरीय जांच की जाए।

संगठन के प्रदेश आय-व्यय निरीक्षक सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि एनपीएस से संबंधित इस तरह के प्रकरण प्रकाश में आने से पुरानी पेंशन की मांग को और भी बल मिल रहा है क्योंकि एनपीएस पूरी तरह शेयर बाजार पर आधारित है। जिसमें पूंजी कभी भी डूब सकती है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मामले की उच्चस्तरीय जांच के बाद शीघ्र दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मामले की जिला स्तर पर जांच हो रही है। कई जिलों से एनपीएस में गंभीर वित्तीय अनियमितता के मामले की शिकायत आ रही है। इस अवसर पर मिथिलेश मौर्य, मो. जावेद, लाल मणि, चंद्रशेखर सिंह, अनुराधा, आशीष गुप्ता आदि मौजूद रहे।




शासन में उठेगा एनपीएस घोटाले का मामला

प्रयागराज । जिले के सैकड़ों एडेड शिक्षकों-कर्मचारियों की एनपीएस के 80 करोड़ रुपये से अधिक निजी कंपनी में निवेश करने का मामला सोमवार को प्रमुख सचिव के साथ शिक्षक प्रतिनिधियों की होने वाली बैठक में उठेगा।

 पूर्व एमएलसी व उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए सोमवार को प्रमुख सचिव के साथ वार्ता होनी है। उसमें शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, पुरानी पेंशन सहित अन्य मुद्दों के साथ-साथ प्रयागराज में एनपीएस के फंड को निजी फंड मैनेजर को सौंपने की मनमानी का मुद्दा भी शासन के सामने रखूंगा।

 सरकार से मांग करूंगा कि एनपीएस के फंड की सुरक्षा की व्यवस्था की जाए। यह पूरा एनपीएस ही घोटाला है और इसे वापस लेकर सरकार पुरानी पेंशन ही दे ।



NPS फंड में छेड़छाड़ का बड़ा मामला सामने आया, बाबू सस्पेंड, जेडी ने डीआईओएस कार्यालय के बाबू पर की कार्रवाई, मामले की जांच शुरू, एफआईआर कराने की तैयारी

प्रयागराज । जिले के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों की पेंशन की रकम निजी कंपनी में निवेशित करने वाले जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के बाबू आलोक गुप्ता को शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया है। 


मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) दिब्यकांत शुक्ल ने वरिष्ठ सहायक आलोक गुप्ता को डीआईओएस के यूजर आईडी एवं पासवर्ड का दुरुपयोग कर कुछ शिक्षकों-कर्मचारियों के एनपीएस खातों में निवेशित रकम को बिना उनकी सहमति के डिफाल्ट फंड से अन्य फंड में स्थानान्तरित करने का दोषी पाया है। कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के विरुद्ध कार्य करने पर आलोक गुप्ता को निलंबित करते हुए राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज अर्जुनपुरगढ़ा फतेहपुर से संबद्ध किया गया है। मामले की जांच मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशक तनुजा त्रिपाठी को दी गई है। जानकारों की मानें तो इस मामले में एफआईआर भी कराने की तैयारी है।


माध्यमिक शिक्षक संघ ने चेताया

प्रयागराज प्रयागराज एडेड कॉलेजों के शिक्षकों के एनपीएस का धन प्राइवेट कंपनियों को बिना शिक्षकों की सहमति के स्थानांतरित करने के मामले में माध्यमिक शिक्षक संघ ने गंभीरता से लिया है। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक दिव्यकांत शुक्ल, डीआईओएस पीएन सिंह व वित्त नियंत्रक पवन कुमार को ज्ञापन देकर आपत्ति दर्ज कराई। मंडलीय मंत्री अनुज कुमार पांडेय, जिलाध्यक्ष राम प्रकाश पांडेय, जिला मंत्री जगदीश प्रसाद, डॉ. चंद्रावर शुक्ला व सुधीर मिश्रा आदि ने चेतावनी दी कि शिक्षकों की पेंशन की रकम सात दिन में पूर्व फंड में स्थानान्तरित नहीं होने पर आंदोलन करेंगे। अनुज कुमार पांडेय ने बताया कि उन्होंने एनएसडीएल से संपर्क किया था। वहां से बताया गया यह काम डीआईओएस कार्यालय से ही हुआ है। बिना शिक्षक कर्मचारी के सहमति के ऐसा करना गलत है।


पेंशन की 80 करोड़ से अधिक राशि निजी कंपनी में ट्रांसफर

एडेड कॉलेजों के शिक्षकों-कर्मचारियों की एनपीएस में निवेशित 80 करोड़ से अधिक की रकम निजी कंपनी में ट्रांसफर करने की चर्चा है। कितने शिक्षकों और कर्मचारियों की राशि एक से दूसरे खाते में भेजी गई यह तो जांच का विषय है। बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी ऐसे हैं जो एनपीएस का लेखाजोखा ऑनलाइन देख नहीं पाते लेकिन सूत्रों की मानें तो 80 करोड़ रुपये से अधिक निजी कंपनी के खाते में डाले गए हैं। इसके चलते शिक्षकों-कर्मचारियों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। आरोप है कि इस हेराफेरी के लिए निजी कंपनी के प्रतिनिधियों ने कमीशन के रूप में मोटी रकम दी है।


Thursday, November 2, 2023

संपूर्णानंद संस्कृत विवि को मिलेगा राष्ट्रीय दर्जा, बदलाव के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने शुरू की पहल

संपूर्णानंद संस्कृत विवि को मिलेगा राष्ट्रीय दर्जा, बदलाव के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने शुरू की पहल


विश्वविद्यालय के अभ्युदय और उत्थान के लिए कुलपति और राज्यमंत्री ने की चर्चा

जल्द शुरू होगा ज्योतिष परामर्श केंद्र, काशी के स्वरूप में होंगे द्वार


वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय फलक तक ले जाने की केंद्र और प्रदेश सरकार ने पहल शुरू कर दी है। जल्द ही विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर की संस्था का दर्जा भी मिल जाएगा, हालांकि यह राज्य सरकार से ही संबद्ध रहेगा। इससे विश्वविद्यालय में अनुदान और वित्तीय समस्या का समाधान आसानी से हो सकेगा। बुधवार को | राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने इस विषय के साथ ही विकास के मुद्दों लपति से चर्चा की। 


राज्यमंत्री ने बताया कि चारों प्रवेश द्वार को काशी के स्वरूप में निर्मित किया जाएगा। जल्द ही ज्योतिष परामर्श केंद्र की शुरुआत होगी, इससे जरूरतमंदों को सही ज्योतिषीय परामर्श मिल सकेगा। विधायक निधि से मिले 25 लाख रुपये से इसका निर्माण कराया जा रहा है। जल्द ही इसका संचालन भी शुरू हो जाएगा। परिसर के विकास में जो भी बाधाएं हैं उसे दूर करने के लिए अध्ययन करने के बाद कार्ययोजना तैयार की गई है।


कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा और कुलसचिव राकेश कुमार के साथ मंथन के दौरान राज्यमंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजलापूर्ति के लिए आरओ मशीन, सीवर लाइन को ठीक कराने के साथ ही छात्रावासों में स्मार्ट डस्टबिन रखे जाएंगे। सड़कों का भी जीर्णोद्धार कराया जाएगा। 


10 पाठ्यक्रमों से जुड़े सात सौ अभ्यथी

राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र के स्टूडियो का निरीक्षण किया। बताया कि केंद्र से संचालित होने वाले 10 पाठ्यक्रमों में देश भर से 700 आवेदन पंजीकृत हो चुके हैं। पाठ्यक्रम के माध्यम से घर बैठे ज्योतिष, कर्मकांड, वास्तु और अन्य शास्त्रों का अध्ययन किया जा सकेगा। इसकी ऑनलाइन कक्षाएं जल्द चलेंगी।


महीने भर में लाखों युवाओं के हाथों में होंगे नए स्मार्टफोन, सरकार स्मार्टफोन व टैबलेट खरीद पर रख रही पैनी निगाह, 949 करोड़ रुपये से खरीदे जाएंगे 9.5 लाख स्मार्टफोन

महीने भर में लाखों युवाओं के हाथों में होंगे नए स्मार्टफोन

सरकार स्मार्टफोन व टैबलेट खरीद पर रख रही पैनी निगाह

949 करोड़ रुपये से खरीदे जाएंगे 9.5 लाख स्मार्टफोन


लखनऊ। प्रदेश में स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत 25 लाख स्मार्टफोन और टैबलेट वांटे जाने हैं। इसे लेकर प्रदेश सरकार बेहद गंभीर है। समय से एक-एक पीस की आपूर्ति के लिए चार कंपनियों की सप्लाई का समय तय किया गया है। अगले एक महीने में 9.5 लाख स्मार्टफोन सप्लाई करने के लिए 949 करोड़ रुपये दिए गए हैं।


सरकार स्मार्टफोन व टैबलेट की खरीद प्रक्रिया पर पैनी निगाह रख रही है। जेम पोर्टल के बाद भी अलग से बात कर कीमतें कम कराई गई हैं। स्मार्टफोन की खरीद के लिए जेम पोर्टल से चार कंपनियों को चुना गया। विजन डिस्ट्रीब्यूशन, सेलकॉन इम्पैक्स और एनएफ इंफ्राटेक सर्विसेज सैमसंग स्मार्टफोन की सप्लाई करेंगी। एक स्मार्टफोन की कीमत 9,972 रुपये है। इन कंपनियों को क्रमशः 7,84,314 लाख, 6,86,275 लाख और 5,88,235 लाख स्मार्टफोन की सप्लाई करनी है। जबकि इंस्टेंट प्रोक्योरमेंट सर्विसेज प्रा. लि. लावा के 4,41,176 लाख फोन सप्लाई करेगी। इस तरह चारों कंपनियों को 25 लाख स्मार्टफोन सप्लाई देने का टेंडर जारी किया गया है।


इन कंपनियों को कांट्रैक्ट मिलने के एक महीने में 15 फीसदी यानी 3,75,000 स्मार्टफोन की आपूर्ति का जिम्मा दिया गया था। इसके लिए 371 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। नोडल एजेंसी यूपीडेस्को ने इस धनराशि का इस्तेमाल कर लिया है। चारों कंपनियों ने 6 अक्तूबर तक 3.90 लाख स्मार्टफोन की आपूर्ति कर दी। इसके एवज में करीब 374 करोड़ का भुगतान किया गया। हालांकि लगभग तीन करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। अब अगले एक महीने में चारों कंपनियों को 9.5 लाख स्मार्टफोन सप्लाई करने हैं। इस पर करीब 918 करोड़ रुपये खर्च होंगे।


वहीं, यूपीडेस्को ने इस काम में प्रशासकीय खर्च के रूप में 7.5 करोड़ रुपये की मांग की है। इसके अतिरिक्त 6 से 16 अक्तूबर के बीच सप्लाई किए गए फोन का करीब 23.35 करोड़ रुपये बकाया है। विद्यार्थियों को जल्द से जल्द स्मार्टफोन मिले, शासन ने इस कार्य को प्राथमिकता पर रखते हुए 949 करोड़ रुपये की स्वीकृति दे दी है।


उधर, टैबलेट खरीद की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। अरबों रुपये की खरीद में पैनी निगाह का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि टैबलेट खरीद में दो कंपनियों ने एक ही रेट की विड डाल दी थी बिल्कुल एक ही कीमत की बिड डालने पर आशंकाओं को देखते हुए और पारदर्शिता बरतने के लिए दोबारा बिड मांगी गई और पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया।

विदेशी फंडिंग के मामले में SIT ने जुटाना शुरू किया मदरसों का ब्योरा

विदेशी फंडिंग के मामले में  SIT  ने जुटाना शुरू किया मदरसों का ब्योरा


 लखनऊ : मदरसों में शैक्षिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए हो रही विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को लेकर विशेष जांच दल (एसआइटी) ने अपनी जांच शुरू कर दी है। एसआइटी ने मदरसा बोर्ड से बीते वर्षों में पंजीकृत हुए मदरसों से जुड़ी सूचनाएं मांगी है। बिना मान्यता के संचालित मदरसों का भी पूरा ब्यौरा जुटाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के बारे में सूचनाएं जुटाने के लिए खुफिया इकाई की भी मदद ली जा रही है। पहले ऐसे मदरसों को सूचीबद्ध किया जा रहा है, जिन्हें विदेश से फंडिंग हो रही है।

विदेशी फंडिंग से देश- विरोधी व अवैध मतांतरण जैसी अन्य गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने की आशंका के चलते जांच शुरू की गई है। विशेषकर नेपाल सीमा से सटे जिलों में बीते कुछ वर्षों में खुले मदरसों की जानकारी जुटाई जा रही है। एसआइटी में एसपी साइबर क्राइम प्रो. त्रिवेणी सिंह व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की निदेशक जे. रीभा बतौर सदस्य शामिल हैं। प्रदेश में 16,513 मान्यता प्राप्त व 8,500 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं।



मदरसों में विदेशी फंडिंग की जिलों से रिपोर्ट मांगेगी एसआईटी 

लखनऊ। प्रदेश के मदरसों में विदेशी फंडिंग की जांच के लिए गठित एसआईटी समस्त जिलों से रिपोर्ट मांगने की तैयारी में है।

एसटीएफ की रोज होने वाली बैठक में विदेशी फंडिंग के स्रोत और उसके व्यय के हर बिंदु को गहनता से खंगाला जा रहा है। साथ ही, मदरसों में शिक्षा देने के लिए जिन एनजीओ के माध्यम से विदेशों से रकम आती है, उनकी फेहरिस्त भी तैयार की जा रही है। 

दरअसल, एसआईटी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि नेपाल सीमा पर बीते एक दशक के दौरान मदरसों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से इजाफा हुआ है। 



मदरसों में विदेशी फंडिंग पर शिकंजा,  देवबंद से लेकर बंगाल तक नेटवर्क खंगाल रही यूपी ATS 

धर्मांतरण में विदेशी फंडिंग के प्रयोग से एजेंसियां चौकन्नी


लखनऊ । यूपी एटीएस को मदरसों के जरिए देश विरोधी गतिविधियों के लिए विदेशी फंडिंग के मास्टर माइंड की तलाश है। इसके लिए विदेशी फंडिंग लाने वाले स्वयंसेवी संगठनों और उनके जरिए चंदा प्राप्त करने वाले मदरसों को चिह्नित किया जा रहा है। बांग्लादेशी नागरिक आदिल को पश्चिम बंगाल ले जाकर ऐसे कुछ ठिकानों का पता भी लगाया गया है।


अवैध घुसपैठ कर भारत पहुंचे मीरपुर (बांग्लादेश) निवासी आदिल उर रहमान को गिरफ्तार करने के बाद एटीएस को कई अहम सूचनाएं मिलीं। इसके बाद आदिल के दो मददगारों नजीबुल शेख और अबू हुरायरा गाजी को गिरफ्तार किए जाने पर गिरोह के देवबंद (सहारनपुर) और पश्चिम बंगाल कनेक्शन के साथ-साथ विदेशी फंडिंग का भी खुलासा हुआ है। 


यह गिरोह विदेशी फंडिंग से बांग्लादेशियों को भारत में लाकर बसाने और उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में मदद करता है। पिछले तीन वर्षों में 20 करोड़ रुपये की फंडिंग की जानकारी मिलने के बाद जांच आगे बढ़ी तो इसमें मदरसों को माध्यम बनाने का भी खुलासा हुआ। 


सूत्रों के अनुसार आदिल को लेकर पश्चिम बंगाल गई एटीएस की टीम ने गिरोह के नेटवर्क के बारे में कुछ ठोस जानकारी एकत्र की है, जिसके आधार पर जल्द ही कुछ अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी हो सकती है। मदरसों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग का अवैध घुसपैठ और धर्मांतरण में उपयोग किए जाने की जांच के लिए गठित एसआईटी ने सबसे पहले नेपाल सीमा पर पिछले दो दशक में बने नए मदरसों की जांच करने का फैसला किया है।



सभी 24 हजार मदरसे एसआईटी के रडार पर, 16 हजार मदरसे वर्तमान में हैं पंजीकृत, आठ हजार अवैध

बैठक में पहले नेपाल बार्डर इलाकों के मदरसों की जांच कराने पर बनी सहमति


लखनऊ। विदेशी फंडिंग की जांच को गठित एसआईटी के रडार पर प्रदेश के सभी 24 हजार मदरसे हैं। इनमें से 16 हजार पंजीकृत हैं, जबकि बाकी आठ हजार अवैध हैं। एसआईटी सबसे पहले नेपाल सीमा पर बीते दो दशकों के दौरान बने नये मदरसों की जांच करेगी। एसआईटी की पहली बैठक में इस पर सहमति बनी है। यह भी तय किया गया है कि जिन मदरसों में विदेश से पैसा भेजा जा रहा है, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।


बता दें कि शासन के निर्देश पर मदरसों में विदेशी फंडिंग की जांच के लिए एडीजी एटीएस मोहित अग्रवाल की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई है, जिसमें एसपी साइबर क्राइम प्रो. त्रिवेणी सिंह और निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण जे. रोभा को सदस्य बनाया गया है। एसआईटी के रडार पर इनमें से अधिकतर भारत- नेपाल सीमा पर बीते दो दशकों के दौरान विदेशी फंडिंग की बदौलत खोले गये। इन मदरसों के जरिए टेरर फंडिंग होने की आशंका भी जताई जाती रही है। 


अब एसआईटी विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल के हर पहलू को गहराई से खंगालने जा रही है। बैठक में मदरसों में विदेशी फंडिंग को लेकर पूर्व में दर्ज हुए मुकदमों के बारे में भी जानकारी ली गयी, जिसमें सामने आया कि फिलहाल इस तरह का कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। अब जिन मदरसों में नियम विरुद्ध तरीके से विदेशी फंडिंग का सुराग हाथ लगेगा, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर विवेचना भी कराई जाएगी। 


आईबी ने भी दी थी रिपोर्ट

सूत्रों के मुताबिक नेपाल सीमा पर बने मदरसों के बारे में राजधानी स्थित केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी के जोनल कार्यालय ने भी जानकारी एकत्र की थी, जिसकी सूचना केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी गयी थी। इस रिपोर्ट में नेपाल सीमा पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों का जमावड़ा होने के साथ मदरसों, मजारों व मस्जिदों का बड़े पैमाने पर निर्माण होने की जानकारी भी दी गयी थी।



मदरसों की सर्वे रिपोर्ट अब तक ठंडे बस्ते में, विदेशी चंदे का हिसाब लेने को भेजी जाएगी नोटिस


लखनऊ : प्रदेश में पिछले साल मदरसों की मान्यता, उनके आर्थिक स्रोत आदि के बारे में सर्वे करवाया गया था, जिसकी रिपोर्ट रविवार तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है। इस लेटलतीफी को लेकर उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तेखार जावेद खासे नाराज हैं।


रविवार को उन्होंने कहा कि उक्त सर्वे को हुए 11 महीने गुजर चुके हैं और अभी तक शासन स्तर पर इस सर्वे की समीक्षा ही हो रही है। सर्वे में 8,449 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं। चेयरमैन का कहना है कि इन साढ़े आठ हजार मदरसों के 7.5 लाख बच्चों का भविष्य अधर में है। सोचा यह गया था कि सर्वे रिपोर्ट आने के बाद इन गैर मान्यता प्राप्त मदरसों में से मानकों को पूरा करने वाले मदरसों को मान्यता दी जाएगी ताकि इन मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाई के बाद जो प्रमाण पत्र जारी हो उससे उनका भला हो सके।


 उन्होंने कहा प्रदेश में 560 अनुदानित और 16 हजार से कुछ अधिक मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। अगर इन साढ़े आठ हजार मदरसों को जोड़ दिया जाए तो मदरसों की कुल तादाद 25 हजार के आसपास बैठती है। जहां तक मदरसों की फण्डिंग का सवाल है तो इस बारे में मदारिस-ए-अरबिया के महासचिव वहीदुल्लाह खान ने कहा कि पहले भी नेपाल की तराई से सटे जिलों में मदरसों की फण्डिंग की जांच करवाई जा चुकी है, मगर कुछ गलत नहीं निकला।



लखनऊ : प्रदेश के मदरसों को मिले विदेशी चंदे के दुरुपयोग की जांच के लिए गठित एसआईटी की पहली बैठक बुधवार को होने की संभावना है। बैठक में जांच का दायरा तय करने पर भी विचार होगा। माना जा रहा है कि सबसे पहले मदरसों को नोटिस भेजकर विदेशी चंदे का हिसाब मांगा जाएगा।


आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के एडीजी मोहित अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी में एसपी साइबर क्राइम डॉ. त्रिवेणी सिंह व निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण जे. रीभा को शामिल किया गया है। इससे पहले अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मदरसों की जांच कर चुका है। एसआईटी की पहली बैठक में विभागीय जांच रिपोर्ट पर भी चर्चा होने की संभावना है। 


विदेशी चंदे से देश विरोधी व धर्मांतरण जैसी गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने की जानकारी मिलने के बाद एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी सभी मदरसों को नोटिस देकर विदेशी मुद्रा अर्जक खातों (ईईएफसी) में हुए लेन-देन की जानकारी लेने के बाद उन मदरसों को सूचीबद्ध किया जाएगा, जिन्हें विदेशों से रकम प्राप्त हुई है। इसके बाद इस बात की जांच होगी कि किन-किन देशों से यह रकम भेजी गई है।



विदेशी फंडिंग को लेकर 4000 मदरसों की जांच SIT के हवाले 

 एडीजी एटीएस की अध्यक्षतामें तीन सदस्यीय टीम गठित


लखनऊ। मदरसों को हो रही विदेशी फंडिंग से धर्मांतरण और देश विरोधी गतिविधियों जैसी शिकायतों को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इसके मद्देनजर विभिन्न  जिलों में चल रहे चार हजार से अधिक मदरसों की जांच एसआईटी से कराने का फैसला किया गया है।


आतंक निरोधी दस्ता (एटीएस) के एडीजी मोहित अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित एसआईटी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। टीम में एसपी साइबर क्राइम डॉ. त्रिवेणी सिंह और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की निदेशक जे. रीभा को भी शामिल किया गया है। 


एसआईटी मदरसों को मिलने वाली विदेशी व गैर-कानूनी फंडिंग का पता लगाएगी। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी मदरसों में हो रही फंडिंग की सिलसिलेवार जांच करेगी। सभी मदरसों को नोटिस देकर फॉरेन करेंसी अकाउंट (ईईएफसी) के माध्यम से हो रहे लेनदेन की जानकारी मांगी जाएगी। इसके बाद उनको सूचीबद्ध किया जाएगा, जिन्हें विदेश से रकम भेजी जा रही है। फिर इस बात की जांच होगी कि किस-किस देश से रकम भेजी गई है और राशि का प्रयोग किन गतिविधियों में किया गया।


बीते दिनों एटीएस ने बांग्लादेशी व रोहिंग्या नागरिकों की घुसपैठ कराने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ा तो जांच में सामने आया कि दिल्ली से संचालित एनजीओ के माध्यम से देश में तीन वर्षों में 20 करोड़ की विदेशी फंडिंग हुई। इसका उपयोग घुसपैठियों की मदद के लिए किया जा रहा जांच के दायरे में यह भी प्रकरण रहेगा।


बता दें कि नेपाल सीमा से सटे लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और बहराइच के अलावा आसपास कई क्षेत्रों में एक हजार से अधिक मदरसों का संचालन किया जा रहा है। बीते कुछ वर्षों में इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इन्हें विदेशी फंड मिलने की बात सामने आई है। इस आधार पर अल्पसंख्यक विभाग ने कई जिलों में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की जांच भी की थी, जिसमें इसके आय का स्रोत दिखाया गया। 


घुसपैठ से भी जुड़े हैं

बीते दिनों एटीएस ने बांग्लादेशी व रोहिंग्या नागरिकों की घुसपैठ कराने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ा तो जांच में सामने आया कि दिल्ली से संचालित एनजीओ के माध्यम से देश में तीन वर्षों में 20 करोड़ की विदेशी फंडिंग हुई। इसका उपयोग घुसपैठियों की मदद के लिए किया जा रहा था। जांच के दायरे में यह भी प्रकरण रहेगा।

नए सत्र से परिषदीय स्कूलों में डिजिटल लर्निंग को लगेंगे पंख, 18,381 स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाई जा रहीं, 880 कंप्यूटर लैब, एक हजार करोड़ होगा खर्च

नए सत्र से परिषदीय स्कूलों में डिजिटल लर्निंग को लगेंगे पंख, 18,381 स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाई जा रहीं, 880 कंप्यूटर लैब, एक हजार करोड़ होगा खर्च


लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में नए शैक्षिक सत्र वर्ष 2024-25 से डिजिटल लर्निंग को तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा। 18,381 उच्च प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लास तैयार की जा रही हैं। विद्यार्थियों को इसमें रोचक ढंग से पाठ पढ़ाया जाएगा। वहीं 880 ब्लाक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) पर इनफार्मेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलाजी (आइसीटी) लैब बनाई जा रही हैं। 2.09 लाख शिक्षकों को टैबलेट भी वितरित किए जा रहे हैं। 


डिजिटल लर्निंग की मदद से उच्च कोटि की शिक्षा देने के लिए करीब एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। स्मार्ट क्लास रूम तैयार करने और विद्यार्थियों को ई कंटेंट उपलब्ध कराने पर कुल 781 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर 53 करोड़ रुपये की लागत से आइसीटी लैब तैयार की जा रही हैं। यहां विद्यार्थियों को कंप्यूटर का आधारभूत ज्ञान दिया जाएगा।

सीबीएसई : 10वीं, 12वीं के प्रैक्टिकल एक जनवरी से होंगे

सीबीएसई : 10वीं, 12वीं के प्रैक्टिकल एक जनवरी से होंगे


केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के प्रैक्टिकल का शेड्यूल जारी कर दिया है। सीबीएसई की वर्ष 2024 की लिखित बोर्ड परीक्षाएं फरवरी से प्रस्तावित हैं। इससे पहले बोर्ड संचालित सभी विद्यालयों को प्रैक्टिकल निर्धारित समय से पूरे कराने होंगे। 

इसके लिए बोर्ड ने एक जनवरी से 15 फरवरी तक की तारीख तय कर दिशानिर्देश विद्यालयों को भेज दिए हैं। प्रैक्टिकल कराने के साथ ही बोर्ड के पोर्टल पर प्रैक्टिकल के अंकों को भी अपलोड करना होगा। इस वर्ष हाईस्कूल और इंटर में तकरीबन 30 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।

बीस और तीस अंकों के प्रैक्टिकल : बोर्ड द्वारा प्रैक्टिकल के लिए अलग- अलग विषयों के लिए 20, 30 और 50 अंक तय किए गए हैं। 15 फरवरी तक सभी स्कूलों को प्रोजेक्ट और इंटरर्नल असेसमेंट जमा करने होंगे।



सीबीएसई स्कूलों में एक जनवरी से होंगी प्रायोगिक परीक्षाएं


नई दिल्ली : सीबीएसई की ओर से देश और विदेश के स्कूलों में 10वीं और 12वीं की प्रायोगिक और आंतरिक मूल्यांकन परीक्षाएं एक जनवरी, 2024 से शुरू होंगी, लेकिन सीबीएसई के कुछ स्कूल अत्यधिक ठंड पड़ने के कारण इस दौरान बंद रहते हैं। ऐसे स्कूलों में प्रायोगिक परीक्षाएं नहीं आयोजित हो पाएंगी।



सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई से संबंधित कुछ स्कूल ऐसे क्षेत्रों में हैं, जहां सर्दी के मौसम में बहुत बर्फबारी होती हैं। इसके चलते ये स्कूल बंद रहते हैं तो इन स्कूलों में प्रायोगिक परीक्षाएं 14 नवंबर से शुरू होकर 14 दिसंबर तक चलेंगी। 


स्कूलों को प्रायोगिक परीक्षा के अंतिम दिन तक विद्यार्थियों के अंकों को अपलोड करने का कार्य पूरा कर लेना होगा। अगर किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 30 से अधिक है तो ऐसे स्कूलों में परीक्षाओं में एक विषय की परीक्षा को एक दिन में ही दो से तीन सत्रों में आयोजित करना होगा ।

Wednesday, November 1, 2023

स्पॉन्सरशिप योजना : जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में जीवन यापन करने वाले परिवारों के बच्चों की उचित देखभाल एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु यूपी सरकार की अनूठी पहल, देखें जारी विज्ञापन और पात्रता के नियम और शर्तें

स्पॉन्सरशिप योजना : जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में जीवन यापन करने वाले परिवारों के बच्चों की उचित देखभाल एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु यूपी सरकार की अनूठी पहल, देखें जारी विज्ञापन और पात्रता के नियम और शर्तें 


स्पॉन्सरशिप योजना के अंतर्गत अधिकतम 18 वर्ष आयु तक के पात्र बच्चों को ₹4,000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता


पात्रता

⚫ ऐसे बच्चे जिनके पिता की मृत्यु हो गई हो, मां तलाकशुदा या परिवार से परित्यक्त हो

⚫ ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता या उनमें से कोई एक गंभीर / जानलेवा रोग से ग्रसित हो

⚫ ऐसे बच्चे जो बेघर हैं, निराश्रित हैं या विस्थापित परिवार के साथ रह रहे हैं ऐसे बच्चे जो कानून से संघर्षरत हैं

⚫ ऐसे बच्चे जिन्हें बाल तस्करी, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया हो

⚫ ऐसे बच्चे जो किसी प्राकृतिक आपदा के शिकार हों • ऐसे बच्चे जो दिव्यांग, लापता या घर से भागे हुए हैं

⚫ ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता या उनमें से एक कारागार में निरुद्ध है ऐसे बच्चे जो एचआईवी / एड्स से प्रभावित हों
 
⚫ ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता आर्थिक, शारीरिक या मानसिक रूप से देखभाल हेतु असमर्थ हों

⚫ ऐसे बच्चे जिनको सहायता एवं पुनर्वास की आवश्यकता हो

⚫ ऐसे बच्चे जो फुटपाथ पर जीवनयापन करने वाले, प्रताड़ित, उत्पीड़ित या शोषित हों


अभिभावक की आय सीमा

🔴 ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम ₹72,000 वार्षिक

🔴 शहरी क्षेत्रों में अधिकतम ₹96,000 वार्षिक

🔴 माता-पिता दोनों अथवा वैध संरक्षक की मृत्यु होने की स्थिति में परिवार की अधिकतम आय सीमा का नियम लागू नही


बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी अवकाश तालिका कर रही है शिक्षकों को बदनाम, तालिका में दिख रही है 33 छुट्टियां जब कि मिल पाती है 19

बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी अवकाश तालिका कर रही है शिक्षकों को बदनाम, तालिका में दिख रही है 33 छुट्टियां जब कि मिल पाती है 19




शिक्षकों की छुट्टियों के नाम पर लोग तरह तरह की बातें करते हैं और बेसिक शिक्षकों पर छुट्टी को लेकर तंज कसते रहते हैं लेकिन हकीकत कुछ और है जिससे लोग वाकिफ नहीं हैं। शासन ने पहले ही महापुरुषों की जयंती पर होने वाले अवकाशों को समाप्त कर दिया है। इसके अलावा बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी अवकाश तालिका में कई अन्य प्रकार के अवकाशों को भी समाप्त कर दिया गया है। 


बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी अवकाश तालिका में कुल 33 अवकाशों को जगह गई है जिनमें से 8 अवकाश रविवार को हैं जो सूची में अंकित हैं। इसके अलावा 6 अवकाश ऐसे अंकित हैं जिनमें शिक्षकों को विद्यालय बुलाया गया है। इस प्रकार शिक्षकों को मात्र 19 अवकाश छुट्टियां मिल रहे हैं जबकि अवकाश तालिका में 33 छुट्टियां दर्शाई गई हैं जिससे अन्य विभागों के लोग बिना जाने, बिना सोचे समझे ऊलजलूल कमेंट करने लगते हैं जबकि उन्हें हकीकत पता नहीं होती। 


इन हालातों में यदि शिक्षकों को मिलने वाली छुट्टियों की तुलना प्रशासनए राजस्व एवं अन्य विभागों से करें तो यह कमतर हैं। आरटीई ने स्कूलों में 220 कार्यदिवस अनिवार्य किए हैं। इन हालातों में यह इससे अधिक हो जाएंगे।


अनसुनी कर दी शिक्षक संघों की मांग

शिक्षक संघों ने मांग की थी कि अवकाश सूची में गणतंत्र दिवसए स्वतंत्रता दिवसए गांधी जयंतीए सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती जैसे अवकाशों को सूची में शामिल न किया जाए क्योंकि इन अवकाशों पर स्कूल खुलते हैं और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसे देखते हुए इन अवकाशों को अवकाश तालिका में अंकित न किया जाए।

इस मांग को बेसिक शिक्षा परिषद ने दरकिनार कर दिया और ऐसी अवकाश तालिका जारी कर दी जिसमें कि कई अवकाश ऐसे अंकित हैं जिसमें शिक्षकों को विद्यालय जाना होता है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि प्रत्येक वर्ष अवकाश कम किए जा रहे हैं इससे माहौल प्रभावित हो रहा है । 

बच्चों व शिक्षकों को भी मानसिक तौर पर आराम की जरूरत होती है। शिक्षकों को चुनाव संबंधी कार्यए जनगणना और पोलियो जैसे अन्य गैर शैक्षणिक अनेकों कार्य अवकाश के दिनों में ही करने पड़ते हैं इस पर भी शासन को गौर करना चाहिए।


संडे को पड़ने वाले त्योहार

यूपी बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा घोषित अवकाश तालिका में कई अवकाश इस साल रविवार को ही पड़ रहे हैं। इसमें पहली छुट्टी गुरु गोविंद सिंह जन्मदिवस की है। दूसरी रामनवमी, तीसरी बकरीद, चौथी महात्मा गांधी जन्म दिवस, पांचवी महर्षि वाल्मीकि जयंती, छठवां नरक चतुर्दशी, सातवां छठ पूजा पर्व और आठवां क्रिसमस डे है।


6 ऐसे दिन अवकाश तालिका में अंकित जब खुलते हैं विद्यालय

गणतंत्र दिवसए संत रविदास जयंती, डा. भीमराव आंबेडकर जन्म दिवस, स्वतंत्रता दिवस, महात्मा गांधी जयंती और सरदार वल्लभभाई पटेल जन्म दिवस पर शिक्षण कार्य स्थगित रहता है पर इन दिनों पर शिक्षकों और छात्रों को स्कूल में उपस्थित होकर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और गोष्ठी करनी होती है।


गर्मी और सर्दी की होगी छुट्टी 

बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में 20 मई से 15 जून तक ग्रीष्मावकाश रहता है वहीं 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहता है। स्थानीय स्तर पर जिलों के डीएम अवकाश दे सकते हैं जबकि मुस्लिम त्योहार चंद्र दर्शन के अनुसार बदल सकते हैं। हरितालिका तीज, करवाचौथ, संकट चतुर्थी, हलषष्ठी और अहोई अष्टमी में केवल शिक्षिकाओं को ही अवकाश मिलता है।

69 हजार शिक्षक भर्ती में एक अंक विवाद मामले में रिट कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर अफसरों पर तय होंगे आरोप, 22 नवंबर तक ब्योरा पेश करने के लिए मिला समय

69 हजार शिक्षक भर्ती में एक अंक विवाद मामले में रिट कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर अफसरों पर तय होंगे आरोप, 22 नवंबर तक ब्योरा पेश करने के लिए मिला समय 


लखनऊ। प्रदेश में 69 हजार शिक्षक भर्ती में एक अंक विवाद मामले में राज्य सरकार को रिट कोर्ट के आदेश का अनुपालन कर 22 नवंबर तक ब्योरा पेश करने के लिए और समय मिल गया है। 


इससे पहले मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार से कोर्ट के 20 दिसंबर 2021 के फैसले के तहत प्रस्तावित कार्रवाई का ब्योरा मांगा था। मगर सरकार पेश नहीं कर सकी। 


न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की एकल पीठ ने कहा कि अगर 22 नवंबर तक रिट कोर्ट के आदेश का पालन न हुआ या सरकारी वकील, अपील में पारित होने वाला आदेश प्रस्तुत न कर पाए तो ये अधिकारी उस दिन भी पेश होंगे। इन पर अवमानना का आरोप भी तय किया जा सकता है। यह आदेश अभ्यर्थी सुरंगमा शुक्ला की अवमानना याचिका पर दिया। 


याची का कहना था कि 20 दिसंबर 2021 को शैक्षिक परिभाषा वाले प्रश्न पर रिट कोर्ट ने उनकी शरण में आए अभ्यर्थियों को एक अतिरिक्त अंक प्रदान करते हुए मेरिट के अनुसार नियुक्ति का आदेश दिया था। पर, अभी तक रिट कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। वहीं, इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका भी खारिज हो चुकी है।


 आदेश का अनुपालन नहीं होने से करीब 1000 अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में है। इसे रिट कोर्ट के आदेश की अवहेलना बताते हुए अवमानना याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के समय सरकारी वकील ने कहा कि मामले में कई अपीलें नामित बेंच के समक्ष 20 नवंबर को सूचीबद्ध हैं। उस दिन अपीलें निस्तारित हो सकती हैं। 


ऐसे में आखिरी मौका देकर इस अवमानना मामले को मुल्तवी करने का आग्रह किया उधर, याची के अधिवक्ता अमित कुमार सिंह भदौरिया ने इसका विरोध किया। कहा, पिछली तिथियों पर सिर्फ यही कहकर केस को मुल्तवी कराया गया कि अपीलें विचाराधीन हैं। कोर्ट ने सरकारी वकील के आग्रह पर सख्त आदेश देते अगली सुनवाई 22 नवंबर को नियत की है। 

गोंडा, मिर्जापुर और मुरादाबाद में खुलेंगे राज्य विश्वविद्यालय, कैबिनेट ने दी हरी झंडी

गोंडा, मिर्जापुर और मुरादाबाद में खुलेंगे राज्य विश्वविद्यालय, कैबिनेट ने दी हरी झंडी 



लखनऊ । गोंडा, मिर्जापुर व मुरादाबाद में नए राज्य विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इससे संबंधित संशोधित अध्यादेश को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। इनकी स्थापना के बाद प्रदेश में 23 राज्य विश्वविद्यालय हो जाएंगे। 


दरअसल, राज्य सरकार ने बजट में मां पाटेश्वरी देवी राज्य विवि गोंडा, मां विंध्यवासिनी राज्य विवि मिर्जापुर, उप्र राज्य विवि मुरादाबाद की स्थापना की घोषणा की थी। 


इसी क्रम में उच्च शिक्षा विभाग ने विवि अधिनियम की धारा चार, 50 व 52 और अधिनियम की अनुसूची पांच में संशोधन का प्रस्ताव किया था। इसे कैबिनेट ने अपनी सहमति दे दी है।


 संशोधन के अनुसार नए राज्य विवि के अस्तित्व में आने तक वह पुराने विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार संचालित होंगे। वहीं कैबिनेट ने मथुरा में एसकेएस इंटरनेशनल विवि को संशोधन के साथ संचालन प्राधिकार पत्र जारी करने पर सहमति दे दी है। 


मानव संपदा पोर्टल पर सेवा विवरण दर्ज करने में लापरवाही, एक अक्टूबर तक पोर्टल पर दर्ज करने थे सभी विवरण, कई कालेजों में मूल सेवा पुस्तिका से नहीं किया गया मिलान

मानव संपदा पोर्टल पर सेवा विवरण दर्ज करने में लापरवाही, एक अक्टूबर तक पोर्टल पर दर्ज करने थे सभी विवरण,  कई कालेजों में मूल सेवा पुस्तिका से नहीं किया गया मिलान


प्रयागराज ।  प्रदेश के सभी राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों व उच्च शिक्षा निदेशालय के कर्मियों का सेवा विवरण मानव संपदा पोर्टल पर एक अक्टूबर तक दर्ज हो जाने थे, लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं हुआ है। जो विवरण दर्ज किए गए हैं, उसके सत्यापन में लापरवाही बरती जा रही है। इसलिए पिछले दिनों उच्च शिक्षा निदेशक ने सभी प्राचार्यों को निर्देश  दिया कि सेवा विवरण दर्ज करने का काम त्रुटिरहित किया जाए।


उच्च शिक्षा निदेशक प्रोफेसर ब्रह्मदेव ने 25 अगस्त को निर्देश दिया था कि सभी कर्मियों की नियुक्ति, कार्यभार ग्रहण, कार्यमुक्ति, अवकाश प्रबंधन, वेतन आहरण, स्थानांतरण, वार्षिक मूल्यांकन आदि का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर एक अक्टूबर तक दर्ज कर दिया जाए। इसे हर महीने के प्रथम सप्ताह में अपडेट किया जाएगा। 


निदेशक के संज्ञान में आया कि विवरण को सत्यापित करने से पूर्व सत्यापनकर्ता द्वारा मूल सेवा पुस्तिका और अभिलेख का मिलान नहीं किया जा रहा है, यह गंभीर लापरवाही है। इसलिए सभी प्राचार्यों को निर्देश दिया कि मानस संपदा सेल में तीन कर्मियों को तैनात किया जाए, जो सभी के विवरण पोर्टल पर दर्ज करें। उसके बाद सेवा पुस्तिका के सत्यापन का कार्य प्राचार्य करें। 


पोर्टल पर कोई भी इंट्री मूल सेवा पुस्तिका के आधार पर ही होगी। महाविद्यालय के सभी कर्मियों को उनका मानव संपदा कोड और पासवर्ड उपलब्ध करा दिया जाए, जिससे वह अपनी सेवा पुस्तिका देख सकें। त्रुटि होने पर संशोधन किया जा सके।

परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को राज्य कर्मियों की तरह अवकाश देने पर कमेटी लेगी निर्णय

परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को राज्य कर्मियों की तरह अवकाश देने पर कमेटी लेगी निर्णय

• उप्र शिक्षक महासंघ के साथ प्रमुख सचिव ने की बैठक

• कैशलेस उपचार की सुविधा छह नवंबर को फिर वार्ता


लखनऊ : उत्तर प्रदेश शिक्षक महासंघ के पदाधिकारियों और प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा एमकेएस सुंदरम के बीच वार्ता हुई। बैठक में परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति अवकाश की सुविधा दिए जाने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करने का निर्णय लिया गया। कमेटी में अधिकारियों के साथ-साथ महासंघ के पदाधिकारी भी रहेंगे।


प्रमुख सचिव ने बताया कि यह कमेटी शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की तरह उपार्जित अवकाश, द्वितीय शनिवार का अवकाश, प्रतिकर अवकाश एवं अध्ययन अवकाश की सुविधा देने पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम को ध्यान में रखकर निर्णय लेगी। वहीं कैशलेस उपचार की सुविधा शिक्षकों को देने के लिए वित्त विभाग से संभावित व्ययभार का आंकलन कराया जाएगा और फिर कोई निर्णय लिया जाएगा।


 परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया हर हाल में आठ नवंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए। एमके एस सुंदरम ने बताया कि ऐसे शिक्षक जिनके पारस्परिक स्थानांतरण हुए हैं और दूसरे स्कूल में कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाए हैं, इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अनुमति मांगी जाएगी। वर्ष 2014 के बाद नियुक्त हुए शिक्षकों को सामूहिक बीमा का लाभ जल्द दिलाया जाएगा। 


परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों की तरह 12 वर्ष की सेवा पूरा करने पर प्रोन्नत वेतनमान देने पर भी विचार किया जाएगा। सचिवालय में हुई बैठक में शिक्षकों की 21 सूत्रीय मांगों में से 12 मांगों पर वार्ता हुई। बाकी पुरानी पेंशन बहाली सहित नौ बिंदुओं पर वार्ता के लिए छह नवंबर को फिर बैठक बुलाई गई है।


प्रमुख सचिव ने शिक्षक संघों की 21 मांगों में 12 मांगों पर सहमति जतायी, शेष मांगों पर 6 नवंबर को पुनः वार्ता


लखनऊ : बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमकेएस सुंदरम ने शिक्षकों की पदोन्नति, उपार्जित व प्रतिकर अवकाश, सामूहिक बीमा, कैशलेश इलाज समेत 12 बिन्दुओं पर सोमवार को वार्ता की। पदोन्नति की कार्रवाई आठ नवम्बर तक पूरी कर ली जाएगी।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक में शिक्षकों की लंबित 21 सूत्री मांग पत्र में एक से 12 पर सहमित जतायी। अन्य मांगों पर छह नवंबर दोबारा वार्ता करेंगे। शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर उपार्जित अवकाश, द्वितीय शनिवार अवकाश, प्रतिकर अवकाश एवं अध्ययन अवकाश की अनुमन्यता हेतु एक समिति गठित की जाएगी। समिति में विभागीय अधिकारी व संगठन के पदाधिकारी होंगे। समिति शिक्षा का अधिकार अधिनियम पर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति कैशलेस चिकित्सा देने के मामले में वित्त विभाग द्वारा व्यय भार का आगमन कराकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। इस पर अफसरों के साथ मंथन किया जाएगा।

पदोन्नति 8 नवंबर, 2023 तक प्रत्येक दशा में सुनिश्चित कर ली जाएगी। शिक्षक संगठनों ने लंबित मांगों को लेकर नौ अक्तूबर को निशातगंज स्थित शिक्षा निदेशालय में धरना दिया था। बैठक में स्कूल महानिदेशक विजय किरन आनंद, शिक्षा निदेशक महेंद्र देव, सचिव प्रताप सिंह के अलावा शिक्षक नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी, सुरेश कुमार त्रिपाठी, संजय सिंह, नरेंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे।



शिक्षकों का होगा सामूहिक बीमा, जल्द परस्पर तबादले की उम्मीद, शिक्षक संघों और शासन के बीच बहुप्रतीक्षित बैठक संपन्न, छह नवंबर को फिर होगी वार्ता

नौ अक्तूबर को शिक्षकों के महानिदेशक स्कूल शिक्षा कार्यालय पर धरना देने के बाद शासन के साथ वार्ता तय हुई थी। सोमवार को महासंघ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा एमकेएस सुंदरम व विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक हुई।


उत्तर प्रदेश शिक्षक महासंघ की शासन के साथ सोमवार को पहले चरण की वार्ता में 2014 व उसके बाद नियुक्त शिक्षकों को सामूहिक बीमा का लाभ देने की प्रक्रिया 30 नवंबर तक पूरी करने पर सहमति बनी। साथ ही विभागीय अधिकारियों ने कहा कि परस्पर तबादले (जिले के अंदर व एक से दूसरे जिले में) जाड़े की छुट्टियों से पहले करने के लिए शासनादेश में संशोधन का प्रस्ताव भेजा गया है।



नौ अक्तूबर को शिक्षकों के महानिदेशक स्कूल शिक्षा कार्यालय पर धरना देने के बाद शासन के साथ वार्ता तय हुई थी। सोमवार को महासंघ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा एमकेएस सुंदरम व विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक हुई। तीन घंटे चली बैठक में 12 बिंदुओं पर चर्चा हुई व शेष पर छह नवंबर को फिर से वार्ता होगी।


डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति उपार्जित अवकाश, दूसरे शनिवार को अवकाश, प्रतिकर अवकाश व अध्ययन अवकाश देने पर निर्णय के लिए एक समिति गठित होगी। इसमें विभागीय अधिकारी व संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे। समिति शिक्षा का अधिकार अधिनियम को देखते हुए आवश्यक निर्णय लेगी। शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने पर वित्त विभाग व्यय भार का आगणन करेगा।


इसी तरह बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति आठ नवंबर तक हर हाल में सुनिश्चित होगी। बेसिक शिक्षा में चयन वेतनमान में 12 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षकों की भांति प्रोन्नत वेतनमान देने का भी शासन संभावित व्यय भार का आगणन कराकर कार्रवाई करेगा। वहीं ऐसे शिक्षक जिनका चयन एक अप्रैल 2005 से पूर्व हुआ था को केंद्र की भांति पुरानी पेंशन से आच्छादित करने पर भी चर्चा हुई। इस पर पुनर्विचार करने पर बैठक में सहमति बनी।


बैठक में एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी, पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी, संजय सिंह महामंत्री उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, नरेंद्र वर्मा, शिव शंकर पांडेय, राधे रमण त्रिपाठी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद, शिक्षा निदेशक बेसिक व माध्यमिक महेंद्र देव, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल व संयुक्त शिक्षा निदेशक गणेश कुमार उपस्थित थे।