स्कूलों में कार्यरत रसोइया गांव शहर की सबसे गरीब तबके की महिलायें हैं। उनमें से भी बड़ा हिस्सा दलितों, अतिपिछड़ों, विधवाओं व परित्यक्ताओं का है। काम को देखते हुए साल भर में 1000 रुपये का मानदेय उनके साथ केंद्र व राज्य सरकार का भद्दा मजाक है। उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित कर 15000 रुपये मासिक वेतन, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा व अन्य लाभ दिलाये जाने की लड़ाई लड़ी जा रही है। आगामी 2 सितंबर को मेहनतकशों, ट्रेड यूनियनों की तरफ से देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की गई है जिसे हम सबको सफल बनाना होगा। माकपा राज्य मंत्रिपरिषद सदस्य एवं प्रांतीय कोषाध्यक्ष किसान नेता कामरेड मुकुट सिंह ने मिड-डे मील रसाइयों का कर्मचारी यूनियन (सीटू) की बैठक में उपरोक्त आहवान मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए किया। माकपा जिला मंत्री अमर सिंह शाक्य ने बताया कि पिछली 19 अप्रैल को लखनऊ में जंगी प्रदर्शन कर राज्यकर्मी का दर्जा, 15000 रुपये मासिक वेतन, दुर्घटना बीमा, श्रम कानूनों को कड़ाई से लागू करने, वर्ष में दो जोड़ी ड्रेस, 12 माह का मानदेय वेतन, गर्भवती को 6 माह का अवकाश और ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने जैसी मांगों को उठाया गया था। बैठक की अध्यक्षता आराधना ने की और ममता देवी, पुनीता देवी, संगीता देवी, निर्मला देवी, सावित्री देवी, शीला देवी, सरोज, प्रीति, शशी, श्रीदेवी, सुघरश्री, उर्मिला देवी, रमेश चंद्र सक्सेना, विटोला देवी ने भी संबोधित किया। बैठक में जिले के हर ब्लाक में संगठन बनाने के लिए कमेटियों का गठन किया गया।
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