परिषदीय स्कूलों के बच्चे 'बांसुरी' में देखेंगे कला के विविध रंग, बेसिक शिक्षा में कक्षा तीन व चार के लिए पहली बार कला की पुस्तक
कला शिक्षण के लिए सुनिश्चित है न्यूनतम 100 घंटे का शिक्षण सत्र
प्रयागराज । परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा तीन और चार के विद्यार्थियों को पहली बार कला की पुस्तक 'बांसुरी' पढ़ने को मिलेगी। अब तक शिक्षक बिना पुस्तक कला/संगीत पढ़ाते थे और परीक्षा लेते थे। नए सत्र से बच्चों को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (एनसीईआरटी) की पुस्तक बांसुरी पढ़ने के लिए मिलेगी। एनसीएफएसई (स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा संबंधी मार्गदर्शिका) की अनुशंसा के अनुसार कला शिक्षण के लिए न्यूनतम 100 घंटे का शिक्षण सत्र सुनिश्चित किया गया है। इसमें कला के चारों घटक दृश्य कला, संगीत, नृत्य और अंग संचालन संबंधी जानकारी है।
कक्षा तीन की पुस्तक में 20 पाठ हैं। प्रत्येक अध्याय में क्यूआर कोड है, उसे स्कैन करके अतिरिक्त विषय सामग्री तक पहुंच सकते हैं। वर्तमान सत्र में बच्चों को कलात्मकता से परिचित कराने के लिए विशेषज्ञ भी आमंत्रित किए जाएंगे। शिक्षण के दौरान बच्चों से कलाकृतियां बनवाई जाएंगी। उनका प्रदर्शन स्कूल परिसर या अन्य स्थानों पर किया जाएगा।
राज्य शिक्षा संस्थान उत्तर प्रदेश के प्राचार्य राजेंद्र प्रताप ने बताया कि बांसुरी में सुझाई गई गतिविधियों को कराने से अभिव्यक्ति कौशल, सामुदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय विरासत के संरक्षण के लिए सचेत रहने की चेतना जागृत होगी। इससे छात्र छात्राओं में व्यक्तिगत स्तर तथा समूह में कार्य करने, आलोचनात्मक दृष्टिकोण का विकास, पढ़ने के साथ लिखने का अभ्यास में मदद मिलेगी।
दृश्यकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच से होगा जुड़ाव
पुस्तक के दृश्य कला भाग में रेखांकन, चित्रकला, काटना, चिपकाना जैसी गतिविधि शामिल है। मिट्टी, रंग, प्रकृति की समझ बच्चों में आएगी। संगीत की ओर छात्रों का ध्यान खींचते हुए विभिन्न भाषाओं के गीत, वाद्ययंत्रों व थिरकने, धुनों और गीतों पर शारीरिक गतिविधां कराने के साथ नाटक पाठ्यक्रम का हिस्सा है। विदूषक बच्चों को अभिनय, मंच, सहायक सामग्री आदि से परिचित कराएंगे। राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डा. रीना मिश्रा कहती है कि यह पुस्तक सुगम और रोचक है। पुस्तक बताती है कि मिट्टी के घड़े का प्रयोग वाद्ययंत्र की तरह होता है, इसे घटम कहते हैं। कंदील, दीपक, मुखौटा, कागजों से आभूषण बनाना सीखने के साथ संगीत में ताली, चुटकी, लयबद्ध पैरों की धाप आदि को समझाने का प्रयास है।
20 घंटे दृश्यकला तो 20 घंटे संगीत की होगी पढ़ाई
पुस्तक में निहित दृश्यकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच के लिए कुल 20-20 घंटे की पढ़ाई निर्धारित है। 20 घंटे अनुभवात्मक कार्य कराए जाएंगे। कला शिक्षक को सप्ताह में चार कक्षाएं और शनिवार को एक कक्षा आवंटित करने प्रविधान है। बच्चों के दक्षता स्तर को मापने के लिए चार श्रेणी ए, बी, सी, डी, ई का सुझाव है। इनका अर्थ क्रमशः उत्कृष्ट, कुशल, होनहार, विकासशील और आरंभिक है।
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