बीते सितम्बर में भी खजनी के एक प्राथमिक स्कूल में तैनात शिक्षक भानू प्रताप के नाम पर दूसरे शिक्षक द्वारा वेतन लेने का मामला उजागर हुआ था। जांच-पड़ताल शुरू होने पर एक शिक्षक छूट्टी लेकर तीर्थयात्र पर चला गया। जबकि दूसरे भानू प्रताप तैनाती को लेकर बीएसए से गुहार लगाते रहे। बीएसए ने पड़ताल के बाद असली भानू प्रताप को कैम्पियरगंज के एक विद्यालय में तैनाती दे दी। जबकि नकली भानू प्रताप के विरुद्व अबतक कुछ नहीं हो पाया। करीब 2.50 लाख रुपए की रिकवरी भी अबतक नहीं हो सकी है।
बलरामपुर के परिषदीय स्कूल की शिक्षिका के शिकायती पत्र पर जांच पड़ताल चल रही है। कौड़ीराम में तैनात शिक्षिका का वेतन बाधित करके स्पष्टीकरण तलब किया है। शिक्षिका ने नोटिस का जवाब दिया या नहीं, फाइल देखने के बाद ही बताया जा सकता है।ओम प्रकाश यादव, बीएसए गोरखपुर
गोरखपुर धर्मेन्द्र मिश्रबेसिक शिक्षा विभाग में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। एक ही नाम, डिग्री, पता, पैन नंबर पर दो शिक्षिकाएं अलग-अलग जिले से वेतन उठा रही हैं। एक गोरखपुर में तो दूसरी बलरामपुर के परिषदीय स्कूल में तैनात है। डेढ़ माह की पड़ताल में असली-नकली की पहचान नहीं हो सकी है। लिहाजा विभाग ने दोनों का वेतन रोक दिया है।दरअसल बलरामपुर के परिषदीय स्कूल में तैनात शिक्षिका के पैन नम्बर को लेकर ट्रेजरी ने मार्च में आपत्ति की। कहा कि इसी नम्बर से गोरखपुर में भी वेतन का आहरण हो रहा है। इसपर वहां के बीएसए ने गोरखपुर बीएसए को पत्र भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया। सम्बन्धित पैन नम्बर और शिक्षिका का शैक्षणिक प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की मांग की। बलरामपुर में तैनात शिक्षिका ने 12 मार्च को बीएसए को आवेदन देकर बताया कि उसके नाम, पता, डिग्री और पैन का फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर कोई शिक्षिका गोरखपुर में अध्यापक पद पर कार्य कर रही है।बीएसए ओमप्रकाश यादव ने पड़ताल कराई तो पता चला कि कौड़ीराम ब्लॉक के एक स्कूल पर उसी नाम की शिक्षिका तैनात है, जो उक्त पैन नम्बर का इस्तेमाल कर रही है। शैक्षणिक प्रमाण पत्र और पता भी वहीं पाया गया। इसके बाद बीएसए ने तत्काल वेतन रोकते हुए शिक्षिका से स्पष्टीकरण तलब किया। नोटिस मिलने के बाद शिक्षिका ने मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए दो माह का वक्त मांग दिया। अब अगली सुनवाई 20 मई को है।
बलरामपुर और गोरखपुर बीएसए ने एक दूसरे को पत्र लिखकर शिक्षिकाओं का शैक्षणिक प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज मांगा है। सूत्रों के मुताबिक बलरामपुर बीएसए ने दस्तावेज उपलब्ध करा दिए है मगर गोरखपुर बीएसए ने अभी दस्तावेज नहीं भेजा।
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