स्कूलों के संचालन का पूरा जिम्मा समाज को सौंपेगी भारत सरकार, सरकार सिर्फ वेतन और व्यवस्था देगी, बड़े बदलाव की तैयारी के संकेत
सम्मग्र शिक्षा अभियान के एक नए चरण की होगी शुरुआत
नई दिल्ली: स्कूली शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए शुरू किए गए समग्र शिक्षा अभियान के जल्द ही एक नए चरण की शुरुआत होगी। इसमें 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्यों को पूरा करने सहित स्कूलों के संचालन की व्यवस्था को लेकर भी बड़े बदलाव की तैयारी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को इसे लेकर एक खाका पेश किया और राज्यों से सुझाव भी मांगे। नई व्यवस्था के तहत स्कूलों के संचालन का पूरा जिम्मा समाज के पास होगा, जबकि सरकार सिर्फ वेतन और व्यवस्था देगी।
केंद्र ने यह पहल तब की है, जब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को पांच साल पूरा हो गया है। समग्र शिक्षा अभियान का मौजूदा चरण भी 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहा है। इस अभियान के चलते पिछले कुछ वर्षों में स्कूली शिक्षा में इंफ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता दोनों स्तर पर काफी सुधार हुआ है। बावजूद इसके लर्निंग आउटकम बढ़ाने, परीक्षा के बोझ को कम करने, बारहवीं तक शत-प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात करने जैसे ऐसे कदम हैं, जिसे सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाए बगैर हासिल नहीं किया जा सकता।
मंत्रालय ने इसी सोच के साथ अब स्कूलों के संचालन की पूरी व्यवस्था में बदलाव का फैसला लिया है। इसे लेकर एक मसौदा तैयार किया गया है, जिसमें स्कूलों के संचालन के लिए समाज के प्रबुद्ध वर्गों की समिति गठित की जा सकती है।
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