जनपद में बेसिक शिक्षा का हाल ऐसा है, जहां पर शिक्षक बीएसए दफ्तर और बीआरसी दफ्तर कार्य संभालते है और एकल स्कूलों में ताले लटकते हैं। इसके बाद भी विभाग द्वारा इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं। ऐसे में शैक्षिक स्तर उठने के बजाय गिरता जा रहा है। बीते वर्षों से लेकर अब तक कई बीएसए आ चुके है, लेकिन अभी तक बीएसए कार्यालय और बीआरसी में तैनात शिक्षकों का संबद्धीकरण समाप्त नहीं किया जा सका है। शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चलने के बजाय डगमगा रहा है।जिले में प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों की संख्या करीब 2700 है। इन विद्यालयों में अंग्रेजी, गणित और विज्ञान के शिक्षकों की कमी वर्षों से चल रही है। इसके बाद भी जिन स्कूलों में छात्र संख्या के सापेक्ष शिक्षक नहीं है। वहां तैनात शिक्षकों को बीएसए कार्यालय और बीआरसी में संबद्ध किया गया है। इसके चलते जिले के दर्जनों एकल बंद स्कूलों में अभी तक ताला लटक रहा हैं। विभागीय खंड शिक्षाधिकारियों की लापरवाही के चलते वर्षों से संबद्ध शिक्षक पढ़ाने के बजाय बीएसए दफ्तर और ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) में बाबूगिरी करते नजर आ रहे है। जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पटल पर तैनात लिपिकों से भारी संख्या में कमी हो। पूर्व बीएसए द्वारा संबद्ध शिक्षकों की सूची मांगी गई थी, लेकिन टालमटोल के चलते यह लिस्ट नहीं दी जा सकी। सूत्र बताते हैं जिले में करीब सैकड़ों की संख्या में शिक्षकों को संबद्ध किया गया है। इसमें शिक्षक और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी शामिल हैं। रायबरेली में कई वर्षों से चल आ रही इस परंपरा को कोई भी बीएसए तोड़ नहीं सका। इन संबद्ध शिक्षकों को पदोन्नति भी मिल जाती है जोकि शिक्षा का अधिकार नियमों के विरुद्ध है। इस बार शिक्षकों को बीएसए से बहुत उम्मीद है कि जिससे शिक्षक नेताओं का संबद्धीकरण समाप्त कर उनका मिथक तोड़ा जा सके
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