केंद्र सरकार की ओर शुरू की गई दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को राइट टू एजूकेशन (आरटीई) के तहत निश्शुल्क शिक्षा दिए जाने की योजना राजधानी लखनऊ में इस वर्ष भी पूरी तरह फ्लाप रही है। जिले के निजी स्कूलों की एक लाख सीटों के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर ऐसे बच्चों को दाखिला दिए जाने की व्यवस्था थी। बावजूद इसके बेसिक शिक्षा विभाग महज एक प्रतिशत सीटों पर भी दावेदारी के साथ दाखिले नहीं करा सकी है। 1जिले में निर्धारित 25 हजार सीटों के लिए महज 1308 आवेदन ही विभाग को प्राप्त हुए जिनमें 534 छात्र पात्र मिले हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि प्राप्त आवेदनों में 250 छात्रों का दाखिला कराया जा चुका हैं। बीएसए प्रवीणमणि त्रिपाठी का कहना है कि आरटीइ के तहत 1308 आवेदन प्राप्त हुए है। इनमें 534 ही पात्र हैं। पात्रों में 250 बच्चों के दाखिले कराए जा चुके हैं। 1क्या कहते हैं एसोसिएशन अध्यक्षनिजी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष मधुसूदन दीक्षित का कहना है कि अभी तक किसी विद्यालय में एक भी छात्र का दाखिला नहीं हुआ है। 1क्या है दाखिले की प्रक्रिया1दाखिले के लिए आवेदन फार्म बीएसए ऑफिस से लेना पड़ता है। फार्म में जो स्कूल बच्चे के घर से निकटतम हो उसी को वरीयता के मुताबिक फार्म में भरा जाता है। अधिक छह स्कूलों का नाम वरियता के मुताबिक दिया जा सकता है। फार्म के साथ निवास जाति प्रमाण पत्र, अलाभित समूह के लिए जाति प्रमाण पत्र व दुर्बल आय वर्ग के बच्चों के माता पिता का आय प्रमाण पत्र जिनकी वार्षिक आय एक लाख से कम हो उपलब्ध कराना पड़ता है। साथ ही संबंधित अस्पताल अथवा नगर निगम से जन्म प्रमाण पत्र मुहैया करना पड़ता है। यदि जन्म प्रमाण पत्र नहीं है तो शपथ पत्र देना होता है। इस सभी दस्तावेजों के साथ फार्म भर कर बीएसए कार्यालय में देना पड़ता है। बीएसए कार्यालय फार्म की स्क्रूटनी कर छात्रों को निकटतम स्कूल एलाट करने का काम करता है। योजना के दम तोड़ने का कारण सामाजिक कार्यकत्र्ता शबीना बानो का कहना है कि सरकार की ओर से प्रचार प्रसार के अभाव में इस योजना को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। जानकारी न होने के कारण भी ही दाखिलों की संख्या कम है।
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