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Saturday, April 4, 2026

CBSE : नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए गणित, विज्ञान के दो स्तर अगले सत्र से होंगे लागू, छठी कक्षा से तीसरी भाषा अनिवार्य,

छठी कक्षा से तीसरी भाषा को सीबीएसई ने किया अनिवार्य, नए नियम के तहत तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषा होना जरूरी

कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यामक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भाषा शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा (आर3) को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। यह कदम नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है। साथ ही इसी सत्र से कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू किया जा रहा है।

सीबीएसई के अनुसार अब छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कम से कम एक और भाषा पढ़नी होगी। नए नियम के तहत तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। इस नीति के लागू होने के बाद कक्षा छठी से शुरू होने वाला तीसरी भाषा का अध्ययन कक्षा दसवीं तक जारी रहेगा। वर्तमान में हिंदी और अंग्रेजी समेत कुल 44 भाषाएं पढ़ाई जा रही हैं। जिनमें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाएं, अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषाएं और कुछ विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं।

छात्रों का होगा समग्र विकास : भाषा पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्रों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमता का समग्र विकास हो सके। इसमें आर 1, आर2 और आर3 के रूप में तीन-भाषा ढांचा तय किया है। एनसीएफएसई-2023 की सिफारिशों के अनुसार इन तीन भाषाओं में से दो भाषाएं भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड द्वारा बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी जाएगी।

 सभी कक्षा में भाषा होगी अनिवार्य
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा की पढ़ाई शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठीं में अनिवार्य रूप से शुरू होगी। इसके बाद हर वर्ष इसे एक-एक कक्षा में बढ़ाया जाएगा ताकि छात्रों पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े और वह क्रमिक रूप से नई भाषा सीख सकें। जारी कार्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में केवल कक्षा छठीं के छात्रों के लिए आर3 अनिवार्य होगा। जबकि सत्र 2027-28 में यह कक्षा छठी और सातवी, सत्र 2028-29 में कक्षा छठी से आठवी, सत्र 2029-30 में कक्षा छठी से नौवीं और सत्र 2030-31 तक कक्षा छठी से दसवीं तक के सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य हो जाएगी।

सांस्कृतिक विविधता की समझ होगी मजबूत : इस नीति के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। सीबीएसई का मानना है कि इस पहल से छात्रों की भाषाई क्षमता के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विविधता की समझ भी मजबूत होगी। इस चरणवद्ध शुरुआत से पाठ्यक्रम का सुचारू रूप से परिवर्तन सुनिश्चित और माध्यमिक स्तर के मूल्यांकन सुधारों के साथ सामंजस्य स्थापित होगा।

अधिकांश किताब 10 से 15 अप्रैल तक होंगी उपलब्ध : वहीं सीबीएसई द्वारा कक्षा नौवीं और दसवीं पाठ्यक्रम जारी करने को लेकर आयोजित वेबिनार में एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश सकलानी ने अनुसार नौवीं की किताबें तैयार हैं। प्रिंटिंग में हैं। इसमें अधिकांश किताबें 10 से 15 अप्रैल के बीच आ जाएंगी। एक से दो किताबें आने में देरी हो सकती है।



सीबीएसई : नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए गणित, विज्ञान के दो स्तर अगले सत्र से होंगे लागू, 

मानक और उन्नत प्रणाली पर आधारित 10वीं की पहली परीक्षा 2028 में होगी

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए अपना नया शैक्षिक कार्यक्रम लागू कर दिया। इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली होगी। गणित और विज्ञान के लिए दो स्तरीय प्रणाली (मानक और उन्नत) पर आधारित कक्षा 10 की पहली बोर्ड परीक्षा 2028 में होगी।

सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि 2026 से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत अनिवार्य तीन भाषा फार्मूला कक्षा 6 के लिए लागू किया जाएगा, जबकि कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान में अनिवार्य मानक एवं वैकल्पिक उन्नत पाठ्यक्रमों की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू की जाएगी। कक्षा 9 के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू होने से दोनों विषयों में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

अधिकारी ने कहा, नए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे (एनसीएफ) की सिफारिशों के अनुसार, इन तीन भाषाओं में से दो भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए । भाषाओं को तीन चरणों-आर 1, आर 2 और आर3-में एक सुव्यवस्थित तीन-भाषा ढांचे के तहत व्यवस्थित किया गया है। बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन के बोर्ड के प्रयासों को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से तीसरी भाषा को अनिवार्य किए जाने से यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक छात्र कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करे। हालांकि, एक समान भाषा योजना को अपनाना वांछनीय है, लेकिन अगर कोई छात्र विदेश के किसी स्कूल से पढ़कर आया है और उसने वहां 8वीं या 9वीं तक जो तीसरी भाषा पढ़ी थी, वह स्कूलों में उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे खास मामलों में निर्धारित मानदंडों के अनुसार छूट दी जा सकती है। 


मानक परीक्षा अनिवार्य, उन्नत वैकल्पिक

गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली पर अधिकारी ने कहा, सभी छात्र मानक पाठ्यक्रम का अध्ययन करेंगे और तीन घंटे की 80 अंकों की एक समान परीक्षा में शामिल होंगे। उच्च दक्षता का विकल्प चुनने वाले छात्र दोनों विषयों में किसी एक या दोनों में एक अतिरिक्त उन्नत स्तर का चयन कर सकते हैं। इस स्तर में एक घंटे का 25 अंकों का एक अन्य प्रश्नपत्र हल करना होगा, जिसे उच्च-स्तरीय बौद्धिक कौशल और गहन वैचारिक समझ आंकने के लिए तैयार किया गया है। अधिकारी ने कहा, छात्रों के लिए मानक परीक्षा देना अनिवार्य होगा, जबकि उन्नत परीक्षा वैकल्पिक रहेगी। अहम बात यह है कि उन्नत परीक्षा में हासिल अंकों को कुल अंकों में नहीं जोड़ा जाएगा; इसके बजाय 50 फीसदी या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मार्कशीट में उन्नत स्तर की योग्यता अलग से दिखाई जाएगी।

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