लखनऊ : शिक्षक के तौर पर अपने विद्यार्थियों को ईमानदारी से जीवन जीने का सबक सिखाने वाले कमलेश कुमार मिश्र को रिटायर होने के बाद ईमानदारी महंगी पड़ रही है। वर्ष 2009 में बख्शी का तालाब क्षेत्र के प्राइमरी स्कूल सुवंशीपुर से सेवानिवृत्त हुए कमलेश कुमार मिश्र ने संकल्प किया कि वह पेंशन के लिए कोई घूस नहीं देंगे। उनसे खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में करीब दस हजार रुपये देने के लिए कहा गया, लेकिन वह अड़ गए कि जीवन भी नौकरी की और अब अपना ही हक घूस देकर नहीं लूंगा।
मगर भ्रष्ट तंत्र बिना घूस लिए उनकी पेंशन निर्धारित नहीं कर रहा है। उनके पास तारीख के अनुसार वह लिस्ट है जिसमें वह बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर दूसरे अधिकारियों तक से मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई उन्हें न्याय नहीं दिला पाया है।
इस भ्रष्ट तंत्र से लड़ाई लड़ते-लड़ते सेवानिवृत्त शिक्षक कमलेश कुमार मिश्र की यह हालत हो गई है कि उनके जूते फट चुके है, शरीर पर जो कपड़े हैं वह भी कई जगह से फटे हुए हैं। पेंशन न मिलने के कारण उन्हें खर्च चलाना मुश्किल होता है। बेटे सिर्फ दो वक्त की रोटी का खर्चा तो चला सकते हैं मगर महंगाई के इस दौर में उन्हें भी बहुत कुछ देखना होता है। वह कहते हैं कि हमने भी संकल्प लिया है कि घूस तो नहीं देंगे चाहे बिना पेंशन पाए ही जीवन खत्म हो जाए।
बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय की ओर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को फरवरी 2016 में पत्र लिखा गया था कि जल्द इस प्रकरण पर उचित कार्रवाई करें। मगर अभी तक खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से ही फाइल आगे नहीं बढ़ी है।
No comments:
Write comments