‘सब पढ़े, सब बढ़ें,' बेसिक शिक्षा विभाग का नारा व्यवस्था के आगे दम तोड़ रहा है। परिषदीय प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में 15 अक्टूबर से अर्धवार्षिक परीक्षाएं शुरु होने जा रही है, लेकिन इन विद्यालयों के छात्र-छात्रओं ने अभी तक आधा कोर्स पढ़ा ही नहीं है। बड़ी संख्या में नौनिहाल बिना किताबें पढ़े ही अर्धवार्षिक परीक्षाओं में बैठेंगे, क्योंकि उनके स्कूलों में सभी विषयों की पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। परिषदीय स्कूलों में आधा शैक्षिक सत्र समाप्त हो गया है, लेकिन अभी तक जिले के पचास प्रतिशत विद्यालयों में भी पूरा कोर्स नहीं पहुंचा है। दूरदराज के गांव तो दूर जिला मुख्यालय व अन्य नगरों के विद्यालयों में भी शतप्रतिशत किताबें नहीं पहुंची है। कुछ विद्यालयों के शिक्षक गत शैक्षिक सत्र की पुरानी किताबों से बच्चों को विद्यालय में पढ़ देते है, लेकिन उनके घर पढ़ने को कुछ नहीं है। इस कारण शिक्षक बच्चों का पाठ्यक्रम अभी तक पूरा नहीं करा पाए है, जबकि अर्धवार्षिक परीक्षाएं 15 अक्टूबर से शुरू होने को हैं। ऐसे में बिना कोर्स पूरा करे ही अधूरे ज्ञान से बच्चे परीक्षा में शामिल होंगे। उधर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महेशचंद का कहना है कि उनकी तैनाती हाल ही में हुई है। उन्होंने जानकारी की थी, पता चला है कि काफी विद्यालयों में पुरानी किताबों से ब्लैकबोर्ड पर कोर्स पढ़ाया जा रहा है। पढ़े हुए कोर्स से परीक्षा ली जाएगी
No comments:
Write comments