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Wednesday, November 2, 2016

बिकती हैं माँ की छुट्टी, सीसीएल के नाम पर शिक्षिकाओं का हो रहा खुलेआम शोषण, प्रति माह के हिसाब से लिए जाते रुपये, नहीं दे रहा कोई ध्यान

केस एक

सुरसा विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने दो माह पूर्व सीसीएल के लिए आवेदन दिया था। उसकी सहायिका पूर्व में चिकित्सीय अवकाश पर रही। प्रधानाध्यापिका ने सोंचा कि सहायिका आ जाएगी तो वह सीसीएल पर चली जाएगी लेकिन उसी बीच सहायिका ने जुगाड़ लगाकर सीसीएल करवा ली। प्रधानाध्यापिका का आवेदन पहले था, लेकिन उसे अवकाश नहीं मिल सका और वह रोती घूमती रही।

केस दो

बावन विकास खंड के एक विद्यालय की शिक्षिका ने सीसीएल के लिए आवेदन किया। तो उससे 17 हजार रुपये मांगे गए। साफ साफ कह दिया गया कि लेना हो तो लो नहीं तो आगे बढ़ो। अभी हाल में ही एक शिक्षिका से रुपये मांगे गए। सौदेबाजी होते होते आठ हजार में बात पक्की हो गई। इसी बीच शिक्षिका के परिवारी जन ने रुपये मांग रहे लिपिक का वीडियो बना लिया और मामला काफी तूल पकड़ा।

शिक्षिकाओं की बाल्य देखभाल अवकाश में खेल के दो मामले तो महज उदागरण मात्र हैं। आए दिन रोजाना ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। परिषदीय विद्यालयों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की बातें तो बहुत हो रही हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं की तरफ ध्यान तो देना दूर की बात उल्टे शोषण हो रहा है। शिक्षिकाओं की बाल्य देखभाल अवकाश के नाम पर खुलेआम वसूली हो रही है। हालत तो यह हो गई है कि छुट्टी बिकती है, जो खरीदता उसे मिलती नहीं तो शिक्षिकाएं दर दर भटकती रहती हैं लेकिन कोई ध्यान देने वाल नहीं है।विद्यालयों में ड्यूटी के साथ ही शिक्षिकाएं अपनी जिम्मेदारी भी निभा सकें, कुछ इसी मंशा के साथ सीसीएल यानी कि चाइल्ड केयर लीव ( बाल्य देखभाल अवकाश ) की व्यवस्था बनाई गई थी। जिसमें दो भी शिक्षिका अपने सेवाकाल के दौरान दो बच्चों की देखभाल के लिए दो वर्ष तक की सीसीएल ले सकती है। शिक्षिकाओं को यह अवकाश तीन तीन माह के लिए दिया जाता है। वैसे सरकार की मंशा तो अच्छी थी लेकिन मनमानी का शिकार हो गई। पूर्व में खंड शिक्षा अधिकारी सीसीएल देते थे लेकिन शिकायत हुई कि ब्लाकों पर शोषण होता है तो बीएसए को अधिकार दे दिया गया तो और खेल बढ़ गया है और अब प्रति माह के हिसाब से रुपये मांगे जाते हैं। बीएसए कार्यालय में लंबित प्रकरण खेल की गवाही दे रहे हैं। जो व्यवस्था कर देता उसे अवकाश मिल जाता नहीं तो शिक्षिकाएं परेशान घूमती रहती हैं।

प्रति माह के हिसाब से लिए जाते रुपये नहीं दे रहा कोई ध्यानसीसीएल में किसी भी तरह के खेल की बात से साफ इन्कार कर रहे हैं। जो भी आता है, नियमानुसार सीसीएल दे दी जाती है। अगर कहीं से रुपये मांगने या फिर मनमानी की शिकायत आती है तो वह जांच कर कार्रवाई करेंगे।-मसीहुज्जमा सिद्दीकी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।

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