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Saturday, February 28, 2026

पंजीकृत परीक्षार्थी के स्थान पर छ‌द्म परीक्षार्थी द्वारा परीक्षा में सम्मिलित होने के प्रकरणों में साक्ष्य संकलन एवं कठोर वैधानिक कार्यवाही के सम्बंध में।

पंजीकृत परीक्षार्थी के स्थान पर छ‌द्म परीक्षार्थी द्वारा परीक्षा में सम्मिलित होने के प्रकरणों में साक्ष्य संकलन एवं कठोर वैधानिक कार्यवाही के सम्बंध में।


वित्तविहीन शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय की तैयारी, माध्यमिक शिक्षा विभाग बना रहा इनके लिए नियमावली

वित्तविहीन शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय की तैयारी, माध्यमिक शिक्षा विभाग बना रहा इनके लिए नियमावली

यूपी सरकार वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की दशा सुधारने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है

23 हजार के करीब वित्त विहीन माध्यमिक स्कूल हैं यूपी में

नियमों के मुताबिक स्कूल प्रबंधन को काम करना होगा

04 लाख के करीब इनमें अंशकालिक शिक्षक काम करते हैं


लखनऊ। राज्य सरकार वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। माध्यमिक शिक्षा विभाग इसके लिए नियमावली तैयार कर इसमें इनकी सेवा शर्तों के साथ मानदेय तय करने जा रहा है। स्कूल प्रबंधन को इसके आधार पर शिक्षकों को रखते हुए मानदेय देना होगा। प्रदेश में इस समय करीब 23 हजार वित्तविहीन माध्यमिक स्कूल हैं और इनमें चार लाख से अधिक अंशकालिक शिक्षक हैं।

नियमावली बनाने के लिए सचिव माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। कमेटी एक माह में अपनी रिपोर्ट देगी। इसमें सभी बिंदुओं की गहन समीक्षा करते हुए जरूरी प्रावधान किए जाएंगे। नियमावली जारी होने के बाद स्कूल प्रबंधकों की मनमर्जी समाप्त हो जाएगी।


माध्यमिक शिक्षा में 80% इन शिक्षकों की भागीदारी

माध्यमिक शिक्षा में वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों की भागीदारी 70 से 80 प्रतिशत बताई जाती है। विधानमंडल में इनके मानदेय का मामला उठा था, इस पर सरकार ने कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही का आश्वासन दिया था।


नियमावली जल्द जारी होः माध्यमिक शिक्षक संघ

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री राजीव यादव कहते हैं कि वित्त विहीन शिक्षकों के लिए मजबूत सेवा नियमावली बने और सम्मानजनक मानदेय मिले। नियमावली बनाते हुए इसे जल्द जारी किया जाए।


न्यूनतम मजदूरी के बराबर मानदेय नहीं

वित्त विहीन माध्यमिक स्कूलों में अंशकालिक शिक्षकों की सेवाशर्तें 10 अगस्त 2001 को जारी शासनादेश के अनुसार निर्धारित हैं। इसके मुताबिक स्कूल प्रबंधन को अपने संसाधनों के आधार पर शिक्षकों को भुगतान करना है। यह भुगतान संपूर्ण शिक्षण सत्र के लिए नियमित रूप से किया जाएगा। इसका लेखा-जोखा भी रखा जाएगा। इसके मुताबिक शिक्षकों को मजदूरी अधिनियम में कुशल श्रमिक के लिए तय न्यूनतम मजदूरी से कम मानदेय नहीं दिया जाएगा। साथ ही भविष्य निधि एवं जीवन बीमा की सुविधाएं भी दी जाएंगी। इसके बाद भी अधिकतर स्कूलों में शासनादेश का पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है। कुछ स्कूलों में तो 5000 से 6000 रुपये प्रतिमाह ही मानदेय दिया जा रहा है।



वित्तविहीन माध्यमिक शिक्षकों के लिए बनेगी सेवा नियमावली, उच्चस्तरीय समिति गठित, देखें आदेश 

लखनऊः प्रदेश के 22 हजार वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की अरसे लंबित सेवा नियमावली अब तय होने वाली है। शासन ने सचिव, माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली का मसौदा तैयार करेगी। 


समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव को सौंपनी होगी। इसके साथ ही यह समिति वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता से संबंधित नियमावली में भी संशोधन के लिए प्रस्ताव देगी। इस संबंध में सोमवार को आदेश जारी कर दिया गया।

सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति में माध्यमिक शिक्षा के विशेष सचिव, शिक्षा निदेशक, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (लखनऊ मंडल), शिक्षा निदेशक द्वारा नामित वित्तविहीन संस्था का प्रतिनिधि और कंसल्टेंट मेसर्स डेलाइट का प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। 

माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे। यह समिति वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा शर्तों, कार्यकाल, दायित्व और अन्य आवश्यक पहलुओं को लेकर विस्तृत नियमावली पर विचार कर रिपोर्ट देगी। इसी के साथ माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा वित्तविहीन विद्यालयों को मान्यता दिए जाने से जुड़े मानकों और शर्तों का भी पुनरीक्षण करेगी।

सूबे में बनेंगे 76 हजार आंगबाड़ी केंद्र के नए भवन, सुविधाओं से होंगे लैस

सूबे में बनेंगे 76 हजार आंगबाड़ी केंद्र के नए भवन, सुविधाओं से होंगे लैस

सीएम ने दिए निर्देश- 1.89 लाख केंद्रों का हो रहा संचालन, 76 हजार केंद्रों के पास अपना भवन नहीं


लखनऊ। प्रदेश के हर एक आंगनबाड़ी केंद्र का स्वयं का भवन होगा। इसके लिए 76 हजार नये भवनों का निर्माण कराया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं। जल्द से जल्द कार्य योजाना तैयार करने को कहा है। खुद के भवनों में आंगनबाडी केंद्रों का संचालन होने से तमाम सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी।


प्रदेश में 1.89 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें से लगभग 76 हजार केंद्र अभी अपने भवनों के बिना चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन से छह वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र प्री-प्राइमरी शिक्षा का आधार हैं, इसलिए सुरक्षित, आकर्षक और बाल-मित्र वातावरण सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है।

भवन निर्माण के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) से सहयोग लेने के निर्देश दिए गए हैं। अगर और जरूरत पड़ेगी तो राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रस्तावित भवनों में पेयजल, विद्युत व्यवस्था, बाल-मित्र शौचालय, किचन शेड, खेल क्षेत्र, लो-हाइट वॉश यूनिट, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण कक्ष, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और पोषण वाटिका जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।


ये दिए सुझाव : मुख्यमंत्री ने कहा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल अपनाया जाए। एक मानक डिजाइन तैयार की जाए। जहां संभव हो, प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में ही आंगनबाड़ी भवन बनाया जाए। जिससे ताकि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

Friday, February 27, 2026

अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के चतुर्थ त्रैमास के वेतनादि के भुगतान हेतु अतिरिक्त धनावंटन के सम्बन्ध में

अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के चतुर्थ त्रैमास के वेतनादि के भुगतान हेतु अतिरिक्त धनावंटन के सम्बन्ध में


परिषदीय स्कूलों में 3 मार्च का भी अवकाश घोषित करने की मांग ने पकड़ा जोर

परिषदीय स्कूलों में 3 मार्च का भी अवकाश घोषित करने की मांग ने पकड़ा जोर, PSPSA ने रखी मांग





लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 2 मार्च सोमवार को होलिका दहन और 4 मार्च बुधवार को होली की छुट्टी है। किंतु परिषद के कैलेंडर में 3 मार्च मंगलवार को विद्यालय खोले गए हैं। इसे देखते हुए शिक्षक संगठनों ने 3 मार्च को भी छुट्टी घोषित करने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर 3 मार्च को भी अवकाश घोषित करने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि 28 फरवरी को शिक्षण कार्य करने के बाद वे दूर-दराज अपने घर चले जाएंगे। 


3 मार्च को होली का अवकाश किए जाने और डिजिटल उपस्थिति हेतु शिक्षकों  को बाध्य न किए जाने की मांग को लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का ज्ञापन 
 


किताबों की ढुलाई का टेंडर जल्दी करके समय से स्कूलों तक पहुंचाने के निर्देश, ऑनलाइन बैठक में अपर मुख्य सचिव ने की योजनाओं की समीक्षा

किताबों की ढुलाई का टेंडर जल्दी करके समय से स्कूलों तक पहुंचाने के निर्देश, ऑनलाइन बैठक में अपर मुख्य सचिव ने की योजनाओं की समीक्षा 


लखनऊ। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलों में निशुल्क वितरण के लिए भेजी गई किताबों को समय से स्कूलों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व बीएसए के साथ बृहस्पतिवार को हुई ऑनलाइन बैठक में उन्होंने किताबों की ढुलाई का टेंडर समय से करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में उन्होंने सभी विद्यालयों में आठ मार्च तक छात्राओं के लिए अलग शौचालय बनवाने, आरटीई के लिए जारी बजट का समय से प्रयोग करने के भी निर्देश दिए। पीएमश्री विद्यालयों में चल रहे कामकाज व सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालयों की दूसरी किस्त के उपभोग की समीक्षा में अपर मुख्य सचिव ने बजट के समय से सदुपयोग के निर्देश दिए। कहा, पैसा अगर लैप्स हुआ तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। 



किताबों की आपूर्ति, आरटीई में प्रवेश की प्रगति जांचेंगे अपर मुख्य सचिव

लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को नए सत्र 2026-27 में समय से किताबें वितरित कराने की कवायद तेज हो गई है। इसके तहत कई जिलों में 80 फीसदी तक किताबों की आपूर्ति हो गई है। अब जिले में इसका टेंडर कर मार्च में वितरण सुनिश्चित किया जाना है। इसी क्रम में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा 26 फरवरी को बैठक कर विभागीय कार्यों की प्रगति जांचेंगे। इसमें प्रमुख रूप से सत्र 2026-27 में पाठ्य पुस्तकों की समय से आपूर्ति, आरटीई में प्रवेश व जिलावार फीस प्रतिपूर्ति के लिए दी गई राशि के भुगतान की स्थिति शामिल है। 

इसके साथ ही अपर मुख्य सचिव पीएमश्री योजना में एसएनए स्पोर्ट के माध्यम से वित्तीय व्यय, पीएम पोषण योजना के अंतर्गत वित्तीय प्रगति की भी समीक्षा करेंगे। सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व बीएसए की ऑनलाइन समीक्षा बैठक में वे नव भारत साक्षरता के व्यय, समग्र शिक्षा की विभिन्न योजनाओं, फर्नीचर खरीद व भुगतान, होली से पहले सभी कार्मिकों के वेतन भुगतान, आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लास व टैबलेट, सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय की दूसरी किश्त के उपभोग प्रमाण पत्र की स्थित की भी समीक्षा करेंगे। 




नए सत्र में समय पर किताबें देने की तैयारी तेज, 26 फरवरी की बैठक में होगी समीक्षा 

लखनऊ : नए शैक्षिक सत्र में बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को समय से किताबें मिलें, इसके लिए शिक्षा विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। इसी कड़ी में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने 26 फरवरी को बैठक बुलाई है। बैठक में किताबों की आपूर्ति से लेकर आरटीई के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति, सीएम माडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण और स्कूलों की जमीनी स्थिति की समीक्षा होगी। 


शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए पाठ्य-पुस्तकों की समयबद्ध आपूर्ति करने के लिए ट्रांसपोर्ट टेंडर की स्थिति पर भी नजर रखी जाएगी। विद्यालयों में स्वच्छ व क्रियाशील बालिका शौचालयों की स्थिति, प्रेरणा पोर्टल पर फोटो अपलोड की प्रगति और यू-डायस पर रिपोर्ट अपडेट की स्थिति भी देखी जाएगी। पीएमश्री योजना, पीएम पोषण योजना और नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के खर्च की भी समीक्षा होगी।

वरिष्ठता नहीं, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से बनेंगे प्रधानाचार्य, हाईकोर्ट ने रद्द किए पुरानी प्रक्रिया के भर्ती प्रस्ताव

वरिष्ठता नहीं, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से बनेंगे प्रधानाचार्य, हाईकोर्ट ने रद्द किए पुरानी प्रक्रिया के भर्ती प्रस्ताव


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों (एडेड विद्यालय) में प्रधानाचार्य बनने के लिए अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा व साक्षात्कार देना अनिवार्य बताया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 2023 के नए शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम के लागू होने के बाद पुराने नियमों के तहत मांगे गए सभी अधियाचन शून्य माने जाएंगे।


 कोर्ट ने शासन और चयन आयोग को भर्ती प्रक्रिया अगले छह महीने के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। कई जिलों के याचियों की याचिका पर न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। याचियों ने दलील दी कि वर्ष 2019-20 और 2021-22 में प्रधानाचार्यों के 884 और हेडमास्टरों के 729 पदों के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। इसलिए इसे पुराने नियमों से ही पूरा किया जाना चाहिए।

इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून में बदलाव का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। महज अधियाचन भेज देने से किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति का मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। जब प्रक्रिया एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी तो नई व्यवस्था को लागू करना पूरी तरह सांविधानिक है। 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (संशोधन) अधिनियम, 2016 अधिसूचना दिनांक 22 मार्च, 2016 के अधीन विनियमित किए गये अध्यापकों की सूचना गई मांगी

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (संशोधन) अधिनियम, 2016 अधिसूचना दिनांक 22 मार्च, 2016 के अधीन विनियमित किए गये अध्यापकों की सूचना गई मांगी 


 

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रदर्शन कर दिखाई ताकत और प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रदर्शन कर दिखाई ताकत और प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

कलक्ट्रेट तक जुलूस लेकर पहुंचे  शिक्षक, केंद्र सरकार से मामले में स्पष्ट रुख की मांग, आंदोलन की चेतावनी भी दी 


लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बृहस्पतिवार को शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ व उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन कर टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य करने का जमकर विरोध किया। जिलों में शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से पीएम मोदी को ज्ञापन भेजा।


दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने से पहले से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर भी संकट आ गया है। इससे देश भर के शिक्षक आंदोलन की राह पर हैं। इसी क्रम में जिलों में बीएसए कार्यालय पर एकत्र होकर शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ हुंकार भरी। उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी ने कहा कि अध्यादेश लाकर शिक्षकों को राहत दे। उन्होंने बताया कि 7 मार्च को दिल्ली में टीएफआई की बैठक होगी। इसमें सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष व महासचिव भाग लेंगे। बैठक में दिल्ली में होने वाली रैली की तिथि घोषित की जाएगी।

पीएम को भेजे ज्ञापन में आरटीई लागू होने की तिथि से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग की गई है। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्रालय जल्द से जल्द इस मामले में संसद में अध्यादेश लाकर राहत दे। 



23 से 25 फरवरी तक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे यूपी के शिक्षक 




टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ यूपी के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय 

23 फरवरी 2026
लखनऊः परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। राजधानी में रविवार को हुई बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (जेटीएफआइ) का गठन किया और शिक्षक हितों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।

बैठक में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पांडेय ने कहा कि टीईटी के मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने इसे शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए हर मोर्चे पर संघर्ष जारी रखने की बात कही। 

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों ने नियुक्ति के समय सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी कर नौकरी प्राप्त की है, ऐसे में अब उन्हें टीईटी के बिना अपात्र बताना पूरी तरह गलत है। 

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी ने सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहने की बात कही। वहीं बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि महासंघ शिक्षकों का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देगा, संघर्ष अब और तेज होगा। 

बैठक में निर्णय लिया गया कि नौ मार्च से 15 मार्च तक 'शिक्षकों की पाती' नाम से ईमेल और पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा।


टीईटी अनिवार्यता का विरोध तेज, सरकार के रुख से खुश नहीं है प्रदेशभर के शिक्षक, X पर #JusticeForTeachers ग्लोबल ट्रेंडिंग में टॉप पर

23 फरवरी 2026
प्रयागराज : टीईटी की अनिवार्यता पर प्रदेश सरकार का रुख स्पष्ट न होने से नाराज परिषदीय शिक्षकों ने रविवार दोपहर दो से चार बजे तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभियान चलाया। जस्टिस फॉर टीचर्स हैशटैग से चलाया गया अभियान एक समय पूरी दुनिया में टॉप ट्रेंड कर रहा था। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले देशभर के सरकारी शिक्षकों ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रयागराज से भी उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ और महिला शिक्षक संघ के सदस्यों ने बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जताई।

शिक्षकों का कहना है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता उचित नहीं है। उनकी जब नियुक्ति हुई तब आवश्यक सारी अर्हताएं पूरी करते थे। नियुक्ति के सालों बाद कोई नियम लागू करने के कारण हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। विरोध अभियान के क्रम में सभी शिक्षक 23 से 25 फरवरी तक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। 26 फरवरी को एक से चार बजे तक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना देंगे और जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के सभी शिक्षक महारैली करके भारत सरकार को ज्ञापन देंगे।





टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ आज सोशल मीडिया पर अभियान चलाएंगे शिक्षक

22 फरवरी 2026
लखनऊ। देश-प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर शिक्षक एक बार फिर से आंदोलन तेज करेंगे, ताकि इस मामले में दबाव बनाकर जल्द से जल्द सकारात्मक परिणाम लिया जा सके। इसके लिए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक की ओर से 22 फरवरी को दोपहर में सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। इसी क्रम में 23 फरवरी से शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। 


टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश के कई शिक्षकों संगठन आए एक साथ, मार्च के अंत में दिल्ली में रैली करेंगे 

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद लगाए शिक्षक संगठन फिर आंदोलन की राह पर हैं। इस बार प्रदेश के कई शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले आंदोलन करने के लिए तैयार हुए हैं। इसका कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।

रिसालदार पार्क स्थित शिक्षक भवन में हुई बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ, उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने तय किया कि 27 जुलाई 2011 के पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से राहत देने के लिए वे सभी मिलकर लड़ाई लड़ेंगे।

बैठक में तय किया गया कि 22 फरवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। 23 से 25 फरवरी तक शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर धरना देंगे। यहां डीएम कार्यालय तक पैदल मार्च कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली में महारैली की जाएगी।

बैठक में टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी, उप्र महिला शिक्षक संघ की डॉ. सुलोचना मौर्य, संजय सिंह, शिवशंकर पांडेय, राधेरमण त्रिपाठी, अनंत कुमार, पंकज अवस्थी, प्रीति सिंह, ज्योति सिंह आदि उपस्थित हुए। राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने भी अपनी सहमति दी है।


यूपी बोर्ड सख्त: 3 अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य, नकली और महंगी पुस्तकों पर होगी कार्रवाई, माध्यमिक स्कूलों में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना यूपी बोर्ड का काम : हाईकोर्ट

पाठ्यपुस्तकों का निर्धारण यूपी बोर्ड का अधिकार क्षेत्र –हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने निस्तारित की राजीव प्रकाशन की याचिका

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में यह टिप्पणी की है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करना सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद (बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन) प्रयागराज की शक्ति और अधिकार क्षेत्र में आता है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मैसर्स राजीव प्रकाशन की याचिका निस्तारित करते हुए दिया है।

याची ने सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद के एक आदेश को चुनौती देते हुए यह याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने याचिका को इसी मुद्दे पर 2014 में दिए गए एक पुराने फैसले के आधार पर निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उक्त निर्णय में कहा गया था कि विवादित आदेश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के अध्ययन के लिए पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करना संबंधित प्राधिकारी की शक्ति और अधिकार क्षेत्र में है। यदि याची यूपी अधिनियम संख्या 7, 1979 या किसी अन्य कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो राज्य के अधिकारी उसमें परिकल्पित कार्रवाई का सहारा लेने के लिए हमेशा स्वतंत्र हैं।

याची अधिनियम या किसी अन्य कानून के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर रहा है, तो उन्हें ऐसी किताबें प्रकाशित करने या खुले बाजार में बेचने से नहीं रोका जा सकता जो परिषद की निर्धारित पाठ्यपुस्तकें नहीं हैं। भले ही ऐसी पुस्तकें परिषद की पाठ्यपुस्तकों के स्तर की न हों या उनकी कीमत बहुत अधिक हो, याची को अपने विपणन प्रयासों के परिणाम स्वयं भुगतने होंगे।

कोर्ट ने आगे कहा कि हमने 15 अप्रैल 2014 के निर्णय का अवलोकन किया है और हमारा मानना है कि याचिका में उठाया गया मुद्दा पूरी तरह से उसी निर्णय के अंतर्गत आता है। तदनुसार इस याचिका को उन्हीं शर्तों के साथ निस्तारित किया जाता है।




यूपी बोर्ड सख्त: 3 अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य, नकली और महंगी पुस्तकों पर होगी कार्रवाई

माध्यमिक स्कूलों में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना यूपी बोर्ड का काम : हाईकोर्ट

किताबें छापकर खुले बाजार में बेचने पर कोई रोक नहीं है। कोर्ट ने इसी मामले में मेसर्स मित्तल बुक डिपो केस के फैसले को लागू करते हुए याचिका निस्तारित कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी तथा न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मेसर्स राजीव प्रकाशन एंड कंपनी व दो अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका में परिषद के सचिव की आठ जनवरी 2026 की विज्ञप्ति व 31 जनवरी 2026 के संशोधन को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है।

बोर्ड अथवा एनसीईआरटी के लोगो-नाम का उपयोग वर्जित
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी यूपी बोर्ड अथवा एनसीईआरटी के नाम व लोगो के उपयोग का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने सिर्फ इतना भर कहा है कि बोर्ड किसी को किताब छापने से नहीं रोक सकता (यदि यह कानून न तोड़े), लेकिन स्कूल में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना बोर्ड का काम है। किसी भी अनधिकृत प्रकाशक को एनसीईआरटी या यूपी बोर्ड के नाम/लोगो का उपयोग कर पुस्तकें छापने का अधिकार नहीं है। ऐसा करना कापीराइट अधिनियम और यूपी एक्ट संख्या सात (1979) का उल्लंघन है।

 सचिव के अनुसार, यह तथ्य भ्रामक है कि निर्धारित पुस्तकों तक सीमित रहना जरूरी नहीं है। बोर्ड ने कहा है कि शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए केवल तीन मुद्रकों मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स आगरा, मेसर्स पीतम्बरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड बिजौली झांसी और मेसर्स सिंघल एजेंसीज, लखनऊ को ही अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त किसी भी निजी प्रकाशक की पुस्तक 'पाठ्यपुस्तक' के रूप में अधिकृत नहीं है।



हाईकोर्ट में याचिकाएं खारिज, विद्यालयों में पढ़ाई जाएंगी यूपी बोर्ड की NCERT पाठ्यक्रम आधारित पाठ्यपुस्तकें

प्रयागराज : यूपी बोर्ड से अधिकृत प्रकाशकों के माध्यम से मुद्रित कराई गईं कक्षा नौ से 12 तक की पाठ्‌यपुस्तकों से नए शैक्षिक सत्र अप्रैल से पढाई कराए जाने में अब कोई अड़चन नहीं है। तीन अधिकृत प्रकाशकों की पाठ्यपुस्तकों के अलावा अन्य कोई किताबें/गाइड बुक न पढ़ाए जाने की यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह की विज्ञप्ति के विरुद्ध दाखिल याचिकाएं हाई कोर्ट से खारिज हो गईं। यूपी बोर्ड ने अपनी 12 तथा एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित 36 विषयों की 70 पाठ्यपुस्तकें मुद्रित करने वाले प्रकाशकों की सूची जारी की है।

इन प्रकाशकों की किताबें फरवरी के प्रारंभ में जनपदों में निर्धारित पुस्तक विक्रेताओं के यहां उपलब्ध करा दी गई हैं। बोर्ड सचिव ने आठ जनवरी को जारी विज्ञप्ति में कहा था कि प्रदेश के सभी राजकीय, एडेड व स्ववित्तपोषित हाईस्कूल व इंटरमीडिएट (कक्षा नौ से 12 तक) विद्यालयों में यूपी बोर्ड से अधिकृत प्रकाशकों से मुद्रित पाठ्यपुस्तकों के अलावा अन्य कोई पाठ्यपुस्तक प्रचलित नहीं की जाएगी। 

विद्यार्थियों को अधिक मूल्य/अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें/गाइड बुक आदि खरीदने पढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। बोर्ड सचिव के अनुसार इस संबंध में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राजीव प्रकाशन एंड कंपनी व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य याचिका को इस आशय से निस्तारित कर दिया गया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) की आठ जनवरी की विज्ञप्ति में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं पाया गया। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अनधिकृत प्रकाशक किसी संबंधित कानून का उल्लंघन करते पाया गया तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्यावाही सुनिश्चित की जाएगी।

Thursday, February 26, 2026

अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत विद्यालयों/महाविद्यालयों तथा सम्बद्ध प्राइमरी (बालक) /(बालिका) में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के एन०पी०एस० के अंशदान का स्थानान्तरण के सम्बन्ध में।

अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत विद्यालयों/महाविद्यालयों तथा सम्बद्ध प्राइमरी (बालक) /(बालिका) में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के एन०पी०एस० के अंशदान का स्थानान्तरण के सम्बन्ध में।



शिक्षा विभाग का रूटीन है, काम में देर-भ्रष्टाचार का फेर, प्रदेशभर में लंबे समय से लटके हैं मामले, रिश्वत की भी आती हैं शिकायतें, फिर भी नहीं होता निस्तारण

शिक्षा विभाग का रूटीन है, काम में देर-भ्रष्टाचार का फेर, प्रदेशभर में लंबे समय से लटके हैं मामले, रिश्वत की भी आती हैं शिकायतें, फिर भी नहीं होता निस्तारण

देवरिया में शिक्षक ने की थी आत्महत्या


लखनऊ: देवरिया में कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने 20 फरवरी को आत्महत्या कर ली। सुइसाइड नोट से पता चला कि उन्हें पहले बर्खास्त किया गया था। बाद में हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और तैनाती के आदेश दिए। एक साल से वह बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। इस दौरान उन्होंने जेवर गिरवी रख और खेत बेच कर 16 लाख रुपये भी दिए, लेकिन उन्हें तैनाती नहीं मिली।


यह मामला तो शिक्षक की आत्महात्या के बाद चर्चा में आ गया, लेकिन शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़े काफी गहरी हैं। नियुक्ति से लेकर वेतन, भत्ते और पेंशन के मामले लंबे समय तक लटके रहते हैं। आत्महत्या, मारपीट जैसी घटनाओं के बाद मामला जब चर्चा में आ जाता है तो उस पर कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ दिन बाद मामला शांत हो जाता है। तय समय में निस्तारण का सिटीजन चार्टर और समय-समय पर अधिकारियों के आदेश भी होते हैं, लेकिन कार्यप्रणाली में अंतर नहीं आता। अब भी बीएसए और डीआईओएस दफ्तरों में कई मामले लंबित हैं।


निधन हुआ, पर पेंशन का पुनर्निर्धारण नहीं: मोलनलालगंज से बेसिक स्कूल से रिटायर शिक्षिका मनोरमा देवी का निधन हो गया। डेढ़ साल पहले उनके पति लक्ष्मी नारायण ने पेंशन का पुनर्निर्धारण अपने पक्ष में करवाने के लिए आवेदन किया। जनवरी 2025 में ही बीएसए ने पत्रावली की जांच पड़ताल करने के लिए मोहनलालगंज के बीईओ को पत्र लिख। तब से वह दफ्तर के चक्कर लगाते रहे। इस बीच वह बीमार भी हुए। इलान के लिए पैसे के अभाव की बात भी बताई, लेकिन उनको पेंशन नहीं मिल सकी और 2 सितंबर 2025 को उनका निधन हो गया। उसके बाद उनकी बहू ने अधिकारियों से लेकर सीएम तक को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके श्वसुर से 70 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। उन्होंने बीईओ पर कार्रवाई की मांग की है।

वेतन वृद्धि रोकी  : लखनऊ में ही पूर्व माध्यमिक विद्यालय कमालपुर विचिलिका में ही पूर्व इंचार्ज प्रधानाध्यापिका शशि सिंह की वेतन वृद्धि पिछले साल जुलाई में रोक दी गई। इसकी वजह ये बताई गई कि उन्होंने एक बच्चे का दाखिला जन्म तिथि में छेड़छाड़ करके लिया। शिक्षिका ने बीएसए को स्पष्टीकरण में लिखा कि आधार कार्ड के अनुसार उन्होंने आयुसंगत कक्षा में प्रवेश लिया। आरटीई के नियमों के आधार पर ही जारी शासनादेश में भी कहा गया था कि टीसी या आयु प्रमाण पत्र के अभाव में दाखिले न रोके और आयु संगत कक्षा में प्रवेश देकर उनको मुख्य धारा में जोड़े। उन्होंने अभिभावक का एफिडेविट भी दिया है। इसके बाद भी प्रधानाध्यापिका की वेतन वृद्धि रोकने का आदेश अब तक वापस नहीं लिया गया। 

विधान परिषद में उठा मुद्दा 
विधान परिषद में शिक्षक दल के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने रायबरेली का मामला उठाया। वशी नकवी इंटर कॉलेज में प्रवक्ता प्रदीप कुमार कार्यवाहक प्रधानाचार्य बने। प्रबंधतंत्र कुछ भर्तियां करवाना चाहता था। शासन से रोक होने के कारण उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद उनको पहले सस्पेंड और फिर बर्खास्त कर दिया गया। डीआईओएस ने निलंबन समाप्त भी कर दिया, लेकिन उसके बावजूद तीन साल से उनको आन तक न तो कॉलेज में पढ़ाने दिया जा रहा है और न वेतन दिया जा रहा है। मामला कोर्ट भी गया। इस बीच कई बार विधान परिषद में यह मुद्दा उठा। पीठ से मामला निस्तारित करने के आदेश भी हुए। विशेष सचिव और निदेशक के साथ बैठक भी हुई, लेकिन अब भी स्थिति जस की तस है।


पहले भी कई मामले रहे चर्चित
पुराने चर्चित मामलो की बात करें तो 2013 में एक रिटायर शिक्षक ने बीएसए के लेखाधिकारी के सामने ही आत्मदाह का प्रयास किया था। वहा भी मामला पेशन और भत्तों के लिए रिश्वत मागने का था। हाल ही में सीतापुर के बीएसए को हेडमास्टर द्वारा बेल्ट से पीटे जाने का मामला सामने है। उसमे यह बात सामने आई थी कि स्कूल न आने वाली एक शिक्षिका की हाजिरी लगाने का दबाव उन पर बीएसए बना रहे थे।

मिलता है भ्रष्टाचार को बढ़ावा
इस बारे में प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय कहते हैं कि सिटीजन चार्टर और समय-समय पर विभागीय आदेश भी जारी होते रहे है। उनका पालन किया जाए और तय समय पर काम हो तो ये नौबत ही न आए। सिटीजन चार्टर और विभागीय ऐक्ट में हर काम की समय सीमा और प्रक्रिया तय है। मामले लम्बित होने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।


मामले लंवित न रखने के लिए स्पष्ट निर्देश है। इसकी समीक्षा भी की जाती है। फिर भी यदि कोई अधिकारी मामलों को लंवित रखता है या भ्रष्टाचार की शिकायत आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। - मोनिका रानी, डीजी-स्कूल शिक्षा

आश्रित कोटे में शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ, वैध चुनौती के बिना शासनादेश असंवैधानिक नहीं: हाईकोर्ट

आश्रित कोटे में शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ, वैध चुनौती के बिना शासनादेश असंवैधानिक नहीं: हाईकोर्ट


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने सहानुभूति के आधार पर मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति देने के एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह एवं न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने मेरठ के अनिरुद्ध यादव की विशेष अपील पर दिया है।


विशेष अपील पर बहस करते हुए अपीलार्थी के अधिवक्ता शिवम यादव एवं हिमांशु बंसल ने कहा कि चार सितंबर 2000 एवं 15 फरवरी 2013 के शासनादेशों को उनकी वैधता पर स्पष्ट और प्रत्यक्ष चुनौती दिए बिना असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि किसी भी वैधानिक नियम या शासनादेश को तब तक असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता, जब तक उसकी विधिक वैधता को विधिवत चुनौती न दी गई हो। 


खंडपीठ ने इसी आधार पर एकल पीठ के निर्णय के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई। इस अंतरिम आदेश के बाद मृतक आश्रित कोटे में शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।

Wednesday, February 25, 2026

विशेष परिस्थितियों में अनुकंपा नियुक्ति हेतु विशेष आदेश दे सकती है सरकार – हाईकोर्ट

विशेष परिस्थितियों में अनुकंपा नियुक्ति हेतु विशेष आदेश दे सकती है सरकार – हाईकोर्ट 

मृतक आश्रित भर्ती नियमावली-1974 में सरकार के पास विशेष परिस्थितियों में आदेश पारित करने की शक्तिः हाईकोर्ट

अध्यापक की मौत के बाद पत्नी का भी निधन होने से बेटी अनाथ हो गई थी, कोर्ट ने मृतक आश्रित के रूप में चाची के आवेदन पर एक हफ्ते में आदेश पर निर्णय लेने का दिया है निर्देश


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक आश्रित भर्ती नियमावली-1974 का उद्देश्य कर्मचारी के परिवार को दरिद्रता से बचाना है। नियमों की व्याख्या ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे वास्तविक रूप से पीड़ित और निराश्रित परिवार लाभ से वंचित रह जाए। राज्य सरकार के पास इस प्रावधान के नियम-10 के तहत विशेष परिस्थितियों व लोकहित में आदेश पारित करने की शक्ति है।


इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने अनाथ बच्ची से जुड़े दया नियुक्ति मामले में सरकार को विचार करने का निर्देश दिया है।

शैलेंद्र कुमार भारती बलिया के जोगीडील प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। सात जून 2018 को सड़क हादसे में उनकी सेवा के दौरान मौत हो गई थी। 10 जुलाई 2018 को पत्नी का भी निधन हो गया। इससे उनकी ढाई साल की बेटी अनाथ हो गई।

मामले में बलिया के अपर जिला जज ने तीन मार्च 2021 को बच्ची की चाची राजकुमारी को विधिक संरक्षक नियुक्त किया तो उन्होंने मृतक आश्रित के रूप में दया नियुक्ति का आवेदन किया, जिसे बलिया के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने खारिज कर दिया। कहा, वह 1974 के नियमों में परिभाषित परिवार की श्रेणी में नहीं आतीं हैं। मामला हाईकोर्ट गया तो वहां एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी। फिर याची ने खंडपीठ के पास सुनवाई की गुहार लगाई थी।


कोर्ट ने कहा-सरकार मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाए : कोर्ट ने कहा कि बच्ची नौ साल की है। उसके पास चाचा-चाची के अतिरिक्त कोई सहारा नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार मानवीय दृष्टिकोण अपनाए। साथ ही अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को निर्देश दिया कि राज्य सरकार से लिखित निर्देश प्राप्त कर एक सप्ताह में मेरिट के आधार पर उचित आदेश पारित कराया जाए। 27 फरवरी को फिर मामले की सुनवाई होगी।

9वीं व 10वीं के ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति ₹750 रुपये बढ़ी, छात्रवृत्ति एवं शुल्क भरपाई का लाभ पाने के लिए अभिभावकों की आय सीमा भी बढ़ी

9वीं व 10वीं के ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति ₹750 रुपये  बढ़ी, छात्रवृत्ति एवं शुल्क भरपाई का लाभ पाने के लिए अभिभावकों की आय सीमा भी बढ़ी

आय सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख, सामान्य वर्ग को भी जल्द मिलेगा फायदा


लखनऊ। कक्षा 9 व 10 के पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को अब 2250 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये छात्रवृत्ति मिलेगी। इसके साथ ही पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति एवं शुल्क भरपाई का लाभ पाने के लिए अभिभावकों की आय सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये सालाना करने की घोषणा की।


राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में बताया कि वर्ष 2026-27 में लगभग 38 लाख विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिलने की संभावना है। दिव्यांगजन पेंशन राशि 1000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह होने जा रही है। वर्ष 2017 से पहले यह राशि मात्र 300 रुपये थी, जिसे योगी सरकार ने चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर अब पांच गुना तक पहुंचा दिया है। इसके लिए पेंशन मद में 1400 करोड़ रुपये से अधिक की व्यवस्था हो चुकी है।

मंत्री ने कहा कि पिछड़े वर्ग की गरीब बेटियों के लिए संचालित शादी अनुदान योजना में भी आय सीमा को बढ़ाकर 1 लाख रुपये सालाना कर दिया गया है। पहले यह ग्रामीण क्षेत्र में 46000 और शहरी क्षेत्र में 56000 रुपये थी। प्रदेश के सभी 18 मंडलों में दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र (डीआरसी) स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है।


अब सितंबर में ही छात्रवृत्ति वितरण : नरेंद्र कश्यप ने कहा कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 से एक भी पात्र छात्र-छात्रा भुगतान से वंचित नहीं रह रहा है। पहले छात्रवृत्ति वितरण वित्त वर्ष के अंतिम दिन 31 मार्च को होता था, लेकिन योगी सरकार में 25 सितंबर से ही छात्रवृत्ति वितरण प्रारंभ कर दिया। अब तक लगभग 20 लाख छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जा चुकी है।


सामान्य वर्ग के लिए भी आयसीमा में वृद्धि पर सहमति : असीम अरुण
समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए भी छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में आयसीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये सालाना किए जाने पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। अगले वित्त वर्ष से इसे लागू कर दिया जाएगा। अभी सामान्य व पिछड़े वर्ग के करीब 50 लाख छात्र इस योजना का लाभ पाते हैं।

India set to launch free nationwide HPV vaccination for adolescent girls 14 साल की हर लड़की को लगेगा सर्विकल कैंसर से बचाव के लिए मुफ्त टीका, केंद्र सरकार जल्द शुरू करेगी अभियान

India set to launch free nationwide HPV vaccination for adolescent girls

 14 साल की हर लड़की को लगेगा सर्विकल कैंसर से बचाव के लिए मुफ्त टीका, केंद्र सरकार जल्द शुरू करेगी अभियान  

हर वर्ष करीब 1.50 करोड़ लड़कियां इस उम्र में पहुंचती हैं इन सभी को लगेगी मुफ्त वैक्सीन

सभी राज्यों में ब्लाक स्तर तक 14 वर्ष की उम्र की लड़कियों की पहचान की जा रही, मानीटरिंग भी

80 हजार महिलाएं हर साल सर्विकल कैंसर का शिकार होती हैं भारत में

42 हजार की मौत हर साल सर्विकल कैंसर की वजह से होती है देश में

160 देश पहले ही एचपीवी वैक्सीन को टीकाकरण में शामिल कर चुके, 90 देश सिंगल डोज दे रहे


नई दिल्ली : स्वस्थ्य नारी, सशक्त समाज की अवधारणा को मजबूती देने के लिए मोदी सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। महिलाओं में बढ़ते सर्विकल कैंसर के मामलों के मद्देनजर अब वह वैक्सीनेशन अभियान शुरू करने जा रही है। इसके तहत देशभर की 14 साल की लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन मुफ्त दी जाएगी। यह सिंगल डोज टीका होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर साल करीब डेढ़ करोड़ लड़‌कियां 14 साल की उम्र में पहुंचती हैं, इन सभी को यह टीका लगाया जाएगा। 


स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार टीकाकरण की पूरी तैयारी कर ली गई है और कभी भी इस अभियान को शुरू किया जा सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई अध्ययनों से साफ हुआ है कि 14 साल की उम्र में दिए गए टीके का एक डोज भी दो या तीन डोज के समान प्रभावी होता है। 

देश में हर साल लगभग डेढ़ करोड़ लड़कियां 14 साल की उम्र सीमा में पहुंचती है। अभियान के तहत हर साल 1.50 करोड़ लड़‌कियों को यह टीका निशुल्क लगाया जाएगा। इसके लिए सभी राज्यों में ब्लाक स्तर तक इस उम्र की लड़कियों की पहचान की जा रही है। सरकार की कोशिश है कि टीकाकरण से एक भी लड़की छूटे नहीं। इसके लिए पूरे अभियान की डिजिटल मानिटरिंग भी की जाएगी। यह टीका पहले से चले आ रहे टीकाकरण अभियान से अलग होगा, जिसके तहत विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए बच्चों को 12 तरह से टीके अलग-अलग लगाए जाते हैं। 

खुले बाजार में सर्विकल कैंसर से बचाव के लिए 15 वर्ष से काम की लड़कियों के लिए क्वाद्दिवेलेंट गार्डासिल-4 एक डबल डोज वैक्सीन है और इसमें प्रत्येक की कीमत 3,927 रुपये है।


राज्यपाल की अनुमति के बगैर सेवानिवृत्त कर्मी के खिलाफ नहीं हो सकती कार्यवाही, हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ जारी वसूली आदेश को किया रद्द

राज्यपाल की अनुमति के बगैर सेवानिवृत्त कर्मी के खिलाफ नहीं हो सकती कार्यवाही, हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ जारी वसूली आदेश को किया रद्द


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिड-डे मील घोटाले के आरोपी एक सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ जारी वसूली आदेश को रद्द कर दिया। कहा, राज्यपाल की अनुमति के बिना किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकती। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने बागपत के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त कौशिक से 11.14 लाख की रिकवरी के आदेश को रद्द कर दिया।


मामला बागपत के सर्वोदय मंदिर इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त कौशिक से जुड़ा है। उन पर आरोप था कि कोरोनाकाल (2019-2022) के दौरान उन्होंने मिड-डे मील योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ते और खाद्यान्न में करीब 11 लाख रुपये का गबन किया। विभाग ने एक आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर उनकी पेंशन से इस राशि की वसूली का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रधानाचार्य 2021 में सेवानिवत्त हो चुके हैं।

सिविल सेवा नियमावली के अनुच्छेद 351-ए के तहत सेवानिवृत्त के बाद किसी भी कार्रवाई के लिए राज्यपाल की मंजूरी जरूरी है। विभाग ने सरकार के एक विशेष सचिव के पत्र को ही मंजूरी मान लिया और बिना कोई नई चार्जशीट दिए पुरानी रिपोर्ट के आधार पर रिकवरी शुरू कर दी। कोर्ट ने वसूली आदेश को रद्द कर कहा कि पिछली आंतरिक जांच केवल एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट थी। उसे पूर्ण अनुशासनात्मक जांच नहीं माना जा सकता।

Tuesday, February 24, 2026

माध्यमिक स्कूल के शिक्षक कर्मियों को 25 लाख ग्रेच्युटी, माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को सहमति

माध्यमिक स्कूल के शिक्षक कर्मियों को 25 लाख ग्रेच्युटी, माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को सहमति

परिषदीय माध्यमिक एडेड शिक्षकों को होगा लाभ

लखनऊ। माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भी ग्रेच्युटी 25 लाख होगी। सरकार ने राज्यकर्मियों की भांति एडेड एवं परिषदीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों की ग्रेच्युटी सीमा राशि बढ़ाने की सहमति दे दी है। इससे जल्द ही शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों को सेवानिवृति पर आर्थिक लाभ होगा।


वर्तमान में इन शिक्षकों एवं कर्मियों की ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा राशि 20 लाख निर्धारित है। दो वर्ष पूर्व दो जुलाई 2024 को राज्य कर्मियों की अधिकतम ग्रेच्युटी की सीमा वृद्धि 25 लाख की गई है। साल भर से शिक्षकों की ग्रेच्यूटी को राज्यकर्मियों के बराबर करने की मांग की जा रही थी। अब जाकर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव पिछले सप्ताह वित्त विभाग को भेजा है। प्रदेश के एडेड एवं परिषदीय माध्यमिक स्कूलों में ढाई लाख से अधिक शिक्षक एवं कर्मचारी कार्यरत हैं।


माध्यमिक शिक्षा विभाग ने तैयार किया प्रस्तावः माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राज्यकर्मियों की भांति परिषदीय-सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों की भी अधिकतम ग्रेच्युटी 25 लाख करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे विभाग में उच्च स्तर पर अन्तिम रूप देने के बाद वित्त विभाग को भेज दिया जाएगा। इससे माध्यमिक शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मियों को सेवानिवृति पर आर्थिक लाभ होगा। अब तक इनके अधिकतम ग्रेच्युटी की राशि 20 लाख तक ही निर्धारित है।

Monday, February 23, 2026

परिषदीय स्कूलों में जर्जर शौचालयों पर उठी आवाज, अलग बजट और जवाबदेही के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था करने की PSPSA ने रखी मांग

परिषदीय स्कूलों में जर्जर शौचालयों पर उठी आवाज, अलग बजट और जवाबदेही के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था करने की PSPSA ने रखी मांग


प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन,PSPSA (उत्तर प्रदेश) ने परिषदीय विद्यालयों में जर्जर और अपर्याप्त शौचालयों की समस्या को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ उच्च न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन ने पत्र के माध्यम से कहा है कि प्रदेश के अनेक परिषदीय विद्यालयों में आज भी छात्र-छात्राएं और शिक्षक जर्जर शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर हैं, जबकि कई स्थानों पर बच्चों को खुले में जाने की स्थिति बनी हुई है, जो गंभीर स्वास्थ्य और सुरक्षा चिंता का विषय है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि विभागीय स्तर पर कागजों में अधिकांश विद्यालयों को शौचालययुक्त और सुरक्षित दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है। संगठन का आरोप है कि जिला स्तर पर शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाकर जर्जर शौचालयों को कागजी रूप से सुरक्षित दर्शाया जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि अधिकारियों द्वारा शौचालय निर्माण के लिए अलग बजट देने के बजाय कंपोजिट ग्रांट की सीमित राशि (लगभग 25 हजार रुपये) से निर्माण कराने का निर्देश दिया जा रहा है। संगठन का तर्क है कि इतनी कम राशि में शौचालय निर्माण संभव नहीं है और यदि विद्यालय यह राशि निर्माण में खर्च करते हैं तो रंगाई-पुताई, मरम्मत, शिक्षण सामग्री, परीक्षा व्यवस्था जैसे अन्य आवश्यक कार्य प्रभावित हो जाएंगे।

पत्र में यह भी चिंता जताई गई है कि आजादी के दशकों बाद भी कई विद्यालयों में शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं की कार्य परिस्थितियों को लेकर इसे संवेदनशील मुद्दा बताया गया है और कहा गया है कि यह केवल सुविधा नहीं बल्कि गरिमा और मानवाधिकार से जुड़ा विषय है।

संगठन ने मांग की है कि परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग सुरक्षित शौचालयों के निर्माण हेतु अलग से पर्याप्त बजट जारी किया जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों द्वारा बिना भौतिक सत्यापन के विद्यालयों को सुरक्षित घोषित किया जा रहा है, उनके स्तर पर भी जवाबदेही तय की जाए। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना या स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है।

संगठन ने सरकार और प्रशासन से इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की अपील करते हुए कहा है कि स्वच्छ और सुरक्षित विद्यालय वातावरण ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बुनियादी शर्त है।



देश में 32 विश्वविद्यालय फर्जी, UGC ने जारी की लिस्ट, राजधानी दिल्ली में 12 और यूपी के 4 विश्वविद्यालयों की डिग्री अमान्य

देश में 32 विश्वविद्यालय फर्जी, UGC ने जारी की लिस्ट, राजधानी दिल्ली में 12 और यूपी के 4 विश्वविद्यालयों की डिग्री अमान्य


नई दिल्ली। यूजीसी ने देश में 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी की है। दिल्ली के बाद यूपी में सबसे अधिक फर्जी संस्थान हैं। प्रदेश में 4 संस्थान खुद को वैध बताकर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।  आयोग ने कहा है कि ये संस्थान यूजीसी अधिनियम 1956 के तहत डिग्री देने के लिए अधिकृत नहीं हैं।

यूजीसी ने फरवरी 2026 तक देश भर में 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी की है। जिसमें उत्तर प्रदेश से 4 संस्थान भी शामिल हैं। ये संस्थान यूजीसी अधिनियम 1956 के तहत डिग्री देने के लिए अधिकृत नहीं हैं, इसलिए इनकी डिग्री नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए अमान्य मानी जाएगी। साथ ही यूजीसी ने अपील की है कि दाखिला लेने से पहले ugc.gov.in पर संस्थान की मान्यता जांच लें। बता दें कि दिल्ली में सबसे ज्यादा 12 फर्जी विश्वविद्यालय हैं, उसके बाद यूपी दूसरे नंबर पर है।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देश में चल रहे कुल 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी कर दी। ये यूनिवर्सिटी खुद को वैध बताकर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। यूजीसी की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 12 संस्थान फर्जी हैं। वहीं, दूसरा नंबर यूपी का आता है। यहां चार फर्जी संस्थान चल रहे थे। आयोग का कहना है कि इन संस्थानों को न ही केंद्र और न ही राज्य की तरफ से मान्यता मिली है।


यूपी के ये संस्थान फर्जी

गांधी हिन्दी विद्यापीठ प्रयाग, इलाहाबाद (प्रयागराज)

महामाया टैक्निकल विश्वविद्यालय पी.ओ. महर्षि नगर, गौतम बुद्ध नगर, नोएडा 201304

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी) अचलताल, अलीगढ़

भारतीय शिक्षा परिषद् भारत भवन, मटियारी चिनहट, फैजाबाद रोड, लखनऊ-227105

Sunday, February 22, 2026

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों, सम्बद्ध प्राइमरी विद्यालयों एवं संस्कृत विद्यालयों की समूह बीमा पालिसी डाटा उपलब्ध कराने के संबंध में

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों, सम्बद्ध प्राइमरी विद्यालयों एवं संस्कृत विद्यालयों की समूह बीमा पालिसी डाटा उपलब्ध कराने के संबंध में


Saturday, February 21, 2026

डीएलएड में तीन बार फेल अभ्यर्थियों को नहीं दिया जाएगा चौथा मौका, एकल पीठ का आदेश रद्द

फिसड्डी शिक्षकों के हवाले नहीं कर सकते बच्चों का भविष्य : हाईकोर्ट

डीएलएड में तीन बार फेल अभ्यर्थियों को नहीं दिया जाएगा चौथा मौका, एकल पीठ का आदेश रद्द


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) के उन अभ्यर्थियों को बड़ा झटका दिया है, जो एक ही विषय में तीन बार फेल होने के बाद चौथे अवसर (अतिरिक्त मौके) की मांग कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि मासूम बच्चों का भविष्य फिसड्डी शिक्षकों के हवाले नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना राज्य का सांविधानिक दायित्व है। यदि बार-बार फेल होने वाले अभ्यर्थियों को नियमों के विरुद्ध जाकर शिक्षक बनने का मौका दिया गया तो यह उन मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा, जिन्हें ये पढ़ाएंगे।


इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार की स्पेशल अपील को स्वीकार कर लिया। साथ ही एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें तीन बार फेल हो चुके छात्रों को अतिरिक्त मौका देने का निर्देश दिया गया था।

गौरतलब है कि डीएलएड कोर्स के नियमों के मुताबिक, यदि कोई प्रशिक्षु किसी एक विषय में तीन बार अनुत्तीर्ण होता है तो उसका प्रशिक्षण समाप्त मान लिया जाता है। हालांकि, सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने 2021 और 2022 में कुछ छात्रों के प्रत्यावेदन पर उन्हें विशेष अवसर देते हुए परीक्षा में बैठने की अनुमति दी थी।

इसके बाद ऐसे सैकड़ों छात्रों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। समानता के आधार पर उन्होंने भी अतिरिक्त अवसर की मांग की थी। उनकी इस मांग को एकल पीठ ने स्वीकार करते हुए परीक्षा में अतिरिक्त अवसर देने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने खंडपीठ के समक्ष स्पेशल अपील दाखिल की थी।

सरकार की दलील
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि प्रशिक्षुओं को पहले ही पर्याप्त अवसर दिए जा चुके थे। शिक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव के पास नियमों को शिथिल करने की कोई कानूनी शक्ति नहीं है। किसी भी सरकारी आदेश के जरिये उन वैधानिक नियमों को नहीं बदला जा सकता जो केंद्र और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने निर्धारित किए हैं। नियम विरुद्ध दिए गए पिछले मौकों को आधार बनाकर नए अधिकारों की मांग करना वैधानिक रूप से गलत है।

समानता के आधार पर अवैध लाभ की मांग उचित नहीं
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि अधिकारियों ने पूर्व में कुछ छात्रों को नियमों के विरुद्ध जाकर अवैध लाभ दे दिया था तो अन्य छात्र भी उसी अवैध लाभ की मांग नहीं कर सकते। समानता का अधिकार केवल कानूनी और वैध कार्यों के लिए होता है, अवैध कार्यों को दोहराने के लिए नहीं।

एनसीटीई के नियम सर्वोपरि
कोर्ट ने कहा कि एनसीटीई के नियम राज्य के किसी भी कार्यकारी आदेश से ऊपर हैं। इसके मुताबिक दो साल का यह कोर्स अधिकतम तीन साल में पूरा होना अनिवार्य है। सचिव के पास इस समय सीमा को बढ़ाने या अतिरिक्त मौका देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।

Friday, February 20, 2026

अशासकीय अशासकीय सहायता प्राप्त प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षको/शिक्षणेत्तर कर्मचारियो के GPF लेखा शीर्षक-8338 के अन्तर्गत आवंटित धनराशि के उपरान्त जनपदो में कम पड़ रही धनराशि के मॉग पत्र/प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

अशासकीय अशासकीय सहायता प्राप्त प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षको/शिक्षणेत्तर कर्मचारियो के GPF लेखा शीर्षक-8338 के अन्तर्गत आवंटित धनराशि के उपरान्त जनपदो में कम पड़ रही धनराशि के मॉग पत्र/प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में


अस्थाई शिक्षकों और कर्मियों की भर्ती में आरक्षण पर UGC की सख्ती, 45 दिन या अधिक समय के लिए अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों के पालन का ब्यौरा तलब

अस्थाई शिक्षकों और कर्मियों की भर्ती में आरक्षण पर UGC की सख्ती, 45 दिन या अधिक समय के लिए अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों के पालन का ब्यौरा तलब


लखनऊ । विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में अस्थाई पदों पर शिक्षकों व कर्मचारियों की हुई भर्ती में आरक्षण का हिसाब किताब लिया जाएगा। 45 दिन व उससे अधिक समय के लिए इन अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों से इसका ब्योरा तलब किया गया है। अब वर्ष 2023 से 2025 तक हुई भर्तियों की जांच होगी। 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह शिक्षकों और कर्मचारियों के अस्थाई पदों पर की जा रही भर्तियों में आरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन करें। ओबीसी व एससी-एसटी श्रेणी के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिया जाए। 45 दिन व उससे अधिक समय के लिए जितने भी अस्थाई पदों पर भर्ती हो रही है, उसमें आरक्षण के मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।

Thursday, February 19, 2026

एसआईआर के बाद अपनी ग्राम पंचायतों में तैनाती पा सकेंगे शिक्षामित्र, विधान सभा सत्र में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह का जवाब

एसआईआर के बाद अपनी ग्राम पंचायतों में तैनाती पा सकेंगे शिक्षामित्र, विधान सभा सत्र में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह का जवाब


लखनऊ। यूपी के विधानसभा में सत्र के दौरान सपा विधायक ओम प्रकाश ने बुधवार को शिक्षामित्रों के मानदेय और उनकी गृह जिले की ग्राम पंचायत में तैनाती का मामला उठाया। उनकी बात सुनने के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिक्षामित्रों को उनके गृह जिलों की ग्राम पंचायतों में तैनाती के लिए मुक्त कर दिया जाएगा। आदेश पहले ही हो चुके हैं। एसआईआर की वजह से उन्हें फिलहाल मुक्त नहीं किया जा रहा है।


ओम प्रकाश ने कहा कि सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक शिक्षामित्रों की भर्ती हुई थी। हालांकि अब शिक्षामित्र लाचार हैं। एक ही विद्यालय में उनके साथ पढ़ाने वाले अध्यापकों को 80 हजार से एक लाख रुपये तनख्वाह दी जा रही है, जबकि शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। 

शिक्षा मित्रों में से 37 हजार टीईटी पास हैं। बावजूद इसके शिक्षामित्रों को न तो 68,500 और न ही 69 हजार शिक्षक भर्ती में शामिल किया गया। तमाम शिक्षामित्र अपने निवास से दूर तैनात हैं। इससे भी उन्हें दिक्कत हो रही है। मेरे गांव में 13 शिक्षामित्र हैं। जब वह अपनी दिक्कत कहते हैं तो हम केवल मूकदर्शक बने सुनते रहते हैं। पूरे देश में शिक्षामित्र बने थे। यूपी में इनकी संख्या 1,37,500 है। सभी राज्यों में उनकी तनख्वाह बढ़ गई, जबकि यूपी में नहीं हुआ। इनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।


कैशलेस इलाज का आदेश जारी हो चुका

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जवाब दिया कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और शिक्षकों के कैशलेस इलाज का आदेश जारी हो चुका है। ग्राम पंचायतों में भी तैनाती का आदेश जारी हो चुका है। हालांकि, एसआईआर की प्रक्रिया में इनकी ड्यूटी लगी है। इसके बाद ही इनकी रिलीविंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 2017 में शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 रुपये था जिसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया गया है। आगे भी जो बेहतर होगा वह किया जाएगा। मंत्री के जवाब पर सपा सदस्यों ने कहा कि हमने तो शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाकर उन्हें 40 हजार रुपये वेतन दिया था। सपा सरकार तो उनकी बेहतरी चाहती थी।

यूपी बोर्ड वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा कार्यों के निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण हेतु लगाए गए शिक्षाधिकारियों की संशोधित सूची जारी

यूपी बोर्ड वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा कार्यों के निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण हेतु लगाए  गए शिक्षाधिकारियों की संशोधित सूची जारी 

कार्यालय ज्ञाप
माध्यमिक शिक्षा परिषद, उ०प्र० प्रयागराज की वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा दिनांक 18 फरवरी 2026 से प्रारम्भ होकर दिनाक 12 मार्च, 2026 को समाप्त होगी। अतः माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा सचालित की जाने वाली हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केन्द्रों में अनुचित साधन प्रयोग (नकल) की प्रवृत्ति/सम्भावनाओं पर अंकुश लगाने परीक्षाओं की शुचिता, पवित्रता, गुणवता, विश्वसनीयता तथा विधि-व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिगत परीक्षा कार्यों के निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण हेतु कार्यालय ज्ञाप संख्या 129/15-7-2026 दिनांक 29-01-2026 निर्गत किया गया है।

2- इस सम्बन्ध में शिक्षा निदेशक, माध्यमिक के पत्र संख्या मा०शि० प०/केंद्र निर्धारण/डी० ई0/4282 दिनांक 10.02.2026 द्वारा उपलब्ध कराये गए संशोधन के प्रसताव पर सम्यक विचारोपरांत अपरिहार्य परिस्थितियों के दृष्टिगत उक्त कार्यालय ज्ञाप दिनांक 29-01-2026 के क्रम में निदेशालय स्तर से नामित अधिकारियों के सम्बन्ध में एत‌द्वारा निम्न तालिकाओं के अनुसार संशोधन किया जाता है।



नई शिक्षक भर्ती की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यूपी के शिक्षामित्र, 69000 भर्ती में आरक्षण विवाद संग इस मामले की होगी सुनवाई

नई शिक्षक भर्ती की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यूपी के शिक्षामित्र, 69000 भर्ती में आरक्षण विवाद संग इस मामले की होगी सुनवाई

आदेश के पांच साल बाद भी प्रदेश भी में शुरू नहीं हुई शिक्षक भर्ती

शीर्ष अदालत के पहले के आदेश पर आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी दी थी सहमति 

पूर्व में उच्चतम न्यायालय ने अवसर, वेटेज और आयु में छूट देने के लिए कहा था


प्रयागराज। 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़े प्रकरण में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सिविल अपील राम शरण मौर्य बनाम स्टेट ऑफ यूपी में शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए नई शिक्षक भर्ती शुरू करने का अनुरोध किया है।


शिक्षामित्रों का कहना है कि शीर्ष अदालत ने अपने पूर्व आदेश में अगली शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को अवसर, वेटेज (भारांक) तथा आयु/पात्रता में उपयुक्त छूट देने की बात कही थी, जिस पर राज्य सरकार ने भी सहमति व्यक्त की थी। हालांकि, आदेश के बाद पांच वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नई शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई है। 
प्रार्थना में यह भी उल्लेख है कि राज्य सरकार ने पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 12 जून 2020 को दाखिल इंटरक्यूलेटरी एप्लीकेशन में यह जानकारी दी थी कि उस समय शिक्षकों के 51112 पद खाली थे। साथ ही 68500 शिक्षक भर्ती से संबंधित 27,713 रिक्त पदों को नई विज्ञप्ति जारी कर भरने के निर्देशों का भी अब तक अनुपालन नहीं हुआ है। 

इस पर याचिकाकर्ताओं ने शीघ्र भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कराने और पूर्व निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की है। उधर इस मामले से जुड़े लोग इस मिसलेनियस एप्लीकेशन (एमए) को आगामी सुनवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण मान रहे हैं। 

यह आवेदन भविष्य की भर्ती नीति और प्रक्रियात्मक दिशा को प्रभावित कर सकता है। 69000 शिक्षक भर्ती पहले से ही व्यापक न्यायिक विमर्श का विषय रही है और संबंधित पक्षकार लंबित निर्देशों के अनुपालन पर विशेष जोर दे रहे हैं। शिक्षामित्रों के प्रार्थना पत्र की सुनवाई भी 69000 आरक्षण विवाद के साथ की जाएगी।

Wednesday, February 18, 2026

बेसिक शिक्षकों के 46,944 पदों पर नहीं होंगी भर्तियां, यूपी सरकार का विधान सभा में दो टूक जवाब

बेसिक शिक्षकों के 46,944 पदों पर नहीं होंगी भर्तियां, यूपी सरकार का विधान सभा में दो टूक जवाब 


लखनऊ: बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को विधान सभा में बताया कि परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती के 46,944 पद रिक्त हैं। फिलहाल भर्ती के लिए सरकार की कोई योजना नहीं है।

चित्रकूट से सपा विधायक अनिल प्रधान द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि एक अप्रैल 2022 से आठ जनवरी 2026 तक 5,856 अभ्यर्थियों का चयन व नियुक्तियां सरकार ने की हैं। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक सीधी भर्ती के 46,944 पद वर्तमान में रिक्त हैं। 

विधायक ने यह भी पूछा कि क्या सरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए नए पदों का सृजन कर भर्ती परीक्षा कराने पर विचार करेगी? इस पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं' दिया गया।

 मंत्री ने यह भी कहा कि पर्याप्त संख्या में शिक्षक व शिक्षामित्र कार्यरत हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री ने फिर दोहराया कि एक भी परिषदीय विद्यालय बंद नहीं किया गया है।  शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को सरकार पांच-पांच लाख रुपये रुपये की सीमा तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही है। मानदेय बढ़ाने पर विचार हो रहा है। उधर टीईटी मामले में सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने की जानकारी भी दी गई।