Saturday, February 28, 2026
वित्तविहीन शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय की तैयारी, माध्यमिक शिक्षा विभाग बना रहा इनके लिए नियमावली
सूबे में बनेंगे 76 हजार आंगबाड़ी केंद्र के नए भवन, सुविधाओं से होंगे लैस
Friday, February 27, 2026
परिषदीय स्कूलों में 3 मार्च का भी अवकाश घोषित करने की मांग ने पकड़ा जोर
किताबों की ढुलाई का टेंडर जल्दी करके समय से स्कूलों तक पहुंचाने के निर्देश, ऑनलाइन बैठक में अपर मुख्य सचिव ने की योजनाओं की समीक्षा
वरिष्ठता नहीं, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से बनेंगे प्रधानाचार्य, हाईकोर्ट ने रद्द किए पुरानी प्रक्रिया के भर्ती प्रस्ताव
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रदर्शन कर दिखाई ताकत और प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
यूपी बोर्ड सख्त: 3 अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य, नकली और महंगी पुस्तकों पर होगी कार्रवाई, माध्यमिक स्कूलों में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना यूपी बोर्ड का काम : हाईकोर्ट
Thursday, February 26, 2026
शिक्षा विभाग का रूटीन है, काम में देर-भ्रष्टाचार का फेर, प्रदेशभर में लंबे समय से लटके हैं मामले, रिश्वत की भी आती हैं शिकायतें, फिर भी नहीं होता निस्तारण
आश्रित कोटे में शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ, वैध चुनौती के बिना शासनादेश असंवैधानिक नहीं: हाईकोर्ट
Wednesday, February 25, 2026
विशेष परिस्थितियों में अनुकंपा नियुक्ति हेतु विशेष आदेश दे सकती है सरकार – हाईकोर्ट
9वीं व 10वीं के ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति ₹750 रुपये बढ़ी, छात्रवृत्ति एवं शुल्क भरपाई का लाभ पाने के लिए अभिभावकों की आय सीमा भी बढ़ी
India set to launch free nationwide HPV vaccination for adolescent girls 14 साल की हर लड़की को लगेगा सर्विकल कैंसर से बचाव के लिए मुफ्त टीका, केंद्र सरकार जल्द शुरू करेगी अभियान
राज्यपाल की अनुमति के बगैर सेवानिवृत्त कर्मी के खिलाफ नहीं हो सकती कार्यवाही, हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ जारी वसूली आदेश को किया रद्द
Tuesday, February 24, 2026
माध्यमिक स्कूल के शिक्षक कर्मियों को 25 लाख ग्रेच्युटी, माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को सहमति
Monday, February 23, 2026
परिषदीय स्कूलों में जर्जर शौचालयों पर उठी आवाज, अलग बजट और जवाबदेही के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था करने की PSPSA ने रखी मांग
परिषदीय स्कूलों में जर्जर शौचालयों पर उठी आवाज, अलग बजट और जवाबदेही के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था करने की PSPSA ने रखी मांग
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन,PSPSA (उत्तर प्रदेश) ने परिषदीय विद्यालयों में जर्जर और अपर्याप्त शौचालयों की समस्या को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ उच्च न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन ने पत्र के माध्यम से कहा है कि प्रदेश के अनेक परिषदीय विद्यालयों में आज भी छात्र-छात्राएं और शिक्षक जर्जर शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर हैं, जबकि कई स्थानों पर बच्चों को खुले में जाने की स्थिति बनी हुई है, जो गंभीर स्वास्थ्य और सुरक्षा चिंता का विषय है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि विभागीय स्तर पर कागजों में अधिकांश विद्यालयों को शौचालययुक्त और सुरक्षित दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है। संगठन का आरोप है कि जिला स्तर पर शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाकर जर्जर शौचालयों को कागजी रूप से सुरक्षित दर्शाया जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि अधिकारियों द्वारा शौचालय निर्माण के लिए अलग बजट देने के बजाय कंपोजिट ग्रांट की सीमित राशि (लगभग 25 हजार रुपये) से निर्माण कराने का निर्देश दिया जा रहा है। संगठन का तर्क है कि इतनी कम राशि में शौचालय निर्माण संभव नहीं है और यदि विद्यालय यह राशि निर्माण में खर्च करते हैं तो रंगाई-पुताई, मरम्मत, शिक्षण सामग्री, परीक्षा व्यवस्था जैसे अन्य आवश्यक कार्य प्रभावित हो जाएंगे।
पत्र में यह भी चिंता जताई गई है कि आजादी के दशकों बाद भी कई विद्यालयों में शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं की कार्य परिस्थितियों को लेकर इसे संवेदनशील मुद्दा बताया गया है और कहा गया है कि यह केवल सुविधा नहीं बल्कि गरिमा और मानवाधिकार से जुड़ा विषय है।
संगठन ने मांग की है कि परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग सुरक्षित शौचालयों के निर्माण हेतु अलग से पर्याप्त बजट जारी किया जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों द्वारा बिना भौतिक सत्यापन के विद्यालयों को सुरक्षित घोषित किया जा रहा है, उनके स्तर पर भी जवाबदेही तय की जाए। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना या स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है।
संगठन ने सरकार और प्रशासन से इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की अपील करते हुए कहा है कि स्वच्छ और सुरक्षित विद्यालय वातावरण ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बुनियादी शर्त है।