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Friday, January 15, 2021

आंगनबाड़ी केंद्रों पर लाभार्थियों को दाल की जगह मिलेगा काला चना


आंगनबाड़ी केंद्रों पर लाभार्थियों को दाल की जगह मिलेगा काला चना,  इन 38 जिलों में बंटेगा काला चना


बिना तैयारी शुरू की गई पोषाहार वितरण की नई व्यवस्था चार माह बाद भी पटरी पर नहीं आ पाई है। पोषाहार के लिए तय मीनू के मुताबिक आहार का वितरण नहीं हो पा रहा है। अब तक लाभार्थियों को न दाल मिल रही है और न ही घी की  आपूर्ति शुरू हो पाई है। ऐसे में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) निदेशालय ने फिर पोषाहार आपूर्ति व्यवस्था में आंशिक बदलाव किया है।


आंशिक बदलाव के बाद अब शहरी क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाली गर्भवती, धात्री व किशोरियों को पोषाहार के रूप में दाल की जगह काला चना दिया जाएगा। जबकि छह माह से लेकर 6 साल के बच्चों व अति कुपोषित बच्चों को दाल ही दी जाएगी। फिलहाल यह व्यवस्था लखनऊ व अमेठी समेत 38 जिलों में शुरू की जाएगी। निदेशक आईसीडीएस डॉ. सारिका मोहन ने नैफेड के प्रबंध निदेशक को 38 जिलों के शहरी आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए काला चना उपलब्ध कराने का आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश एक महीने की आपूर्ति के लिए जारी किया गया है।


बता दें कि नई व्यवस्था में पोषाहार के मीनू में मोटे अनाज के साथ ही दाल और देशी घी देने का प्रावधान किया गया था। घी की आपूर्ति पीसीडीएफ को करना था और खाद्य एवं रसद विभाग को दाल उपलब्ध कराना था। लेकिन प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) ने घी की आपूर्ति करने से मना कर दिया है। जबकि दाल खरीदने के लिए सरकार के स्तर से 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर निर्धारित की गई है। जबकि बाजार में दाल की कीमत काफी अधिक है। इससे जिला कार्यक्रम अधिकारी दाल की खरीद नहीं कर पा रहे हैं। इन्हीं दिक्कतों से आपूर्ति व्यवस्था में आंशिक बदलाव किया गया है।
 

इन जिलों में बंटेगा काला चना
लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सीतापुर, वाराणसी, भदोही, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज, प्रतापगढ़, आजमगढ़, मऊ, बहराइच, बांदा, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, जालौन, झांसी, कानपुर नगर, कासगंज, कुशीनगर, औरैया, अलीगढ़, मैनपुरी, पीलीभीत, फतेहपुर, बदायूं, बिजनौर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, मेरठ व हमीरपुर।

Thursday, January 14, 2021

आंगनबाड़ी केंद्रों में होगी प्ले ग्रुप की पढ़ाई, तैयार हुई किताबें

आंगनबाड़ी केंद्रों में होगी प्ले ग्रुप की पढ़ाई, तैयार हुई किताबें


वाराणसी। नए शैक्षिक सत्र से आंगनबाड़ी में प्ले ग्रुप के बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए वाराणसी के राज्य हिंदी संस्थान में किताबें तैयार की जा रही हैं। कुछ किताबें तैयार भी हो चुकी हैं। तीन से छह साल तक के बच्चों के लिए यह किताबें तैयार हो रही हैं। शासन ने आंगनबाड़ी केंद्रों में प्ले ग्रुप का पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद को सौंपी है।


राज्य हिंदी संस्थान की निदेशक डॉ. ऋचा जोशी ने बताया कि संस्थान द्वारा किताब तैयार करने के लिए यूपी कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रामसुधार सिंह, बलदेव पीजी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. उदय प्रकाश पांडेय, डायट वाराणसी, चंदौली के प्रवक्ता व स्कूलों के अध्यापकों को चुना गया है ।


डॉ. ऋचा ने बताया कि पुस्तक का मुख्य फोकस बच्चों में देखने, सुनने व बोलने का अभ्यास कराने पर रहेगा । बच्चों के लिए तीन तरह की पुस्तकें होंगी।

Sunday, January 10, 2021

आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पोषाहार बनाने को सभी ब्लॉकों में लगेंगे प्लांट, स्वयं सहायता समूह मार्च से शुरू करेंगे पोषाहार तैयार।

आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पोषाहार बनाने को सभी ब्लॉकों में लगेंगे प्लांट, स्वयं सहायता समूह मार्च से शुरू करेंगे पोषाहार तैयार।


प्रयागराज : आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पोषाहार तैयार कराने को सभी ब्लॉक में प्लांट लगाए जाएंगे। स्वयं सहायता समूह मार्च से पोषाहार तैयार करना शुरू कर देंगे। लखनऊ से प्रशिक्षण लेकर आई टीम ब्लॉक वार चयनित महिलाओं को ट्रेनिंग दे रही है। प्लांट लगने के बाद समूह की 400 महिलाओं को रोजगार मिलेगा।


लखनऊ में कैबिनेट की बैठक में तय किया गया था कि आंगनबाड़ी केंद्रों का पोषाहार अब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित समूह की महिलाएं पोषाहार तैयार करेंगी। विभाग ने पहले चरण में उन्नाव व फतेहपुर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्लांट लगाया है। जिला मिशन प्रबंधक अमित शुक्ला के मुताबिक, प्लांट लगाने के लिए भवन में ऑफिस, तीन फेस का कनेक्शन, पानी की व्यवस्था के लिए सबमर्सिबल और चे¨गग रूम अनिवार्य रूप से रहेगा। संकुलस्तरीय संघ (सीएलएफ) का नोडल चयनित हो गया है।


समूह की महिलाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण : ब्लॉक मिशन अधिकारी बीएमएम और दो महिलाएं (एओपी की पदाधिकारी) लखनऊ से दो दिवसीय प्रशिक्षण लेकर आई हैं।