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Tuesday, October 13, 2026

प्रदेश में शिक्षकों के वेतन से ईपीएफ कटौती नहीं कर रहे निजी स्कूल, अपना अंशदान बचाने के लिए खेल कर रहे स्कूल संचालक

प्रदेश में शिक्षकों के वेतन से ईपीएफ कटौती नहीं कर रहे निजी स्कूल, अपना अंशदान बचाने के लिए खेल कर रहे स्कूल संचालक

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय ने यूपी बोर्ड के 2847 व 505 महाविद्यालयों को भेजा पत्र

लखनऊ: निजी स्कूल संचालक बच्चों का भविष्य बनाने वाले शिक्षकों का वर्तमान सुधार रहे न भविष्य। मानदेय कम होने के बाद भी शिक्षकों को भविष्य निधि के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा दी जाती है, लेकिन स्कूल संचालक शिक्षकों के पीएफ की कटौती ही नहीं कर रहे ताकि संचालकों को नियोक्ता का अंशदान न देना पड़े। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय ने यूपी बोर्ड के 2847 व 505 महाविद्यालयों को पत्र भेजकर पीएफ पंजीकरण कराने का अनुरोध किया है। स्कूल संचालक श्रम सुविधा पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं।


कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) लखनऊ क्षेत्र में सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, हरदोई, रायबरेली व लखीमपुर खीरी जिले आते हैं लेकिन यही हाल पूरे प्रदेश में है। छह जिलों में माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड ) से मान्यता प्राप्त हाईस्कूल व इंटरमीडिएट स्तर के 2847 विद्यालय और 600 से अधिक महाविद्यालय चल रहे हैं. इनमें से अधिकांश प्रधानाचार्य से अनुचर तक के पीएफ अंशदान की कटौती नहीं करते। कुछ तो सिर्फ कागज पर कर रहे हैं।

क्या है नियम
स्कूल या संस्थान जहां भी 20 या उससे अधिक कर्मचारी किसी भी रूप में कार्यरत है उनके वेतन से पेंशन कटौती अनिवार्य है। कर्मचारी संख्या 20 से कम होने पर स्वेच्छा से कटौती कर सकते हैं। केंद्र ने पिछले महीने ही वेतन सीमा 15 से 25 हजार प्रतिमाह कर दी है।

नियोक्ता अंशदान बचाने का खेल : वेतन या मानदेय की धनराशि पर 12 प्रतिशत कर्मचारी और इतनी ही धनराशि नियोक्ता को जमा करनी पड़ती है। अधिकांश नियोक्ता अपना अंशदान बचाने के लिए कटौती ही नहीं कर रहे हैं। ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त द्वितीय आशीष कुमार ने बताया, सभी स्कूल प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों से शिक्षक व अन्य स्टाफ की पीएफ कटौती का अनुरोध किया है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने सभी महाविद्यालयों  को पत्र भेजा है। ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त प्रथम अश्विनी कुमार गुप्ता ने बताया, 2009 से अब तक संचालित ऐसे संस्थान जिन्होंने 20 कर्मचारी होने पर भी पीएफ जमा नहीं किया वह 31 अक्टूबर तक नियोक्ता का अंशदान जमा कर ईपीएफओ कोड पा सकते हैं। 31 के बाद निरीक्षण करके अंशदान जमा न करने वालों पर जुर्माना लगेगा। 


Thursday, June 17, 2021

शिक्षामित्रों व अनुदेशकों की नहीं हो रही ईपीएफ कटौती

शिक्षामित्रों व अनुदेशकों की नहीं हो रही ईपीएफ कटौती


प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत लगभग 1.60 लाख शिक्षामित्रों और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे 30 हजार अंशकालिक अनुदेशकों की ईपीएफ कटौती क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त के आदेश के सवा साल भी शुरू नहीं हो सकी है। यदि यह कटौती हो रही होती तो कोरोना काल में असमय मौत के मुंह में समाने वाले शिक्षकों को ईपीएफओ की ओर से मिलने वाले 2.5 से 7 सात लाख रुपये तक का बीमा मिल जाता। जो लोग बीमार है, उनका इलाज हो सकता था।


कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में काम करने वाले संविदा शिक्षकों व कर्मचारियों की ईपीएफ कटौती का आदेश जारी कर दिया गया, जबकि वह भी 11 माह का मानदेय पाते हैं। वर्तमान में प्रदेश के 75 में से 16 जिलों कानपुर नगर, महोबा, ललितपुर, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ, बस्ती, देवरिया, कानपुर देहात, आजमगढ़, चंदौली, जौनपुर, वाराणसी, मुरादाबाद और फैजाबाद में धनराशि का निर्धारण भी किया जा चुका है लेकिन कटौती शुरू नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने 28 फरवरी 2020 को एक अप्रैल 2015 से कटौती का आदेश दिया था।


सरकार एक तरफ कोर्ट में कह रही है कि हम ईपीएफ दे रहे हैं लेकिन आज तक एक रुपये की कटौती नहीं हुई। कटौती होती तो जो लोग मर गए उनके परिजनों को अनुकंपा राशि मिलती और जो बीमार हैं उनको इलाज का पैसा मिलता। लेकिन अधिकारियों ने एक भी न सुनी। - त्रिभुवन सिंह, उपाध्यक्ष