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Friday, January 19, 2024

गैरलाभकारी संस्था प्रथम फाउंडेशन द्वारा 26 राज्यों में 28 जिलों के 34,745 किशोरों से बातचीत पर आधारित 'Annual Status Of Education Report (असर–रूरल) 2023- Beyond Basics' जारी

गैरलाभकारी संस्था प्रथम फाउंडेशन द्वारा 26 राज्यों में 28 जिलों के 34,745 किशोरों से बातचीत पर आधारित 'Annual Status Of Education Report (असर–रूरल) 2023- Beyond Basics' जारी


गैरलाभकारी संस्था प्रथम फाउंडेशन द्वारा 26 राज्यों में 28 जिलों के 34,745 किशोरों से बातचीत पर आधारित 'एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (रूरल), 2023- बियोंड बेसिक्स', दरअसल ग्रामीण भारत में 14-18 के किशोरों के शैक्षिक स्तर की पड़ताल है, जो परेशान करती है, तो कुछ मामलों में आश्वस्त भी करती है। 

सर्वेक्षण के लिए इसमें देश भर के प्रत्येक राज्य के एक- एक ग्रामीण जिले को, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के दो-दो ग्रामीण जिलों को चुना गया था। पता चलता है कि 25 फीसदी किशोर अपनी क्षेत्रीय भाषा में दूसरी कक्षा का पाठ नहीं पढ़ पाते, जबकि 56.7 फीसदी को गणित में भाग करने में परेशानी आई ! ऐसे ही, करीब 57.3 फीसदी किशोर अंग्रेजी में वाक्य पढ़ सकते हैं, और इनमें से तीन चौथाई (73.4 फीसदी) इसका अर्थ बता सकते हैं। जाहिर है, यह हताश करने वाली स्थिति है। 

सर्वे में शामिल 43.7 फीसदी किशोरों व 19.8 प्रतिशत किशोरियों के पास खुद का स्मार्टफोन है, लेकिन 9.9 फीसदी किशोरों और 8.3 प्रतिशत किशोरियों के पास ही कंप्यूटर लैपटॉप है। यह भी कोई अच्छी तस्वीर पेश नहीं करता। हालांकि कुछ तथ्य स्थिति बेहतर होने की बात कहते हैं। जैसे, उम्र के साथ नामांकन प्रतिशत बढ़ा है और 86.8 फीसदी से अधिक किशोर शैक्षणिक संस्थानों में पंजीकृत हैं। 

नामांकन में लैंगिक खाई भी घट रही है। वर्ष 2017 में 11.9 फीसदी लड़कों के मुकाबले 16 फीसदी लड़कियां स्कूल कॉलेज में नहीं थीं, यानी अंतर करीब चार फीसदी का था। लेकिन 2023 में यह अंतर घटकर महज 0.2 फीसदी रह गया। ग्रामीण किशोरियों की स्थिति अलबत्ता तुलनात्मक रूप से हताशाजनक है। मसलन, वे इंजीनियर और डॉक्टर बनना तो चाहती हैं, लेकिन मानविकी पढ़ने के लिए विवश हैं। डिजिटल कौशल में भी वे अपने समवयस्क किशोरों से पीछे हैं। 

सर्वे के अनुसार, मात्र 5.6 फीसदी किशोर व्यावसायिक प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि सरकार व्यावसायिक प्रशिक्षण को गांवों तक ले जाने की कई योजनाओं पर काम कर रही है। 


ASER रिपोर्ट का दावा, 25 फीसदी छात्र कक्षा दो की क्षेत्रीय भाषा की पुस्तक पढ़ने में असमर्थ

नई दिल्ली। देश के 25% 14 से 18 आयु वर्ग के छात्र कक्षा दो की क्षेत्रीय भाषा की पुस्तक पढ़ने में असमर्थ हैं। आधे से अधिक युवा भाग के सामान्य सवाल हल करने में पीछे हैं। यह खुलासा वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (असर) 2023 में हुआ है। 


दिल्ली में बुधवार को भारत में सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को दर्शाती असर रिपोर्ट 2023 जारी की गई है। असर रिपोर्ट के लिए 26 राज्यों के 28 जिलों में 14 से 18 आयु वर्ग के 34,745 बच्चों पर सर्वेक्षण किया है। देशभर के प्रत्येक राज्य के एक ग्रामीण जिले को चुना गया है, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के दो-दो ग्रामीण जिलों को सर्वे के लिए चुना गया था। 


असर रिपोर्ट 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के 86.8% छात्र किसी न किसी शैक्षणिक संस्थान में नामांकित हैं लेकिन आयु के अनुसार नामांकन में कुछ अंतर है। इसके मुताबिक 14 वर्ष के 3.9% और 18 वर्ष के 32.6% युवा कहीं भी पढ़ाई नहीं कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, 14 साल के 96.1% छात्रों ने शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश लिया था, लेकिन जब 18 साल के बच्चों की बात आती है तो यह प्रतिशत तेजी से गिरकर 67.4% हो गया।



STEM एरिया यानी साइंस, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी व मैथ्स में अब लड़कों का रुझान बढ़ रहा, असर रिपोर्ट में खुलासा 


अभी तक इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, साइंस, मैथ्स यानी स्टेम में लड़कियों का दबदबा होता था। लेकिन अब एक बड़ा बदलाव असर 2023 रिपोर्ट में दिखा है। इसके स्टेम एरिया यानी साइंस, मुताबिक, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी व मैथ्स में अब लड़कों का रुझान बढ़ रहा है। 

देश में 36.3% लड़के इन विषयों में पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि लड़कियां का यहां आंकड़ा महज 28.1% है। हालांकि, उच्च शिक्षा तक आते-आते बेटियां आगे निकल जाती हैं। वहीं, 70.9% लड़के कक्षा दो की पढ़ाई क्षेत्रीय भाषा में कर पाते हैं तो लड़कियों का यह आंकड़ा 76% है। हालांकि, लड़के अंग्रेजी और गणित में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।



यूपी : स्कूली बच्चों के नामांकन में वाराणसी टॉप पर, ASER 2023 की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

लखनऊ। प्रदेश में पठन-पाठन व स्कूली बच्चों (14 से 18 साल) की शिक्षा में अपेक्षाकृत सुधार हो रहा है। देश में जहां इस आयु वर्ग के 86.8 फीसदी बच्चों का नामांकन विभिन्न विद्यालयों में हैं, वहीं वाराणसी में कुल 91.2 फीसदी बच्चों का नामांकन हुआ है। हाथरस में बच्चों का कुल नामांकन 81.07 फीसदी ही है। 


यह आंकड़े प्रथम संस्था की ओर से हाल ही में जारी असर-2023 की रिपोर्ट में सामने आए हैं। संस्था की ओर से देश के 26 राज्यों व 28 जिलों में 14 से 18 साल के बच्चों की शैक्षिक स्थिति का सैंपल सर्वे किया गया था। इसमें के वाराणसी व हाथरस ग्रामीण में भी सर्वे किया गया। 


रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में 30.6% बच्चे सरकारी स्कूलों में व बाकी प्राइवेट व अन्य शैक्षिक संस्थानों में नामांकित हैं। 16.8% लड़के व 18.8% लड़कियां किसी भी शैक्षिक संस्थान में नामांकित नहीं हैं। वाराणसी में 82% बच्चे दूसरे स्तर तक की किताब पढ़ लेते हैं। 91.5% युवाओं के घर में स्मार्टफोन है, 93.7% युवा स्मार्टफोन चलाने में सक्षम हैं। 70.5% युवा सप्ताह में कम से कम एक शैक्षिक गतिविधि के लिए स्मार्टफोन का प्रयोग करते हैं और 90.5% सोशल मीडिया के लिए करते हैं।


दूसरी ओर, हाथरस में कुल नामांकित 81.7% बच्चों में 27.7% सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में नामांकित हैं, जबकि 18.3% कहीं नामांकित नहीं हैं। 73% बच्चे दूसरे स्तर तक की किताब पढ़ लेते हैं। हाथरस में 89.2% युवाओं के घर में स्मार्टफोन है। 93.1% युवा स्मार्टफोन का प्रयोग करने में सक्षम हैं। इसमें 54.1 फीसदी युवा सप्ताह में कम से कम एक शैक्षिक गतिविधि के लिए स्मार्टफोन का प्रयोग करते हैं। 

Monday, October 16, 2023

यूपी की शैक्षणिक सामग्री पूरे देश में मुख्य सामग्री के रूप में जानी जाए, NGO पार्टनर मीट कार्यक्रम में बोले DGS विजय किरण आनंद

यूपी की शैक्षणिक सामग्री पूरे देश में मुख्य सामग्री के रूप में जानी जाए... NGO पार्टनर मीट कार्यक्रम में बोले DGS विजय किरण आनंद


उत्तर प्रदेश में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ में एक दिवसीय एन.जी.ओ.पार्टनरशिप मीट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 20 संस्थाओं ने भाग लिया और अपने कार्यों की प्रस्तुति की। इसका मुख्य उद्देश्य था शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग और समझौते को मजबूत करके बच्चों को गुणवत्ता से शिक्षा प्रदान करना। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग ने बेहतर प्रयासों को साझा किया और संयुक्त प्रयास करने का वादा किया।


लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य में शिक्षा को बढ़ावा देने तथा तकनीकी शिक्षण के माध्यम से बच्चों के बेहतर विकास के लिए लखनऊ में एक दिवसीय एन.जी.ओ.पार्टनरशिप मीट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 20 संस्थाओं ने सहभागिता कर अपने कार्यों की प्रस्तुति प्रदान की। विभिन्न संस्था से आए साथियों ने अपने कार्यों की प्रदर्शनी लगाकर उनकी उपलब्धियों को साझा किया।


एन.जी.ओ.पार्टनरशिप मीट कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था शिक्षा के क्षेत्र में साथी संगठनों के बीच सहयोग और समझौते को मजबूत करके बच्चों को गुणवत्ता से शिक्षा प्राप्त कराने के लिए संयुक्त प्रयास करना था। कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रयासों को साझा किया। 


शिक्षा विभाग ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे प्रतिबंधों के समाधान के लिए साथी संस्थाओं के साथ सहयोग करने का वादा किया और माध्यमिक शिक्षा विभाग के साथ मिलकर विभिन्न शिक्षा संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और उनका समाधान निकालने की दिशा निर्देश दिया किया।


कार्यक्रमों में मौजूद सभी संगठनों के कार्यों की सराहना करते हुए महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश विजय किरण आनंद कहा की , "सभी साथी संस्थाओं को कार्यक्रमों के माध्यम से लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। ज्यादातर संस्थाओं के पास बेहतर सामग्री मौजूद है, जिससे हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर निपुण बना सकते है। हम सभी को मिलकर नए तरह के शिक्षण सामग्री बनाने पर बल देना चाहिए। हमारा सपना और संकल्प है उत्तर प्रदेश का शैक्षणिक सामग्री पुरे देश में मुख्य सामग्री के रूप में जाना जाए।"


राज्य परियोजना निदेशक (आई.ए.एस), समग्र शिक्षा (माध्यमिक) रुपेश कुमार ने कहा, "राज्य में संस्था द्वारा किए जा रहें सराहनीय है और संस्था के विभिन्न शिक्षण सहायक सामग्री तथा नई तकनीकों के माध्यम से बच्चों को आधुनिकीकरण की ओर अग्रसर किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में हम बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकेंगे।"


कार्यक्रम में उपस्थित सभी संस्था साथियों को धन्यवाद ज्ञापन करते हुए एजुकेट गर्ल्स संस्था के स्टेट ऑपरेशन्स लीड नीतिन झा ने कहा, 'हम सभी बच्चों के विकास के लिए अथक प्रयासों से बच्चों को स्कूल से जोड़कर नए भारत के निर्माण में अपना सहयोग प्रदान कर सकते है। बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए एकजुट जो कर काम कर सकते है।'


इस कार्यक्रम में विष्णु कांत पांडेय (अपर राज्य परियोजना निदेशक), सांत्वना तिवारी (संयुक्त निदेशक), शिवलाल (संयुक्त निदेशक), भगवत पटेल (संयुक्त निदेशक), दीपचंद (उप निदेशक), प्रेमचंद्र यादव (उप शिक्षा निदेशक), प्रतिमा सिंह सहायक निदेशक, एजुकेट गर्ल्स से अलका सिंह, आदित्य एवं टीम के अन्य सदस्यों ने प्रतिभाग किया।

Thursday, June 24, 2021

बेसिक शिक्षा में NGO को रोकने के लिए शिक्षक एकजुट, अन्य विकल्पों पर किया ऑनलाइन मंथन

बेसिक शिक्षा में NGO को रोकने के लिए शिक्षक एकजुट, अन्य विकल्पों पर किया ऑनलाइन मंथन



प्रयागराज। परिषदीय विद्यालय के बच्चों को ऑनलाइन शिक्षण से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा सुझाए गए एनजीओ के विकल्प के विरोध के बाद शिक्षकों ने एकजुट होकर दूसरे विकल्पों पर मंथन किया।


 इसके लिए प्रदेश भर में ऑनलाइन बैठकें कर विचार-विमर्श किया गया और सुझाव दिए गए। कोरोना काल में बंद परिषदीय विद्यालयों में संसाधन के अभाव में ऑनलाइन शिक्षण कार्य नहीं हो पा रहा है। 


सरकार द्वारा विकल्प के रूप में एनजीओ की मदद लिए जाने की योजना बनाई गई, लेकिन बेसिक शिक्षा में एनजीओ के प्रवेश का राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उप्र सहित कई संगठनों ने विरोध किया। 


बैठकों का संयोजन प्रदेश संगठन मंत्री शिवशंकर सिंह व संचालन संयुक्त रूप से प्रदेश मीडिया प्रमुख बुजेश श्रीवास्तव तथा प्रदेश संयुक्त मंत्री व वाराणसी के जिलाध्यक्ष शशांक कुमार पाण्डेय ने किया। मैठकों में प्रदेशीयमंत्री कामता नाथ, प्रवक्ता वीरेंद्र मिश्रा, प्रदेशीय उपाध्यक्ष रानी परिहार आदि ने अपने विचार रखे।

Tuesday, June 8, 2021

बेसिक शिक्षा में NGO के दखल से शिक्षक संगठनों में उबाल

बेसिक शिक्षा में NGO के दखल से शिक्षक संगठनों में उबाल



सिद्धार्थनगर :महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद ने उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षण कार्य में गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) से सहयोग लेने का फरमान जारी किया है। इसे शिक्षक संगठनों ने अप्रासंगिक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। कहा कि यदि आदेश अमल में आया तो जनपद के 700 से अधिक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कंवीजीनियस संस्था कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं के लिए वाट्सएप आधारित मूल्यांकन और उपचारात्मक अध्ययन मंच नाम से कार्यक्रम संचालित करेगा। 


आकांक्षी जनपदों में संस्था की ओर से चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट में छात्रों को वाट्सएप से जोड़कर साप्ताहिक मूल्यांकन के जरिये उनका शैक्षणिक आंकलन किया तथा विद्यार्थियों को व्यक्तिगत शिक्षण के माध्यम से जिस भी विषय में जो समस्या आ रही थी, उस विषय पर विशेष ध्यान देकर शिक्षण प्रदान किया गया। 


महानिदेशक ने 24 मई को पत्र भेजकर बीएसए से अपेक्षा की है कि संस्था के प्रस्ताव के अनुसार आगामी दो माह तक कार्य करने के लिए संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों और शिक्षकों को निर्देशित करें। ताकि संस्था काम शुरू कर सके। शिक्षक संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने रोष व्यक्त करते हुए अपनी प्रतिक्रिया कुछ यूं दी है।


प्रांतीय उपाध्यक्ष, उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ, उप राधेरमण त्रिपाठी का कहना है कि शिक्षकों की भर्ती आरटीई नियमों के तहत की जाती है। बीटीसी, डीएलएड, बीएड आदि करने के बाद टीईटी/सीटीईटी और फिर शिक्षक भर्ती परीक्षा पास करने के बाद कोई शिक्षक बनता है। एनजीओ में पढ़ाने वालों की क्या शैक्षणिक योग्यता है, किसी को पता नहीं।

 जिलाध्यक्ष पूमा शिक्षक संघ, डा. अरुणेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि बेसिक शिक्षा में समय समय पर प्रयोग होते रहे है अब एक बार पुन: एनजीओ द्वारा शिक्षा देने का प्रयास निष्फल होगा। शिक्षक ही शिक्षा के लिए एक मात्र विकल्प है। सरकारें अपनी जिम्मेदारियों से भागना चाहती है। उनकी जिम्मेदारी है कि प्रदेश का प्रत्येक बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त करे।

प्रदेश संयुक्त मंत्री / जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, आदित्य शुक्ला ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग में हर प्रकार से योग्य ,प्रशिक्षित , एवं पर्याप्त शिक्षक हैं तो विभाग द्वारा धन भुगतान कर एनजीओ से क्यों व क्या उम्मीद करके कार्य लिया जाता है। यदि एनजीओ के कर्मचारी इतने ही योग्य हैं तो परीक्षा पास कर अध्यापक क्यों नहीं बन गए। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ इसका विरोध करेगा।

जिलाध्यक्ष, अटेवा, जनार्दन शुक्ल का कहना है कि इतनी कठिन परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर कोई शिक्षक बनता है उसके ऊपर एनजीओ को थोपना बहुत ही गलत है । इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए ,नहीं तो हम सभी शिक्षक आन्दोलन के लिए बाध्य होंगे।

Sunday, June 6, 2021

सूबे के परिषदीय विद्यालयों में NGO के बढ़ते दखल एंव शैक्षणिक कार्य सम्पादन के प्रस्ताव को निरस्त करने के संबंध में प्राथमिक शिक्षक संघ (सुशील पांडेय गुट) द्वारा लिखा गया पत्र

सूबे के परिषदीय विद्यालयों में NGO के बढ़ते दखल एंव शैक्षणिक कार्य सम्पादन के प्रस्ताव को निरस्त करने के संबंध में प्राथमिक शिक्षक संघ (सुशील पांडेय गुट) द्वारा लिखा गया पत्र