NCERT शिक्षकों-पेशेवरों के लिए शुरु करेगा मार्गदर्शन एवं परामर्श डिप्लोमा कोर्स (DCGC), छात्रों की शैक्षणिक से भावनात्मक समस्याओं को समझने में मिलेगी मदद
NCERT शिक्षकों-पेशेवरों के लिए शुरु करेगा मार्गदर्शन एवं परामर्श डिप्लोमा कोर्स, छात्रों की शैक्षणिक से भावनात्मक समस्याओं को समझने में मिलेगी मदद
🔴 अधिक जानकारी के लिए लिंक क्लिक करके देखें अधिकृत जानकारी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और शिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने स्कूली शिक्षकों और काउंसलिंग के बत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए बार्गदर्शन एवं परामर्स डिप्लोमा कोर्स यानी डिप्लोमा कोर्स इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग (DCGC) शुरू करने का एलान कया है।
इसका मकसद, शिक्षकों व शिक्षा मत्र से जुड़े अन्य पेशेवरों को छात्रों की शैक्षणिक, सामाजिक बावनात्मक व नैतिक समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए प्रशिक्षित करना है।
एनसीईआरटी ने सोमवार को यह कोर्स शुरू करने की घोषणा की। फिलहाल, अगले साल से यह कोर्स एनसीईआरटी के छह केंद्रों-दिल्ली, अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूरु व शिलांग केंद्र में चलाया जाएगा। प्रति केंद्र 50 सीट रहेंगी। एनसीईआरटी के विश्वविद्यालय बनने के बाद यह केंद्र कॉलेज बन जाएंगे। अगले चरण में सीटों में भी बढ़ोतरी होगी।
एक वर्षीय कोर्स तीन भागों में बंटा
अगले साल से शुरू होने वाले इस डिप्लोमा कोर्स को तीन भागों में बांटा गया है। जनवरी-जून 2027 तक छह महीने का डिस्टेंस, जुलाई-सितंबर तक तीन महीने को फेस टू फेस और अक्तूबर से दिसंबर तक तीन महीने अपने गृह शहर में इंटर्नशिप का मौका मिलेगा। अधिकारी के मुताबिक, आज स्कूलों में छात्रों की समस्याएं केवल पढ़ाई या परीक्षा के दबाव तक सीमित नहीं हैं। कई बार छात्र करियर को लेकर असमंजस, साथियों से तुलना, आत्मविश्वास की कमी और भावनात्मक चुनौतियों का भी सामना करते हैं। कुछ मामलों में छात्रों को ध्यानपूर्वक सुनने, उसकी परेशानी समझने और उचित मार्गदर्शन देने की जरूरत होती है। यह कोर्स शिक्षकों को इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने में सहायता करेगा।
पाठ्यक्रम में तीन बिंदुओं पर फोकस
शैक्षणिक समस्याएं: पढ़ाई में कठिनाई, सीखने से जुड़ी चुनौतियां और शैक्षणिक प्रगति के लिए मार्गदर्शन पर रहेगा।
सामाजिक व भावनात्मक समस्याएं: छात्रों की भावनाओं, व्यवहार और सामाजिक संबंधों से जुड़ी चुनौतियों को समझना।
नैतिक समस्याएं: छात्रों में सही निर्णय लेने, जिम्मेदारी समझने और सकारात्मक व्यवहार विकसित करने में सहायता करना।