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Tuesday, June 23, 2026

मदरसों में घटते जा रहे विद्यार्थी, बढ़ गए शिक्षक, मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से घटकर 63 हजार पर सिमटी

मदरसों में घटते जा रहे विद्यार्थी, बढ़ गए शिक्षक, मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से घटकर 63 हजार पर सिमटी 

अनुदान सूची में 558 मदरसे शामिल, शिक्षक हैं 10 हजार


लखनऊ : मदरसों में छात्रों के नामांकन की गहन जांच से फर्जी नामांकन कम हो रहे या मुस्लिम अभिभावक बच्चों को मदरसों में पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे ? साल दर साल मदरसों में छात्रों की संख्या घटने से यह सवाल उठ रहा है। 10 वर्ष पहले प्रदेश के मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से अधिक थी, जो घटकर अब 63 हजार रह गई है।


दूसरी तरफ, पिछले वर्ष शिक्षकों की भर्ती पर रोक लगने से पहले तक उनकी संख्या लगातार बढ़ती रही। वर्तमान में मदरसों में तकरीबन 10 हजार शिक्षक हैं।

प्रदेश में सरकार की अनुदान सूची में 558 मदरसे शामिल हैं। इनमें फर्जी छात्र नामांकन, अनुदान राशि में हेरफेर की शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के निर्देश दिए। जांच में मानकों व नियमों के उल्लंघन पर 15 मदरसों की मान्यता निलंबित कर उनके अनुदान को रोका गया लेकिन 543 मदरसों को अनुदान मिल रहा है। सभी में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया गया लेकिन छात्रों की संख्या में गिरावट जारी है। 

मदरसा शिक्षा बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही स्वीकारती हैं कि छात्रों की संख्या घट रही है। कहती हैं कि कामिल, फाजिल (स्नातक) डिग्री की मान्यता नहीं होना भी इसका एक कारण है। वह कहती हैं कि संभवतः जो अभिभावक बच्चों को स्नातक, परास्नातक तक पढ़ाना चाहते हैं, वह मदरसों में दाखिले से बच रहे हैं क्योंकि मुंशी व मौलवी की पढ़ाई के बाद आगे की शिक्षा के लिए इस बोर्ड की व्यवस्था नहीं है। कामिल, फाजिल की डिग्री को सुप्रीम कोर्ट असंवैधानिक करार दे चुका है।

मदरसा सुधार आंदोलन के तलहा अंसारी का कहना है कि अभिभावक यह समझ रहे हैं कि प्रतिस्पर्धा के दौर में बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के रोजगार नहीं मिल सकता है, इसलिए बच्चों को मदरसों के बजाय मुख्यधारा के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अंसारी का यह भी मानना है कि पहले मदरसों में छात्रों की फर्जी संख्या दर्ज करके अनुदान हड़पा जाता था। उन्होंने 2016 की मदरसा नियमावली के बाद अनुदान और छात्रों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए सीबीआइ जांच की मांग की है। मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की गई है। पिछले वर्ष तक शिक्षकों की भर्ती में मनमानी का जिक्र करते हुए बताते हैं कि लखनऊ के एक मदरसे में छात्र तो 429 ही हैं लेकिन शिक्षक 611 देवरिया के मदरसे में 240 छात्र हैं लेकिन शिक्षक 14 हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 30 छात्रों पर एक शिक्षक का अनुपात है।

Saturday, August 17, 2024

समायोजन से बचने के लिए छात्र संख्या में गड़बड़ी का संदेह, बेसिक शिक्षा निदेशालय ने मामले की जांच के दिए आदेश

समायोजन से बचने के लिए छात्र संख्या में गड़बड़ी का संदेहबेसिक शिक्षा निदेशालय ने मामले की जांच के दिए आदेश

3200 से अधिक स्कूलों की छात्र संख्या संदेह के घेरे में


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में चल रही समायोजन प्रक्रिया को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों व शिक्षकों का खेल सामने आया है। जानकारी के अनुसार 3200 से अधिक स्कूलों में छात्र संख्या एक-दो बढ़ाकर दिखाने का अंदेशा है। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध होने पर जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामला सही मिलने पर कार्रवाई के लिए भी कहा है।



विभाग में चल रही समायोजन की प्रक्रिया के लिए छात्र संख्या को आधार बनाया गया है। 30 छात्र पर एक शिक्षक की आवश्यकता होती है। जबकि इससे एक भी छात्र ज्यादा होने पर दो शिक्षकों की जरूरत होगी। ऐसे में तबादले से बचने के लिए कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या 61, 91, 121 व 151 दिखाई गई है। राज्य स्तर पर 30 जून के नामांकन डाटा के विश्लेषण से। यह संदेह पैदा हुआ है कि कुछ शिक्षकों को अनुचित लाभ देने के लिए ऐसा किया गया।


महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा की ओर से सभी बीएसए व बीईओ को इसे लेकर कड़े निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने ऐसे विद्यालयों के डाटा का उल्लेख करते हुए कहा है कि प्रथम दृष्टया इसमें संदेह होता है। ऐसे जो प्रकरण संज्ञान में आए हैं, उनकी पुष्टि के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह काफी गंभीर मामला है। उन्होंने कहा है कि ऐसे विद्यालयों की सूची की बीएसए व्यक्तिगत रूप से जांच कराएं। यदि आवश्यक हो तो डाटा संशोधन के लिए पत्र भी भेजें। उन्होंने कहा है कि पूर्व में डाटा संशोधन की तय अंतिम तिथि के बाद बीएसए द्वारा भेजे गए किसी भी अनुरोध पर तब तक विचार नहीं किया जाएगा, जब तक उपरोक्त फॉर्मेट में बीएसए सूचना नहीं भेजते हैं।

Thursday, January 21, 2021

बंद हो सकते 10 हजार बेसिक विद्यालय, चतुर्थ श्रेणी अनुकंपा नियुक्ति पर भी रोक का सुझाव

बंद हो सकते 10 हजार बेसिक विद्यालय, चतुर्थ श्रेणी अनुकंपा नियुक्ति पर भी रोक का सुझाव




समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बेसिक शिक्षा विभाग में 10,000 से अधिक प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जिनके लिए आवश्यक न्यूनतम 30 छात्र उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। इनको बंद कर वहां तैनात शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। यहां के छात्रों को निकट के प्राइमरी या निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने को कहा गया है।


चतुर्थ श्रेणी अनुकंपा नियुक्ति पर रोक का सुझाव

इसके साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग में भविष्य में अनुकंपा के आधार पर चतुर्थ श्रेणी के रूप में नियुक्ति की व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया गया है।

Thursday, December 31, 2020

सरकारी परिषदीय विद्यालयों में कोरोना काल में बढ़ गए विद्यार्थी

प्रयागराज : सरकारी परिषदीय विद्यालयों में कोरोना काल में बढ़ गए विद्यार्थी


प्रयागराज। कोरोना संक्रमण के दौर में स्कूल बंद होने, घर बैठे ऑनलाइन क्लास चलाने के प्रयास के बीच सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। अभिभावकों ने नौकरी चली जाने से निजी स्कूलों से बच्चों का नाम कटवाकर अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में नाम लिखवा दिया। जिले में कोरोना संक्रमण के दौर में चालू शैक्षिक सत्र में 14 हजार से अधिक बच्चे बढ़ गए। सबसे खास बात यह है कि इसमें पहली कक्षा नहीं बल्कि बीच की कक्षा में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।


बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले के प्राथमिक विद्यालयों में 2019 में कुल 4,16007 बच्चे पंजीकृत थे, 2020 में बच्चों की संख्या 4,30191 पहुंच गई। बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुशवाहा का कहना है कि कोविड-19 के दौर में अभिभावकों का सरकारी स्कूलों के प्रति रुझान बढ़ा है। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने निजी स्कूलों से नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों में बच्चों का नाम लिखवाया। नए प्रवेश लेने वालों में नौकरी छूटने के बाद बाहर से आने वाले प्रवासियों के बच्चे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के बाद इस बात का विवरण नहीं कि कितने प्रवासियों के बच्चों ने प्रवेश लिया।


परिषदीय स्कूल में बच्चों के आंकड़े
बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों को देखें तो पहली से पांचवीं तक कुल 164864 छात्राएं। उच्च प्राथमिक स्तर पर कुल 51566 छात्राओं ने प्रवेश लिया। प्राथमिक में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के 67717 और जूनियर में 22133 बालक अभी पढ़ रहे हैं। अंग्रेजी माध्यम में प्राथमिक विद्यालयों में कुल 43268 बच्चे पढ़ रहे हैं। इसमें छात्राओं की संख्या 21437 है। उच्च प्राथमिक कक्षाओं में कुल 4367 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें 2239 छात्राएं हैं।

Friday, September 4, 2020

फतेहपुर : वित्तीय वर्ष 2020-21 में विभिन्न मदों से लाभान्वित होने वाले छात्रों की संख्या का विवरण उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : वित्तीय वर्ष 2020-21 में विभिन्न मदों से लाभान्वित होने वाले छात्रों की संख्या का विवरण उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में।




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Tuesday, July 7, 2020

फतेहपुर : सत्र 2020-21 में छात्र-छात्राओं को निःशुल्क यूनीफॉर्म वितरण हेतु विद्यालयवार छात्र संख्या उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : सत्र 2020-21 में छात्र-छात्राओं को निःशुल्क यूनीफॉर्म वितरण हेतु विद्यालयवार छात्र संख्या उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में।






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