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Wednesday, April 29, 2026

शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

27 अप्रैल 2026

गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दोनों के अदालत में पेश न होने पर अब पुलिस उन्हें भगोड़ा घोषित कराने के लिए कोर्ट में आवेदन करेगी। भगोड़ा घोषित होने के बाद उनके घर 82 का नोटिस चस्पा किया जाएगा और फिर संपत्ति कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।


कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरी बाजार स्थित एक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। वेतन बहाल न होने और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने 21 फरवरी को गुलरिहा स्थित अपने आवास में फंदे से लटक आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सरगर्मी मची थी।

कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट और वीडियो में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बीएसए और लिपिक अब भी फरार हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर पहले 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है।


देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


अपडेट 19 मार्च 2026
निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

16 मार्च 2026
गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

यह है मामला
कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

09 मार्च 2026
गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

Friday, January 12, 2024

फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी कर रहे 382 शिक्षक किए जाएंगे बर्खास्त, 48 जिलों के बीएसए को STF ने जांच के बाद लिखा पत्र

फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी कर रहे 382 शिक्षक किए जाएंगे बर्खास्त, 48 जिलों के बीएसए को STF ने जांच के बाद लिखा पत्र


लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी करने वाले 382 शिक्षकों को बर्खास्त करने की संस्तुति यूपी एसटीएफ की ओर से की गई है। सबसे ज्यादा 52 शिक्षक देवरिया के हैं। मथुरा के 43 और सिद्धार्थनगर के 29 फर्जी शिक्षक इसमें शामिल हैं। बीते करीब पांच वर्षों से एसटीएफ फर्जी मार्कशीट व प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी कर रहे शिक्षकों की जांच कर रही थी। बर्खास्तगी के बाद फर्जी शिक्षकों को दिए गए वेतन की वसूली भी की जाएगी।

परिषदीय स्कूलों में शिक्षक पद पर वर्ष 2006 से वर्ष 2016 तक भर्तियां हुई थीं। बीते दिनों देवरिया के 85 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। अब इस जिले में 52 और फर्जी शिक्षक सामने आ गए हैं। जिन 382 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त करने की सिफारिश की गई है वे 48 जिलों के हैं। इन जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दे दी गई है। शिक्षक भर्ती के पूरे डाटाबेस की गहन जांच की जा रही है।



एसटीएफ की जांच के फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहे 382 बेसिक शिक्षक होंगे बर्खास्त, सबसे ज्यादा देवरिया और मथुरा जिले के


फर्जी दस्तावेज लगाकर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले प्रदेश के 382 शिक्षकों को जल्द बर्खास्त किया जा सकता है। यूपी एसटीएफ ने जांच के बाद दोषी पाए गए शिक्षकों को बर्खास्त करने के लिए 48 जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है। इन सभी की जांच बीते करीब साढ़े तीन वर्षों के दौरान की गयी है।




बता दें कि एसटीएफ बीते करीब पांच वर्ष से फर्जी दस्तावेज लगाकर शिक्षक की नौकरी हासिल करने के मामले की जांच कर रही है। एसटीएफ के अनुमान के मुताबिक प्रदेश में इस तरह के करीब 50 हजार शिक्षक हैं, जिन्होंने दूसरे की मार्कशीट लगाकर नौकरी हासिल की और सालों से काम कर रहे हैं। हाल ही में एसटीएफ ने ऐसे 382 शिक्षकों के खिलाफ जांच पूरी कर उनको बर्खास्त करने की संस्तुति की है। इनमें सर्वाधिक 52 शिक्षक देवरिया के हैं। इसके अलावा मथुरा के 43, सिद्धार्थनगर के 29 शिक्षक हैं। बाकी जिलों के शिक्षकों की सूची जल्द अपडेट हो जाएगी। 



2006 से 2016 तक हुए भर्ती

एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक ये भर्तियां वर्ष 2006 से 2016 के बीच हुई थी। एसटीएफ और जिला पुलिस की जांच के बाद देवरिया में बीते दिनों 85 शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। अब एसटीएफ मुख्यालय यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि किस तरह जालसाजों ने सरकारी सिस्टम को धता बताकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग के डाटाबेस की गहनता से पड़ताल जारी है।

Tuesday, January 9, 2024

यूपी के देवरिया में 85 प्राथमिक शिक्षकों से होगी 125 करोड़ रुपये की वसूली

यूपी के देवरिया में 85 प्राथमिक शिक्षकों से होगी 125 करोड़ रुपये की वसूली


देवरिया जिले के प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी करने वाले 85 शिक्षकों के खिलाफ आरसी जारी की गई है। इन शिक्षकों से 125 करोड़ रुपये की वसूली की जाएगी। इन सभी शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। इन लोगों ने वेतन और अन्य मदों में 125 करोड़ रुपये की धनराशी विभाग से मिली थी।


देवरिया: देवरिया के प्राथमिक विद्यालयों से बर्खास्त 85 शिक्षकों से 125 करोड़ रुपये की वसूली की जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा वसूली के लिए आरसी जारी कर दी गई है। ये सभी शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे प्राथमिक विद्यालयों में नौकरी कर रहे थे। एसटीएफ और बेसिक शिक्षा विभाग की संयुक्त जांच में सभी के शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर वेतन और अन्य मदों में ली गई धनराशि वसूली का निर्देश जारी किया गया था। अब इनके खिलाफ आरसी जारी की गई है।


देवरिया जिले में सन 1999 के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में भर्ती हुए दर्जनों शिक्षकों के खिलाफ फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी पाने की शिकायत की गई थी। एसटीएफ और बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा की गई जांच में 85 शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। बेसिक शिक्षा विभाग सभी शिक्षकों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ फिर दर्ज कराया गया था। यही नहीं इन शिक्षकों द्वारा वेतन और अन्य मदों में ली गई धनराशि जमा करने का निर्देश दिया गया था। मगर किसी ने भी धनराशि जमा नहीं किया।


विभिन्न विद्यालयों में तैनात थे सभी शिक्षकये सभी शिक्षक जिले के विभिन्न विद्यालयों में तैनात थे। विभाग द्वारा की गई जांच में इन सभी शिक्षकों द्वारा लगभग 125 करोड़ रुपये की धनराशि वेतन और अन्य मदों में ली गई है। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा वसूली के लिए सभी के खिलाफ आरसी जारी की गई है। विभाग के मुताबिक पैसा न जमा करने पर आरोपी शिक्षको की जमीने नीलाम कर वसूली की जाएगी।


इन शिक्षकों से से होगी वसूली
जिन शिक्षकों से वसूली की जानी है। इनमें सलेमपुर रोड निवासी राम लखन से 63.86 लाख, ठाकुर नगर वार्ड के राम भरोसा से 87.60 लाख, सलाहाबाद वार्ड निवासी वीना रानी से 72.69 लाख, टीचर्स कॉलोनी के सुशील कुमार सिंह से 48.24 लाख, हरैंया के आलोक कुमार से 11. 90 लाख, गौरव कुमार से 10.37 लाख, स्वाति तिवारी से 37.6 5 लाख, विराजभार के वेद प्रकाश तिवारी से 22.62 लाख, गुलाबचंद से 22.62 लाख, बरसी पार के राजेश कुमार से 34.79 लाख रुपए वसूले जाने हैं।

इसी तरह दीनानाथ तिवारी से 85.17 लाख ,बिरजानंद यादव से 54.15 लाख , कसिली की रीता मिश्रा से 77 . 51 लाख, बरसी पार की रेनू बाला से 63.86 लाख, प्रियंका से 46. 50 लाख, रेवली के हरेंद्र यादव से 96 लाख, मझवलिया गांव के वृंदा लाल गौतम से 54.42 लाख , रंगोली के चंद्रभूषण यादव से 43.50 लाख, बतरौली के सरोज यादव से 37. 93 लाख, भागलपुर के संजय कुमार से 68.50 लाख समेत तिवारीपुर के अभिषेक तिवारी से 9.65 लाख रुपये की वसूली होनी है।


 बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि देवरिया जिले के 85 शिक्षकों के खिलाफ वसूली के लिए आरसी जारी की गई है। इन सभी के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे।

Sunday, July 11, 2021

फर्जी नियुक्ति में 17 पर मुकदमा तीन शिक्षक समेत पांच गिरफ्तार, बीएसए के फर्जी हस्ताक्षर से हुआ करोड़ों का भुगतान

फर्जी नियुक्ति में 17 पर मुकदमा तीन शिक्षक समेत पांच गिरफ्तार, बीएसए के फर्जी हस्ताक्षर से हुआ करोड़ों का भुगतान
 
बैक डेट से नियुक्ति दिखाकर शिक्षकों का वेतन एरियर दिलाने वाले 5 गिरफ्तार


लखनऊ : यूपी एसटीएफ ने देवरिया में शिक्षा विभाग में चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया हैं। बैक डेट से शिक्षकों की नियुक्ति दिखाकर वित्त एवं लेखाधिकारी की मदद से उनका वेतन व एरियर दिलाने वाले गैंग के पांच सदस्यों को यूपी एसटीएफ ने देवरिया से गिरफ्तार किया है। फर्जीवाड़े के खेल में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़ी भूमिका सामने आई है। ये अधिकारी और कर्मचारी इस फर्जीवाड़े के लिए शिक्षक से लाखों का कमिशन ले रहे थे। आरोपितों से पूछताछ में पता चला है कि देवरिया के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी बड़ी रकम घूस ली है।

एसटीएफ के मुताबिक गिरफ्तार सदस्यों में देवरिया के बरियारपुर का ओम प्रकाश मिश्रा, कोतवालो का मुन्ना यादव, राज कुमार मणि त्रिपाठी, संजय कुमार और गोरखपुर का अजीत उपाध्याय शामिल हैं। इनके पास से तमाम फर्जी दस्तावेज एमजी हेक्टर गाड़ी, देवरिया के बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी को मुहर बरामद हुई है। सिद्धार्थनगर के जिला विद्यालय निरीक्षक अवधेश नारायण मौर्य ने इस फर्जीवाड़े के बारे में एसटीएफ को जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि अशासकीय सहायता प्राप्त पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अनियमित एवं फर्जी रूप से नियुक्त कार्यरत शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है।

 एसटीएफ की जांच में सामने आया कि एक गिरोह है, जो सहायता प्राप्त विद्यालयों में स्थायी तौर पर शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए फर्जी अनुमोदन-पत्र व अन्य फर्जी दस्तावेज तैयार करता है। मामले में एसटीएफ की तरफ से विभिन्न विद्यालयों में शिक्षक पद पर फर्जी अनुमोदन पत्र के आधार पर नियुक्त शिक्षकों और वित्त एवं लेखाधिकारी, वैसिक, देवरिया सहित 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रति शिक्षक दो लाख लिए यह भी खुलासा हुआ है कि कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन देवरिया के सात शिक्षकों को बचाने के लिए बीएसए कार्यालय के बाबू जयशंकर श्रीवास्तव के जरिए वर्तमान बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्रति शिक्षक दो-दो लाख रुपये दिए गए हैं। अब तक की जांच से 19 शिक्षकों का फर्जी तरीके से अनुमोदन पत्र तैयार कराकर नियुक्ति करवाए जाने का पता चला है। एसटीएफ मामले की और कड़ियां जोड़ रही है।

ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा 
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह लोग सहायता प्राप्त विद्यालयों में स्थायी तौर पर नियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर स्कैन करके फर्जी तरीके से शिक्षक के पद का अनुमोदन पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज भी तैयार करते हैं। यह लोग बैक डेट से नियुक्ति दिखाकर एरियर का भी भुगतान करा देते हैं। पूरे गठजोड़ में देवरिया के वित्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक जगदीश लाल श्रीवास्तव भी शामिल है। वह आरोपितो के साथ रहकर फर्जी अनुमोदन-पत्र तैयार करवाता है। अजित उपाध्याय ने इसी तरह से फर्जी अनुमोदन पत्र तैयार कराकर भाई दिलीप को शिक्षक के पद पर नियुक्त करवाया। पेशे से ठेकेदार राजकुमार मणि, जगदीश के साथ रहता है उसने भी पत्नी कुमारी रजना को सहायक अध्यापक के पद पर सहदेव बालिका, पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बाबू, बभनी, देवरिया में नियुक्त करवाया है।

वित्त एवं लेखाधिकारी को दिए ₹40 लाख

आरोपित ओमप्रकाश मिश्र शिक्षक है, जो वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में अटैच है। ओमप्रकाश ने अपनी रिश्तेदार श्वेता मिश्रा को भी फर्जी अनुमोदन पत्र के आधार पर शिक्षक पद पर नियुक्त करवाया है। श्वेता की बैक डेट से नियुक्ति के बाद एरियर में मिली पैसे और अन्य रकम मिलाकर करीब ₹40 लाख राजकुमार मणि एवं वित्त एवं लेखाधिकारी, जगदीश लाल श्रीवास्तव को दिए गए अभियुक्त जनार्दन उपाध्याय पूर्व में वित्त एव लेखाधिकारी के कार्यकाल में क्लर्क के पद पर था, जो इस समय रिटायर्ड है, लेकिन यह भी फर्जी दस्तावेज बनाने में शामिल है। संजय कुमार बीएसए कार्यालय देवरिया में चपरासी है, जो डिस्पैच रजिस्टर में हेरफेर, रजिस्टर के पेज फाड़ना और अन्य फर्जीवाड़ा करता है। 

अभियुक्त मुन्ना यादव के घर से एक ही विद्यालय के एक ही शिक्षक के एक से अधिक विभिन्न पत्रांक पर फर्जी अनुमोदन पत्र बरामद हुआ है। इसमें कुमारी रंजना, श्वेता मिश्रा एवं मुन्ना के बेटे विनय कुमार सहित आठ शिक्षकों का अनुमोदन था जगदीश लाल श्रीवास्तव बिना किसी सत्यापन के स्वयं फर्जी अनुमोदन पत्र तैयार कराने में सहयोग कर वेतन एवं एरियर जारी कर देता है। इसके एवज में प्रति अभ्यर्थी के हिसाब से पैसा लेता है।


देवरिया: दो अनुदानित विद्यालयों में शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति व उन्हें करोड़ों रुपये के एरियर भुगतान के मामले में गोरखपुर की एसटीएफ ने देवरिया के बीएसए कार्यालय के वित्त एवं लेखाधिकारी समेत 17 लोगों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। तीन शिक्षकों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 13,660 रुपये, 11 मोबाइल, पैन कार्ड आदि बरामद किया है।



सिद्धार्थनगर के डीआइओएस (तत्कालीन बीएसए देवरिया) एएन मौर्य ने देवरिया के अनुदानित विद्यालयों में फर्जी तरीके से शिक्षकों की नियुक्ति और उन्हें करोड़ों रुपये के एरियर भुगतान की शिकायत की जानकारी एसटीएफ को दी थी। जांच में गौरीबाजार के मदरसन स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय में चार व सहदेव लघु माध्यमिक विद्यालय बाबू बभनी में आठ फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति और उन्हें करीब 40-40 लाख रुपये के एरियर भुगतान की पुष्टि हुई। 

यह भी पता चला कि फर्जी नियुक्ति में पूरा गिरोह सक्रिय है। एसटीएफ प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह ने शुक्रवार रात सदर कोतवाली में वित्त एवं लेखाधिकारी जगदीश लाल श्रीवास्तव, बीएसए कार्यालय से संबंद्ध शिक्षक ओमप्रकाश मिश्र, सेवानिवृत्त लिपिक जर्नादन उपाध्याय, गोरखपुर के खोराबार में तैनात शिक्षक अजीत कुमार उपाध्याय और लेखाधिकारी के करीबी राजकुमार मणि के साथ 12 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। एसटीएफ ने अजीत उपाध्याय, ओमप्रकाश मिश्र, नियुक्ति पाए शिक्षक मुन्ना यादव, राजकुमार मणि और जांच में तथ्य मिलने पर बीएसए कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संजय आर्य को गिरफ्तार कर लिया।

फर्जी नियुक्ति के आरोपित शिक्षक : दिलीप कुमार उपाध्याय, राघवेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, विमल कुमार शुक्ला, ब्रजेंद्र सिंह, विनय कुमार, कुमारी अंजना, सुरेंद्र यादव, जगदीश यादव, कुमारी विमला यादव, नीतू रस्तोगी, श्वेता मिश्र, रंजना कुमारी।


फर्जी नियुक्ति कराने वाले गिरोह के 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर पांच को गिरफ्तार किया गया है। अन्य अनुदानित विद्यालयों में भी फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति की जांच की जा रही है। -सत्यप्रकाश सिंह, इंस्पेक्टर, एसटीएफ गोरखपुर

Wednesday, June 23, 2021

देवरिया में प्रोत्साहन के नाम पर शिक्षकों की ऑनलाइन परीक्षा का विरोध, बहिष्कार का एलान

देवरिया में प्रोत्साहन के नाम पर शिक्षकों की ऑनलाइन परीक्षा का विरोध, बहिष्कार का एलान



उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ ने  बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार राय को ज्ञापन सौंपा। इसमें मिशन प्रेरणा की पुस्तकों पर आधारित ऑनलाइन परीक्षा का विरोध करते हुए परीक्षा न देने का ऐलान किया।

देवरिया । डीएम के निर्देश के पर जनपद के परिषदीय शिक्षकों की होने वाली आनलाइन परीक्षा का बहिष्कार प्राथमिक शिक्षक संघ कर रहा है। संघ के पदाधिकारियों ने जिलाबेसिक शिक्षा अधिकारी से मिलकर परीक्षा को स्थगित करने का अनुरोध किया है।

प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्र तथा अनुदेशकों की आनलाइन परीक्षा 30 जून को आयोजित होनी है। मंगलवार को डीएम कार्यालय से जारी किए गए पत्र में इसकी जानकारी दी गयी है। मिशन प्रेरणा के तहत तैयार किए गए माड्यूल शिक्षण संग्रह, आधार शिला तथा ध्यानाकर्षण से 50 प्रश्नों की परीक्षा आनलाइन कराने की योजना बनी है। इस परीक्षा का विरोध प्राथमिक शिक्षक संघ ने किया है। 

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार भारती तथा जिलामंत्री विजय कुमार सिंह ने मंगलवार को बीएसए देवरिया संतोष कुमार राय से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने सौंपे गए पत्रक में लिखा है कि सोशल मीडिया के जरिए शिक्षकों की परीक्षा की जानकारी हुई है। जिलाप्रशासन अपने स्तर से ऐसी परीक्षाओं का आयोजन कराने की योजना बना रहा है। जबकि प्रदेश स्तर पर ऐसी किसी भी परीक्षा की व्यवस्था नहीं हुई है। यह परीक्षा परिषदीय शिक्षकों का मनोबल बढ़ाने की बजाय उनको अपमानित करेगा। 

प्रदेश के जिलों में जिला अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से विना पूर्व सूचना के अचानक शिक्षको ,शिक्षा मित्रों, व अनुदेशकों का ऑनलाइन परीक्षा का आदेश जारी कर शिक्षको ,शिक्षा मित्रों व अनुदेशकों के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है,जब बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा ऐसा कोई आदेश निर्गत नही है ,और ना ही शिक्षक नियमावली में वर्णित है, की शिक्षको से चयन उपरांत समय समय पर परीक्षा ली जाए।


जिला प्रशासन द्वारा किसके आदेश पर परीक्षा कराने के आदेश जारी हो रहें है। प्रदेश के शिक्षको का परीक्षा करना न्याय संगत नही है, शिक्षकों का उत्पीड़िन बन्द कराए सरकार । प्रदेश में जिला प्रशासन,द्वारा किये जा रहे परीक्षा कराने के तुगली फ़रमान को तुरंत वापस कराए सरकार, ऐसे आदेश से प्रदेश के शिक्षक समुदाय में आक्रोश व असंतोष व्याप्त हैं।ऐसे आयोजनों को पूरे प्रदेश के शिक्षक, शिक्षा मित्र, व अनुदेशक वहिष्कार करते हैं।- अनिल यादव, प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ


देवरिया : जनपद के समस्त परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों / अनुदेशकों / शिक्षा मित्रों के शैक्षिक गुणवत्ता प्रोत्साहन योजना (देवरिया मॉडल) के सम्बन्ध में

Saturday, June 12, 2021

सरकार जून में शिक्षामित्रों से करवा रही बेगारी, शिक्षामित्रों को मिल रहा 11 महीने का ही मानदेय

जून में शिक्षामित्रों से बिना वेतन काम ले रहा विभाग

सरकार जून में शिक्षामित्रों से करवा रही बेगारी,  शिक्षामित्रों को मिल रहा 11 महीने का ही मानदेय


प्रयागराज। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों से सरकार कोरोना महामारी के दौरान जून माह में बिना मानदेय के काम ले रही है। शिक्षामित्रों को 26 मई 1999 में नियुक्ति के समय से ही सालभर में 11 महीने का ही मानदेय दिया जाता रहा है। 


परिषदीय विद्यालयों में जून माह में अवकाश होने के चलते उन्हें इस अवधि का मानदेय नहीं दिया जाता है। शिक्षामित्र समय-समय पर पूरे बर्ष मानदेय देने की मांग उठाते रहे हैं, सरकार जून में विद्यालय बंद होने की बात कहकर मानदेय देने से बचती रही है। 


2020 और 2021 में कोरोना के चलते सरकार की ओर से कोबिड सर्वे के लिए शिक्षामित्रों की ड्यूटी लगा दी है। अब पूरे जून शिक्षामित्र बिना किसी मानदेय के जान जोखिम में डालकर कोविड सर्वे का काम कर रहे हैं।


 उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ ने शिक्षमित्रों से जून महीने में बिना वेतन काम लेने को लेकर सवाल उठाया है। संघ ने सरकार पर शिक्षामित्रों से बेगारी कराने का आरोप लगाया है। संघ का “ कहना है कि सरकार शिक्षामित्रों को स्कूल बंद होने की अवधि में जून के वेतन का भुगतान नहीं करती है। शिक्षामित्रों को कोविड कंट्रोल में लगा दिया गया। 


उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के संतोष शुक्ला का कहना है कि प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में डेढ़ लाख से अधिक शिक्षामित्र ऑनलाइन शिक्षण, कोविड कंट्रोल सहित दूसरे विभागीय कार्यों में लगाए गए हैं। उन्हें इस कार्य का कोई भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे शिक्षामित्र निराश हैं, उनका मनोबल दूट रहा है। 


11 महीने का मानदेय देकर 12 महीने काम लेना गलत है। उन्होंने सरकार से चुनाव ड्यूटी के बाद जान गंबाने बाले शिक्षकों के समान ही शिक्षामित्रों को सहायता एवं नौकरी की मांग की हैं। सरकार शिक्षामित्रों को जून का मानदेय उपलब्ध करवाए।



देवरिया | उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ ने शिक्षमित्रों से जून महीने में काम लेने को लेकर सवाल उठाया है। सरकार पर शिक्षामित्रो से बेगारी कराने का आरोप लगाया है।


प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार यादव ने कहा है कि प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में एक लाख अठावन हजार शिक्षामित्रों से जून में आन लाइन शिक्षण कार्य व अन्य विभागीय व प्रशासनिक कार्य लिए जा रहे हैं। उन्हें इसके लिए कोई भुगतान नहीं मिल रहा है। इससे शिक्षामित्रों का मनोबल अब टूट रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रो को मात्र 11 माह का ही मानदेय मिलता है। ऐसे में 12 महीने का काम लेना गलत है। 


बिना मानदेय के एक महीने काम लेना मानवता के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से जून में कार्य कर रहे शिक्षा मित्रों को एक माह का मानदेय देने की मांग की।