शिक्षकों के समायोजन को लेकर जूनियर-सीनियर का विवाद शुरू, जिलों में समायोजन सूची पर भी विवाद
हाईकोर्ट ने स्कूलों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती के आदेश दिए थे, अगली सुनवाई 22 मई को होनी है
हाल ही में अमेठी और भदोही में जूनियर शिक्षकों का समायोजन
कौशाम्बी, बुलंदशहर, लखीमपुर में सीनियर को दूसरे स्कूल भेजा
प्रयागराज। हाईकोर्ट के आदेश पर परिषदीय स्कूलों में हो रहे शिक्षकों के समायोजन में एक और विवाद पैदा हो रहा है। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा के आदेश पर कुछ जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने जूनियर शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेज दिया है जबकि कुछ अन्य जिलों के बीएसए ने सीनियर शिक्षकों को समायोजित कर दिया है। अब इसको लेकर शिक्षकों ने विवाद करना शुरू कर दिया है। सीनियर कह रहे हैं कि जूनियर शिक्षक का समायोजन होना चाहिए जबकि जूनियर शिक्षक पहले से कार्यरत शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेजने पर अड़े हैं।
चूंकि अपर मुख्य सचिव के चार मई के आदेश में यह साफ नहीं है कि जूनियर या सीनियर में किसका समायोजन होगा इसलिए इसे लेकर कानूनी विवाद होना तय है। इसमें सीनियर और जूनियर दोनों में से जिसका मनमाफिक स्कूल में समायोजन नहीं होगा, वही न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। सौरभकुमार सिंह व छह अन्य की ओर से दायर विशेष अपील में हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को परिषदीय स्कूलों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती के आदेश दिए थे। इस मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होनी है।
अपर मुख्य सचिव ने सभी बीएसए से समायोजन करते हुए 20 मई तक रिपोर्ट मांगी है। अब तक जिन जिलों में समायोजन हो चुका है उनमें अमेठी, बाराबंकी और भदोही में जूनियर शिक्षकों जबकि मेरठ, बुलंदशहर, प्रतापगढ़ और कौशांबी में सीनियर को दूसरों स्कूलों में भेजा जा रहा है। बरेली में वरिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस माना गया है। लखीमपुर खीरी में वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस माना गया है लेकिन यदि सरप्लस अध्यापक महिला है तो अधिक ठहराव वाले पुरुष शिक्षक को समायोजित करने जा रहे हैं। हरदोई में दो कदम आगे बढ़ते हुए वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों सरप्लस शिक्षकों का डेटा मंगा लिया है। लखनऊ में अभी तक बीएसए ने सरप्लस में कनिष्ठ जाएगा या वरिष्ठ इसकी स्थिति तय नहीं की है।
जिले में शिक्षकों की समायोजन सूची पर भी विवाद
प्रयागराज। परिषदीय शिक्षकों के समायोजन के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने मंगलवार को सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी कर दी। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस दिखाया गया है। हालांकि सूची में आरटीई नियमों की खुलकर अनदेखी की गई है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 100 छात्रसंख्या तक विषयवार तीन शिक्षक होना अनिवार्य है। तमाम विद्यालयों में एक विषय के एक से अधिक शिक्षक होने के बावजूद उन्हें सरप्लस नहीं दिखाया गया है। सिर्फ उन्हीं शिक्षकों को सरप्लस किया गया है जहां छात्रसंख्या 100 से कम है और अध्यापक तीन से अधिक हैं। एनआईसी की वेबसाइट पर प्रदर्शित डाटा के संबंध में शिक्षकों को कोई आपत्ति हो तो जनपदीय स्थानान्तरण/समायोजन समिति के सदस्य सचिव बीएसए को 19 मई तक साक्ष्य सहित प्रस्तुत कर सकते हैं। बीएसए ने साफ किया है कि 19 मई के बाद किसी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।
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