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Tuesday, September 15, 2020

फतेहपुर : ग्राम सभा करेंगी स्कूलों के बिजली बिलों का भुगतान

फतेहपुर : ग्राम सभा करेंगी स्कूलों के बिजली बिलों का भुगतान।

फतेहपुर : परिषदीय स्कूलों को ग्राम पंचायतों की संपत्ति मानकर उनके बिजली के बिलों का भुगतान करना होगा। शासन ने पंचायतराज विभाग की ओर से इसके क्रियान्यवन के निर्देश दिए हैं। नए नियम से जहां बेसिक शिक्षा विभाग को राहत मिलेगी वहीं ग्राम पंचायतों पर खर्च का बोझ बढ़ेगा।



बेसिक शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद 2129 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनका भुगतान अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग के द्वारा किया जाता रहा है। विभाग पर करीब चार करोड़ का बिजली का बिल बकाया चल रहा है। इसको अदा करने के लिए अब शासन ने नया तरीका निकाला है। शिक्षा महानिदेशक ने इस अदायगी को ग्राम पंचायतों से कराए जाने के निर्देश दिए हैं। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बिजली के बिल की अदायगी के लिए शासन से पंचायतीराज विभाग को पत्र भेजा गया है। विभाग में इस मद में अब धन नहीं मिलेगा।

संविलियन के बाद विद्यालय कम, कनेक्शन ज्यादा

पहले जिले में 2650 विद्यालय संचालित थे। संविलियन के बाद इनकी संख्या 2129 रह गई है। ऐसी स्थिति में एक कैंपस में दो-दो बिजली के कनेक्शन कागजों पर चल रहे हैं। विभाग के लिए यह चिता का विषय बना हैं। असल में तमाम विद्यालय ऐसे हैं जिनमें कनेक्शन ही नहीं हैं, लेकिन बिजली का बिल आ रहा है। उनकी देनदारी बढ़ती जा रही है।


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Monday, August 31, 2020

फतेहपुर : सौ परिषदीय स्कूलों में लगेंगे सोलर प्लांट, बिजली के साथ पीने के लिए मिलेगा शुद्ध पानी

फतेहपुर : सौ परिषदीय स्कूलों में लगेंगे सोलर प्लांट, बिजली के साथ पीने के लिए मिलेगा शुद्ध पानी।

फतेहपुर। जिले के 100 परिषदीय स्कूलों में शुद्ध पीने के पानी की व्यवस्था में तीन करोड़ खर्च किया जाएगा। इसके लिए सोलर एनर्जी प्लांट लगाए जाएंगे। प्रत्येक स्कूल में करीब तीन लाख की लागत से सोलर एनर्जी प्लांट लगाने का काम शुरू हो गया है।




जिले के 10 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मिलाकर कुल 100 परिषदीय विद्यालय सुविधा के लिए सूचीबद्ध किए गए हैं। प्रत्येक स्कूल में तीन बड़े पैनल, पांच पंखे, ओवरहेड टैंक और सबमर्सिबल पंप लगाए जाने का प्रावधान है। सोलर एनर्जी प्लांट लगने के बाद इन स्कूलों में दिन के समय बिजली आपूर्ति मिलेगी। इसी के साथ आरओ का शुद्ध पीने का पानी मिलेगा। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन ने सोलर एनर्जी प्लांट लगाने के लिए सीधे नेडा को बजट दे दिया है। कार्यदायी संस्था ने प्लांट लगाने  का काम प्रारंभ कर दिया है। यह काम अगले महीने तक पूरा हो जाएगा।




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Wednesday, August 12, 2020

फतेहपुर : 65 और उत्कृष्ट विद्यालयों का होगा चयन, विद्यालय के बेहतर शिक्षक को मिलेगा सम्मान

फतेहपुर : 65 और उत्कृष्ट विद्यालयों का होगा चयन, विद्यालय के बेहतर शिक्षक को मिलेगा सम्मान।

सभी 13 ब्लॉकों से पांच-पांच स्कूलों का होगा चयन

उत्कृष्ट स्कूल के बेहतर शिक्षक को मिलेगा सम्मान


फतेहपुर :  बेसिक शिक्षा विभाग जिले में 65 और उत्कृष्ट विद्यालयों का चयन करेगा। इन स्कूलों के सर्वाधिक क्रियाशील एक शिक्षक को पांच सितंबर को डीएम सम्मानित करेंगे। इससे पहले जिले में 357 उत्कृष्ट विद्यालयों का चयन हो चुका है। उत्कृष्ट विद्यालयों के चयन के लिए बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने-अपने ब्लाक से पांच-पांच स्कूलों की सूची मांगी है। चयनित विद्यालयों की पत्रावली 14 अगस्त को बीएसए कार्यालय में जमा करना होगा।



उत्कृष्ट विद्यालयों के चयन की व्यवस्था 2017-18 से लागू हुई है। इस सत्र में कुल 93 उत्कृष्ट विद्यालय चयनित हुए थे। 2018 19 में 264 उत्कृष्ट विद्यालय का चयन किया गया था। इस तरह से वर्तमान समय में जिले में कुल 357 उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं। चालू सत्र में प्रति ब्लाक पांच उत्कृष्ट विद्यालयों का चयन किया जाना है। इसके लिए बीएसए ने सभी बीईओ को मंगलवार को पत्र जारी कर दिया है।

उत्कृष्ट विद्यालय के मानकों में पौधरोपण भी  :: 2018-19 और 2019-20 के नामांकन में वृद्धि के प्रतिशत के से दिसंबर तक वार्षिक परीक्षा के प्राप्तांक के साथ फर्नीचर आदि। नवाचार एवं साथ छह से 14 वर्ष के बच्चों की कुल जनसंख्या के सापेक्ष विद्यालयों में अधिकतम नामांकन। नामांकन के सापेक्ष अक्तूबर उपस्थिति में वृद्धि का तुलनात्मक विवरण प्रतिशत में। पिछले सत्र की परिणाम सीट। भौतिक वातावरण में विद्यालय का परिवेश जैसे रंगाई पुताई, पेयजल, टाइल्स, पौधरोपण, आईसीटी विधि से बच्चों की पढ़ाई। यह सभी मानक पूरे करने वाले स्कूल उत्कृष्ट विद्यालयों की श्रेणी में शामिल होंगे।


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Thursday, August 6, 2020

फतेहपुर : परिषदीय विद्यालयों को मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं से संतृप्त करने हेतु "ऑपरेशन कायाकल्प" के अंतर्गत खेल का मैदान के विकास, किचेन वाटिका की फेन्सिंग आदि का निर्माण कराए जाने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : परिषदीय विद्यालयों को मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं से संतृप्त करने हेतु "ऑपरेशन कायाकल्प" के अंतर्गत खेल का मैदान के विकास, किचेन वाटिका की फेन्सिंग आदि का निर्माण कराए जाने के सम्बन्ध में।


फतेहपुर : परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प करेगी पालिका।


फतेहपुर : ग्राम पंचायतों की तर्ज पर नगर पालिका परिषद नगरीय क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प करेगी। 14वें वित्त से विद्यालय की बाउंड्रीवाल, शौचालय समेत भवनों को कायाकल्प ऑपरेशन के तहत सुसज्जित कराया जाएगा। नगर पालिका ने आपरेशन कायाकल्प की तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही इन विद्यालयों का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

परिषदीय विद्यालयों के कायाकल्प योजना के तहत सुंदरीकरण के साथ बाउड्रीवॉल व अतिरिक्त कक्षाओ का निर्माण भी कराया जाएगा। छात्र छात्राओ के लिए उनकी संख्या के अनुसार अलग शौचालय एवं रनिंग वाटर की व्यवस्था भी की जाएगी। स्वच्छ रनिंग वाटर की सुविधा के साथ साथ जलनिकासी का कार्य भी कराया जाएगा। विद्यालय की फर्श दीवारों की छत तथा दीवारों की खिड़की आदि का मरम्मतीकरण कार्य कराए जाने के निर्देश दिए गए है। कक्ष एवं शौचालय में टाइल्स का कार्य, विद्युतीकरण व किचन सेट का जीर्णोद्धार के साथ सुसज्जीकरण फर्नीचर का कार्य भी कराया जाएगा। जिस किसी विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है, वहां चहारदीवारी एवं गेट का निर्माण भी कराया जाएगा। शासन द्वारा निर्देशित किया गया है कि नगरीय परिसंपत्तियो के रूप में नगर क्षेत्र के विद्यालयों में कराए जाने वाले कार्यो की तकनीकी एवं अन्य जानकारी व ऑपरेशन कायाकल्प के सहयोग में बेसिक शिक्षा विभाग आवश्यकता के हिसाब से रखरखाव भी कराएगी।


शासन द्वारा गाइडलाइन जारी की गई है। चौदहवें वित्त से ऑपरेशन कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयो का सुंदरीकरण कराए जाने के निर्देश तो दिए गए है पर धन का अभाव है। अभी इस सम्बन्ध में विचार विमर्श किया जा रहा है।

निरूपमा प्रताप, नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी






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Tuesday, July 28, 2020

बांदा : 1868 स्कूलों का नहीं हो पाया कायाकल्प, समन्वयक ने उजागर किए कायाकल्प के अधूरे कार्य

बांदा : 1868 स्कूलों का नहीं हो पाया कायाकल्प, समन्वयक ने उजागर किए कायाकल्प के अधूरे कार्य।

बांदा ::  नए शिक्षा सत्र में जिले के 1868 विद्यालयों के बच्चों को बुनियादी सुविधाओं से जूझना पड़ेगा। कहीं पीने का नहीं तो कहीं शौचालय नदारद हैं। तमाम स्कूलों में रसोईघर और बिजली कनेक्शन का अभाव है। विभागीय जिला समन्वयक द्वारा उप निदेशक (बेसिक) को भेजी गई रिपोर्ट में ये खामियां उजागर हुई हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 124 स्कूल सभी सुविधाओं से संतृप्त और लैस हैं। शासन ने मार्च 2019 में परिषदीय स्कूलों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी 'ऑपरेशन कायाकल्प के तहत ग्राम पंचायतों को दी थीं, लेकिन ग्राम पंचायतों ने सभी स्कूलों के बुनियादी सुविधाओं से लैस नहीं किया। स्कूलों की ताजा हालत सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक (निर्माण) द्वारा दो दिन पूर्व बेसिक शिक्षा उप निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट से उजागर हुई है।


समन्वयक की रिपोर्ट में बताया गया है कि जिले के 1992 परिषदीय स्कूलों में मात्र 124 स्कूलों में ही 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत कार्य कराए गए हैं। 1868 स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1992 परिषदीय विद्यालयों में 620 में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। 844 स्कूलों में बालक व बालिकाओं के अलग-अलग शौचालय नहीं हैं। 692 स्कूलों में रसोईघर, 1925 स्कूलों में हैंडवाशिंग यूनिट, 1217 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन और बाउंड्रीवाल नहीं है। 1947 स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय व रैप नहीं बने हैं। 120 विद्यालयों में श्यामपट्ट (ब्लैक बोर्ड) नहीं हैं। 1198 स्कूलों की कक्षाओं में फर्श या टायल्स नहीं हैं।





पहले शौचालय और पंचायत भवन बनेंगे : जिला समन्वयक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि जिला पंचायत राज विभाग का कहना है कि ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवनों के निर्माण को शासन के निर्देशानुसार पहले कराया जा रहा है।

शासन ने ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय स्कूलों में 14 बिंदुओं पर संतृप्त करने का कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपा है। उन्हें ही सभी स्कूलों में यह कार्य कराना है। अधूरे कार्यों के बारे में शासन को पत्राचार किया गया है। -हरिश्चंद्र नाथ, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बांदा।

शासन ने 125 दिनों में प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय और पंचायत घर बनाए जाने के आदेश दिए हैं। इसलिए पहले ये दोनों कार्य कराए जा रहे हैं। इसी के बाद ऑपरेशन कायाकल्प' से स्कूलों में काम होंगे। -संजय यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी बांदा।


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Monday, July 27, 2020

फतेहपुर : अब परिषदीय शिक्षकों को भी घोषित करें "कोरोना वारियर्स", सोशल मीडिया पर शिक्षकों ने बुलंद की मांग

फतेहपुर : अब परिषदीय शिक्षकों को भी घोषित करें "कोरोना वारियर्स", सोशल मीडिया पर शिक्षकों ने बुलंद की मांग।

फतेहपुर : कोरोना काल में राष्ट्रनिर्माण में योगदान दे रहे परिषदीय शिक्षकों ने भी खुद को कोरोना वायरस का दर्जा दिए जाने की मांग की है। उनका तर्क है कि कोरोना के प्रकोप के दौर में वह अपने परिवार को खतरे में डालकर समाज के बीच रहकर काम कर रहे हैं इसलिए उन्हें भी बीमा कौरव कोरोना से मृत्यु होने पर परिजनों को आर्थिक मदद का भरोसा मिलना चाहिए। शिक्षक अपने संघों से इस मांग को शासन के समक्ष रखने की आवाज उठा रहे हैं।

गत एक जुलाई से परिषदीय स्कूलों के शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार व प्रकोप के बीच शिक्षकों को अपने व परिवार की चिंता सताने लगी है। इसके लिए सोशल मीडिया व शिक्षकों के समूहों में जबरदस्त चर्चा जारी है।

शिक्षकों की मांग है कि जिस तरह सरकार ने पुलिस, डॉक्टर व सफाईकर्मियों को कोरोना योद्धा का दर्जा देकर उनके परिजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है उसी तरह की सुरक्षा उनके परिवारीजनों को भी मिलनी चाहिए। इसके पीछे वह तर्क देते हैं कि अन्य विभागों के कर्मचारी व अधिकारी तो अपने दफ्तरों में रहकर ही काम करते हैं लेकिन परिषदीय शिक्षक लगातार समाज के बीच रहकर काम कर रहा है। वह अभिभावकों के स्मार्टफोन में दीक्षा ऐप डाउनलोड कराने से लेकर राशन, ड्रेस व पुस्तक वितरण के साथ मिड डे मील की फीडिंग के लिए भी भटक रहा है।




मांग : परिषदीय शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर बुलंद की अपनी मांग स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिस की तरह कर रहे समाज के लिए काम

खतरों से खेलकर राष्ट्र निर्माण : 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों का कहना है कि हमारे पास न तो पुरानी पेंशन है और न ही फंड, इसलिए हमारे परिवार की सुरक्षा आवश्यक है। कहते हैं कि यदि दुर्भाग्य से कोरोना के कारण उनकी मौत होती है तो उनके परिजनों की आर्थिक सुरक्षा कैसे हो पाएगी। हम भी तो समाज के बीच रहकर विपत्ति की इस घड़ी में राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।



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