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Wednesday, July 8, 2020

16 अगस्त तक भरे जाएंगे 10वीं-12वीं के परीक्षा फॉर्म

यूपी बोर्ड की 2021 परीक्षा के लिए हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के परीक्षा फॉर्म 16 अगस्त तक और विलंब शुल्क के साथ 20 अगस्त तक भरे जाएंगे। सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने मंगलवार को विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया। प्रदेशभर के 28 हजार से अधिक स्कूलों में कक्षा 10 व 12 में प्रवेश लेने व फीस जमा करने की अंतिम तिथि 5 अगस्त तय की गई है। प्रधानाचार्य छात्र-छात्राओं से प्राप्त परीक्षा शुल्क एकमुश्त 10 अगस्त तक चालान के माध्यम से कोषागार में जमा करेंगे।
परीक्षा शुल्क की सूचना और छात्र-छात्राओं के विवरण 16 अगस्त को रात 12 बजे तक बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। प्रधानाचार्य 10 अगस्त के बाद प्रति छात्र 100 रुपया विलंब शुल्क के साथ परीक्षा शुल्क कोषागार में 16 अगस्त तक जमा करेंगे। विलंब शुल्क के साथ जमा परीक्षा शुल्क की सूचना और छात्र-छात्राओं के विवरण 20 अगस्त को रात 12 बजे तक अपलोड होंगे। वेबसाइट पर अपलोड छात्र-छात्राओं के विवरण की चेकलिस्ट प्राप्त कर प्रधानाचार्य 21 से 31 अगस्त तक उसकी विधिवत जांच करेंगे।

इस दौरान वेबसाइट पर किसी प्रकार का अपडेशन प्रतिबंधित रहेगा। जांच के बाद ऑनलाइन अपलोड छात्र-छात्राओं के विवरण में यदि किसी प्रकार का संशोधन होना है तो उसे प्रधानाचार्य दोबारा वेबसाइट खोलकर 1 से 10 सितंबर को रात 12 बजे तक कर सकेंगे। सचिव ने साफ किया है कि इस दौरान नये छात्र या छात्रा का विवरण अपलोड (स्वीकार) नहीं किया जाएगा। केवल संशोधन ही स्वीकार किए जाएंगे। छात्र-छात्रा के विवरण में कोई कमी न हो इसके लिए कक्षाध्यापक एवं प्रधानाचार्य के साथ ही उनके अभिभावक भी हस्ताक्षर करेंगे। कक्षा 9 व 11 के अग्रिम पंजीकरण की तारीख भी जल्द घोषित होगी।

हाईस्कूल की फीस 500, इंटर की 600 रुपये
हाईस्कूल व इंटर के छात्र-छात्राओं को क्रमश: 500 एवं 600 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा। प्रति छात्र एक रुपये अंकपत्र शुल्क और 25 पैसे प्रधानाचार्यों के उपयोग के लिए देना होगा।

Friday, June 26, 2020

निर्णय : CBSE एवं ICSE बोर्ड की 10वीं और 12वीं की बची परीक्षाएं रद्द

निर्णय : CBSE एवं ICSE बोर्ड की 10वीं और 12वीं की बची परीक्षाएं रद्द।

नई दिल्ली : विशेष संवाददाता कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड ने 10वीं और 12वीं की बची हुई परीक्षाएं रद्द करने का फैसला किया है। दोनों बोर्ड ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी। इस पर अदालत ने केंद्र और सीबीएसई को 12वीं की परीक्षा पर नई अधिसूचना जारी करने को कहा है। इस मामले में शुक्रवार को दोबारा सुनवाई होगी।








 हालात ठीक होने पर परीक्षा : केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि एक से 15 जुलाई तक होने वाली परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। महाराष्ट्र, दिल्ली और ओडिशा ने हलफनामा दाखिल परीक्षा कराने में असमर्थता जताई है। अब परीक्षाएं तब होंगी, जो वातावरण अनुकूल होगा। नई अधिसूचना जारी करें : शीर्ष अदालत ने सीबीएसई और केंद्र सरकार से कहा कि नई सूचना में आंतरिक मूल्यांकन और परीक्षा के बीच विकल्प का मामला भी स्पष्ट करें। साथ ही राज्य बोर्ड परीक्षाओं की वर्तमान स्थिति, परीक्षाओं की तारीख के बारे में भी बताएं। कोर्ट ने शुक्रवार की सुबह तक सीबीएसई से नई अधिसूचना और हलफनामा मांगा है। वहीं, आईसीएसई बोर्ड ने बताया कि 10वीं और 12वीं के छात्रों को दोबारा परीक्षा का विकल्प नहीं मिलेगा। अभिभावकों ने दायर की याचिका कोरोना के कारण कुछ अभिभावकों ने बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने तथा आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर रिजल्ट बनाने की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है, ऐसे में परीक्षा के लिए बच्चों को भेजने से उन्हें खतरा हो सकता है।







संभावना

12वीं के लिए दो विकल्प आंतरिक मूल्यांकन : पिछली तीन परीक्षाओं के प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन करा सकते हैं बाद में परीक्षा : यदि कोई छात्र परिणाम से संतुष्ट नहीं है तो वह बाद में परीक्षा दे सकता है

10वीं के लिए...

10वीं के छात्रों को पुनः परीक्षा का विकल्प नहीं मिलेगा।

संशय यूनिवर्सिटी दाखिला : परीक्षाएं रद्द होने से डीयू समेत तमाम विश्वविद्यालयों में दाखिले को लेकर भी असमंजस बढ़ गया है। छात्र : मेरिट के आधार पर कॉलेजों में दाखिले में परेशानी बढ़ेगी। ड्रॉप लेने वाले छात्रों को भी नुकसान। प्रतियोगी परीक्षाएं : सरकार ने सीटेट रद्द कर दी है। अब जेईई मेंस, जेईई एडवांस और नीट पर भी संशय के बादल मंडराए।

29 विषयों की परीक्षा बाकी थी छात्रों की,

16 लाख से अधिक छात्रों पर फैसले का असर


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Sunday, June 21, 2020

केंद्रीय बोर्डों की बची परीक्षाओं पर 30 जून तक निर्णय ले केंद्र सरकार

केंद्रीय बोर्डों की बची परीक्षाओं पर 30 जून तक निर्णय ले केंद्र सरकार : कोर्ट


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने केंद्रीय बलों की बची परीक्षाएं टक्कर विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर उन्हें अंक देने के आग्रह वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को जनहित को ध्यान में रखकर 30 जून तक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने यह अहम आदेश राजधानी के छात्र अनुज निषाद की जनहित याचिका पर दिया। याची ने दसवीं व बारहवीं बोर्ड की बची परीक्षा कराने के सीबीएसई और आईसीएसई के निर्णय को चुनौती दी थी।





याची के अधिवक्ता केके पाल की दलील थी कि कोरोना के बढ़ रहे मरीजों के मद्देनजर परीक्षा के दौरान स्कूलों में शारीरिक दूरी बनाए रखने व मास्क आदि लगाने के दिशा निर्देशों का पूरी तरह पालन संभव नहीं है। याचिका में केंद्र सरकार समेत केंद्रीय बोर्डों ( सीबीएसई और आईसीएससीई) की माध्यमिक स्तर की बची परीक्षाएं न करवाकर विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर उन्हें अंक दिए जाने के निर्देश देने की गुजारिश की गई थी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा विशेषज्ञों द्वारा गौर किए जाने लायक है। ऐसे में याचिका गृह मंत्रालय को संदर्भित की जाए जो प्रत्यावेदन मानी जाएगी और सक्षम अधिकारी इस मामले में समुचित निर्णय लेंगे। इस आदेश के तहत कोई निर्णय लेते समय सर्वाधिक जनहित को ध्यान में रखना होगा। कोर्ट को यह बताए जाने पर कि परीक्षाएं पहली जुलाई से होने वाली हैं, अदालत ने अपेक्षा की कि केंद्र के समुचित प्राधिकारी परीक्षा शुरू होने के पहले इस आदेश के तहत समुचित निर्णय लेंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील एसबी पांडेय को कहा कि वह तत्काल इस आदेश को केंद्रीय गृह मंत्रालय के संबंधित अफसर को भेजें।



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Wednesday, June 17, 2020

CISCE बोर्ड : परीक्षा ना देने का छात्रों को मिला विकल्प

सीआईसीएसई बोर्ड : परीक्षा ना देने का छात्रों को विकल्प मिला।


सीआईसीएसई बोर्ड के 10वीं और 12वीं के छात्र बची हुई बोर्ड की परीक्षा ना देने का विकल्प चुन सकते हैं। उन्हें प्री -बोर्ड या स्कूल में हुई परीक्षाओं के आधार पर अंक दिए जाएंगे।




कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनजर एक अभिभावक ने अदालत में परीक्षाएं रद कराने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी,जिसके जवाब में बोर्ड ने बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष यह प्रस्ताव दाखिल किया।काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) के मुख्य कार्यकारी एवं सचिव, गैरी एराथून के अनुसार छात्रों को 22 जून तक अपने संबंधित स्कूलों में इसकी जानकारी देनी होगी। लॉकडाउन के कारण कुछ परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं,जो अब एक से 14 जुलाई के बीच होंगी। हालांकि, कई अभिभावक उन्हें रद करने की मांग कर रहे हैं।


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Monday, June 15, 2020

बोर्ड बचे हुए विषयों की न लें परीक्षा, अभिभावकों ने की अपील

अपील : बोर्ड बचे हुए विषयों की परीक्षा न ले

नई दिल्ली : देश में लगातार कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। इस बीच एक जुलाई से होने वाली सीबीएसई और सीआईसीएसई के बचे हुए विषयों की परीक्षाओं को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। उन्होंने परीक्षा रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अभी तक हुई परीक्षाओं के आधार पर परिणाम घोषित किए जाएं।






अभिभावकों ने स्टूडेंट्स लाइव्स मैटर (छात्रों का जीवन मायने रखता है), लाइव्स ओवर एग्जाम (परीक्षा से बढ़कर जीवन) और कैंसल बोर्ड एग्जाम्स (बोर्ड परीक्षाएं रद्द करें) हैशटैग से ऑनलाइन अभियान शुरू किया है। चार अभिभावकों ने तो उच्चतम न्यायालय को अर्जी देकर अनुरोध किया है कि कोविड-19 के मद्देनजर बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी जाएं। एक अभिभावक निशांत अक्शर ने कहा, हमारे बच्चों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा? एक बच्चा या परीक्षक, जो कोरोना वायरस से संक्रमित है, लेकिन उसमें लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं, पूरी कक्षा के बच्चों को संक्रमित कर सकता है। चार घंटे तक एक ही कमरे में रहने से संक्रमण का खतरा भी बहुत ज्यादा रहेगा।

हालात खराब हो *गए तो क्या होगा



दसवीं कक्षा के एक छात्र की मां रोहिणी भूमिहार का कहना है, जरूरी सामान की कमी के अलावा, अगर हालात और खराब हो गए तो क्या होगा? बच्चे फिर से तैयारी करेंगे और अंतिम समय में परीक्षा (फिर से) रद्द हो जाएगी। हमारे बच्चों के दिमाग पर इसका क्या असर होगा? यह देखते हुए कि हालात में सुधार की गुंजाइश कम है, पंजाब, तेलंगाना और तमिलनाडु ने इस वर्ष छात्रों की 10वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं।



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Sunday, June 14, 2020

10वीं व 12वीं की परीक्षाओं को लेकर सरकार चिंतित, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्वास्थ्य और गृहमंत्री से मांगी सलाह

10वीं व 12वीं की परीक्षाओं को लेकर सरकार चिंतित, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्वास्थ्य और गृहमंत्री से मांगी सलाह।


नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने जुलाई में प्रस्तावित परीक्षाओं को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय की चिंताएं बढ़ा रखी हैं। वह इसलिए भी चिंतित है क्योंकि परीक्षाओं को अब सिर्फ दो हफ्ते ही बाकी हैं, लेकिन संक्रमण की रफ्तार लगातार तेज ही हो रही है। खासकर दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि इसे लेकर कोई भी निर्णय लेने से पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्वास्थ्य और गृह मंत्रालय को पूरी जानकारी देते हुए राय मांगी है। मंत्रालय का साफ कहना है कि वह कोई फैसला स्वास्थ्य और गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के बाद ही लेगा।




जुलाई में जो परीक्षाएं प्रस्तावित हैं उनमें 10वीं, 12वीं की सीबीएसई और सीबीएसई की बोर्ड की परीक्षाओं के साथ विश्वविद्यालयों की भी परीक्षाएं शामिल हैं जो एक जुलाई से होनी हैं। इसके साथ ही नीट और जेईई मेंस की भी परीक्षाएं जुलाई में होनी हैं। मौजूदा प्लान के तहत नीट की परीक्षा 26 जुलाई को और जेईई मेंस की 13 से 23 जुलाई के बीच प्रस्तावित है। ऐसे में सवाल है कि यदि संक्रमण इसी तरह बढ़ता रहा तो परीक्षाएं कैसे हो पाएंगी। हालांकि इस सब के बीच छात्रों और परिजनों की ओर से

परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग भी तेज हो गई है।अभिभावकों की कहना है कि वह बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालकर परीक्षाएं नहीं चाहते। कुछ अभिभावकों ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। हालांकि मंत्रालय ने भी साफ किया है कि उसके लिए भी छात्रों की सुरक्षा पहली जिम्मेदारी है। ऐसे में वह कोई भी कदम उठाने से पहले छात्रों की सुरक्षा जरूर सुनिश्चित करेगा। इसका चलते फिलहाल सारे जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।


कोरोना संक्रमण के नाते मामले कर रहे परेशान


मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्वास्थ्य और गृह मंत्रालय से मांगी राय


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