DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label माध्यमिक शिक्षा. Show all posts
Showing posts with label माध्यमिक शिक्षा. Show all posts

Friday, July 3, 2020

माध्यमिक व बेसिक के 75 प्रतिशत बच्चे से रहे दूर, गांवों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा रही बेमकसद

माध्यमिक व बेसिक के 75 प्रतिशत बच्चे से रहे दूर, गांवों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा रही बेमकसद


गांवों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा साबित हो रही बेमकसद बेसिक में 25 प्रतिशत, माध्यमिक में 30 फीसद बच्चे ही ले रहे लाभ


फ़तेहपुर : कोरोना वायरस को लेकर लॉकडाउन के दौर में बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराई गई कि छात्र छात्राओं की शिक्षा प्रभावित न हो सके।लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई का सच जमीनी हकीकत से दूर है। अभी तक नासिक में 75 प्रतिशत तो माध्यमिक में 70 प्रतिशत छात्र-छात्राएं ऑनलाइन शिक्षा से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। 


खासकर ग्रामीणांचलों में स्थित विद्यालयों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा बेमकसद साबित हो रही है। इसका कारण है कि अधिकांश बच्चों के अभिभावकों के पास न ही एडायड फोन हैं और जहां मोबाइल हैं भी वहां गांवों में नेटवर्किंग की समस्या है। 


ऐसे अव्यवस्थाएं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने बच्चों का ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए व्हाट्सएप, फेसबुक समेत अन्य ऐपों के माध्यम से ग्रुप बनाकरबच्चों को जोड़ा गया। विद्यालयों के कक्षाध्यापकों को जिम्मेदारी दी गई कि वह अपने कक्षा के सभी बच्चों को ग्रुप में जोड़ कर प्रतिदिन निर्धारित समय में शिक्षण सामग्री प्रेषित करेंगे और उनके द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का जवाब भी देंगे। 

Wednesday, July 1, 2020

यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव सेवानिवृत्त, चार्ज दिव्यकान्त शुक्ल को

यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव सेवानिवृत्त, चार्ज दिव्यकान्त शुक्ल को 



प्रयागराज। यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव शिक्षा विभाग में अपनी 29 वर्ष की सेवा के बाद मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गई। इसके बाद सचिव का पद प्रभार यूपी बोर्ड के नवनियुक्त विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) एवं संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रयागराज मंडल दिव्यकांत शुक्ल को दिया गया है। 


वह सचिव के पद पर स्थाई नियुक्ति होने तक संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रयागराज मंडल के साथ वर्तमान पद का दायित्व संभालेंगे। नीना श्रीवास्तव 31 मार्च 2020 को अवकाश ग्रहण कर रहीं थीं, लेकिन शासन ने यूपी बोर्ड परीक्षा को देखते हुए उनका कार्यकाल 30 जून तक बढ़ा दिया था।

Tuesday, June 30, 2020

रिजल्ट घोषित करने के साथ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया यूपी बोर्ड


रिजल्ट घोषित करने के साथ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया यूपी बोर्ड


वर्ष 2020 के हाईस्कूल और इंटर का रिजल्ट घोषित होने के साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा कराने वाला यूपी बोर्ड अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया। प्रदेश में शिक्षा का विस्तार करने के उद्देश्य से इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत माध्यमिक शिक्षा परिषद गठित किया गया था। बोर्ड ने 1923 में पहली बार परीक्षा कराई थी जिसमें हाईस्कूल के 5655 और इंटर के 89 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। 2020 की परीक्षा बोर्ड की 98वीं परीक्षा थी। 2022 में परीक्षा के 100 साल पूरे हो जाएंगे।


परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार ने 1972 में मेरठ, 1978 में वाराणसी, 1981 में बरेली, 1986 में इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) तथा 2017 में गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना की। छात्रसंख्या के लिहाज से यह दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। 2020 की परीक्षा के लिए 56,07,118 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। जितने छात्र 10वीं-12वीं की परीक्षा देते हैं उतनी दुनिया के 80-85 देशों की आबादी नहीं है।


हर दो दशक में ऐसे बढ़ी परीक्षार्थियों की संख्या
वर्ष         10वीं           12वीं ( छात्र-छात्राओं की संख्या)
1923      5655         89
1939      15545       5447
1959      155211     100970
1979      874438    516047
1999      2276571   1114301
2019      3192587   2603169



समय के साथ बदला काम का तरीका
समय के साथ बोर्ड ने अपने काम का तरीका भी बदला है। पिछले कुछ सालों में बोर्ड ने तकनीक का भरपूर इस्तेमाल कर नकल पर रोक लगाई है। वहीं, परीक्षार्थियों को सहूलियत दी है। उदाहरण के तौर पर इस साल से स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। जनहित गारंटी अधिनियम 2011 के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को अंकपत्रों एवं प्रमाणपत्रों में संशोधन, द्वितीय प्रतिलिपि आदि घर बैठे मिल रही है। परीक्षा के लिए केंद्रों के आवंटन से लेकर डिजिटल हस्ताक्षर वाली मार्क्सशीट तक ऐसे दर्जनों काम हैं जो बोर्ड ने तकनीक के माध्यम से बेहतर किए हैं।


प्रमुख बदलाव
2018 से बोर्ड परीक्षा केंद्रों का निर्धारण कम्प्यूटर के जरिए ऑनलाइन
2019 से सीसीटीवी के साथ वॉयस रिकॉर्डर की निगरानी में परीक्षा 
2020 में परीक्षा केंद्रों की वेबकास्टिंग कराने की शुरुआत की गई
2018-19 सत्र से मान्यता संबंधी कार्रवाई ऑनलाइन कराई गई
2017-18 से फर्जी पंजीकरण रोकने को बच्चों के आधार नंबर लिए गए
2019 में 39 विषयों की परीक्षा में दो की जगह एक पेपर देना पड़ा
2018-19 सत्र से कक्षा 9 से 12 तक में एनसीईआरटी कोर्स लागू किया गया

Monday, June 29, 2020

प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूल, यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का रेकॉर्ड प्राइवेट से करीब 11% ज्यादा


प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूल, यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का रेकॉर्ड प्राइवेट से करीब 11% ज्यादा


लखनऊ: आमतौर पर सरकारी स्कूलों के रिजल्ट पर हमेशा ही सवाल खड़े होते रहे हैं। पर इस बार यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट में सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन प्राइवेट से बेहतर रहा है। प्राइवेट स्कूलों के 72.45 प्रतिशत बच्चे पास हुए, जबकि सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 83.70 रहा। यानी, प्राइवेट स्कूलों से करीब 11 प्रतिशत ज्यादा।


शनिवार को यूपी बोर्ड का रिजल्ट जारी किया गया। इंटरमीडिएट में परीक्षा देने वालों में से 74.63 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए। इनमें बालकों के पास होने का प्रतिशत 68.88 रहा, जबकि बालिकाओं का 81.96। वहीं, ये विद्यार्थी किस तरह के विद्यालयों में पढ़ते थे, इस नजरिये से देखें तो शासकीय (सरकारी) स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पास प्रतिशत प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा बेहतर रहा। 


यही नहीं, प्राइवेट स्कूलों की तुलना में ऐडेड माध्यमिक स्कूलों का भी परफॉर्मेंस पास होने के मानकों पर करीब 6 प्रतिशत ज्यादा रहा। प्रदेश में 785 शासकीय विद्यालय हैं, जिनमें से 84,523 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 70,744 विद्यार्थी पास हुए। इस तरह से यहां पर पास प्रतिशत 83.70 रहा। वहीं, 4077 ऐडेड माध्यमिक विद्यालयों में 7,43,604 विद्यार्थियों ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। इनमें से 5,82,433 पास हुए। यानी, पास प्रतिशत 78.33 रहा। वहीं, प्रदेश में चल रहे 12,482 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 15,92,903 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 11,54,009 पास हुए। यानी, 72.45 प्रतिशत।


यही नहीं, प्रदेश में 111 प्राइवेट स्कूल ऐसे रहे, जिनमें पास होने का प्रतिशत 20 से भी कम रहा। जबकि केवल सात ही सरकारी स्कूल थे, जिनमें पास होने वालों का प्रतिशत 20 से कम रहा और ऐसे ही ऐडेड स्कूलों की संख्या 18 रही।


हाईस्कूल में प्राइवेट का परफॉर्मेंस तीन प्रतिशत ज्यादा
इंटरमीडिएट में जहां निजी स्कूलों से सरकारी स्कूल आगे निकले, वहीं हाईस्कूल की परीक्षाओं प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पास प्रतिशत सरकारी की तुलना में तीन प्रतिशत ज्यादा रहा। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में से 82.08% विद्यार्थी पास हुए, जबकि प्राइवेट स्कूलों के 85.11% विद्यार्थी परीक्षा पास कर सके। ऐडेड स्कूलों का परफॉर्मेंस 79.77 प्रतिशत रहा।


नकल के लिए बदनाम जिलों की हालत रही पतली
नकल के लिए बदनाम रहे जिलों की हालत भी इस साल कुछ पतली ही रही। परिणाम में उनका वह दबदबा नहीं रहा, जैसा की बीते वर्षों में दिखता रहा है। जैसे अलीगढ़ की स्थिति इस कदर खराब हुई कि इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उसका स्थान 75वें पर है। यहां केवल 56.39 प्रतिशत विद्यार्थी ही पास हो सके। हरदोई भी नकल के लिए खासा बदनाम रहा है, लेकिन इस साल परिणाम के तौर पर यह प्रदेश के जिलों में 43वें स्थान पर रहा है। बाराबंकी का स्थान 49वां, रायबरेली का 50वां और गोंडा का 52वां नंबर रहा है। देवरिया में केवल 61.14 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए, जबकि बलिया में पास प्रतिशत 57.57 रहा।

Sunday, June 28, 2020

यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम आज, ऐसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के रिजल्ट

■    यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम आज, ऐसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के रिजल्ट


● पहले इसके लिए यूपी बोर्ड की वेबसाइट upresults.nic.in पर जाएं
● यहां 10वीं या 12वीं एग्जाम रिजल्ट पर क्लिक करें
● इसके बाद अपना रोल नंबर यहां इंटर करें
● फिर आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा
● रिजल्ट देखने के बाद स्क्रीन का प्रिंट अवश्य लें
● यूपी बोर्ड की वेबसाइट व अन्य जानकारी


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं का रिजल्ट  आज 27 जून घोषित होगा। स्टूडेंट अपना रिजल्ट यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक कर पाएंगे, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है।

◆ बोर्ड का नाम : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद
◆ परीक्षा का नाम : कक्षा 10वीं/12वीं का बोर्ड एग्जाम
◆ आधिकारिक वेबसाइट : upmsp.nic.in
◆ रिजल्ट की वेबसाइट : upresults.nic.in

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर परीक्षा का परिणाम शनिवार को उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा लखनऊ में घोषित करेंगे। इसी के साथ परीक्षा में शामिल 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का इंतजार खत्म हो जाएगा। इस बार 10वीं-12वीं की परीक्षा एक साथ 18 फरवरी को शुरू हुई थी। 10वीं की परीक्षा 3 मार्च को इंटर की परीक्षा 6 मार्च को समाप्त हुई थी। की परीक्षा में हाईस्कूल के 3022607 और इंटर के 2584511 कुल 5607118 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से पांच लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने बीच में ही पेपर छोड़ दिया था। इससे पहले 2019 में 10वीं व 12वीं में 5795756 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इस लिहाज से 2020 की परीक्षा में 188638 परीक्षार्थियों की कमी हुई थी। परीक्षा के लिए 7784 केंद्र बनाए गए थे जो 2019 की तुलना में 570 कम था। इस बार 1 जुलाई 2019 को ही परीक्षा का टाइम टेबल घोषित कर दिया गया था।


लखनऊ/प्रयागराज। यूपी बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षा का परिणाम आज 27 जून को दोपहर 12:30 बजे यहां लोक भवन में जारी किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा यह परिणाम जारी करेंगे। परीक्षा में इस बार 51 लाख से अधिक 51 लाख से परीक्षा थीं शामिल हुए थे। परिणाम बोर्ड अधिक मात्रा ने दी है परीक्षा की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।


 इस बार इंटरमीडिएट में एक विषय में फेल होने वाले परीक्षार्थी को पहली बार कंपार्टमेंट में शामिल होने का मौका मिलेगा। बोर्ड की ओर से कोरोना संक्रमण के चलते पहली बार ही परीक्षार्थियों डिजिटल हस्ताक्षर वाले अंकपत्र एवं प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। डिजिटल हस्ताक्षर वाले प्रमाण पत्र, प्रवेश लेने से लेकर नौकरी तक में मान्य होंगे। 


लखवऊ । UP board result 2020 : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 का परिणाम 27 जून को एक साथ घोषित होगा। यूपी बोर्ड  हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का रिजल्ट यूपी बोर्ड मुख्यालय पर शनिवार को दोपहर 12.30 बजे जारी होगा। इसकी सारी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। यह परिणाम दिल्ली में भी रफी मार्ग आइएनएस बिल्डिंग से भी उसी समय जारी होगा। स्टूडेंट्स रिजल्ट जारी होने के बाद यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in और upresults.nic.in पर देख सकेंगे।


यूपी बोर्ड ने इस वर्ष 10वीं की परीक्षा 18 फरवरी 2020 से 3 मार्च 2020 के मध्य सफलता पूर्वक पूरी कराई थी, जबकि 12वीं की परीक्षा 18 फरवरी 2020 से 6 मार्च 2020 के बीच कराई गई थी।परीक्षा में 56 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिसमें हाईस्कूल के 30,22,607 परीक्षार्थी और इंटरमीडिएट के 25,84,511 परीक्षार्थी थे। इन परीक्षार्थियों के लिए प्रदेश भर में 7784 परीक्षा केंद्र बनाए गए। प्रत्येक परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इस बार बोर्ड परीक्षाओं की निगरानी के लिए प्रदेश भर में कुल 19 लाख कैमरे लगाए गए। इसके साथ ही इस परीक्षा के लिए 1.88 लाख कक्ष निरीक्षक नियुक्त किये गए। इन्हें परीक्षा केंद्र पर अपने पहचानपत्र और आधार कार्ड के साथ ड्यूटी करने को कहा गया था।


परीक्षा में पहले से ज्यादा बरती गई सख्ती : यूपी बोर्ड के अनुसार, इस बार परीक्षा में पहले से ज्यादा सख्ती बरती गई। सभी परीक्षा केंद्रों को सीसीटीवी कैमरा, वॉयस रिकॉर्डर, ब्रॉडबैंड, राउटर जैसी तकनीकों से लैस किया गया था। हर जिले में एक मॉनिटरिंग सेल बनाया गया था, जिसे लखनऊ में शिक्षा निदेशक के कार्यालय से जोड़ा गया था। पूरी परीक्षा स्पेशल टास्क फोर्स, जिलाधिकारी और पुलिस की देखरेख में संपन्न कराई गई।


रंगीन उत्तर पुस्तिकाओं का उपयोग : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में इस बार परीक्षा की कॉपियों को चार रंगों में बनवाई थी। ये कॉपियां नीला, पीला, हरा और गुलाबी रंग की थीं। इसके साथ ही बोर्ड परीक्षा की कॉपियों में क्रमांक भी दर्ज किये गए थे। इसका उद्देश्य परीक्षा को नकलविहीन बनाना था। उत्तर पुस्तिकाओं में क्रमांक दर्ज होने से इन्हें बाहरी कॉपियों से बदला नहीं जा सका।

UP Board result : फर्स्ट डिवीजन वालों की संख्या बढ़ी, आधे से अधिक सेकेंड डिवीजन में पास


UP Board result : फर्स्ट डिवीजन वालों की संख्या बढ़ी, आधे से अधिक सेकेंड डिवीजन में पास


यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास करने वाले परीक्षार्थियों की संख्या इस बार और भी बढ़ गई है। जबकि द्वितीय और तृतीय श्रेणी में परीक्षा पास करने वालों की संख्या में कमी आई है। ससम्मान परीक्षा पास करने वाले परीक्षार्थियों में इस वर्ष गत वर्ष की तुलना में मामूली कमी आई है।


3.41 प्रतिशत ससम्मान हुए पास
इस बार इंटर की परीक्षा के लिए पंजीकृत 25,86,339 परीक्षार्थियों में से 24,84,479 परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से 18,54,099 परीक्षार्थियों को सफलता मिली है। सफल होने वाले इन परीक्षार्थियों में से 63,193 यानी 3.41 प्रतिशत ससम्मान पास हुए हैं। ससम्मान पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 0.05 प्रतिशत की मामूली कमी हुई है। पिछले वर्ष 3.46 प्रतिशत परीक्षार्थी ससम्मान पास हुए थे।


33.91 प्रतिशत प्रथम श्रेणी में पास
इंटर में सफलता पाने वाले 18,54,099 परीक्षार्थियों में से 6,28,734 परीक्षार्थियों ने प्रथम श्रेणी के साथ परीक्षा पास की है। यह संख्या कुल परीक्षार्थियों का 33.91 प्रतिशत है। प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास करने वालों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले 1.94 प्रतिशत बढ़ी है। 2019 में सफलता पाने वाले 16,47,919 परीक्षार्थियों में से 5,26,896 यानी 31.97 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने प्रथम श्रेणी के साथ परीक्षा पास की थी।


आधे से अधिक सेकेंड डिवीजन में पास
इंटर में पास हुए 18,54,099 परीक्षार्थियों में से 53.62 प्रतिशत परीक्षार्थियों को सेकेंड डिवीजन मिला है। सेकेंड डिवीजन से पास होने वाले परीक्षार्थियों की कुल संख्या 9,94,161 है। गत वर्ष की तुलना में इस श्रेणी में पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या में मामूली यानी 0.03 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले वर्ष परीक्षा में 16,47,919 परीक्षार्थियों में से 53.65 प्रतिशत को सेकेंड डिवीजन मिला था।


6.55 फीसदी को मिली तृतीय श्रेणी
इस वर्ष सिर्फ 6.55 प्रतिशत परीक्षार्थी ही तृतीय श्रेणी में सफल हुए हैं। इंटर में पास हुए 1854099 परीक्षार्थियों में से 121528 तृतीय श्रेणी में पास हुए हैं । तृतीय श्रेणी में पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 1.38 प्रतिशत कम हुई है। पिछले वर्ष 7.14 प्रतिशत परीक्षार्थी तृतीय श्रेणी में पास हुए थे।


2.51 प्रतिशत ग्रेस मार्क्स से पास
इस वर्ष 46,483 परीक्षार्थी ऐसे हैं, जिन्हें ग्रेस मार्क देकर पास किया गया है। यह संख्या परीक्षा में शामिल कुल परीक्षार्थियों का 2.51 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की तुलना में ग्रेस मार्क्स के साथ पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या कम हुई है। पिछले वर्ष 49,255 यानी 2.99 प्रतिशत परीक्षार्थी ग्रेस मार्क से पास हुए थे।