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Tuesday, September 22, 2020

आधा सत्र बीता विद्यालय खुलने पर अब भी संशय, आइए जानते हैं कि अभिभावकों की क्‍या है सोच?

आधा सत्र बीता विद्यालय खुलने पर अब भी संशय, 
आइए जानते हैं कि अभिभावकों की क्‍या है सोच? 

 
प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों का सत्र अप्रैल से शुरू होता है। विद्यार्थी स्कूल जाने लगते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते मार्च से ही सभी विद्यालय बंद हैं। पाठन-पाठन जैसे-तैसे ऑनलाइन संचालित करने की कोशिश हो रही है। आधा सत्र बीत जाने के बाद भी विद्यालय खुलने को लेकर असमंजस की स्थिति है।


बोले डीआइओएस, शासन से कोई निर्देश नहीं मिला है

हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से कक्षा नौ से 12वीं तक के स्कूल खोलने का निर्देश हो चुका है। इस मामले में राज्य अपने यहां की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने को स्वतंत्र हैं। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि अभी शासन से कोई निर्देश नहीं मिला है। समीक्षा के बाद जो आदेश आएगा उसके अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उसमें भी बिना अभिभावक की अनुमति के कोई भी विद्यार्थी स्कूल नहीं आ सकेंगे।


स्‍कूल प्रबंधन का कहना है कि निर्देश मिलने पर खुलेंगे स्‍कूल

इस संबंध में स्कूलों का कहना है कि उनकी पूरी तैयारी है। जैसे निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार स्कूल खोले जाएंगे। संक्रमण से बचाव के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे। महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की प्रधानाचार्य सुष्मिता कानूनगो ने बताया कि 22 से 30 सितंबर तक कम्पार्टमेंट परीक्षा कराई जाएगी। इस बीच विद्यालय नहीं खुलेगा। उसके बाद यदि निर्देश मिलेगा तो बोर्ड की परीक्षा वाले बच्चों को बुलाया जाएगा। खासकर प्रायोगिक कक्षाओं के लिए। बाकी विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई करते रहेंगे।


इन स्‍कूलों की प्रधानाचार्यों का यह कहना है

श्री महाप्रभु पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य रविंद्र बिरदी ने भी कहा कि ऑनलाइन कक्षाएं चलती रहेंगी। जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों को विद्यालय बुलाया जाएगा। केपी गर्ल्‍स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य अमिता सक्सेना ने बताया कि निर्देश आने पर स्कूल खुलेंगे। कर्नलगंज इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अजय कुमार ने बताया कि विद्यालय में शिक्षक नियमित आ रहे हैं। शासन का जैसा निर्देश मिलेगा उसके अनुसार कक्षाएं चलाई जाएंगी।


आइए जानते हैं कि अभिभावकों की क्‍या है सोच

शहर में लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। इसे लेकर अभिभावक चिंतित हैं। वे अपने बच्चों को अभी स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई जैसे चल रही है, वही पर्याप्त है। मेंहदौरी कालोनी की कविता कहती हैं कि मेरा बेटा कक्षा 11वीं में पढ़ता है। ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। अभी संक्रमण को देखते हुए हम बच्चे को स्कूल नहीं भेज सकते। घर में ही रहना सुरक्षित है। इसी प्रकार नैनी की रहने वाली सुषमा पांडेय बेटे की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। हालांकि वह उतनी प्रभावी नहीं है लेकिन कोरोना वायरस का खतरा भी नहीं मोल ले सकते। अभी घर में ही रहना ठीक है। जल्दबाजी कर के मुसीबत नहीं मोल लेंगे।

Saturday, September 19, 2020

यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट वाणिज्य में अब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू होगा बदलाव

यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट वाणिज्य में अब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू होगा बदलाव



उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के इंटरमीडिएट वाणिज्य में भी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम लागू हो गया है। नए शैक्षिक सत्र की कक्षा 11 में नए पाठ्यक्रम से पढ़ाई शुरू होगी। बता दें कि कुछ माह पहले ही अंग्रेजी विषय में भी एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अपनाया गया था और कक्षा नौ से पढ़ाई शुरू हो चुकी है, जबकि वाणिज्य वर्ग की पढ़ाई अगले सत्र से होगी। शासन ने वाणिज्य वर्ग में पाठ्यक्रम बदलने पर मुहर लगा दी है।


यूपी बोर्ड में कक्षा 9 से 12वीं तक की पढ़ाई एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर हो रही है। कई विषयों में पहले ही यह पाठ्यक्रम लागू है तो अन्य विषयों में बोर्ड प्रशासन बदलाव करा रहा है। इस वर्ष हाईस्कूल में अंग्रेजी, व इंटर में अंग्रेजी व वाणिज्य विषय का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी की तर्ज पर किया गया है। इसका प्रस्ताव काफी समय पहले भेजा गया था, कक्षा 9 व 11 के अंग्रेजी पाठ्यक्रम में बदलाव हो चुका है।

अब शासन ने वाणिज्य वर्ग में पाठ्यक्रम बदलने पर मुहर लगा दी है। असल में, वाणिज्य वर्ग में रेगुलेशन में संशोधन होना था इसलिए शासन के निर्देश का इंतजार किया जा रहा था। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि इस वर्ष पंजीकरण कार्य पूरा हो रहा है और पढ़ाई चल रही है इसलिए वाणिज्य वर्ग का नया पाठ्यक्रम नए सत्र से लागू होगा।


पहले का वाणिज्य पाठ्यक्रम

एक अनिवार्य विषय : हिंदी या सामान्य हिंदी
बहीखाता व लेखाशास्त्र
व्यापारिक संगठन व पत्र व्यवहार

निम्न में से कोई दो विषय
अर्थशास्त्र तथा वाणिज्य भूगोल
अधिकोषण तत्व
औद्योगिक संगठन
गणित तथा प्रारंभिक सांख्यिकी
कंप्यूटर
बीमा सिद्धांत एवं व्यवहार
मानविकी वर्ग के विषयों में से कोई एक विषय
क्रम एक अर्थशास्त्र व वाणिज्य भूगोल लेने वाले छात्र मानविकी वर्ग से अर्थशास्त्र विषय नहीं ले सकेंगे।
क्रम पांच कंप्यूटर विषय लेने वाले छात्र मानविकी वर्ग से कंप्यूटर विषय नहीं ले सकेगा।


अब ये पाठ्यक्रम
अनिवार्य विषय
1. सामान्य हिंदी
2. व्यवसाय अध्ययन
3. लेखाशास्त्र

ऐच्छिक विषय निम्न में से कोई दो लेने होंगे
1. अर्थशास्त्र
2. अंग्रेजी
3. गणित
4. कंप्यूटर

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

 
प्रयागराज : माध्यमिक शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के लिए सिर्फ प्रयागराज में विभाग को करीब 40 लाख रुपये की जरूरत है। करीब दो महीने पहले भेजे गए 3732 शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र का सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालयों से नहीं हो सका है। विश्वविद्यालयों ने प्रपत्रों की जांच के लिए शुल्क मांगा है।

‘अनामिका’ प्रकरण सामने आने के बाद सभी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रपत्रों की जांच कर संबंधित विश्वविद्यालयों को भी सत्यापन के लिए भेजा गया है। डीआइओएस कार्यालय के पास सत्यापन शुल्क के नाम पर कोई भी बजट न होने से यह कार्य अभी अधर में है। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि जनपद में 378 राजकीय विद्यालय के शिक्षक हैं, इनमें 250 महिला व 128 पुरुष हैं। वित्तपोषित कॉलेजों के कुल 3286 अध्यापक हैं, इनमें 809 महिला व 2477 शिक्षक हैं। 68 संस्कृत विद्यालयों के भी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने के लिए विश्वविद्यालयों के पास भेजा गया है।


सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक डिग्री के सत्यापन के लिए 500 रुपये, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वद्यिालय में 500 रुपये, आइआइटी दिल्ली में 1000 रुपये, भारतीय खेल प्राधिकरण में दो हजार रुपये शुल्क देने पर ही डिग्री का सत्यापन संभव है।

Thursday, September 17, 2020

यूपी : नई शिक्षा नीति के लिए 7 फोकस ग्रुप का गठन

नई शिक्षा नीति, 2020 : स्कूलों के विद्यार्थी भी करेंगे इंडस्ट्री इंटर्नशिप, अंतर-विषयी पढ़ाई पर होगा जोर

 यूपी : नई शिक्षा नीति के लिए 7 फोकस ग्रुप का गठन


नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सात फोकस ग्रुप का गठन कर दिया है। ये समूह पाठ्यक्रम, शिक्षकों के प्रशिक्षण, स्कूल प्रबंधन, सबके लिए शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और शिक्षा में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने जैसे विषयों पर प्रस्ताव तैयार करेंगे। नीति के क्रियान्वयन के लिए बनी स्टीयरिंग कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने निर्देश दिए कि ये वर्किंग ग्रुप यदि चाहें तो बाहरी विशेषज्ञों की मदद ले सकते हैं।बैठक में नीति के कई पहलुओं पर चर्चा हुई और अलग-अलग समूहों का गठन किया गया। इन समूहों में विभागीय अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। सभी विषयों पर विस्तार के चर्चा हुई और तय किया गया कि ये फोकस ग्रुप एक हफ्ते में बैठक कर रूपरेखा तैयार करेंगे और स्टीयरिंग कमेटी की बैठक एक हफ्ते बाद फिर होगी। 


इन फोकस ग्रुप का हुआ गठन

1-पाठ्यक्रम व शिक्षाशास्त्र-सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष अशोक गांगुली, उर्वशी साहनी, बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह, जेडी भगवती सिंह, मशिप के सचिव दिव्यकांत शुक्ला व विशेष सचिव आर्यका अखौरी

 2-मूल्यांकन व आकलन, परीक्षा रिफार्म - पूर्व परीक्षा नियंत्रक पवनेश कुमार, दिव्यकांत शुक्ल, जेडी प्रदीप कुमार, विशेष सचिव जय शंकर दुबे 

3-शिक्षकों के क्षमता संवर्धन व भर्ती-पवनेश कुमार, राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान की निदेशक ललिता प्रदीप, चयन बोर्ड की सचिव र्कीति गौतम, सांत्वना तिवारी, जेडी अजय कु सिंह, डीडी विकास श्रीवास्तव, राजू राना, कुमार राघवेन्द्र सिंह

4-शिक्षा में टेक्नोलॉजी- एकेटीयू के कुलपति विनय पाठक, एचसीएल फाउण्डेशन के ऑपरेशन हेड योगेश कुमार, विवेक नौटियाल, सुधीर कुमार, आर्यका अखौरी

5-कौशल व कॅरिअर- एनआईओएस के पूर्व अध्यक्ष महेश चन्द्र पंत, एनएसडीसी के पूर्व सीईओ जयंत कृष्णा, कॅरिअर काउंसिलर अमृता दास, एडी मंजू शर्मा, हरवंश सिंह, बृजेश मिश्र, कमलेश तिवारी, उदयभानु त्रिपाठी

6-विद्यार्थी सपोर्ट सिस्टम- उर्वशी साहनी, ममता अग्रवाल, भगवत प्रसाद पटेल, एमपी सिंह, उदयभानु त्रिपाठी

7-स्कूल मैनेजमेंट सिस्टम व निजी निवेश- अशोक गांगुली, संध्या तिवारी, पूर्व सचिव बेशिप रूबी सिंह, ललिता प्रदीप, मनोज द्विवेदी, प्रेम चन्द्र यादव, जय शंकर दुबे


लखनऊ : माध्यमिक स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को भी अब इंडस्ट्री में इंटर्नशिप कराई जाएगी, ताकि वे स्वरोजगार के लिए प्रेरित हो सकें। हर दो से तीन महीने में 10 दिन बैगलेस होंगे। विद्यार्थी इस दौरान बिना बस्ते के स्कूल आएंगे और इंडस्ट्री में जाकर ट्रेनिंग लेंगे। वहीं वोकेशनल एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। तनाव रहित, खेल-खेल में और खुद प्रयोग कर विद्यार्थी सीखें, इस पर जोर दिया जाएगा।


नई शिक्षा नीति, 2020 को लागू करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला की अध्यक्षता में बनाई गई स्टियरिंग कमेटी की बुधवार को हुई बैठक में कई प्रस्तावों पर विचार किया गया और इन्हें लागू कराने के लिए रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी। माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों की करियर काउंसिलिंग भी की जाएगी। सरकारी व सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में ई-लर्निंग को और बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। शिक्षकों के प्रशिक्षण और स्कूल मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थी अपने कोर्स के साथ अन्य मनपसंद कोर्स भी आसानी से चुन सकेंगे। अंतर-विषयी पढ़ाई को बढ़ावा दिया जाएगा।

Sunday, September 13, 2020

कोरोना के चलते यूपी बोर्ड परीक्षा तैयारियों पर लगा ग्रहण

 कोरोना के चलते यूपी बोर्ड परीक्षा तैयारियों पर लगा ग्रहण

 
शैक्षिक सत्र आधा सत्र बीत रहा है, अभी कॉलेजों में प्रवेश चल रहा है। उत्तर प्रदेश माध्यमित शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के 27 हजार से अधिक संबद्ध कॉलेजों में कक्षा 9 व 11 में पंजीकरण और हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के परीक्षा फार्म भरे जाने से इम्तिहान की तैयारियां अधर में हैं। वजह, परीक्षार्थियों की संख्या तय नहीं है। जुलाई माह से चल रहे प्रवेश में छात्र-छात्राओं की संख्या पिछले वर्षों की अपेक्षा काफी कम है। इसीलिए पंजीकरण की तारीखें दो बार बढ़ाई जा चुकी हैं, फिर भी तय नहीं है कि अपेक्षित छात्र-छात्राएं प्रवेश ले लेंगे। 


यूपी बोर्ड में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं कराने का तय शेड्यूल रहा है। मुख्यालय में उसी के अनुसार वर्षभर कार्य चलता रहता है। सितंबर माह में आमतौर पर सभी कालेजों से आधारभूत सूचनाएं मांगी जाती रही हैं, ताकि उसी के अनुसार परीक्षा केंद्र निर्धारण किया जा सके। 2021 की परीक्षा के लिए अभी शुरुआत भी नहीं हो सकी है। यह जरूर है कि बोर्ड सचिव ने पिछले माह हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा कराने का अनुमानित माह घोषित किया है। उसके बाद से सारी प्रक्रिया ठप है। अक्टूबर में परीक्षा केंद्र निर्धारण नीति और नवंबर में केंद्र निर्धारण का कार्य पूरा होता रहा है।


अभी कंपार्टमेंट परीक्षा पर असमंजस : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर परीक्षा 2020 में एक विषय में अनुत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षा होनी है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा चुके हैं साथ ही शासन को परीक्षा तारीख तय करने के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया है, अब तक तारीख का इंतजार हो रहा है।

तो दोगुने हो जाएंगे परीक्षा केंद्र : 2021 की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा में यदि पिछले वर्ष की तरह ही परीक्षार्थी आवेदन करते हैं तो परीक्षा केंद्रों की तादाद दोगुनी हो जाएगी। शासन ने कुछ दिन पहले कोविड-19 को देखते हुए इस संबंध में सूचना मांगी थी। उसमें कहा गया कि पिछले वर्ष 7783 केंद्रों पर परीक्षा कराई गई थी, शारीरिक दूरी का अनुपालन करने में केंद्रों की संख्या दोगुनी करनी होगी।

इस माह के अंत तक पंजीकरण : यूपी बोर्ड प्रशासन फिलहाल कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश व परीक्षा फार्म भरने में जुटा है। इस माह के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। उसके बाद ही परीक्षा की तैयारी शुरू होगी। वहीं, पढ़ाई ऑनलाइन कराई जा रही है।

Saturday, September 12, 2020

यूपी के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए हिन्दी में बनाएंगे वीडियो

यूपी के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए हिन्दी में बनाएंगे वीडियो

 
अब माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए भी वीडियो बनाएंगे। इसके लिए एनसीईआरटी विषय और पाठ के नाम बताएगा और उसके मुताबिक विभाग शिक्षकों को चयनित कर वीडियो बना कर भेजेगा। इसे पीएम ई-विद्या चैनल पर चलाया जाएगा। अभी तक यूपी के शिक्षकों के वीडियो यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए ही प्रसारित किए जा रहे हैं। 



हिन्दी में वीडियो बनाने के लिए यूपी से साधा संपर्कएनसीईआरटी लॉकडाउन में हर कक्षा के लिए ई-विद्या चैनल शुरू किया है और इस पर कक्षावार वीडियो का प्रसारण होता है। ये चैनल निशुल्क हैं और पूरे देश में प्रसारित किए जा रहे हैं। हिन्दी पट्टी के प्रदेशों के लिए पाठों के वीडियो हिन्दी में बनवाने के लिए एनसीईआरटी ने यूपी से संपर्क साधा है। दरअसल, ये ख्याल उन्हें यूपी के वीडियो देख कर आया है। 


लॉकडाउन के दौरान यूपी बोर्ड ने दूरदर्शन व स्वयंप्रभा (अब पीएम ई विद्या) चैनल पर स्लॉट लेकर प्रसार शुरू किया। इस चैनल पर वीडियो चलाने के लिए एनसीईआरटी का अनुमोदन लेना पड़ता है। इन वीडियो को देखने के बाद ही एनसीईआरटी ने यूपी से संपर्क से साधा।860 वीडियो एनसीईआरटी ने पास किएयूपी ने लॉकडाउन के दौरान ही वीडियो बनवाने की शुरुआत की और हजारों की संख्या में शिक्षकों ने वीडियो भेजे। इनमें से 860 वीडियो एनसीईआरटी ने प्रसारण के लिए पास कर दिए। 


निदेशालय स्तर पर एक टीम का गठन किया गया है जो वीडियो का परीक्षण कर एनसीईआरटी भेजती है या रिजेक्ट करती है। वीडियो बनाने वाले 134 शिक्षकों को शिक्षक दिवस के मौके पर ई प्रमाणपत्र भी दिए गए।