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Sunday, July 26, 2026

बदलते तबादला-समायोजन के नियम से पढ़ाई प्रभावित, हाईकोर्ट, आदेशों में संशोधन व आपत्तियों के बीच उलझी प्रक्रिया, शिक्षक असमंजस में, स्कूलों की पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित

बदलते तबादला-समायोजन के नियम से पढ़ाई प्रभावित, हाईकोर्ट, आदेशों में संशोधन व आपत्तियों के बीच उलझी प्रक्रिया, शिक्षक असमंजस में, स्कूलों की पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित


लखनऊः प्रदेश में राजकीय माध्यमिक और बेसिक विद्यालयों में शिक्षकों के स्थानांतरण और समायोजन की प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र से ही उलझी हुई है। जून से शुरू हुई प्रक्रिया में आदेशों में संशोधन करना पड़ा। अलग-अलग मामलों में शिक्षक अदालत भी पहुंचे। इससे विभाग को अपने आदेशों में बदलाव करना पड़ा। इसका असर स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी दिखाई देने लगा है।


माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण नीति-2017 के तहत वर्ष 2026-27 के लिए सरप्लस और विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादले किए हैं। विभाग ने 271 सरप्लस शिक्षकों का स्थानांतरण किया है। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों के भी तबादले किए गए हैं। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग में विशेष परिस्थितियों के आधार पर करीब छह हजार शिक्षकों ने स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। समायोजन को लेकर जारी आदेशों में बदलाव और आपत्तियों के कारण पूरी प्रक्रिया लंबी खिंचती जा रही है। 

शिक्षक संगठनों का कहना है कि लगातार बदल रहे आदेशों से शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई शिक्षक अब तक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उनकी अंतिम तैनाती कहां होगी। कुछ स्कूलों में शिक्षक कार्यमुक्त होने की प्रतीक्षा में हैं, जबकि कई विद्यालयों में नए शिक्षक अभी तक नहीं पहुंचे हैं। इसका असर नियमित पढ़ाई, कक्षाओं के संचालन और विषयवार शिक्षण पर पड़ रहा है।

शिक्षक नेताओं का कहना है कि स्थानांतरण और समायोजन जैसी प्रक्रिया स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए। यदि आदेश जारी होने के बाद बार-बार संशोधन होंगे और मामले अदालत तक पहुंचेंगे तो सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की पढ़ाई का होगा। शिक्षकों का यह भी कहना है कि स्थानांतरण और समायोजन जैसी प्रक्रियाएं शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले पूरी हो जानी चाहिए। सत्र शुरू होने के बाद लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया से स्कूलों में अनिश्चितता बढ़ती है और इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। 

दूसरी ओर, विभाग का कहना है कि शिक्षक संगठनों की आपत्तियों, आरटीई के प्रविधानों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियम सम्मत बनाने के लिए आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि सभी आपत्तियों का निस्तारण कर जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 10 अगस्त 2026 के लिये दिशा-निर्देश जारी

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 10 अगस्त 2026 के लिये दिशा-निर्देश


Saturday, July 25, 2026

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीनस्थ प्रदेश के मण्डलीय एवं जनपदीय कार्यालयों में विभाग द्वारा पदस्थापित कर्मचारियों के अतिरिक्त किसी अन्य कर्मचारियों को सम्बद्ध न किये जाने के सम्बन्ध में।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीनस्थ प्रदेश के मण्डलीय एवं जनपदीय कार्यालयों में विभाग द्वारा पदस्थापित कर्मचारियों के अतिरिक्त किसी अन्य कर्मचारियों को सम्बद्ध न किये जाने के सम्बन्ध में


माध्यमिक में सरप्लस शिक्षकों का नए सिरे से होगा चिह्नांकन, पुराना आदेश निरस्त कर फिर से जारी किया जाएगा समायोजन आदेश

माध्यमिक में सरप्लस शिक्षकों का नए सिरे से होगा चिह्नांकन, पुराना आदेश निरस्त कर फिर से जारी किया जाएगा समायोजन आदेश

लखनऊ। प्रदेश के ऐसे राजकीय माध्यमिक विद्यालय जहां पर कक्षा छह से कक्षा आठ तक की कक्षाएं चल रही हैं, वहां सरप्लस शिक्षकों की नए सिरे से सूची बनाई जाएगी। पुराने आदेश को निरस्त करते हुए नए सिरे से शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के मानकों के आधार पर सूची बनाई जाएगी। अब 30 छात्रों पर एक शिक्षक का मानक लेते हुए नए सिरे से सूची बनेगी।

माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से इसके लिए आदेश जारी किया गया है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों को चिह्नित कर उन्हें दूसरे स्कूलों में तबादले की प्रक्रिया चल रही है। कई राजकीय माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां कक्षा छह से इंटर तक की पढ़ाई होती है। वहीं कई कक्षा नौ से इंटर तक के हैं। ऐसे विद्यालय जहां कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं चल रही हैं, वहां आरटीई एक्ट के मानकों के अनुसार सरप्लस की नई सूची बनाई जाएगी।

अभी तक 45 छात्र पर एक शिक्षक का मानक मानते हुए सरप्लस शिक्षकों की सूची बनाई गई थी। इसे लेकर मामला हाईकोर्ट चला गया है। इसमें सुनवाई चल रही है। वहीं विभाग अब वर्ष 2009 के आरटीई एक्ट के तहत 30 छात्र पर एक शिक्षक के मानक के अनुसार सूची बनेगी। ऐसे में सरप्लस शिक्षकों की संख्या बढ़कर करीब 600 होने की संभावना है।

वहीं कक्षा नौ व कक्षा 10 में 59 छात्र पर एक शिक्षक और कक्षा 11 व 12 में 74 छात्र पर एक शिक्षक का मानक लागू रहेगा। क्योंकि इन कक्षाओं में आरटीई एक्ट लागू नहीं है। ऐसे में इनकी पुरानी नियमावली ही चलेगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा निदेशक को इसके अनुसार कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। 


Thursday, July 23, 2026

प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के 3.50 लाख शिक्षकों को भी मिलेगा कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ, शिक्षकों के चिह्नांकन और पंजीकरण कराने का निर्देश जारी

प्रदेश के  वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के 3.50 लाख शिक्षकों को भी मिलेगा कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ, शिक्षकों के चिह्नांकन और पंजीकरण कराने का निर्देश जारी 

प्रधानाध्यापक करेंगे की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आवेदन का सत्यापन

लखनऊ। राजकीय और एडेड विद्यालयों के बाद अब प्रदेश के 2500 से अधिक वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के करीब 3.50 लाख शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। शासन ने इसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को शिक्षकों के चिह्नांकन और पंजीकरण कराने का निर्देश दे दिया है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से फरवरी 2026 में राजकीय और एडेड विद्यालय में यह सुविधा शुरू करते हुए कहा गया था कि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों का कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है। इसलिए इनके चिह्नह्मांकन के लिए अलग से आदेश जारी किया जाएगा। इसी क्रम में विभाग के विशेष सचिव उमेश चंद्र ने जारी आदेश में कहा है कि वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के लिए विकसित पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा।

आदेश के मुताबिक शिक्षक खुद और अपने आश्रित का पोर्टल पर आधार कार्ड के अनुसार ब्योरा दर्ज करेंगे। उनके आवेदन का प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य सत्यापन कर अग्रसारित करेंगे। इसमें वे शिक्षक की नियुक्ति नियमानुसार होने और कार्यरत होने का परीक्षण करेंगे। साथ ही संबंधित शिक्षक के किसी कारण से विद्यालय से अलग होने की स्थिति में प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापक डीआईओएस को अवगत कराएं। ऐसे शिक्षकों को योजना से अलग रखा जाएगा।

प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य के आवेदन को प्रमाणित करने के बाद अंतिम अनुमोदन डीआईओएस द्वितीय करेंगे। डीआईओएस सत्यापन आवेदन स्वीकृत करेंगे। इस क्रम में माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।



Tuesday, July 21, 2026

E-KYC में फंसे शिक्षकों के कैशलेस चिकित्सा कार्ड, शिक्षकों का डेटा फॉरवर्ड करने में बीएसए व बीईओ भी कर रहे देरी

E-KYC में फंसे शिक्षकों के कैशलेस चिकित्सा कार्ड, शिक्षकों का डेटा फॉरवर्ड करने में बीएसए व बीईओ भी कर रहे देरी

4.19 लाख से सापेक्ष 2.74 लाख का हुआ है आवेदन स्वीकृत

लखनऊ। प्रदेश में बेसिक व माध्यमिक के शिक्षकों के लिए सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का उद्घाटन कर दिया गया है। लगभग 150 शिक्षकों ने इसका लाभ भी ले लिया, किंतु अभी भी काफी संख्या में शिक्षकों के कैशलेस चिकित्सा कार्ड नहीं बन पाए हैं। शिक्षकों के अनुसार ई-केवाईसी करने में दिक्कत आ रही है। वहीं बीईओ भी कुछ जगह पर शिक्षकों का डेटा फॉरवर्ड नहीं कर रहे हैं।


बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से लंबी कवायद के बाद शिक्षकों के लिए सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना शुरू की गई है। हालांकि अभी भी इसके लिए छूटे हुए शिक्षकों के रजिस्ट्रेशन व डेटा अपडेशन की प्रक्रिया चल रही है। जानकारी के अनुसार बेसिक में 4.19 लाख से अधिक शिक्षकों के सापेक्ष 2.74 लाख शिक्षकों का आवेदन अप्रूव हुआ है। 53 हजार से ज्यादा का आवेदन बीईओ स्तर पर और 34 हजार से अधिक बीएसए स्तर पर लंबित है।

शिक्षकों के स्तर पर 38 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। 18 हजार से अधिक के आवेदन बीएसए व बीईओ ने सुधार के लिए वापस किए हैं। शिक्षकों ने बताया कि ई-केवाईसी करने में दिक्कत आ रही है। कुशीनगर, हरदोई, सीतापुर, फतेहपुर आदि जिलों में ई-केवाईसी न होने से डेटा नॉट फाउंड लिखकर आ रहा है। जब वे ई-केवाईसी करते हैं तो परिवार के सदस्यों से जुड़ी जानकारी पूरी नहीं आ रही है। इसमें रसोइयों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। जिनका पहले से आयुष्मान कार्ड बना है। सीएमओ कार्यालय से उनके कार्ड भी डिसेबल नहीं किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ विभाग का कहना है कि यह दिक्कत साइट की है।