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Wednesday, October 7, 2020

UGC Fake Universities List 2020 : यूजीसी ने जारी की फर्जी 24 विश्वविद्यालयों की सूची, यहां चेक करें पूरी लिस्ट

UGC Fake Universities List 2020 : यूजीसी ने जारी की फर्जी 24 विश्वविद्यालयों की सूची, यहां चेक करें पूरी लिस्ट।

UGC Fake Universities List 2020 : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची 2020 जारी की है। इस लिस्ट में देश भर के 24 विश्वविद्यालयों को रखा गया है, जिन्हें फर्जी करार दिया गया है। आयोग के अनुसार इन विश्वविद्यालयों को कोई भी डिग्री प्रदान करने का अधिकार नहीं है। आयोग द्वारा इस लिस्ट में दिल्ली में कुल 7 और उत्तर प्रदेश में 8 विश्वविद्यालयों को फर्जी घोषित किया गया है। वहीं इनके अलावा कर्नाटक से 2 और केरल से एक यूनिवर्सिटी को फर्जी घोषित किया गया है, जबकि महाराष्ट्र से 2 और वेस्ट बंगाल की एक यूनिवर्सिटी फर्जी बताई जा रही है। इस संबंध में यूजीसी ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें लिखा है कि यह सभी यूनिवर्सिटीज गैर कानूनी रूप से संचालित हो रहे हैं। 


पढ़ें किस राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की कौन सी यूनिवर्सिटी है फर्जी

दिल्ली
▪️कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, दरियागंज, दिल्ली
▪️यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, दिल्ली
▪️वॉकेशनल यूनिवर्सिटी, दिल्ली
▪️ए.डी.आर सेंट्रिक जूरीडीकल यूनिवर्सिटी, ए.डी.आर हाउस, 8जे, गोपाल टॉवर, 25 राजेंद्र प्लेस, नई दिल्ली
▪️इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, नई दिल्ली
▪️विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट, इंडिया, रोजगार सेवा सदन, 672, संजय एंक्लेव, नई दिल्ली
▪️आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, विजय विहार, रिठाला, रोहिणी

कर्नाटक
▪️बडागानवी सरकार वर्ल्ड ओपन यूनिवर्सिटी एजूकेशन सोसाइटी, गोकाक, बेलगम

केरल
▪️सेंट जॉन यूनिवर्सिटी कृष्णाटम्

महाराष्ट्र
▪️राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर

पश्चिम बंगाल
▪️इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव मेडिसन. 80, चौरंगी रोड, कोलकाता
▪️इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव मेडिसन एंड रिसर्च, 8ए, डायमंड हार्बर रोड ब्यूटिच इन, ठाकुर पूकीर, कोलकाता

उत्तर प्रदेश
▪️वारणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
▪️महिला ग्राम विद्यापीठ/विश्वविद्यालय, प्रयाग
▪️गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग
▪️नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलैक्ट्रो काम्पलेक्स होम्योपैथी, कानपुर
▪️नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी अचलताल, अलीगढ़
▪️उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय, कोसी कलां, मथुरा
▪️महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन विश्वविद्यालय, प्रतापगढ़
▪️इंद्रप्रस्थ शिक्षा परिषद्, इंस्टीटूशनल एरिया, खोड़ा, मकनपुर, नोएडा

ओडिसा
▪️नव भारत शिक्षा परिषद्, अन्नपूर्णा भवन, शक्ति नगर, राउर केला
▪️नॉर्थ ओडिसा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, मयूरभंज

पुडुचेरी
▪️श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन

आंध्र प्रदेश
▪️क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी, गुंटूर

इसके अलावा यूजीसी ने नए शैक्षणिक सत्र के संबंध में निर्देश दिए हैं। इसके मुताबिक देश भर के विश्वविद्यालयों में 1 नवंबर, 2020 से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होगी।वहीं ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन पाठ्यक्रमों के लिए प्रथम वर्ष की कक्षाएं नवंबर 2020 में शुरू होंगी। बता दें कि इस बार कोविड-19 महामारी की वजह से नया शैक्षणिक लेट हो गया है। आमतौर पर जुलाई-अगस्त में शुरू होने वाला सत्र इस बार नवंबर में शुरू होगा। इसके अलावा महामारी की वजह से मार्च में होने वाली वार्षिक परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई थीं।

Saturday, September 5, 2020

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर अड़ा UGC लेकिन पढ़ाई पर राज्यों को देगा पूरी छूट

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर अड़ा UGC लेकिन पढ़ाई पर राज्यों को देगा पूरी छूट

 

नई दिल्ली: कोरोना संकटकाल में परीक्षाओं को लेकर छिड़ी लड़ाई खूब चर्चा में रही, जिसमें छात्रों के भविष्य को देखते हुए यूजीसी अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर अड़ गया था, लेकिन अब वह पढ़ाई को लेकर राज्यों के साथ ऐसा कोई टकराव नहीं रखना चाहता है। यही वजह है कि विश्वविद्यालयों पर पढ़ाई को लेकर कुछ भी नहीं थोपा जाएगा, बल्कि सभी को अपने स्तर पर इससे जुड़ा फैसला लेने की पूरी छूट दी जाएगी। वह छात्रों को जिस तरह से पढ़ाना चाहते है, उसका पूरा फैसला ले सकेंगे। यानी किन-किन छात्रों को क्लास में बुलाना है, किसे आनलाइन पढ़ाना चाहते है जैसे सारे निर्णय अब वह अपने स्तर पर करेंगे। हालांकि 30 फीसद कोर्स ऑनलाइन कराने का निर्देश दिया जा चुका है।



यूजीसी वैसे भी राज्यों और राज्य के विवि के साथ अब कोई नया विवाद नहीं खड़ा करना चाहता है। पढ़ाई को लेकर जो नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है, उनमें राज्यों को इससे जुड़ा पूरा फैसला लेने के लिए अधिकृत किया जाएगा।

Friday, September 4, 2020

परीक्षाओं के साथ विवि प्रवेश का काम भी रखें जारी, 30 सितंबर तक करानी है परीक्षाएं- यूजीसी

परीक्षाओं के साथ विवि प्रवेश का काम भी रखें जारी, 30 सितंबर तक करानी है परीक्षाएं- यूजीसी

 

नई दिल्ली: अनलॉक-4 आने के बाद शैक्षणिक संस्थानों के जल्द खुलने की उम्मीद के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों से इसकी तैयारी शुरू करने को कहा है। इसके तहत सितंबर में परीक्षाओं के साथ प्रवेश का काम भी पूरा करने को कहा है। यदि प्रवेश प्रक्रिया में ज्यादा वक्त लगने की संभावना है तो छात्रों को तदर्थ (प्रोविजनल) प्रवेश भी दिया जा सकता है जिसकी शेष प्रक्रिया बाद में पूरी हो सकेगी।


यूजीसी का मानना है कि प्रवेश प्रक्रिया यदि समय पर पूरी हो जाती है तो संस्थानों के खुलने के बाद तुरंत पढ़ाई शुरू हो सकेगी। यदि इसमें किसी तरह की देरी भी होती है तो छात्रों की ऑनलाइन सहित दूसरे माध्यमों से पढ़ाई शुरू कराई जा सकेगी। अभी प्रवेश प्रक्रिया अटके होने की वजह से इन छात्रों की पढ़ाई शुरू नहीं हो पा रही है। यूजीसी ने यह निर्देश उस समय दिया है जब सभी विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अपनी अंतिम वर्ष की परीक्षाएं करानी हैं।


 यूजीसी को बड़ी राहत इसलिए भी है क्योंकि वह पहले ही सभी विश्वविद्यालयों को 30 फीसद कोर्स की पढ़ाई ऑनलाइन कराने के निर्देश दे चुका है। ऐसे में संस्थानों के खुलने के बाद छात्रों को 70 फीसद कोर्स ही पढ़ाना होगा। यूजीसी ने यह निर्देश केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ साथ राज्य विश्वविद्यालयों को भी दिया है। साथ ही इससे जुड़ी सभी तैयारियों का ब्योरा भी मांगा है।

Wednesday, August 19, 2020

रद्द नहीं की जा सकतीं अंतिम वर्ष की परीक्षाएं -यूजीसी, परीक्षाएं कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

रद्द नहीं की जा सकतीं अंतिम वर्ष की परीक्षाएं -यूजीसी, परीक्षाएं कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

 
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि 30 सितंबर तक विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के छह जुलाई के उसके निर्देश कोई फरमान नहीं है, लेकिन राज्य बिना परीक्षाएं कराए डिग्री प्रदान करने का फैसला नहीं ले सकते।


यूजीसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आरएस रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ को बताया कि आयोग के निर्देश छात्रों के फायदे के लिए हैं क्योंकि विश्वविद्यालयों को परास्नातक पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश शुरू करने हैं और राज्य सरकारें यूजीसी के दिशानिर्देश निष्प्रभावी नहीं कर सकतीं।


 यूजीसी के छह जुलाई के दिशानिर्देश की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखते हुए पीठ ने कहा, मसला यह है कि अगर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने फैसला किया है कि हालात परीक्षाएं कराने के अनुकूल नहीं हैं तो क्या वे यूजीसी के निर्देशों को अस्वीकार कर सकते हैं। दूसरा मुद्दा यह है कि क्या यूजीसी राज्य सरकारों को निष्प्रभावी कर सकता है और विश्वविद्यालयों को निर्धारित तिथि पर परीक्षाएं कराने के लिए कह सकता है।


वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के दौरान मेहता ने पीठ को बताया कि राज्य समयसीमा बढ़ाने की मांग तो कर सकते हैं, लेकिन वे बिना परीक्षाएं कराए डिग्री प्रदान करने का फैसला नहीं ले सकते। उन्होंने दलील दी कि कोविड-19 राष्ट्रीय आपदा है और राज्य सरकारें यूजीसी को निष्प्रभावी नहीं कर सकतीं। पीठ ने कहा, यह ध्यान में रखना होगा कि छात्रों का कल्याण छात्र तय नहीं कर सकते, इस संबंध में फैसला संवैधानिक निकाय को लेना है। पीठ ने कहा, एक अन्य मसला यह है कि क्या आपदा प्रबंधन कानून के तहत राज्य फैसला ले सकते हैं और कह सकते हैं कि वे परीक्षाएं नहीं कराएंगे और छात्रों के पिछले प्रदर्शन के आधार पर परिणाम घोषित करेंगे। 


Tuesday, August 11, 2020

अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं तो डिग्री मान्य नहीं, UGC ने परीक्षाएं नहीं कराने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में बताया गलत

अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं तो डिग्री मान्य नहीं, UGC ने परीक्षाएं नहीं कराने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में बताया गलत

 
नई दिल्ली : राज्य विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद करने के दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार के फैसले को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सुप्रीम कोर्ट में गलत बताते हुए इसे नियमों का उल्लंघन बताया है। साथ ही कहा है कि यदि छात्रों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं कराई गईं तो उनकी डिग्रियों को मान्यता नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी का पक्ष सुनने के बाद मामले की सुनवाई 14 अगस्त तक के लिए टाल दी।


यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट से यह जानकारी भी साझा की कि देश के ज्यादातर विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने को तैयार हैं। साथ ही बताया कि बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षाएं करा भी चुके हैं। ऐसे में यदि कोई राज्य परीक्षाएं नहीं कराता है तो इससे शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। यूजीसी ने कहा कि कोरोना संक्रमण की स्थिति के मद्देनजर विश्वविद्यालयों को अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है।

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर तुषार मेहता ने कहा कि यूजीसी के नियमों में राज्य बदलाव नहीं कर सकते क्योंकि डिग्री प्रदान करने के लिए नियम निर्धारित करने का अधिकार सिर्फ यूजीसी को है। शीर्ष अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के छह जुलाई के दिशानिर्देश को चुनौती दी गई है। तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को दिल्ली और महाराष्ट्र के फैसले की सूचना देते हुए कहा कि उनके हलफनामों पर यूजीसी अपना जवाब दाखिल करेगा। वहीं, कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने दावा किया कि छह जुलाई के दिशानिर्देश न तो कानूनी तौर पर और न ही संवैधानिक तौर पर वैध हैं। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को उक्त याचिकाओं पर कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया था।

Saturday, August 8, 2020

अब स्नातक के आखिरी सेमेस्टर में रोजगार की ट्रेनिंग अनिवार्य


अब स्नातक के आखिरी सेमेस्टर में रोजगार की ट्रेनिंग अनिवार्य 


अब सामान्य डिग्री प्रोग्राम (बीए, बीकॉम, बीएससी) के आखिरी वर्ष के छात्रों को आखिरी सेमेस्टर में रोजगार की अनिवार्य ट्रेनिंग मिलेगी। यूजीसी ने सामान्य डिग्री प्रोग्राम के छात्रों के लिए पहली अप्रेंटिसशिप / इंटर्नशिप के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।


फिलहाल शुरुआत में यह ट्रेनिंग 20 क्रेडिट की होगी। हालांकि, विश्वविद्यालय चाहें तो इन क्रेडिट को बढ़ा सकेंगे। अप्रेंटिसशिप / इंटर्नशिप ट्रेनिंग में छात्र बहुविषयक (अपने पाठ्यक्रम से इतर) विषयों को चुन सकेंगे।


बीए, बीकॉम, बीएससी जैसे सामान्य डिग्री प्रोग्राम के छात्र जब स्नातक की डिग्री लेकर कैंपस से निकलते हैं तो उनके पास रोजगार कौशल नहीं होता है। एक अनुमान के मुताबिक, 2030 तक दुनियाभर में सबसे अधिक युवा भारत में होंगे। ऐसे में रोजगार की सबसे अधिक जरूरत होगी। इसी के मद्देनजर पहली अप्रेंटिसशिप / इंटर्नशिप दिशा-निर्देश तैयार किया गया है, ताकि बीए, बीएससी, बीकॉम प्रोग्राम के छात्र कॉलेज से अब बहुविषयक डिग्री लेकर निकल सकें। स्नातक डिग्री प्रोग्राम के आखिरी साल में अंतिम सेमेस्टर अप्रेंटिसशिप / इंटर्नशिप पर आधारित होगा।


इस दौरान उन्हें किसी भी विषय पर आधारित अप्रेंटिसशिप / इंटर्नशिप  करनी होगी। अप्रेंटिसशिप में उन्हें बाकायदा इंडस्ट्री की तरफ से वेतन मिलेगा। इसके अलावा इंटर्नशिप में स्टाइपेंड होगा। छात्र अपने भविष्य के आधार पर दोनों में से किसी एक को चुन सकेगा।


24 क्रेडिट वाले विषय में मॉस्टर डिग्री का मौका
च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के तहत स्नातक में अप्रेंटिसशिप / इंटर्नशिप के साथ जिस विषय में छात्र ने 24 क्रेडिट लिए होंगे, उसी में उसे स्नातकोत्तर प्रोग्राम (एमए, एमएसी,तकनीकी, व्यावसायिक आदि) की पढ़ाई का मौका भी मिलेगा। उदाहरण के रूप में यदि कोई छात्र अर्थशास्त्र में 24 क्रेडिट के साथ बीबीए ( लॉजिस्टिक्स अप्रेंटिसशिप ) किया हो तो वह अर्थशास्त्र में एमए, एमएससी पाठ्यक्रम में दाखिला ले सकेगा।

पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करना जरूरी
अप्रेंटिसशिप या इंटर्नशिप पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करना जरूरी होगा। असफल होने या अपूर्ण अप्रेंटिसशिप / इंटर्नशिप प्रशिक्षण के लिए परीक्षा में दोबारा बैठना अनिवार्य होगा। अप्रेंटिसशिप / इंटर्नशिप पाठ्यक्रम में छात्र द्वारा प्राप्त अंकों को सेमेस्टर और अंतिम ग्रेड शीट में दर्शाया जाएगा।


फिक्की, सीआईआई, वाणिज्यिक और गैर-वाणिज्यिक संगठन करेंगे मदद
शिक्षण संस्थानों में अप्रेंटिसशिप या इंटर्नशिप के लिए फिक्की, सीआईआई, वाणिज्यिक और गैर-वाणिज्यिक जैसे संगठन मदद करेंगे। इसके लिए बाकायदा विश्वविद्यालयों और इन संगठनों के बीच समझौता होगा। समझौते के तहत अप्रेंटिसशिप या इंटर्नशिप की सभी जानकारियां सार्वजनिक करनी होगी। उद्योग संगठनों को छात्रों को आखिरी में सर्टिफिकेट भी देना होगा।


स्नातक में 80 फीसदी लिखित पाठ्यक्रम
स्नातक कार्यक्रम में सामान्य डिग्री प्रोग्राम में अब सिर्फ 80 फीसदी पाठ्यक्रम लिखित रहेगा, जबकि 20 फीसदी अप्रेंटिसशिप या इंटर्नशिप पर आधारित क्रेडिट का होगा। इसी के आधार पर मॉर्क्सशीट में ये क्रेडिट भी जुड़ेंगे।