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Saturday, January 13, 2024

स्नातक की पाठ्यपुस्तक बारह भाषाओं में होंगी, यूजीसी ने पुस्तक लिखने के लिए इच्छुक लेखकों से मांगे आवेदन

स्नातक की पाठ्यपुस्तक बारह भाषाओं में होंगी, यूजीसी ने पुस्तक लिखने के लिए इच्छुक लेखकों से मांगे आवेदन

नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) 12 भारतीय भाषाओं में कला, विज्ञान, वाणिज्य और सामाजिक विज्ञान में स्नातक स्तर पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है।


यूजीसी चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने बताया कि हम राज्यों में नोडल विश्वविद्यालयों की पहचान कर रहे हैं,जो उन लेखकों की टीम बनाने की कवायद का समन्वय करेंगे जो भारतीय भाषाओं में उच्च गुणवत्ता वाली पाठ्यपुस्तकें लिख सकते हैं। यह प्रयास विश्वविद्यालयों में छात्रों को भारतीय भाषाओं में सीखने के अवसर प्रदान करने के राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्य के अनुरूप है। यूजीसी की ओर से विभिन्न विषयों में स्नातक (यूजी) स्तर के पाठ्यक्रमों के लिए 12 भारतीय भाषाओं में मूल पाठ्यपुस्तकें लिखने के लिए इच्छुक लेखकों/आलोचकों और उच्च शिक्षा संस्थानों के संकाय सदस्यों को इच्छा जाहिर करने को कहा है। 



कला, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के लेखकों के पास आयोग को स्वीकृति भेजने और उपलब्ध फॉर्म के माध्यम से अपनी रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) प्रस्तुत करने के लिए 30 जनवरी, 2024 तक का समय है।

Wednesday, January 11, 2023

एकसाथ दो डिग्री लेने से नहीं रोक सकते संस्थान, यूजीसी के निर्देश- माइग्रेशन व स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के नाम पर दाखिले में नहीं कर सकते आनाकानी

एकसाथ दो डिग्री लेने से नहीं रोक सकते संस्थान, यूजीसी के निर्देश- माइग्रेशन व स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के नाम पर दाखिले में नहीं कर सकते आनाकानी

नई दिल्ली : उच्च शिक्षण संस्थान अब एकसाथ दो डिग्रियों की पढ़ाई करने में बाधक नहीं बन सकते। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों को ऐसा तंत्र विकसित करने के लिए कहा है, जिसमें छात्र एकसाथ दो डिग्रियों की पढ़ाई कर सकें।


यूजीसी ने स्पष्ट कहा कि माइग्रेशन सर्टिफिकेट और स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के बिना दाखिला देने में संस्थान आनाकानी नहीं कर सकते। यदि किसी विद्यार्थी ने शिकायत की, तो संस्थान के खिलाफ कार्रवाई होगी। यूजीसी के संज्ञान में आया था कि विद्यार्थियों के इन प्रमाणपत्रों को संस्थान जमा करा लेते हैं, जिससे उन्हें अन्य कोर्स में दाखिला लेने में परेशानी होती है।

पिछले साल मिली थी एकसाथ दो डिग्री की सुविधा

यूजीसी सचिव पीके ठाकुर ने बताया, पिछले साल अप्रैल में एकसाथ दो पूर्णकालिक डिग्री पूरा करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके तहत कोई भी छात्र एकसाथ दो नियमित डिग्री, एक ऑनलाइन- एक नियमित और एक नियमित व एक ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग मोड से पढ़ाई कर सकता है।

इसके अलावा एक डिप्लोमा कोर्स और एक यूजी कार्यक्रम, दो मास्टर कोर्स या दो स्नातक कोर्स के संयोजन के साथ चयन करने की अनुमति भी मिली है।

डिजिलॉकर से सर्टिफिकेट का सत्यापन

केंद्र सरकार ने डिजिलॉकर के जरिये सर्टिफिकेट के सत्यापन की मंजूरी दी है। यहां सीबीएसई बोर्ड, प्रदेश शिक्षा बोर्ड, विश्वविद्यालय और कॉलेज अपने छात्रों के सर्टिफिकेट अपलोड कर सकते हैं। दाखिले के दौरान इसी डिजिलॉकर से उच्च शिक्षण संस्थान सर्टिफिकेट की जांच कर सकते हैं। हालांकि शिक्षण संस्थान अब भी छात्रों से सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज मांगते हैं।


निर्देश: एक साथ दो पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए व्यवस्था हो

नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों को अपने विधिक निकायों के जरिए ऐसी व्यवस्था तैयार करने को कहा है, जिससे छात्रों के लिये एक साथ दो पाठ्यक्रमों की पढ़ाई सुगम हो सके। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यह निर्देश ऐसे समय में आया है, जब यूजीसी ने विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) द्वारा स्थानांतरण प्रमाणपत्र या स्कूल परित्याग प्रमाणपत्र पर जोर दिए जाने के कारण पेश आने वाली परेशानियों पर संज्ञान लिया।

यूजीसी के सचिव पी. के. ठाकुर ने विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों को लिखे एक पत्र में कहा कि यूजीसी के संज्ञान में यह बात सामने आई है कि स्थानांतरण प्रमाणपत्र या स्कूल परित्याग प्रमाणपत्र पर जोर दिए जाने के कारण छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

Tuesday, January 18, 2022

कंपनियां नहीं चला सकतीं आनलाइन शैक्षिक कोर्स, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने छात्रों को किया सतर्क

कंपनियां नहीं चला सकतीं आनलाइन शैक्षिक कोर्स, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग  ने छात्रों को किया सतर्क


नई दिल्ली : कोरोना काल में जब स्कूल-कालेज बंद पड़े हैं और छात्रों के पास पढ़ाई का एक मात्र जरिया आनलाइन ही बचा है। ऐसे में आनलाइन शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़े भी बढ़े हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों को इसे लेकर सतर्क किया और सलाह दी है कि बगैर मान्यता और संबद्धता को जांचे किसी भी आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में दाखिला न लें। खासकर आनलाइन पढ़ाई करा रही शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी निजी कंपनियों को लेकर बिल्कुल सतर्क रहें, क्योंकि इन्हें ऐसे कोर्स चलाने की अनुमति नहीं है।


उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए निर्धारित किए गए आनलाइन कोर्स के नियमों का हवाला देते हुए यूजीसी ने साफ किया है कि इन कोर्स को चलाने की अनुमति फिलहाल उन्हीं विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को है जो यूजीसी के मानकों को पूरा करते है। इन कोर्स को किसी दूसरे संस्थानों या निजी कंपनियों को संचालित करने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे में शिक्षा से जुड़ी निजी क्षेत्र की जो भी आनलाइन कंपनियां छात्रों को इस तरह के कोर्स या प्रोग्राम में दाखिला देने का आफर दे रही हैं, वे बिल्कुल गलत है। ऐसी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इनकी गतिविधियों पर नजर भी रखी जा रही है।


यूजीसी के मुताबिक आनलाइन पढ़ाई कराने वाली निजी क्षेत्र से जुड़ी इन कंपनियां की ओर से आनलाइन और दूरस्थ माध्यमों से संचालित होने वाले प्रोग्राम या कोर्स में यह कहते हुए दाखिला देने का प्रस्ताव किया जा रहा है कि वह विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं। इन कोर्स को चलाने की संबद्धता किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की ओर से दी ही नहीं जा सकती।



यूजीसी : ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की फ्रेंचाइजी नहीं दी जा सकती

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने निर्देश दिया है कि उच्च शिक्षण संस्थान फ्रेंचाइजी व्यवस्था के तहत ऑनलाइन या ओपन डिस्टेंस लर्निंग कार्यक्रम संचालित न करें। ऐसा करने पर संबंधित संस्थान और पाठ्यक्रम का दावा करने वाली फ्रेंचाइजी दोनों पर कार्रवाई की जाएगी।

यूजीसी के अनुसार मान्यता सूची में शामिल संस्थान ही अनुमति वाले पाठ्यक्रम चला सकते हैं। आयोग को पता चला है कि एडटेक कंपनियां ओपन डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए विज्ञापन दे रही हैं। इनमें उच्च शिक्षण संस्थानों की फ्रेंचाइजी या समझौते का हवाला दिया गया है।

छात्रों को आगाह किया

यूजीसी ने छात्रों को भी आगाह किया है कि वे विज्ञापनों के झांसे में न आएं। किसी भी पाठ्यक्रम में दाखिले से पहले यूजीसी की वेबसाइट पर उसकी मान्यता व पात्रता की जांच जरूर करें।


कंपनियां नहीं चला सकतीं आनलाइन शैक्षिक कोर्स, यूजीसी ने कहा- बगैर मान्यता और संवद्धता को जांचे आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में न लें दाखिला


नई समस्या

★ यूजीसी ने कहा- बगैर मान्यता और संवद्धता को जांचे आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में न लें दाखिला

★ शिक्षा से जुड़ी निजी आनलाइन कंपनियां विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर चला रही है कोर्स

नई दिल्ली : कोरोना काल में जब स्कूल-कालेज बंद पड़े हैं और छात्रों के पास पढ़ाई का एक मात्र जरिया आनलाइन ही बचा है। ऐसे में आनलाइन शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़े भी बढ़े हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों को इसे लेकर सतर्क किया और सलाह दी है कि बगैर मान्यता और संबद्धता को जांचे किसी भी आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में दाखिला न लें। खासकर आनलाइन पढ़ाई करा रही शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी निजी कंपनियों को लेकर बिल्कुल सतर्क रहें, क्योंकि इन्हें ऐसे कोर्स चलाने की अनुमति नहीं है।

उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए निर्धारित किए गए आनलाइन कोर्स के नियमों का हवाला देते हुए यूजीसी ने साफ किया है कि इन कोर्स को चलाने की अनुमति फिलहाल उन्हीं विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को है जो यूजीसी के मानकों को पूरा करते है। इन कोर्स को किसी दूसरे संस्थानों या निजी कंपनियों को संचालित करने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे में शिक्षा से जुड़ी निजी क्षेत्र की जो भी आनलाइन कंपनियां छात्रों को इस तरह के कोर्स या प्रोग्राम में दाखिला देने का आफर दे रही हैं, वे बिल्कुल गलत है। ऐसी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इनकी गतिविधियों पर नजर भी रखी जा रही है।

यूजीसी के मुताबिक आनलाइन पढ़ाई कराने वाली निजी क्षेत्र से जुड़ी इन कंपनियां की ओर से आनलाइन और दूरस्थ माध्यमों से संचालित होने वाले प्रोग्राम या कोर्स में यह कहते हुए दाखिला देने का प्रस्ताव किया जा रहा है कि वह विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं। इन कोर्स को चलाने की संबद्धता किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की ओर से दी ही नहीं जा सकती।

Sunday, January 10, 2021

भारत के प्रख्यात शिक्षा संस्थान दूसरे देशों में भी कर सकेंगे अपने कैंपस की स्थापना, UGC ने जारी किए निर्देश

भारत के प्रख्यात शिक्षा संस्थान दूसरे देशों में भी कर सकेंगे अपने कैंपस की स्थापना, UGC ने जारी किए निर्देश


प्रख्यात संस्थानों का दर्जा प्राप्त भारतीय विश्वविद्यालय और कॉलेज अब दूसरे देशों में भी अपने कैंपसों की स्थापना कर सकेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस संबंध में नए निर्देश जारी किये हैं।  शिक्षा मंत्रालय ने साल 2018 में प्रख्यात संस्थान (आईओए) योजना शुरू की थी, जिसके तहत 10 सार्वजनिक और 10 निजी संस्थानों समेत कुल 20 संस्थानों का चयन कर उन्हें पूरी अकादमिक और प्रशासनिक स्वायत्ता प्रदान की जाती है।
   
  

नए दिशा-निर्देश नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत जारी किये गए हैं, जिनके अनुसार विदेशी विश्वविद्यालय भारत में और भारत के शीर्ष संस्थान दूसरे देशों में अपने कैंपस स्थापित कर सकेंगे।
     

नियमों के अनुसार प्रख्यात संस्थानों को पांच साल में अधिकतम तीन ऑफ-कैंपस केन्द्र खोलने की अनुमति होगी। वे एक अकादमिक वर्ष में एक से अधिक कैंपस नहीं खोल सकेंगे बहरहाल, उन्हें इसके लिये शिक्षा मंत्रालय , गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी।
 
    
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, ''प्रख्यात संस्थानों को प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पांच साल में अधिकतम तीन ऑफ-कैंपस केन्द्र खोलने की अनुमति होगी। वे एक अकादमिक वर्ष में एक से अधिक कैंपस नहीं खोल सकेंगे।''

    
इनमें कहा गया है, ''ऑफ कैंपस केन्द्र स्थापित करने के इच्छुक संस्थान को शिक्षा मंत्रालय में आवेदन देते हुए अपनी 10 वर्षीय 'रणनीतिक लक्ष्य योजना'' और पांच वर्षीय 'कार्यान्वयन योजना' के बारे में बताना होगा। इसमें अकादमिक, संकाय की भर्ती, छात्रों का दाखिला, अनुसंधान अवसंरचना विकास तथा वित्तीय तथा प्रशासनिक योजनाएं शामिल हैं।''

Wednesday, October 7, 2020

UGC Fake Universities List 2020 : यूजीसी ने जारी की फर्जी 24 विश्वविद्यालयों की सूची, यहां चेक करें पूरी लिस्ट

UGC Fake Universities List 2020 : यूजीसी ने जारी की फर्जी 24 विश्वविद्यालयों की सूची, यहां चेक करें पूरी लिस्ट।

UGC Fake Universities List 2020 : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची 2020 जारी की है। इस लिस्ट में देश भर के 24 विश्वविद्यालयों को रखा गया है, जिन्हें फर्जी करार दिया गया है। आयोग के अनुसार इन विश्वविद्यालयों को कोई भी डिग्री प्रदान करने का अधिकार नहीं है। आयोग द्वारा इस लिस्ट में दिल्ली में कुल 7 और उत्तर प्रदेश में 8 विश्वविद्यालयों को फर्जी घोषित किया गया है। वहीं इनके अलावा कर्नाटक से 2 और केरल से एक यूनिवर्सिटी को फर्जी घोषित किया गया है, जबकि महाराष्ट्र से 2 और वेस्ट बंगाल की एक यूनिवर्सिटी फर्जी बताई जा रही है। इस संबंध में यूजीसी ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें लिखा है कि यह सभी यूनिवर्सिटीज गैर कानूनी रूप से संचालित हो रहे हैं। 


पढ़ें किस राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की कौन सी यूनिवर्सिटी है फर्जी

दिल्ली
▪️कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, दरियागंज, दिल्ली
▪️यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, दिल्ली
▪️वॉकेशनल यूनिवर्सिटी, दिल्ली
▪️ए.डी.आर सेंट्रिक जूरीडीकल यूनिवर्सिटी, ए.डी.आर हाउस, 8जे, गोपाल टॉवर, 25 राजेंद्र प्लेस, नई दिल्ली
▪️इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, नई दिल्ली
▪️विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट, इंडिया, रोजगार सेवा सदन, 672, संजय एंक्लेव, नई दिल्ली
▪️आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, विजय विहार, रिठाला, रोहिणी

कर्नाटक
▪️बडागानवी सरकार वर्ल्ड ओपन यूनिवर्सिटी एजूकेशन सोसाइटी, गोकाक, बेलगम

केरल
▪️सेंट जॉन यूनिवर्सिटी कृष्णाटम्

महाराष्ट्र
▪️राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर

पश्चिम बंगाल
▪️इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव मेडिसन. 80, चौरंगी रोड, कोलकाता
▪️इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव मेडिसन एंड रिसर्च, 8ए, डायमंड हार्बर रोड ब्यूटिच इन, ठाकुर पूकीर, कोलकाता

उत्तर प्रदेश
▪️वारणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
▪️महिला ग्राम विद्यापीठ/विश्वविद्यालय, प्रयाग
▪️गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग
▪️नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलैक्ट्रो काम्पलेक्स होम्योपैथी, कानपुर
▪️नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी अचलताल, अलीगढ़
▪️उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय, कोसी कलां, मथुरा
▪️महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन विश्वविद्यालय, प्रतापगढ़
▪️इंद्रप्रस्थ शिक्षा परिषद्, इंस्टीटूशनल एरिया, खोड़ा, मकनपुर, नोएडा

ओडिसा
▪️नव भारत शिक्षा परिषद्, अन्नपूर्णा भवन, शक्ति नगर, राउर केला
▪️नॉर्थ ओडिसा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, मयूरभंज

पुडुचेरी
▪️श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन

आंध्र प्रदेश
▪️क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी, गुंटूर

इसके अलावा यूजीसी ने नए शैक्षणिक सत्र के संबंध में निर्देश दिए हैं। इसके मुताबिक देश भर के विश्वविद्यालयों में 1 नवंबर, 2020 से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होगी।वहीं ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन पाठ्यक्रमों के लिए प्रथम वर्ष की कक्षाएं नवंबर 2020 में शुरू होंगी। बता दें कि इस बार कोविड-19 महामारी की वजह से नया शैक्षणिक लेट हो गया है। आमतौर पर जुलाई-अगस्त में शुरू होने वाला सत्र इस बार नवंबर में शुरू होगा। इसके अलावा महामारी की वजह से मार्च में होने वाली वार्षिक परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई थीं।

Saturday, September 5, 2020

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर अड़ा UGC लेकिन पढ़ाई पर राज्यों को देगा पूरी छूट

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर अड़ा UGC लेकिन पढ़ाई पर राज्यों को देगा पूरी छूट

 

नई दिल्ली: कोरोना संकटकाल में परीक्षाओं को लेकर छिड़ी लड़ाई खूब चर्चा में रही, जिसमें छात्रों के भविष्य को देखते हुए यूजीसी अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर अड़ गया था, लेकिन अब वह पढ़ाई को लेकर राज्यों के साथ ऐसा कोई टकराव नहीं रखना चाहता है। यही वजह है कि विश्वविद्यालयों पर पढ़ाई को लेकर कुछ भी नहीं थोपा जाएगा, बल्कि सभी को अपने स्तर पर इससे जुड़ा फैसला लेने की पूरी छूट दी जाएगी। वह छात्रों को जिस तरह से पढ़ाना चाहते है, उसका पूरा फैसला ले सकेंगे। यानी किन-किन छात्रों को क्लास में बुलाना है, किसे आनलाइन पढ़ाना चाहते है जैसे सारे निर्णय अब वह अपने स्तर पर करेंगे। हालांकि 30 फीसद कोर्स ऑनलाइन कराने का निर्देश दिया जा चुका है।



यूजीसी वैसे भी राज्यों और राज्य के विवि के साथ अब कोई नया विवाद नहीं खड़ा करना चाहता है। पढ़ाई को लेकर जो नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है, उनमें राज्यों को इससे जुड़ा पूरा फैसला लेने के लिए अधिकृत किया जाएगा।