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Friday, July 31, 2020

यूजीसी : अन्तिम वर्ष की परीक्षा को रोक नहीं सकते, शीर्ष न्यायालय में आयोग ने जवाब किया दाखिल

यूजीसी : अन्तिम वर्ष की परीक्षा को रोक नहीं सकते, शीर्ष न्यायालय में आयोग ने जवाब किया दाखिल।

अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 30 सितंबर तक करवाने का मकसद छात्रों का भविष्य संभालना है, ताकि अगले कोस्टो की पढ़ाई में विलंब न हो। यह बात विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल जवाब में कही है। कोरोना महामारी के मद्देनजर परीक्षाएं करवाने के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अदालत ने यूजीसी से जवाब मांगा था। मामले में शुक्रवार को सुनवाई होगी।




 याचिकाओं में छात्रों के स्वास्थ्य हित को लेकर परीक्षाएं आयोजित नहीं करने और छह जुलाई को जारी किए गए यूजीसी के दिशा निर्देश रद्द करने की मांग की गई है। दिशा-निर्देशों में विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं लेने का निर्देश दिया गया था।

सफाई • यूजीसी ने शीर्ष न्यायालय जवाब दाखिल किया में कहा, परीक्षा लेने का मकसद छात्रों का भविष्य संभालना है।


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Tuesday, July 28, 2020

सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने पर यूजीसी से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने पर यूजीसी से मांगा जवाब
 

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों और कालेजों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यूजीसी से तीन दिन में जवाब मांगा है। कोर्ट मामले पर 31 जुलाई को फिर सुनवाई करेगा।


न्यायमूर्ति अशोक भूषण, आर. सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया कि वे याचिकाओं की प्रति सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और यूजीसी के वकील को दें। कोर्ट ने यूजीसी को तीन दिन में याचिका का जवाब देने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता कोई प्रतिउत्तर दाखिल करना चाहते हैं तो अगली सुनवाई 31 जुलाई से पहले दाखिल कर दें। कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हैं जिसमें कालेजों और विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के 6 जुलाई के आदेश को चुनौती दी गई है। 


याचिका में कोरोना के अलावा बिहार व असम में बाढ़ के कारण छात्रों को होने वाली परेशानी का भी मुद्दा उठाया गया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि करीब 390 विश्वविद्यालय परीक्षाएं कराने की प्रक्रिया में हैं।

फेलोशिप के लिए अब नेट पास करना जरूरी, UGC ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी की

फेलोशिप के लिए अब नेट पास करना जरूरी, UGC ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी की


नई दिल्ली : एससी, ओबीसी व अल्पसंख्यक समाज के प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए इनसे जुड़ी राष्ट्रीय फेलोशिप स्कीमों में बदलाव किया गया है। जिन्हें हासिल करने के लिए अब नेट ( नेशनल इलिजबिलटी टेस्ट) पास करना जरूरी होगा। यूजीसी ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी की है। साथ ही कहा है कि इससे समाज के प्रतिभाशाली छात्रों को आगे आने का मौका मिलेगा। अभी तक इन सभी फेलोशिप स्कीमों में चयन पीजी कोर्स के अंकों के आधार पर किया जाता था।


यूजीसी का मानना है कि इन सभी फेलोशिप के लिए चयन की अब तक जो प्रक्रिया थी, उससे बड़ी संख्या में समाज के प्रतिभाशाली छात्र वंचित रह जाते थे। इसी कारण संबंधित मंत्रलयों को इसमें बदलाव का सुझाव दिया गया। इस सुझाव पर मंत्रलयों ने अपनी सहमति दे दी है। इस निर्णय के मद्देनजर अल्पसंख्यकों के लिए चल रही मौलाना आजाद फेलोशिप स्कीम की नई गाइडलाइन जारी की गई है। यह 2019-20 से ही लागू मानी जाएगी। 


इससे पहले इन सभी स्कीमों की फेलोशिप राशि में भी बढ़ोतरी की गई थी। इसके तहत सीनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए हर महीने 35 हजार रुपए और जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए 31 हजार रुपए दिए जाते हैं। इन फेलोशिप स्कीमों के लिए वित्तीय मदद संबंधित मंत्रलय उपलब्ध कराता था। बाकी फेलोशिप को लेकर भी गाइडलाइन जारी की जा रही है।

Saturday, July 18, 2020

सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों में प्रवेश प्रक्रिया अगस्त से होगी शुरू, यूजीसी ने दिए संकेत


सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों में प्रवेश प्रक्रिया अगस्त से होगी शुरू, यूजीसी ने दिए संकेत


नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के खतरे के चलते बंद पड़े विश्वविद्यालयों और कालेजों में जल्द ही फिर से शैक्षणिक गतिविधियां शुरु होगी। इसकी तैयारी तेज हो गई है। फिलहाल इसकी शुरूआत अंडर ग्रेजुएट से जुड़ी प्रवेश प्रक्रिया से होगी। जो सभी विवि और कालेजों में अगस्त में शुरू हो जाएगी। वहीं नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत अभी तक पिछली गाइडलाइन के तहत सितंबर से ही करने की है, लेकिन इस पर अंतिम फैसला उस समय कोरोना संक्रमण की स्थिति का आंकलन करने के बाद लिया जाएगा।

नए शैक्षणिक सत्र को लेकर संशोधित गाइडलाइन अगले हफ्ते तक जारी होगी

इस बीच यूजीसी ने प्रवेश प्रक्रिया सहित नए शैक्षणिक सत्र को लेकर संशोधित गाइडलाइन अगले हफ्ते तक जारी करने के संकेत दिए है। माना जा रहा है कि यह सोमवार या मंगलवार तक जारी हो जाएगी। यूजीसी ने यह सक्रियता उस समय दिखाई है, जब सीबीएसई सहित देश भर के लगभग सभी शैक्षणिक बोर्डो का 12 वीं का रिजल्ट घोषित हो चुका है। ऐसे में छात्रों को अब विश्वविद्यालय और कालेजों की शुरू होने वाली प्रवेश प्रक्रिया का इंतजार है।

ज्यादातर विश्वविद्यालय परीक्षाओं को लेकर तैयार- यूजीसी

यूजीसी से जुड़े सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर विवाद न खड़ा हुआ होता, तो अब तक प्रवेश और नए शैक्षणिक सत्र को लेकर भी गाइडलाइन जारी हो गई होती, लेकिन अचानक इस विवाद से खड़े होने से यूजीसी इस मामले में पूरी तरह से उलझ गई। जिसके चलते गाइडलाइन को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। हालांकि यूजीसी का मानना है कि अब स्थिति सामान्य है। ज्यादातर विश्वविद्यालयों की ओर से अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर जवाब मिल गया है। जो परीक्षाओं को लेकर तैयार है। 


बाकी विश्वविद्यालयों से भी संपर्क किया जा रहा है। अगले हफ्ते तक सभी विवि से इसका जवाब मिल सकता है। यूजीसी की ओर से इससे पहले 29 अप्रैल को प्रवेश और नए शैक्षणिक सत्र को लेकर गाइडलाइन जारी की गई थी। हालांकि इसके बाद कोरोना संक्रमण की स्थिति के और गंभीर होने के बाद सारी योजना स्थगित हो गई थी। इनमें परीक्षा कराने का भी योजना है, जिसे इस गाइडलाइन के तहत एक से पंद्रह जुलाई के बीच होना था।

परीक्षाओं के पीछे कोरोना के ठप्पे से बचाने की कवायद

यूजीसी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर उसका जोर इसलिए है, क्योंकि वह नहीं चाहते है, कि इन छात्रों पर कोरोना का ठप्पा लगे। अधिकारियों की मानना है कि जो लोग इन परीक्षाओं का विरोध कर रहे है, उन्हें अभी यह बात समझ में नहीं आ रही है। लेकिन यदि इन्हें बगैर परीक्षाओं के ही पास कर दिया जाता है, तो जहां भी यह मार्कशीट लेकर जाएंगे, इन्हें कोरोना में बगैर परीक्षाओं के पास किए गए लोगों में गिनती होती रहेगी।

Thursday, July 16, 2020

ज्यादातर विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने को राजी


UGC ने दी जानकारी, फाइनल ईयर की परीक्षाओं को लेकर 177 यूनिवर्सिटी ने नहीं लिया अब तक फैसला

ज्यादातर विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने को राजी


हाल ही में यूजीसी ने अपनी संशोधित गाइडलाइन तैयार कर विश्वविद्यालयों के सामने पेश की थी। ये गाइडलाइंस फाइनल ईयर की परीक्षाओं को लेकर जारी की गई थीं। गाइडलाइंस आने के बाद सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में परीक्षाओं को लेकर उथल पुथल शुरू हो गई। 


ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने गुरुवार को इस विषय पर कहा कि परीक्षाओं के आयोजन की स्थिति बताने के लिए विश्वविद्यालयों से संपर्क किया गया था। अभी तक केवल 640 विश्वविद्यालयों ने फाइनल ईयर की परीक्षाओं को लेकर जवाब दिया है। बता दें कि इनमें से लगभग 454 विश्वविद्यालयों ने या तो परीक्षा आयोजित करा ली हैं या फिर वो करना को लेकर विचार कर रहे हैं। लेकिन 177 विश्वविद्यालय अभी भी ऐसे हैं, जिन्होंने फाइनल परीक्षाओं पर कोई निर्णय नहीं लिया है। एएनआई के अनुसार, यूजीसी ने सूचना दी है कि 2019-20 के दौरान स्थापित हुए 27 प्राइवेट विश्वविद्यालय फाइनल ईयर की परीक्षा के लिए मान्य नहीं हैं।

Tuesday, July 14, 2020

छात्रों के हितों और शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए परीक्षाएं जरूरी - UGC


विश्वविद्यालय और कॉलेजों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर यूजीसी ने फिर जारी किया बयान


छात्रों के हितों और शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए परीक्षाएं जरूरी

यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने कहा कि उन्होंने सभी राज्यों को परीक्षाओं को लेकर जारी गाइडलाइन और उसे कराने के लिए तय किए गए मानकों का ब्यौरा भेज दिया है। ...


नई दिल्ली,   विश्वविद्यालय की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक बार से जरूरी करार देते हुए इसे छात्रों के व्यापक हित में बताया है। ऐसे में राज्य परीक्षाओं को लेकर कोई भी फैसला लेने से पहले छात्रों के हितों और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आंकलन करें। वहीं परीक्षाओं को लेकर जारी गाइडलाइन पर यूजीसी कहना है कि आयोग के रेगुलेशन के तहत सभी विश्वविद्यालय उसे मानने के लिए बाध्य है। हालांकि यह विवाद का समय नहीं है। सभी विवि को तय गाइडलाइन के तहत परीक्षाएं करानी चाहिए। 


सभी राज्यों को भेजी गई संशोधित गाइडलाइन और परीक्षाओं को लेकर तैयार की गई एसओपी
आयोग के सचिव रजनीश जैन ने कहा कि उन्होंने सभी राज्यों को परीक्षाओं को लेकर जारी गाइडलाइन और उसे कराने के लिए तय किए गए मानकों का ब्यौरा भेज दिया है। फिर भी यदि विश्वविद्यालयों को किसी भी मुद्दे को लेकर कोई भ्रम है, तो वह संपर्क कर सकते है। उन्होंने कहा कि जहां तक बात परीक्षाओं की है तो कोरोना संकट के चलते वह पहले से इसे लेकर विश्वविद्यालयों को काफी सहूलियतें दे चुके हैं। इसमें वह ऑनलाइन और ऑफलाइन किसी भी तरीके से करा सकते हैं। जिसमें वह ओपन बुक एक्जाम, एमसीक्यू (मल्टीपल च्वायस क्यूश्चन) जैसे परीक्षा के तरीके भी अपना सकते है। 



एचआरडी मंत्रालय भी समर्थन में उतरा, राज्यों के साथ जल्द ही कर सकता है बैठक
यूजीसी सूत्रों की मानें तो आयोग ने विवाद के बीच उन कानूनी पहलुओं को भी खंगालना शुरू कर दिया है, जिसके दायरे में सभी विवि आते हैं। हालांकि यूजीसी के जुड़े अधिकारियों का कहना है, कि वह इस विवाद में नहीं पड़ना चाहते हैं। वैसे भी इसे लेकर काफी राजनीति हो रही है। सूत्रों के मुताबिक मानव संसाधन विकास मंत्रालय भी राज्यों के साथ इसे मुद्दे पर जल्द चर्चा कर सकता है।



छात्रों के हितों और शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए परीक्षाएं जरूरी
उनका कहना है कि कोरोना के इस संकटकाल में भी दुनिया का कोई विवि या उच्च शैक्षणिक संस्थान बगैर परीक्षा या असेसमेंट के सर्टिफिकेट नहीं दे रहा है। ऐसे में यदि भारतीय विश्वविद्यालय ऐसा करते है, तो इसका असर उनकी वैश्विक साख पर भी पड़ेगी। साथ ही जो भारतीय छात्र अपनी डिग्रियों या सर्टिफिकेट को लेकर नौकरियों के लिए जाएंगे, उन्हें भी इस चुनौती की सामना करना पड़ सकता है। यूजीसी देश में विश्वविद्यालयों की सबसे बड़ी नियामक संस्था है। सभी डिग्री कोर्स इसकी मंजूरी के बाद ही मान्य होते है। इसके साथ ही सभी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक और शोध से जुड़ी गतिविधियों को संचालित करने के लिए यह वित्तीय मदद भी देती है।