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Sunday, April 20, 2025

यूपी की साक्षरता दर 73% के करीब पहुंची, शहरों में साक्षरता दर अब 80.85%

यूपी की साक्षरता दर 73% के करीब पहुंची, शहरों में साक्षरता दर अब 80.85%


लखनऊ। यूपी की साक्षरता दर 69.72 से बढ़कर 72.6 प्रतिशत हो गई है। खास तौर पर शहरी क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा बेहतर हुई है। शहरों में साक्षरता दर अब 80.85 प्रतिशत है।

केंद्रीय सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता के मामले में यूपी की स्थिति में सुधार की जरूरत है। अभी यह दर 70.45 प्रतिशत है। बिहार और झारखंड जैसे राज्य भी ग्रामीण क्षेत्र के साक्षरता में वर्तमान में यूपी से बेहतर स्थिति में हैं।


लैंगिक अंतर कम हुआ : रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की औसत सारक्षता दर अब 72.6 है जबकि 2011 में यह 69.72% पर थी। स्त्री-पुरुष की साक्षरता के हिसाब से देखें तो 2024 में प्रदेश में पुरुषों की साक्षरता दर 81.8 फीसदी, महिलाओं की साक्षरता दर 63.4 फीसदी पर पहुंच चुकी है। प्रदेश में अब पुरुष और महिलाओं के बीच साक्षरता के क्षेत्र में अभी भी लैंगिक अंतर 18.4 फीसदी है जो पहले से कम हुई है। वहीं 2011 में 79.24 प्रतिशत पुरूष साक्षर थे जबकि महिला साक्षरों का प्रतिशत 59.26 फीसदी था। तब लैंगिक अंतर 19.98 प्रतिशत का था।


यूपी आन्ध्र, राजस्थान से आगे

यूपी की तुलना में आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, राजस्थान में पुरुषों की साक्षरता कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में आंध्र, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान तथा तेलंगाना में यूपी की तुलना में पुरुषों की साक्षरता दर कम है।


देश में असम ही एक मात्र ऐसा राज्य है जहां के शहरी क्षेत्रों में पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक साक्षर हैं। असम के शहरी क्षेत्र में 86.3 फीसदी पुरुष साक्षर है जबकि महिलाओं की साक्षरता दर वहां 91.4 फीसदी है। अर्थात दोनो के बीच का अन्तर 5.1 प्रतिशत का है।

Monday, September 9, 2024

छह साल पहले बंद कर दिए गए लोक शिक्षा केन्द्र, निरक्षरों को पढ़ाने के लिए वालंटियर्स खोजे नहीं मिल रहे, अब बेसिक शिक्षकों के भरोसे साक्षरता !

छह साल पहले बंद कर दिए गए लोक शिक्षा केन्द्र, निरक्षरों को पढ़ाने के लिए वालंटियर्स खोजे नहीं मिल रहे, अब बेसिक शिक्षकों के भरोसे साक्षरता !

पहले से ही गैर शैक्षणिक कार्यों से जूझ रहे हैं शिक्षक, अब और होगी दिक्कत 

करीब छह साल पहले बंद कर दिए गए लोक शिक्षा केन्द्र, अन्य व्यवस्था नहीं


लखनऊ । 15 वर्ष से अधिक निरक्षरों को साक्षर बनाने की मुहिम धीमी पड़ती नजर आ रही है। 2018 में निरक्षरों के लिए डेडीकेटेड लोक शिक्षा केन्द्रों को बंद कर दिया गया। अब पहले से ही तमाम गैर शैक्षणिक कार्यों से जूझ रहे बेसिक शिक्षकों को यह कार्य थमा दिया गया है। ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है कि साक्षरता मिशन को कैसे अंजाम दिया जाएगा।
साक्षर भारत मिशन के अन्तर्गत 2012 में लोक शिक्षा समिति का गठन कर प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक लोक शिक्षा केन्द्र की स्थापना की गई थी। प्रत्येक लोक शिक्षा केन्द्र पर दो प्रेरक नियुक्त किए गए थे। इन प्रेरकों का कार्य 15 से 65 वर्ष की आयु के निरक्षरों को कर उन्हें साक्षर बनाना था।

नियमित अंतराल पर निरक्षरों की परीक्षा आयोजित कर उन्हें साक्षर बनाया जाता था। प्रेरकों को दो हजार रुपये प्रतिमाह का मानदेय भी दिया जाता था लेकिन 2018 में इस योजना को बंद कर दिया गया। प्रेरकों के मानदेय का मामला अब भी शासन के पास है।


चिन्हित बच्चों को पढ़ाएं या वालंटियर खोजें?
वर्तमान समय में निरक्षरों और उन्हें साक्षर करने वाले वालंटियर्स को खोजने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षकों को दी गई है। पहले से ही अनेक गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझे बेसिक शिक्षकों के पास पूरी गंभीरता से इस कार्य को करने के लिए समय नहीं है। सूत्र बताते हैं कि किसी तरह चिन्हित किए गए निरक्षरों को पढ़ाने के लिए वालंटियर्स खोजे नहीं मिल रहे हैं। इस मसले पर सिर्फ कागजी बाजीगरी की जा रही है। बीते साल 23 हजार निरक्षर चिन्हित किए गए थे। इस वर्ष चिन्हीकरण जारी है।


Saturday, November 25, 2023

निरक्षर लोगों के जीवन में दिखेगा उल्लास, अंडरस्टैंडिंग लाइफलांग लर्निंग फार आल इन सोसायटी नामक नया अभियान शुरू ULLAS: understanding lifelong learning for all in society

निरक्षर लोगों के जीवन में दिखेगा उल्लास,  अंडरस्टैंडिंग लाइफलांग लर्निंग फार आल इन सोसायटी नामक नया अभियान शुरू ULLAS: understanding lifelong learning for all in society 


 नई दिल्ली : देश को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लिए छिड़ा अभियान अब सिर्फ शब्द और संख्या ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें निरक्षर लोगों को वे सारी शिक्षाएं भी दी जाएंगी, जिससे उनके जीवन में एक नया उल्लास दिख सके। खासकर वे उस ज्ञान से अपनी जरूरत के सारे काम निपटा सकेंगे। इनमें बैंकों से जुड़े लेन-देन, साइबर सुरक्षा, मतदान, सेहत और रेल यात्रा आदि से जुड़ी सीख भी दी जाएंगी। 


शिक्षा मंत्रालय ने इसे लेकर उल्लास (अंडरस्टैंडिंग लाइफलांग लर्निंग फार आल इन सोसायटी) नामक नया अभियान शुरू किया है, जिसमें 2030 तक देश को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में सिफारिश के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इसे लेकर पाठ्यक्रम पुस्तक भी तैयार की हैं।


इनमें शब्द व संख्या ज्ञान के साथ उनकी आम जरूरतों से जुड़े सभी विषयों को शामिल किया है। इस नई अध्ययन सामग्री के जरिये निरक्षर लोगों को अधिक मतदान, बैंकिंग व सेहत के प्रति जागरूक किया गया है। बातचीत आधारित सामग्री भी तैयार की गई है। यानी वोटिंग के बारे में क्या जानते हैं। यह क्यों जरूरी है। किस उम्र में मतदान का अधिकार मिलता है आदि। 


इसी तरह बैकिंग के दौरान पैसा जमा करने व निकासी का फार्म भरना बताया गया है। साइबर सुरक्षा को लेकर भी जागरूक किया हैं। इसमें उन्हें अपना पिन, ओटीपी और खाते की जानकारी किसी से भी साझा न करने की बात बताई गई है। रेल यात्रा, पीएनआर, सीट के बारे में जानकारियां उन्हें दी जाएंगी।


18 करोड़ से अधिक निरक्षर होने का अनुमान : 2011 की जनगणना में देश में 25 करोड़ से अधिक लोग निरक्षर थे। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार पिछले वर्षों में साक्षरता के क्षेत्र में प्रगति के आधार पर अब इनकी संख्या 18.12 करोड़ होने का अनुमान है।



Monday, January 30, 2023

UGC : विश्वविद्यालय के प्रत्येक छात्र को अब पांच अनपढ़ लोगों को पढ़ाना होगा जरूरी, मिलेगा क्रेडिट , नए शैक्षणिक सत्र से ही विश्वविद्यालयों में शुरू होगा नया साक्षरता अभियान, UGC ने जारी की गाइडलाइन

UGC : विश्वविद्यालय के प्रत्येक छात्र को अब पांच अनपढ़ लोगों को पढ़ाना होगा जरूरी, मिलेगा क्रेडिट

नए शैक्षणिक सत्र से ही विश्वविद्यालयों में शुरू होगा नया साक्षरता अभियान, UGC ने जारी की गाइडलाइन


पाठ्यक्रम से जुड़े प्रोजेक्ट वर्क या एसाइनमेंट का यह होगा हिस्सा इसके बाद ही छात्रों को मिलेगी डिग्री मौजूदा समय में देश की साक्षरता दर करीब 78 प्रतिशत है।


नई दिल्ली। वर्ष 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना अभी भले ही दूर की कौड़ी जैसा लग रहा है, लेकिन केंद्र सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुकी है। खासकर शत- प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य को हासिल करने को लेकर बड़ी पहल की है। इसके लिए एक नया साक्षरता अभियान भी तैयार किया है। जिसमें विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्रों के लिए हर साल कम से कम पांच अनपढ़ लोगों को अब पढ़ाना जरूरी होगा। इसके लिए उन्हें क्रेडिट स्कोर भी मिलेगा, जो उनके कोर्स में जुडेगा।


नई साक्षरता स्कीम को लागू करने के निर्देश
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने फिलहाल नए शैक्षणिक सत्र से ही सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से नई साक्षरता स्कीम को लागू करने के निर्देश दिए है। साथ ही इसके लिए एक विस्तृत गाइड लाइन भी जारी की है। जिसमें प्रत्येक कोर्स के प्रोजेक्ट वर्क और एसाइनमेंट को इससे जोड़ने के लिए कहा है। इनमें ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट दोनों ही तरह के कोर्स शामिल होंगे।


इस स्कीम के तहत एक अनपढ़ को पढ़ाने पर पांच क्रेडिट स्कोर मिलेगा। लेकिन यह तभी मिलेगा जब सीखने वाले को साक्षर होने का प्रमाण पत्र मिल जाएगा। इसके लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में और राज्य सरकार की ओर से कुछ सेंटर खोले जाएंगे।


यूजीसी के मुताबिक इस पहल से साक्षरता की मुहिम काफी तेज हो सकेगी। मौजूदा समय में देश मे साक्षरता की दर करीब 78 प्रतिशत है। जबकि इसे लेकर शुरू कि गए नए अभियान में इसे शत-प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बीच यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से अनपढ़ लोगों को पढ़ाने के लिए छात्रों को विशेष प्रशिक्षण भी देने का सुझाव दिया है।


ताकि इस अभियान पर बेहतर तरीके से अमल हो सके। जानकारों की मानें तो इस पहल के पीछे छात्रों को पढ़ाई के साथ कुछ जिम्मेदारी भी देना है। इससे समाज से जुड़ने का भी उन्हें एक बेहतर मौका मिलेगा। गौरतलब है कि मौजूदा समय में देश में एक हजार से ज्यादा विश्वविद्यालय और करीब 45 हजार कालेज है।

Thursday, September 8, 2022

उत्तर प्रदेश के 17 लाख लोग होंगे साक्षर, बिना मानदेय साक्षर करेंगे स्वयंसेवक

उत्तर प्रदेश के 17 लाख लोग साक्षर बनेंगे, 15 सितम्बर तक सर्वे वालेंटियर का चयन

नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत सत्र 2022-23 का लक्ष्य


लखनऊ :  प्रदेश के 17 लाख निरक्षर लोगों को नव साक्षरता कार्यक्रम के तहत एक साल के भीतर साक्षर किया जाएगा। ऑनलाइन पाठ्य सामग्री और माड्यूल के जरिए साक्षर किया जाएगा।


मुख्यत महिलाओं, एससी-एसटी, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और श्रमिक इनमें शामिल हैं। 15 साल से अधिक उम्र के निरक्षरों का सर्वे व इन्हें साक्षर करने वाले वालेंटियर का चयन 15 सितम्बर तक पूरा करना है। इनको पढ़ने-लिखने से लेकर व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी। साक्षरता विभाग ने पूरे कार्यक्रम का प्रारूप बनाया है। बता दें कि अन्तरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस आठ सितम्बर को मनाया जाता है।

साक्षरता विभाग के सहायक निदेशक राज कुमार का कहना है कि केन्द्र सरकार द्वारा नव साक्षरता कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसके तहत्र निरक्षरों का ऑनलाइन पंजीकरण किया जाएगा। वालेंटियर में प्राइमरी, जूनियर स्कूल के छात्र, एनसीसी, एनएसएस, बीटीसी, डीएलएड छात्र एवं स्वयं सेवक शामिल होंगे। नई शिक्षा नीति के तहत साक्षर बनाने के साथ संख्या ज्ञान और व्यवहारिक ज्ञान देना जरूरी है। एससीईआरटी ने पाठ्यक्रम और माड्यूल तैयार किया है। पाठ्यक्रम में रुपयों के लेनदेन, कानूनी जानकारी, बाल देखभाल आदि शामिल है।


लखनऊ में 57 हजार निरक्षर हैं वर्तमान में

लखनऊ में करीब 57 हजार निरक्षर हैं। वर्ष 2021 के सर्वे में मलिहाबाद में सबसे ज्यादा 15366 लोग निरक्षर थे। इनमें 19738 पुरुष तथा 37227 महिलाएं हैं। काकोरी में 11,196 निरक्षर मिले। सरोजनी नगर में 922 और सबसे कम 804 निरक्षर गोसाईगंज में हैं।

बिना मानदेय साक्षर करेंगे स्वयंसेवक

निरक्षरों को साक्षर करने के लिए बिना किसी मानदेय के योगदान देने वाले स्वयंसेवकों का चिह्नांकन क्षेत्रवार चल रहा है। इसके तहत विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को जोड़ा जा रहा है। स्वयंसेवक के रूप में कक्षा पांच व उससे ऊपर के स्कूली छात्रों को भी जुड़ने के लिए प्रेरित करने को कहा गया है। ऐसे बच्चे अपने परिवार या पड़ोसियों को साक्षर करेंगे। इसके अलावा एमएड, बीएड, बीटीसी, जेबीटी आदि पाठ्यक्रमों के पूर्व छात्रों को भी जोड़ने के लिए कहा गया है।

Thursday, June 23, 2022

बेसिक शिक्षा : निरक्षरों को पढ़ाने-लिखाने में प्रयागराज अव्वल

बेसिक शिक्षा : निरक्षरों को पढ़ाने-लिखाने में प्रयागराज अव्वल


शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से 15 साल से अधिक उम्र के लोगों को पढ़ाने-लिखाने के लिए चलाई जा रही मुहिम में प्रयागराज ने महत्वपूर्ण काम किया है। पूरे प्रदेश में प्रयागराज के बेसिक शिक्षा विभाग ने सर्वाधिक 20255 निरक्षरों को साक्षर बनाने की उपलब्धि हासिल की है। 2011 की जनगणना के अनुसार यूपी में 15 से अधिक आयु के 4.82 करोड़ लोग निरक्षर हैं।



प्रदेश के 75 जिलों में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों में सर्वाधिक निरक्षर मुरादाबाद, सीतापुर और प्रयागराज में हैं। मुरादाबाद में 14.55 लाख, सीतापुर 12.74 व प्रयागराज में 12.62 लाख निरक्षर हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 से ही पढ़ना-लिखना अभियान शुरू करने की योजना बनाई थी लेकिन कोरोना के कारण गति नहीं मिल सकी।


2021-22 में हालात ठीक होने पर इस अभियान की ओर ध्यान दिया गया। चिह्नित निरक्षरों को शिक्षकों, शिक्षामित्रों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों, एनसीसी व एनएसएस के स्वयंसेवकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मचारियों आदि की सहायता से साक्षर बनाया जा रहा है। एनसीईआरटी ने निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए 120 घंटे का कोर्स तैयार किया है जो चार महीने में पूरा होता है। पढ़ाई के बाद मूल्यांकन भी होता है और तब साक्षर का प्रमाणपत्र मिलता है।


शाहजहांपुर में 8190, हापुड़ में 4560 ने पकड़ी कलम


अभियान के तहत प्रयागराज के बाद शाहजहांपुर के सर्वाधिक 8190 तो हापुड़ के 4560 निरक्षरों ने साक्षर होने की उपलब्धि हासिल की है। रायबरेली में 4410, बस्ती 3492, कानपुर देहात 2347 व मिर्जापुर में 2134 व्यक्ति साक्षर हुए।