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Friday, July 3, 2020

सुल्तानपुर : वेतन से कटने के बाद भी एनपीएस खातों में नहीं पहुंचे 15 करोड़

वेतन से कटने के बाद भी एनपीएस खातों में नहीं पहुंचे 15 करोड़


सुल्तानपुर। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत जिले के लगभग 4200 शिक्षकों करीब 15 करोड़ रुपये वेतन से न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के रूप में कट गया है लेकिन अभी यह रुपया उनके खातों में नहीं भेजा गया है। यह राशि सात माह की बताई जा रही है। इसे लेकर शिक्षकों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। जिले के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत लगभग 4200 शिक्षकों के वेतन से एनपीएस की कटौती होती है। इसमें शिक्षकों के मूल वेतन एवं महंगाई का 10 प्रतिशत पैसा काटा जाता है। जून 2019 से एनपीएस का पैसा प्रतिमाह शिक्षकों की वेतन से कट रहा है लेकिन उनके एनपीएस खातों में ऑनलाइन शो नहीं कर रहा है। इसे लेकर शिक्षकों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। उनका पैसा कहां अटका हुआ है, इसे लेकर शिक्षक असमंजस में हैं। 4200 शिक्षकों के औसतन पांच हजार रुपये के हिसाब से प्रतिमाह 2.10 करोड़ रुपये एनपीएस कटौती के रूप में काटे जा रहे हैं। सात माह का लगभग 15 करोड़ रुपये न्यू पेंशन स्कीम के तहत काटा गया है लेकिन उनके खातों में वह धनराशि नहीं पहुंची है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष दिलीप पांडेय ने कहा कि प्राथमिक शिक्षक संघ शुरू से ही एनपीएस कटौती का विरोध करता रहा है। एनपीएस का पैसा कहां अटका है, इसकी जांच होनी चाहिए और जब तक यह पैसा शो न हो तब तक कटौती बंद की जानी चाहिए।

10 प्रतिशत शिक्षक व 14 प्रतिशत सरकार का अंशदान एनपीएस में शिक्षकों के मूल वेतन एवं महंगाई का 10 प्रतिशत अंशदान जाता है जबकि सरकार को शिक्षक के मूल वेतन एवं महंगाई का 14 प्रतिशत अंशदान देना होता है। जून 2019 से अभी तक सरकार ने अपने अंशदान का बजट अलॉट नहीं किया है। इसकी वजह से शिक्षकों की एनपीएस कटौती भी वेबसाइट पर शो नहीं कर रही है।

जिले के लगभग 4200 शिक्षकों का कट रहा एनपीएस

National Pension एनपीएस कटौती का विरोध अंबा के जिलाध्यक्ष अशोक सिंह गौरा ने कहा कि पुरानी पेंशन से सभी सरकारी कर्मचारियों को आच्छादित करना चाहिए। हम सभी शुरू से ही एनपीएस का विरोध कर रहे हैं। सरकार की हीलाहवाली की वजह से हम सभी की गाढ़ी कमाई का पैसा कहां है, यह पता नहीं लग पा रहा है।

बजट मिलते ही शो करेगा पैसा शिक्षकों की सैलरी से एनपीएस की जो कटौती प्रतिमाह हो रही है उसका पैसा एनएसडीएल खाते में भेजा जा रहा है। सरकार का अंशदान मिलते ही पैसा खातों में शो करने लगेगा। किसी भी

शिक्षक या कर्मचारी को इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। -मिथिलेश सिंह, वित्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा

Thursday, January 9, 2020

सुलतानपुर : ARP के अवशेष पदों पर नियुक्ति हेतु पुनः विज्ञप्ति हुई जारी, देखें

सुलतानपुर : ARP के अवशेष पदों पर नियुक्ति हेतु पुनः विज्ञप्ति हुई जारी, देखें।





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Friday, December 13, 2019

सुलतानपुर : एआरपी परीक्षा में शामिल नौ शिक्षकों को संघ ने छह साल के लिए किया निलंबित, शिक्षकों की प्राथमिक सदस्यता भी रद

सुलतानपुर : एआरपी परीक्षा में शामिल नौ शिक्षकों को संघ ने छह साल के लिए किया निलंबित, शिक्षकों की प्राथमिक सदस्यता भी रद।





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Sunday, December 1, 2019

सुलतानपुर : कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में विभिन्न पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें

सुलतानपुर : कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में विभिन्न पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें।







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Saturday, November 2, 2019

सुलतानपुर : एआरपी पद के चयन के लिए विज्ञप्ति जारी, देखें विज्ञप्ति सह आवेदन पत्र प्रारूप

सुलतानपुर : एआरपी पद के चयन के लिए विज्ञप्ति जारी, देखें।





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Saturday, October 19, 2019

बीईओ ने कर दिया शिक्षकों के साथ 'खेल', साहब ने खेला 'चंदे' का ऐसा 'खेल' कि मास्टर साहब भी हो गए फेल !



पत्र लिखकर सहयोग राशि मांगना पूर्णतया उचित नहीं है। अगर वसूली हो रही है या हुई है तो इस पर प्रतिबंध लगाते हुए जवाब-तलब किया जाएगा।
 कृष्ण कुमार सिंह, बीएसए, सुलतानपुर
फिर भी आपसी सौहार्द्र का हवाला देकर वसूले रुपये
"72 हजार आवंटित हुआ जिले में खेल
आयोजन के लिए
यह स्थिति क्षम्य नहीं होगी
कूरेभार के खंड शिक्षा अधिकारी रवीन्द्र वर्मा ने 12 अक्टूबर को प्रधानाध्यापकों को जारी किए गए एक आदेश में स्पष्ट लिखा है कि 'आपकी न्याय पंचायत में एनपीआरसी स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित है, लेकिन अभी तक किसी प्रधानाध्यापक ने कोई सहयोग राशि नहीं दी है। यह स्थिति आपसी सौहार्द्र को समाप्त कर देगी। शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।'•एनबीटी, सुलतानपुर : जिले में खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) का नया 'खेल' सामने आया है। बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता के आयोजन के लिए सरकार ने जिले को 72 हजार रुपये आवंटित कर रखे हैं। इसके बावजूद खंड शिक्षा अधिकारियों ने प्रधानाध्यापकों से एक-एक हजार रुपये का चंदा वसूल लिया। जिन प्रधानाध्यापकों ने चंदा देने में आनाकानी की, उनसे आपसी सौहार्द्र बिगड़ने और क्षम्य न होने की चेतावनी देकर पैसा वसूल लिया गया।

नौनिहालों की प्रतिभा निखारने के लिए सरकार हर साल परिषदीय स्कूलों में बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन करवाती है। यह प्रतियोगिता न्याय पंचायत स्तर से शुरू होकर प्रदेश स्तरीय आयोजन के साथ समाप्त होती है। आयोजन में खर्च को देखते हुए सरकारी बजट जारी किया जाता है। जिला व्यायाम शिक्षक राहुल तिवारी के मुताबिक जिले को इस बार 72000 रुपये मिले हैं। ये बजट सभी 14 ब्लॉकों और एक नगर क्षेत्र में बांट दिया गया है।
जिले के 1890 शिक्षकों से वसूला गया चंदा!
जिले में कुल 1735 प्राथमिक और 612 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। बेसिक महकमे से मिले आंकड़े के अनुसार इन स्कूलों में कुल 1890 प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं। प्रधानाध्यापकों के मुताबिक खंड शिक्षाधिकारियों ने सभी ब्लॉकों में बैठक कर चंदे के तौर पर 1000 रुपये देने का आदेश दिया। कुछ ब्लॉकों में लिखित तो कुछ में मौखिक आदेश जारी किए गए। आदेश के क्रम में ज्यादातर प्रधानाध्यापकों ने 1000 रुपये के हिसाब से धनराशि भी दे दी। 1890 प्रधानाध्यापकों की संख्या के हिसाब से देखें तो 18,90,000 रुपये होते हैं।