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Thursday, June 4, 2026

1565 परिषदीय विद्यालय में हब एंड स्पोक मॉडल से मिलेगी नई दिशा

1565 परिषदीय विद्यालय में हब एंड स्पोक मॉडल से मिलेगी नई दिशा 

लखनऊ। प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक, नवाचारी बनाने में पीएमश्री योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश के 1565 परिषदीय विद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक संसाधन और शिक्षा मिल सके। 


इस मॉडल में हर जिले में एक चयनित पीएमश्री विद्यालयों में एस्ट्रोनॉमी लैब और एआई आधारित स्किल लैब की स्थापना यूपीईएलसी कर रहा है। इन प्रयोगशालाओं से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा। इससे बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, नवाचार और शोध की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। हब एंड स्पोक मॉडल के रूप में विकसित किए जा रहे यह विद्यालय अपने आस-पास के अन्य विद्यालयों के लिए संसाधन, नवाचार और शैक्षिक उत्कृष्टता का केंद्र बनेगा। इसके माध्यम से आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी सुविधाओं और श्रेष्ठ शैक्षिक गतिविधियों का लाभ अधिक से अधिक विद्यालयों तक पहुंचाया जा सकेगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि इससे छात्र भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे। विज्ञान विषयों की अवधारणाओं को समझने में प्रयोगशालाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आधुनिक उपकरणों और तकनीकी संसाधनों से सुसज्जित ये प्रयोगशालाएं विद्यालयों को नई पहचान देगी। 

Wednesday, May 4, 2022

उत्तर प्रदेश के स्कूलों में बढ़ा दाखिला, शिक्षकों के 51 हजार पद हैं खाली

उत्तर प्रदेश के स्कूलों में बढ़ा दाखिला, शिक्षकों के 51 हजार पद हैं खाली


बेसिक शिक्षा परिषद के 1.50 लाख से अधिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में अभियान चलाकर छात्र-छात्राओं की संख्या तो बढ़ाई जा रही है लेकिन सबसे अहम सवाल है कि इन बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की संख्या कब बढ़ेगी। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के मुताबिक प्राथमिक स्कूलों में 30 बच्चों और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। 


यही नहीं उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान/गणित, भाषा और सामाजिक विषय का एक शिक्षक होना अनिवार्य है। लेकिन इन मानकों का पालन नहीं हो रहा। पिछले साढ़े तीन साल में परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। ये स्थिति तब है जबकि प्रदेश सरकार ने दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट में स्वयं स्वीकार किया था कि उस समय शिक्षकों के 51112 पद खाली थे। हर साल परिषदीय स्कूलों से औसतन 12 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त होते हैं। 


यदि ये संख्या जोड़ ली जाए तो शिक्षकों के कम से कम 75 हजार पद खाली हैं। डीएलएड, बीएड, टीईटी/सीटीईटी पास बेरोजगार तीन साल से नई भर्ती शुरू करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। आखिरी बार एक दिसंबर 2018 को 69000 भर्ती शुरू हुई थी।


आरटीई लागू होने के बाद नहीं हुआ पद सृजन
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में जुलाई 2011 में आरटीई लागू होने के तकरीबन 11 साल बाद भी मानक के अनुरूप शिक्षकों के पद सृजित नहीं हो सके हैं। कुछ साल पहले बेसिक शिक्षा परिषद के तत्कालीन सचिव संजय सिन्हा ने आरटीई मानक के अनुरूप प्रत्येक जिले में शिक्षकों के पद सृजित किए थे। सूत्रों के अनुसार उस रिपोर्ट में गाजियाबाद, नोएडा जैसे दो-चार जिलों को छोड़कर अधिकांश जिलों में शिक्षकों के पद बढ़ रहे थे। लेकिन सरकार से मंजूरी नहीं मिलने के कारण वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी। 


17 लाख अतिरिक्त बच्चों का हुआ दाखिला
प्रयागराज। प्रदेशभर के परिषदीय स्कूलों में एक से 30 अप्रैल तक चलाए गए प्रवेश उत्सव में पिछले साल की तुलना में 17 लाख अतिरिक्त बच्चों का दाखिला हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग ने दो करोड़ नामांकन का लक्ष्य रखा है। हर जिले को 20 प्रतिशत अतिरिक्त नामांकन का लक्ष्य मिला था। अधिकांश जिलों में पिछले साल से अधिक बच्चों का प्रवेश हुआ है।




परिषदीय स्कूलों में बढ़ा दाखिला, अहम सवाल कब बढ़ेंगे शिक्षकों के पद?

RTE लागू होने के बाद नहीं हुआ पदसृजन


प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के 1.50 लाख से अधिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में अभियान चलाकर छात्र-छात्राओं की संख्या तो बढ़ाई जा रही है लेकिन सबसे अहम सवाल है कि इन बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की संख्या कब बढ़ेगी। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के मुताबिक प्राथमिक स्कूलों में 30 बच्चों और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए।




यही नहीं उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान/गणित, भाषा और सामाजिक विषय का एक शिक्षक होना अनिवार्य है। लेकिन इन मानकों का पालन नहीं हो रहा। पिछले साढ़े तीन साल में परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। ये स्थिति तब है जबकि प्रदेश सरकार ने दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट में स्वयं स्वीकार किया था कि उस समय शिक्षकों के 51112 पद खाली थे। हर साल परिषदीय स्कूलों से औसतन 12 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त होते हैं।


यदि ये संख्या जोड़ ली जाए तो शिक्षकों के कम से कम 75 हजार पद खाली हैं। डीएलएड, बीएड, टीईटी/सीटीईटी पास बेरोजगार तीन साल से नई भर्ती शुरू करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। आखिरी बार एक दिसंबर 2018 को 69000 भर्ती शुरू हुई थी।


आरटीई लागू होने के बाद नहीं हुआ पद सृजन :


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में जुलाई 2011 में आरटीई लागू होने के तकरीबन 11 साल बाद भी मानक के अनुरूप शिक्षकों के पद सृजित नहीं हो सके हैं। कुछ साल पहले बेसिक शिक्षा परिषद के तत्कालीन सचिव संजय सिन्हा ने आरटीई मानक के अनुरूप प्रत्येक जिले में शिक्षकों के पद सृजित किए थे। सूत्रों के अनुसार उस रिपोर्ट में गाजियाबाद, नोएडा जैसे दो-चार जिलों को छोड़कर अधिकांश जिलों में शिक्षकों के पद बढ़ रहे थे। लेकिन सरकार से मंजूरी नहीं मिलने के कारण वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी।


प्रयागराज। प्रदेशभर के परिषदीय स्कूलों में एक से 30 अप्रैल तक चलाए गए प्रवेश उत्सव में पिछले साल की तुलना में 17 लाख अतिरिक्त बच्चों का दाखिला हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग ने दो करोड़ नामांकन का लक्ष्य रखा है। हर जिले को 20 प्रतिशत अतिरिक्त नामांकन का लक्ष्य मिला था। अधिकांश जिलों में पिछले साल से अधिक बच्चों का प्रवेश हुआ है।


● हर जिले को 20 प्रतिशत अधिक नामांकन का दिया था लक्ष्य

● कई जिलों में पिछले साल से कहीं अधिक हो गया बच्चों का दाखिला

● साढ़े तीन साल से प्राथमिक स्कूलों के लिए नहीं हुई शिक्षकों की भर्ती

● हर साल प्राइमरी के तकरीबन 12 हजार शिक्षक हो जाते हैं सेवानिवृत्त

● सरकार ने भी माना था कि प्रदेश में शिक्षकों के 51 हजार पद हैं खाली

● प्रदेशभर के विद्यालयों में 75 हजार के करीब पद हैं खाली

● आखिरी बार 2018 में हुई थी 69 हजार शिक्षक भर्ती