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Friday, June 4, 2021

दो सप्ताह में तय होगी CBSE 12वीं की मूल्यांकन प्रक्रिया

दो सप्ताह में तय होगी CBSE 12वीं की मूल्यांकन प्रक्रिया


■ सीबीएसई व आइसीएसई को सुप्रीम कोर्ट ने दी दो हफ्ते की मोहलत

■ कोर्ट ने कहा सभी बोर्ड छात्रों के हितों का विशेष ध्यान रखें

नई दिल्ली : सीबीएसई और आइसीएसई को 12वीं कक्षा का रिजल्ट तैयार करने के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया और मानदंड निर्धारित करने को सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह का समय दिया है और 17 जून को फिर सुनवाई पर लगाने का निर्देश दिया।


जस्टिस एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने वकील ममता शर्मा की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान दोनों बोर्ड को यह मोहलत दी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने गत पहली जून को सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा रद करने के निर्णय की जानकारी दी। 


पीठ ने कहा कि सरकार की मूल्यांकन प्रक्रिया क्या होगी यह कोर्ट में पेश करें। कोर्ट उसे देखेगा और अगर किसी को उस पर आपत्ति होगी तो उसे भी देखा जाएगा। कोर्ट ने अटार्नी से पूछा आपको मूल्यांकन प्रक्रिया तय करने के लिए कितना समय चाहिए। अटार्नी जनरल ने कहा कि दो सप्ताह का समय दे दिया जाए।


 कोर्ट ने आइसीएसई बोर्ड की ओर से पेश वकील से पूछा कि आपको कितना समय चाहिए इस पर उन्होंने चार सप्ताह का समय मांगा।  लेकिन कोर्ट इसके लिए राजी नहीं हुआ। जब वकील ने विशेषज्ञों से विमर्श आदि की दुहाई देते हुए कम से कम तीन सप्ताह का समय मांगा तो कोर्ट ने कहा आप समय की सौदेबाजी न करें। अटार्नी जनरल ने तर्कसंगत दो सप्ताह का समय मांगा है आप भी दो सप्ताह में निर्णय लें।

Thursday, June 3, 2021

बड़ी खबर : यूपी बोर्ड की 12वीं की बोर्ड परीक्षा भी निरस्त, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने की घोषणा

बड़ी खबर : यूपी बोर्ड की 12वीं की बोर्ड परीक्षा भी निरस्त, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने की घोषणा


जानिए कैसे उत्तीर्ण होंगे, छात्र-छात्राएं?

प्रदेश के माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि इंटर की निरस्त परीक्षा के परीक्षाफलों को परीक्षार्थियों के कक्षा-10 की बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांकों एवं उनके कक्षा-11 के वार्षिक परीक्षा के प्राप्तांकों के औसत के आधार पर तैयार कराया जायेगा। यदि कक्षा-11 के वार्षिक परीक्षा के प्राप्तांक उपलब्ध नहीं होंगे तब उस स्थिति में कक्षा-12 की प्री-बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांकों को लिया जायेगा। इंटरमीडिएट की वर्ष 2021 की परीक्षा के सभी रजिस्टर्ड परीक्षार्थियों को आगामी इंटर परीक्षा में अपनी इच्छा के अनुसार एक विषय में अथवा अपने सभी विषयों की परीक्षा में सम्मिलित होकर अपने अंको में सुधार करने का अवसर प्राप्त होगा। हाईस्कूल के लिए संबंधित परीक्षार्थियों को कक्षा-नौ की वाॢषक परीक्षा के प्राप्तांकों एवं उनके कक्षा-10 के प्री-बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांकों के औसत के आधार पर तैयार कराया जायेगा


उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से बातचीत के बाद परीक्षा निरस्त करने की घोषणा की।


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 को रद्द कर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से बातचीत के बाद परीक्षा निरस्त करने की घोषणा की है।

बता दें कि 12वीं की परीक्षा जुलाई के दूसरे सप्ताह में आयोजित की जानी थी पर सीबीएसई की 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लिए गए निर्णय के तहत निरस्त होने के बाद यूपी बोर्ड की परीक्षा का भी निरस्त होना तय माना जा रहा था। गुरुवार को इस निर्णय की घोषणा कर दी गई। बता दें कि यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए 26 लाख 10 हजार 316 परीक्षार्थी पंजीकृत थे।



UP Board Class 12th Exam Result 2021 : UP बोर्ड की इंटर की भी परीक्षा रद, इंटरमीडिएट के विद्यार्थी भी होंगे प्रोन्नत

डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा की गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ करीब आधा घंटा की बैठक

UP Board Class 12th Exam Result 2021 : डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा की गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ करीब आधा घंटा की बैठक के बाद सरकार ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक परिषद यानी यूनी बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षा को भी रद कर दिया है।

लखनऊ :  पीएम नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद सीबीएसई तथा आइससी के कक्षा 12 की परीक्षा के रद करने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इंटरमीडिएट की परीक्षा को रद कर दिया है। इसके आगे की रणनीति की घोषणा शाम को की जाएगी।

डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा की गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ करीब आधा घंटा की बैठक के बाद सरकार ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक परिषद यानी यूनी बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षा को भी रद कर दिया है। इस बैठक में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा अराधना शुक्ला भी मौजूद थीं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के करीब सौ वर्ष के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि कक्षा 10 तथा कक्षा 12 की परीक्षा को रद किया गया है।

डॉ. दिनेश शर्मा के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12वीं की परीक्षा को रद करने के निर्णय को मंजूरी दे दी है। उन्होंने डिप्टी सीएम व शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के बाद अपना निर्णय लिया। सीबीएसई व आइएससी के बाद मध्य प्रदेश के बाद गुजरात व उत्तराखंड की सरकार बोर्ड की परीक्षा रद कर चुकी हैं। इसके बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने भी यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा को रद कर दिया है। इससे पहले यूपी सरकार ने हाईस्कूल की परीक्षा रद कर चुकी है।


सीएम योगी के साथ डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा समेत शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों के साथ करीब 30 मिनट बैठक चली। 10:30 बजे शुरू हुई बैठक 11:00 बजे समाप्त हुई। शिक्षा बोर्ड के द्वारा तैयार की गई कमेटी ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री के सामने पेश की। इसमें परीक्षा रद किए जाने के बाद परीक्षार्थियों के अन्य विकल्प के सुझाव दिए गए।


26 लाख हैं परीक्षार्थी

यूपी बोर्ड 12वीं की परीक्षा के लिए 26,09,501 स्टूडेंट्स पंजीकृत हैं। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षाएं पहले ही रद कर दी गई हैं। सीबीएसई व सीआईसीएसई ने भी 12वीं की परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा की है। ऐसे में यूपी में भी 12वीं की परीक्षाएं रद करने के कयास लगाए जा रहे हैं। हाईस्कूल का रिजल्ट किस आधार पर तैयार किया जाए। इसके विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने इसके लिए एक अलग कमेटी भी बना दी गई।


बोर्ड सचिव ने प्री बोर्ड के मार्क्स मांगे थे

बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ला ने 22 मई को ही सभी स्कूलों से क्लास 12 के प्री-बोर्ड और 11वीं के छमाही व वार्षिक परीक्षा के अंक मांगे थे, 28 मई तक अधिकांश स्कूल छात्र-छात्राओं के अंक डाटा भी ऑनलाइन पोर्टल पर फीड कर दिया।

जल्द शुरू हो परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति, हजारो पद रिक्त

जल्द शुरू हो परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति,  हजारो पद रिक्त

बहराइच । परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की प्रोन्नति प्रक्रिया को जल्द शुरू करवाने की मांग को लेकर बुधवार को शिक्षक संगठन ने बीएएसए को ज्ञापन सौंपा ज्ञापन कार्यक्रम की अगुवाई प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आनंद मोहन पाठक ने की ।


जिलाध्यक्ष आनन्द कुमार पाठक ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापकों की पदोन्नति 2013 के बाद से नहीं हुई है। यही नहीं 1998 तक नियुक्त व पदोन्नति प्राप्त प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापकों व जूनियर के सहायक अध्यापकों को जूनियर विद्यालय के प्रधानाध्यापक पद पर भी पदोन्नत नहीं किया गया है। जबकि प्रधानाध्यापक के हजारों पद रिक्त है। ऐसे में विभाग को तत्काल पदोन्नति शुरू करे। इस दौरान विजय कुमार उपाध्याय, सुनील कुमार मिश्र, बृजेश कुमार आदि मौजूद रहे।


बेसिक शिक्षा में जिले के अंदर तबादले की प्रक्रिया ठप, उपज रहा रोष

बेसिक शिक्षा में जिले के अंदर तबादले की प्रक्रिया ठप, उपज रहा रोष


प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को अब तक जिले के भीतर तबादले की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है। शासन से आश्वासन मिला था कि इस बार गर्मी की छुट्टियां शुरू होने पर स्थानांतरण की भी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी पर ऐसा नहीं हुआ। इससे शिक्षकों में रोष है। प्रयागराज में 2016 के बाद से एक ब्लाक से दूसरे ब्लाक में स्थानांतरण नहीं हुआ है।


प्रशिक्षित शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के जिला संयुक्त मंत्री अफरोज अहमद ने बताया कि शिक्षकों का पद जिले कैडर का है। जिले के शिक्षकों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। नियमावली 2010 के अनुसार पहले पांच साल पुरुष शिक्षकों की नियुक्ति पिछड़े व दूर दराज के गावों में की जाती है। शिक्षकों को उनकी निकट के किसी विकासखंड में तैनाती दी जा सकती है। प्रयागराज में यह प्रक्रिया पांच साल से ठप है। शिक्षक नेता बिजेंद्र सिंह ने बताया कि कई ऐसे अध्यापक दंपती हैं जो अलग अलग विकासखंड में लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। कुछ लोग गंभीर बीमारियों से भी ग्रसित हैं और दूर दराज के गावों में अध्यापन के लिए जाने को विवश हैं।

शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर अभियान, ट्विटर पर हल्ला मचाने से लेकर लेकर मुंडन कराने और काला दिवस मनाकर जताया विरोध, युवा हो रहे लामबंद

शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर अभियान, ट्विटर पर हल्ला मचाने से लेकर लेकर मुंडन कराने और काला दिवस मनाकर जताया विरोध, युवा हो रहे लामबंद



बेरोजगार युवा शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर ट्विटर पर हैं। कोरोना काल में डिजिटल प्रदर्शन और अपनी मांगों को सामने रखने के लिए ट्विटर सबसे प्रभावी मंच बन गया है। 

बुधवार को बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में होने वाली 51 हजार शिक्षक भर्ती की मांग की। शाम तक 'ब्लैकडे रिलीज यूपीपीआरटी' व शिक्षक भर्ती हैशटैग से सात लाख से ज्यादा ट्वीट शिक्षक भर्ती को लेकर हो चुके हैं। दो जून को काला दिवस मनाते हुए कुछ जिलों में युवाओं ने शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर मुण्डन भी करवाया है। 

सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 51 हजार पदों पर शिक्षक भर्ती होनी है। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण अब तक इसमें कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। वहीं 69 हजार शिक्षक भर्ती में बचे हुए 5100 पदों पर भी अभी तक काउंसिलिंग नहीं हो पाई है। ऐसे में युवा सरकार पर दबाव बनाने के लिए लामबंद हो रहे हैं ।


10 लाख प्रशिक्षित स्नातकों ने नई भर्ती के लिए शुरू किया प्रदेश सरकार के खिलाफ अभियान

प्रयागराज:  मिशन दो जून की रोटी के तहत लगभग 10 लाख यूपीटीईटी एवं सीटीईटी पास प्रशिक्षित स्नातकों ने नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए दो जून से 30 जून तक प्रदेश सरकार के खिलाफ अभियान की शुरुआत कर दी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की ओर से लगातार दो वर्ष से प्रशिक्षित स्नातकों की मांग की अनदेखी की जा रही है। 

अपनी मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए बुधवार को संगम तट पर बड़ी संख्या में पुरुष प्रशिक्षितों ने मुंडन करवा कर विरोध प्रदर्शन किया जबकि महिला प्रशिक्षुयों ने अपने सिर और हाथ में काली पट्टी बांध विरोध दर्ज कराया। अभियान की शुरूआत पंकज मिश्रा अभिषेक तिवारी सतेंद्र सीटू, राहुल यादव, मनोज यादव, शिवम तिवारी, दुर्लभ रवि, आकाश आदि साथी ने मुंडन करा कर की।

प्राथमिक स्कूल की नई शिक्षक भर्ती के लिए बीटीसी व डीएलएड प्रशिक्षुओं ने संगम पर कराया मुंडन

प्रयागराज : प्राथमिक स्कूल की नई शिक्षक भर्ती के लिए प्रतियोगी तरह-तरह के जतन कर रहे हैं। बुधवार को बीटीसी व डीएलएड प्रशिक्षुओं ने संगम पर मुंडन कराकर भर्ती निकालने की मांग की। उनका दावा है कि प्रदेश के कई जिलों में प्रतियोगियों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर भर्ती में देरी का विरोध किया। इंटरनेट मीडिया पर भी दिन भर ‘मिशन दो जून की रोटी’ छाया रहा।

प्रयागराज में प्रतियोगियों ने एकजुट होकर पहले इंटरनेट मीडिया पर मुख्यमंत्री को पत्र भेजे और फिर दो जून को काला दिवस मनाने का ऐलान किया। प्रतियोगियों का दावा है कि करीब 10 लाख प्रशिक्षु टीईटी व सीटीईटी उत्तीर्ण हैं। अब वे नई भर्ती के लिए 30 जून तक आंदोलन करेंगे। बेसिक विभाग में करीब दो साल से भर्ती नहीं जारी हुई है और बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। महिला प्रशिक्षुओं ने अपने सिर और हाथ में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। यहां राहुल यादव, पंकज मिश्र, अभिषेक तिवारी, सतेंद्र सीटू, शिवम तिवारी, रवि, आकाश व सुनील आदि ने मुंडन कराया। कोचिंग संस्थानों व सामाजिक संगठनों ने भी इंटरनेट मीडिया पर प्रशिक्षुओं का साथ दिया।


सोशल मीडिया में छाया रहा युवा मंच का काला दिवस

प्रयागराज:  प्रदेश सरकार की ओर से लगातार लंबित भर्तियों एवं खाली पदों को भरने की मांग को लेकर युवा मंच सहित दूसरे संगठनों के आवाहन पर युवाओं ने बुधवार को प्रदेश भर में काली पट्टी और काला गमछा बांधकर काला दिवस मनाया। ट्विटर, फेसबुक पर भी इससे जुड़े पोस्ट व ट्वीट किए। 

युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह व राम बहादुर पटेल के नेतृत्व में बांह काली पट्टी बांधकर कर छात्रों ने सांकेतिक प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि योगी सरकार ने 97 हजार प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए वादा किया था लेकिन अभी तक विज्ञापन जारी नहीं हुआ। युवाओं की एकजुटता दर्शाने व ताकत के प्रदर्शन के लिए पांच जून को यूपी बेरोजगारी दिवस का आवाहन किया गया है। इस मौके पर युवा मंच की ओर से रोजगार संवाद का आयोजन किया गया है, जिसका युवा मंच के फेसबुक पेज से लाइव भी किया जाएगा।

मदरसा बोर्ड की भी नहीं होंगी परीक्षाएं, आलिम के मसले पर निर्णय यूपी बोर्ड के बाद

मदरसा बोर्ड की भी नहीं होंगी परीक्षाएं, आलिम के मसले पर निर्णय यूपी बोर्ड के बाद


लखनऊ : कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की भी परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी। तहतानिया व फौकानिया (कक्षा 1 से 8 तक) के सभी करीब 16 लाख बच्चे प्रमोट किए जाएंगे। मुंशी/मौलवी (हाईस्कूल) के भी बच्चे यूपी बोर्ड की तर्ज पर प्रमोट किए जाएंगे। बोर्ड जल्द ही इसका प्रस्ताव सरकार के पास भेजेगा। 

साथ ही मदरसा बोर्ड ने मुंशी/मौलवी के छात्रों की अर्धवार्षिक व प्री बोर्ड परीक्षा के अंक मंगाए हैं। वहीं, आलिम (इंटरमीडिएट) के मसले पर यूपी बोर्ड का निर्णय आने के बाद मदरसा बोर्ड फैसला करेगा।


कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने सभी को हिलाकर रख दिया है। यूपी बोर्ड ने भी बच्चों की सुरक्षा देखते हुए हाईस्कूल परीक्षा निरस्त करने का फैसला किया था।

 सीबीएसई ने कक्षा 12 की परीक्षा इस साल नहीं करने का फैसला लिया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए मदरसा बोर्ड ने भी इस बार बोर्ड की परीक्षाएं न कराने का निर्णय किया है।

विवि : एक समान चयन प्रक्रिया के अनुसार शैक्षणिक पदों पर भर्ती करने और समय सारिणी बनाकर पढ़ाई के राज्यपाल ने दिए निर्देश

विवि : एक समान चयन प्रक्रिया के अनुसार शैक्षणिक पदों पर भर्ती करने और समय सारिणी बनाकर पढ़ाई के राज्यपाल ने दिए निर्देश


राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालयों को शैक्षिक सत्र 2021-22 के लिए समय सारिणी बनाकर पढ़ाई व अन्य गतिविधियां शुरू करने की तैयारियां करने को कहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक पदों पर भर्ती के लिए नई एक समान चयन प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाही प्रारंभ की जाए। राज्यपाल ने सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार सत्र 2020-21 में चरणबद्ध तरीके से परीक्षा कराने अथवा अगले वर्ष में प्रमोशन देने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए 15 जून तक सुझाव भेजने को कहा है।


राज्यपाल ने बुधवार को पं. दीन दयाल उपाध्याय विवि गोरखपुर, चौ. चरण सिंह विवि मेरठ, हरकोर्ट बटलर तकनीकी विवि कानपुर, प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विवि प्रयागराज, डॉ. आंबेडकर विवि आगरा तथा ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि लखनऊ की ऑनलाइन समीक्षा करते हुए ये निर्देश दिए। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने वित्तीय लेखों को नियमानुसार रखें और ऑडिट आपत्तियों का निराकरण कराएं। 


अनियमितताओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। वित्तीय अनियमितताएं स्वीकार्य नहीं होंगी। दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह के बाद सभी छात्र-छात्राओं को तत्काल उपाधियां उपलब्ध करा दी जाएं। अवितरित उपाधियों पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उपाधि वितरण के लिए छात्रों का नाम, पता एवं मोबाइल नंबर सहित पूर्ण डाटाबेस बनाया जाए जिससे उसे उनके पते पर भेजा जा सके।


राज्यपाल ने कहा कि विवि में संचालित महिला उत्थान केंद्रों को प्रभावी बनाया जाए। विवि मात्र शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान बनकर ही न रहें। सामाजिक सरोकारों में भी योगदान दें। राज्यपाल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालयों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तुतिकरण को भी देखा। बैठक में विश्वविद्यालयों के कुलपति, अधिकारी व राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव महेश गुप्ता भी मौजूद थे।

यूपी में 25 लाख लोग अनपढ़, डीएलएड प्रशिक्षुओं को दी जाएगी पढ़ाने लिखाने की जिम्मेदारी

यूपी में 25 लाख लोग अनपढ़, डीएलएड प्रशिक्षुओं को दी जाएगी पढ़ाने लिखाने की जिम्मेदारी


प्रदेश सरकार 15 वर्ष से अधिक आयु के 25 लाख निरक्षरों को पढ़ाएगी। इसके लिए तैयारियां जोरों पर है। साक्षरता निदेशालय को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। पहले चरण में 4.20 लाख को पढ़ाया जाएगा। प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग अभी भी निरक्षर हैं। अब केंद्र की पहल पर राज्य सरकार इन्हें पढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार ने जनवरी में सर्वे शुरू कराया था। प्रदेश के कुछ जिलों ने साक्षरता विभाग को अपनी रिपोर्ट दी है। अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में लगभग 25 लाख लोग निरक्षर हैं। इनमें से पहले चरण में केन्द्र सरकार के लक्ष्य के अनुसार लगभग 4.20 लाख लोगों को ही साक्षर किया जाएगा।


इन्हें केंद्र सरकार की एक योजना के तहत पढ़ाया जाएगा। इसमें लखनऊ के लगभग 57 हजार लोग शामिल हैं।डीएलएड की पढ़ाई करने वाले छात्रों को दी जाएगी जिम्मेदारी प्रदेश के
विभिन्न संस्थानों में डीएलएड की पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राओं को निरक्षरों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए आंतरिक मूल्यांकन में छात्रों को अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। 


कुछ मानदेय देने का भी प्रस्ताव है, लेकिन अभी इस पर निर्णय नहीं हो पाया है। शासन के पास मंजूरी के लिए फाइल भेजी गयी है। वहीं, निरक्षरों के लिए विशेष प्रकार की किताबें भी छपाई जाएंगे। किताबों को छपवाने की जिम्मेदारी एससीईआरटी को मिलेगी।


हर निरक्षर का नाम, पता, मोबाइल नंबरजुटाया गया: पहली बार इन्हें पढ़ाने के लिए ठोस योजना तैयार की गई है। हर निरक्षर के नाम, पते के साथ उनके फोन नंबर की भी सूची तैयार हुई है। उनके आधार कार्ड का विवरण भी लिया गया है।


इन्हें पढ़ाने के लिए प्रशिक्षु फोन करके ही जाएंगे। जब लोग दिन में कामकाज से फुरसत में होंगे तब यह उन्हें पढ़ाएंगे। साक्षरता विभाग के इस प्रयास से प्रदेश में निरक्षर कम होंगे।



लखनऊ में 57 हजार निरक्षर चिह्नित
लखनऊ में लगभग 57 हजार निरक्षरों को चिह्नित किए गए हैं। यहां मलिहाबाद क्षेत्र में सबसे ज्यादा 15366 लोग निरक्षर मिले हैं। जबकि दूसरे स्थान पर काकोरी में 11,196 अनपढ़ मिले हैं सबसे कम 804 निरक्षर गौसाईगंज में मिले हैं। दूसरे नंबर पर सबसे कम निरक्षर लोग सरोजनी नगर में हैं। यहां 922 अनपढ़ मिले हैं। | लखनऊ में कुल 19738 पुरुष और 37227 महिलाएं निरक्षर हैं पुरुषों की तुलना में दोगुनी महिलाएं अनपढ मिली है।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने उत्तर प्रदेश सरकार से यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 रद्द करने की अपील की

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने उत्तर प्रदेश सरकार से यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 रद्द करने की अपील की

इंटरमीडिएट परीक्षा रद्द करने की मांग


03 घंटे की परीक्षा को डेढ़ घंटे में कराने की बात कही गई है

27 लाख छात्र-छात्राओं को देनी है यूपी बोर्ड इंटर की परीक्षा


लखनऊ : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने उत्तर प्रदेश सरकार से यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 रद्द करने की अपील की है। संघ के प्रवक्ता डॉक्टर आरपी मिश्रा ने कहा कि वर्तमान में कोरोना संक्रमण के कारण छात्र और अभिभावक दोनों तनाव में हैं। ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से होने वाली पढ़ाई बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए पर्याप्त नहीं है। डॉक्टर आरपी मिश्रा ने कहा कि योगी सरकार इस मुद्दे पर जल्द से जल्द फैसला ले और परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी करे।


डॉक्टर आरती मिश्रा का कहना है कि सीबीएसई ने 12वीं की परीक्षाएं इस साल के लिए रद्द करने का फैसला लिया है। बोर्ड पहले ही दसवीं की परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी कर चुका है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से यूपी बोर्ड की दसवीं की परीक्षा 2021 को रद्द करने की घोषणा भी पहले की जा कि सीबीएसई ने 12वीं की परीक्षाएं इस चुकी है। वहीं सरकार की ओर से जुलाई के मध्य में इंटरमीडिएट की परीक्षा कराने की घोषणा की गई है। सीबीएसई की ओर से बारहवीं की परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद, उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा की ओर से बयान जारी किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ बैठक करके 12वीं परीक्षा पर फैसला लिए जाने की बात कही है।

छात्र अभिभावक भी यही चाहते यूपी बोर्ड की ओर से जारी प्रारूप के मुताबिक 3 घंटे की परीक्षा को डेढ़ घंटे में कराने की बात कही गई है। अभी तक बोर्ड की तरफ से परीक्षा का कोई पैटर्न जारी नहीं किया गया है। मौजूदा हालातों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में करीब 27 लाख छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों की ओर से भी इस परीक्षा को रद्द किए जाने की मांग उठाई जा रही है।

यूपी बोर्ड पहले से कर रहा बिना परीक्षा रिजल्ट जारी करने की तैयारी, प्रदेश भर के स्कूलों से इंटरमीडिएट के छात्रों के 11 वीं के छमाही एवं वार्षिक परीक्षा के अंक मांग चुका है बोर्ड

यूपी बोर्ड पहले से कर रहा बिना परीक्षा रिजल्ट जारी करने की तैयारी, प्रदेश भर के स्कूलों से इंटरमीडिएट के छात्रों के 11 वीं के छमाही एवं वार्षिक परीक्षा के अंक मांग चुका है बोर्ड

सीबीएसई, सीआईएसई द्वारा 12 वीं की परीक्षा निरस्त करने के बाद अब यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षा रद्द करने की मांग उठने लगी है। दोनों बोर्डों ने भले ही अपनी परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा एक जून को की, लेकिन यूपी बोर्ड ने इससे पहले ही 24 मई को ही इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे छात्रों के 11 वीं के छमाही एवं वार्षिक परीक्षा के अंक मांग लिए थे। ऐसे में देखा जाए तो यूपी बोर्ड पहले ही विचार कर रहा था कि सीबीएसई ने 12 वीं की परीक्षा निरस्त की तो उसको भी यह निर्णय लेना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि यूपी बोर्ड भी बिना परीक्षा लिए रिजल्ट जारी कर सकता है।


यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल की ओर से 24 मई को प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर इंटर के परीक्षार्थियों की 12 वीं के प्री बोर्ड परीक्षा के साथ इन छात्रों के 11 वीं के छमाही एवं वार्षिक परीक्षा के प्राप्तांक एवं पूर्णांक मांगे थे। बोर्ड सचिव ने 12 वीं के छात्रों के अंक वेबसाइट https://upmsp.edu.in/ पर 28 मई तक अपलोड करने का निर्देश दिया था। स्कूलों की ओर से फरवरी 2021 में इंटरमीडिएट में पंजीकृत छात्रों की प्री बोर्ड परीक्षा कराई गई थी।

इसके अलावा बोर्ड सचिव ने 2021 में कक्षा 11 की कृषि भाग-1 की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं की 2020-21 में हुई छमाही परीक्षा के अंक भी वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे। हालांकि बोर्ड की ओर से प्री बोर्ड एवं छमाही के अंक मांगे जाने पर इंटरमीडिएट के रिजल्ट सीधे जारी करने के सवाल पर उस समय सचिव ने इनकार किया था। उनका कहना था कि बोर्ड यह देखना चाह रहा है कि स्कूलों ने फरवरी में प्री बोर्ड परीक्षा कराई है कि नहीं। अब सीबीएसई, सीआईएसई की बारहवीं की परीक्षाएं रद्द की जा चुकी हैं, इसलिए इस बात की प्रबल संभावना है कि यूपी बोर्ड की भी बारहवीं की परीक्षा रद्द हो सकती है।

यूपी बोर्ड को प्रदेश के 32 जनपदों ने नहीं भेजा बारहवीं के परीक्षार्थियों के अंक, बोर्ड सचिव ने दोबारा पत्र जारी कर सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से वेबसाइट पर अंक अपलोड करने को कहा

यूपी बोर्ड को प्रदेश के 32 जनपदों ने नहीं भेजा बारहवीं के परीक्षार्थियों के अंक

बोर्ड सचिव ने दोबारा पत्र जारी कर सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से वेबसाइट पर अंक अपलोड करने को कहा

यूपी बोर्ड की ओर से मांगे जाने के बाद भी प्रदेश के 32 जनपदों के जिला विद्यालय निरीक्षकों ने 12 वीं के छमाही एवं प्री बोर्ड परीक्षा के अंक के साथ 2020 के 11 वीं के छमाही एवं वार्षिक परीक्षा के अंक अपलोड नहीं किए हैं।


बोर्ड सचिव की ओर से जारी पत्र में प्रयागराज, लखनऊ, कौशाम्बी, आगरा सहित 32 जिलों के नाम शामिल हैं। सचिव दिव्यकांत शुक्ल की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षकों से अतिशीघ्र वेबसाइट पर अंक अपलोड करने को कहा गया है। यूपी बोर्ड सचिव की ओर से आनन-फानन में एक बार फिर से बारहवीं के अंक मांगे जाने के बाद अब तय हो गया है कि प्रदेश सरकार हाईस्कूल की तर्ज पर इंटरमीडिएट की परीक्षा निरस्त करके छात्रों को सीधे पास करने जा रही है।

Wednesday, June 2, 2021

कोरोना से शिक्षक ने जीत ली जंग पर जेवर और खेत हो गया गिरवी

शिक्षक ने कोरोना से जिंदगी की जंग तो जीत ली लेकिन जेवर और खेत गिरवी हो गये। इलाज पर 38 दिन में नौ लाख रुपये अस्पताल में खर्च हो गए। अब पोस्ट कोविड कमजोरी से जूझ रहे शिक्षक को समझ में नहीं आ रहा है कि वह पत्नी के जेवर और पुश्तैनी खेत को कैसे छुड़ाएं। इतना ही नहीं मित्रों और रिश्तेदारों से लिया कर्ज भी चुकाने की चिंता सता रही है।


पादरी बाजार में रहने वाले प्राथमिक शिक्षक राजेन्‍द्र लाल 38 दिन बाद अस्‍पताल से घर लौटे तब उन्‍हें पता चला कि उनके इलाज के लिए पत्‍नी ने अपने जेवर गिरवी रख दिए। इसके बाद फिर रुपये की जरूरत पड़ी तो छह बीघा खेत गिरवी रखना पड़ा। मुसीबत की इस घड़ी में कई मित्रों व रिश्‍तेदारों ने भी मदद की।

पिपराइच थाना क्षेत्र के गोलहरा गांव के रहने वाले 48 वर्षीय शिक्षक राजेन्द्र लाल ने बीते दिसंबर में पादरी बाजार में मकान खरीदा है। मकान खरीदने में उनकी पूरी जमा पूंजी खर्च हो गई। लोन भी लेना पड़ा। पत्नी कनकलता ने बताया कि 11 अप्रैल को उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में कोरोना पॉजिटिव मिले तो बेटियां शिवानी, सुदीक्षा और पुत्र शशांक घबरा गए। कनकलता ने सभी को हौसला बंधाया और खुद लग गई इलाज के लिए पैसों के इंतजाम में।

38 दिन में इलाज पर 9 लाख से ज्यादा खर्च हुए अस्पताल से 38 दिन बाद 17 मई को राजेन्‍द्र डिस्‍चार्ज हुए। तब तक इलाज पर करीब 9 लाख से ज्‍यादा खर्च हो चुके थे। इसमें छह लाख रुपये अस्पताल का बिल है जबकि तीन लाख रुपये दवाओं पर खर्च हुए। इसके अन्य अन्य खर्चों का कोई हिसाब नहीं है। कनकलता का कहना है कि राजेन्‍द्र अभी पूरी तरह सामान्‍य नहीं है। उन्‍हें उठने-बैठने के लिए भी किसी की मदद लेनी पड़ रही है।



हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं पूरी हुई 12460 शिक्षक भर्ती, अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत

हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं पूरी हुई 12460 शिक्षक भर्ती, अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत


★ उठाई मांग

• भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने की मांग की गई

• वर्ष 2016 में निकली 12460 शिक्षक भर्ती का मामला गरमाया


2016 में निकली 12460 की शिक्षक भर्ती आज तक लंबित है। 12460 पद में से करीब 6000 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी पहले मिल चुका है। भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगने के कारण भर्ती की प्रक्रिया रुक गई थी जिस पर हाईकोर्ट लखनऊ से भर्ती पूर्ण कराने का आदेश भी दिया जा चुका है। जिसे सरकार द्वारा अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा है । बीटीसी अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी है।


उन्होंने अपील की है सरकार नियमावली और भर्ती प्रक्रिया के मुताबिक 51 जनपद जिला वरीयता के बच्चों के साथ न्याय करते हुए भर्ती को पूरा करें । बीटीसी अभ्यर्थियों ने योगी सरकार से मांग उनकी नियुक्ति प्रक्रिया को अविलम्ब शुरु किया जाए।


ई-मेल भेजने वाले अभ्यर्थियों में संजय कुमार तिवारी, अर्पित श्रीवास्तव, नीरज पाठक, योगेंद्र तिवारी, संजय पाल सहित करीब 3000 बीटीसी अभ्यर्थी शामिल हैं। प्रक्रिया शुरू न होने पर अभ्यर्थियों ने धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

कोरोना काल में विरोध का अड्डा बना ट्विटर : शिक्षक भर्ती, प्रमोशन, कैशलेस इलाज की भी उठ रही मांग

कोरोना काल में विरोध का अड्डा बना ट्विटर : शिक्षक भर्ती, प्रमोशन, कैशलेस इलाज की भी उठ रही मांग


महामारी में लगभग सवा साल से लॉकडाउन, कोरोना कर्फ्यू एवं अन्य प्रतिबंधों के बीच विरोध का सबसे बड़ा अड्डा ट्विटर बनकर उभरा है। सोशल मीडिया के किसी भी दूसरे प्लेटफॉर्म चाहे वह फेसबुक हो, व्हाट्सएप या इंस्टाग्राम वगैरह, सबसे अधिक अभियान ट्विटर पर ही चल रहे हैं।


 इसका सबसे बड़ा कारण ट्वीट री- ट्वीटके चलते कोई भी मुद्दा देश में टॉप ट्रेंड करने लगता है और आम आदमी से लेकर नीति नियंताओं तक का ध्यान उस ओर चला जाता है। मीडिया में भी कवरेज मिल जाती है। डीएलएड, बीटीसी, बीएड और टीईटी/सीटीईटी पास बेरोजगार नई भर्ती के लिए लगातार ट्विटर पर अभियान चला रहे हैं। मंगलवार को भी सुबह 11 बजे से परिषदीय प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अभियान चलाया गया। 


डिजिटल स्ट्राइक करने वाले प्रशिक्षुओं का दावा है कि शिक्षकों के डेढ़ लाख से अधिक पद खाली होने के बावजूद सरकार विज्ञापन जारी नहीं कर रही। 26 मई को योगी रोजगार दो अभियान में एक लाख से ज्यादा ट्वीट हुए। 


69000 भर्ती में आरक्षण की अनदेखी पर भी कई दिनों से ट्विटर पर अभियान चल रहा है। परिषदीय शिक्षकों ने 25 मई को केशलेस ट्रीटमेंट फॉर यूपी टीचर्स नाम से अभियान चलाया जिसे एक लाख से अधिक लोगों ने ट्वीट किया।

1.76 लाख बच्चों को केजी, नर्सरी और कक्षा एक में नहीं हो पाया दाखिला

1.76 लाख बच्चों को केजी, नर्सरी और कक्षा एक में नहीं हो पाया दाखिला


राजधानी में करीब 1.76 लाख छोटे बच्चों को प्ले, केजी, नर्सरी तथा कक्षा एक में दाखिला नहीं मिल पाया है। करीब 26 हजार बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं। प्राइवेट स्कूलों में दो लाख बच्चे हर साल दाखिला लेते थे। प्राइवेट के लगभग 25% यानी 50 हजार का ही दाखिला हो पाया। डेढ़ लाख बच्चों का दाखिला नहीं हो पाया।

2020 में भी सभी बच्चों को स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाया था। अब 2021 में भी अभी तक एडमिशन नहीं हो पाया है। यह वह बच्चे हैं जो पहली बार स्कूल जाने वाले थे। 20,000 से ज्यादा बच्चों का प्ले स्कूलों में दाखिला होना था। जबकि 1.80 लाख बच्चे अन्य बड़े प्राइवेट स्कूलों में केजी, नर्सरी तथा कक्षा 1 में एडमिशन लेते। पिछले वर्ष भी कुछ बच्चों ने तो प्राइवेट स्कूलों में दाखिला ले लिया था कुछ सरकारी स्कूलों में। इस वर्ष सरकारी में कोई एडमीशन नहीं हुआ। जबकि प्राइवेट में लगभग 25 प्रतिशत दाखिला हुआ है।


घरों में ही सीख रहे हैं बच्चे

राजधानी में करीब 1.76 लाख बच्चे घरों में ही खेल कूद रहे हैं। कुछ अभिभावक जहां खुद अपने बच्चों को घरों में पढ़ा रहे हैं वही कुछ पूरी तरह कॉपी किताब से दूर हैं। सरकारी स्कूलों में जो लोग अपने बच्चों का दाखिला चाहते थे उनकी तो बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं हो पा रही है। उनके पास तो कॉपी किताब भी नहीं है।

छोटे बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पाती

छोटे बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पाती। इसलिए भी तमाम अभिभावकों ने प्राइवेट स्कूलों में बच्चों का दाखिला नहीं कराया।


अभिभावक बोले

बच्चे को घर में ही पढ़ा रहे हैं। पिछले वर्ष ही एडमिशन कराना था। लेकिन कोरोना की वजह से नहीं कराया। इस वर्ष अप्रैल से एडमिशन की तैयारी थी लेकिन फिर कोरोना आ गया। बच्चे की पढ़ाई 2 साल लेट हो गई है। -सरिता, इंदिरानगर

मेरा बच्चा साल साल का हो गया है। सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए पिछले साल भेजने वाले थे लेकिन स्कूल बंद हो गया था। इस बार फिर एडमिशन नहीं हो पाया। - राज कुमार, दरोगा खेड़ा, सरोजनी नगर


शिक्षक बोले

इस वर्ष बच्चों का एडमिशन नहीं हो पाया। कोरोना की वजह से काफी दिक्कतें आई हैं। जिन बच्चों का पहले से एडमिशन हुआ था उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। - अमृता भटनागर, प्रिंसिपल, ग्रीन विले स्कूल, आशियाना


राजधानी में करीब एक हजार मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल हैं। इनमें से प्रत्येक में औसतन 200 बच्चे नर्सरी, केजी तथा तथा कक्षा एक में एडमिशन लेते हैं। इस बार केवल 25% बच्चों का ही दाखिला हो पाया। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले करीब डेढ़ लाख बच्चों का एडमिशन नहीं हुआ है। ऑनलाइन छोटे बच्चों की पढ़ाई भी नहीं हो पाती है। इसलिए भी अभिभावकों ने दाखिले से दूरी बनायी। - अनिल अग्रवाल, मैनेजिंग डायरेक्टर, सेंट जोसेफ ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन

मृतक आश्रित शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ ने भी पत्र लिख कर वेतन कटौती हेतु की मनाही।

मृतक आश्रित शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ ने भी पत्र लिख कर वेतन कटौती हेतु की मनाही।


दो बोर्डों के फैसले से यूपी बोर्ड पर भी बढ़ा दबाव, जुलाई के दूसरे सप्ताह में 12वीं की परीक्षा की तैयारी में था बोर्ड, यूपी बोर्ड इंटर के 26 लाख से अधिक बच्चों की बढ़ी बेसब्री

दो बोर्डों के फैसले से यूपी बोर्ड पर भी बढ़ा दबाव, जुलाई के दूसरे सप्ताह में 12वीं की परीक्षा की तैयारी में था बोर्ड, यूपी बोर्ड इंटर के 26 लाख से अधिक बच्चों की बढ़ी बेसब्री

प्रयागराज : 12वीं की बोर्ड परीक्षा निरस्त करने के सीबीएसई और सीआईएससीई के फैसले से यूपी बोर्ड पर भी दबाव बढ़ गया है। सीबीएसई ने ही सबसे पहले हाईस्कूल की परीक्षा निरस्त करने का निर्णय था। उसके बाद एक-एक करके देश के अन्य बोर्ड ने भी परीक्षाएं निरस्त कर दीं। अब 12वीं की भी परीक्षा निरस्त करने के फैसले ने सभी बोर्ड को फिर से सोचने पर विवश कर दिया है ।


इस फैसले के बाद से यूपी बोर्ड के इंटर के 26 लाख से अधिक छात्र, छात्राओं के लिए भी प्रदेश सरकार के आदेश का इंतजार बढ़ गया है। सीबीएसई के फैसले के थोड़ी देर बाद ही दूसरे सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) ने भी वक्तव्य जारी कर परीक्षाएं निरस्त करने का निर्णय ले लिया।

बोर्ड का कहना है कि छात्र छात्राओं, शिक्षकों और अन्य हितधारकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कुशलता उनके लिए प्राथमिकता है।

यूपी में भी उपमुख्यमंत्री और माध्यमिक शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बयान दिया है कि यूपी बोर्ड की कक्षा 12 की परीक्षा के बारे में मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद शीघ्र निर्णय लेंगे।

28 मई को उपमुख्यमंत्री ने हाईस्कूल की परीक्षा निरस्त करते हुए 12वीं की परीक्षा जुलाई के द्वितीय सप्ताह से कराने की घोषणा की थी। अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने 29 मई के आदेश में परीक्षा आयोजित कराने संबंधी प्रस्ताव माध्यमिक शिक्षा निदेशक से मांगा था। लेकिन मंगलवार को परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है।

28 मई को उपमुख्यमंत्री ने हाईस्कूल परीक्षा निरस्त करते हुए 12वीं परीक्षा जुलाई के द्वितीय सप्ताह से कराने की घोषणा की थी।


यूपी बोर्ड : इंटरमीडिएट की परीक्षाएं रद्द कर सकती है सरकार

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर सीबीएसई की परीक्षाएं रद्द करने के लिए अभिभावकों व विद्यार्थियों की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।

अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है कि कोरोना संक्रमण के कारण सीबीएसई की परीक्षाएं रद्द करने का निर्णय देश भर के छात्रों के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे उम्मीद लगाई जा रही है कि यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षाएं भी रद्द हो सकती हैं।

सीबीएसई के बाद सीआईएससीई ने भी 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी है। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिढट परीक्षा के लिए अब विद्यार्थियों की निगाहें मुख्यमंत्री पर है। सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा में लगभग 14 लाख बच्चे बैठने वाले थे जबकि यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट 2021 की परीक्षा में 26, 09,501 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। बोर्ड परीक्षाओं पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री लेंगे।

वार्षिक परीक्षाफल के आधार पर प्रमोट होंगे 9वीं व 11वीं के छात्र, सालभर परीक्षा या असेसमेंट नहीं हुआ तो सामान्य रूप से किया जाएगा प्रोन्नत

वार्षिक परीक्षाफल के आधार पर प्रमोट होंगे 9वीं व 11वीं के छात्र, सालभर परीक्षा या असेसमेंट नहीं हुआ तो सामान्य रूप से प्रोन्नत किया जाएगा

सभी बोर्ड के स्कूलों के लिए निर्देश, किसी ने विशेष नियम बनाए तो वही लागू होंगे।

लखनऊ : 9वीं व 11वीं के छात्र वार्षिक परीक्षाफल के आधार पर अगली कक्षा में भेजे जाएंगे। यदि सालभर कोई परीक्षा या असेसमेंट नहीं हुआ हो तो सामान्य रूप से छात्रों को प्रमोट करने का निर्देश है। शिक्षा विभाग के निर्देशों से सभी स्कूलों को अवगत करा दिया गया है। वहीं, कक्षा 6, 7, 8, 9 और 11 के छात्रों को प्रोन्नत करने के संबंध में यदि किसी प्रकार की शिकायत होगी तो उसकी सुनवाई जिला स्तर की कमेटी करेगी।


माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कक्षा 6, 7, 8 9, और 11 के छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट करने का दिशा-निर्देश जारी किया है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि विभाग के निर्देश के अनुसार कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को सीधे अगली कक्षा में भेजना है। वहीं, कक्षा 9 और 11 के छात्रों को वार्षिक परीक्षाफल के आधार पर प्रमोट किया जाना है। जिन स्कूलों ने वार्षिक परीक्षा नहीं कराई, वे वर्ष भर में कराए गए टेस्ट, प्रोजेक्ट, आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर प्रमोट कर सकते हैं। यदि साल भर इस तरह की कोई शैक्षणिक गतिविधियां नहीं हुई हैं तो सामान्य रूप से छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने का निर्देश है। ये निर्देश सभी बोर्ड के स्कूलों के लिए हैं, लेकिन यदि किसी बोर्ड ने विशेष तौर पर नियम बनाए हैं तो वहां उसी के नियम लागू होंगे।

जिला शुल्क नियामक समिति में करें शिकायत

शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि अगली कक्षा में प्रमोट करने को लेकर छात्र या अभिभावक जिला अधिकारी की अध्यक्षता वाली शुल्क नियामक समिति में शिकायत कर सकते हैं। इसका तीन दिन में निस्तारण होगा 10वीं की बोर्ड परीक्षा निरस्त कर दी गई है। जल्द मूल्यांकन नीति जारी कर छात्रों को कक्षा 11 में प्रमोट कर दिया जाएगा। इसमें भी किसी छात्र या अभिभावक की शिकायत होगी तो उसका भी यही समिति निस्तारण करेगी।

यूपी बोर्ड : डिप्टी सीएम बोले- 12वीं की परीक्षा पर निर्णय हालात का आकलन करने के बाद

यूपी बोर्ड : डिप्टी सीएम बोले- 12वीं की परीक्षा पर निर्णय हालात का आकलन करने के बाद

यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा जुलाई के दूसरे सप्ताह में प्रस्तावित है। प्रदेश के डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि स्थिति की समीक्षा करने के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा।


उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा कराने पर फैसला कोरोना की स्थिति का आकलन करने और मुख्यमंत्री से विचार विमर्श करने के बाद लिया जाएगा। 12वीं की परीक्षा जुलाई के दूसरे सप्ताह में प्रस्तावित है। हालांकि अभी टाइम टेबल जारी नहीं हुआ है।

डिप्टी सीएम ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए विद्यार्थियों के हित में सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में संक्रमण की नियंत्रित स्थिति को देखते हुए अधिकांश जिलों में कोरोना कर्फ्यू खोल दिया गया है। स्थिति के आकलन के बाद अगले कुछ दिनों में इंटरमीडिएट की परीक्षा कराने पर निर्णय लिया जाएगा।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को देखते हुए केंद्र सरकार ने सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी है। इसके बाद यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा के भी रद्द किए जाने को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं जिस पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति की समीक्षा करने के बाद निर्णय लिया जाएगा।

हालांकि, सीबीएसई की परीक्षा को लेकर छात्रों में असमंजस की स्थिति है। उनका कहना है कि हमें किस प्रकार पास किया जाएगा, किसको क्या ग्रेड दी जाएगी, इसको लेकर वह चिंतित हैं। सीबीएसई इसका मूल्यांकन कैसे करेगा, इसका उन्हें इंतजार है। वहीं मेधावी छात्रों का कहना है कि ज्यादा मेहनत करने वालों और कम मेहनत करने वाले छात्रों को एक जैसे ग्रेड या मार्क्स नहीं दिए जा सकते। अगर ऐसा हुआ तो फिर हमारी कड़ी मेहनत का क्या फायदा।

सीबीएसई के बाद आईसीएससी ने रद्द की परीक्षा, अब यूपी बोर्ड को परीक्षा कराना पडे़गा भारी

सीबीएसई के बाद आईसीएससी ने रद्द की परीक्षा, अब यूपी बोर्ड को परीक्षा कराना पडे़गा भारी
 
प्रयागराज  : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से बारहवीं की परीक्षा को निरस्त करने के निर्णय के बाद आईसीएसई ने भी 12 वीं की परीक्षा निरस्त कर दी है। सीबीएसई, आईसीएसई के निर्णय के बाद अब यूपी बोर्ड सहित दूसरे प्रादेशिक बोर्ड को 12 वीं की परीक्षा कराना कठिन होगा।


उत्तर प्रदेश सरकार भले ही यह कह रही है कि जुलाई के दूसरे, तीसरे सप्ताह मे परीक्षा कराने का निर्णय हो सकता है। सीबीएसई और आईसीएसई की ओर से अब केंद्र सरकार के निर्देश के आधार पर परीक्षा परिणाम जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित दूसरी प्रवेश परीक्षाओं को लेकर सरकार को फैसला लेने का समय मिल जाएगा।

Tuesday, June 1, 2021

नहीं होंगी वर्ष 2021 की CBSE कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा, प्रधानमंत्री ने लिया फैसला

नहीं होंगी वर्ष 2021 की CBSE कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा, प्रधानमंत्री ने लिया परीक्षा रद्द करने का फैसला।

CBSE बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं कोरोना के चलते रद्द, पीएम मोदी बोले- छात्रों के हित में लिया गया फैसला

12वीं की परीक्षा रद्द करने का फैसला छात्र हित में : मोदी, मप्र, उत्तराखंड, राजस्थान व गुजरात में 12वीं की भी बोर्ड परीक्षाएं रद


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार द्वारा इस साल सीबीएसई की 12वीं की बोर्ड परीक्षा रद करने का निर्णय एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया के बाद लिया गया और यह छात्रों के हित में सबसे अच्छा कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को देश भर से कई तरह के फीडबैक मिले उन्हीं के आधार पर यह छात्र-हितैषी निर्णय लिया गया।

 
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के बाद कई राज्यों ने 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं रद करने का निर्णय लिया है। ऐसा करने वालों में मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान व गुजरात शामिल हैं। हालांकि, हिमाचल प्रदेश में परीक्षाएं रद करने के निर्णय पर कानूनी मुहर मंत्रिमंडल की बैठक में लगेगी। उधर, इस संबंध में उत्तर प्रदेश, गोवा, बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर व महाराष्ट्र भी जल्द निर्णय लेंगे। मंगलवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक में सीबीएसई की 12वीं की परीक्षाएं रद करने का निर्णय लिया गया था। इसके एक दिन बाद बुधवार को मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकंडरी की परीक्षाएं रद कर दी गई हैं।


सीबीएसई की 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में परीक्षा को लेकर हुई बैठक में यह फैसला किया गया.




CBSE 12th Exam: सीबीएसई बोर्ड की 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी गई है. यह निर्णय पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया. 12वीं की परीक्षा होगी या नहीं इसका रोडमैप तय करने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई थी.











इस बैठक में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा शिक्षा मंत्रालय के स्‍कूली शिक्षा व उच्‍च शिक्षा सचिव शामिल थे. इस बैठक में सीबीएसई के चेयरमैन भी हिस्‍सा ले रहे थे.  इस बैठक में प्रधानमंत्री को परीक्षा के उन सभी विकल्पों की जानकारी भी दी गई, जिन पर पिछले दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में विभिन्न राज्यों और हितधारकों के साथ हुई बैठक में चर्चा हुई थी.


राज्यों से मांगे थे सुझाव
सीबीएसई बोर्ड की 12वीं की परीक्षाओं को लेकर हुई पिछली बैठक में भी शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर व महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के अलावा सभी राज्यों के शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव भी शामिल हुए थे. बैठक में शिक्षा मंत्री निशंक ने राज्यों से 25 मई तक अपने सुझाव देने का आग्रह किया था और कहा था कि इस संबंध में वह एक जून को कोई ऐलान कर सकते हैं लेकिन आज अचानक उनकी तबियत खराब होने के कारण वह इस संबंध में कोई घोषणा नहीं कर सके.


CBSE बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं कोरोना के चलते रद्द, पीएम मोदी बोले- छात्रों के हित में लिया गया फैसला

CBSE 12th Exam 2021 : सीबीएसई 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। यह फैसला पीएम मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार शाम एक अहम बैठक में लिया गया। कोरोना महामारी के अनिश्चितता भरे माहौल और विभिन्न हितधारकों की राय लेने के बाद फैसला किया गया कि इस साल कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी।

सीबीएसई अब 12वीं के छात्रों के रिजल्ट तैयार करने के लिए कदम उठाएगा। यह एक पारदर्शी, वैकल्पिक प्रक्रिया के जरिए एक समय-सीमा के भीतर होगा।

सरकार ने बताया कि पिछले साल की तरह, यदि कुछ छात्र परीक्षा देने की इच्छा रखते हैं, तो स्थिति अनुकूल होने पर सीबीएसई द्वारा उन्हें ऐसा विकल्प प्रदान किया जाएगा।

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "सरकार ने सीबीएसई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। व्यापक विचार विमर्श के बाद हमने छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया है। इससे न सिर्फ छात्रों को सुरक्षा मिलेगी बल्कि उनका भविष्य भी उज्ज्वल रहेगा।"

उन्होंने कहा कि कोरोना (COVID-19) ने अकेडमिक कैलेंडर को प्रभावित किया है और बोर्ड परीक्षाओं का मामला छात्रों, शिक्षकों और पैरेंट्स भारी चिंता पैदा कर रहा था जिसे खत्म किया जाना जरूरी था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी की स्थिति पूरे देश में एक अभूतपूर्व और व्यापक स्थिति है। हालांकि कोरोना के मामलों के नंबर लगातार कम हो रहे हैं। कुछ राज्य इसे प्रभावी ढंग से माइक्रो-कैंटेनमेंट हैंडल कर रहे हैं तो कुछ राज्य अभी भी लॉकडाउन का विकल्प ले रहे हैं। छात्र, शिक्षक और अभिभावक प्राकृतिक रूप से अपनी सेहत को लेकर चिंतित थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों पर ऐसी स्थिति में परीक्षाएं देने दबाव डालना नहीं होना चाहिए।

सरकार के इस फैसले से सीबीएसई कक्षा 12 की परीक्षा देने जा रहे करीब 12 लाख और आईसीएससीई के 4 लाख छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।  यानी इस साल 12वीं के करीब 16 लाख छात्र बिना परीक्षा दिए पास हो सकेंगे।

12वीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द किए जाने पर खुशी जताते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुझे खुशी है कि 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। हम अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित थे। यह बहुत बड़ी राहत है। वहीं, दिल्ली के डिप्टी सीएम और राष्ट्रीय राजधानी के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, ''हम फैसले का स्वागत करते हैं। यह फैसला छात्रों और टीचरों के हित में है। हमने भी यही मांग की थी। पहले की परफॉर्मेंस पर स्टूडेंट्स को मार्क्स मिलने चाहिए।''

बैठक में उन्हें तमाम राज्यों और हितधारकों से मिले सुझावों एवं व्यापक विचार विमर्श से निकल रहे विभिन्न विकल्पों के बारे में बताया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई मीटिंग में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेन्द्र प्रधान, निर्मला सीतारमण मौजूद थे। इसके अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हुए।

इससे पहले 23 मई को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई हाईलेवल मीटिंग के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा था कि 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर एक जून को या इससे पहले अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में भी कहा कि दो दिनों के भीतर 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर फैसला ले लिया जाएगा।

गोरखपुर : परिषदीय विद्यालयों में आपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत 18 पैरामीटर्स का संतृप्तिकरण कराये जाने के सम्बन्ध में

परिषदीय विद्यालयों में आपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत 18 पैरामीटर्स का संतृप्तिकरण कराये जाने के सम्बन्ध में

69000 शिक्षक भर्ती के बचे 5000 पदों के लिए काउंसिलिंग इसी माह

69000 शिक्षक भर्ती के तीसरे चरण की काउंसिलिंग की जल्द संभावना

शिक्षकों के बचे 5000 पदों के लिए काउंसिलिंग इसी माह



लखनऊ : परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69,000 शिक्षकों की भर्ती में खाली रह गए लगभग 5000 पदों पर चयन के लिए इसी माह काउंसिलिंग कराने की तैयारी है। कोराना महामारी के कारण इन पदों पर भर्ती के लिए काउंसिलिंग नहीं हो सकी थी। 

प्रदेश के ज्यादातर जिलों में कोरोना कर्फ्यू से छूट मिलने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग सहायक अध्यापकों के इन रिक्त पदों पर भर्ती की तैयारियां में जुट गया है। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ.सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि इन खाली पदों को भरने के लिए जल्द काउंसिलिंग कराई जाएगी। 

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने बताया कि हन रिक्त पदों पर भर्ती के लिए बेसिक शिक्षा विभाग नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआइसी ) से सॉफ्टवेयर तैयार करा रहा है। यह काम लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही काउंसिलिंग की तारीखें घोषित की जाएंगी। काउंसिलिंग इसी माह कराने की याजना है। 69,000 शिक्षक भर्ती के इन रिक्त पदों को भरने के लिए अप्रैल माह में ही काउंसिलिंग कराने की योजना थी। 

इन रिक्त पदों को 69,000 शिक्षक भर्ती की मेरिट लिस्ट से आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए भरा जाएगा। इनमें से 1133 पद अनुसूचित जनजाति श्रेणी के हैं, जिन्हें उपयुक्त अभ्यर्थियों की अनुपलब्धता के कारण नहीं भरा जा सका है। इन पदों को अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों से ही भरा जाएगा।




परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69,000 शिक्षक भर्ती के तहत हुआ है। दो चरणों की काउंसिलिंग में करीब 64 हजार से अधिक पदों को भरा जा चुका है। रिक्त पदों के लिए तीसरे चरण की काउंसिलिंग होनी है।


 बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री इसका ऐलान कर चुके हैं। परिषद सचिव एनआइसी में रिक्त सीटों के सापेक्ष समय सारिणी बना रहे हैं। पांच हजार पदों पर काउंसिलिंग का कार्यक्रम जारी होगा।

यूपी : माध्यमिक में कोविड/नॉनकोविड के कारण कार्यरत अधिकारी/कर्मचारी एवं राजकीय/अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी की मृत्यु के संबंध में सूचना प्रेषण

यूपी : माध्यमिक में कोविड/नॉनकोविड के कारण कार्यरत अधिकारी/कर्मचारी एवं राजकीय/अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी की मृत्यु के संबंध में सूचना प्रेषण।




अब प्रोन्नत होंगे मदरसा बोर्ड के 10वीं के छात्र, शासन से आदेश आने के बाद होगी घोषणा

अब प्रोन्नत होंगे मदरसा बोर्ड के 10वीं के छात्र, शासन से आदेश आने के बाद होगी घोषणा


लखनऊ। प्रदेश के मदरसों से मुंशी-मौलवी (कक्षा (10) कर रहे विद्यार्थियों को प्रोन्नत किया जा सकता है। कोरोना काल में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद भी से परीक्षा रद्द कर यूपी बोर्ड के कक्षा 10 के छात्रों की तरह 11वीं कक्षा में प्रोन्नति देने पर विचार कर रहा है।


प्रदेश के सभी मदरसों में इस बार मुंशी- मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल में करीब एक लाख 76 हजार छात्र-छात्राएं है। इनमें से करीब एक लाख विद्यार्थी मुंशी मौलवी यानि कक्षा 10 के हैं। प्रदेश सरकार ने कोरोना महामारी के चलते सभी बोर्ड के कक्षा 10 के छात्रों को बिना परीक्षा आयोजित कराए प्रमोट करने का निर्णय लिया है। 


मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने बताया कि सरकार का निर्णय सभी बोर्ड के लिये है। हालांकि कोई आदेश इस संबंध में नहीं आया है आदेश आने के बाद परीक्षा को रद्द करने और छात्रों को प्रोन्नत करने की औपचारिक घोषणा की जाएगी। 

उन्होंने बताया कि मुंशी- मौलवी कक्षा के प्राइवेट तथा आलिम कक्षा (12वीं कक्षा) के छात्रों के बारे में सरकार के आदेश पर अमल होगा। यूपी बोर्ड द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार ही मंशी-मौलवी के छात्र परीक्षा में शामिल नहीं होंगे ।

बेसिक शिक्षकों की अपील की ऑनलाइन सुनवाई शुरू, पहले ही दिन शिक्षकों की 20 अपीलें निस्तारित

बेसिक शिक्षकों की अपील की ऑनलाइन सुनवाई शुरू, पहले ही दिन शिक्षकों की 20 अपीलें निस्तारित


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक शिक्षकों की अपील की आनलाइन सुनवाई शुरू हो गई है। सोमवार को बेसिक शिक्षा परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने प्रयागराज के 15 व हरदोई जिले के पांच शिक्षकों की सुनवाई की। सचिव ने बताया कि सभी 20 प्रकरणों का निस्तारण तत्काल किया गया है। ज्ञात हो कि परिषद सचिव ने गूगल मीट पर पहली बार अपील की सुनवाई की।


शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से परिषद मुख्यालय पहुंचना पड़ता था और एक पक्ष की ही सुनवाई होती थी, शिक्षकों का जवाब बीएसए से पत्र के माध्यम से लेते थे। आनलाइन सुनवाई में बीएसए व कार्यालय सहायक भी जुड़े थे। सुनवाई उन की हुई जिनमें बीएसए ने शिक्षकों को अलग वजहों से निलंबित किया या फिर वेतन रोका था।

मांग : शिक्षामित्रों को जून का भी मिले मानदेय

मांग : शिक्षामित्रों को जून का भी मिले मानदेय


लखनऊ। उप्र. प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने सरकार से शिक्षामित्रों को जून का भी मानदेय देने की मांग की है। संगठन के प्रदेश मंत्री कौशल कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षामित्रों को 11 माह का मानदेय मिलता है, लेकिन जून में स्कूलों में छुट्टी होने से उन्हें मानदेय नहीं दिया जाता है। इससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।


उन्होंने बताया कि संबिदा पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को भी 12 माह का मानदेय मिलता है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों में भी संविदा शिक्षकों को 12 माह का मानदेय मिलता है। इसी आधार पर शिक्षामित्रों को भी 12 माह मानदेय मिलना चाहिए।

शिक्षामित्रों ने सरकार को वादे की दिलाई याद, 24 घंटे में 5 लाख से अधिक ट्वीट्स के जरिये #यूपी_के_शिक्षामित्रों_का_दर्द किया सार्वजनिक

शिक्षामित्रों ने सरकार को वादे की दिलाई याद, 24 घंटे में 5 लाख से अधिक ट्वीट्स के जरिये #यूपी_के_शिक्षामित्रों_का_दर्द किया सार्वजनिक

पांच लाख से अधिक मैसेज पोस्ट कर शिक्षामित्रों ने ट्वीटर पर उठाई अपनी आवाज

 

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षा मित्रों ने सोमवार को घर पर रहते हुए प्रदेश सरकार को विधानसभा चुनाव 2017 मे अपने संकल्प पत्र में किये गये लिखित वादे तथा मा प्रधानमंत्री जी गृहमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी द्वारा किये मौखिक वादे को याद दिलाते हुए बताया की हमारी समस्याओं को सरकार बनने के तीन माह के भीतर हल करने का वादा किया गया था लेकिन आज चार साल से अधिक हो जाने के बाद भी सरकार द्वारा अपना वादा नही पूरा किया गया।


इस बीच आमदनी कम खर्च अधिक के जीवन संघर्ष मे दो हजार से अधिक शिक्षा मित्रों ने अपनी जान भी गवां दी। शिक्षा मित्रों द्वारा वादा याद दिलाने के क्रम मे ट्वीटर पर हैसटैग #यूपी_के_शिक्षामित्रों का दर्द के माध्यम से पांच लाख से अधिक मैसेज कर अपनी पीड़ा से सरकार को अवगत कराते हुए अपनी समस्याओं का जल्द निराकरण का निवेदन किया गया।

शिक्षकों के समान वेतन की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने रखा उपवास

शिक्षकों के समान वेतन की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने रखा उपवास


लखनऊ : नई नियमावली बनाकर शिक्षामित्रों को शिक्षकों की तरह वेतन और अन्य लाभ दिए जाने की मांग करते हुए उप्र दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षामित्रों ने सोमवार को अपने घरों में उपवास किया। संघ ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा है।


 संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि शिक्षामित्र पिछले 21 वर्षों से प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोविड-19 से संक्रमित होकर लगभग 200 से अधिक शिक्षामित्र अपनी जान गंवा चुके हैं। यदि सरकार शिक्षामित्रों को नई नियमावली बनाकर शिक्षकों की तरह वेतन और अन्य लाभ नहीं देती है तो वह उन्हें शिक्षकों की भांति 62 वर्ष तक की सेवा व 12 महीने के हिसाब से प्रतिमाह 35000 रुपये वेतन दे। 


उन्होंने शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए उपमुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी के निर्णय को भी सार्वजनिक करने की मांग की।

हमीरपुर : कस्तूरबा में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु विज्ञप्ति जारी

हमीरपुर : कस्तूरबा में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु विज्ञप्ति जारी



देवरिया : कस्तूरबा में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु विज्ञप्ति जारी

देवरिया : कस्तूरबा में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु विज्ञप्ति जारी




69000 शिक्षक भर्ती: आरक्षण की गड़बड़ियों के खिलाफ अभ्यर्थी पीपीई किट पहन करेंगे प्रदर्शन

69000 शिक्षक भर्ती: आरक्षण की गड़बड़ियों के खिलाफ अभ्यर्थी पीपीई किट पहन करेंगे प्रदर्शन


प्रदेश के 69000 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों ने विरोध शुरू कर दिया है। अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन मीटिंग करके आरक्षण की गड़बड़ी के बारे में चर्चा की। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि प्रदेश सरकार ने जल्द जांच करवाकर चयन से बाहर हो गए पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी तो अभ्यर्थी पीपीई किट पहनकर शिक्षामंत्री आवास, एससीईआरटी पर धरना प्रदर्शन करेंगे। 


पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों ने ट्विटर सहित सभी ऑनलाइन माध्यमों से आवाज उठाएंगे। अभ्यर्थियों का आरोप है कि 69000 शिक्षक भर्ती में पिछड़े अभ्यर्थियों के लगभग 6000 पदों पर घोटाला हुआ है। 2019 में आयोजित इस भर्ती प्रक्रिया में कई लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिसमें से लगभग एक लाख 40 हजार अभ्यर्थी पास हुए थे।

एमआरसी के नाम पर पिछड़े वर्ग की लगभग 6000 सीटों को सामान्य वर्ग से भर दिया। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की कड़ी फटकार के बाद भी प्रदेश सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। बैठक में अमरेंद्र बाहुबली,शोभित सिंह मनोज प्रजापति, सुनीता दक्ष ललित, तूफान यादव  गौरव आदि मौजूद रहे।

University Exam 2021 : विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 13 अगस्त तक करा लेने की योजना

University Exam 2021 : विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 13 अगस्त तक करा लेने की योजना


University Exam 2021 : प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की वार्षिक एवं सेमेस्टर परीक्षाएं 13 अगस्त तक करा लेने की योजना बनाई है। साथ ही परीक्षा का सरलीकरण इस प्रकार किया जाएगा कि एक विषय के सभी प्रश्नपत्रों को शामिल करते हुए एक ही प्रश्नपत्र तैयार किया जाएगा जो बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित होगा। परीक्षा प्रणाली ओएमआर पर आधारित होगी।


सूत्रों के अनुसार, तीन कुलपतियों की कमेटी की सिफारिशों के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस संबंध में जल्द ही शासनादेश जारी कर दिया जाएगा। शासन की मंशा है कि सभी परीक्षाओं के परिणाम 31 अगस्त 2021 तक घोषित कर दिए जाएं। प्रस्ताव में प्रायोगिक परीक्षाओं के बारे में यह व्यवस्था बनाई गई है कि इसमें अंकों का निर्धारण लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाए तथा मौखिक परीक्षा को आवश्यकतानुसार आनलाइन कराया जाए। विश्वविद्यालयों में वार्षिक परीक्षा पद्धति एवं सेमेस्टर परीक्षा पद्धति में छात्रों को प्रोन्नत करने के नियम भी तय कर दिए गए हैं। दोनों के लिए अलग-अलग दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। अंतिम वर्ष एवं अंतिम सेमेस्टर से पूर्व की कक्षाओं के छात्रों को बिना परीक्षा कराए प्रोन्नत किया जाएगा।

सेमेस्टर प्रणाली में होगी यह व्यवस्था
प्रस्ताव में कहा गया है कि ऐसे विश्वविद्यालय जहां स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं हो चुकी हैं तथा द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं सम्पन्न नहीं हुई हैं, वहां उनके प्रथम सेमेस्टर के अंकों के आधार पर उनके द्वितीय सेमेस्टर के परिणाम तथा अंक निर्धारित होंगे। इसी तरह यदि तृतीय एवं विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं हो चुकी हैं तथा चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं नहीं हुई हैं तो तृतीय एवं सेमेस्टर के अंकों के आधार पर चतुर्थ सेमेस्टर के परिणाम एवं अंक निर्धारित होंगे।

वार्षिक परीक्षा प्रणाली में होगी यह व्यवस्था
प्रस्ताव में कहा गया है कि ऐसे विश्वविद्यालय जहां स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष की परीक्षाएं संपन्न नहीं हुई हैं। वहां ऐसे छात्रों को द्वितीय वर्ष में प्रोन्नत कर दिया जाएगा तथा इनकी आगामी द्वितीय वर्ष की परीक्षा के अंकों के आधार पर उनके प्रथम वर्ष का परिणाम एवं अंक निर्धारित होंगे। ऐसे विश्वविद्यालय जहां वर्ष 2020 में प्रथम वर्ष की परीक्षाएं हुई थीं, वहां प्रथम वर्ष के अंकों के आधार पर द्वितीय वर्ष के परिणाम एवं अंक निर्धारित होंगे और तृतीय वर्ष में प्रोन्नत किया जाएगा। इसी तरह ऐसे विश्वविद्यालय जहां 2020 में प्रथम वर्ष की परीक्षाएं नहीं हुई थीं, उनके लिए द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं कराई जाएंगी और परीक्षा परिणाम के आधार पर तृतीय वर्ष में प्रवेश दिया जाएगा। स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्रों को भी द्वितीय वर्ष में प्रोन्नत किया जाएगा। जब वर्ष 2022 में द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं होंगी तो द्वितीय वर्ष के अंकों के आधार पर उन्हें प्रथम वर्ष में अंक प्रदान किए जाएंगे।

यूपी बोर्ड : स्कूलों ने किया नंबर देने में खेल, बिना परीक्षा अपलोड कर दिए वेबसाइट पर अंक

यूपी बोर्ड : स्कूलों ने किया नंबर देने में खेल, बिना परीक्षा अपलोड कर दिए वेबसाइट पर अंक

यूपी बोर्ड के दिशा निर्देश के बाद भी कोरोना के चलते स्कूलों में हाईस्कूल की नहीं हुई छमाही, प्री-बोर्ड परीक्षा

यूपी बोर्ड ने स्कूलों से 20 मई तक 2021 की हाईस्कूल परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के छमाही एवं प्री बोर्ड परीक्षा के अंक वेबसाइट पर अपलोड करने का निदेश दिया था। इसी बीच बोर्ड ने इन छात्रों के नौवी की वार्षिक परीक्षा के अंक भी मांग लिए। इसके बाद स्कूलों की ओर से आनन-फानन में बिना परीक्षा कराए ही दसवीं के छमाही और प्री बोर्ड तथा नौवीं के वार्षिक परीक्षा के अंक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए। मनमाने तरीके से अंक अपलोड करने के खेल में अच्छे विद्यार्थी जहां परेशान हैं तो औसत दर्ज के विद्यार्थी खुश हैं।


2020 के मार्च में कोरोना संक्रमण तेज हो जाने के बाद सरकार ने छठीं से नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा के छात्रों को सीधे अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया था। ऐसे में जब 2020 में नौवीं की वार्षिक परीक्षा हुई नहीं तो स्कूलों ने नंबर कैसे वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। यही हाल 2020-2021 में भी रहा। हाईस्कूल के अधिकांश स्कूलों में छमाही और प्री बोर्ड परीक्षा नहीं हुई, अब बोर्ड की ओर से मांगे जाने पर स्कूलों ने मनमाने तरीके से छात्रों के अंक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए। 

यूपी बोर्ड ने भी सीबीएसई की तर्ज पर हाईस्कूल के छात्रों के छमाही और प्री बोर्ड परीक्षा के अंक के साथ आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर प्रमोट करने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2020 में नौवी की वार्षिक परीक्षा नहीं हुई थी। 2020-21 में भी हाईस्कूल के छात्रों की छमाही एवं प्री बोर्ड परीक्षा नहीं कराई गई है। ऐसे में स्कूल वाले बोर्ड की ओर से अंक अपलोड करने के निर्देश के बाद स्कूलों ने मनमाने तरीके से वेबसाइट पर अंक अपलोड कर दिए। उनका कहना है कि ऐसे में राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में तो छात्रों के हित को लेकर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया जबकि वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधन ने बिना परीक्षा कराए ही छात्रों को मनमाने अंक दे दिए। उनका कहना है कि ऐसे में मेधावी छात्रों का नुकसान होगा।