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Monday, December 9, 2024

62 हजार ऐडेड माध्यमिक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बहाली का प्रस्ताव, निलंबन और बर्खास्तगी के मामलों में हुई वृद्धि को देखते हुए लिया गया निर्णय

62 हजार ऐडेड माध्यमिक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बहाली का प्रस्ताव, निलंबन और बर्खास्तगी के मामलों में हुई वृद्धि को देखते हुए लिया गया निर्णय 

■ बोर्ड के विलय से खत्म हुई अपील की व्यवस्था

■ प्रबंधकों की मनमानी कार्रवाई के खिलाफ अपील का था प्रावधान 

■ अब तक चयन बोर्ड ऐसे मामलों की सुनवाई कर लेता था निर्णय


प्रयागराज । प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के तकरीबन 62 हजार प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बहाल करने के लिए शासन ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से प्रस्ताव मांगा है।


इन स्कूलों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों का चयन पहले उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से होता था लेकिन नियोक्ता प्रबंधक होते हैं। चयन बोर्ड अधिनियम-1982 की धारा-21 में यह प्रावधान था कि प्रधानाचार्य या शिक्षक पर कोई कार्रवाई करने से पहले प्रबंधक चयन बोर्ड से अनुमोदन लेते थे लेकिन 21 अगस्त 2023 को विधानसभा से पारित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग विधेयक में यह व्यवस्था नहीं है।


नया आयोग बनने के साथ ही चयन बोर्ड का उसमें विलय हो गया है और उसमें सेवा सुरक्षा का प्रावधान नहीं होने प्रबंधकों की मनमानी बढ़ गई है। प्रदेशभर में शिक्षकों को मनमाने तरीके से निलंबित और बर्खास्त किया जा रहा है। इसके खिलाफ शिक्षक संगठन आंदोलन कर रहे थे। 


माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी की ओर से 21 नवंबर को एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को भेजे पत्र में लिखा है कि इस संबंध में विनियम संशोधन की प्रक्रिया पर विचार-विमर्श किया गया है। शिक्षा निदेशक से इस संबंध में एक समेकित प्रस्ताव मांगा गया है ताकि संशोधन की पूरी कार्यवाही एक साथ की जा सके।


लंबे संघर्ष के बाद चयन बोर्ड की नियमावली बनी थी। जिसमें बिना पूर्वानुमोदन प्रबंधक की कार्रवाई ईशून्य मानी जाती थी। अब मनमाने तरीके से शिक्षकों पर कार्रवाई हो रही है। यदि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बहाल नहीं की गई तो संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। सुरेश कुमार त्रिपाठी, प्रदेश अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ व पूर्व एमएलसी

उत्तर प्रदेश में खुलेंगे नए विश्वविद्यालय और कालेज, केंद्र सरकार द्वारा उच्च शिक्षा में पिछड़े राज्यों में खोले जाएंगे ये संस्थान

उत्तर प्रदेश में खुलेंगे नए विश्वविद्यालय और कालेज, केंद्र सरकार द्वारा उच्च शिक्षा में पिछड़े राज्यों में खोले जाएंगे ये संस्थान

• तैयारी में जुटा शिक्षा मंत्रालय जल्द हो सकती है घोषणा


नई दिल्ली: नए केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों को खोलने की घोषणा के बाद केंद्र सरकार उच्च शिक्षा में पिछड़े राज्यों में जल्द ही नए विश्वविद्यालयों और कालेजों को खोलने की घोषणा करेगी। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। इन संस्थानों को उन राज्यों और जिलों में खोला जाएगा, जिनका उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) राष्ट्रीय औसत से कम है या जहां उच्च शिक्षा हासिल करने योग्य आबादी यानी 18 से 23 वर्ष की उम्र के प्रति एक लाख युवाओं पर इनकी संख्या काफी कम है। इन मानकों पर बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा व छत्तीसगढ़ जैसे राज्य फिट बैठ रहे हैं। क्षमता विकास के लिए बड़ी संख्या में उच्च शिक्षण संस्थानों को अपग्रेड करने की भी योजना है।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) के तहत वर्ष 2035 तक देश में उच्च शिक्षा के जीईआर को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने यह पहल की है। सूत्रों की मानें तो अगले 10 सालों में उच्च शिक्षा को विस्तार देने का रोडमैप तैयार लिया गया है।


कुछ संस्थान खुद खोलेगा मंत्रालय

इनमें पहला कदम इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने का है। इसमें नए विश्वविद्यालय और कालेजों को खोलना शामिल है। मंत्रालय इनमें कुछ संस्थान खुद खोलेगा। कुछ संस्थानों को खोलने के लिए राज्यों को मदद देगा। मंत्रालय ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसलिए भी तेजी दिखाई है, क्योंकि यह लक्ष्य काफी चुनौतीपूर्ण है। 

अभी देश में उच्च शिक्षा का जीईआर केवल 28 प्रतिशत है। गौरतलब है कि देश में स्कूली शिक्षा में करीब 26 करोड़ छात्र पंजीकृत हैं, जबकि उच्च शिक्षा में अभी करीब चार करोड़ छात्र ही पंजीकृत है। उच्च शिक्षा में दाखिला लेने के बाद पढ़ाई बीच में छोड़ने और फिर पढ़ाई शुरू करने जैसे पहलों को शिक्षा मंत्रालय शुरू करेगा। साथ ही पढ़ाई छोड़कर यदि वे कुछ काम-धंधा भी करते हैं, तो अब उनका वह अनुभव भी उच्च शिक्षा में जुड़ेगा।

प्रदेश के 8140 केंद्रों पर होगी यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा, अंतिम सूची जारी

प्रदेश के 8140 केंद्रों पर होगी यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा, अंतिम सूची जारी। 

09 दिसंबर 2024
प्रदेश के 8140 केंद्रों पर होंगी यूपी बोर्ड की परीक्षाएं

यूपी बोर्ड ने जारी की परीक्षा केंद्रों की अंतिम लिस्ट, अब नहीं होगा संशोधन

कम हो गए 125 परीक्षा केंद्र

यूपी बोर्ड की वर्ष 2024 की परीक्षा में कुल 8265 केंद्र बनाए गए थे। पिछले साल के मुकाबले इस बार 125 केंद्र कम हो गए हैं। इस वार हाईस्कूल में परीक्षार्थियों की संख्या भी कम हुई है। हाईस्कूल में 256490 परीक्षार्थी घट गए हैं, जबकि इंटरमीडिएट में 163667 परीक्षार्थी बढ़े हैं। कुल परीक्षार्थियों की बात करें तो 92823 परीक्षार्थी कम हुए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा-2024 में कुल 5525342 परीक्षार्थी थे, जबकि 2025 की परीक्षा के लिए 5432519 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।


प्रयागराज। यूपी बोर्ड ने रविवार को वर्ष 2025 की दसवीं व बारहवीं की परीक्षाओं के लिए केंद्रों की अंतिम लिस्ट जारी कर दी। 24 फरवरी से शुरू होने जा रहीं यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 8140 केंद्रों पर आयोजित की जाएंगी। केंद्रों की लिस्ट में अब कोई संशोधन नहीं होगा। इन केंद्रों पर कुल 54 लाख 32 हजार 519 विद्यार्थी परीक्षा देंगे, जिनमें 28 लाख 90 हजार 454 छात्र व 25 लाख 42 हजार 65 छात्राएं हैं।


इससे पूर्व यूपी बोर्ड ने ऑनलाइन माध्यम से 7657 केंद्रों का चयन करते हुए लिस्ट जारी कर आपत्तियां मांगी थीं। सभी जिलों के डीईओएस के माध्यम से आईं आपत्तियों के निस्तारण के बाद बोर्ड परीक्षा-2025 के लिए 8142 केंद्र निर्धारित करते हुए अंतिम रूप से छह दिसंबर तक पुनः आपत्तियां मांगी गई थीं। अंतिम तिथि तक यूपी बोर्ड को कुल 2311 आपत्तियां मिलीं। इनमें से 658 आपत्तियां नए केंद्र बनाने के लिए आई थीं।


बोर्ड सूत्रों के अनुसार अफसरों पर नए केंद्र बनाने के लिए काफी दबाव था। चर्चा है कि दबाव बनाने वालों में जनप्रतिनिधि भी शामिल थे। हालांकि, बोर्ड ने किसी भी तरह के दबाव में न आते हुए लिस्ट में कोई भी नया केंद्र शामिल नहीं किया बल्कि दो केंद्र कम हो गए। अब 8140 केंद्रों पर परीक्षाएं होंगी। जौनपुर व आजमगढ़ के एक-एक परीक्षा केंद्र को लिस्ट से बाहर किया गया है।


यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि सभी आपत्तियों के निस्तारण के बाद दो केंद्र कम किए गए हैं। भूलवश लिस्ट से इन्हें डिलीट नहीं किया जा सका था। अब इन्हें हटा दिया गया है। दोनों केंद्रों के लिए तकरीबन 40-40 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिन्हें पास के ही दूसरे केंद्रों में शिफ्ट किया गया है।




परीक्षा केंद्रों को लेकर यूपी बोर्ड को मिलीं 2311 आपत्तियां

■ पिछले साल की तुलना में डेढ़ गुना अधिक शिकायतें
■ आज अंतिम सूची जारी करेगा यूपी बोर्ड

07 दिसंबर 2024
प्रयागराज। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 के लिए जिलों से निर्धारित केंद्रों को लेकर यूपी बोर्ड को 2311 आपत्तियां मिली हैं। पिछले साल की तुलना में आपत्तियां डेढ़ गुना बढ़ी है। पिछले साल 1500 से 1600 के बीच आपत्तियां मिली थीं। बोर्ड ने प्रधानाचार्यो या प्रबंधकों से कारणों और साक्ष्यों सहित संबंधित विद्यालय की आईडी से अपनी आपत्ति ऑनलाइन पोर्टल पर शुक्रवार की शाम छह बजे तक मांगी थी। विद्यार्थी या अभिभावक की आपत्ति/शिकायत को प्रधानाचार्य के माध्यम से मांगी थी। निर्धारित समयसीमा तक प्रदेशभर के 75 जिलों से कुल 2311 आपत्तियां मिली हैं।

बोर्ड के स्तर से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शनिवार को केंद्रों की अंतिम सूची जारी होगी। जिन शिकायतों में जिले स्तर पर गड़बड़ी मिली है, उनमें संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक से जवाब तलब हो रहा है। उदाहरण के तौर पर किसी स्कूल में गेट है लेकिन ऑनलाइन सूचना में गेट नहीं दर्शाया गया है। स्कूल के कमरे कम कर दिए या फिर फर्नीचर समेत अन्य आधारभूत सूचनाओं में हेरफेर कर दिया गया। इसके चलते भी कई स्कूलों को सेंटर नहीं बनाया गया। उन स्कूलों के प्रबंधकों ने ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज की है। 


गौरतलब है कि बोर्ड ने ऑनलाइन 7,657 केंद्र तय किए थे, जिनमें राजकीय 940, सहायता प्राप्त 3512 और वित्तविहीन 3205 स्कूल हैं। निस्तारण के बाद जिलों से 8142 स्कूलों को केंद्र बनाया गया है। संशोधित सूची में 576 राजकीय, 3447 सहायता प्राप्त और 4119 वित्तविहीन स्कूलों को केंद्र बनाया गया है।



यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए प्रदेश भर में बने 8142 केंद्र, 485 नए केंद्र बने,  सरकारी व एडेड घटे निजी परीक्षा केंद्र बढ़े

प्रयागराज। यूपी बोर्ड की दसवीं व बारहवीं की परीक्षा प्रदेश भर के 8142 केंद्रों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्रों की सूची पर आईं आपत्तियों के निस्तारण के बाद परीक्षा केंद्रों की लिस्ट में 485 नए केंद्र शामिल किए गए हैं। इन पर फिर से आपत्तियां मांगी गईं हैं। अंतिम लिस्ट सात दिसंबर को जारी होगी। हालांकि, केंद्रों की संख्या में अब किसी तरह के फेरबदल की उम्मीद नहीं है। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इस बार 123 केंद्र कम हैं, क्योंकि हाईस्कूल में परीक्षार्थियों की संख्या भी कम हुई है। 


इस बार हाईस्कूल में 25,6490 परीक्षार्थी घटे हैं, जबकि इंटरमीडिएट में 16,3667 परीक्षार्थी बढ़े हैं। कुल परीक्षार्थियों की बात करें तो 92,823 परीक्षार्थी कम हुए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा-2024 में कुल 55,25,342 परीक्षार्थी थे, जबकि 2025 की परीक्षा के लिए 54,32,519 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि परीक्षा केंद्रों की लिस्ट पर छह दिसंबर तक आपत्तियां मांगी गई हैं। 


बोर्ड सात दिसंबर को केंद्रों की अंतिम लिस्ट जारी करने की तैयारी में है। इससे पूर्व यूपी बोर्ड ने ऑनलाइन माध्यम से 7657 केंद्रों का चयन करते हुए लिस्ट जारी कर आपत्तियां मांगी थीं। सभी जिलों के डीईओएस के माध्यम से आपत्तियां के निस्तारण के बाद बोर्ड परीक्षा-2025 के लिए अब 8142 केंद्र निर्धारित किए गए हैं। 


पिछली बार भी आपत्तियों के बाद बढ़े थे 401 केंद्र यूपी बोर्ड परीक्षा-2024 में भी आपत्तियों के निस्तारण के बाद 401 केंद्र बढ़ गए थे और अंतिम लिस्ट में सरकारी व एडेड विद्यालयों की संख्या घटी और निजी विद्यालयों की संख्या बढ़ी थी। 


पिछली बार परीक्षा में सॉफ्टवेयर के माध्यम से यूपी बोर्ड ने 7864 केंद्र निर्धारित किए थे। इनमें 1017 सरकारी, 3537 एडेड व 3310 निजी विद्यालय शामिल थे। आपत्तियों के निस्तारण के बाद जनपद समिति के अनुमोदन पर फाइनल लिस्ट में केंद्रों की संख्या बढ़कर 8265 हो गई थी। इनमें 566 सरकारी, 3479 एडेड व 4120 निजी विद्यालय शामिल थे।


सरकारी व एडेड घटे निजी परीक्षा केंद्र बढ़े

आपत्तियों के निस्तारण से पूर्व यूपी बोर्ड ने ऑनलाइन माध्यम से जिन 7657 परीक्षा केंद्रों का चयन करते हुए लिस्ट जारी की थी, उनमें 940 सरकारी विद्यालयों, 3515 अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों व 3205 वित्त विहीन निजी विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। आपत्तियों के निस्तारण के बाद यूपी बोर्ड ने जो लिस्ट जारी की है, उसमें सरकारी व एडेड विद्यालयों की संख्या कम हो गई है जबकि निजी विद्यालयों की संख्या बढ़ गई है। परीक्षा के लिए निर्धारित 8142 केंद्रों में 576 सरकारी, 3447 एडेड व 4119 निजी विद्यालय शामिल हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्रों की लिस्ट से 364 सरकारी व 65 एडेड विद्यालयों को बाहर करते हुए 914 निजी विद्यालयों को शामिल किया गया है।

CBSE बोर्ड परीक्षा प्रैक्टिकल एक जनवरी से, जानिए कैसे करें तैयारी?

CBSE  बोर्ड परीक्षा प्रैक्टिकल एक जनवरी से, जानिए कैसे करें तैयारी? 


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 10वीं व 12वीं की प्रैक्टिकल परीक्षाओं के अंक छात्रों के फाइनल रिजल्ट बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छात्र अक्सर प्रैक्टिकल एग्जाम के प्रति बेहद लापरवाह रवैया अपनाते हैं। जब समय हाथ से निकल जाता है, तो प्रैक्टिकल एग्जाम में अपने प्रदर्शन को लेकर मलाल करते हैं। अब छात्र ऐसी गलती करने का विचार न करें। बोर्ड प्रैक्टिकल परीक्षाएं एक जनवरी से शुरू हो रही हैं। 14 फरवरी तक चलने वाली प्रैक्टिकल परीक्षाओं में अच्छा स्कोर करने के लिए कुछ टिप्स प्रस्तुत हैं 


कांसेप्ट को क्लियर रखेंः प्रैक्टिकल की तैयारी करने के दौरान आप एक या दो एक्सपेरिमेंट को याद कर सकते हैं, लेकिन सारे प्रयोगों को याद करना आपके लिए मुश्किल होगा और ऐसा करना आपको कंफ्यूज भी कर सकता है। ऐसे में बेहतर होगा कि प्रयोगों को रटने की बजाय आप उनके कांसेप्ट पर फोकस करें। ऐसे उत्तर देने में आपको किसी तरह की परेशानी नहीं होगी और आप अच्छा परफार्म करेंगे।


चरण-दर-चरण जानें प्रक्रिया: किसी भी एक्सपेरिमेंट को पूरा करने के लिए सही प्रक्रिया को चरण-दर- चरण अपनाना जरूरी है। ऐसे में प्रयोगों की सभी प्रक्रियाओं को अच्छी तरह से पढ़ें। प्रयोगों को तैयार करते समय कक्षा में किए गए हर चरण को याद करने का प्रयास करें। अगर एक्सपेरिमेंट याद नहीं आता है, तो आप इसके लिए आनलाइन वीडियो की मदद ले सकते हैं।

डायग्राम की करें प्रैक्टिसः हर छात्र डायग्राम बनाने में अच्छा नहीं होता और यह सच परीक्षक को पता होता व है। ऐसे में छात्र अपनी ड्राइंग स्किल को लेकर किसी तरह की चिंता न करें। आपको बस इस बात का ध्यान रखना है कि आपका डायग्राम साफ- सुथरा होना चाहिए और उस पर नेमिंग अच्छे से होनी चाहिए। इसे तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका बार-बार डायग्राम बनाना है।

फाइलों को रखें तैयारः प्रैक्टिकल एग्जाम से पहले अपनी फाइल को पूरी तरह से तैयार कर शिक्षक से  चेक करा लें।


Sunday, December 8, 2024

अब विधानसभा में उठेगा जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती का मुद्दा, चार साल से नियुक्ति मांग रहे परीक्षा में सफल 43 हजार अभ्यर्थी

अब विधानसभा में उठेगा जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती का मुद्दा, चार साल से नियुक्ति मांग रहे परीक्षा में सफल 43 हजार अभ्यर्थी



प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक के पदों पर चार साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों का मुद्दा सदन में उठेगा। इसके लिए अभ्यर्थियों ने विधानसभा व विधान परिषद सदस्यों से संपर्क किया है। इन पदों की लिखित परीक्षा में सफल तकरीबन 43 हजार अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटकी है।


जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती का विज्ञापन 2021 में आया था, जिसके तहत प्रधानाध्यापक के 390 व सहायक अध्यापक के 1507 पदों पर भर्ती होनी थी। इसके लिए अक्तूबर 2021 में परीक्षा कराई गई और नवंबर 2021 में परिणाम भी आ गया। हालांकि, परिणाम में गड़बड़ी को लेकर कई अभ्यर्थी न्यायालय चले गए और चयनितों की नियुक्ति प्रक्रिया बीच में ही रोक दी गई।


उच्च न्यायालय ने 15 फरवरी 2024 को समस्त रिट खारिज कर भर्ती का मार्ग प्रशस्त कर दिया। अब आरक्षण नीति स्पष्ट न होने से चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटकी है। लिखित परीक्षा में 43 हजार से अधिक अभ्यर्थी सफल हुए थे, जिन्हें काउंसलिंग में शामिल होना है। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम लिस्ट जारी की जाएगी। नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के लिए शासन की ओर से चार बार महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पांच बार पत्र भेजा जा चुका है।


जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती के प्रदेश अध्यक्ष नागेंद्र पांडेय का कहना है कि 16 दिसंबर से विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है। इसमें जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती 2021 का मुद्दा उठाने के लिए विधानसभा व विधान परिषद के सदस्यों से वार्ता की जा रही है। शिक्षक विधायक राज बहादुर सिंह चंदेल से छह बार वार्ता हुई है। अन्य कई विधायकों से भी इस बारे में बात की गई है। शिक्षक विधायक ने पिछली बार विधानपरिषद में जोर-शोर से यह मुद्दा उठाया था।


उस समय शिक्षा मंत्री ने जबाव दिया था कि कोर्ट से आदेश आते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। कोर्ट से ऑर्डर आए हुए लगभग दस महीने हो गए हैं, पर अभी तक भर्ती एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। इसके कारण लगभग 43 हजार अभ्यर्थी मानसिक रूप से परेशान हैं। इस भर्ती को आए चार वर्ष होने जा रहे हैं और अभी तक उसमें आरक्षण का पेच, सीटों की संख्या का निर्धारित न होना, मेरिट कैसे बनेगी आदि समस्याओं का निराकरण नहीं हो सका है।

यूपी बोर्ड परीक्षा से पहले राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को देना होगा ऑनलाइन इम्तिहानकक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थी होंगे परीक्षा में शामिल, यहां होगा पंजीकरण

यूपी बोर्ड परीक्षा से पहले राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को देना होगा ऑनलाइन इम्तिहानकक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थी होंगे परीक्षा में शामिल



🔴 यहां होगा पंजीकरण
परीक्षा के लिए https://gov.embibe.com/uttarpradesh/student/in-hi/ पर जाकर अपने मोबाइल नंबर से  पंजीकरण करना होगा। कॉलेजों के प्रधानाचार्य व शिक्षकों को भी अपना पंजीकरण करना होगा।


प्रयागराज। बोर्ड परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को अपनी तैयारियों को परखने का मौका मिलेगा। इसके लिए कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों की ऑनलाइन परीक्षा का आयोजन होगा। परीक्षा 12 से 16 दिसंबर के बीच आयोजित होगी। इसमें कमजोर विद्यार्थियों को अपनी कमियों में सुधार करने का मौका मिलेगा और विद्यालय स्तर पर भी उनकी तैयारियों को दुरुस्त कराया जा सकेगा।


यूपी बोर्ड परीक्षा के आयोजन को लेकर केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12 तक के बच्चों को परीक्षा के लिए अपनी तैयारियों को परखने का मौका भी दिया जा रहा है। जिसमें विद्यार्थी अपनी तैयारियों का परख सकेंगे। इसके लिए एक ऑनलाइन परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। कक्षा नौ व दस में गणित और विज्ञान, कक्षा 11 व 12 में गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान व जीव विज्ञान और आईआईटी व नीट की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। ऑनलाइन परीक्षा सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक दी जा सकेगी।




यूपी बोर्ड परीक्षा से पहले अब ऑनलाइन इम्तिहान, राजकीय विद्यालयों का परिणाम सुधारने के लिए की गई पहल

■ कक्षा नौ से 12 वीं तक के विद्यार्थियों की दिसंबर में होगी परीक्षा

■ ऑनलाइन परीक्षा में सिर्फ गणित और विज्ञान से पूछे जाएंगे प्रश्न


प्रयागराज । बोर्ड परीक्षा में सूबे के राजकीय विद्यालयों का प्रदर्शन सुधारने की कवायद राज्य परियोजना कार्यालय ने शुरू कर दी है। यूपी बोर्ड परीक्षा से पहले कक्षा 9 से 12वीं तक के छात्र- छात्राओं को पहली बार ऑनलाइन परीक्षा देनी होगी। गणित और विज्ञान विषय की ऑनलाइन परीक्षा होगी। यह परीक्षा 12 दिसंबर से प्रस्तावित है। इसके बाद रिपोर्ट कार्ड दिया जाएगा। कमजोर विद्यार्थियों की एक माह बाद फिर से परीक्षा कराई जाएगी। इस संबंध में अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा माध्यमिक ने सभी डीआईओएस को पत्र जारी कर निर्देश दिया है।


राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर का आकलन करने, सीखने के परिणामों में वृद्धि करने तथा उनकी अंतिम परीक्षाओं की तैयारी को सशक्त बनाने के लिए यह परीक्षा आयोजित की जाएगी। कक्षा 9-10वीं में गणित एवं विज्ञान और 11वीं व 12वीं में गणित, भौतिक, रसायन एवं जीव विज्ञान विषय की परीक्षा कराई जाएगी। आईआईटी, जेईई और नीट की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन विशेष परीक्षा भी प्रस्तावित है।


शिक्षकों का 25 तक होगा पंजीकरण

परीक्षा के लिए प्रधानाचार्य और शिक्षक 25 नवंबर तक पंजीकरण कर सकते हैं। विद्यार्थियों का पंजीकरण 26 से 30 नवंबर तक https://gov.embibe.com/uttarpradesh/student/in-hi/ पर होगा।


घर से भी दे सकेंगे परीक्षा

ऑनलाइन परीक्षा विद्यार्थी घर से भी दे सकेंगे। विद्यार्थी विद्यालय परिसर स्थित कम्प्यूटर लैब अथवा घर में उपलब्ध उपकरणों के माध्यम से परीक्षा दे सकेंगे। सभी विद्यालय के संबंधित विषय के शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि उनके विषय के सभी विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हों।


यह है कार्यक्रम

12 दिसंबर को कक्षा नौ व 10 की गणित, कक्षा 11-12 की भौतिक विज्ञान, 13 दिसंबर को कक्षा 9-10 की विज्ञान, कक्षा 11-12 की रसायन विज्ञान, 14 दिसंबर को कक्षा 11-12 गणित व जीव विज्ञान, 15 दिसंबर को कक्षा 11-12 आईआईटी, जेईई और नीट की परीक्षा होगी।


एक सप्ताह में रिजल्ट, कमजोर छात्र के लिए अतिरिक्त कक्षा

परीक्षा सम्पन्न होने के एक सप्ताह के अंदर विद्यार्थी की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जिसमें उनके अंक, कमजोर और सुदृढ़ विषयों का समावेश होगा। यह रिपोर्ट संबंधित विद्यालय से साझा की जाएगी। कमजोर छात्र की एक माह तक अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर उसे दोबारा परीक्षा में शामिल होने के योग्य तैयार किया जाए। पुनः परीक्षा के बाद विद्यार्थी की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा।

महिला व बाल संरक्षण गृहों को गोद लेंगे अधिकारी, मुख्य सचिव ने जारी किए निर्देश

महिला व बाल संरक्षण गृहों को गोद लेंगे अधिकारी, मुख्य सचिव ने जारी किए निर्देश


लखनऊ। प्रदेश में संचालित सरकारी महिला और बाल संरक्षण गृहों को सभी विभाग के अधिकारियों द्वारा गोद लिया जाएगा। एक अधिकारी को कम से कम एक संरक्षण गृह को गोद लेना होगा। इस पहल से संरक्षण गृहों में रहने वाली निराश्रित महिलाओं व बच्चों को पारिवारिक माहौल देने  का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने सभी अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। 


गोद लेने वाले अधिकारियों के परिजनों से अपेक्षा की गई है कि वे इन बच्चों के साथ खेलें और पढ़ाएं। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने स्टांप एवं पंजीकरण, राज्य कर विभाग, महिला कल्याण, समाज कल्याण सहित सभी  विभागों के प्रमुखों को पत्र भेजकर चार तरह के सहयोग की अपेक्षा की गई है। 


प्रदेश के 62 बाल संरक्षण गृह और 09 महिला संरक्षण गृह में रहने वाले बच्चों और महिलाओं की मदद का जिक्र है। इन स्थानों पर विषम स्थितियों से निकले बच्चे और महिलाओं को रखा जाता है। उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए ये चार सहयोग मांगे गए हैं। इन स्थानों पर रहने वाले बच्चों और महिलाओं के मन की बात सुनने के लिए अधिकारी वहां जाएं और कम से कम एक गृह को गोद लें। 


प्रशासनिक अधिकारी स्वयं या अपने परिवार के साथ होली, दिवाली, ईद, क्रिसमस आदि त्योहार का कुछ समय निराश्रितों के साथ बिताएं, जिससे बच्चों को अपनेपन का एहसास होगा। अधिकारी इन गृहों में रहने वाले बच्चों व महिलाओं को शैक्षिक रूप से सक्षम बनाएं। 


Saturday, December 7, 2024

स्कूल में घुसकर स्टूडेंट्स के सामने कॉलर पकड़कर प्रधान ने की प्रधानाध्यापक की जूतों से पिटाई, रजिस्टर फाड़े, गांव में मुनादी कराकर विद्यालय प्रबंध समिति का चुनाव कराना पड़ा भारी

दो दिन में हो प्रधान की गिरफ्तारी नहीं तो स्कूल बंद, प्रधानाध्यापक को पीटने का मामला, शिक्षक संघ ने दी चेतावनी

🆕 अपडेट 
मऊरानीपुर। ग्राम धमनापायक के उच्च प्राथमिक विद्यालय में बृहस्पतिवार को प्रधान कृपेंद्र पटेल द्वारा प्रधानाध्यापक की जूतों से पिटाई के मामले ने तूल पकड़ लिया। शुक्रवार को शिक्षकों ने दो दिनों में ग्राम प्रधान की गिरफ्तारी की मांग करते हुए एसडीएम और सीओ को ज्ञापन सौंपा। चेतावनी देते हुए कहा कि गिरफ्तारी न होने पर जनपद के सभी स्कूलों पर तालाबंदी की जाएगी। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि घटना से सभी शिक्षकों में भय व्याप्त है। इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। पुलिस को आरोपी ग्राम प्रधान को जल्द से जल्द गिरफ्तार करना चाहिए।

नहीं तो शिक्षक आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस दौरान माधव मिश्रा, अजय सिंह, धीरेंद्र प्रताप सिंह, रामस्वरूप पाल, पंकज पाठक, कुलदीप, हरीशंकर यादव आदि उपस्थित रहे।


मामले की जांच के लिए लहचूरा के थानाध्यक्ष पंकज मिश्र भी स्कूल पहुंचे। उन्होंने अध्यापिका रीना से पूछताछ की। रीना ने बताया कि जब ग्राम प्रधान ने प्रधानाध्यापक को पीटना शुरू किया तो वह खाना खा रहीं थीं। यह देखकर रीना घबरा गई। उन्होंने घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद प्रधान ने उन्हें धमकाया। वहीं, विद्यालय में शुक्रवार को मौजूद पांच अध्यापकों ने पुलिस से प्रधान की गिरफ्तारी की मांग की। जबकि पीड़ित प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार विद्यालय में मौजूद नहीं रहे।


एसडीएम और सीओ पहुंचे स्कूल, ली जानकारी

एसडीएम गोपेश तिवारी और सीओ लक्ष्मीकांत गौतम शुक्रवार सुबह धमनापायक के विद्यालय पहुंचे। यहां अधिकारियों ने अध्यापकों और बच्चों से घटना के बारे में जानकारी ली।

मामले की जांच के लिए मैं स्कूल गया था। वहां अध्यापकों से पूछताछ की। आरोपी प्रधान को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - पंकज मिश्र, थानाध्यक्ष, लहचुरा



स्कूल में घुसकर स्टूडेंट्स के सामने कॉलर पकड़कर प्रधान ने की प्रधानाध्यापक की जूतों से पिटाई, रजिस्टर फाड़े, गांव में मुनादी कराकर विद्यालय प्रबंध समिति का चुनाव कराना पड़ा भारी


झांसी में ग्राम प्रधान ने स्कूल में घुसकर स्टूडेंट्स के सामने कॉलर पकड़कर प्रधानाध्यापक की जूतों से पिटाई कर दी। प्रबंध समिति रजिस्टर और अटेंडेंस रजिस्टर भी फाड़ दिए। शिक्षिका मारपीट का वीडियो बनाने लगी तो उसे जान से मारने की धमकी दी। इस घटना से बच्चे सहम गए और जोर-जोर से रोने लगे। स्कूल से जाते समय ग्राम प्रधान ने शिकायत करने पर प्रधानाध्यापक समेत पूरे स्टॉफ को जान से मारने की धमकी दी। डर के कारण प्रधानाध्यापक ने रविवार तक की छुट्‌टी ले ली है। प्रधान के प्रधानाध्यापक से भिड़ने का वीडियो भी सामने आया है। पुलिस ने केस दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी है।


बताया जा रहा है कि प्रधानाध्यापक ने गांव में मुनादी कराकर गुरुवार को स्कूल की प्रबंध समिति का चुनाव कराया था। समिति का गठन भी हो गया था। इस बात से ग्राम प्रधान नाराज था। पूरा मामला लहचूरा थाना क्षेत्र के धमनापायक गांव का है।


धमनापायक के उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार पटेल ने बताया, हर दो साल में स्कूल में प्रबंध समिति का गठन हाेता है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 9 सदस्यों की समिति स्कूल स्टूडेंट्स के पेरेंट्स चुनते हैं। इस बार प्रधान कृपेंद्र पटेल चाहते थे कि दबंगई के दम पर समिति में उनके आदमी पदाधिकारी बन जाए। लेकिन मैंने मना कर दिया।


हमने पहले गांव में मुनादी कराई और दो दिन बाद गुरुवार को पेरेंट्स की मीटिंग हुई। 10 बजे से 11:45 बजे तक हुई मीटिंग में प्रबंध समिति का गठन हो गया। इसमें आपसी सहमति से मानवेंद्र पटेल को अध्यक्ष और रामकुमारी को उपाध्यक्ष बनाया गया। 9 सदस्य भी बनाए गए। इससे पहले भी मानवेंद्र पटेल अध्यक्ष थे।


समिति के गठन के कुछ देर बाद ही दोपहर लगभग 12 बजे ग्राम प्रधान कृपेंद्र पटेल स्कूल पहुंचे। प्रबंध समिति का गठन करने पर मेरे साथ गाली गलौच करने लगे। जब हमने अभद्रता करने का विरोध किया तो उन्होंने प्रबंध समिति रजिस्टर और छात्र उपस्थिति रजिस्टर को फाड़ दिया।


फिर मेरा कॉलर पकड़ लिया और मुझे जूता मारने लगे। मैं चिल्लाते हुए बाहर भागा तो पीछा करके पकड़ लिया। वहां बच्चों के सामने फिर मारपीट की।


महिला टीचर ने वीडियो बनाया तो धमकाया पीड़ित ने बताया कि स्कूल की अनुदेशिका रीना मोबाइल से वीडियो बनाने लगी तो ग्राम प्रधान ने शिक्षिका को जान से मारने की धमकी दी। उसका दौड़कर मोबाइल छीनने का प्रयास किया। फिर पूरे स्टाफ को जान से मारने की धमकी देकर भाग गया।


घटना के बाद बच्चे रोने लगे और स्टाफ बुरी तरह डर गया। 112 पर कॉल करने पर पुलिस आ गई। शाम को पूरा स्टाफ प्रधानाध्यापक के साथ लहचूरा थाने पहुंच गया। वहां आरोपी के खिलाफ शिकायत दी। पुलिस ने देर शाम ग्राम प्रधान कृपेंद्र पटेल के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।


जब तक प्रधान जेल नहीं जाएगा हम स्कूल नहीं जाएंगे

स्कूल में वर्तमान में 144 बच्चे पढ़ते हैं। इनके पेरेंट्स ही प्रबंध समिति को चुनते हैं। इसके लिए 50 प्रतिशत पेरेंट्स का होना जरूरी हाेता है। हर माह प्रबंध समिति की बैठक होती हैं। इसमें स्कूल की समस्याओं को दूर किया जाता है। साथ ही जो बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं उनको स्कूल पहुंचाने के लिए समिति पेरेंट्स से बात करती है।

इधर, घटना के बाद स्कूल स्टाफ में रोष व्याप्त है। अनुदेशिका रीना का कहना है कि प्रधान पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो हम लोग स्कूल नहीं खोलेंगे। न ही शैक्षणिक कार्य होंगे। क्योंकि, हम लोगों को रास्ते में अनहोनी होने का डर है, हम लोग बिल्कुल स्कूल नहीं आएंगे, जब तक वो जेल नहीं जाएंगे।


शिक्षिका ने कहा, हम लोग स्कूल नहीं जाएंगे, जान का खतरा है।
लहचूरा थाना प्रभारी पंकज मिश्रा ने बताया कि स्कूल का स्टाफ आया था। प्रधानाध्यापक की तहरीर पर आरोपी पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वीडियो भी उपलब्ध कराया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



परिषदीय शिक्षकों को जबरन किया गया था कार्यमुक्त, और अब चहेते शिक्षकों का परस्पर तबादला हो गया निरस्त, तबादले को लेकर लंबित याचिका पर 12 दिसंबर को है हाईकोर्ट में सुनवाई

परिषदीय शिक्षकों को जबरन किया गया था कार्यमुक्त, और अब चहेते शिक्षकों का परस्पर तबादला हो गया निरस्त,  तबादले को लेकर लंबित याचिका पर 12 दिसंबर को है हाईकोर्ट में सुनवाई


प्रयागराज । परिषदीय शिक्षकों के अंतरजनपदीय पारस्परिक तबादले में भी मनमानी सामने आने लगी है। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने 19 जून 2024 को कुल 1398 जोड़े (2796 शिक्षकों) के अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण के आदेश जारी किए थे। पहली बार एक से दूसरे जिले में तबादला करने की बजाय सीधे एक से दूसरे स्कूल में स्थानांतरण करने से शिक्षकों में नाराजगी थी।


तमाम शिक्षकों ने कार्यभार ग्रहण करने से इनकार कर दिया तो कार्रवाई की धमकी देते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से शिक्षकों को जबरन कार्यमुक्त करवाया गया था। खास बात यह है कि सचिव स्वयं शिक्षकों का तबादला आदेश निरस्त कर रहे हैं। फर्रुखाबाद से फिरोजाबाद स्थानांतरित प्रदीप सिंह राजपूत और उनके जोड़े के रूप में फिरोजाबाद से फर्रुखाबाद स्थानांतरित पुष्पेन्द्र कुमार का तबादला आदेश 23 अक्तूबर को निरस्त कर दिया गया। 

यह स्थिति तब है जबकि तबादले को लेकर शिक्षकों की याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है। स्थानांतरण केइस निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर 12 दिसंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।

भाषा विश्वविद्यालय से मदरसे ले सकेंगे कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों के लिए मान्यता, शासन स्तर पर हो रहा विचार

भाषा विश्वविद्यालय से मदरसे ले सकेंगे कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों के लिए मान्यता, शासन स्तर पर हो रहा विचार


लखनऊ। मदरसे भविष्य में कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों के लिए मान्यता ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय से ले सकेंगे। इसके लिए शासन स्तर पर विचार हो रहा है। लेकिन, इन पाठ्यक्रमों की मान्यता लेने वाले मदरसों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के उच्च शिक्षा के मानक पूरे करने होंगे।


उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम-2004 और संबंधित नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने फैसले में कहा है कि बारहवीं कक्षा से आगे कामिल और फाजिल का प्रमाणपत्र देने वाले मदरसों को मान्यता नहीं दी जा सकती। क्योंकि, उच्च शिक्षा यूजीसी अधिनियम के तहत संचालित होती है, इसलिए यूपी मदरसा अधिनियम और संबंधित नियमावली से कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों के संबंध में किए गए प्रावधान हटाए जाएंगे। 


शासन के सूत्रों के मुताबिक, कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों को लेकर मंथन चल रहा है। इन पाठ्यक्रमों के संचालन की मान्यता उच्च शिक्षा विभाग ही दे सकता है। इसलिए इन पाठ्यक्रमों को भाषा विवि से जोड़ने पर विचार हो रहा है। 



मदरसा अधिनियम में संशोधन करेगी प्रदेश सरकार, अधिनियम के दायरे से बाहर की जाएंगी कामिल और फाजिल की डिग्रियां

मदरसा अधिनियम और नियमावली सिर्फ बारहवीं कक्षा तक ही सीमित रहेगी, शासन स्तर पर तैयार किया जा रहा प्रस्ताव


लखनऊ। प्रदेश सरकार उप्र मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम - 2004 में संशोधन करेगी। इस अधिनियम के दायरे से कामिल (स्नातक) और फाजिल (स्नातकोत्तर) डिग्रियां बाहर की जाएंगी। इसके लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।


सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में दिए गए फैसले में मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम की सांविधानिक वैधता को बरकरार रखा गया है। उससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसा अधिनियम को असांविधानिक करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा था कि यूपी मदरसा अधिनियम के सभी प्रावधान संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करते हैं।


साथ ही अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बारहवीं कक्षा से आगे कामिल और फाजिल का प्रमाणपत्र देने वाले मदरसों को मान्यता नहीं दी जा सकती। क्योंकि, उच्च शिक्षा यूजीसी अधिनियम के तहत संचालित होती है। वहीं, उप्र मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम-2004 में परिषद की शक्तियां बताई गई हैं। इसमें कहा गया है कि मदरसा बोर्ड मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं का संचालन करेगा।


इस एक्ट के आधार पर ही उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा  विनियमावली, 2016 तैयार की गई थी। अब शासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए मदरसा अधिनियम और नियमावली में से कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों के बारे में दिए गए सभी प्रावधान हटाएगा। यह अधिनियम और नियमावली सिर्फ बारहवीं कक्षा तक ही सीमित रहेगी।

Friday, December 6, 2024

अब घर बैठे सांकेतिक भाषा में स्कूली पढ़ाई करेंगे विशेष छात्र, सांकेतिक भाषा के पहला पीएम ई-विद्या डीटीएच चैनल होगा शुरू

अब घर बैठे सांकेतिक भाषा में स्कूली पढ़ाई करेंगे विशेष छात्र, सांकेतिक भाषा के पहला पीएम ई-विद्या डीटीएच चैनल होगा शुरू 


नई  दिल्ली। अब बोलने और सुनने में असमर्थ स्कूली छात्र घर बैठे टीवी पर सांकेतिक भाषा में निःशुल्क पढ़ाई कर सकेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय सांकेतिक भाषा के पहले पीएम ई-विद्या डीटीएच चैनल शुक्रवार को शुरू होगा। 


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान और केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी इसका उद्घाटन करेंगे। इसके लिए राष्ट्रीय और राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रमों के आधार पर विषय सामग्री तैयार की जा रही है। खास बात यह है कि इसमें स्थानीय सांकेतिक भाषाओं को भी जगह मिलेगी, ताकि छात्र आसानी से अपनी मातृभाषा में समझ सकें। 


अब 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी किसी भी संकाय से कर सकेंगे स्नातक, 12वीं के अनिवार्य विषय की नहीं रहेगी बाध्यता, अपनी रुचि से कला, विज्ञान या कॉमर्स में कोई भी संकाय चुन सकेंगे

अब 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी किसी भी संकाय से कर सकेंगे स्नातक12वीं के अनिवार्य विषय की नहीं रहेगी बाध्यता, अपनी रुचि से कला, विज्ञान या कॉमर्स में कोई भी संकाय चुन सकेंगे



नई दिल्ली। अब 12वीं की पढ़ाई करने के बाद विद्यार्थी स्नातक पाठ्यक्रम के लिए किसी भी संकाय में दाखिला ले सकेंगे। कला, विज्ञान या कॉमर्स में स्नातक की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों का 12वीं कक्षा में संबंधित विषय से पास होना अनिवार्य नहीं रहेगा। छात्र सीयूईटी यूजी व संबंधित विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में शामिल होकर उसकी मेरिट के आधार पर अपनी पसंद का संकाय चुन सकेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) उच्च शिक्षा में लचीलापन लाने के उद्देश्य से यूजीसी रेगुलेशन-2024 ला रहा है।


इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 से यूजी और पीजी प्रोग्राम में कई बड़े बदलाव दिखेंगे। यूजीसी अध्यक्ष प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सिफारिशों के अनुरूप तैयार यूजीसी रेगुलेशन-2024 का मकसद उच्च शिक्षा में जरूरी बदलाव लाना है। इसमें विद्यार्थी को बहुविषयक कोर्स की पढ़ाई का मौका भी मिलेगा। यदि वे अपनी प्रतिभा साबित करते हैं, तो उन्हें कोई भी विषय या डिग्री चुनने का विकल्प मिलेगा। पढ़ाई के दौरान विषय, संस्थान व अध्ययन का तरीका बदलने की भी सुविधा होगी।


ये होंगे बड़े बदलाव

■ छात्र ने लेवल 4 या 12वीं की पढ़ाई (रेगुलर व ओपन स्कूल) की होगी तो अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम या फिर इंटीग्रेटेड अंडरग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम में दाखिला ले सकता है।

■ लेवल-4 या किसी भी स्ट्रीम में 12वीं के बाद दूसरे संकाय में दाखिले के लिए सीयूईटी यूजी- 2025 और संबंधित यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी।

■ कोई भी छात्र यूजी और पीजी प्रोग्राम में अलग-अलग दो डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई कर सकता है।

■ कोई उच्च शिक्षण संस्थान यूजीसी रेगुलेशन और नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे सीधे प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।


साल में दो बार ले सकेंगे दाखिला

नए रेगुलेशन में सभी तरह के विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को साल में दो बार दाखिला लेने, डिग्री प्रोगाम कभी भी छोड़ने या पढ़ाई (नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के तहत दोबारा शुरू करने, किसी भी विषय में कभी भी पढ़ाई का मौका देने का प्रावधान है। पहले सत्र में जुलाई-अगस्त और दूसरे सत्र में जनवरी फरवरी में दाखिला होगा।



आर्ट्स से 12वीं पास कर सकेंगे बी.एससी.

• यूजीसी ने यूजी और पीजी कोर्स के लिए तैयार किए नए नियम

• दो सत्रों में प्रवेश, पहला-जुलाई अगस्त, दूसरा-जनवरी-फरवरी


नई दिल्लीः आर्ट्स, साइंस और कामर्स स्ट्रीम यानी संकाय के बंधन में जकड़ी शिक्षा से छात्रों को अब आजादी मिलेगी। किसी विषय या फिर स्ट्रीम से 12वीं करने वाले छात्र अब पसंद के किसी भी विषय से स्नातक कर सकेंगे। यानी आर्ट्स या कामर्स विषयों में 12वीं करने वाले छात्र अपनी स्नातक की पढ़ाई विज्ञान विषयों के साथ कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें स्नातक स्तर पर उन विषयों या कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा को या फिर विश्वविद्यालय से जुड़ी प्रवेश परीक्षा की पात्रता को हासिल करना होगा।


इसी तरह किसी भी विषय से स्नातक करने वाले अब परास्नातक की पढ़ाई भी किसी भी विषय से कर सकते हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के तहत पढ़ाई को लचीला बनाते हुए स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर नए नियमों का मसौदा जारी किया है।


 हालांकि ये नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में कब से लागू होंगे, यह साफ नहीं है, लेकिन यूजीसी का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों को जल्द ही इन्हें अपनाने की सिफारिश की जाएगी। अब तक विज्ञान संकाय में 12 वीं पास स्नातक स्तर पर कला विषयों में दाखिला ले सकते हैं, लेकिन कला विषयों में 12वीं करने वालों को विज्ञान या फिर दूसरे किसी विषय में दाखिले की पात्रता नहीं थी।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग चेयरमैन प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार के मुताबिक छात्रों की सुविधा को देखते हुए नियमों में बदलाव की पहल की गई है। इसके साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में साल में दो बार दाखिला देने की पहल भी की गई है। इसमें पहले सत्र के लिए प्रवेश जुलाई-अगस्त में होगी, जबकि दूसरे सत्र के लिए प्रवेश जनवरी- फरवरी में दिया जाएगा। स्नातक और परास्नातक में प्रवेश के इन नियमों में किए गए बदलाव के मसौदे को लोगों की आम राय लेने के बाद जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। अभी उच्च शिक्षण संस्थानों में सिर्फ एक ही सत्र में प्रवेश दिया जाता है। खास बात यह है कि दोनों ही सत्रों में छात्रों को प्रवेश सीयूईटी की मेरिट के आधार पर ही दिया जाएगा। यह परीक्षा साल में एक बार ही आयोजित की जाती है।


एम.टेक-एमई में प्रवेश ले सकेंगे बी.एससी आनर्स करने वाले

स्नातक और परास्नातक में प्रवेश से जुड़े प्रस्तावित नए नियमों के तहत फिजिक्स, बायोलाजी और गणित आदि विषयों से चार वर्षीय बी. एससी आनर्स करने वाले छात्र भी अब एम. टेक-एमई कर सकते हैं। अभी तक एम. टेक-एमई में सिर्फ बी. टेक और बीई करने वाले छात्रों को ही प्रवेश दिया जाता रहा है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 के नाम पर शिक्षकों से ठगी का प्रयास

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 के नाम पर शिक्षकों से ठगी का प्रयास

प्रयागराज के बेसिक शिक्षा विभाग के कई शिक्षकों को आए है र हैं फोन 
■ व्हाट्सएप पर एपीके फाइल भेजकर फोन हैक करने की गई कोशिश


प्रयागराज । साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर ठगी करने में जुटे हैं। अब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 के नाम पर बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को व्हाट्सएप पर एपीके फाइल भेजकर सर्वे के नाम पर ठगी का प्रयास किया जा रहा है। हाल ही में प्रयागराज के तीन प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक को फोन कॉल आ चुके हैं। हालांकि शिक्षकों की सूझबूझ से साइबर अपराधी अपनी मंशा में कामयाब नहीं हो सके।

 हाल ही में फिरोजाबाद में 12 शिक्षकों के मोबाइल फोन को एपीके फाइल के जरिए हैक करने का मामला सामने आया है। वहीं प्रयागराज में अब तक तीन शिक्षकों के पास फोन कॉल आ चुकी है। साइबर अपराधी 1076 नंबर का उपयोग कर शिक्षकों से संपर्क कर रहे हैं। यह नंबर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का है, जिससे शिक्षक आसानी से भरोसा कर लेते हैं। फीडबैक के नाम पर जानकारी मांगी जा रही है। निर्धन परिवार का सर्वे करने के नाम पर व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा जा रहा है। इसमें आधार कार्ड और अन्य निजी जानकारी अपलोड करने की मांग की जाती है। फर्जी एप डाउनलोड करने के बाद फोन हैक हो रहा है।


व्हाट्सएप पर एपीके फाइल भेजकर डाउनलोड करने की सलाह दी गई। हालांकि तीनों प्रधानाध्यापकों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए डाउनलोड करने से साफ मना कर दिया। साथ ही कॉल रिकॉर्ड कर शिक्षकों के ग्रुप में सचेत रहने के लिए साझा किया गया है।




साइबर हैकर्स के निशाने पर उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षक, जानिए कैसे हो रहा है फ्राड और कैसे करें बचाव? 


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक इन दिनों साइबर हैकर्स के निशाने पर हैं। हाल ही में फिरोजाबाद में 12 शिक्षकों के मोबाइल एपीके फाइल के जरिए हैक किए जाने की खबर ने सभी को चौंका दिया है। अब राज्यभर के शिक्षक मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 से आने वाली संदिग्ध कॉल्स को लेकर असमंजस में हैं। इन कॉल्स में विभागीय फीडबैक के नाम पर एप डाउनलोड करने और आधार कार्ड समेत निजी जानकारी अपलोड करने के लिए कहा जा रहा है।  


कैसे हो रहा है फ्रॉड?
शिक्षकों को 1076 नंबर से कॉल कर यह विश्वास दिलाया जा रहा है कि यह मुख्यमंत्री हेल्पलाइन है। पहले उनसे विभागीय कार्यों और फीडबैक से जुड़े सवाल किए जाते हैं। इसके बाद एक लिंक भेजा जाता है, जिसमें आधार कार्ड और अन्य निजी जानकारी भरने या फोटो अपलोड करने की मांग की जाती है। कुछ शिक्षकों ने लिंक पर क्लिक किया, जिससे उनके मोबाइल हैक हो गए।  


शिक्षामित्र धर्मेंद्र कुमार बताते हैं, "मेरे पास भी 1076 से कॉल आई। इसे मुख्यमंत्री हेल्पलाइन समझकर रिसीव कर लिया था। लेकिन सतर्कता बरतने के कारण ठगी से बच गया।" वहीं, शिक्षक अरुण गुप्ता ने बताया, "कॉल के बाद भेजे गए लिंक पर क्लिक करने से मैंने परहेज किया।"  


शिक्षकों के बीच बढ़ रही चिंता
तीन दिनों में प्रदेशभर में 200 से अधिक शिक्षकों को ऐसी कॉल्स आ चुकी हैं। इस घटना ने शिक्षकों में चिंता बढ़ा दी है। शिक्षकों का कहना है कि इस मामले में विभागीय अधिकारियों की तरफ से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी फिरोजाबाद, आशीष पांडेय ने कहा, "यह फ्रॉड कॉल्स हो सकती हैं। शिक्षकों को किसी भी संदिग्ध कॉल का जवाब देने से पहले अधिकारियों से परामर्श लेना चाहिए।"  


सतर्कता के उपाय
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षकों को साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए निम्नलिखित सतर्कता उपाय सुझाए गए हैं:  

1. संदिग्ध कॉल से बचें: 1076 या अन्य अज्ञात नंबर से आने वाली कॉल्स को तुरंत न उठाएं।  

2. लिंक पर क्लिक न करें: किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें।  

3. निजी जानकारी साझा न करें: आधार कार्ड, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी किसी को न दें।  

4. फीडबैक सत्यापित करें: अगर फीडबैक के लिए कॉल आती है, तो पहले संबंधित अधिकारी से सत्यापन करें।  

5. साइबर क्राइम सेल से संपर्क करें: किसी भी फ्रॉड का संदेह हो तो तुरंत पुलिस की साइबर क्राइम सेल को सूचित करें।  

6. अन्य शिक्षकों को सतर्क करें: अपने साथी शिक्षकों को ऐसी घटनाओं से अवगत कराएं।  


साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर शिक्षकों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों को जागरूक और सतर्क रहना आवश्यक है। किसी भी संदिग्ध कॉल या लिंक पर भरोसा न करें और विभागीय और पुलिस अधिकारियों से परामर्श लेना न भूलें। सतर्कता ही इस साइबर जाल से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।

बाबा साहब डॉ० भीमराव अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस दिनांक 06 दिसम्बर पर कार्यक्रमों का आयोजन किये जाने के सम्बन्ध में निदेशक माध्यमिक शिक्षा का आदेश

बाबा साहब डॉ० भीमराव अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस दिनांक 06 दिसम्बर पर कार्यक्रमों का आयोजन किये जाने के सम्बन्ध में निदेशक माध्यमिक शिक्षा का aadesh



Thursday, December 5, 2024

मांग : 6 दिसम्बर को गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस का अवकाश घोषित करने के संबंध में RSM का ज्ञापन

मांग :  6 दिसम्बर को गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस का अवकाश घोषित करने के संबंध में RSM का ज्ञापन


छह को अवकाश घोषित करने की मांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर छह दिसंबर को अवकाश घोषित करने की मांग की है। 

संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार यादव ने कहा है कि गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस का अवकाश परिषदीय विद्यालयों की छुट्टियों की सूची में 24 नवंबर (रविवार) को दर्ज है। जबकि सिख कैलेंडर के अनुसार शहीदी दिवस 06 दिसम्बर (शुक्रवार) को है। 

इसके अनुसार पंजाब व चंडीगढ़ आदि प्रदेशों में अवकाश छह दिसंबर को घोषित किया गया है। ऐसे में प्रदेश के बेसिक विद्यालयों मे छह दिसंबर को अवकाश घोषित करें। 

शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का लगातार बढ़ता बोझ, डाटा फीडिंग के बोझ तले दबते जा रहे शिक्षक, अब अपार आईडी की फीडिंग में बर्बाद हो रहा पढ़ाई का समय

शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का लगातार बढ़ता बोझ, डाटा फीडिंग के बोझ तले दबते जा रहे शिक्षक, अब अपार आईडी की फीडिंग में बर्बाद हो रहा पढ़ाई का समय
 

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक इन दिनों पढ़ाई छोड़कर अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट अकादमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी बनाने में व्यस्त हैं। शिक्षकों को इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसमें छात्रों के व्यक्तिगत और शैक्षणिक डेटा को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फीड करना शामिल है। इससे उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी, यानी बच्चों को पढ़ाना, बुरी तरह प्रभावित हो रही है।  


"हमें पढ़ाई के समय इस तरह के प्रशासनिक काम में उलझाया जा रहा है। शिक्षण कार्य पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, हम डेटा एंट्री ऑपरेटर बन गए हैं," एक शिक्षक ने नाराजगी जताई।  


गैर-शैक्षणिक कार्यों और योजनाओं से पढ़ाई हो रही बाधित  

यह पहली बार नहीं है जब शिक्षकों को पढ़ाई छोड़कर गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया गया है। इससे न केवल बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है, बल्कि शिक्षकों में मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार की कई योजनाएं, जैसे मिड-डे मील की रिपोर्टिंग और अब अपार आईडी फीडिंग, सीधे कक्षाओं के समय को कम कर रही हैं।  

"अगर हमारा समय डेटा फीडिंग में ही लग जाएगा, तो बच्चों को पढ़ाएगा कौन? पढ़ाई के समय में इस तरह की गतिविधियां बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं," एक अन्य शिक्षक ने बताया।  


प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग स्टाफ क्यों नहीं? 

शिक्षकों का सवाल है कि सरकार इस तरह के कार्यों के लिए अलग से स्टाफ क्यों नहीं नियुक्त करती। क्या शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाना है, या हर योजना का कार्यान्वयन भी उनकी जिम्मेदारी है? शिक्षकों को जबरन इस तरह के कार्यों में शामिल करने से न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी गिर रही है।  

"ऐसे कार्यों के लिए डाटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य तकनीकी स्टाफ नियुक्त होना चाहिए। शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए होते हैं, न कि प्रशासनिक कार्यों के लिए," शिक्षकों के संगठन ने अपनी नाराजगी जाहिर की।  


बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा सीधा असर

बच्चों की शिक्षा पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। पढ़ाई का समय लगातार घट रहा है, जिससे बच्चों का शैक्षणिक स्तर प्रभावित हो रहा है। कई शिक्षक शिकायत करते हैं कि वे न तो पूरे समय पढ़ा पा रहे हैं, और न ही बच्चों की पढ़ाई में सुधार के लिए कोई नई योजना लागू कर पा रहे हैं।  

"हम बच्चों के साथ समय बिताने के बजाय कागजों और कंप्यूटर पर डेटा भरने में व्यस्त हैं। यह बच्चों के साथ अन्याय है," एक शिक्षक ने बताया।  


क्या हो सकता है समाधान? 

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ कम करना जरूरी है।  

1. डेटा फीडिंग और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग से स्टाफ नियुक्त किया जाए।  
2. शिक्षकों को केवल शिक्षण और शैक्षणिक विकास के कार्यों तक सीमित रखा जाए।  
3. सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शैक्षणिक गुणवत्ता में कोई कमी न हो।  


"बच्चों का भविष्य बनाने वाले शिक्षकों को उनके मूल कार्य से अलग करना न केवल शिक्षा व्यवस्था के लिए हानिकारक है, बल्कि यह पूरी शिक्षा नीति पर सवाल खड़ा करता है।"  

सरकार को इस दिशा में जल्द कदम उठाने की जरूरत है, ताकि शिक्षकों की ऊर्जा बच्चों की पढ़ाई में लगे और शिक्षा का स्तर बेहतर हो सके।

प्रदेश में छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति न भेजने पर एक बार फिर सख्ती शुरू, शिक्षकों का कहीं रोका गया वेतन तो कहीं दी गई कारण बताओ नोटिस

प्रदेश में छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति न भेजने पर एक बार फिर सख्ती शुरू, शिक्षकों का कहीं रोका गया वेतन तो कहीं दी गई कारण बताओ नोटिस
 

बाराबंकी समेत कई जिलों में बेसिक शिक्षा विभाग ने शुरू की कार्रवाई

लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल पंजिकाओं को लेकर एक बार फिर सख्ती शुरू हुई है। शिक्षकों की ऑनलाइन डिजिटल अटेंडेंस पर भले ही रोक लग गई हो, लेकिन छात्रों की उपस्थिति ऑनलाइन (रियल टाइम) पर व मिड-डे-मील की सूचना न भेजने वाले शिक्षकों का वेतन रोकने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। बाराबंकी में 170 विद्यालय के शिक्षकों का वेतन रोकने की संस्तुति की गई है।


प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के एक दर्जन रजिस्टर को डिजिटल करने की कवायद पिछले दिनों शुरू की गई थी। इसके तहत शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस भी लगनी थी। किंतु शिक्षकों के विरोध के कारण इसे वापस लेना पड़ा था। वहीं दूसरी तरफ एक बार फिर छात्रों की उपस्थिति व मिड-डे- मील से जुड़ी सूचनाएं रियल टाइम पर प्रेरणा पोर्टल पर न अपलोड करने पर बेसिक शिक्षा विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है।


इसके तहत जहां बाराबंकी में त्रिवेदीगंज ब्लॉक के विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है। वहीं बरेली, बुलंदशहर, मेरठ आदि में भी शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि विद्यालय से जुड़ी सूचनाएं प्रधानाध्यापक व उनके द्वारा नामित शिक्षक की ओर से अपडेट करनी है। ऐसा न करने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।


वहीं इस प्रकरण पर उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की ओर से महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजकर नाराजगी व्यक्त की गई है। संघ के प्रांतीय महामंत्री अरुणेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि मुख्य सचिव के साथ हुई वार्ता में डिजिटल अटेंडेंस को स्थगित रखने व एक विशेषज्ञ समिति के गठन की बात कही गई थी।

किंतु कुछ जिलों में बीएसए द्वारा ऑनलाइन उपस्थिति व पंजिकाओं के डिजिटलाइजेशन न करने पर शिक्षकों का वेतन रोका जा रहा है। यह मुख्य सचिव के निर्देशों की अवहेलना है। इस मामले में यथास्थिति बनाई रखी जाए। 

Wednesday, December 4, 2024

तदर्थ शिक्षकों का नियमितीकरण व बकाया एरियर का होगा भुगतान, मिले आश्वासन के बाद माध्यमिक शिक्षक संघ का आंदोलन स्थगित

तदर्थ शिक्षकों का नियमितीकरण व बकाया एरियर का होगा भुगतान, मिले आश्वासन के बाद  माध्यमिक शिक्षक संघ का आंदोलन स्थगित

■ शिक्षकों ने विधान भवन घेराव का ऐलान किया था 

■ माध्यमिक शिक्षक संघ की 18 सूत्री मांगों पर हुई वार्ता


लखनऊ । माध्यमिक शिक्षक संघ ने बुधवार को विधान भवन घेराव का अपना प्रस्तावित आन्दोलन स्थगित कर दिया है। मंगलवार को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा, दीपक कुमार के साथ हुई वार्ता के बाद शिक्षक नेताओं ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। एक दिन पूर्व सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी शिक्षक नेताओं की वार्ता हुई थी और मुख्यमंत्री ने शिक्षक नेताओं की समस्याएं सुनने के बाद अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को शिक्षक नेताओं से वार्ता कर समस्याओं के निपटारे के निर्देश दिए थे।

 इसी परिप्रेक्ष्य में मंगलवार को शिक्षक नेता एवं एमएलसी राजबहादुर सिंह चंदेल, पूर्व एमएलसी चेतनारायण सिंह, लवकुश मिश्रा, महेश चन्द्र शर्मा तथा माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री संजय द्विवेदी के साथ वार्ता हुई और शिक्षा सेवा आयोग मे धारा 21 जैसी व्यवस्था न होना, प्रोन्नति, वेतन समेत संगठन की 18 सूत्री मांगों पर विस्तार से विचार किया गया। प्रमुख मांगों पर सकारात्मक आश्वासन के बाद संगठन ने बुधवार को प्रस्तावित विधान भवन घेराव आंदोलन को स्थगित कर दिया।


लखनऊ। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) का धरना मंगलवार को विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार से वार्ता के बाद स्थगित हो गया। वार्ता में अपर मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया कि वर्ष 2000 तक के तदर्थ शिक्षकों को विनियमित करने की प्रक्रिया कर रहे हैं। यह देख रहे हैं कि कहां कौन शिक्षक छूट गए हैं। इससे पहले के शिक्षकों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है।

वहीं पुरानी पेंशन बहाली पर उन्होंने इसे केंद्र का मामला बताया। प्रदेश अध्यक्ष चेत नारायण सिंह ने बताया कि अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों के बकाया एरियर की समीक्षा करके भुगतान करने की बात कही है। वहीं शिक्षकों के अकारण निलंबन के मामले में धारा 21 और धारा 18 को शिक्षा सेवा चयन आयोग में शामिल कराने व जीपीएफ का पैसा जमा नहीं होने का कारण जानने की बात कही।

प्रतिनिधिमंडल में एमएलसी राजबहादुर चंदेल, प्रदेश महामंत्री अनिरूद्ध त्रिपाठी शामिल थे। इससे पहले आज भी लखनऊ, इलाहाबाद, बरेली मंडल, कानपुर, चित्रकूट मंडल के शिक्षक रॉयल होटल परिसर में एकत्र हुए और धरना दिया। 

नौवीं व दसवीं में गणित की तर्ज पर साइंस व सोशल साइंस में दो विकल्प (स्टैंडर्ड व एडवांस) देने की CBSE की तैयारी

नौवीं व दसवीं में गणित की तर्ज पर साइंस व सोशल साइंस में दो विकल्प (स्टैंडर्ड व एडवांस) देने की CBSE की तैयारी

सीबीएसई की नौवीं व दसवीं में दोनों विषयों में स्टैंडर्ड और एडवांस स्तर का विकल्प देने की योजना


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड गणित की तर्ज पर छात्रों को सोशल साइंस व साइंस में दो विकल्प (स्टैंडर्ड व एडवांस) देने की तैयारी कर रहा है। बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नौवीं व दसवीं कक्षा के इन दोनों विषयों के दो स्तर (स्टैंडर्ड व एडवांस) को पढ़ाने की योजना बनाई है। बीते दिनों सीबीएसई करिकुलम कमेटी में इस प्रस्ताव को रखा गया। अब बोर्ड की प्रबंध समिति की बैठक से मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जा सकेगा।


वर्तमान में दसवीं कक्षा में छात्रों को गणित विषय में बेसिक व स्टैंडर्ड स्तर ऑफर किया जाता है। इसे वर्ष 2020 में लागू किया गया था। इसमें दोनों स्तर के लिए पेपर व कठिनता का स्तर अलग- अलग होता है। इसी तरह से अब बोर्ड साइंस व सोशल साइंस में दो विकल्प देने की योजना पर काम कर रहा है। इसे बोर्ड की प्रबंध समिति की बैठक में रखा जाएगा, जहां से मंजूरी मिलने के बाद ही इस योजना को शैक्षणिक सत्र 2026- 27 से लागू किया जाएगा। दोनों विषयों के लिए दो विकल्प मिलने पर परीक्षा अलग से होगी या पाठ्य सामग्री अलग होगी इस पर अभी फैसला होना बाकी है।


एनसीईआरटी की किताबों की प्रतीक्षा कर रहा बोर्ड

बोर्ड अगले साल आने वाली एनसीईआरटी की किताबों की प्रतीक्षा कर रहा है। उन किताबों को नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के आधार पर तैयार किया जा रहा है। एनसीईआरटी ने बीते साल पहली व दूसरी और इस साल तीसरी व छठी कक्षा के लिए पुस्तकें तैयार की हैं। अब अगले साल कुछ और पुस्तकें नए तरीके की आनी है। बेसिक व स्टैंडर्ड को कैसे लागू किया जाएगा इसकी रुपरेखा एनसीईआरटी की पुस्तकों के आधार पर ही तैयार की जाएगी।

देश भर के 782 जिलों के 88 हजार स्कूलों तीसरी, छठीं और नौवीं कक्षा के 23 लाख छात्र आज देंगे "परख" परीक्षा

देश भर के 782 जिलों के 88 हजार स्कूलों तीसरी, छठीं और नौवीं कक्षा के 23 लाख छात्र आज देंगे "परख" परीक्षा



नई दिल्ली। तीसरी, छठीं और नौवीं कक्षा के 23 लाख छात्र बुधवार को "परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024" में शामिल होंगे। यह परीक्षा 782 जिलों में तीन साल बाद आयोजित की जा रही है। इसमें भाषा, गणित, हमारे आस-पास की दुनिया, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों में छात्र का समग्र विकास का आकलन होगा। इसमें उम्र व कक्षा के आधार पर सीखने की जरूरत और कितना सीखा आदि का मूल्यांकन किया जाएगा।


यह परीक्षा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों के तहत आयोजित हो रहा है। यह छात्रों के आधारभूत, प्रारंभिक और मध्य चरणों (यानी, वर्तमान में तीसरी, छठी और नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र) के अंत में विकसित क्षमताओं का आकलन करने और उपचारात्मक उपाय करने में मदद करेगा।


यह स्कूलों के पूरे स्पेक्ट्रम को कवर करेगा, यानी देश भर के सरकारी स्कूल (केंद्र सरकार और राज्य सरकार), सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल और निजी स्कूलों के छात्र इसमें शामिल होंगे। 


23 भाषा में आयोजित होगी परीक्षा

परीक्षा 23 भाषाओं में आयोजित की जाएगी, जिसमें असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बोडो, अंग्रेजी, मिजो, गारो और खासी शामिल है।


75,565 पर्यवेक्षक नियुक्त

सर्वेक्षण को सुचारू और निष्पक्ष संचालन के लिए 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 94878 फील्ड इन्वेस्टिगेटर, 75,565 पर्यवेक्षक, 3128 जिला स्तरीय अधिकारी और 180 राज्य नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। साथ ही, सर्वेक्षण के समग्र कामकाज की निगरानी और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए जिलों में 38 राष्ट्रीय स्तर के पर्यवेक्षकों के साथ 782 बोर्ड प्रतिनिधियों को नियुक्त किया गया है। सभी कर्मियों को उनकी जिम्मेदारियों के बारे में प्रशिक्षण दिया गया है।

Tuesday, December 3, 2024

अफसरों की मनमानी और खामियाजा शिक्षक भुगत रहे, आदेशों के बाद भी सवा साल से तदर्थ शिक्षकों को वेतन-भत्ता नहीं, शासन ने मांगा स्पष्टीकरण

अफसरों की मनमानी और खामियाजा शिक्षक भुगत रहे, आदेशों के बाद भी सवा साल से तदर्थ शिक्षकों को वेतन-भत्ता नहीं, शासन ने मांगा स्पष्टीकरण

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही, अधिकारियों से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण तलब

02 हजार तदर्थ शिक्षकों वेतन का भुगतान नहीं कराया


लखनऊ । कोर्ट और शासन के स्पष्ट आदेशों के बाद भी माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने प्रदेश के दो हजार तदर्थ शिक्षकों के वेतन का भुगतान नहीं कराया। शासन ने संबंधित अफसरों से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा है। जयाच संतोषजनक नहीं मिलने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है।


वर्ष 2000 के पूर्व के दो हजार तदर्थ शिक्षकों को पिछले सवा साल से वेतन और भत्ते का भुगतान नहीं हो रहा है। यह स्थिति तब है जब इन शिक्षकों के वेतन-भत्ते के भुगतान के लिए कोर्ट के बाद शासन ने भी स्पष्ट आदेश किया हैं। विभागीय अधिकारियों ने तकनीकी कारण बताकर इन तदर्थ शिक्षकों के मामले लटका रखे हैं। 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश त्रिपाठी की माने तो यह अधिकारियों का दुस्साहस है कि उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में जारी राजाज्ञा के बावजूद भी अभी तक पिछले सवा साल से रुके वेतन का भुगतान शुरू नहीं हो सका है। 


दूसरी तरफ शिक्षा अधिकारियों के इस उपेक्षा पूर्ण रवैये पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने अत्यंत गहरी नाराजगी जाहिर की है और शासन का इस ओर ध्यान आकर्षित किया है।


अफसरों की मनमानी, खामियाजा शिक्षक भुगत रहे'

सगठन के वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने बयान जारी कर कहा है कि संगठन लगातार इस मामले की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करता चला आ रहा है। सारे आदेश के बाद भी शिक्षा अधिकारियों की उदासीनता के बलते पिछले सितंबर 2023 से अधिकारियों की मनमानी के कारण वर्ष 2000 तक कार्यरत दो हजार से अधिक तदर्थ शिक्षक भुखमरी के कगार पर है। हर स्तर पर आदेश भी जारी है लेकिन शिक्षक अधिकारियों की गलतियों एवं हठधरमिता का खामियाजा भुगतने पर विवश है।


 शिक्षक नेताओं ने बताया कि कोर्ट और विभागीय आदेश के तहत इन सभी तदर्थ शिक्षकों को बिना किसी व्यवधान के एरियर सहित नियमित वेतन भुगतान करने के स्पष्ट आदेश जारी होने पर भी वेतन का भुगतान नहीं होने से शिक्षकों नाराजगी है।

यूपी के बच्चे अब दिन में भी तारे देख सकेंगे, सभी 18 मंडलों में बनेंगे तारामंडल

यूपी के बच्चे अब दिन में भी तारे देख सकेंगे, सभी 18 मंडलों में बनेंगे तारामंडल


लखनऊ । प्रदेश के सभी 18 मंडल के बच्चों को जल्द ही एक सौगात मिलने वाली है जहां वो सचमुच दिन में तारे देख सकेंगे। अति- आधुनिक टेलीस्कोप के जरिए ग्रह नक्षत्रों की दुनिया में डूब सकेंगे। एस्ट्रो- फोटोग्राफी के जरिए लाखों मील दूर सूरज, चांद, सितारों, ग्रहों और उपग्रहों की तस्वीरें ले सकेंगे। साथ ही स्पेस साइंस और एस्ट्रोनामी से संबंधित श्री- डी फिल्में और शो देख सकेंगे। विज्ञान की दुनिया की और तमाम बातों से रूबरू हो सकेंगे।


दरअसल, प्रदेश सरकार जल्द ही स्थापना करने जा रही है। इन तारामंडलों के भीतर नक्षत्रशाला के साथ ही साइंस पार्क भी होंगे। यह जानकारी सोमवार को उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दी। सोमवार को वह इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण कार्यों की समीक्षा के लिए वहां मौजूद थे। 


उन्होंने बताया कि गोरखपुर में नक्षत्रशाला का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। वहीं आगरा, वाराणसी, बरेली और बांदा में तारामंडल व साइंस पार्क के लिए जमीनें मिल चुकी हैं। हमारी कोशिश है कि सरकार के इस कार्यकाल में हम सभी 18 मंडलों में तारामंडल व साइंस पार्क बनाने का काम पूरा कर सकें। गाजियाबाद में पहले से ही मिनी साइंस पार्क का संचालन किया जा रहा है।


सभी 18 मंडलों में तारामंडल की मुख्यमंत्री के विजन पर काम करते हुए कोशिश है कि प्रदेश के बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित हो। वो कल्पनाशील, स्वप्नदर्शी व सक्षम बनें। इस सोच के साथ हम प्रदेश के सभी 18 मंडल में साइंस पार्क व तारामंडल स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।
- अनिल कुमार, मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उप्र।


घर बैठे बुक कर सकेंगे टिकट

बच्चों के लिए इन नक्षत्रशालाओं के टिकट में खास छूट होगी। यही नहीं टिकटों की बुकिंग बुक माई शो, पेटीएम, अमेजॉन जैसे विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए घर बैठे कर सकेंगे। टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग की शुरुआत सबसे पहले लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला से की जाएगी।

संविदा व अतिथि शिक्षकों के लिए वेतन मानकीकरण का प्रस्ताव नहीं, केंद्र सरकार ने लोकसभा में दिया जवाब

संविदा व अतिथि शिक्षकों के लिए वेतन मानकीकरण का प्रस्ताव नहीं, केंद्र सरकार ने लोकसभा में दिया जवाब


नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय ने संविदा और अतिथि शिक्षकों के लिए अनुबंध और वेतन के मानकीकरण के लिए राष्ट्रीय ढांचे की किसी भी योजना से इन्कार कर दिया। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में सोमवार को एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।


कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने पूछा कि क्या सरकार के पास संविदा या अतिथि शिक्षकों के लिए अनुबंध और वेतन के मानकीकरण के लिए राष्ट्रीय ढांचा स्थापित करने की कोई योजना है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके किए गए काम के लिए उन्हें समान मुआवजा दिया जाए। 


केंद्रीय मंत्री मजूमदार ने ऐसे किसी भी प्रस्ताव से इन्कार करते हुए बताया कि उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (एआईएसएचई) 2022-23 के अनुसार, सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों में 2.43 लाख से अधिक संविदा संकाय सदस्य और निजी संस्थानों में 10 हजार से अधिक संविदा संकाय सदस्य कार्यरत हैं। 

चार वर्षीय स्नातक डिग्री वाले विद्यार्थियों के लिए एक साल का बीएड डिग्री पाठ्यक्रम फिर होगा शुरू

चार वर्षीय स्नातक डिग्री वाले विद्यार्थियों के लिए एक साल का बीएड डिग्री पाठ्यक्रम फिर होगा शुरू


नई दिल्ली। शैक्षणिक सत्र 2026- 27 से बीएड का प्रारूप बदलने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत दस साल बाद अब बीएड फिर एक वर्षीय हो जाएगा। बीएड कॉलेजों के लिए वर्ष 2025 से बदलाव की अधिसूचना जारी होगी। इसमें चार वर्षीय स्नातक डिग्री वाले विद्यार्थियों का दाखिला होगा।


शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी के नियमों व मापदंड में बदलाव भी 2027 में चार वर्षीय इंटीग्रेटेड डिग्री पाने वाले बैच के निकलने से पहले हो जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने बताया कि स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार एवं फर्जी व डमी कॉलेजों पर नकेल की तैयारी तेज हो गई है। शिक्षा नीति के तहत चार भागों फाउंडेशन, प्रीपेटरी, मिडिल व सेकंडरी स्तर के अनुरूप ही शिक्षक तैयार किए जाएंगे। स्नातक पाठ्यक्रम में बदलाव के कारण अलग-अलग बीएड कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं।


ऐसे मिलेगी बीएड डिग्री

■ एक साल में बीएड : इसमें चार वर्षीय स्नातक व स्नातकोत्तर का पाठ्यक्रम पूरा कर चुके विद्यार्थी दाखिला ले सकेंगे।

■ दो साल में बीएड : तीन वर्षीय स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को दाखिला मिलेगा। स्नातक के बाद शिक्षक बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों को फायदा मिलेगा।

■ एमएड डिग्री : चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड व दो साल बीएड की पढ़ाई वाले विद्यार्थी इसमें दाखिला ले सकेंगे।


इन पाठ्यक्रमों का होगा विस्तार

■ चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड : 2023 में बीए-बीएड, बीएससी-बीएड और बीकॉम- बीएड का पहला बैच शुरू हुआ है। 2025 से इसमें चार नए विशेषज्ञता कोर्स शारीरिक शिक्षा, कला शिक्षा, योग शिक्षा व संस्कृत शिक्षा जुड़ेंगे। जो छात्र 12वीं के बाद शिक्षक बनना चाहेंगे, वे इसमें दाखिला ले सकेंगे।

■ पुराना दो वर्षीय बीएड: अभी 750 कॉलेजों में चल रहे इस पाठ्यक्रम का भी विस्तार किया जाएगा।



फर्जी कॉलेजों पर नकेल

■ देशभर के साढ़े 15 हजार बीएड कॉलेजों को शिक्षकों के पैन नंबर, उनकी वेतन खाते से पंजीकृत करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे वे एक से ज्यादा कॉलेजों में सेवाएं नहीं दे सकेंगे।

■ डमी व फर्जी कॉलेजों को पकड़ने के लिए जियो कोऑर्डिनेट के तहत शिक्षकों व छात्रों की लाइव फोटो अपलोड करनी होगी।

■ कॉलेजों को वर्ष 2021-22 और 2022-23 की परफोर्मेस अप्रेजल रिपोर्ट (पीएआर) 10 दिसंबर तक अनिवार्य तौर पर अपलोड करने के निर्देश हैं। इसमें शिक्षकों व छात्रों की संख्या, छात्र-शिक्षक अनुपात, पाठ्यक्रम, मूल्यांकन, परिणाम, पास प्रतिशत जैसी अहम जानकारियां देनी है। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार होगा।

Monday, December 2, 2024

मांग : बेसिक शिक्षकों का जिले के अंदर और बाहर परस्पर तबादला जल्द शुरू हो, शिक्षामित्रों पर भी निर्णय लेने की रखी मांग

मांग : बेसिक शिक्षकों का जिले के अंदर और बाहर परस्पर तबादला जल्द शुरू हो, शिक्षामित्रों पर भी निर्णय लेने की रखी maang


लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की जिले के अंदर और जिले के बाहर परस्पर तबादला प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की है। दारुलसफा में संघ कार्यालय पर रविवार को हुई प्रांतीय बैठक में यह मांग उठाई गई।


बैठक में प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि शिक्षकों का परस्पर तबादला हर साल सर्दियों और गर्मियों की छुट्टी में करने का आदेश प्रमुख सचिव ने जारी किया है। लेकिन इस साल जनवरी से अब तक आवेदन लेने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा कोई आदेश जारी नहीं किया गया। एक साल से प्रदेश के हजारों शिक्षक इसके इंतजार में हैं।  उन्होंने कहा कि अगर 15 दिसंबर तक आवेदन के लिए पोर्टल नहीं खोला गया तो संघ आंदोलन के लिए बाध्य होगा। जल्द ही इस मामले में संघ का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम से भी मिलेगा।


प्रदेश महामंत्री संदीप दत्त व प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने कहा कि शिक्षामित्रों की आर्थिक हालत बहुत खराब है। प्रदेश सरकार ने पिछले महीने संघ के साथ हुई बैठक के बाद समस्याओं का स्थायी हल निकलने की बात कही थी। किंतु आज तक कुछ नहीं हुआ। इससे शिक्षामित्र नाराज हैं। सरकार इस पर भी जल्द ठोस निर्णय ले ताकि उनका आक्रोश शांत किया जा सके। अन्यथा शिक्षामित्र भी आंदोलन की तैयारी में हैं। 

18 सूत्रीय मांगों को लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की सीएम योगी को ज्ञापन, बेसिक शिक्षकों, सरकार, शासन और विभाग के मध्य उत्पन्न संवादहीनता को वार्ता के माध्यम से समाप्त करने की मांग

18 सूत्रीय मांगों को लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की सीएम योगी को ज्ञापन,  बेसिक शिक्षकों, सरकार, शासन और विभाग के मध्य उत्पन्न संवादहीनता को वार्ता के माध्यम से समाप्त करने की maang


यूनिफॉर्म में परिषदीय बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की नई पहल: बेसिक शिक्षकों की मांग हर जिले में लागू हो शाहजहांपुर का मॉडल

यूनिफॉर्म में परिषदीय बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की नई पहल: बेसिक शिक्षकों की मांग हर जिले में लागू हो शाहजहांपुर का मॉडल  


शाहजहांपुर । उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में परिषदीय स्कूलों के बच्चों को यूनिफॉर्म में स्कूल भेजने के लिए प्रशासन ने एक प्रेरक और सख्त कदम उठाया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) डॉ. अपराजिता सिंह ने साफ किया है कि यूनिफॉर्म में न आने वाले बच्चों के अभिभावकों को राशन वितरण में रोक लगाई जाएगी। यह कदम शिक्षा और बच्चों की बेहतरी के लिए उठाया गया है।  


यूनिफॉर्म का उद्देश्य
सरकार ने बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, स्वेटर, जूते और मोजे खरीदने हेतु 1200 रुपये सीधे डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खातों में भेजे हैं। यूनिफॉर्म का उद्देश्य न केवल बच्चों को सर्दी से बचाना है, बल्कि उनकी पहचान और अनुशासन को भी बढ़ावा देना है। इसके बावजूद, सर्दी में बच्चों को बिना उचित यूनिफॉर्म के स्कूल आने की शिकायतें मिल रही थीं।  


कैसे काम करेगा यह मॉडल?
सीडीओ डॉ. अपराजिता सिंह ने निर्देश दिया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर बच्चे पूरी यूनिफॉर्म में स्कूल नहीं आते, तो संबंधित अभिभावकों की सूची बनाकर कोटेदारों को दी जाएगी। इसके बाद इन परिवारों को मुफ्त राशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह निर्णय स्कूल निरीक्षण और अभिभावकों को जागरूक करने के बाद लिया गया है।  


शिक्षा और जिम्मेदारी का संदेश
यह पहल शिक्षा के महत्व और अभिभावकों की जिम्मेदारी को रेखांकित करती है। सरकार द्वारा प्रदान किए गए धन का उपयोग बच्चों की मूलभूत आवश्यकताओं पर होना चाहिए। यूनिफॉर्म के अभाव में बच्चे न केवल ठंड का सामना करते हैं, बल्कि आत्मविश्वास में भी कमी महसूस करते हैं।  


हर जिले के लिए प्रेरणा
शाहजहांपुर की यह पहल अन्य जिलों के लिए एक प्रेरणा बन सकती है। अगर हर जिले में इस मॉडल को अपनाया जाए तो:  

- बच्चों की उपस्थिति में सुधार होगा।  

- यूनिफॉर्म पहनने से बच्चों में अनुशासन और समानता का भाव बढ़ेगा।  

- अभिभावक सरकारी सहायता का सही उपयोग करेंगे।  

- सरकारी योजनाओं के उद्देश्य को सही दिशा मिलेगी।  


प्रशासन और शिक्षकों की भूमिका
इस पहल को सफल बनाने के लिए प्रशासन और शिक्षकों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।  

- अभिभावकों को लगातार जागरूक करें।  

- यूनिफॉर्म के महत्व और बच्चों के स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को समझाएं।  

- स्कूल निरीक्षण को नियमित करें।  


सीडीओ का संदेश 
सीडीओ डॉ. अपराजिता सिंह ने कहा, "यूनिफॉर्म बच्चों के लिए केवल कपड़ा नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य की सुरक्षा का प्रतीक है। यह पहल बच्चों को ठंड से बचाने और उनके आत्मसम्मान को बढ़ाने के लिए है। अभिभावकों को अपने बच्चों की जिम्मेदारी को समझना होगा।"

  
शाहजहांपुर का यह कदम न केवल बच्चों के लिए बेहतर वातावरण सुनिश्चित करेगा, बल्कि अभिभावकों में भी जिम्मेदारी का भाव जगाएगा। अन्य जिलों को भी इस पहल को अपनाना चाहिए, जिससे शिक्षा और बच्चों की बेहतरी के लिए सरकार की योजनाएं पूरी तरह सफल हो सकें। यूनिफॉर्म में बच्चे, शिक्षित और आत्मविश्वास से भरे बच्चे।

Sunday, December 1, 2024

15 जनवरी तक होंगे दशमोत्तर छात्रवृत्ति के आवेदन, शासन ने जारी की संशोधित समय सारिणी

15 जनवरी तक होंगे दशमोत्तर छात्रवृत्ति के आवेदन, शासन ने जारी की संशोधित समय सारिणी


लखनऊ । शैक्षिक सत्र 2024-25 में दशमोत्तर छात्रवृत्ति आवेदन से वंचित विद्यार्थियों को अंतिम मौका दिया गया है। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के योजना से वंचित होने की सूचना पर शासन ने संशोधित समय सारिणी जारी की है। जारी संशोधित समय सारिणी के अनुसार 15 जनवरी तक आवेदन और 23 जनवरी तक कॉलेजों को सत्यापित कर अग्रसारित करना होगा।


शैक्षिक सत्र 2024-24 में उपसचिव रजनीकांत पांडेय ने दशमोत्तर कक्षाओं में अध्ययनरत बच्चों को छात्रवृत्ति योजना से लाभान्वित करने के लिए संशोधित आवेदन की समय सारिणी जारी की है। जिसके अनुसार 31 दिसंबर तक कॉलेजों को सॉफ्टवेयर पर मास्टर डेटा अपलोड करना होगा। छह जनवरी तक डीआईओएस व 10 जनवरी तक समाज कल्याण विभाग को फीस सहित अन्य डेटा को सत्यापित करना अनिवार्य होगा।


इसी तरह दशमोत्तर कक्षाओं (कक्षा 11 व 12 संग स्नातक, परास्नातक व तकनीकी शिक्षा) में अध्ययनरत विद्यार्थी 15 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के बाद तीन दिन तक त्रुटियों में सुधार का मौका देते हुए 17 जनवरी तक आवेदन की हार्ड कॉपी स्कूल में जमा करनी होगी। 23 जनवरी तक कॉलेज आवेदित फार्म व अपलोड डेटा का सत्यापन करने के बाद फार्म निरस्त या अग्रसारण की कार्रवाई पूरी करेंगे।


आवेदन के बाद जांच पूरी करते हुए समाज कल्याण विभाग बच्चों के खाते में प्रतिपूर्ति राशि का अंतरण करेगा। सचिव का पत्र मिलने के बाद समाज कल्याण विभाग ने डीआईओएस के माध्यम से सभी प्रधानाचार्यों को संशोधित आवेदन समय सारिणी भेजते हुए निर्धारित समयावधि में दशमोत्तर छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया है।


संशोधित दशमोत्तर छात्रवृत्ति आवेदन समय सारिणी प्रधानाचार्यों को भेजी गई है। आवेदन नहीं करने की दशा में विद्यार्थी की तो समय से जांच कर फॉर्म अग्रसारित नहीं करने पर कॉलेज प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी होगी।

यूपी बोर्ड प्रश्नपत्रों की नए सिरे से बनेगी रूपरेखा, 15 दिसंबर से पहले दो दिवसीय कार्यशाला में होगा मंथन, 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षा से लागू हो सकता है नया प्रारूप

यूपी बोर्ड प्रश्नपत्रों की नए सिरे से बनेगी रूपरेखा, 15 दिसंबर से पहले दो दिवसीय कार्यशाला में होगा मंथन, 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षा से लागू हो सकता है नया प्रारूप

■ कक्षा नौ से 12 तक के प्रश्नपत्रों के प्रारूप पर विचार

■ हाई ऑर्डर थिंकिंग स्किल पर होगा गंभीर मंथन


प्रयागराज । यूपी बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के प्रश्नपत्रों की रूपरेखा नए सिरे से तय की जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के परिप्रेक्ष्य में कक्षा नौ से 12 तक की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र का प्रारूप फिर से निर्धारित करने के लिए बोर्ड 15 दिसंबर से पहले दो दिनी कार्यशाला आयोजित करने जा रहा है।


प्रश्नपत्रों में हाई ऑर्डर थिंकिंग स्किल (हॉट्स) समेत अन्य प्रकार के प्रश्नों को कितने अनुपात में शामिल करना है और प्रश्नपत्र में सरल, सामान्य और कठिन प्रश्नों की संख्या कितनी होनी चाहिए आदि बिन्दुओं पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे।


वैचारिक समझ बढ़ेगीः प्रश्नपत्रों में बदलाव का मकसद छात्र-छात्राओं में रटने और परीक्षा के लिए सीखने की बजाए वैचारिक समझ बढ़ाने पर जोर होगा। नया प्रारूप तैयार करने के बाद शासन को भेजा जाएगा जिसकी मंजूरी मिलने के बाद 2026 की परीक्षा से लागू हो सकता है। सचिव भगवती सिंह के अनुसार प्रश्नपत्रों के प्रारूप पर कार्यशाला से यूपी बोर्ड के विषय विशेषज्ञों की समझ भी बेहतर होगी।


क्षमताओं और योग्यताओं का करेंगे परीक्षण

बोर्ड परीक्षा और प्रवेश परीक्षा सहित माध्यमिक विद्यालय परीक्षाओं की वर्तमान प्रकृति और आज की कोचिंग संस्कृति विशेष रूप से माध्यमिक विद्यालय स्तर पर बहुत नुकसान पहुंचा रही है। इससे वास्तव में सीखने की बजाए विद्यार्थी अपना मूल्यवान समय परीक्षा, कोचिंग और तैयारी में दे रहा है। ये परीक्षाएं छात्रों को एक ही स्ट्रीम में बहुत ही सीमित सामग्री सीखने के लिए मजबूर करती हैं। बोर्ड परीक्षाओं को इस तरह बनाया जाएगा कि वे महीनों की कोचिंग और याद करने की बजाय मुख्य रूप से विद्यार्थियों की मूल क्षमताओं और योग्यताओं का परीक्षण कर सकें।

बीएसए की पहल पर कबाड़ी को किताबें बेचने के मामले में बीईओ की गिरफ्तारी को जिलाधिकारी ने बताया नियम विरुद्ध, सीओ और एसओ के खिलाफ कार्यवाही हेतु एसपी को लिखा पत्र

बीएसए की पहल पर कबाड़ी को किताबें बेचने के मामले में बीईओ की गिरफ्तारी को जिलाधिकारी ने बताया नियम विरुद्ध, सीओ और एसओ के खिलाफ कार्यवाही हेतु एसपी को लिखा पत्र


बांसी। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने परिषदीय विद्यालय की किताबें कबाड़ी को बेचने के मामले में शुक्रवार को हुई बीईओ बांसी की गिरफ्तारी को नियम विरुद्ध बताते हुए प्रभारी निरीक्षक और सीओ बांसी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए एसपी को पत्र लिखा है। इस मामले को संज्ञान में लाने के लिए बीएसए ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा था।


बीएसए ने डीएम लिखे पत्र में कहा था कि पुस्तकें कबाड़ी को बेचने के आरोप में बीईओ कार्यालय के अनुचर सहाबुद्दीन और रामजस के विरुद्ध पुलिस ने बिना विभागीय जांच प्राथमिकी दर्ज की थी। इस प्राथमिकी में बीईओ अखिलेश कुमार सिंह का नाम नहीं था। सिर्फ अनुचरों के बयान को आधार बनाकर अखिलेश कुमार सिंह के नाम को प्रकाश में लाकर गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने मुख्य सचिव के शासनादेश का हवाला देते हुए कहा है कि यदि किसी अधिकारी और कर्मचारी द्वारा बरती अनियमितता प्रकाश में आती है तो उसके विरुद्ध जांच के बाद अनुशासनिक विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।


बीएसए ने कहा है कि विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई में यदि यह पाया जाता है कि उसकी कोई आपराधिक भूमिका है तो उसके विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराए जाने पर विचार किया जाता है। अन्यथा विभागीय कार्रवाई में जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर दंड दिए जाते हैं। बीएसए ने कहा है कि प्रभारी निरीक्षक और सीओ बांसी ने शासनादेश का पालन नहीं किया। उन्होंने डीएम से प्रभारी निरीक्षक और सीओ बांसी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। बीएसए की शिकायत के आधार पर डीएम ने एसपी को पत्र लिखा है।


बीईओ की गिरफ्तारी के मामले में शासनादेश का उल्लंघन किया गया है। किसी आपराधिक मामले में विभागीय जांच में दोष साबित होने पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में बांसी के सीओ और कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी को पत्र लिखा गया है। ~ डॉ0 राजा गणपति आर, जिलाधिकारी




BEO Arrested: कबाड़ी के यहां किताब की बिक्री मामले में बीईओ गिरफ्तार

30 नवंबर 2024
सिद्धार्थनगर। बांसी कोतवाली की पुलिस ने परिषदीय विद्यालय की पुस्तकों को कबाड़ी से बेचने के मामले शुक्रवार को पांचवें आरोपी खंड शिक्षा अधिकारी बांसी अखिलेश सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया है।


बताते चलें कि 15 अक्तूबर परिषदीय विद्यालय की पुस्तक बेचने के मामले में कोतवाली पुलिस ने दो कबाड़ी और दो खंड शिक्षा अधिकारी बांसी के कार्यालय सहायक कुल चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 


बच्चों को पढ़ने के लिए निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराई गई कक्षा एक से आठ तक की पुस्तक खंड शिक्षा अधिकारी बांसी के कार्यालय में पड़ी थी। जिसे विद्यालयों में न भेजकर अतिरिक्त आमदनी के लिए कबाड़ी के हाथ बेच दिया था। 15 अक्तूबर को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने एक पिकअप से कक्षा एक से आठ तक की 8 क्विंटल किताबों को ले जाते समय कबाड़ी को पकड़ा था।


पकड़े गए कबाड़ी कस्बे के शास्त्रीनगर वार्ड निवासी अंकित कसेरा व प्रतीक कसेरा उर्फ गोपाल और खंड शिक्षा अधिकारी बांसी कार्यालय सहायक शहाबुद्दीन पुत्र मो इस्लाम निवासी नेउरी थाना मिश्रौलिया व अनुचर रामजस निवासी प्रतापनगर कस्बा बांसी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 


इसमें पांचवें आरोपी के रूप में बीईओ थे। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगी थी। शुक्रवार को मौके पर पहुंचकर दबोच लिया। इस संबंध में कोतवाल बांसी राम कृपाल शुक्ल ने बताया कि पांचवें आरोपी खंड शिक्षा अधिकारी बांसी अखिलेश सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया गया है।