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Saturday, September 2, 2017

बदायूं : आम विद्यालयों को मात दे रहे आमगांव का विद्यालय, छात्रों को लगातार कर रहे जागरूक


हमें नाज है

जहां एक ओर शिक्षक-शिक्षिकाएं सिर्फ वेतन को लेकर नौकरी करते हैं। तो वहीं कुछ शिक्षक-शिक्षिकाएं ऐसे भी हैं जो बच्चों के लिए सबकुछ न्यौछावर कर रहे हैं। अवकाश के समय भी बच्चों के घर जाकर तालीम दे रहे हैं। ऐसे ही विद्यालय में शुमार है विकास क्षेत्र जगत का उच्च प्राथमिक विद्यालय आमगांव में तैनात इंचार्ज प्रधानाध्यापक संगीता शर्मा। जिन्होंने सामान्य रुप वाले विद्यालय को कांवेंट जैसा बना दिया। जिसका फल यह है कि पास के गांव के निजी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों ने वहां से नाम कटवाकर यहां दाखिला लिया है। कक्षा आठ में मीना मंच की गतिविधियों से सीखना कुछ छात्रओं की आगे की पढ़ाई का जरिया बना है। उन्हें स्वच्छता के लिए राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

इंचार्ज प्रधानाध्यापक ने संस्कृत विषय से एमए, बीएड व बीटीसी की। सेवानिवृत्त पिता को आदर्श मानकर लोगों के मन में बसी बेसिक शिक्षा के धारणा को बदलने की ठानी। वर्ष 2010 में विद्यालय में तैनाती मिली। उस समय विद्यालय सामान्य था। सामुदायिक सहभागिता से विद्यालय की सूरत संवारना शुरु किया। बजट की जरूरत और पड़ी तो खुद का वेतन भी विद्यालय में लगाने से पीछे नहीं हटीं। विद्यालय में कंप्यूटर की शिक्षा देना शुरु किया और धीरे-धीरे पुस्तकालय, मीना मंच का कमरा के अलावा विज्ञान प्रयोगशाला भी बनवाई। समय-समय पर बच्चों को प्रयोग भी कराती हैं। ज्यादा शिक्षा प्रयोग के माध्यम से ही दे रही हैं। कक्षाओं में प्रयोग के साधन मौजूद हैं। पौधों का संरक्षण करती हैं। दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था की गई है। विद्यालय से संबंध हर अभिलेख मौजूद है। जो भी विद्यालय आता है, पंजिका पर तारीफ लिखे बिना नहीं रह पाता। लाउडस्पीकर से विद्यालय में प्रार्थना होती है। जिससे गांव के अन्य बच्चे भी आकर्षित होते हैं। उनका कहना है कि विद्यालय भी मंदिर की तरह ही होता है। जहां बच्चों का भविष्य तैयार किया जाता है। जिससे वह बेहतर देश का निर्माण कर सकें।

प्रयोगशाला में प्रयोग करते छात्र-छात्रएं ’ जागरणएमडीएम में भी स्वच्छता का रखा जाता है ध्यान

मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण की ओर से रसोइयों को एप्रिन पहनकर एमडीएम बनाने का निर्देश दिया गया, लेकिन बजट के अभाव में निर्देशों का पालन नहीं हो पाता, लेकिन इस विद्यालय में रसोइया साफ-सुथरी रहकर एप्रिन पहनकर एमडीएम बनाती हैं। उनके दायित्वों का बोध कराने को दीवार पर जागरूकता संदेश लिखे गए हैं।

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