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Tuesday, January 13, 2026

मनमाने समायोजन पर हाईकोर्ट पहुंचे परिषदीय शिक्षक, प्रयागराज और लखनऊ में दायर हुई याचिकाएं, किसी भी जिले में नियम का पालन नहीं

मनमाने समायोजन पर हाईकोर्ट पहुंचे परिषदीय शिक्षक,  प्रयागराज और लखनऊ में दायर हुई याचिकाएं, किसी भी जिले में नियम का पालन नहीं

प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में मनमाने समायोजन के खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विभिन्न जिलों के शिक्षकों की ओर से प्रयागराज और लखनऊ बेंच में दाखिल याचिकाओं में तीसरे चरण के समायोजन में नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है। कुछ जिलों में शिक्षामित्रों को भी शिक्षक मानते हुए समायोजन कर दिया गया, जिससे शिक्षकों में आक्रोश है।

पिछले साल जून में पहले चरण के समायोजन में विभिन्न जिलों के तमाम स्कूल एकल हो गए थे। उसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन तो हुआ लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हो सकी। दिसंबर अंत में तीसरे चरण के समायोजन में भी शिक्षकों से विकल्प नहीं लिया गया और मनमाने तरीके से कुछ जिलों में वरिष्ठ तो कुछ में कनिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दाखिल याचिका में पिछली सुनवाई के बाद सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा गया है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को फिर होनी है।

सचिव ने मंडलीय अफसरों से मांगी रिपोर्ट: बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशकों से समायोजन की रिपोर्ट तलब की है।

एक गलती सुधारने में और बड़ी भूल कर बैठे अफसर
प्रयागराज। पहले चरण के समायोजन में की गई गलती सुधारने में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने और बड़ी गलती कर दी है। जून 2025 में समायोजन के दौरान बड़ी संख्या में स्कूल एकल हो गए थे। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं हुईं तो अफसरों ने समायोजन रद्द करते हुए शिक्षकों को वापस मूल विद्यालयों में भेजना शुरू कर दिया। इसके खिलाफ भी कुछ याचिकाएं कर दीं। मामला बिगड़ता देखकर अफसरों ने तीसरे चरण के समायोजन के आदेश जारी कर दिए। आरोप है है कि तीसरे चरण में नियम दरकिनार करते हुए अलग-अलग जिलों में बीएस ने मनमाने आदेश जारी कर दिए।



नियम न कानून और परिषदीय शिक्षकों का कर दिया मनमाना तबादला, समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक का कोई तय मानक, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक

यू-डायस पोर्टल पर 31 दिसम्बर को ही स्थानान्तरित पर अभी तक सूची जारी नहीं हुई

● शिक्षकों से विकल्प लिए बगैर कर दिया मनमाना स्थानान्तरण 
● जिलों में बीएसए की मनमानी के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक

03 जनवरी 2026
प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों के समायोजन में अफसरों पर मनमानी के आरोप लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि अफसरों ने मनमानी की सीमा पार कर दी है। यू-डायस पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर हुए समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक को ही देखा गया। जहां जिस बेसिक शिक्षा अधिकारी को जो समझ में आया, तबादला आदेश जारी कर दिया। आक्रोशित शिक्षक हाईकोर्ट खुलने पर समायोजन आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

जिन जिलों में कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हुआ है उनमें अमेठी, मथुरा, रायबरेली, बदायूं, हरदोई, देवरिया, हाथरस, उन्नाव, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, बागपत और पीलीभीत आदि शामिल हैं। वहीं, जिन जिलों में वरिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हुआ है उनमें अमरोहा, हापुड़, वाराणसी, चित्रकूट, बरेली, रामपुर, आगरा, गोरखपुर, फर्रुखाबाद, कुशीनगर, संत कबीर नगर, फिरोजाबाद, फतेहपुर और सीतापुर आदि शामिल हैं।

शिक्षक नेता निर्भय सिंह का कहना है कि कई जिलों जैसे बाराबंकी, लखनऊ आदि में यू-डायस पोर्टल पर शिक्षकों को 31 दिसम्बर को ही स्कूल से स्थानान्तरित कर दिया गया है। अभी तक सूची जारी नहीं हुई कि किसे किस स्कूल भेजा गया है। इसे लेकर शिक्षक परेशान हैं।

प्रयागराज में समायोजन में मनमानी का आरोप
आरोप है कि संदीप कुमार तिवारी का समायोजन मेजा के कंपोजिट विद्यालय नेवढ़िया से उच्च प्राथमिक विद्यालय महुलीकलां में हुआ जो कि 40 किलोमीटर दूर है जबकि दो किमी दूर बगल का स्कूल एकल था। संदीप कुमार जुलाई-अगस्त 2025 में समायोजन के दौरान प्रधानाध्यापक बिसाहिजन खुर्द से नेवढ़िया गए थे। आरोप है कि स्वेच्छा से समायोजन लेने के छह महीने के अंदर दोबारा जबरदस्ती समायोजन कर दिया गया। उनसे वरिष्ठ दो शिक्षक हैं जिनका समायोजन नहीं हुआ। उच्च प्राथमिक विद्यालय शृंग्वेरपुर से हिंदी की अकेली शिक्षक सुनीता चौरसिया का समायोजन मादूपुर कर दिया गया। जबकि उनके स्कूल में एक विषय में दो शिक्षिकाएं हैं, उनमें से किसी का समायोजन नहीं हुआ। कई स्कूल ऐसे हैं जिसमें वरिष्ठ और कनिष्ठ को छोड़कर अन्य शिक्षकों का समायोजन हो गया है।

प्राइमरी हेड को जूनियर में किया समायोजित
जौनपुर और कासगंज समेत कुछ जिलों में प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को उच्च प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर दिया गया है। जबकि इसे लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। सैकड़ों शिक्षकों ने प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में समायोजन या पदोन्नति में टीईटी लागू करने के लिए हाईकोर्ट में याचिकाएं कर रखी है।




समायोजन में एक नीति न होने पर बेसिक शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी, प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर बढ़ रही नाराजगी

30 दिसम्बर 2025
लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ ने कहा है कि शिक्षकों के समायोजन में कोई एक नीति नहीं है। कहीं वरिष्ठ तो कहीं जूनियर शिक्षकों का मनमाना तबादला किया जा रहा है। 

संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा एक प्रयोगशाला बन गई है। कभी स्कूलों की पेयरिंग, कभी टीईटी अनिवार्यता तो कभी ऑनलाइन हाजिरी की वजह से शिक्षक परेशान रहे हैं। अब सरप्लस शिक्षकों के समायोजन में उनके सामने नई मुसीबत खड़ी है। जिन स्कूलों में मानक से अधिक शिक्षक हैं, उन्हें एकल व बंद स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने बताया है कि जिले में सरप्लस की जो सूची बनाई जा रही है, उसमें कुछ जगह जूनियर का तबादला किया जा रहा है। वहीं, कुछ जिलों में वरिष्ठ के तबादले का विकल्प दे रहे हैं। कुछ जगह बिना विकल्प के ही जबरन समायोजन की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि हर जिले में अलग-अलग नीति से शिक्षकों में काफी नाराजगी है।



कहीं सीनियर तो कहीं जूनियर शिक्षक का कर दिया जा रहा तबादला, परिषदीय शिक्षकों के अंत:जनपदीय तबादलों में मनमानी

लखनऊ: हाथरस के बीएसए में खंड शिक्षाधिकारियों को आदेश दिया है कि शिक्षक विहीन और एकल विद्यालय में जूनियर शिक्षक कर तबादला समायोजन कर दिया जाए। आदेश में यह भी लिखा है कि शिक्षकों से बिना विकल्प लिए तबादला किया जाए। वहीं, हमीरपुर के बीएमए लिखते हैं कि विकल्प लेकर  शिक्षक का तबादला कर दिया जाए। कई तरह की ऐसी असमानताएं केवल  मामला इन दो जिलों का ही नहीं,  पूरे प्रदेश का पही हाल है।

कुछ बीएसए सीनियर शिक्षक का तबादला कर रहे हैं तो कुछ जिलों में जूनियर का तबादला कर दे रहे। इतना ही नहीं, कुछ बीएसए ने विकल्प लेकर तबादला करने की बात लिखी है तो कुछ बिना विकल्प तबादले को कह रहे। वहीं कुछ जिले ऐसे भी है, जहां जूनियर का कोई निक ही नहीं किया गया है। ऐसे में किसी भी शिक्षक का तबादला किया जा सकता है। जिलों  में अलग-अलग नीति अपनाए जाने से शिक्षक परेशान हैं। उनका कहना है कि बिना किसी नियम के जिस शिक्षक को चाहेंगे, तबादला कर दिया जाएगा। कोई विकल्प नहीं भरता है, तो उसका तबादला जबरन करने की बात भी कई जिलों के बीएसए कर रहे हैं। 


कहां कैसे हो रहे तबादले?

शासनादेश में कह स्पष्ट नहीं किया गया कि तबादला जूनियर का होगा या सीनियर का। सीतापुर के बीएसए ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया कि किस शिक्षक का पहले तबादला होगा। कुशीनगर के बीएसए ने यह तो लिखा है कि पहले दिव्यांग सरप्लस, फिर महिला सरप्लस और फिर पुरुष सरप्लस का तबादला होगा। लेकिन उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया कि इनमें भी पहले जूनियर का किया जाएगा या फिर सीनियर का। हमीरपुर के बीएसए ने पहले दिव्यांग महिला, फिर दिव्यांग पुरुष, उसके बाद बरिष्ठ महिला और फिर वरिष्ठ पुरुष अध्यापक का तबादला करने के लिए लिखा है। 

शासन और निदेशक स्तर से जारी आदेश 19 दिसंबर को जो पत्र लिखा है, उसके अनुसार दिव्यांग, महिला, पुरुष विषया और विधुर के साथ ही वरिष्ठता के आधार पा तबादला होगा। वहीं, 26 दिसंबर को बिना किसी विकल्प के जूनियर शिक्षक तबादला करने के लिए लिखा है। 


बड़े अफसरों ने साधा मौन
इस बारे में अपर मुख्य सचिन पार्थ सारथी सेन शर्मा, डीजी स्कूल शिक्षा मोनिका रानी, निदेशक बेसिक शिक्षा से बात करने के लिए फोन किया गया। उनका पक्ष जानने के लिए मेसेज भी किया। अपर मुख्य सचिव ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बाकी अधिकारियों ने भी कोई जवाब नहीं दिया।


क्या है असल वजह?
इसके पहले भी बेसिक शिक्षकों के तबादले होते रहे है। प्रदेश स्वर में ऑनलाइन चुनते थे। इस बार तबादला करने के लिए बीएसए पर छोड दिया गया है। वे अपने स्तर से अलग-अलग़ निर्णय ले रहे है। जानकारों के अनुसार इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि इसस पहले एक बार सीनियर और एक बार जूनियर का नियम था। तब भी कुछ शिवक कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने ना सिरे से नही बनाने के लिए कहा गया। यही वजह है कि जिला स्तर से कैसे भी तबादला प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है। अभी कोर्ट बंद है। ऐसे में शिक्षक अभी कोर्ट भी नहीं सकते।

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