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Sunday, May 18, 2025

परिषदीय स्कूल के बच्चों को DBT के रुपयों का इंतजार, सत्र शुरू हुए 47 दिन बीते, 70 फीसदी बच्चों का ही आधार सत्यापन पूरा

परिषदीय स्कूल के बच्चों को DBT के रुपयों का इंतजार, सत्र शुरू हुए 47 दिन बीते, 70 फीसदी बच्चों का ही आधार सत्यापन पूरा


लखनऊ । प्राइमरी स्कूल में सत्र शुरू हुए 47 दिन बीत गए हैं लेकिन अभी तक यूनीफार्म के पैसे अभिभावकों के खाते नहीं पहुंचे हैं। कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों की यूनीफार्म, स्वेटर, जूते, मोजे व स्टेशनरी के प्रति छात्र 1200 रुपये अभिभावकों के खाते में आने हैं।


 प्रेरणा पोर्टल पर एक लाख से अधिक छात्रों (70 फीसदी) और अभिभावकों के बैंक अकाउंट नंबर, आधार नंबर, आईएफएससी कोड की फीडिंग पूरी हो चुकी है। अभिभावक स्कूल आकर शिक्षकों से यूनीफार्म के पैसे भेजने का दबाव बना रहे हैं।


प्रधानाध्यापकों का कहना है कि स्कूल के पास आउट, प्रोन्नत और नव प्रवेशित करीब 70 फीसदी छात्र-छात्राओं का विवरण प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। जो बचे हैं उनका ब्योरा अपलोड किया जा रहा है। 


एडी बेसिक श्याम किशोर तिवारी बताते हैं कि किसी भी दिन अभिभावकों के खाते में यूनीफार्म के पैसे भेजे जा सकते हैं। विभाग की ओर से तैयारियां पूरी हैं। कक्षा वार ब्योरा अपलोड हो गया है

Sunday, May 4, 2025

ARP का जिम्मा शिक्षा का स्तर सुधारने का और करना पड़ रहा BRC में बाबूगिरी

ARP का जिम्मा शिक्षा का स्तर सुधारने का और करना पड़ रहा BRC में बाबूगिरी 


लखनऊ। प्राइमरी स्कूलों की शिक्षा का स्तर सुधारने और निपुण बनाने वाले एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी), आरटीई के चयनित बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिले दिला रहे हैं। बच्चों व अभिभावकों के आधार का सत्यापन, अपार आईडी, यू डायस, डीबीटी, किताबों के वितरण समेत दूसरे काम काम कर रहे हैं। बीआरसी पर बाबूगिरि के साथ ही विभाग की ओर से मांगी जाने वाली सूचनाएं स्कूलों से लेकर भेज रहे हैं। इन्हीं कामों की वजह से एआरपी में खासी नाराजगी है। शिक्षक एआरपी की जिम्मेदारी संभालने से दूर भाग रहे हैं।


लखनऊ में 1618 प्राइमरी स्कूलों में करीब पौने दो लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। शासन ने प्राइमरी स्कूलों का शैक्षिक स्तर सुधारने और निपुण बनाने के लिये एआरपी के पद सृजित किये हैं। नगर और ग्रामीण क्षेत्र में विज्ञान, हिन्दी, गणित, अंग्रेजी और सामाजिक अध्ययन के 10-10 एआरपी के पद हैं। विषय विशेषज्ञ शिक्षक ही एआरपी बनाए जाते हैं। सरोजनीनगर के एक आरपी का कहना है कि जिस काम के लिये लिया गया है, वो काम नहीं कराया जा रहा। डीबीटी समेत अन्य कार्य कर रहे हैं।


🔴 एआरपी के मूल काम

● बच्चों को अंग्रेजी, हिन्दी गणित, विज्ञान और सामाजिक अध्ययन में दक्ष बनाना।
● विभागीय आदेश, ऐप, पढ़ाई से लेकर अन्य गतिविधियों का क्रियान्वयन कराना।
● शिक्षकों को प्रशिक्षण देना और स्कूलों की प्रगति को परखना
● बच्चों का मूल्यांकन का काम।


🔴 ये काम किये जा रहे 

● आरटीई तहत निजी स्कूलों में दाखिला लेने वाले या दाखिले से वंचित बच्चों का सत्यापन
● बच्चों की यूनीफार्म के रुपये भेजने के लिये डीबीटी में सूचनाएं अपलोड करना
● बच्चों व अभिभावकों के आधार सत्यापन,यूडाइस व अपार आईडी पर बच्चों का ब्योरा अपलोड कराना
● ड्रॉप बॉक्स में पड़े हुए बच्चों की सूचना, अगली कक्षा में नामांकन की सूचना देना
● इलाके के बिना मान्यता वाले स्कूलों का चिन्हीकरण


एआरपी का काम सिर्फ प्राइमरी स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने का है। इसी मकसद से इनकी नियुक्ति की गई है। एआरपी से दूसरे काम लिये जाने की जानकारी नहीं है। बीएसए से बात करके पता करेंगे। -श्याम किशोर तिवारी, एडी बेसिक



एआरपी नहीं बनना चाहते

बाबूगीरी के काम लिये जाने से शिक्षकों में एआरपी बनने की रुचि कम हो गई। शिक्षक एआरपी नहीं बनना चाहते हैं। लखनऊ में एआरपी के 50 पद हैं। एआरपी चयन के लिये आवेदन में सिर्फ 66 शिक्षकों ने आवेदन किया था। लखनऊ में पांच हजार से अधिक शिक्षक हैं। 25 एआरपी का चयन हुआ है। 

Sunday, March 23, 2025

RTE : बच्चों का सीट एलॉटमेंट ऑनलाइन देखने का विकल्प नहीं, अभिभावकों को मेसेज से मिलती है प्रवेश की सूचना, भटक रहे अभिभावक

RTE : बच्चों का सीट एलॉटमेंट ऑनलाइन देखने का विकल्प नहीं, अभिभावकों को मेसेज से मिलती है प्रवेश की सूचना,  भटक रहे अभिभावक


23 मार्च 2025
लखनऊ। प्रदेश में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत चल रही प्रवेश प्रक्रिया में सीट अलॉटमेंट की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है। अभिभावकों के मोबाइल फोन पर सीट अलॉटमेंट की जानकारी दी जाती है। कई अभिभावक सूचना न मिलने से परेशान हैं।

आरटीई के तहत प्रदेश के लिए चार चरणों में आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। तीन चरणों का सीट अलॉटमेंट कर प्रवेश दिलाया जा रहा है। इसके बावजूद कई अभिभावक भटक रहे हैं, क्योंकि बच्चे को सीट अलॉट हो गई लेकिन अभिभावक को इसकी जानकारी नहीं हुई।

अभिभावकों ने बताया कि आवेदन करते समय साइबर कैफे वाले अपना फोन नंबर डाल देते हैं। इससे मेसेज उनको नहीं मिल पाता है। वहीं, कोई और ऐसा माध्यम नहीं है, जिससे सीट अलॉटमेंट की जानकारी मिल सके। इसके लिए अभिभावक बीएसए कार्यालय का चक्कर काटते रहते हैं। बीएसए दफ्तर के कर्मचारी भी यह कहकर टरका देते हैं कि सीट अलॉटमेंट की जानकारी ऑनलाइन देखने का अधिकार सिर्फ बीएसए को है। जब वह आएंगे तो सीट अलॉटमेंट के बारे में पता चलेगा। इसलिए अभिभावक सीट अलॉटमेंट की जानकारी ऑनलाइन करने की मांग कर रहे हैं।

वहीं, समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या होने के कारण सीट अलॉटमेंट की सूचना ऑनलाइन नहीं की जाती है। संबंधित अभिभावक या बच्चे अपना परिणाम ही देख सकते हैं। अभिभावकों को मोबाइल फोन पर सीधे मेसेज जाता है। जिला स्तर पर डाटा देखने का अधिकार बीएसए व राज्य स्तर पर हमारे पास है। अगर संबंधित बच्चे को अपनी दूसरी प्राथमिकता पर प्रवेश लेना है तो बीएसए कार्यालय में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। आरटीई के तहत अधिकाधिक बच्चों के दाखिले के लिए अभियान चलाया जा रहा है। 




RTE : प्रवेश दिए बगैर ही कागज पर दिखाए दाखिले, निजी स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराने के लिए भटक रहे अभिभावक

स्कूल प्रवेश लेने से कर रहा मना, आईजीआरएस पर की गई शिकायत

21 मार्च 2025
लखनऊ। प्रदेश में निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा अधिनियम (आरटीई) के तहत दाखिले के लिए चार चरणों के आवेदन हो चुके हैं। यह कवायद की जा रही है कि एक अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र से पहले सीट पाने वाले बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित कराया जाए। किंतु जिलों में इसे लेकर लापरवाही दिख रही है।


दरअसल, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कुछ बच्चों को प्रवेश नहीं मिला। जब इसकी शिकायत एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) पर की गई तो उनका प्रवेश दिखा दिया गया।


निदेशालय का चक्कर काट रहे अभिभावक ने बताया कि एक निजी स्कूल में प्रवेश के लिए बच्चे का आवेदन किया था लेकिन स्कूल दाखिला लेने से मना कर रहा है। जब इसकी शिकायत आईजीआरएस की तो बच्चे का प्रवेश हुआ दिखा दिया। उन्होंने दोबारा शिकायत की और अधिकारियों से मिलकर बच्चे को प्रवेश दिलाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं।


आरटीई में निजी कॉलेजों द्वारा सीट अलॉट होने के बाद भी प्रवेश न लेने की भी शिकायत विभाग को मिल रही है। पर, विभाग व जिला स्तरीय अधिकारी कोई सख्ती नहीं कर पा रहे हैं। इससे निजी स्कूलों की मनमानी चल रही है। तीन चरणों की पूरी प्रक्रिया होने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अब तक कितने बच्चों के दाखिले सुनिश्चित हुए हैं।


बीएसए बताएंगे प्रवेश न मिलने के कारण

समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि आरटीई में ज्यादा से ज्यादा दाखिले के लिए डीएम व बीएसए के स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। जहां यह सूचना जानकारी मिलती है कि कोई स्कूल प्रवेश नहीं ले रहा है तो वहां स्थानीय अधिकारी वार्ता कर रहे हैं। इस बार यह व्यवस्था की गई है कि अगर सीट अलॉटमेंट के बाद भी बच्चे का प्रवेश नहीं हो रहा है तो संबंधित बीएसए को इसका कारण बताना होगा।

Friday, April 5, 2024

सूबे की राजधानी लखनऊ में 89 प्राथमिक विद्यालय सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे

इन शिक्षकों को पढ़ाने के साथ दाखिले, आधार सत्यापन, डीबीटी समेत दूसरे कार्य भी

सूबे की राजधानी लखनऊ में 89 प्राथमिक विद्यालय सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे


लखनऊ । नगर व ग्रामीण क्षेत्र के 89 प्राइमरी स्कूल में एक-एक शिक्षक तैनात हैं। इन शिक्षकों पर पढ़ाने के साथ नए बच्चों के दाखिले, आधार सत्यापन, डीबीटी समेत स्कूल के दूसरे कामकाज भी कर रहे हैं। लोक सभा चुनाव अलग से है। बता दें कि चार दिन पहले 48 शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने से स्कूलों में और शिक्षक कम हो गए हैं।


अधिकारी दावे करते हैं कि शिक्षामित्र बच्चों को पढ़ा रहे हैं। जबकि इनमें से दर्जन भर स्कूलों में शिक्षामित्र भी नहीं हैं। करीब पांच साल से शिक्षक न होने से बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। अभिभावक प्राइमरी स्कूलों से बच्चों को निकालकर निजी स्कूलों में दाखिला करा रहे हैं।


एक शिक्षक के जिम्मे दो-दो स्कूल लखनऊ के 1618 प्राइमरी स्कूलों में करीब पांच हजार शिक्षक तैनात हैं। नगर क्षेत्र में 5 57 स्कूल में शिक्षक नहीं हैं। यहां दूसरे स्कूलों के एक-एक शिक्षक लगाए गए हैं। इनमें कई शिक्षकों के पास दो-दो स्कूलों का कार्यभार है। यह शिक्षक एक ही समय पर दो स्कूलों के बच्चों को पढ़ाने के अलावा दाखिले, पुस्तकें बांटने, भोजन परोसने से लेकर अन्य कामकाज निपटा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के करीब 132 स्कूलों में लम्बे समय से एक-एक शिक्षक तैनात हैं। मानक के अनुसार शिक्षक न होने से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है।


बच्चों की शिक्षा में आ रही बाधा शिक्षकों का कहना है कि उनका अधिकांश समय बच्चों के दाखिले, मिड डे मील और विभागीय कामकाज में पूरा समय खत्म हो जाता है। एक शिक्षक पर स्कूल के कामकाज के साथ बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में जब इन शिक्षकों को आधार सत्यापन या डीबीटी जैसे दूसरे कामों में लगाया जाता है तो पढ़ाई का संकट और बढ़ जाता है।


शिक्षकों की लगातार कमी होती जा रही

31 मार्च को प्राइमरी व जूनियर स्कूलों के 48 शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए। इनमें से दो ने व्यक्तिगत कारणों से स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति ली है। इससे कई स्कूलों में एक-एक शिक्षक बचे हैं। शिक्षक नेताओं का कहना है कि बीते सालों में शिक्षकों की कई भर्तियां हुईं लेकिन लखनऊ में अधिक शिक्षक संख्या बताकर शासन यहां शिक्षकों की भर्ती नहीं कर रहा है। इससे शिक्षकों की लगातार कमी होती जा रही है। जिससे विद्यालयों में पढ़ाई पर प्रभाव पड़ रहा है। इस स्तिथि में सख्ती से सुधार की जरूरत है ताकि बच्चों की शिक्षा सुचारू रहे।


 ग्रामीण के मुकाबले शहर के स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। सभी स्कूलों में शिक्षक हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। शासन के आदेश पर समायोजन होगा। एकल शिक्षक वाले स्कूलों में कमी दूर होगी। –राजेश सिंह, मुख्यालय, खण्ड शिक्षा अधिकारी

Wednesday, January 31, 2024

अब तक नहीं आई कंपोजिट ग्रांट! कैसे होंगे स्कूलों के विकास के काम? नहीं बन पाएंगी स्मार्ट क्लास

अब तक नहीं आई कंपोजिट ग्रांट!  कैसे होंगे स्कूलों के विकास के काम? नहीं बन पाएंगी स्मार्ट क्लास

 📢 प्राइमरी का मास्टर PKM
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75 फीसदी स्कूल कम्पोजिट ग्रांट नहीं निकाल पाए थे

पिछले वर्ष प्रधानाध्यापकों ने अपनी तनख्वाह से काम कराया था

कम्पोजिट ग्रांट के पांच करोड़ रुपये वापस हो गए थे पिछले साल


लखनऊ। प्राथमिक स्कूलों में इस साल स्मार्ट कक्षाएं नहीं बन पाएंगी। स्कूलों को अभी तक कम्पोजिट ग्रांट नहीं मिली है। ऐसे में स्कूलों में रंगाई पोताई, पठन पाठन की सामाग्री की खरीददारी के साथ ही मरम्मत के काम कैसे होंगे? 


पिछले वर्ष प्रधानाध्यापकों ने अपनी तनख्वाह से काम कराया था। जिसका भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि बजट जारी भी हो जाएगा तो उनका और स्कूल में काम कराने वाले वेंडर के पंजीकरण की प्रक्रिया में मार्च गुजर जाएगा। लखनऊ में 1618 प्राथमिक, जूनियर और कम्पोजिट स्कूल हैं। 


सरकार हर साल इन स्कूलों में में स्मार्ट क्लास बनाने समेत दूसरे विकास कार्यों के लिए कम्पोजिट ग्रांट देती है। 100 बच्चों पर 25 हजार, 100 से 250 बच्चों पर 50 हजार व 250 से अधिक बच्चों वाले स्कूलों को 75 हजार रुपये कम्पोजिट ग्रांट की व्यवस्था है। पिछले साल शासन ने लखनऊ को 6 करोड़ 32 लाख रुपये जारी किये थे। यूपी प्राथमिक शिक्षक संघ के मंत्री वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि बीते साल 75 फीसदी स्कूल कम्पोजिट ग्रांट नहीं निकाल पाए थे।


बीएसए राम प्रवेश ने बताया कि कम्पोजिट ग्रांट की राशि एक हफ्ते में आने की उम्मीद है। इसका भुगतान बीते साल की तर्ज पर पोर्टल से ही किया जाएगा।

Tuesday, July 4, 2023

प्रोन्नत वेतनमान का लाभ प्रदान किये जाने हेतु बीएसए लखनऊ ने मांगी सूचनाएं

प्रोन्नत वेतनमान का लाभ प्रदान किये जाने हेतु बीएसए लखनऊ ने मांगी सूचनाएं


Monday, March 13, 2023

पांच साल बाद निजी स्कूलों को आरटीई अन्तर्गत प्रवेश के लिए मिलेगी शुल्क प्रतिपूर्ति

पांच साल बाद निजी स्कूलों को आरटीई अन्तर्गत प्रवेश के लिए मिलेगी शुल्क प्रतिपूर्ति 


लखनऊ। राजधानी के निजी स्कूलों को पांच वर्षाें बाद आरटीई की सीटों की शुल्क प्रतिपूर्ति मिलने जा रही है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय को हाल ही में वर्ष 2017 से लंबित मांगपत्र के सापेक्ष 29 करोड़ रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि आवंटित हो गई है। इसे सत्यापन के बाद जिले के 806 स्कूलों को बांटा जाएगा।



यह जानकारी देते हुए बीएसए अरुण कुमार ने बताया कि इन स्कूलों की करीब 33 हजार सीटों पर आरटीई के तहत गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ाया जा रहा है। आरटीई शुल्क प्रतिपूर्ति न होने से निजी स्कूलों का इस व्यवस्था से मोहभंग होता जा रहा था। इसके चलते आरटीई के तहत आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश कराना अधिकारियों के लिए कठिन हो गया था। मांग के सापेक्ष करीब 67 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की धनराशि जिले में पहुंचने से निजी स्कूलों ने राहत की सांस ली है।



लॉटरी से पहले धनराशि पहुंचने से राहत

जानकारी के मुताबिक, आगामी 15 मार्च को आरटीई के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों के लिए पहली लॉटरी होने जा रही है। ऐसे समय में प्रतिपूर्ति धनराशि आने से अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।



इस बार आए 10309 आवेदन


पहले चरण के लिए इस बार 2050 निजी स्कूलों की सीटों पर 10309 आवेदन आए हैं। इनका 13 मार्च तक सत्यापन किया जाएगा।15 मार्च को लॉटरी होगी। इसके बाद दो अन्य चरणों में लॉटरी के लिए आवेदन आएंगे। वहीं, पिछले पांच वर्षाें के आवेदनों की संख्या में दोगुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2018-19 में 4810 प्रवेश हुए। वर्ष 2019- 20 में यह संख्या 4680, 2020-21 में 6358, 2021-22 में 6387 और 2022-23 में 8020 पहुंच गई।



प्रतिपूर्ति राशि ऊंट के मुंह में जीरा

यह शुल्क प्रतिपूर्ति ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। जिले के स्कूलों का 43 करोड़ रुपये पांच साल से बकाया है। पांच साल बाद 29 करोड़ मिला है। हमलोग लगातार यह मांग कर रहे हैं कि प्रतिपूर्ति की राशि न्यायालय के निर्णय के अनुसार दी जाए। नियमानुसार व समय से शुल्क प्रतिपूर्ति न देने से निजी स्कूलों का मोहभंग हो रहा है। - अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष, अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

Thursday, November 17, 2022

केयर इंडिया कृत 21वीं सदी कौशल पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला हेतु शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों को प्रतिभाग कराये जाने के सम्बन्ध में

केयर इंडिया कृत 21वीं सदी कौशल पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला हेतु शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों को प्रतिभाग कराये जाने के सम्बन्ध में


Thursday, June 16, 2022

निजी स्कूलों में पढ़ेंगे 1.23 लाख गरीब छात्र-छात्राएं, निश्शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों का हुआ आवंटन

निजी स्कूलों में पढ़ेंगे 1.23 लाख गरीब छात्र-छात्राएं, निश्शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों का हुआ आवंटन


लखनऊ : सूबे के 34,483 निजी स्कूलों में गरीब व सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के बच्चों को प्रवेश दिलाने का रिकार्ड बनने जा रहा है। निश्शुल्क एवं बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत अब तक एक लाख 23 हजार 195 छात्र - छात्राओं को स्कूलों का आवंटन किया गया है। आवेदकों को आवंटित स्कूल की सूचना एसएमएस से दी जा रही है, अभिभावकों को तय स्कूलों में बच्चों को प्रवेश दिलाना होगा।


बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बुधवार को तीसरी लाटरी जारी की। इसके लिए दो मई से 10 जून तक आनलाइन आवेदन लिए गए थे। 36, 232 आवेदनों में 26,915 सही पाए गए और उनका स्कूल आवंटन जिलावार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले चरण के लिए दो से 25 मार्च तक और दूसरे चरण के लिए दो से 23 अप्रैल तक आवेदन लिए गए थे। दोनों चरणों में एक लाख तीन हजार 486 बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए। उनकी प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। 


ऐसे में तीनों चरणों में एक लाख 23 हजार 195 छात्र-छात्राओं को स्कूलों का आवंटन हुआ है। जल्द ही सभी को आवंटित विद्यालयों में प्रवेश मिलेगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने कहा है कि निजी विद्यालय अधिक से अधिक बच्चों को लाभ दिलाने में सहयोग करें।


इस तरह मिलता लाभ

सरकार मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में कक्षा एक व अन्य प्राथमिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत तक की सीमा में गरीब बच्चों को आवेदन लेकर प्रवेश करा रही है। प्रदेश में चार लाख सात हजार 978 कुल सीटें हैं। योजना के तहत आवंटित स्कूल को प्रति छात्र 450 रुपये फीस की प्रतिपूर्ति करती है। बच्चों को यूनीफार्म व किताबें लेने के लिए पांच हजार रुपये अभिभावक के खाते में भेजे जाते हैं। चयनित छात्रों के एडमिशन में आनाकानी करने पर निजी स्कूलों पर कार्यवाही भी की जाती है।




RTE : प्रवेश कराने में लखनऊ यूपी में अव्वल होने के बावजूद भी चयन और प्रवेश की संख्या में पचास फीसदी का अंतर

 
लखनऊ :  निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत बच्चों का चयन और प्रवेश कराने के मामले में पूरे प्रदेश में लखनऊ पहले नम्बर पर है। पहले नम्बर पर रहने के बावजूद भी चयन और प्रवेश की संख्या में पचास फीसदी का अंतर है।

लखनऊ में 16496 बच्चों का चयन निजी स्कूल में आरटीई के तहत कराने के लिए किया गया है लेकिन विभाग अभी तक सिर्फ 7538 बच्चों को ही प्रवेश दिला सका है। हालांकि अन्य जिलों से लखनऊ की स्थिति काफी बेहतर है।

इसीलिए लखनऊ प्रवेश कराने के मामले में आगरा, वाराणसी, गाजियाबाद जैसे जिलों से काफी आगे हैं। आरटीई में प्रवेश कराने के मामले में आगरा 5185 बच्चों के प्रवेश कराकर दूसरे स्थान पर है। वाराणसी में 4908 बच्चों का प्रवेश कराया है। वाराणसी तीसरे स्थान पर है।

बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने कहा कि सत्र 2022-23 में चयनित सभी बच्चों का प्रवेश कराया जाएगा। तीसरी सूची के चयनित 1414 बच्चों की सूची जिलाधिकारी को अनुमोदन के लिए भेजी जा रही है। इसके बाद विद्यालयों को सूची विद्यालयों को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बार पूरा प्रयास किया जाएगा कि सभी चयनित बच्चों को दाखिला मिले।

Saturday, April 9, 2022

RTE : सूबे की राजधानी में चयनित दस हजार छात्रों को प्रवेश का अब तक इंतजार

RTE : सूबे की राजधानी में चयनित दस हजार छात्रों को प्रवेश का अब तक इंतजार


लखनऊ :  निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए चयनित होने के बाद भी अभी तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। पांच अप्रैल तक पहली लॉटरी में चयनित लाभार्थियों का प्रवेश स्कूलों में हो जाना चाहिए था लेकिन अभी तक चयनित बच्चों की सूची ही स्कूलों को नहीं भेजी गई है।


जिनका चयन हुआ है उनके अभिभावक प्रवेश के लिए स्कूल पंहुचे तो स्कूल प्रबंधन ने प्रवेश नहीं दिया। अभिभावक स्कूल और बेसिक शिक्षा कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।


आरटीई की आवेदन प्रक्रिया तीन चरणों में होनी है। पहले चरण में आवेदन दो से 25 मार्च तक हुए थे। जिसमें 13 हजार से अधिक अभिभावकों ने अपने बच्चों के निशुल्क प्रवेश के लिए आवेदन किया था। जिसकी लॉटरी 30 मार्च को निकाली गई और 9760 बच्चों का नाम प्रवेश के लिए फाइनल हुआ। इन बच्चों का प्रवेश स्कूलों में पांच अप्रैल तक कराने का लक्ष्य था। बीएसए विजय प्रताप सिंह ने कहा कि चयनित बच्चों की फाइनल सूची जिलाधिकारी के पास अनुमोदन के लिए गई थी। अनुमोदन हो गया है। स्कूलों को सूची भेजी जा रही है।

Monday, December 27, 2021

29 दिसंबर को सीएम योगी द्वारा अनुदेशकों व रसोईयों का मानदेय बढ़ाने की हो सकती है घोषणा, जानें कितना मिल सकता है लाभ, देखें कार्यक्रम का सजीव प्रसारण प्रातः 10 बजे से इस लिंक पर

दिनांक : 29/12/2021 को पूर्वाह्न  10:00 बजे माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत रसोईयों तथा अंशकालिक अनुदेशकों  से संवाद किया जाएगा। उक्त कार्यक्रम का दूरदर्शन उत्तर प्रदेश के प्राइमरी चैनल पर प्रातः 10:00 बजे से लाईव प्रसारण किया जाएगा तथा यू-ट्यूब पर  https://youtu.be/rbspKvrLl9g  (क्लिक करें) लिंक के माध्यम से देखा जा सकेगा।




29 दिसंबर को सीएम योगी द्वारा अनुदेशकों व रसोईयों का मानदेय बढ़ाने की हो सकती है घोषणा, जानें कितना मिल सकता है लाभ 

शिक्षामित्रों का अलग से सम्मेलन होने के आसार


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 दिसम्बर को प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत रसोइयों व अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री के साथ रसोइयों व अंशकालिक अनुदेशकों का संवाद कार्यक्रम राजधानी के अटल बिहारी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर- केजीएमयू में आयोजित किया जा रहा है।


 अनुदेशकों का एक हजार रुपए और रसोइयों का 500 रुपए मानदेय बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है। अभी अनुदेशकों को सात हजार रुपए और प्राइमरी स्कूल के रसोइयों को डेढ़ हजार रुपए मानदेय दिया जाता है। केजीबीवी के हेड कुक का मानदेय 7971 और रसोइये का 5848 रुपए होता है। इनके मानदेय में 1000 रुपए की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव है।



राज्य सरकार ने अगस्त में मंजूर अनुपूरक बजट में मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया था। प्रदेश के प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में 377520 रसोइए व केजीबीवी में 2030 रसोइए कार्यरत हैं।  वहीं जूनियर स्कूलों में 27555 अनुदेशक काम कर रहे हैं। 


इस आयोजन में लखनऊ से 500 रसोइए और 348 अंशकालिक अनुदेशक प्रतिभाग करेंगे। वहीं बाराबंकी से 180 अनुदेशक रहेंगे। कार्यक्रम के लिए इन्हें परिचय पत्र उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी खण्ड शिक्षा निदेशकों को सौंपी गई है। रसोइयों व अनुदेशकों के चयन में कोविड प्रोटोकॉल का पूरा पालन किया जाएगा और इन्हें कार्यक्रम स्थल तक सुबह आठ बजे तक पहुंचाया जाएगा।


शिक्षामित्रों का अलग से सम्मेलन होने के आसार : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुपूरक बजट पर चर्चा करते हुए शिक्षामित्रों का भी मानदेय बढ़ाने का उल्लेख किया था लेकिन बुधवार को प्रस्तावित समारोह में शिक्षामित्रों को बुलाया नहीं गया है, ऐसे में शिक्षामित्रों का अलग से सम्मेलन हो सकता है। यह भी चर्चा है कि जिस तरह से ग्राम प्रधानों के सम्मेलन में ब्लाक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्षों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया था वैसे ही शिक्षामित्रों का भी ऐलान हो सकता है।


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दिनांक 29 दिसंबर को बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत रसोइयों एवं अंशकालिक अनुदेशको से संवाद कार्यक्रम का लाइव प्रसारण BRC व विद्यालयों में दिखाए जाने की व्यवस्था किए जाने विषयक



दिनांक 29 दिसंबर को बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत रसोइयों एवं अंशकालिक अनुदेशको से संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग कराए जाने विषयक निर्देश जारी। देखें पूर्ण निर्देश


मुख्यमंत्री योगी, उत्तर प्रदेश से दिनांक 29.12. 2021 को बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत रसोईयों एवं अंशकालिक अनुदेशकों का संवाद कार्यक्रम अटल बिहारी बाजपेयी साइन्टिफिक कन्वेशन सेन्टर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ में प्रातः 10 बजे से 11 बजे के मध्य होना सुनिश्चित हुआ है। उक्त कार्यक्रम में लखनऊ व बाराबंकी जनपद से रसोईयों एवं अंशकालिक अनुदेशकों द्वारा प्रतिभाग करने के सम्बन्ध में निम्न विवरणानुसार अग्रेतर कार्यवाही किया जाना है।


Friday, October 22, 2021

राजधानी के 116 सरकारी स्कूलों को शहर के बिल्डरों और रियल स्टेट कंपनियों ने लिया गोद, होगा कायाकल्प

राजधानी के 116 सरकारी स्कूलों को शहर के बिल्डरों और रियल स्टेट कंपनियों ने लिया गोद, होगा कायाकल्प


 लखनऊ : राजधानी के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों का भी निजी स्कूलों की तरह कायाकल्प होगा। डीएम अभिषेक प्रकाश की पहल पर शहर के बिल्डरों और रियल स्टेट कंपनियों ने 116 सरकारी स्कूलों को गोद लिया है। सामाजिक सहभागिता फंड से स्कूलों को आधुनिक बनाया जाएगा।


राजधानी के भी कई स्कूलों की हालात बेहद खस्ता है। कहीं पर फर्नीचर नहीं है तो कहीं शौचालय खराब हैं। खिड़कियां और दरवाजे भी जर्जर हालत में हैं। स्कूलों की खराब हालत देखकर डीएम ने बिल्डरों और रीयल एस्टेट कंपनियों को बुलाकर बैठक कर मदद मांगी। डीएम की पहल पर शहर के कई बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियां आगे आई हैं। बुधवार को डीएम शिविर कार्यालय में हुई बैठक में स्कूलों के जीर्णोद्वार करने को लेकर चर्चा हुई।


जिलाधिकारी के मुताबिक बिल्डरों और कंपनियों ने 15 जनवरी तक इन स्कूलों में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। 65 परिषदीय विद्यालय एवं 51 माध्यमिक विद्यालयों में रंग-रोगन, पेयजल, फर्नीचर, शौचायल और बिजली सहित अन्य अवस्थापना सुविधाओं को दुरुस्त किया जाएगा। सीएसआर की मदद से इन स्कूलों में शिक्षा के स्तर को कैसे और बेहतर किया जाए, इस पर भी योजना बनाई जा रही है। स्कूलों का जीर्णोद्वार हो जाए फिर आगे इस पर काम किया जाएगा।


इन बिल्डरों और कंपनियों ने लिया स्कूलों को गोद : मैसर्स अंसल प्रापर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, मैसर्स गर्व बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स एमआर एमजीएफ लैंड लिमिटेड, मैसर्स ओमेक्स लिमिटेड, मैसर्स विराज कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स एल्डिको सिटी, मैसर्स एएनएस डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स स्वास्तिक मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स पिंटेल रियलिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स ओमेगा इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स श्री राज इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड एवं मैसर्स शिप्रा प्राइवेट लिमिटेड।

Thursday, October 21, 2021

लखनऊ : मण्डल के किसी भी जनपद में ग्रेच्युटी विकल्प पत्र नहीं भराये जाने पर एडी बेसिक ने दिया तत्काल आवश्यक कार्यवाही का आदेश

लखनऊ : मण्डल के किसी भी जनपद में ग्रेच्युटी विकल्प पत्र नहीं भराये जाने पर एडी बेसिक ने दिया तत्काल आवश्यक कार्यवाही का आदेश।



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Wednesday, August 11, 2021

लखनऊ : ऐडेड स्कूलों में प्रबंध समिति के चुनाव ससमय सम्पन्न न कराने अथवा प्रबंधक के हस्ताक्षर बीएसए से प्रमाणित न कराने पर वेतन रोकने की चेतावनी

लखनऊ : ऐडेड स्कूलों में प्रबंध समिति के चुनाव ससमय सम्पन्न न कराने अथवा प्रबंधक के हस्ताक्षर बीएसए से प्रमाणित न कराने पर वेतन रोकने की चेतावनी



Friday, July 2, 2021

खुलते ही स्कूल, बेसिक शिक्षा मंत्री ने किया निरीक्षण, देखीं व्यवस्थाएं

खुलते ही स्कूल, बेसिक शिक्षा मंत्री ने किया निरीक्षण, देखीं व्यवस्थाएं


लखनऊ। राजधानी में गुरुवार से सभी परिषदीय विद्यालय समेत निजी व सरकारी माध्यमिक विद्यालय खुल गए। परिषदीय विद्यालयों में साफ-सफाई कराने के बाद शिक्षकों ने काम शुरू किया। 


पहले दिन बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने प्राथमिक विद्यालय अलीगंज, प्राथमिक विद्यालय चांदन और प्राइमरी स्कूल नरही का निरीक्षण किया। विद्यालयों की सफाई व्यवस्था देखी, परिसर, कक्षाओं व कार्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालयों पर बनी पेंटिंग की प्रशंसा भी की। विद्यालयों के स्टाफ से ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था की जानकारी ली।

Wednesday, June 2, 2021

1.76 लाख बच्चों को केजी, नर्सरी और कक्षा एक में नहीं हो पाया दाखिला

1.76 लाख बच्चों को केजी, नर्सरी और कक्षा एक में नहीं हो पाया दाखिला


राजधानी में करीब 1.76 लाख छोटे बच्चों को प्ले, केजी, नर्सरी तथा कक्षा एक में दाखिला नहीं मिल पाया है। करीब 26 हजार बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं। प्राइवेट स्कूलों में दो लाख बच्चे हर साल दाखिला लेते थे। प्राइवेट के लगभग 25% यानी 50 हजार का ही दाखिला हो पाया। डेढ़ लाख बच्चों का दाखिला नहीं हो पाया।

2020 में भी सभी बच्चों को स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाया था। अब 2021 में भी अभी तक एडमिशन नहीं हो पाया है। यह वह बच्चे हैं जो पहली बार स्कूल जाने वाले थे। 20,000 से ज्यादा बच्चों का प्ले स्कूलों में दाखिला होना था। जबकि 1.80 लाख बच्चे अन्य बड़े प्राइवेट स्कूलों में केजी, नर्सरी तथा कक्षा 1 में एडमिशन लेते। पिछले वर्ष भी कुछ बच्चों ने तो प्राइवेट स्कूलों में दाखिला ले लिया था कुछ सरकारी स्कूलों में। इस वर्ष सरकारी में कोई एडमीशन नहीं हुआ। जबकि प्राइवेट में लगभग 25 प्रतिशत दाखिला हुआ है।


घरों में ही सीख रहे हैं बच्चे

राजधानी में करीब 1.76 लाख बच्चे घरों में ही खेल कूद रहे हैं। कुछ अभिभावक जहां खुद अपने बच्चों को घरों में पढ़ा रहे हैं वही कुछ पूरी तरह कॉपी किताब से दूर हैं। सरकारी स्कूलों में जो लोग अपने बच्चों का दाखिला चाहते थे उनकी तो बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं हो पा रही है। उनके पास तो कॉपी किताब भी नहीं है।

छोटे बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पाती

छोटे बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पाती। इसलिए भी तमाम अभिभावकों ने प्राइवेट स्कूलों में बच्चों का दाखिला नहीं कराया।


अभिभावक बोले

बच्चे को घर में ही पढ़ा रहे हैं। पिछले वर्ष ही एडमिशन कराना था। लेकिन कोरोना की वजह से नहीं कराया। इस वर्ष अप्रैल से एडमिशन की तैयारी थी लेकिन फिर कोरोना आ गया। बच्चे की पढ़ाई 2 साल लेट हो गई है। -सरिता, इंदिरानगर

मेरा बच्चा साल साल का हो गया है। सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए पिछले साल भेजने वाले थे लेकिन स्कूल बंद हो गया था। इस बार फिर एडमिशन नहीं हो पाया। - राज कुमार, दरोगा खेड़ा, सरोजनी नगर


शिक्षक बोले

इस वर्ष बच्चों का एडमिशन नहीं हो पाया। कोरोना की वजह से काफी दिक्कतें आई हैं। जिन बच्चों का पहले से एडमिशन हुआ था उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। - अमृता भटनागर, प्रिंसिपल, ग्रीन विले स्कूल, आशियाना


राजधानी में करीब एक हजार मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल हैं। इनमें से प्रत्येक में औसतन 200 बच्चे नर्सरी, केजी तथा तथा कक्षा एक में एडमिशन लेते हैं। इस बार केवल 25% बच्चों का ही दाखिला हो पाया। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले करीब डेढ़ लाख बच्चों का एडमिशन नहीं हुआ है। ऑनलाइन छोटे बच्चों की पढ़ाई भी नहीं हो पाती है। इसलिए भी अभिभावकों ने दाखिले से दूरी बनायी। - अनिल अग्रवाल, मैनेजिंग डायरेक्टर, सेंट जोसेफ ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन

Saturday, May 22, 2021

परिषदीय शिक्षकों को कोविड टीकाकरण प्राथमिकता से कराये जाने के सम्बन्ध में अनुरोध

परिषदीय शिक्षकों को कोविड टीकाकरण प्राथमिकता से कराये जाने के सम्बन्ध में अनुरोध





निजी विद्यालय : अभिभावकों की मजबूरी - शुल्क चुकाना है जरूरी, सरकारी आदेश के पालन के दावों की खुली पोल

निजी विद्यालय : अभिभावकों की मजबूरी - शुल्क चुकाना है जरूरी, सरकारी आदेश के पालन के दावों की खुली पोल 


कोरोना काल में उप मुख्यमंत्री डा.दिनेश शर्मा ने गुरुवार को अभिभावकों और निजी संस्थानों की सहूलियत को देखते हुए नया आदेश जारी किया है। इसमें तीन महीने की फीस इकट्ठा न लेने और बढ़ोतरी न करने की बात कही गई है। स्कूल प्रबंधकों ने भी सरकार के आदेश का पालन करने का भरोसा दिया है, लेकिन शुक्रवार को पड़ताल की गई तो हकीकत दावों से इतर थे। सिटी मांटेसरी स्कूल व लखनऊ पब्लिक स्कूल जैसे बड़े स्कूलों ने कंप्यूटर शुल्क व फीस बढ़ाकर आदेश को धता बता दिया है। कई स्कूल पहले ही तीन महीने की फीस ले चुके हैं। उनको लेकर अभिभावक असमंजस में हैं।


सिटी मांटेसरी स्कूल की महानगर शाखा में कंप्यूटर शुल्क के नाम 920 रुपये लिए गए। कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के अभिभावकों ने 30 अप्रैल को फीस जमा की है। कंप्यूटर शुल्क के मद में यह पैसा लिया गया। बच्चों के भविष्य को लेकर अभिभावक चाहते हुए भी चुप्पी साधे हुए हैं।


इस बारे में सीएमएस के प्रवक्ता ऋषि खन्ना का कहना है कि आप रसीद की कॉपी दीजिए, शनिवार को जाऊंगा तो पता करता हूं। सरकार का जो भी निर्देश आया है, उसका पालन किया जाएगा। फीस के साथ कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाएगा। राजाजीपुरम के लखनऊ पब्लिक कालेज में पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष फीस में 250 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।


अभिभावक की ओर से भेजे गए फीस कार्ड में वर्ष 2020-21 में अप्रैल माह की फीस 6,400 रुपये थी तो 2021-22 में 6,650 रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष फीस में कंप्यूटर की 600 रुपये फीस जुड़ी थी। इस बार कंप्यूटर की फीस तो नहीं ली गई, लेकिन फीस में 250 रुपये की बढ़ोतरी हो गई, जबकि लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कालेजेस के संस्थापक प्रबंधक डा.एसपी सिंह ने सरकार की ओर दिए गए आदेश का पालन करने की बात कही है। ये तो सिर्फ बानगी है।


लखनऊ के कई निजी व मिशनरी स्कूलों की मनमानी जारी है। कई तो तीन महीने से कम फीस ही जमा ही नहीं करते। एक स्कूल तो कंप्यूटर की फीस को परीक्षा की फीस में जोड़कर ले रहा है।


फीस का निर्धारण करे सरकार
पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष पीके श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार द्वारा जब तक निजी विद्यालयों की फीस का निर्धारण नहीं किया जाएगा, तब तक मनमानी चलती रहेगी। आपदा प्रबंधन अधिनियम- 2005 की धारा दो तहत कोरोना संक्रमण को राष्ट्रीय महामारी की संज्ञा दी गई है। निजी संचालकों को अभिभावकों के बारे में भी सोचना चाहिए। जिला प्रशासन के माध्यम से कई बार राज्यपाल व मुख्यमंत्री को फीस निर्धारण का ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

समायोजित होगी फीस
कोरोना संक्रमण काल को देखते हुए सरकार द्वारा जो आदेश दिए गए हैं, उनका पालन कराया जाएगा। शासनादेश में स्पष्ट है कि यदि फीस बढ़ाकर ली गई है तो उसे समायोजित किया जाएगा। यदि कोई विद्यालय तीन महीने की फीस लेने या फिर एडमीशन फीस लेने का दबाव बनाता है तो अभिभावक जिलाधिकारी द्वारा गठित फीस नियामक समिति या मेरे कार्यालय में लिखित शिकायत करें। आदेश के बाद कोई फीस बढ़ाता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
डा.मुकेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक


सेंट जोसफ विद्यालय समूह की संस्थापक अध्यक्ष की सराहनीय पहल, जिनके पिता का हुआ है निधन, उनसे लेंगे आधी फीस

सेंट जोसफ विद्यालय में अनाथ बच्चों को पढ़ाई के साथ ही निश्शुल्क स्टेशनरी व ड्रेस भी दी जाएगी। प्रवेश के लिए सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक मोबाइल नं. 7408714714, 7408501555 व 7704908533 पर संपर्क कर सकते हैं। अभिभावक के मृत्यु प्रमाणपत्र में कोविड से निधन की बात होनी अनिवार्य है।

लखनऊ: कोरोना काल में हर कोई अपने-अपने तरीके से जरूरतमंदों की मदद को आगे आ रहा है। सेंट जोसफ विद्यालय ने कोरोना संक्रमण से अनाथ हुए बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा देने का निर्णय लिया है। समूह की संस्थापक पुष्पलता अग्रवाल का कहना है कि ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता का कोरोना संक्रमण से निधन हो गया है और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है तो उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च विद्यालय समूह द्वारा किया जाएगा।

विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं उन बच्चों के लिए माता-पिता एवं अभिभावक के रूप में काम करेंगे और उनका विशेष ध्यान रखेंगे। वहीं, जिन बच्चों के पिता का निधन हुआ है, उनकी फीस आधी कर दी जाएगी।

राजाजीपुरम, ठाकुरगंज, सुशांत गोल्फ सिटी, सीतापुर रोड, मलिहाबाद व रुचि खंड-एक स्थित शाखाओं में यह सुविधा मिलेगी। संस्थापक अध्यक्ष के निर्णय का अनुपम चौधरी, राजेश अग्रवाल, सीमा अग्रवाल व अनिल अग्रवाल ने स्वागत किया है।

संक्रमण से अनाथ बच्चों को मिलेगी निश्शुल्क शिक्षा

Tuesday, May 18, 2021

लखनऊ मण्डल में कोरोना से मृत शिक्षकों व कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति व अन्य देयकों के भुगतान के सम्बंध में PSPSA के पत्र पर एडी बेसिक ने किया आदेश

लखनऊ मण्डल में कोरोना से मृत शिक्षकों व कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति व अन्य देयकों के भुगतान के सम्बंध में PSPSA के पत्र पर एडी बेसिक ने किया आदेश



Friday, April 30, 2021

निजी स्कूलों की मनमानी शिक्षकों पर पड़ रही भारी

निजी स्कूलों की मनमानी शिक्षकों पर पड़ रही भारी


लखनऊ: निजी अस्पताल हों या निजी स्कूल, पूरी तरह निरंकुश हो चुके हैं। कोरोना काल में निजी अस्पतालों की हकीकत किसी से छिपी न रह गई, तो वहीं रही-सही कसर निजी स्कूल पूरी कर रहे हैं।


प्रदेश सरकार ने कक्षा आठ तक के सभी परिषदीय, मान्यता व सहायता प्राप्त विद्यालयों में 20 मई तक शिक्षक, अनुदेशक व शिक्षा मित्रों के लिए वर्क फ्रॉम होम के आदेश जारी किए हैं। पहले यह अनुमति 30 अप्रैल तक थी, उसे बढ़ाया गया है। सरकार ने संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह निर्णय लिया है, मगर निजी स्कूल रोजाना शिक्षकों को बुला रहे हैं। इसके चलते शिक्षक संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।

गंभीर बात यह है कि स्कूलों के इस तानाशाही रवैये की जानकारी प्रशासनिक अमले को भी है, मगर इनकी ऊंची रसूख के चलते कोई भी अधिकारी इन पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।


हमारे सभी शिक्षक वर्क फ्रॉम होम पर हैं। सभी घर से ही आनलाइन क्लास ले रहे हैं, किसी शिक्षक को स्कूल नहीं बुलाया जा रहा है। जब तक स्थिति सामान्य नहीं होगी तब तक किसी को बुलाया भी नहीं जाएगा। -डा. जगदीश गांधी, संस्थापक, सिटी मांटेसरी स्कूल (सीएमएस)


किसी भी शाखा में शिक्षकों को नहीं बुलाया जा रहा है। सभी शिक्षक आनलाइन क्लास ले रहे हैं। फीस जमा करने य अन्य ऑफिस वर्क के लिए एक-दो लोग ही अल्टरनेट डेज में बुलाए जा रहे हैं। -अनिल अग्रवाल, एमडी, सेंट जोसफ ग्रुप ऑफ स्कूल्स