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Tuesday, August 22, 2119

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    Sunday, May 17, 2026

    स्पेशल बीटीसी प्रशिक्षण 2004 : नियुक्ति तक मानदेय पाने के हकदार हैं अभ्यर्थी – हाईकोर्ट, प्रशिक्षण अवधि तक मानदेय को सीमित करने का शासन का प्रयास खारिज

    स्पेशल बीटीसी प्रशिक्षण 2004 : नियुक्ति तक मानदेय पाने के हकदार हैं अभ्यर्थी – हाईकोर्ट, प्रशिक्षण अवधि तक मानदेय को सीमित करने का शासन का प्रयास khaarij


    प्रयागराजः हाईकोर्ट ने कहा कि स्पेशल बीटीसी ट्रेनिंग कोर्स 2004 के लिए चयनित अभ्यर्थी प्रशिक्षण शुरू होने से लेकर नियुक्ति की तिथि तक 2500 रुपये प्रति माह मानदेय पाने के वैधानिक हकदार हैं। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने राज्य सरकार द्वारा 14 मई 2015 को जारी उस विवादास्पद शुद्धिपत्र को रद कर दिया है, जिसके माध्यम से मानदेय को केवल प्रशिक्षण अवधि तक सीमित करने का प्रयास किया गया था। 


    कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अभ्यर्थियों के बकाया मानदेय का भुगतान चार महीने के भीतर सुनिश्चित करें। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 14 जनवरी 2004 के मूल शासनादेश में अभ्यर्थियों को नियुक्ति तक मानदेय देने का स्पष्ट प्रविधान था, जिसे राज्यपाल की मंजूरी से जारी किया गया था।

    CBSE : नौवीं में त्रिभाषा अनिवार्य पर बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, स्कूलों में एक जुलाई से लागू हो जाएगा बदलाव, तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी

    CBSE : नौवीं में त्रिभाषा अनिवार्य पर बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, स्कूलों में एक जुलाई से लागू हो जाएगा बदलाव, तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी


    15 मई 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों में अब कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा स्कूल शिक्षा 2023 के अनुरूप यह बड़ा बदलाव किया गया है। यह व्यवस्था एक जुलाई से लागू हो जाएगी। हालांकि, तीसरी भाषा के लिए बोर्ड परीक्षा नहीं कराई जाएगी।

    बोर्ड ने 15 मई को जारी परिपत्र में कहा है कि एक जुलाई से कक्षा नौ में तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। स्कूल सीबीएसई की विषय सूची में शामिल किसी भी भाषा को चुन सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं हों। विदेशी भाषा को केवल तीसरी भाषा या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ाया जा सकेगा।

    बोर्ड ने स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा (आर-3) के लिए दसवीं में कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। इसका उद्देश्यविद्यार्थियों पर परीक्षा का अतिरिक्त दबाव कम करना और भाषा सीखने को अधिक सहज बनाना है। सीबीएसई ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे जून तक ओएएसआईएस पोर्टल पर अपनी तीसरी भाषा के संबंध में जानकारी दें।



    छठवीं में तीसरी भाषा का चयन 31 मई तक तय करें स्कूल – सीबीएसई, ये है तीन भाषा चुनने का फार्मूला

    06 मई 2026
    नई दिल्लीः सीबीएसई ने छठवीं में तीसरी भाषा (आर 3) लागू करने को लेकर सभी संबद्ध स्कूलों को प्रक्रिया तेज करने को कहा है। बोर्ड का कहना है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य होगी और सभी स्कूलों को 31 मई तक ओसिस पोर्टल पर अपनी तीसरी भाषा का चयन करके अपलोड या संशोधित करना होगा। नई व्यवस्था एक जुलाई से शुरू करनी होगी।

    सीबीएसई के अनुसार, कई स्कूलों ने तीसरी भाषा का विकल्प पहले ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया है, कुछ स्कूल अब भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। वहीं, कुछ ने नीति के अनुरूप विकल्प नहीं चुने हैं। सीबीएसई ने कहा है, निर्धारित समय सीमा तक जानकारी अपडेट नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई हो सकती है।


    ये है तीन भाषा चुनने का फार्मूला

    आर 1 (पहली भाषा) : यह वह मुख्य भाषा होती है, जिसे स्कूल चुनता है। यह भाषा सीबीएसई की सूची में शामिल होती है, जैसे हिंदी या कोई क्षेत्रीय भाषा। आमतौर पर छात्रों की पढ़ाई की शुरुआत इसी भाषा से होती है।

    आर 2 (दूसरी भाषा) : दूसरी भाषा आर 1 से अलग होती है। यह भी एक मानक भाषा होती है, जिसे स्कूल पढ़ाता है जैसे अंग्रेजी या कोई दूसरी भारतीय भाषा।

    आर 3 (तीसरी भाषा) : तीसरी भाषा आर 1 और आर 2 दोनों से अलग होती है। इसमें छात्र अपनी क्षेत्रीय भाषा या मातृभाषा का चुनाव कर सकते हैं। इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए।




    छठी कक्षा से तीसरी भाषा को सीबीएसई ने किया अनिवार्य, नए नियम के तहत तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषा होना जरूरी

    कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू

    04 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यामक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भाषा शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा (आर3) को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। यह कदम नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है। साथ ही इसी सत्र से कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू किया जा रहा है।

    सीबीएसई के अनुसार अब छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कम से कम एक और भाषा पढ़नी होगी। नए नियम के तहत तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। इस नीति के लागू होने के बाद कक्षा छठी से शुरू होने वाला तीसरी भाषा का अध्ययन कक्षा दसवीं तक जारी रहेगा। वर्तमान में हिंदी और अंग्रेजी समेत कुल 44 भाषाएं पढ़ाई जा रही हैं। जिनमें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाएं, अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषाएं और कुछ विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं।

    छात्रों का होगा समग्र विकास : भाषा पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्रों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमता का समग्र विकास हो सके। इसमें आर 1, आर2 और आर3 के रूप में तीन-भाषा ढांचा तय किया है। एनसीएफएसई-2023 की सिफारिशों के अनुसार इन तीन भाषाओं में से दो भाषाएं भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड द्वारा बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी जाएगी।

     सभी कक्षा में भाषा होगी अनिवार्य
    बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा की पढ़ाई शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठीं में अनिवार्य रूप से शुरू होगी। इसके बाद हर वर्ष इसे एक-एक कक्षा में बढ़ाया जाएगा ताकि छात्रों पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े और वह क्रमिक रूप से नई भाषा सीख सकें। जारी कार्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में केवल कक्षा छठीं के छात्रों के लिए आर3 अनिवार्य होगा। जबकि सत्र 2027-28 में यह कक्षा छठी और सातवी, सत्र 2028-29 में कक्षा छठी से आठवी, सत्र 2029-30 में कक्षा छठी से नौवीं और सत्र 2030-31 तक कक्षा छठी से दसवीं तक के सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य हो जाएगी।

    सांस्कृतिक विविधता की समझ होगी मजबूत : इस नीति के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। सीबीएसई का मानना है कि इस पहल से छात्रों की भाषाई क्षमता के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विविधता की समझ भी मजबूत होगी। इस चरणवद्ध शुरुआत से पाठ्यक्रम का सुचारू रूप से परिवर्तन सुनिश्चित और माध्यमिक स्तर के मूल्यांकन सुधारों के साथ सामंजस्य स्थापित होगा।

    अधिकांश किताब 10 से 15 अप्रैल तक होंगी उपलब्ध : वहीं सीबीएसई द्वारा कक्षा नौवीं और दसवीं पाठ्यक्रम जारी करने को लेकर आयोजित वेबिनार में एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश सकलानी ने अनुसार नौवीं की किताबें तैयार हैं। प्रिंटिंग में हैं। इसमें अधिकांश किताबें 10 से 15 अप्रैल के बीच आ जाएंगी। एक से दो किताबें आने में देरी हो सकती है।



    सीबीएसई : नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए गणित, विज्ञान के दो स्तर अगले सत्र से होंगे लागू, 

    मानक और उन्नत प्रणाली पर आधारित 10वीं की पहली परीक्षा 2028 में होगी

    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए अपना नया शैक्षिक कार्यक्रम लागू कर दिया। इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली होगी। गणित और विज्ञान के लिए दो स्तरीय प्रणाली (मानक और उन्नत) पर आधारित कक्षा 10 की पहली बोर्ड परीक्षा 2028 में होगी।

    सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि 2026 से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत अनिवार्य तीन भाषा फार्मूला कक्षा 6 के लिए लागू किया जाएगा, जबकि कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान में अनिवार्य मानक एवं वैकल्पिक उन्नत पाठ्यक्रमों की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू की जाएगी। कक्षा 9 के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू होने से दोनों विषयों में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

    अधिकारी ने कहा, नए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे (एनसीएफ) की सिफारिशों के अनुसार, इन तीन भाषाओं में से दो भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए । भाषाओं को तीन चरणों-आर 1, आर 2 और आर3-में एक सुव्यवस्थित तीन-भाषा ढांचे के तहत व्यवस्थित किया गया है। बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन के बोर्ड के प्रयासों को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से तीसरी भाषा को अनिवार्य किए जाने से यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक छात्र कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करे। हालांकि, एक समान भाषा योजना को अपनाना वांछनीय है, लेकिन अगर कोई छात्र विदेश के किसी स्कूल से पढ़कर आया है और उसने वहां 8वीं या 9वीं तक जो तीसरी भाषा पढ़ी थी, वह स्कूलों में उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे खास मामलों में निर्धारित मानदंडों के अनुसार छूट दी जा सकती है। 


    मानक परीक्षा अनिवार्य, उन्नत वैकल्पिक

    गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली पर अधिकारी ने कहा, सभी छात्र मानक पाठ्यक्रम का अध्ययन करेंगे और तीन घंटे की 80 अंकों की एक समान परीक्षा में शामिल होंगे। उच्च दक्षता का विकल्प चुनने वाले छात्र दोनों विषयों में किसी एक या दोनों में एक अतिरिक्त उन्नत स्तर का चयन कर सकते हैं। इस स्तर में एक घंटे का 25 अंकों का एक अन्य प्रश्नपत्र हल करना होगा, जिसे उच्च-स्तरीय बौद्धिक कौशल और गहन वैचारिक समझ आंकने के लिए तैयार किया गया है। अधिकारी ने कहा, छात्रों के लिए मानक परीक्षा देना अनिवार्य होगा, जबकि उन्नत परीक्षा वैकल्पिक रहेगी। अहम बात यह है कि उन्नत परीक्षा में हासिल अंकों को कुल अंकों में नहीं जोड़ा जाएगा; इसके बजाय 50 फीसदी या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मार्कशीट में उन्नत स्तर की योग्यता अलग से दिखाई जाएगी।

    एडेड माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को फार्म-16 निःशुल्क मिलेगा, 75 लाख बजट जारी

    एडेड विद्यालय के शिक्षकों को फार्म-16 निःशुल्क मिलेगा, 75 लाख बजट जारी

    सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी, भुगतान की सभी प्रक्रियाएं जेम पोर्टल से सम्पन्न होंगी


    प्रयागराजः प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों को फार्म-16 (पूरे वित्तीय वर्ष का वेतन विवरण) निश्शुल्क उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा निदेशालय ने 75 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की है। वित्त नियंत्रक माध्यमिक शिक्षा निदेशालय प्रयागराज की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआइओएस) को निर्देश जारी किए गए हैं।

    यह धनराशि वर्ष 2026-27 के बजट मद 'व्यावसायिक तथा विशेष सेवाओं के लिए भुगतान' के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई है। डीआईओएस को निर्देशित किया गया है कि फार्म 16 की व्यवस्था के लिए भुगतान प्रक्रिया शासनादेशों, वित्तीय नियमों एवं विभागीय आदेशों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए। यदि किसी कारणवश अग्रिम, गलत अथवा दोहरा भुगतान होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों का होगी। 

    पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भुगतान की सभी प्रक्रियाएं जैम पोर्टल के माध्यम से संपन्न की जाएंगी। साथ ही व्यय का पूरा विवरण निर्धारित प्रारूप में समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि आवंटित धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाएगा। 

    वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर संबंधित डीआइओएस तथा वित्त एवं लेखाधिकारी जवाबदेह होंगे। निदेशालय ने यह भी कहा है कि यदि वित्तीय वर्ष समाप्ति तक कोई धनराशि शेष रहती है तो उसे 31 मार्च 2027 से पूर्व नियमानुसार समर्पित करना होगा।



    राजकीय महाविद्यालयों में कम से कम चार शिक्षकों की होगी तैनाती, राजकीय महाविद्यालयों में तबादले के आवेदन कल से, समय सारिणी जारी

    डिग्री शिक्षकों का तबादला आवेदन बिना कारण निरस्त नहीं होगा, ऑनलाइन आवेदन फॉर्म को निरस्त करने का स्पष्ट कारण लिखना होगा


    लखनऊ। डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के स्थानांतरण आवेदन फॉर्म निरस्त करना प्राचार्यों को अब भारी पड़ेगा। वाजिब कारण के बिना आवेदन फॉर्म को रद्द करने पर जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। डिग्री कॉलेज शिक्षकों के तबादले के लिए ऑनलाइन फार्म 25 व 26 मई को भरे जा सकेंगे।

    उच्च शिक्षा विभाग ने वार्षिक स्थानांतरण नीति के तहत राजकीय डिग्री कॉलेज के शिक्षकों से आवेदन मांगे हैं। प्राचार्य को अब शिक्षक के स्थानांतरण के ऑनलाइन आवेदन फॉर्म को निरस्त करने का स्पष्ट कारण लिखना होगा। बिना पर्याप्त कारण के आवेदन फॉर्म रद्द करेंगे, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर ऑनलाइन लॉगिन में प्राचार्य जानबूझकर लंबित रखेंगे, तो भी उन्हें स्पष्टीकरण देना होगा। ऐसे शिक्षक जिनके यहां चार से कम प्रवक्ता हैं, वह स्थानांतरण होने पर तभी कॉलेज छोड़ सकेंगे जब उनकी जगह कोई दूसरा शिक्षक स्थानांतरित होकर आ जाएगा।

    ऑनलाइन आवेदन फॉर्म https://hiedup.upsdc.gov.in/gdctransfer पर लिए जाएंगे। 29 मई को शिक्षकों के स्थानांतरण के आदेश जारी किए जाएंगे।


    जिले में तीन वर्ष पूरे कर चुके वही आवेदन के पात्र

    आकांक्षी जिलों के डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों का किसी दूसरे जिले में तबादला नहीं होगा, लेकिन दूसरे जिलों के शिक्षक आकांक्षी जिले में स्थानांतरित होकर आ सकेंगे। ऐसे शिक्षक जिनके प्रशासनिक स्थानांतरण की अवधि तीन वर्ष से कम हैं वह तबादले के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। सिर्फ वही शिक्षक आवेदन के पात्र होंगे जो किसी जिले में तीन वर्ष से अधिक की अवधि पूरी कर चुके हैं। प्राचार्यों के भी स्थानांतरण इसी के साथ किए जाएंगे।

    स्थानांतरण पोर्टल 18 मई तक तैयार हो जाएगा

    एनआईसी की ओर से स्थानांतरण के लिए पोर्टल 18 मई तक तैयार किया जाएगा। राजकीय महाविद्यालय 20 मई तक अपने कॉलेज में खाली पदों का ब्योरा भरेंगे। 21 व 22 मई को उच्च शिक्षा निदेशालय कॉलेजों की ओर से भरी गईं वैकेंसी को सत्यापित करेंगे। 25 मई से 26 मई तक शिक्षक स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरेंगे। 27 मई तक प्राचार्य शिक्षकों के आवेदन फॉर्म को सत्यापित करेंगे। 28 मई तक उच्च शिक्षा निदेशक की लॉगिन पर फॉर्म बढ़ाए जाएंगे।



    राजकीय महाविद्यालयों में कम से कम चार शिक्षकों की होगी तैनाती, राजकीय महाविद्यालयों में तबादले के आवेदन कल से, समय सारिणी जारी

    लखनऊ। राज्य सरकार की ओर से स्थानांतरण नीति जारी करने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने राजकीय महाविद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती की कवायद तेज कर दी है। इसके तहत हर महाविद्यालय में कम से कम चार शिक्षकों की तैनाती का लक्ष्य है। विभाग ने ऑनलाइन तबादले के लिए समय सारिणी भी जारी की है। इसके तहत ऑनलाइन तबादला पोर्टल 18 मई से शुरू होगा।


    विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि तबादले के लिए शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। इसके लिए एनआईसी ने ऑनलाइन प्रणाली hiedup.upsdc.gov.in/gdctransfer विकसित की है। उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा सभी राजकीय महाविद्यालयों का डाटा और महाविद्यालयों की रिक्तियों की सूची फीड की जाएगी। इसके लिए सभी राजकीय महाविद्यालयों को लॉगिन आईडी व पासवर्ड दिया जा चुका है।

    तबादले के इच्छुक प्राचार्य व प्रवक्ता अपनी वरीयता आदि व मोबाइल नंबर खुद भरेंगे। आवेदन अंतिम रूप से सबमिट करने के बाद संशोधन नहीं हो सकेगा और स्वतः प्राचार्य लॉगिन पर अग्रसारित हो जाएगा। शिक्षक इसका प्रिंट आउट लेकर आवश्यक दस्तावेज के साथ हस्ताक्षर करके महाविद्यालय प्राचार्य को उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद प्राचार्य आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

    संयुक्त सचिव ने स्पष्ट किया है कि ऐसे महाविद्यालय जहां चार से कम प्रवक्ता हैं वहां कार्यरत प्रवक्ता आवेदन तो कर सकेंगे लेकिन उनका तबादला आदेश तभी मान्य होगा जब उस महाविद्यालय में कोई दूसरा प्रवक्ता कार्यभार ग्रहण कर लेगा। आकांक्षी जिलों में से किसी शिक्षक का तबादला कहीं और नहीं किया जाएगा जबकि बाहर से शिक्षक यहां आ सकेंगे।



    तीन साल से पहले आवेदन नहीं

    जिन शिक्षकों का पिछले साल तबादला हुआ है और उनकी अवधि तीन साल से कम है वे इस साल आवेदन नहीं कर सकेंगे। जिन प्राचार्य व प्रवक्ताओं के गत वर्षों में प्रशासनिक आधार पर तबादले हुए हैं और उनकी अवधि तीन साल से कम है वे भी तबादले के लिए योग्य नहीं होंगे। ऐसे आवेदन मिलने पर निदेशालय को निरस्त करने का अधिकार होगा।

    उच्च शिक्षा निदेशक निरस्त कर सकेंगे तबादला

    संयुक्त सचिव ने कहा है कि तबादले के लिए इच्छुक प्रवक्ता व प्राचार्य का ऑनलाइन तबादले में योग्य होने के बाद भी छात्रहित में उच्च शिक्षा निदेशक को तबादला निरस्त करने का अधिकार होगा। उन्होंने निदेशक उच्च शिक्षा व राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी को निर्देश दिया है कि इस प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा कराएं। साथ ही यह भी कहा है कि निदेशक उच्च शिक्षा द्वारा आवश्यकतानुसार समय सारिणी में बदलाव किया जा सकता है।

    तबादले की समय सारणी

    एनआईसी का ऑनलाइन तबादला पोर्टल 18 मई से शुरू होगा

    महाविद्यालयों द्वारा ऑनलाइन रिक्तियां 18 से 20 मई तक भरी जाएंगी

    उच्च शिक्षा निदेशालय रिक्तियों को 22 मई तक सत्यापित करेगा

    तबादले के इच्छुक प्राचार्य व शिक्षक 25-26 मई को आवेदन करेंगे

    प्राचार्य आवेदकों का 25 से 27 मई तक सत्यापन करेंगे

    निदेशक लॉगिन पर आवेदकों के फॉर्म 28 मई तक फारवर्ड करेंगे

    प्राचार्य व शिक्षकों का डाटा प्रोसेसिंग 28 मई तक किया जाएगा

    तबादला आदेश डाउनलोड 29 मई तक हो सकेगा


    प्रदेश की 90 स्कूली टीमें राष्ट्रीय स्तर पर होंगी पुरस्कृत, विकसित भारत बिल्डथॉन अंतर्गत 25 मई को पुरस्कार वितरण समारोह दिल्ली में होगा

    प्रदेश की 90 स्कूली टीमें राष्ट्रीय स्तर पर होंगी पुरस्कृत, विकसित भारत बिल्डथॉन अंतर्गत 25 मई को पुरस्कार वितरण समारोह दिल्ली में होगा

    विकसित भारत बिल्डथॉन में युवाओं के विचार चयनित, एक राष्ट्रीय व चार राज्य स्तर पर भी चुने गए


    लखनऊ। प्रदेश की १० स्कूली टीमें राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत होंगी। इनका चयन शिक्षा मंत्रालय की ओर से कराए गए विकसित भारत बिल्डथॉन की त्रिस्तरीय प्रतियोगिता के बाद किया गया है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य देश भर के स्कूली छात्रों में रचनात्मकता, समस्या समाधान और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर चयनित टीमों को नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा।


    योजना के तहत अटल इनोवेशन मिशन की ओर से कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान करने और उनके व्यावहारिक समाधान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने इस प्रतियोगिता का परिणाम जारी किया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से जारी सूची के अनुसार जिला स्तर पर 85 नवाचार व प्रोटोटाइप चयनित हुए हैं।

    महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी संबंधित बीएसए व डीआईओएस को बताया है कि 25 मई को इसका पुरस्कार वितरण समारोह दिल्ली में होगा। इसमें जिला व राज्य स्तरीय विजेताओं की राशि उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। यह टीमें कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़ेंगी। राष्ट्रीय स्तर की विजेता टीम संबंधित शिक्षक के साथ समारोह में शामिल होगी। उन्होंने टीम से संबंधित जानकारी जल्द उपलब्ध कराने को कहा है। 

    अनुकंपा नियुक्ति पर दूसरी बार ऊंचे पद का दावा नहीं स्वीकार्य : हाईकोर्ट, चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी मिलने के बाद एलटी ग्रेड शिक्षक पद की मांग खारिज

    अनुकंपा नियुक्ति पर दूसरी बार ऊंचे पद का दावा नहीं स्वीकार्य : हाईकोर्ट, चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी मिलने के बाद एलटी ग्रेड शिक्षक पद की मांग खारिज


    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सेवा मामलों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी मृतक कर्मचारी के आश्रित को एक बार अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल चुकी है, तो बाद में उसे किसी ऊंचे पद पर दोबारा अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। अदालत ने इसी आधार पर सुल्तानपुर निवासी दिलीप कुमार जायसवाल की याचिका खारिज कर दी।


    यह आदेश न्यायमूर्ति अमिताभकुमार राय की एकल पीठ ने दी। याचिकाकर्ता दिलीप कुमार जायसवाल के पिता सुल्तानपुर के एक इंटर कॉलेज में सहायक शिक्षक थे। 2003 में उनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद 2004 में दिलीप को अनुकंपा के आधार पर दूसरे इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर नौकरी दी गई। 

    बाद में दिलीप ने स्नातकोत्तर और बीएड की पढ़ाई पूरी कर ली। इसके आधार पर उसने एलटी ग्रेड सहायक शिक्षक के पद पर दोबारा अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की। लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) सुल्तानपुर ने 2007 में उसका आवेदन खारिज कर दिया।

    याचिकाकर्ता ने डीआईओएस के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस का फैसला पूरी तरह सही और कानून के अनुरूप है। इसमें दखल की जरूरत नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देना होता है, न कि बाद में बेहतर पद प्राप्त करने का अवसर देना। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

    परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मिलेगी प्रयोग आधारित शिक्षा, 38 जिलों के 9356 विद्यालयों में पहुंची साइंस किट

    परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मिलेगी प्रयोग आधारित शिक्षा,  38 जिलों के 9356 विद्यालयों में पहुंची साइंस किट


    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को प्रयोग और अनुभव आधारित विज्ञान शिक्षा से जोड़कर सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की कवायद की जा रही है। इसके तहत 38 जिलों में 9356 साइंस किट की आपूर्ति की गई है ताकि गांवों के गरीब परिवारों के बच्चों को भी आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा मिल सके। 


    किट की आपूर्ति आईआईटी गांधीनगर के माध्यम से सुनिश्चित की गई है। इसके तहत गोंडा में 370, शाहजहांपुर में 366, आगरा में 357, उन्नाव में 338, बुलंदशहर में 314 और अलीगढ़ में 301 साइंस किट पहुंचाई गई हैं। लखीमपुर खीरी में 464 और सीतापुर में 469 किट की आपूर्ति की गई है। इसके माध्यम से प्रयोग आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे परिषदीय विद्यालयों के बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि और नवाचार क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी। 

    साथ ही मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन, ऑपरेशन कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे अभियानों से सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में काम चल रहा है। 

    Saturday, May 16, 2026

    प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के पंजीकृत छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम पूर्ण कराने के सम्बन्ध में

    प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के पंजीकृत छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम पूर्ण कराने के सम्बन्ध में


    यूपी बोर्ड से संचालित होंगे अभिनव स्कूल, नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज किए जाने की मिली मंजूरी

    यूपी बोर्ड से संचालित होंगे अभिनव स्कूल, नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज किए जाने की मिली मंजूरी

    राजकीय अभिनव विद्यालयों की बदली गई व्यवस्था, अब तक ये सभी स्कूल सीबीएसई से चलते थे


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के सभी 18 मंडल मुख्यालय वाले जिलों में अंग्रेजी माध्यम से संचालित पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय अभिनव विद्यालय अब यूपी बोर्ड से संचालित होंगे। अब तक ये सभी 18 स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संचालित थे। 

    शासन के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्त की ओर से 11 मई को माध्यमिक शिक्षा निदेशक को जारी पत्र में इन स्कूलों के सीबीएसई की बजाय राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की तरह यूपी बोर्ड से संचालित करने की अनुमति दी गई है। साथ ही इन 18 राजकीय अभिनव विद्यालयों के नाम भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज किए जाने की मंजूरी दी गई है।

    शिक्षा निदेशालय की ओर से 22 अगस्त 2024 और 21 अप्रैल 2026 को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था। यूपी बोर्ड ने 16 अप्रैल 2026 को संचालित करने की सहमति दी थी। व्यवस्था में बदलाव के पीछे कारण है कि एक तो माध्यमिक शिक्षा विभाग सीबीएसई मानकों के अनुसार मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती नहीं कर पाता। इसके चलते समय-समय पर सीबीएसई को जवाब देना पड़ता है। दूसरे सीबीएसई हर पांच साल में स्कूलों से नवीनीकरण फीस के रूप में 25 हजार रुपये लेता है। सरकारी स्कूल होने के कारण विभाग के पास नवीनीकरण फीस के लिए कोई बजट नहीं होता।

    वैसे भी यूपी बोर्ड में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम लागू होने के कारण सीबीएसई और यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में कोई अंतर नहीं रह गया है। 



    यूपी के 18 राजकीय अभिनव विद्यालय अब माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन, नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज किए जाने की भी मिली अनुमति 

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में संचालित 18 राजकीय अभिनव विद्यालयों के संचालन को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-7 द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब ये विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (CBSE), नई दिल्ली के स्थान पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के अधीन संचालित किए जाएंगे।

    11 मई 2026 को जारी पत्र में बताया गया है कि इस संबंध में पूर्व में जारी विभिन्न प्रस्तावों, पत्रों और तथ्यों पर विचार करने के बाद शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2015 के शासनादेश के अंतर्गत संचालित इन 18 राजकीय अभिनव विद्यालयों को अब प्रदेश में संचालित पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज/राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की तर्ज पर माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज से संचालित किया जाएगा।

    इसके साथ ही इन विद्यालयों के नाम परिवर्तित कर “पंडित दीनदयाल उपाध्याय मॉडल इंटर कॉलेज” किए जाने की भी अनुमति प्रदान कर दी गई है। शासन के इस फैसले को प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस निर्णय का उद्देश्य विद्यालयों के संचालन में आ रही व्यावहारिक और प्रशासनिक कठिनाइयों को दूर करना तथा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप एकरूपता स्थापित करना है। इससे विद्यालयों के प्रबंधन, पाठ्यक्रम संचालन और प्रशासनिक नियंत्रण में बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    आदेश जारी होने के बाद शिक्षा विभाग और संबंधित विद्यालयों में आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब इन विद्यालयों की शैक्षिक और प्रशासनिक गतिविधियां माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित होंगी।



    प्रदेश में जुलाई से 29 और राजकीय महाविद्यालय खोलने की तैयारी

    प्रदेश में जुलाई से 29 और राजकीय महाविद्यालय खोलने की तैयारी

    प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के तहत खुल रहे 20 महाविद्यालय

    इन महाविद्यालयों में पद सृजन के लिए शासन से मांगा गया प्रस्ताव


    प्रयागराज। प्रदेश में एक जुलाई से शुरू होने जा रहे नए सत्र से 29 और राजकीय महाविद्यालय खोलने की तैयारी है। प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम योजना के तहत 20 महाविद्यालयों का संचालन राजकीय महाविद्यालय के रूप में किए जाने के लिए पद सृजन का प्रस्ताव उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से शासन को भेजा जा चुका है। पहले इनका संचालन अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग को करना था लेकिन अब इन्हें उच्च शिक्षा विभाग को हस्तांतरित किया जा रहा है।


    इन 20 कॉलेजों में प्रतापगढ़ के दो राजकीय महाविद्यालय गाबी महूआवन और राजकीय महाविद्यालय संडवा चंडिका पूरब गांव शामिल है। इसके अलावा नौ और महाविद्यालय खोलने की तैयारी है। पिछले साल नवनिर्मित 69 राजकीय महाविद्यालयों में से 46 का संचालन ही शुरू हो सका था। इनमें से सात ऐसे हैं जिन्हें संबद्ध महाविद्यालय के रूप में चलाने से राज्य विश्वविद्यालयों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। चूंकि इनमें पद सृजन पहले ही हो चुका है इसलिए इन्हें जुलाई से शुरू करने में कोई अड़चन भी नहीं हैं। 

    वहीं 69 राजकीय महाविद्यालयों में से दो राठ हमीरपुर और जमालपुर मिर्जापुर का निर्माण पिछले साल पूरा नहीं होने के कारण पठन-पाठन शुरू नहीं हो सका था। अब इनका काम लगभग पूरा है और ये भी जुलाई से शुरू होंगे। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा का कहना है कि प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम योजना के तहत 20 राजकीय महाविद्यालयों में पदसृजन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। वर्तमान में प्रदेश के 216 राजकीय महाविद्यालय संचालित हैं। सहायक निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. एसके पांडेय ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन प्रतिशत लगभग 27 है। 2035 तक सकल नामांकन 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

    Friday, May 15, 2026

    खेल में पुरस्कृत परीक्षार्थियों को बोनस अंक देगा यूपी बोर्ड, पांच से लेकर 20 नंबर तक बोनस अंक के रूप में देने का बोर्ड ने भेजा संशोधित प्रस्ताव

    खेल में पुरस्कृत परीक्षार्थियों को बोनस अंक देगा यूपी बोर्ड, पांच से लेकर 20 नंबर तक बोनस अंक के रूप में देने का बोर्ड ने भेजा संशोधित प्रस्ताव


    प्रयागराज : विभिन्न खेलों में प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के उन खिलाड़ी परीक्षार्थियों को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) परीक्षा में बोनस अंक प्रदान कर सम्मान व प्रोत्साहन देगा, जिन्होंने राज्य, राष्ट्रीय स्तर या अंतरराष्ट्रीय पर प्रथम/द्वितीय/तृतीय स्थान प्राप्त किए हैं। इन्हें हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में पांच से लेकर 20 नंबर तक बोनस अंक के रूप में देने की योजना का संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। 


    बोनस अंक स्कूल गेम्स फेडरेशन आफ इंडिया (एसजीएफआइ) द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग पर ही देय होंगे। सर्वाधिक बोनस अंक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विजेता होने पर दिए जाएंगे।

    बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने शासन को भेजे प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि बोनस अंक केवल उन्हीं परीक्षार्थियों को दिए जाएंगे, जिन्होंने हाईस्कूल अथवा इंटरमीडिएट परीक्षा में सम्मिलित होने से पूर्व प्रतियोगिता में प्रथम/द्वितीय/तृतीय स्थान प्राप्त करने का प्रमाणपत्र या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करने का प्रमाणपत्र परीक्षा वर्ष की 31 जनवरी तक प्राप्त किए हों। 

    हाईस्कूल परीक्षा में परीक्षार्थियों को प्रदान किए जाने वाले बोनस अंक उनके अंकपत्र/प्रमाणपत्र में प्रदर्शित किए जाएंगे। इंटरमीडिएट में अभी ग्रेडिंग व्यवस्था नहीं होने के कारण परीक्षा में प्रदान किए जाने वाले बोनस अंक उनके कुल प्राप्तांक में जोड़े जाएंगे। परीक्षार्थी के अनुत्तीर्ण होने की दशा में बोनस अंक किन्हीं दो विषयों में ग्रेस मार्क के रूप में जोड़े जाएंगे।

    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी

    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी


    प्रयागराज। उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्राओं को स्कूटी देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को विधानसभा चुनाव से पहले धरातल की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए पात्र छात्राओं की सूची बनाई जा रही है।


    खास बात यह है कि छात्राओं को ईंधन पर खर्च खत्म करने और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी वितरित की जाएगी। एक स्कूटी लगभग 55 हजार रुपये की पड़ रही है।

    इस लिहाज से 400 करोड़ में 72,727 स्कूटी पड़ रही है। कुछ बजट आयोजन वगैरह पर भी पड़ेगा। इसलिए 70 हजार से अधिक छात्राओं को वाहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी लाभार्थियों की संख्या का निर्धारण नहीं हो सका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुति भी दे दी है। माना जा रहा है कि छह महीने के अंदर स्कूटी का वितरण हो जाएगा।

     मुख्यमंत्री ने भी महिला दिवस (आठ मार्च) को जल्द स्कूटी वितरित करने की बात कही थी। सरकार ने 20 फरवरी 2025 को इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया के साथ ही स्कूटी की विशिष्टताएं निर्धारित करने के लिए 11 मार्च 2025 को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गई थी। 

    हालांकि पिछले साल कोई ठोस पहल नहीं हो सकी थी। शिक्षा निदेशालय के अफसरों ने विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं से पिछले साल स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं की सूची मांगी है। स्कूटी वितरण में सभी वर्ग का भी ध्यान रखा जाएगा। जिस प्रकार नौकरी में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलता है उसी प्रकार स्कूटी वितरण में भी सभी वर्ग की छात्राओं को लाभ दिया जाएगा।


    योजना से ग्रामीण इलाके की छात्राओं को लाभ
     इस महत्वाकांक्षी योजना का सर्वाधिक लाभ ग्रामीण इलाके की छात्राओं को होगा। अमूमन छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर कॉलेज जाना पड़ता है, विशेषकर ग्रामीण इलाके की छात्राओं को रोजाना कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्कूटी की सहायता से छात्राओं को घर से कॉलेज आने-जाने में आसानी होगी और समय भी बचेगा, जिससे वह अन्य कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

    Thursday, May 14, 2026

    कहीं जूनियर शिक्षक का तबादला तो कही सीनियर का, बेसिक शिक्षकों का अंतःजनपदीय समायोजन में जिलों में बीएसए कर रहे अलग-अलग आदेश


    कहीं जूनियर शिक्षक का तबादला तो कही सीनियर का, बेसिक शिक्षकों का अंतःजनपदीय समायोजन में जिलों में बीएसए कर रहे अलग-अलग आदेश


    शिक्षकों के समायोजन को लेकर जूनियर-सीनियर का विवाद शुरू, जिलों में समायोजन सूची पर भी विवाद

    हाईकोर्ट ने स्कूलों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती के आदेश दिए थे, अगली सुनवाई 22 मई को होनी है

    हाल ही में अमेठी और भदोही में जूनियर शिक्षकों का समायोजन

    कौशाम्बी, बुलंदशहर, लखीमपुर में सीनियर को दूसरे स्कूल भेजा

    प्रयागराज। हाईकोर्ट के आदेश पर परिषदीय स्कूलों में हो रहे शिक्षकों के समायोजन में एक और विवाद पैदा हो रहा है। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा के आदेश पर कुछ जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने जूनियर शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेज दिया है जबकि कुछ अन्य जिलों के बीएसए ने सीनियर शिक्षकों को समायोजित कर दिया है। अब इसको लेकर शिक्षकों ने विवाद करना शुरू कर दिया है। सीनियर कह रहे हैं कि जूनियर शिक्षक का समायोजन होना चाहिए जबकि जूनियर शिक्षक पहले से कार्यरत शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेजने पर अड़े हैं।


    चूंकि अपर मुख्य सचिव के चार मई के आदेश में यह साफ नहीं है कि जूनियर या सीनियर में किसका समायोजन होगा इसलिए इसे लेकर कानूनी विवाद होना तय है। इसमें सीनियर और जूनियर दोनों में से जिसका मनमाफिक स्कूल में समायोजन नहीं होगा, वही न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। सौरभकुमार सिंह व छह अन्य की ओर से दायर विशेष अपील में हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को परिषदीय स्कूलों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती के आदेश दिए थे। इस मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होनी है।

    अपर मुख्य सचिव ने सभी बीएसए से समायोजन करते हुए 20 मई तक रिपोर्ट मांगी है। अब तक जिन जिलों में समायोजन हो चुका है उनमें अमेठी, बाराबंकी और भदोही में जूनियर शिक्षकों जबकि मेरठ, बुलंदशहर, प्रतापगढ़ और कौशांबी में सीनियर को दूसरों स्कूलों में भेजा जा रहा है। बरेली में वरिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस माना गया है। लखीमपुर खीरी में वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस माना गया है लेकिन यदि सरप्लस अध्यापक महिला है तो अधिक ठहराव वाले पुरुष शिक्षक को समायोजित करने जा रहे हैं। हरदोई में दो कदम आगे बढ़ते हुए वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों सरप्लस शिक्षकों का डेटा मंगा लिया है। लखनऊ में अभी तक बीएसए ने सरप्लस में कनिष्ठ जाएगा या वरिष्ठ इसकी स्थिति तय नहीं की है।


    जिले में शिक्षकों की समायोजन सूची पर भी विवाद

    प्रयागराज। परिषदीय शिक्षकों के समायोजन के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने मंगलवार को सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी कर दी। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस दिखाया गया है। हालांकि सूची में आरटीई नियमों की खुलकर अनदेखी की गई है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 100 छात्रसंख्या तक विषयवार तीन शिक्षक होना अनिवार्य है। तमाम विद्यालयों में एक विषय के एक से अधिक शिक्षक होने के बावजूद उन्हें सरप्लस नहीं दिखाया गया है। सिर्फ उन्हीं शिक्षकों को सरप्लस किया गया है जहां छात्रसंख्या 100 से कम है और अध्यापक तीन से अधिक हैं। एनआईसी की वेबसाइट पर प्रदर्शित डाटा के संबंध में शिक्षकों को कोई आपत्ति हो तो जनपदीय स्थानान्तरण/समायोजन समिति के सदस्य सचिव बीएसए को 19 मई तक साक्ष्य सहित प्रस्तुत कर सकते हैं। बीएसए ने साफ किया है कि 19 मई के बाद किसी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।


    सीबीएसई: 12वीं का परिणाम 3.19 फीसदी गिरा, बेटियों ने फिर मारी बाजी

    सीबीएसई: 12वीं का परिणाम 3.19 फीसदी गिरा, बेटियों ने फिर मारी बाजी 

    88.86 फीसदी लड़कियां हुईं पास, 82.13 फीसदी रहा लड़कों का नतीजा


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    CBSE 12th Class Result OUT


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं कक्षा के नतीजों में 85.20 फीसदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.19 फीसदी कम है। बेटियों का प्रदर्शन इस बार भी शानदार रहा है। 88.86 फीसदी बेटियां पास हुईं, तो लड़कों का नतीजा 82.13 फीसदी ही रहा। बेटियां लड़कों से फीसदी आगे रहीं। ट्रांसजेंडर का परिणाम सौ फीसदी रहा। इस बार भी बोर्ड ने टॉपरों की  सूची जारी नहीं की। 


    इस बार बोर्ड ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को अपनाया है। इस साल 17,80,365 परीक्षार्थी पंजीकृत थे और 17,68,968 ने परीक्षा दी थी। इनमें से 15,07,109 विद्यार्थी पास हुए। बीते साल 14,96,307 उत्तीर्ण हुए थे। 1,63,800 विद्यार्थियों को कंपार्टमेंट मिली है। बीते साल यह संख्या 1,29,095 थी। कंपार्टमेंट या विषय में प्रदर्शन सुधारने के इच्छुक विद्यार्थी 15 जुलाई को सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।


    त्रिवेंद्रम रीजन अव्वल प्रयागराज सबसे नीचे

    देशभर के 22 रीजन में से त्रिवेंद्रम 95.62% परिणाम के साथ शीर्ष पर है, जबकि प्रयागराज 72.43% के साथ सबसे नीचे रहा। दस रीजन का परिणाम औसत पास फीसदी से भी कम है। दिल्ली रीजन का पास प्रतिशत भी कम रहा। इस साल दिल्ली रीजन से 91.97 फीसदी छात्र सफल हुए, जो पिछले साल 95.18 रहा था। 90 एवं 95 फीसदी अंक पाने वालों विद्यार्थियों की संख्या भी कम हुई है। 90% से अधिक अंक पाने वालों की संख्या 94,028 है, जबकि 17,113 ने 95 फीसदी से अधिक अंक हासिल किए हैं। कुल 92 विषयों में 49,676 ने सौ में सौ अंक हासिल किए है।

    एक दिन हो सकती है प्राथमिक व उच्च के 3.96 लाख अभ्यर्थियों की टीईटी, दो, तीन और चार जुलाई को UPTET परीक्षा

    एक दिन हो सकती है प्राथमिक व उच्च के 3.96 लाख अभ्यर्थियों की टीईटी, दो, तीन और चार जुलाई को UPTET परीक्षा

    प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए 7.84 लाख व उच्च के लिए 12.12 लाख आवेदन

    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग दो, तीन और चार जुलाई को कराएगा परीक्षा


    प्रयागराज : उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 के उन अभ्यर्थियों की परीक्षा एक दिन में आयोजित कर बड़ी राहत दे सकता है, जिन्होंने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों स्तर की टीईटी के लिए आवेदन किया है। ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या करीब 3.96 लाख है। एक ही दिन में दो अलग-अलग पालियों में परीक्षा कराए जाने से इन अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के जनपद में दो बार नहीं जाना-आना पड़ेगा। इसके अलावा केवल प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए करीब 7.84 लाख व उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए 12.12 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। टीईटी आयोजन दो, तीन व चार जुालई को प्रस्तावित है।




    शिक्षा सेवा चयन आयोग ने एक ही आवेदन में अलग अलग शुल्क लेकर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक की टीईटी के लिए आनलाइन आवेदन लिया है। अंतिम तिथि तीन मई तक कुल 16.16 आवेदन किए गए। आयोग ने परीक्षा व्यवस्था के लिए प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के आवेदनों की अलग-अलग गणना कराई। इसमें करीब 3.96 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों के लिए आवेदन किया है। 

    चूंकि दोनों स्तर की टीईटी का आयोजन अलग-अलग किया जाएगा, इसलिए दोनों में आवेदन करने वाले परीक्षार्थियों को दो बार परीक्षा देने जाना पड़ेगा। इसे ध्यान में रखकर आयोग अध्यक्ष डा. प्रशांत कुमार ऐसी व्यवस्था बनाने के प्रयास में हैं, जिसमें दोनों स्तर के अभ्यर्थियों की परीक्षा एक ही दिन दो अलग-अलग पालियों में संपन्न कराई जा सके।

    अध्यक्ष ने बताया कि इस अनुरूप व्यवस्था बन जाने पर इन अभ्यर्थियों का समय और खर्च दोनों बचेंगे। इसके अलावा प्राथमिक व उच्च प्राथमिक के अलग-अलग अभ्यर्थी अपने लिए निर्धारित पाली में सम्मिलित होकर परीक्षा दे सकेंगे। परीक्षा केंद्रों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र तथा अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग विस्तृत योजना तैयार कर रहा है।

    माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ मिलेगी हुनर की शिक्षा, विद्यार्थियों का होगा कौशल विकास

    माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ मिलेगी हुनर की शिक्षा, विद्यार्थियों का होगा कौशल विकास

    जून के प्रथम सप्ताह से तैयारी

     लखनऊराजधानी समेत प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को हुनर का ज्ञान भी दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से विद्यालयों में कौशल विकास की विशेष पाठशाला शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जून के प्रथम सप्ताह से इसकी शुरुआत होने की संभावना है। इसके तहत विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ ही निश्शुल्क तकनीकी और रोजगारपरक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।


    कौशल विकास मिशन की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग को भेजे गए प्रस्ताव में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यालय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने का अनुरोध किया गया है। योजना के अनुसार छात्र-छात्राओं को उनकी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे वह पढ़ाई के साथ रोजगार से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी भी हासिल कर सकेंगे। तीन महीने से लेकर एक साल तक के कोर्स की पढ़ाई होंगी। हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। भारतीयों की इच्छा के एन यूरोप प्रवेश दिया जाएगा। हर ट्रेड में 30 विद्यार्थियों का ही प्रवेश होगा।

    इन ट्रेडों में मिलेगा प्रशिक्षण :
    इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, प्लंबर, कंप्यूटर आपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, डाटा एंट्री आपरेटर, फैशन डिजाइनिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस, सिलाई एवं कढ़ाई,


    मोबाइल रिपेयरिंग, आटोमोबाइल सर्विस टेक्नीशियन, रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग, हेल्थकेयर असिस्टेंट, होटल मैनेजमेंट एवं फूड प्रोडक्शन, हाउसकीपिंग, रिटेल सेल्स एसोसिएट, सीसीटीवी एवं सिक्योरिटी सिस्टम इंस्टालेशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, वेब डिजाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग, टैली एवं अकाउंटिंग, कृषि आधारित प्रशिक्षण, डेयरी एवं पशुपालन, ड्रोन टेक्नोलाजी एवं संचालन, सोलर पैनल टेक्नीशियन, ई-रिक्शा एवं ईवी रिपेयरिंग, फर्नीचर एवं बढ़ई का कार्य, पेंटिंग एवं पालिशिंग, फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट।


    विद्यालय स्तर पर कौशल विकास की शुरुआत होने से विद्यार्थी कम उम्र में ही रोजगारपरक शिक्षा से जुड़ सकेंगे। इस मिशन का लक्ष्य युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है। माध्यमिक शिक्षा के अलावा अल्प संख्यक कल्याण विभाग, महिला कल्याण व नगर विकास समेत 13 विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। –पुलकित खरे, मिशन निदेशक


    आइसीटी लैब संचालन प्रशिक्षण 16 को
    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित आइसीटी लैब उपकरणों के सुचारु संचालन को लेकर 16 मई निशागंज के राजकीय इंटर कालेज एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण मंडल के छह जनपदों के 129 प्रधानाचार्यों को दिया जाएगा। मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डा. दिनेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण आईसीटी लैब सेवा द्वारा दो सत्रों में आयोजित होगा। सुबह 11 बजे से से दोपहर एक बजे व द्वितीय सत्र तीन से शाम पांच बजे तक चलेगा।

    Wednesday, May 13, 2026

    राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 'भारतीय भाषा समर कैंप-2026' के आयोजन के संबंध में

    राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 'भारतीय भाषा समर कैंप-2026' के आयोजन के संबंध में

    मातृभाषा में पढ़ाई बच्चों का अधिकार, नजरअंदाज नहीं कर सकते : सुप्रीम कोर्ट

    मातृभाषा में पढ़ाई बच्चों का अधिकार,  नजरअंदाज नहीं कर सकते : सुप्रीम कोर्ट

    कोर्ट ने राजस्थान के सभी स्कूलों में राजस्थानी पढ़ाने के लिए कदम उठाने के दिए निर्देश


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में शुरू करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है। इस संबंध में एक उचित नीतिगत ढांचे की कमी को रेखांकित करते हुए शीर्ष अदालत ने यह निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि मातृभाषा में पढ़ाई बच्चों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप एक व्यापक नीति बनानी चाहिए। इस नीति के तहत राजस्थानी भाषा को स्थानीय और क्षेत्रीय भाषा का दर्जा देते हुए स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शुरुआत में प्राथमिक और प्रारंभिक स्तर की कक्षाओं में राजस्थानी भाषा को पढ़ाया जाए और बाद में इसे उच्च कक्षाओं तक बढ़ाया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि राजस्थानी पहले से राज्य के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है इसलिए यह कहना सही नहीं है कि भाषा को शैक्षणिक मान्यता नहीं मिली है।

    कोर्ट ने राजस्थान सरकार के उस तर्क पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि केवल संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को ही सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त भाषा के रूप में पढ़ाया जाता है। अदालत ने कहा कि ऐसा रवैया बहुत संकीर्ण सोच को दर्शाता है।


    स्थानीय भाषा आधारित पढ़ाई की जिम्मेदारी राज्यों की भी

    पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत नीति नहीं बनाती लेकिन सांविधानिक अधिकारों की अनदेखी पर चुप भी नहीं रह सकती। कोर्ट ने कहा कि जब केंद्र सरकार खुद मातृभाषा आधारित पढ़ाई को बढ़ावा दे रही है तो राज्यों की भी जिम्मेदारी है कि वे इसे लागू करें।

    यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें स्कूलों में राजस्थानी भाषा को शिक्षा के माध्यम और विषय के रूप में शामिल करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 4.36 करोड़ लोग राजस्थानी भाषा बोलते हैं।


    Monday, May 11, 2026

    बच्चों को तनाव से बचने के गुर भी सिखाएंगे स्कूल, मंत्रालय जारी करेगा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दिशा-निर्देश, शिक्षक होंगे प्रशिक्षित

    बच्चों को तनाव से बचने के गुर भी सिखाएंगे स्कूल, मंत्रालय जारी करेगा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दिशा-निर्देश, शिक्षक होंगे प्रशिक्षित

    परीक्षा परिणाम सहित साइबर बुलिंग की बढ़ती घटनाएं बच्चों के बढ़ते तनाव की मानी जा रही हैं मुख्य वजह


    नई दिल्ली: खेलने, कूदने और पढ़ने की उम्र में बच्चों में तनाव के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब स्कूल उन्हें पढ़ाने के साथ तनाव मुक्त रहने की भी सीख देंगे। शिक्षा मंत्रालय ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों की मदद से बच्चों को तनाव से बचाने के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन पर काम शुरू किया है। इसमें स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे पर न सिर्फ नजर रखी जाएगी, बल्कि स्कूलों में पढ़ाने वाले प्रत्येक शिक्षक को भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण की मदद से शिक्षक कक्षा में पढ़ाते समय ऐसे बच्चों को पहचान सकेंगे, जिन्हें तनाव हो रहा है। इसके साथ ही काउंसलिंग और मेडिटेशन के जरिए उनके तनाव को भगाने में मदद करेंगे।


    शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों ने इस गाइडलाइन के जून के पहले हफ्ते तक आने की उम्मीद जताई है। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में पढ़ाई और परीक्षा परिणामों से जुड़े तनावों के साथ ही साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट गेम, मैसेजिंग एप्स और अन्य इंटरनेट माध्यमों के जरिए भी बच्चों के तनाव ग्रस्त होने के मामले बढ़े हैं। ऐसे में तैयार की जा रही नई गाइडलाइन में इन सभी पहलुओं से बच्चों को बचाने पर फोकस किया गया है। खासकर कोविड के बाद से स्कूलों में मोबाइल या अन्य डिजिटल माध्यमों से पढ़ाने को बढ़ावा दिया गया है, जिससे बच्चों के बीच इसका इस्तेमाल तो बढ़ा है, लेकिन इसके सुरक्षित प्रयोग को लेकर बच्चों को सतर्क न करने से वे गेमिंग या इंटरनेट मीडिया के अन्य एप्स में फंस गए हैं, जो उनके तनाव बढ़ने का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।


    तनाव के बढ़ते मामलों को लेकर नीति आयोग ने भी उठाए थे सवाल

    मंत्रालय ने यह पहल ऐसे समय शुरू की है, जब नीति आयोग ने भी हाल ही में बच्चों में तनाव बढ़ने के मामलों को लेकर सवाल उठाए थे। साथ ही कहा कि बच्चों को इससे बचाने के लिए काउंसलर नियुक्त करने की पहल पर भी शैक्षणिक संस्थानों ने काम नहीं किया। वहीं तनाव ग्रस्त बच्चों को पहचानने के लिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षण नहीं दिया गया। यही वजह है कि तैयार की जा रही नई गाइडलाइन में शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया गया है। इस पहल में स्कूलों में बच्चों के माता-पिता और संरक्षकों के साथ लगातार बैठकों को शामिल किया जा रहा है ताकि बच्चों में देखे जाने वाले बदलावों पर चर्चा की जा सके।

    RTE की अनदेखी से सुप्रीम कोर्ट नाराज, 10 राज्यों को दी चेतावनी, चार सप्ताह में मांगा जवाब, प्रधान सचिव किए जाएंगे तलब

    RTE की अनदेखी से सुप्रीम कोर्ट नाराज, 10 राज्यों को दी चेतावनी, चार सप्ताह में मांगा जवाब, प्रधान सचिव किए जाएंगे तलब


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब और वंचित बच्चों के लिए निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को लागू नहीं करने पर कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों पर नाराजगी जताई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने 10 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों से पूछा है कि उन्होंने अधिनियम की धारा 12 (1) (सी) को सही तरीके से लागू किया है या नहीं।


    कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि चार सप्ताह के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो संबंधित राज्यों के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिवों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा। पीठ मोहम्मद इमरान अहमद की ओर से 2023 में दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। धारा 12 (1) (सी) के तहत गैर अल्पसंख्यक निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश स्तर पर कम से कम 25 प्रतिशत सीटें कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है।


    पंजाब, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में लागू नहीं कानून

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अदालत को बताया कि कई राज्य अब भी इस प्रावधान को लागू नहीं कर रहे हैं। अदालत के समक्ष पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी ने इस प्रावधान को लागू करने से इन्कार किया है। केरलम, मिजोरम और सिक्किम पर ऐसे नियम बनाने का आरोप है जो इस कानून को कमजोर करते हैं। वहीं अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर ने अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट नियम नहीं बनाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को चार सप्ताह में हलफनामा दाखिल कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

    Sunday, May 10, 2026

    माध्यमिक विद्यालयों में दिखेगी एक भारत-श्रेष्ठ भारत की झलक, विद्यालयों में होगा EBSB क्लब का गठन, हर महीने दूसरे राज्यों से जुड़ी सांस्कृतिक लिए जारी हुआ गतिविधि कैलेंडर

    माध्यमिक विद्यालयों में दिखेगी एक भारत-श्रेष्ठ भारत की झलक, विद्यालयों में होगा EBSB क्लब का गठन, हर महीने दूसरे राज्यों से जुड़ी सांस्कृतिक लिए जारी हुआ गतिविधि कैलेंडर

    विभिन्न प्रतियोगिता व कार्यक्रमों का होगा आयोजन

    लखनऊ। प्रदेश में उच्च शिक्षा के बाद अब माध्यमिक विद्यालयों में भी एक भारत-श्रेष्ठ भारत की झलक देखने को मिलेगी। इसके तहत विद्यालयों में ईबीएसबी क्लब का गठन किया जाएगा। इनके माध्यम से व अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने हर महीने का गतिविधि कैलेंडर जारी किया है।



    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार माध्यमिक विद्यालयों में मई में अरुणाचल प्रदेश व मेघालय की भाषा में गीत, कहावत आदि प्रतियोगिताएं, जुलाई में इन राज्यों की भाषा में निबंध प्रतियोगिता, अगस्त में इन राज्यों के ऐतिहासिक स्थल, स्वदेशी खेलों, संस्कृति, भोजन, भाषा, पोषाक आदि पर स्क्रैप बुक बनाई जाएगी। वहीं सितंबर में इनकी संस्कृति, इतिहास, परंपरा पर नाटक-लोक नाट्य, अक्तूबर में स्वच्छता, सिंगल यूज प्लास्टिक, जल संरक्षण, नवंबर में खेल प्रतियोगिताएं, दिसंबर में नए समाचार, नेशनल आइकन, समाज सुधार, प्रसिद्ध व्यक्तियों पर चर्चा और जनवरी में कक्षा 11 व 12 के छात्रों की कृषि फसलों पर जानकारी व उसका विद्यालय परिसर में प्रयोग पर गतिविधियां होंगी।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने इसके लिए सहारनपुर, बरेली, झांसी, मेरठ, चित्रकूट, लखनऊ, आजमगढ़ व प्रयागराज के संयुक्त शिक्षा निदेशक को नोडल अधिकारी बनाया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि प्रदेश के सभी विद्यालयों में यह गतिविधियां आयोजित की जाएं। इससे जुड़ी जानकारी व फोटोग्राफ निदेशालय को भी उपलब्ध कराए जाएं। ब

    स्कूल-कॉलेजों से और दूर होगा नशा, अब 100 के बजाय 500 मीटर के दायरे में नहीं बिकेंगे तंबाकू उत्पाद, विद्यालय, पुलिस-प्रशासन और नारकोटिक्स विभाग सख्ती से नियम कराएंगे लागू

    स्कूल-कॉलेजों से और दूर होगा नशा, अब 100 के बजाय 500 मीटर के दायरे में नहीं बिकेंगे तंबाकू उत्पाद,  विद्यालय, पुलिस-प्रशासन और नारकोटिक्स विभाग सख्ती से नियम कराएंगे लागू


    लखनऊ। युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेजों के 500 मीटर के दायरे को नशा मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। विद्यालय, पुलिस-प्रशासन और नारकोटिक्स विभाग मिलकर नियम का सख्ती से पालन कराएंगे। स्कूलों के गेट पर इससे जुड़ा बोर्ड भी लगाया जाएगा। अभी 100 मीटर के दायरे तक यह प्रतिबंध लागू है। इसके अलावा नशा मुक्त विद्यालय पोर्टल भी शुरू किया जाएगा। इसमें नशा मुक्ति से जुड़ी सभी जानकारियां दी जाएंगी।


    युवाओं में नशे की लत को कम करने के लिए शिक्षा मंत्रालय की ओर से तीन साल की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। मंत्रालय की ओर से इसे सभी राज्यों को भेजते हुए इसके अनुसार कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि इस सत्र से सभी शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर दायरे को नशा मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाए। 


    माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से सभी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को विस्तृत कार्ययोजना भेजते हुए कहा गया है कि तंबाकू व नशा मुक्त घोषित करने वाले स्कूलों के लिए एक नशा मुक्त विद्यालय पोर्टल इसी सत्र में शुरू किया जाएगा। इसमें निजी, सरकारी व एडेड सभी विद्यालय शामिल होंगे। पोर्टल के माध्यम से स्कूलों की निगरानी की जाएगी। विद्यालय खुद नियमों के पालन से जुड़ी जानकारियां इसमें देंगे।

    प्रदेश में अभी स्कूलों के कूलों के 100 मीटर के दायरे में शराब व तंबाकू की बिक्री पर रोक है। ऐसा करने पर जुर्माने का प्रावधान है। यह प्रतिबंध तंबाकू नियंत्रण कानून के तहत है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार 100 मीटर के दायरे में एक पीली पट्टी खींचकर इसे प्रभावी बनाया जाता है। साथ ही तंबाकू-मुक्त शिक्षण संस्थान बोर्ड भी लगाना है।


    8.5 फीसदी छात्रों को तंबाकू की लत

    इस कार्ययोजना में स्कूल शिक्षा मंत्रालय की सचिव की ओर से बताया गया है कि ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे के अनुसार 13 से 15 साल के लगभग 8.5 फीसदी स्कूली छात्र किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। जो उनको नशीले पदार्थों के सेवन की ओर ले जाने का एक माध्यम बनता है।

    बच्चों के लिए नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान भी माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने बताया कि नई पीढ़ी को नशे की लत से दूर रखने के लिए जागरूकता और व्यवहार में बदलाव पर केंद्रित पीएम ई-विद्या चैनल के माध्यम से परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। इसमें छात्रों, शिक्षकों व अभिभावकों के मानसिक स्वास्थ्य, खुशहाली और समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। माईगॉव प्लेटफार्म पर छात्रों व अभिभावकों के लिए समय-समय पर जागरुकता अभियान चलाया जाए। विभिन्न दिवसों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    डीआईओएस बनेंगे नोडल अधिकारी: अभियान के लिए डीआईओएस नोडल अधिकारी होंगे। वे विद्यालयों के 500 मीटर के दायरे को नशा मुक्त क्षेत्र घोषित करने के लिए कार्यवाही करेंगे। साथ ही सभी विद्यालयों से कार्ययोजना साझा करते हुए इसे प्रभावी बनाएंगे। समय-समय पर प्रधानाचार्यों के साथ बैठक कर कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित करेंगे।

    राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की संबद्धता समाप्त, उच्च शिक्षा निदेशालय ने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के दिए निर्देश

    राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की संबद्धता समाप्त, उच्च शिक्षा निदेशालय ने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के दिए निर्देश

    शिक्षकों की संबद्धता में भेदभाव का उठा था मामला

    राजधानी के कॉलेजों पर मेहरबानी सोनभद्र और लखीमपुर उपेक्षित

    जहां शिक्षकों की पर्याप्त संख्या वहीं अटैच किए शिक्षक

    लखनऊ। प्रदेश के विभिन्न राजकीय स्नातक व परास्नातक महाविद्यालयों में की गई शिक्षकों की संबद्धता समाप्त कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षकों को अपने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं।


    अमर उजाला ने 29 अप्रैल के अंक में राजधानी के कॉलेजों पर मेहरबानी, सोनभद्र और लखीमपुर उपेक्षित शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें यह बताया गया था कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पर्याप्त संख्या वाले विद्यालयों में शिक्षकों को संबद्ध किया जा रहा है। जबकि जिन कॉलेजों में शिक्षकों की संख्या काफी कम है, वहां ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

    उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के विभिन्न राजकीय स्नातक व स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में एक महाविद्यालय से दूसरे महाविद्यालय में कतिपय शिक्षकों की संबद्धता की गई थी। इसके तहत इन सभी की संबद्धता आदेश को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है। हालांकि इसमें प्रशासनिक आधार (प्रशासनिक काम को) पर की गई संबद्धता को छोड़ा गया है।

    उन्होंने सभी प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर को अपने मूल महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने को कहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से तबादला नीति जारी होने के बाद अब जिन कॉलेजों में जरूरत है, वहां पर नए सिरे से शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। इसमें छात्र-शिक्षक अनुपात को ध्यान में रखा जाएगा। इससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

    Saturday, May 9, 2026

    मनमाने तरीके से कार्य करने कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश

    मनमाने तरीके से कार्य करने कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश 



    बीएड में 20 सप्ताह की इंटर्नशिप अनिवार्य

    बीएड में 20 सप्ताह की इंटर्नशिप अनिवार्य

    लखनऊ। बीएड के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में 20 सप्ताह की इंटर्नशिप जरूरी होगी। प्रशिक्षुओं को पहले वर्ष चार, दूसरे वर्ष 16 हफ्ते की इंटर्नशिप करनी होगी। 


    इन्हें राजकीय माध्यमिक स्कूलों पढ़ाने भेजा जाएगा। कहीं राजकीय स्कूल नहीं है तो निजी में भेजा जाएगा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के नियम सख्ती से लागू होंगे। 

    उच्च शिक्षा संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने जिलों को निर्देश भेज दिए हैं। कॉलेज इंटर्नशिप के लिए छात्र सूची डीआईओएस को भेजेंगे।

    Friday, May 8, 2026

    भर्ती परीक्षाओं में फंसी 4461 राजकीय शिक्षकों की पदोन्नति, हर साल बिना पदोन्नति पाए शिक्षक सेवानिवृत्त होते जा रहे

    भर्ती परीक्षाओं में फंसी 4461 राजकीय शिक्षकों की पदोन्नति, हर साल बिना पदोन्नति पाए शिक्षक सेवानिवृत्त होते जा रहे

     
    प्रयागराज। प्रदेश के 2635 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 4461 सहायक अध्यापकों के प्रवक्ता पद पर पदोन्नति भर्ती परीक्षाओं और विभागीय लापरवाही के कारण फंसी हुई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रवक्ता महिला शाखा के 1821 और पुरुष शाखा के 2640 पदों पर पदोन्नति के लिए अधियाचन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा है। ये अलग बात है कि विभाग खुद चार साल कोशिश के बावजूद अब तक पदोन्नति के लिए अर्ह सहायक अध्यापकों की सूची तैयार नहीं कर सका है। इस सबके बीच हर साल बिना पदोन्नति पाए शिक्षक सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं।


    शिक्षा निदेशालय ने 11 व 20 जुलाई 2023, 16 मई व दस जून 2024, 30 सितम्बर और 12 दिसंबर 2025 को महिला शाखा में कार्यरत शिक्षिकाओं के प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशकों से गोपनीय आख्या मांगी थी लेकिन रिक्त 1821 पद के सापेक्ष अब तक तकरीबन 70 फीसदी शिक्षिकाओं की सूची ही तैयार हो सकी है। इसके चलते सात साल से शिक्षिकाओं की पदोन्नति नहीं हो सकी है। इसी प्रकार पुरुष शाखा के 297 पदों की सूचना तो पहले ही भेजी जा चुकी थी और 2343 पदों का अधियाचन शामिल करते हुए कुल 2640 पदों की रिक्तियां 27 फरवरी को आयोग को भेजी गई है।


    हैरानी की बात है कि शिक्षा निदेशालय ने पुरुष शाखा के 2640 पदों पर पदोन्नति के लिए अर्ह सहायक अध्यापकों की सूची ही तैयार नहीं की है। इस बीच शिक्षा विभाग के अफसरों ने विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक कराने के लिए जब लोक सेवा आयोग से संपर्क किया तो जवाब मिला कि वर्तमान में कई भर्ती परीक्षाओं के कारण डीपीसी की तिथि तय नहीं हो पा रही है। आयोग से डीपीसी की तिथि मिलने पर जितने शिक्षकों की गोपनीय आख्या तैयार है उन्हें तो पदोन्नति मिल ही जाएगी।


    पदोन्नति कोटा 

    राजकीय विद्यालयों में पदोन्नति कोटा में प्रवक्ता महिला के 2343 और पुरुष के 3066 कुल 5409 पद स्वीकृत हैं। इनमें से महज 948 (18 फीसदी) पद ही भरे हुए हैं। 4461 (82 प्रतिशत) पद खाली हैं। यदि पदोन्नति होती है तो सहायक अध्यापकों के लगभग साढ़े चार हजार पद खाली होंगे जिससे बेरोजगारों को एक और बड़ी भर्ती में शामिल होने का मौका मिल जाएगा।

    डीआईओएस कार्यालयों में वेतन निकासी और भुगतान की खंगाली जाएगी कुंडली, जानिए क्यों?

    डीआईओएस कार्यालयों में वेतन निकासी और भुगतान की खंगाली जाएगी कुंडली, जानिए क्यों?

    माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को दिए निर्देश

    पीलीभीत में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से काम कराने का मामला सामने आने के बाद लिया निर्णय

    लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय भगवान भरोसे हैं। इसकी बानगी हाल ही में पीलीभीत में देखने को मिली। जहां डीआईओएस कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से वेतन निकासी और भुगतान का काम लिया जा रहा था। अब पैसे में गड़बड़ी का मामला संज्ञान में आने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में हड़कंप मचा हुआ है। निदेशालय ने इस मामले को देखते हुए पूरे प्रदेश में डीआईओएस कार्यालयों की कुंडली खंगालने का निर्णय लिया है।

    पीलीभीत में डीआईओएस कार्यालय के आहरण व वितरण अधिकारी कंप्यूटर के कार्य के साथ ही वेतन संबंधी बिलों का टोकन जारी करने का संवेदनशील काम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से करा रहे थे। जिला प्रशासन की जांच में पता चला कि कर्मचारी ने दूसरे के खातों में पैसे भेज दिए। मामला सही मिला तो कार्रवाई भी की गई है।

    इस घटना के बाद शासन के निर्देश पर अब माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी डीआईओएस कार्यालयों में वेतन निकासी-भुगतान से जुड़े मामले व अन्य बिलों के भुगतान की कुंडली खंगालने का निर्णय लिया है। 

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को इसके लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी एडी अपने जिले व मंडल के कार्यालयों में वेतन निकासी-भुगतान संबंधी कार्यों की गहनता से जांच करें। डीआईओएस कार्यालयों में यदि कोई अनियमितता मिलती है तो दोषी कर्मचारी व अधिकारी का नाम सहित उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव निदेशालय को उपलब्ध कराएं। वहीं, दूसरी तरफ शासन स्तर से भी इस मामले की मॉनीटरिंग की जा रही है। शासन ने भी निदेशालय को इसके लिए कड़े निर्देश दिए हैं। 



    सरकारी नौकरियों में अस्थायी नियुक्ति की परंपरा खत्म होनी चाहिए –सुप्रीम कोर्ट, संविदा शिक्षक से बच्चे के भविष्य और शिक्षा की गारंटी की अपेक्षा करना निराधार

    सरकारी नौकरियों में अस्थायी नियुक्ति की परंपरा खत्म होनी चाहिए –सुप्रीम कोर्ट, संविदा शिक्षक से बच्चे के भविष्य और शिक्षा की गारंटी की अपेक्षा करना निराधार


    शीर्ष कोर्ट कहा-सब्सिडी देने के बजाय व्यवस्था सुदृढ़ बनाना जरूरी

    रोजगार की गारंटी के बिना संविदा शिक्षक से बच्चे के भविष्य और शिक्षा की गारंटी की अपेक्षा करना निराधार है

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा को अस्थायी उपायों से सब्सिडी देने के बजाय उसे सुदृढ़ बनाना समय की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर राज्य भर में सहायक शिक्षकों और सहायक आचार्यों के कुल रिक्त पदों में से 50 फीसदी पद विशेष रूप से संविदा पर नियुक्त शिक्षकों के लिए अधिसूचित करे। शिक्षकों की कमी को शीघ्रता से दूर करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान जैसी सरकारी पहलों के तहत संविदा पर शिक्षकों को निश्चित अवधि के अनुबंधों पर नियुक्त किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कार्यपालिका के लिए आवधिक प्रदर्शन ऑडिट करने और सार्वजनिक रोजगार में संविदा की व्यवस्था को समाप्त करने का समय आ गया है।


    जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी ने कहा, आज की सबसे बड़ी आवश्यकता शिक्षा को मजबूत करना है, विशेषकर प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर, न कि उसे अस्थायी उपायों से आर्थिक सहायता देना। शिक्षा प्रदान करना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि व्यापक और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना है। पीठ ने कहा, किसी भी सेवा में दक्षता बढ़ाने के लिए रोजगार की सुरक्षा का भाव अत्यंत आवश्यक है, और शिक्षा भी इससे अछूती नहीं है। शिक्षक छात्र का रिश्ता अस्थायी नहीं होता, बल्कि शैक्षणिक वर्षों तक कायम रहता है। रोजगार की गारंटी के बिना संविदा शिक्षक से बच्चे के भविष्य और शिक्षा की गारंटी की अपेक्षा करना निराधार है।