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Tuesday, August 22, 2119

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    Tuesday, March 24, 2026

    यूपी बोर्ड ने 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए जारी किया शैक्षिक कैलेंडर, करें डाउनलोड

    माध्यमिक स्कूलों में सप्ताह में एक दिन अब अंग्रेजी में होगी प्रार्थना, यूपी बोर्ड ने 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए जारी किया कैलेंडर

    बच्चों से रोज पढ़वाई जाएंगी अखबार की प्रमुख खबरें, कठिन शब्दों का उच्चारण, अर्थ भी बताया जाएगा

    एक अप्रैल से कक्षा नौ के विद्यार्थियों का शुरू होगा पंजीकरण

    🔴 मुख्य बिंदु

    एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र प्रारंभ।

    कक्षा नौ से 12 तक प्रथम यूनिट टेस्ट जुलाई में (बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित)।

    अर्द्धवार्षिक प्रयोगात्मक परीक्षाएं सितंबर के चौथे सप्ताह में।

    अर्द्धवार्षिक लिखित परीक्षा अक्तूबर में।

    कक्षा 10 व 12 का पाठ्यक्रम 10 जनवरी 2027 तक पूर्ण करना होगा।

    कक्षा नौ व 11 का पाठ्यक्रम 25 जनवरी 2027 तक पूर्ण करना होगा।

    प्री-बोर्ड प्रयोगात्मक परीक्षा 11 जनवरी 2027 से।

    कक्षा नौ व 11 की वार्षिक परीक्षा 1 फरवरी 2027 से।

    बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 27 जनवरी से 10 फरवरी 2027 तक।

    बोर्ड परीक्षा फरवरी 2027 में आयोजित होगी।

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड के 29 हजार से अधिक राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों में सप्ताह में एक दिन अंग्रेजी में प्रार्थना सभा होगी। बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से सोमवार को जारी शैक्षिक सत्र 2026-27 के कैलेंडर में यह व्यवस्था दी गई है। यदि विद्यालय में कोई अन्य भाषा भी पढ़ाई जाती हो तो सप्ताह में एक दिन यथासम्भव प्रार्थना सभा उस भाषा में भी संचालित की जाएगी। खास बात यह है कि एक अप्रैल को सत्र शुरू होने के साथ ही यूपी बोर्ड का पोर्टल क्रियाशील रहेगा जिस पर कक्षा नौ के विद्यार्थियों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) किया जा सकता है।

    स्कूलों को विद्यार्थियों के प्रवेश के साथ-साथ पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू करते हुए उनके विवरण जैसे नाम, पिता का नाम, माता का नाम, जन्मतिथि आदि का मिलान विद्यालयी रिकॉर्ड से किया जाएगा। हाईस्कूल और इंटर के लिए परीक्षा आवेदन करने से पहले विद्यार्थियों के विवरण का विद्यालयी अभिलेखों से मिलान करते हुए अभिभावकों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के बाद ही आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वार्षिक परीक्षा के लिए सभी विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी। प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों से पढ़वाए जाने वाले समाचार में प्रयुक्त कुछ कठिन शब्दों का उच्चारण एवं अर्थ सहित वाक्य प्रयोग भी बताया जाएगा। विद्यालय परिसर में छात्र छात्राओं को मोबाइल लाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा तथा मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक विकास पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों जैसे आंखों की रोशनी, पढ़ाई में एकाग्रता में कमी, ऑनलाइन गेम्स की लत आदि के प्रति जागरूक किया जाएगा।

    छात्र-छात्राओं की सभी परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं एवं ग्रीष्मावकाश गृहकार्य को स्कूल में सुरक्षित रखा जाएगा और यूपी बोर्ड के निर्देश पर वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग एवं साइबर अपराधों के प्रति सजग करने के लिए स्कूलों में 'साइबर क्लब' का गठन होगा। अर्द्धवार्षिक परीक्षा मासिक शैक्षिक पंचांग के अनुसार सितंबर तक पढ़ाए गए लगभग 60 प्रतिशत पाठ्यक्रम से ली जाएगी।


    वार्षिक परीक्षा के बाद करना होगा प्रोजेक्ट कार्य

    प्रयागराज। कक्षा नौ एवं 11 के विद्यार्थियों को वार्षिक परीक्षा के बाद नया सत्र शुरू होने से पहले उनकी रुचि के अनुरूप भाषा, गणित, विज्ञान, कला, संगीत, सामाजिक विज्ञान आदि विषयों को समाहित करते हुए एक रचनात्मक प्रोजेक्ट कार्य अनिवार्य रूप से दिया जाएगा। प्रोजेक्ट कार्य का चयन पूरी तरह से विद्यार्थियों की रुचि के अनुरूप किया जाएगा और सत्र शुरू होने पर विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट कार्य को कक्षाध्यापक / विषय अध्यापक के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों के विद्यालय निरीक्षण के समय इन प्रोजेक्ट कार्यों को उनके समक्ष अवलोकन के लिए प्रस्तुत करना होगा।


    फरवरी में होगी हाईस्कूल-इंटर की बोर्ड परीक्षा

    प्रयागराज। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं फरवरी 2027 में कराई जाएगी। इनकी प्रायोगिक परीक्षाएं 27 जनवरी से दस फरवरी 2027 तक होगी। कक्षा नौ व 11 की वार्षिक परीक्षाएं एक से दस फरवरी तक और विद्यार्थियों के अंक वेबसाइट पर मार्च के तीसरे सप्ताह तक अपलोड करने होंगे। कक्षा 12 की प्री बोर्ड प्रयोगात्मक परीक्षाएं 11 जनवरी से और लिखित परीक्षा 18 जनवरी से शुरू होगी। 10वीं-12वीं का पाठ्यक्रम पूरी करने की अंतिम तिथि दस जनवरी और नौ व 11 का कोर्स पूरा करने की आखिरी तारीख 25 जनवरी है।


    यूपी बोर्ड ने 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए जारी किया शैक्षिक कैलेंडर, करें डाउनलोड




    सिर्फ सर्टिफिकेट नहीं, नौकरी तक रहेगी नजर, एडेड कालेजों तक भी पहुंचेगा प्रोजेक्ट प्रवीण

    सिर्फ सर्टिफिकेट नहीं, नौकरी तक रहेगी नजर, एडेड कालेजों तक भी पहुंचेगा प्रोजेक्ट प्रवीण


    प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में चल रही 'प्रवीण' कौशल योजना को लेकर सरकार ने अब सख्त निगरानी का ब्लूप्रिंट तैयार किया है। अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर साफ कर दिया है कि कौशल प्रशिक्षण अब सिर्फ कागजी उपलब्धि नहीं, बल्कि छात्रों के रोजगार तक का सफर तय करेगी।


     कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को रोज 90 मिनट का कौशल प्रशिक्षण देने वाली इस योजना का दायरा तेजी से बढ़ा है। 2022-23 में 150 स्कूलों से शुरू होकर 2025-26 में यह संख्या 500 से अधिक राजकीय विद्यालयों तक पहुंच चुकी है, जबकि सहायताप्राप्त स्कूलों में भी सर्वे जारी है।

    नई व्यवस्था के तहत जिलाधिकारी के स्तर से स्कूलों में जाकर प्रशिक्षण की हकीकत परखी जाएगी। लैब में लगे उपकरण, ट्रेनिंग पार्टनर द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षक, उनकी उपस्थिति और पढ़ाने की गुणवत्ता, सबका भौतिक सत्यापन होगा। स्कूल प्रशासन और कौशल विकास मिशन के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के लिए नियमित बैठकें भी कराई जाएंगी। सबसे अहम फोकस प्रशिक्षण के बाद का परिणाम होगा। कितने छात्रों को प्रमाणपत्र मिले, कितने रोजगार या स्वरोजगार से जुड़े हैं, अब यह भी प्रशासनिक निगरानी का हिस्सा बनेगा। इसके माध्यम से स्कूलों की पढ़ाई को सीधे रोजगार से जोड़ना और युवाओं को सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि हुनर के साथ आत्मनिर्भर बनाना है।


    एडेड कालेजों तक पहुंचेगा प्रोजेक्ट प्रवीण

    अगले शैक्षणिक सत्र से प्रोजेक्ट प्रवीण का दायरा बढ़ाया जाएगा। इसके तहत एडेड माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभी तक यह योजना केवल राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में लागू थी। धीरे-धीरे इसे अन्य कालेजों तक भी विस्तारित किया जा रहा है। एडेड कालेजों के बाद यूपी बोर्ड के निजी विद्यालयों के छात्रों को भी इससे जोड़ा जाएगा। कौशल विकास मिशन ने अगले शैक्षणिक सत्र में पांच लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य तय किया है।

    24 वर्ष बाद बढ़ेगा यूपी बोर्ड परीक्षा उत्तरपुस्तिकाओं के अंकेक्षकों का पारिश्रमिक, एक रुपये से बढ़ाकर 14 रुपया प्रति कापी करने की तैयारी

    24 वर्ष बाद बढ़ेगा यूपी बोर्ड परीक्षा उत्तरपुस्तिकाओं के अंकेक्षकों का पारिश्रमिक, एक रुपये से बढ़ाकर 14 रुपया प्रति कापी करने की तैयारी

    यूपी बोर्ड से मिला प्रस्ताव शिक्षा निदेशक ने विशेष सचिव को भेजा

    एक रुपये प्रति उत्तरपुस्तिका था, 14 रुपये करने की तैयारी


    प्रयागराजः यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा की मूल्यांकित उत्तरपुस्तिकाओं का रेंडम अंकेक्षण (आडिट) करने वाले अंकेक्षकों का पारिश्रमिक एक रुपये से बढ़ाकर 14 रुपया प्रति कापी करने की तैयारी की गई है। इसी के साथ बाह्य परीक्षकों का दैनिक भत्ता 20 रुपया से बढ़ाकर 100 रुपये करने का प्रस्ताव भी माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव ने विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा को भेजा है। इसके पहले वर्ष 2001 में अंकेक्षकों के पारिश्रमिक में वृद्धि कर एक रुपया प्रति उत्तरपुस्तिका किया गया था।

    वर्ष 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में प्रधानाचार्यों को इस उद्देश्य से यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने अंकेक्षक बनाया, ताकि मूल्यांकन गुणवत्तापूर्ण हो। कई प्रधानाचार्यों ने इसका विरोध किया, लेकिन बोई ने निष्पक्ष और गुणवत्ता पूर्ण मूल्यांकन के लिए इसे जरूरी बताया। इधर, अंकेक्षकों का पारिश्रमिक एक रुपया प्रति उत्तरपुस्तिका होने को बहुत कम मानते हुए बोर्ड सचिव ने इसमें वृद्धि कर 14 रुपया प्रति उत्तरपुस्तिका किए जाने का प्रस्ताव शिक्षा निदेशक को भेजा था।

    इसी के साथ परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए बाह्य केंद्र परीक्षकों को देय दैनिक भत्ते की सीमा बढ़ाए जाने का प्रस्ताव भी भेजा गया था। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने बाह्य परीक्षकों का दैनिक भत्ता 'ए' शहरों के लिए 20 रुपया प्रतिदिन (अधिकतम 300 रुपया) से बढ़ाकर 100 रुपया प्रतिदिन (अधिकतम 1500 रुपया), 'बी' एवं 'सी' श्रेणी के शहरों के लिए 16 रुपया (अधिकतम 240 रुपया) से बढ़ाकर 80 रुपया प्रतिदिन (अधिकतम 1200 रुपया) करने का प्रस्ताव विशेष सचिव को भेजा है। स्वीकृति मिलते ही पारिश्रमिक और दैनिक भत्ता बढ़ा दिया जाएगा।


    Monday, March 23, 2026

    दुनिया के आधे से अधिक देशों के स्कूलों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी टीम की रिपोर्ट

    दुनिया के आधे से अधिक देशों के स्कूलों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी टीम की रिपोर्ट


    नई दिल्ली। दुनियाभर में स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ रही है। यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी (जेम) टीम की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 58 प्रतिशत देशों ने स्कूलों में मोबाइल पर प्रतिबंध लगा दिया है। रिपोर्ट में कहा गया कि क्लास में ध्यान कम होना, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल माध्यमों का बच्चों पर बढ़ता असर इसके मुख्य कारण हैं।


    जून 2023 में केवल 24% देशों में ही यह प्रतिबंध था, जो 2025 की शुरुआत में बढ़कर 40 प्रतिशत और मार्च 2026 तक 58 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सामाजिक माध्यमों का बच्चों, खासकर लड़कियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। 


    लड़कियां लड़कों की तुलना में दोगुना ज्यादा खानपान से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो रही हैं। 32 प्रतिशत किशोरियों को तस्वीरें देखने के बाद अपने शरीर को लेकर असहज महसूस होता है। कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों को बार-बार शरीर से जुड़ी सामग्री दिखाते हैं, जिससे मानसिक असर बढ़ता है। हाल ही में कई देशों ने भी स्कूलों में मोबाइल पर पाबंदी लगाई है। 

    बिना भर्ती के अवसर की मांग करने की बीटीसी अभ्यर्थियों की याचिका खारिज

    बिना भर्ती के अवसर की मांग करने की बीटीसी अभ्यर्थियों की याचिका खारिज

    बेसिक शिक्षा की जब भी निकले भर्ती, उनके अभ्यर्थन पर विचार करने की थी मांग 

    कोर्ट ने कहा, बिना विज्ञापन भविष्य की भर्ती के लिए निर्देश मांगना न्यायोचित नहीं

    प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति को लेकर दाखिल बीटीसी अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने सुनवाई के बाद दिया है। 


    राजेश कुमार श्रीवास्तव व 23 अन्य याचियों की ओर से याचिका में यह प्रार्थना की गई थी कि जब भी बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा सहायक शिक्षक के पदों पर रिक्तियां निकाली जाएं, तब उनकी अभ्यर्थिता पर विचार करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया जाए। 

    सुनवाई के दौरान विपक्षी के अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि बीटीसी प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की पात्रता, शिक्षण अनुभव के आधार पर वरीयता और आयु में छूट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विशेष अनुमति याचिका में विचाराधीन हैं। इसके अलावा अब तक किसी भी प्रकार की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी नहीं किया गया है।

    याचियों की ओर से इस पर कोई ठोस प्रतिवाद नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी विज्ञापन के भविष्य की संभावित भर्ती के लिए इस प्रकार का निर्देश मांगना न्यायोचित नहीं है। साथ ही याचिका पूरी तरह भ्रांतिपूर्ण है। कोर्ट ने इन्हीं आधारों पर याचिका को खारिज कर दिया।

    Sunday, March 22, 2026

    नई सरकारी नौकरी में पेंशन व वेतन निर्धारण में जुड़ेगी पुरानी सैन्य सेवा : हाईकोर्ट

    नई सरकारी नौकरी में पेंशन व वेतन निर्धारण में जुड़ेगी पुरानी सैन्य सेवा : हाईकोर्ट

    पूर्व सैनिक शिक्षक को आठ माह में सभी बकाये का भुगतान करने का आदेश

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई पूर्व सैनिक सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद सरकारी नौकरी में पुनर्नियुक्त होता है तो उसकी पिछली सैन्य सेवा को वेतन निर्धारण और पेंशन लाभ के लिए जोड़ा जाना अनिवार्य है।


    यह आदेश न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने मैनपुरी के हवलदार सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए शिक्षा विभाग को आठ सप्ताह के भीतर सभी बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है।

    याची हवलदार सिंह ने चार जुलाई 1981 से 31 जुलाई 1996 तक भारतीय नौसेना में सेवाएं दी थीं। वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने बीटीसी प्रशिक्षण पूरा किया। 2011 में मैनपुरी के एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुए। 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने 15 वर्ष की सैन्य सेवा को शिक्षा विभाग की सेवा के साथ जोड़ने की मांग की थी, जिस पर विभाग निर्णय नहीं ले पा रहा था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    सुनवाई के दौरान स्थायी अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि याची इस लाभ का हकदार है पर दलील दी कि एक अन्य समान मामले में प्रस्ताव शासन के पास लंबित है।

    हालांकि, कोर्ट ने सरकार के इस रुख पर नाराजगी जताई। कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाएं कानूनी प्रावधानों से ऊपर नहीं हैं। एक बार जब विभाग याची की पात्रता को स्वीकार कर ले तो उसे प्रशासनिक अनुमोदन के अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता। लिहाजा, कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली।

    Saturday, March 21, 2026

    शिक्षकों के निलंबन का अनुमोदन 60 दिनों में नहीं किया तो कार्रवाई, शासन स्तर पर 39 जिले चिन्हित

    शिक्षकों के निलंबन का अनुमोदन 60 दिनों में नहीं किया तो कार्रवाई, शासन स्तर पर 39 जिले चिन्हित 


    लखनऊ। शिक्षकों के निलंबन कर उसे 60 दिनों में अनुमोदित नहीं करना तथा निलम्बन के नाम अध्यापकों का उत्पीड़न करना माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिले, मंडल व निदेशालय तक के अधिकारियों के लिए महंगा पड़ेगा। शासन ऐसे अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।


    निलंबन के मामलों को तय समय सीमा से अधिक लटकाने की बढ़ती प्रवृत्ति के विरुद्ध शासन ने चेतावनी जारी की है। जिसमें कहा गया है कि निलंबन के मामले को 60 दिनों बाद भी लटकाए रखकर शिक्षकों के उत्पीड़न की शिकायतें बढ़ती जा रही है जो सिटिजन चार्टर के प्रतिकूल है। प्रदेश के 39 ऐसे जिले चिन्हित किए गए हैं, जहां इस तरह के मामलों को लंबे समय तक लटकाए जाने की दर्जनों शिकायतें हैं। 


    नियमानुसार निलम्बन के 60 दिनों के भीतर उसका अनुमोदन या अनानुमोदन का निर्णय नहीं होने पर कृत कार्यवाही को विधि शून्य माने जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद दर्जनों ऐसी शिकायतें हैं जिनमें पांच से छह माह बाद भी निलम्बन का अनुमोदन या अनानुमोदन नहीं किया गया है। इस प्रकरण को विधान परिषद में शिक्षक नेताओं की ओर से भी कई बार उठाया जा चुका है, जिसके जवाब में सरकार की ओर से कहा गया था कि इस तरह के मामलों की विशेष निगरानी की जा रही है। इसी कवायद में शासन स्तर पर 39 जिलों को चिन्हित किया गया है।

    KVS admission 2026: बालवाटिका और कक्षा 1 में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जानें कैसे होगा चयन, ऐसे करना होगा अप्लाई

    KVS admission 2026: बालवाटिका और कक्षा 1 में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जानें कैसे होगा चयन, ऐसे करना होगा अप्लाई

    🔴 आवेदन हेतु वेबसाइट : https://admission.kvs.gov.in/


    नई दिल्ली। हर साल की तरह इस बार भी लाखों माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अच्छे स्कूल की तलाश में हैं और इसी बीच केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने  2026-27 सेशन के लिए एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. 20 मार्च से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है और अब अभिभावक अपने बच्चों के लिए आवेदन कर सकते हैं. केंद्रीय विद्यालय देश के सबसे भरोसेमंद सरकारी स्कूलों में गिने जाते हैं, जहां पढ़ाई के साथ अनुशासन और अच्छा माहौल मिलता है, यही वजह है कि यहां एडमिशन के लिए हर साल बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं.


    इस बार भी कक्षा 1 और बाल वाटिका में एडमिशन पूरी तरह ऑनलाइन होगा. अभिभावकों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना होगा और आवेदन की अंतिम तारीख 2 अप्रैल 2026 तय की गई है. अधिकारियों ने सलाह दी है कि आखिरी समय की परेशानी से बचने के लिए समय रहते आवेदन पूरा कर लें.


    क्या है सिस्टम?
    कक्षा 1 में एडमिशन के लिए किसी भी तरह की लिखित परीक्षा या इंटरव्यू नहीं लिया जाता, बल्कि बच्चों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता है. यानी किस बच्चे का नाम आएगा, यह तय प्रक्रिया और किस्मत दोनों पर निर्भर करता है. लॉटरी के बाद जिन बच्चों का नाम सूची में आता है, उन्हें अपने संबंधित केंद्रीय विद्यालय में जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं और फीस भरने के बाद उनका एडमिशन पक्का हो जाता है.


    उम्र क्या होनी चाहिए?
    एडमिशन के लिए बच्चे की उम्र भी तय की गई है. 31 मार्च 2026 तक बच्चे की उम्र कम से कम 6 साल और ज्यादा से ज्यादा 8 साल होनी चाहिए, जबकि 1 अप्रैल को जन्मे बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. विशेष जरूरत वाले बच्चों को उम्र में कुछ छूट भी दी जाती है.


    ये है जरूरी डेट्स
    जरूरी तारीखों की बात करें तो रजिस्ट्रेशन 20 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा. पहली चयन सूची 8 या 9 अप्रैल को जारी की जाएगी, जबकि दूसरी और तीसरी सूची क्रमशः 16 और 21 अप्रैल को जारी हो सकती है, अगर सीटें खाली रहती हैं.


    रिजर्वेशन सिस्टम?
    केंद्रीय विद्यालयों में आरक्षण की व्यवस्था भी लागू होती है ताकि हर वर्ग के बच्चों को मौका मिल सके. 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के तहत, 15 प्रतिशत एससी, 7.5 प्रतिशत एसटी, 27 प्रतिशत ओबीसी और 3 प्रतिशत सीटें विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए तय की गई हैं.


    कैसे भर सकते हैं फॉर्म
    अभिभावकों को वेबसाइट पर जाकर “Admission 2026” सेक्शन में रजिस्ट्रेशन करना होगा, फिर बच्चे और अपने बारे में जानकारी भरनी होगी, जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे और अंत में फॉर्म सबमिट करके उसकी कॉपी रखनी होगी

    सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन, गलत ढंग से दी गई पदोन्नति रद्द करने के बाद शासन का फैसला

    सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन, गलत ढंग से दी गई पदोन्नति रद्द करने के बाद शासन का फैसला

    अब प्रवक्ता के पद पर 10 वर्ष की सेवा के बाद उप प्रधानाचार्य के पद पर मिलेगी प्रोन्नति


    20 मार्च 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन किया गया है। प्रवक्ता से सीधे प्रधानाचार्य पद पर गलत ढंग से की गई प्रोन्नति को निरस्त किए जाने के बाद यह निर्णय गया है। अब प्रवक्ता के पद पर 10 वर्ष की सेवा के बाद उप प्रधानाचार्य के पद पर प्रोन्नति मिलेगी। प्रवक्ता के 22 साल की सेवा पूरी होने पर उसे प्रधानाचार्य के पद पर प्रोन्नति दी जाएगी।

    इन विद्यालयों में उप्र समाज कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली का उल्लंघन कर 4800 रुपये पे ग्रेड पर कार्यरत प्रवक्ताओं को सीधे 7600 रुपये पे ग्रेड पर पदोन्नति दी गई थी। अब संशोधन कर उप प्रधानाचार्य 2 का पद सृजित किया गया है। मामले में उप निदेशक जे.राम पर विभागीयम कार्रवाई की जाएगी।

    नए आदेशों के तहत यूपी में 93 सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के एक-एक पद का सृजन किया गया है। पुनरीक्षित पे मैट्रिक्स लेवल 10 पर 56100-177500 रुपये वेतनमान निर्धारित किया गया है। समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव राजेन्द्र सिंह की ओर से पद सृजन का आदेश जारी कर दिया गया है।




    प्रधानाचार्य बनाए गए 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नति रद्द, समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूलों का मामला

    19 मार्च 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूलों में 100 प्रवक्ताओं की गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर हुई प्रोन्नति को रद कर दिया गया है।


    नियम विपरीत प्रवक्ता पद से सीधे प्रधानाचार्य पर प्रोन्नति किए जाने पर शासन ने सख्त नाराजगी जताई है समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक जे. राम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। समाज कल्याण विभाग यूपी में 101 जयप्रकाशनारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित कर रहा है। 

    यहां कार्यरत करीब 100 प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पर दो वर्ष पूर्व प्रोन्नति दी गई। प्रवक्ताओं को 4800 रुपये पे ग्रेड से सीधे 7600 रुपये पे ग्रेड के प्रधानाचार्य पर प्रोन्नति दी गई। इसका प्रस्ताव 11 जनवरी 2024 को भेजा गया और उस समय इस पद पर प्रोन्नति के लिए पोषक संवर्ग भी उपलब्ध नहीं था। नियम के अनुसार, इन्हें पहले उप प्रधानाचार्य बनाना चाहिए था, फिर प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति किया जाना चाहिए था।

    यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियां ईद व रामनवमी के दिन नहीं जांची जाएंगी, स्थगित रहेगा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य

    यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियां ईद व रामनवमी के दिन नहीं जांची जाएंगी, स्थगित रहेगा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य

    यूपी बोर्ड ने शिक्षकों को राहत देते हुए ईद और रामनवमी के दिन उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्थगित कर दिया है। बोर्ड के सचिव ने शिक्षकों की मांग पर यह फैसला लिया है। जिन मूल्यांकन केंद्रों पर प्रतियोगी परीक्षाएं हैं, वहां परीक्षा के बाद दोपहर एक बजे से मूल्यांकन शुरू होगा।


    यूपी बोर्ड सचिव ने कॉपियों के मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों को राहत दी

    शिक्षकों की मांग पर यूपी बोर्ड सचिव ने जारी किया आदेश

    प्रतियोगी परीक्षा वाले केंद्र पर उस दिन एक बजे से मूल्यांकन


    प्रयागराज। हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बीच कुछ प्रतियोगी परीक्षाएं होने के साथ-साथ ईद और रामनवमी पर्व भी है। कुछ मूल्यांकन केंद्रों पर मूल्यांकन के दिन प्रतियोगी परीक्षा प्रस्तावित होने से भी संकट है। इसके अलावा मूल्यांकन कार्य कर रहे कुछ परीक्षक प्रतियोगी परीक्षा में कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी लगने से परेशान हैं।

    21 व 26 मार्च को मूल्यांकन स्थगित
    इन सभी मामलों में शिक्षकों व शिक्षक संगठनों की मांग पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के सचिव भगवती सिंह ने ईद पर 21 मार्च को तथा रामनवमी पर 26 मार्च को मूल्यांकन स्थगित किए जाने का आदेश जारी कर दिया है।

    बोर्ड सचिव ने अन्य समस्याओं का भी समाधान किया
    उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य एक अप्रैल तक चलना है। इस बीच पर्वों के दिन मूल्यांकन स्थगित करने की शिक्षक संगठनों की मांग का समाधान करते हुए बोर्ड सचिव ने अन्य समस्याओं का भी समाधान कर दिया है। कहा है कि जिन मूल्यांकन केंद्रों पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की एपीओ परीक्षा प्रस्तावित है, उन केंद्रों पर उस दिन मूल्यांकन कार्य परीक्षा संपन्न होने के बाद दोपहर एक बजे से शुरू कराया जाएगा।

    मूल्यांकन अवधि में ही वह दोनों कार्य पूर्ण हो सकेंगे
    बोर्ड सचिव ने कहा कि ऐसे में जिन शिक्षकों की ड्यूटी परीक्षा में कक्ष निरीक्षक के रूप में लगी है, वह वहां से ड्यूटी पूर्ण करने के बाद मूल्यांकन केंद्र पर उपस्थित होकर काॅपियां जांचेंगे। इस तरह मूल्यांकन अवधि के समय में ही वह दोनों कार्य पूर्ण कर सकेंगे। उन्होंने सभी परीक्षकों, अंकेक्षकों, उप प्रधान परीक्षकों से शुचितापूर्ण और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं।


    एडेड माध्यमिक के विषय विशेषज्ञों को भी पुरानी पेंशन, शासनादेश जारी

    एडेड माध्यमिक के विषय विशेषज्ञों को भी पुरानी पेंशन, शासनादेश जारी 

    लखनऊ। प्रदेश के एडेड माध्यमिक स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को भी पुरानी पेंशन की सुविधा मिलेगी। शासन ने इससे संबंधित एक आदेश शुक्रवार को जारी कर दिया। इससे प्रदेश भर में कार्यरत करीब 2200 विषय विशेषज्ञों को इसका लाभ मिलेगा।

    शुक्रवार को माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव उमेश चन्द्र ने इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया। आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को भी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन के विकल्प में सम्मिलित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया गया है। 

    आदेश का माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री राजीव यादव ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी का आभार व्यक्त किया है। विषय विशेषज्ञों को पुरानी पेंशन का लाभ दिए जाने का मुद्दा विधान परिषद में भी शिक्षक नेताओं ने कई बार उठाया था।


    Friday, March 20, 2026

    एक्सपोजर विजिट में लापरवाही, शिक्षकों और बच्चों को बजट के बावजूद शैक्षिक भ्रमण कराने में जिले हुए फिसड्डी, DGSE ने जताई नाराजगी

    एक्सपोजर विजिट में लापरवाही, शिक्षकों और बच्चों को बजट के बावजूद शैक्षिक भ्रमण कराने में जिले हुए फिसड्डी, DGSE ने जताई नाराजगी 

    मात्र बस्ती मंडल में शिक्षकों को कराया गया भ्रमण

    बच्चों को भ्रमण कराने की भी नहीं मिली जानकारी

    लखनऊ। प्रदेश में पीएमश्री योजना के तहत 150 शिक्षकों व राष्ट्रीय अविष्कार अभियान में बच्चों को एक्सपोजर विजिट कराने के लिए पूर्व में बजट दिया गया था। किंतु इसमें जिला स्तर पर लापरवाही देखने को मिली है। शिक्षकों के मामले में मात्र बस्ती मंडल ने ही भ्रमण कराया है। वहीं बच्चों के भ्रमण की सूचना अभी तक किसी जिले से नहीं दी गई है। मुख्यालय ने इस पर नाराजगी जताई है।


    महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की ओर से सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व बीएसए को भेजे पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के 150 शिक्षकों को एक्सपोजर विजिट कराना था। अभी तक मात्र बस्ती मंडल में शिक्षकों का एक्सपोजर विजिट कराया गया है। अन्य मंडल में इसके पूरा न कराने की स्थिति खेदजनक है। उन्होंने निर्देश दिया है कि इसकी जानकारी 31 मार्च तक हर हाल में पोर्टल पर उपलब्ध कराएं।

    श्रीहरिकोटा, इसी तरह राष्ट्रीय अविष्कार अभियान में 150 छात्रों को बंगलुरू, अहमदाबाद, गांधीनगर का चार दिन की एक्सपोजर विजिट कराना है। इसमें जिले से दो मॉडल का निर्माण कराने वाले विजेता को फरवरी में भ्रमण कराना था। किंतु कहीं से भी अभी तक एक्सपोजर विजिट की जानकारी परियोजना कार्यालय को नहीं दी गई है। यह स्थिति खेदजनक है। ऐसे में 31 मार्च तक बच्चों का भ्रमण कराते हुए इसकी सूचना उपलब्ध कराएं।

    संसदीय समिति ने दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की, केंद्र व राज्य सरकारों से की अंशदान बढ़ाने की मांग

    संसदीय समिति ने दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की, केंद्र व राज्य सरकारों से की अंशदान बढ़ाने की मांग


    संसदीय समिति ने पीएम पोषण योजना के तहत स्कूली बच्चों को दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की है। समिति ने केंद्र और राज्य सरकारों से इसके लिए मदद बढ़ाने का आग्रह किया।

    स्कूली बच्चों को पीएम पोषण के तहत सुबह का नाश्ता मिले।

    नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों को भी दोपहर का भोजन मिले।

    केंद्र-राज्य सरकारें पोषण योजना में अपना अंशदान बढ़ाएँ।


    नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय से जुडी संसदीय समिति ने देश भर के स्कूली बच्चों को पीएम पोषण के तहत दिए जाने वाले दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की भी सिफारिश की है। साथ ही कहा है कि केंद्र सरकार को इसके लिए राज्यों को मदद देनी चाहिए।


    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि नाश्ता जो दिन का पहला आधार होता है, वह विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पढ़ाई के दौरान एकाग्रता के लिए आवश्यक उर्जा और स्मरण शक्ति में सुधार करता है।


    समिति की सिफारिश
    समिति ने सिफारिश की है कि ऐसे स्कूल जो सुबह की पाली में चलते है, उनमें बच्चों को हल्का नाश्ता देने की व्यवस्था तुरंत शुरू की जाए। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारें अपने-अपने अंशदान में वृद्धि करें। समिति ने इसके साथ ही स्कूलों में नौवीं से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को भी दोपहर का भोजन मुहैया कराने की सिफारिश की है।

    समिति का मानना है कि छात्रों की यह उम्र किशोरावस्था की होती है। ऐसे में उन्हें उस उम्र में पर्याप्त पोषण की सबसे अधिक जरूरत होती है। मौजूदा व्यवस्था में स्कूलों में आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों को ही दोपहर का भोजन दिया जाता है। समिति का कहना है कि यह ठीक वैसे ही जैसे बाल्टी भरने से पहले नल को बंद कर दिया जाए।

    Thursday, March 19, 2026

    देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया

    देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


    अपडेट 19 मार्च 2026


    निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

    16 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

    पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

    वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

    यह है मामला
    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

    इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



    फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

    09 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

    इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

    बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
    मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



    शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

    देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

    देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



    देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

    गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



    फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

    गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

    पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

    आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


    बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

    उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

    हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

    शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

    किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

    बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



    शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

    देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

    कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

    इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

    जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



    बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

    इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

    इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



    शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


    गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

    तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



    शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

    गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



    विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

    सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

    गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

    16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

    कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

    अध्यापकों को प्रताड़ित करने के आरोप में कानपुर के बीईओ निलंबित, शिक्षा निदेशक बेसिक ने जारी किया निलंबन का आदेश, बीएसए ने की थी संस्तुति

    अध्यापकों को प्रताड़ित करने के आरोप में कानपुर के बीईओ निलंबित, शिक्षा निदेशक बेसिक ने जारी किया निलंबन का आदेश, बीएसए ने की थी संस्तुति

    31 जनवरी को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जांच के बाद की थी निलंबन की संस्तुति

    कानपुर: बिधनू ब्लाक के शिक्षकों को प्रताड़ित करने और विभागीय आदेशों की अवहेलना करने, स्वेच्छाचारिता के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) भरत कुमार वर्मा को सोमवार को निलंबित कर दिया गया। बीएसए ने आरोपों की जांच के बाद शिक्षा निदेशक (बेसिक), प्रयागराज को निलंबन करने की संस्तुति की थी जिसके बाद शिक्षा निदेशक (बेसिक), प्रयागराज की ओर से निलंबन आदेश जारी किया गया है। इस आदेश को तत्काल प्रभाव से अमल में लाते हुए निलंबित बीईओ को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, नर्वल से संबद्ध कर दिया गया है। प्रकरण में आगे की जांच के लिए मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) को जांच अधिकारी नामित किया गया है।

    अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामताराम, पाल की ओर से जारी आदेश में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, कानपुर नगर के 31 जनवरी 2026 को भेजे गए पत्र का उल्लेख किया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बिधनू, बीईओ कार्यरत शिक्षकों के मानव संपदा पोर्टल पर अवकाश आवेदन जैसे बाल्य देखभाल और चिकित्सा अवकाश आदि को बिना किसी ठोस वजह के आपत्ति लगाकर निरस्त कर देते हैं। इससे शिक्षकों में रोष व्याप्त रहता है और विभाग की छवि धूमिल होती है। यह भी आरोप लगाया गया कि डीएम के स्तर पर बुलाई गई विभागीय समीक्षा बैठक में अक्सर अनुपस्थित रहते हैं और इसकी जानकारी विभाग को नहीं दी जाती। 

    शिक्षामित्रों और अनुदेशकों से संचालित समर कैंप का मानदेय समय से नहीं देते हैं। सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक जियाउल्लाह खां की पत्रावली समय से न देने के भी आरोप हैं। गठित जांच समिति के समक्ष बीईओ ने आरोपों को लेकर अपना पक्ष न रखकर बार-बार जांच के लिए समय मांगते रहे। उन पर विभागीय कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न करने के आरोप भी लगाए गए हैं। निलंबित बीईओ भरत कुमार वर्मा से उनका पक्ष जानने लिए बार-बार मोबाइल फोन नंबर पर काल किया गया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।

    हालांकि, बीईओ ने बीएसए को पत्र लिखकर स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देकर चिकित्सा अवकाश देने  को कहा है। वहीं, बीएसए सुरजीत  कुमार सिंह ने कहा कि अपर शिक्षा अ निदेशक (बेसिक) से जारी बीईओ  का निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से कि अमल में लाते हुए डायट, नर्वल से संबद्ध कर दिया गया है। 

    उच्चाधिकारियों ने निलंबन के बाद सा प्रकरण की जांच के लिए मंडलीय वि सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) को प्रस जांच अधिकारी नामित किया है। कि बीईओ का चिकित्सा अवकाश आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।



    नियुक्ति से पहले शिक्षिका की विवाहित व्यक्ति से शादी दुराचरण नहीं : हाईकोर्ट, सेवा समाप्त करने वाला आदेश रद

    नियुक्ति से पहले शिक्षिका की विवाहित व्यक्ति से शादी दुराचरण नहीं : हाईकोर्ट, सेवा समाप्त करने वाला आदेश रद 


    प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि सरकारी स्कूल में शिक्षिका के रूप में नियुक्ति से पहले किसी महिला की विवाहित व्यक्ति से दूसरी शादी को दुराचरण नहीं माना जा सकता है। न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकलपीठ ने इस टिप्पणी के साथ रीना नामक शिक्षिका की याचिका स्वीकार करते हुए सेवा समाप्त करने वाला आदेश रद कर दिया है और प्रतिवादी अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि वे याची को उचित नोटिस देने के बाद नया और तर्कसंगत आदेश पारित करें।


    वर्ष 2015 में याची को प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया। इस शिकायत पर कि उसने ऐसे व्यक्ति से विवाह किया जो पहले से ही विवाहित था, उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। कहा गया कि उसकी सेवाएं समाप्त करने से पूर्व कोई जांच नहीं की गई और उसे अपने पति के पहले विवाह के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। 


    कोर्ट ने कहा, यूपी सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 का नियम 29 (2) यह प्रविधान करता है कि कोई भी महिला कर्मचारी सरकार की पूर्व अनुमति के बिना ऐसे पुरुष से विवाह नहीं करेगी, जिसकी पत्नी जीवित हो। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि यूपी बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1972 की धारा 19, राज्य सरकार को यह अधिकार देती है कि वह बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूलों में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के पदों पर भर्ती तथा नियुक्त व्यक्तियों की सेवा शर्तों के संबंध में नियम बनाए। 


    कोर्ट ने कहा कि आचरण नियमावली की प्रयोज्यता केवल उन लोगों तक सीमित है, जो सरकारी सेवा में आ चुके हैं। नियुक्ति से पहले के चरण में किसी व्यक्ति के खिलाफ इन नियमों का हवाला नहीं दिया जा सकता। चूंकि कथित वैवाहिक अनियमितता वर्ष 2009 से संबंधित है, यानी याची की 2015 में हुई नियुक्ति से काफी पहले की बात है, इसलिए आचरण नियमावली, 1956 के नियम 29 के प्रविधान याचिकाकर्ता के मामले पर स्पष्ट रूप से लागू नहीं होते।

    Wednesday, March 18, 2026

    नवोदय विद्यालय कक्षा 6 का रिजल्ट जारी, जानें आगे कैसे होगा एडमिशन और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के बारे में

    नवोदय विद्यालय कक्षा 6 का रिजल्ट जारी, जानें आगे  कैसे होगा एडमिशन और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के बारे में 


    रिजल्ट देखें इस लिंक से : https://cbseit.in/cbse/2026/nvsrst/NVS_Cls6.aspx

    JNVST Class 6 Result 2026 : जवाहर नवोदय विद्यालयों में कक्षा 6 में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है. स्टूडेंट्स अपने रिजल्ट नवोदय विद्यालय समिति की वेबसाइट और सीबीएसई पोर्टल पर जाकर अपने नतीजे चेक कर सकते हैं. आइए जानते हैं रिजल्ट के बाद के स्टेप्स के बारे में.


    JNVST Class 6 Result 2026 : नवोदय विद्यालय समिति (NVS) ने 17 मार्च को कक्षा 6 के की प्रवेश परीक्षा (JNVST) का रिजल्ट जारी कर दिया. स्टूडेंट्स अब अपना रिजल्ट नवोदय की वेबसाइट navodaya.gov.in या सीबीएसई पोर्टल cbseit.in पर जाकर चेक कर सकते हैं. कक्षा 6 में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा देने वाले बच्चों को को इस रिजल्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. अब एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
     

    JNVST Class 6 Result 2026 देश में कुल 661 नवोदय विद्यालय हैं. नवोदय विद्यालयों में एडमिशन के लिए अभी कई प्रोसेस बाकी हैं. जिसमें डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन, मेडिकल चेकअप, एडमिशन फॉर्म भरना, स्कूल अलॉटमेंट और ज्वाइनिंग शामिल है. इसके अलावा पेरेंट्स काउंसलिंग/मीटिंग भी होती है. आइए जानते हैं पूरी प्रक्रिया को विस्तार से.


    कैसे चेक करें JNVST Class 6 रिजल्ट?

    सबसे पहले नवोदय की ऑफिशियल वेबसाइट navodaya.gov.in या cbseit.in पर जाएं.

    होमपेज पर आपको View JNVST Class 6 Result 2026 का लिंक दिखेगा, उस पर क्लिक करिए.

    अब आपके सामने एक नया पेज खुलेगा.
    यहां अपना Roll Number और Date of Birth भरिए.
    इसके बाद Submit बटन पर क्लिक करिए.
    आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा.

    इसे डाउनलोड करके एक प्रिंटआउट जरूर निकाल लें.


    नवोदय विद्यालय में एडमिशन के लिए स्टेप्स

    डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन
    रिजल्ट जारी होने के बाद अब नवोदय विद्यालयों में एडमशन की प्रक्रिया शुरू होगी. अगर आपका चयन हो गया है तो डॉक्यूमेंट्स वेरीफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा. वेरीफिकेशन के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट-

    जन्म प्रमाण पत्र
    आधार कार्ड
    निवास (Residence) प्रमाण
    कास्ट/कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू)
    पासपोर्ट साइज फोटो
    पिछली कक्षा की मार्कशीट
    ट्रांसफर सर्टिफिकेट


    हेल्थ चेकअप
    एडमिशन से पहले बच्चे का हेल्थ चेकअप कराया जाता है. फिटनेस और सामान्य स्वास्थ्य जांच जरूरी होती है.

    एडमिशन फॉर्म भरना
    स्कूल एडमिशन के लिए फॉर्म देता है. जिसे भरकर जमा करना होगा. पेरेंट्स के लिए सलाह है कि फॉर्म को ध्यान से और सही-जानकारी भरें.

    स्कूल अलॉटमेंट और ज्वाइनिंग
    आपको किस जवाहर नवोदय विद्यालय में एडमिशन मिलेगा इसकी जानकारी दी जाएगी. तय तारीख पर स्कूल में रिपोर्ट करना होगा.

    पेरेंट्स काउंसलिंग/मीटिंग
    जिस स्कूल में एडमिशन मिलेगा उसके नियम, हॉस्टल, पढ़ाई आदि की जानकारी पेरेंट्स को दी जाती है. माता-पिता को जरूरी निर्देश दिए जाते हैं.

    प्रदेश के 62 विद्यालय हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में होंगे अपग्रेड, समग्र शिक्षा के तहत 106 करोड़ बजट स्वीकृत

    प्रदेश के 62 विद्यालय हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में होंगे अपग्रेड, समग्र शिक्षा के तहत 106 करोड़ बजट स्वीकृत

    जल्द ही शुरू किए जाएंगे विद्यालयों के निर्माण कार्य

    लखनऊ। प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा को और मजबूती देने के लिए समग्र शिक्षा के तहत 62 माध्यमिक विद्यालयों को अपग्रेड किया जाएगा। कक्षा आठ तक की पढ़ाई करा रहे 30 विद्यालय 10वीं तक और 10वीं तक की पढ़ाई करा रहे 32 विद्यालय 12वीं तक अपग्रेड किए जाएंगे। इसके लिए 106 करोड़ का बजट स्वीकृत कर दिया गया है।


    जल्द ही इसका काम भी शुरू कर दिया जाएगा। इसमें प्रति हाईस्कूल की लागत 1.48 करोड़ और इंटर की 2.21 करोड़ है। इस तरह इन विद्यालयों की कुल लागत 106 करोड़ होगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग इस राशि से इन विद्यालयों के लिए आवश्यक बिल्डिंग, क्लास रूम आदि का निर्माण कराएगा। साथ ही यहां पर आवश्यक मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।



    69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

    69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

    18 मार्च 2026
    प्रयागराज । बेसिक शिक्षा परिषद की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों के मामले में 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। यह सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस एजी मसीह की बेंच में होगी। पीड़ित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में मुलाकात कर सरकार से याची लाभका प्रस्ताव सुनवाई की तिथि पर प्रस्तुत किए जाने की मांग की। अभ्यर्थियों को न्याय मिलने की उम्मीद जताई है।

    पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी ने कहा कि पीड़ित अभ्यर्थी वर्ष 2020 से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर याची लाभ' की मांग कर रहे हैं। 13 अगस्त 2024 को हाई कोर्ट की डबल बेंच ने भर्ती सूची को रद कर नई सूची बनाने का आदेश दिया था, जिसमें आरक्षण नियमावली के पालन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभाग ने अनुपालन नहीं किया। 

    अब प्रकरण पिछले 18 महीने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मोर्चा पदाधिकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त पैरवी न होने के कारण मामला लंबित है, जिससे अभ्यर्थियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित हो रही है। यदि सरकार 19 मार्च की सुनवाई में 'याची लाभ' का प्रस्ताव प्रस्तुत करती है, तो यह विवाद समाप्त हो सकता है।



    69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति और सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की तरफ से प्रभावी पैरवी की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने घेरा शिक्षा निदेशालय

    10 मार्च 2026
    लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय घेर लिया। बेसिक शिक्षा निदेशक से मिले आश्वासन के बाद भी असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने धरना जारी रखा। बाद में पुलिस ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों को बस से ईको गार्डेन पहुंचाया।


    आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने 19 मार्च को होने वाली सुनवाई में प्रदेश सरकार की तरफ से प्रभावी पैरवी की मांग की। अभ्यर्थियों की तरफ से धनंजय गुप्ता ने कहा कि सरकार खुद ही जाकर नई डेट ले आती है। ऐसे में उन्हें अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। धरने में राज बहादुर, हसीन, अनूप गुप्ता, बृजेश सिंह, श्यामलता सिंह शामिल थे। वहीं, पिछडा दलित संयुक्त मोर्चा की बैठक में अभ्यर्थियों ने फिर से याची लाभ देने की मांग उठाई। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के साथ ही 29334 गणित-विज्ञान भर्ती के अभ्यर्थी भी सोमवार को धरना देने पहुंचे।

    इसलिए आक्रोश : 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभ्यर्थी लगातार नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

    Tuesday, March 17, 2026

    अमृत उद्यान, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली का प्रदेश के विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों व कार्यरत शिक्षकों का भ्रमण कराये जाने के सम्बन्ध में

    अमृत उद्यान, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली का प्रदेश के विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों व कार्यरत शिक्षकों का भ्रमण कराये जाने के सम्बन्ध में 



    डीएलएड की स्क्रूटनी के लिए आवेदन का आज अंतिम मौका

    डीएलएड की स्क्रूटनी के लिए आवेदन का आज अंतिम मौका 

    17 मार्च 2026


    डीएलएड की स्क्रूटनी को 14 मार्च तक करें आवेदन

    6 मार्च 2026
    प्रयागराज। डीएलएड के विभिन्न बैच के प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर परीक्षा के 25 फरवरी को घोषित परिणाम से असंतुष्ट प्रशिक्षु स्क्रूटनी के लिए 14 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि आवेदन पत्र की प्रति के साथ स्क्रूटनी फीस की मूल रसीद संलग्न कर 18 मार्च तक उपलब्ध कराएं। 

    स्क्रूटनी के लिए प्रशिक्षुओं को प्रति विषय 150 रुपये फीस देनी होगी। डायट प्राचार्य एक से 15 मार्च तक आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करेंगे। गौरतलब है कि 25 फरवरी को घोषित परिणाम में बड़ी संख्या में प्रशिक्षु फेल हो गए थे। सर्वाधिक 101279 (57 प्रतिशत) प्रशिक्षु डीएलएड 2024 के प्रथम सेमेस्टर में फेल थे।



    डीएलएड परीक्षा की स्क्रूटनी के लिए आज से आवेदन, जानिए! कैसे और कहां करें आवेदन

    प्रयागराज । डीएलएड प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर परीक्षा वर्ष अक्टूबर व नवंबर 2025 की स्क्रूटनी के लिए आनलाइन आवेदन शनिवार से किए जा सकेंगे। उत्तर प्रदेश पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने अंतिम तिथि 14 मार्च निर्धारित की है। आफलाइन आवेदन नहीं स्वीकार किए जाएंगे। प्रशिक्षण-2018, 2021 एवं 2023 बैच के अभ्यर्थी http://www.btcexam.in पर आवेदन करेंगे, जबकि 2019, 2022 एवं 2024 के अभ्यर्थियों को https://www.updeledexam.in के माध्यम से आवेदन करना होगा।


    डीएलएड-2024 के प्रथम सेमेस्टर में आधे से अधिक परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण

    परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने परीक्षाओं का घोषित किया परिणाम

    1.84 लाख परीक्षार्थियों में से 43 फीसदी उत्तीर्ण, 3525 अनुपस्थित, 1334 का रिजल्ट अपूर्ण

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने डीएलएड प्रशिक्षण के विभिन्न बैच का अक्तूबर एवं नवंबर-2025 में आयोजित प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाओं का परिणाम बुधवार को घोषित कर दिया।

    जारी परिणाम के अनुसार, वर्ष-2024 के प्रथम सेमेस्टर के कुल 1,84,576 परीक्षार्थियों में से 78,125 ही सफल हुए हैं। इनमें से 3525 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। जबकि, 1334 परीक्षार्थियों का परिणाम अपूर्ण व 309 परीक्षार्थियों के परिणाम किसी कारण से रोके गए हैं।

    इसी प्रकार, वर्ष 2017 के थर्ड सेमेस्टर का परिणाम शत प्रतिशत रहा। इसमें एक परीक्षार्थी ही पंजीकृत था, जो कि सफल रहा। वहीं, वर्ष-2018, 2019, 2021, 2022 व 2023 के भी परिणाम घोषित किए गए हैं। परीक्षार्थी अपना परिणाम विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन देख सकते हैं।

    जिन अभ्यर्थियों का परिणाम अपूर्ण है या रोका गया है, उनके प्रकरणों का परीक्षण किया जा रहा है। आवश्यक अभिलेखों एवं औपचारिकताओं की पूर्ति के बाद ऐसे मामलों का निस्तारण किया जाएगा।


    स्कूल चलो अभियान से पहले विद्यालयों में पहुंचें किताबें, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी सीडीओ के साथ ऑनलाइन बैठक कर दिए निर्देश

    स्कूल चलो अभियान से पहले विद्यालयों में पहुंचें किताबें,  बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी सीडीओ के साथ ऑनलाइन बैठक कर दिए निर्देश


    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में नया सत्र 2026-27 एक अप्रैल से शुरू हो रहा है। इससे पहले विद्यालयों के कील-कांटे दुरुस्त किए जा रहे हैं। साथ ही सभी आवश्यक व्यवस्थाएं भी पूरी की जा रही हैं। इस क्रम में सोमवार को बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी सीडीओ के साथ ऑनलाइन बैठक कर निर्देश दिए।


    उन्होंने कहा कि किताबों की आपूर्ति जिला स्तर पर हो गई है। यह सुनिश्चित किया जाए कि स्कूल चलो अभियान (एक अप्रैल) से पहले किताबें विद्यालयों में उपलब्ध हों। ताकि पहले दिन से बच्चों की पढ़ाई शुरू हो सके। उन्होंने कहा कि स्कूल चलो अभियान का विस्तृत निर्देश जारी किया जा चुका है। इसके तहत बच्चों का नामांकन कराएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी छात्र ड्राप आउट न हो।

    अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि आरटीई में जिन बच्चों को दो चरणों में निजी विद्यालयों में सीट मिली है, उनका दाखिला सुनिश्चित कराया जाए। तीसरे चरण के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार कर ज्यादा से ज्यादा आवेदन कराए जाएं। सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालयों की गुणवत्ता व प्रगति सुनिश्चित की जाए। समग्र शिक्षा में केजीबीवी, सामुदायिक सहभागिता, कंपोजिट ग्रांट, विभिन्न निर्माण कार्य आदि में तेजी लाई जाए।

    उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल क्लास को प्रभावी बनाने के लिए बजट जारी किया गया है। इसका बेहतर रूप से संचालन कराया जाए। सामुदायिक सहभागिता के लिए विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों के सहयोग से प्रशिक्षण किया जाए। केजीबीवी के खाली कार्मिकों के पदों को जल्द भरा जाए। वहीं उनके यहां विभिन्न सुविधाओं के लिए जारी राशि का समय से पूरा प्रयोग किया जाए। माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रोजेक्ट अलंकार के लिए जारी राशि का समय से प्रयोग करें।

    जिन विद्यालयों को निपुण घोषित किया गया है। उनके लिए निपुण सम्मान समारोह आयोजित किया जाए। साथ ही अगले साल और अधिक विद्यालयों को निपुण बनाने के लिए प्रयास किए जाएं। बैठक में महानिदेशक स्कूल शिक्षा व बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे।