टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर दिखाया दम, केंद्र सरकार से पुराने कार्यरत शिक्षकों से टीईटी परीक्षा न लेने के साथ कानून बनाने की मांग की
05 अप्रैल 2026
नई दिल्ली: देशभर के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया। टीचर फेडरेशन आफ इंडिया (टीएफआइ) के नेतृत्व में आयोजित रैली में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों शिक्षक शामिल हुए। रैली में टीएफआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि यह फैसला देशभर के करीब 20 लाख शिक्षकों की आजीविका पर संकट खड़ा कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रभाव को खत्म करने के लिए कानून बनाया जाए और पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए।
रैली में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी शिक्षकों का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। दरअसल, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने के बाद वर्ष 2010 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी अनिवार्य किया गया था।
हालांकि, हाल में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी दो वर्षों के अंदर टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद केंद्र सरकार के विद्यालयों में 23 अगस्त, 2010 तथा विभिन्न राज्यों में वर्ष 2011 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी की अर्हता अनिवार्य की गई है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों को भी दो साल के अंदर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षक केंद्र सरकार से कानून बनाकर अनिवार्यता से राहत दिलाने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन में फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चन्द्र शर्मा आदि ने सरकार से शिक्षकों के हित में निर्णय लेने की मांग की।
शिक्षकों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पहले के शिक्षकों से भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ सैकड़ों शिक्षकों ने शनिवार को रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया।
विरोध प्रदर्शन भारतीय शिक्षक संघ के तत्वाधान में किया गया। भारतीय शिक्षक संघ के शिक्षकों ने कहा कि हमारी मांग है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त किया जाए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को आदेश दिया था कि आरटीआई 2009 अधिनियम लागू होने से पहले कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इसके खिलाफ बीते छह महीने से अधिक समय के दौरान शिक्षकों ने कई सांसद व केंद्रीय शिक्षा मंत्री व अन्यों से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर शिक्षकों के समर्थन में कानून बनाने की मांग की। इस संबंध में भारतीय शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री को शनिवार को पत्र भी लिखा।
उत्तर प्रदेश के एक लाख 87 हजार शिक्षक प्रभावित : उत्तर प्रदेश के कई शहरों से आए शिक्षकों ने कहा कि कोर्ट का फैसला व्यावहारिक नहीं है। इस फैसले से उत्तर प्रदेश के एक लाख 87 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया है। शिक्षकों ने इस फैसले को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि जिन शिक्षकों की उम्र अब 50 से 55 साल के बीच है और जिन्होंने 30-35 साल तक सेवा दी है। उनसे दोबारा इस तरह की परीक्षा देने की अपेक्षा करना गलत है। जैसे किसी पुलिस अधिकारी या जज से 20-30 साल बाद फिर से परीक्षा या शारीरिक परीक्षण नहीं लिया जाता, वैसे ही शिक्षकों के साथ भी ऐसा नहीं होना चाहिए।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों ने किया प्रदर्शन
नई दिल्ली। राजधानी के रामलीला मैदान में शनिवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ देशभर के 13 से अधिक राज्यों से पहुंचे हजारों शिक्षकों का आक्रोश फूट पड़ा। इस बड़े प्रदर्शन में शिक्षकों ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर पुराने शिक्षकों को राहत देने की मांग की।
प्रदर्शन करने आए शिक्षक "टीईटी अनिवार्यता वापस लो", "शिक्षकों के साथ अन्याय बंद करो" और "शिक्षक बचाओ, शिक्षा बचाओ" जैसे नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शनकारी शिक्षका सुनीता सिंह ने बताया कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक टीईटी पास करने का आदेश देना अनुचित है। ऐसा आदेश शिक्षकों के अनुभव और मेहनत का अपमान है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यह आंदोलन उनके सम्मान, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी।
सुबह से ही रामलीला मैदान के आसपास शिक्षकों की भारी भीड़ जुटने लगी थी, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े। देशभर से आए शिक्षक संगठनों ने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली का प्रदर्शन नहीं, बल्कि देशभर के शिक्षकों की आवाज है। शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज कर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली में गरजे
प्रयागराज। आठवीं तक के सरकारी स्कूलों में 2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ रामलीला मैदान नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित देशव्यापी प्रदर्शन में प्रयागराज से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने मुख्य
अतिथि सांसद जगदंबिका पाल के साथ मंच साझा किया और कहा कि लाखों शिक्षकों के सामने संकट आया है। इस संकट से लड़ने का काम टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ही करेगा। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के विनोद कुमार पांडेय आदि ने प्रदर्शन में भाग लिया।
यूपी के शिक्षकों ने दिल्ली में विरोध कर दिखाई ताकत
लखनऊ। देशभर के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विरोध में नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विरोध-प्रदर्शन किया। यूपी से भी बड़ी संख्या में शिक्षक पहुंचे और केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को कानून बनाकर रोकने की मांग की।
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के आह्वान पर देशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक रामलीला मैदान पहुंचे। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि वर्ष 2011 के पूर्व भर्ती हुए शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया जाना उचित नहीं है। तमाम शिक्षक रिटायर होने की कगार पर हैं और अब वह टीईटी पास करें तो उनकी नौकरी बचे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को केंद्र सरकार कानून बनाकर रोके, जिससे देश भर के 20 लाख और यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों के जीविकोपार्जन पर संकट न आए। उन्होंने कहा कि शिक्षक इसके विरोध में लगातार आंदोलन करते रहेंगे। शिक्षकों की रैली में सांसद जगदंबिका पाल भी मौजूद रहे और उन्होंने कहा कि वह शिक्षकों के साथ हैं।
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में ताकत दिखाएंगे देश भर के शिक्षक, केंद्र सरकार से राहत के लिए कानून बनाने की करेंगे मांग
03 अप्रैल 2026
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता किए जाने के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में देशभर के शिक्षक एकत्र हो रहे हैं। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले रामलीला मैदान में देशभर से लाखों शिक्षक एकजुट होकर अपनी ताकत का एहसास कराएंगे।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी करने की अनिवार्यता अन्यायपूर्ण है। जब यूपी में 27 जुलाई 2011 को टीईटी लागू किया गया है तो उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता लागू करने से शिक्षकों में काफी आक्रोश है। प्रदेश से एक लाख से अधिक शिक्षक रामलीला मैदान दिल्ली में पहुंच रहे हैं।
इस क्रम में गोरखपुर, कुशीनगर, उन्नाव समेत कई जिलों के शिक्षक आज बृहस्पतिवार को ही दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने निर्णय को पूर्व के प्रभाव से लागू करना, सही नहीं है। इससे देश भर के लाखों शिक्षकों की जीविका पर संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार इससे राहत देने के लिए कानून बनाए।
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को देश भर के शिक्षकों की महारैली
11 मार्च 2026
लखनऊ। देश भर के बेसिक शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में शिक्षकों की दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को महारैली होगी। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) ने मंगलवार को दिल्ली में बैठक कर इसकी घोषणा की।
टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हुई वार्ता में उन्होंने आश्वासन दिया था कि सभी शिक्षकों के सेवा में बने रहने के लिए टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए कानून बनाया जाएगा। किंतु अभी तक केंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इससे देश भर के शिक्षकों में काफी नाराजगी है।
इसके लिए वे चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। इस क्रम में दिल्ली में महारैली की जाएगी। बैठक में राममूर्ति ठाकुर, संजय सिंह, योगेश त्यागी, शिवशंकर पांडेय, विपिन प्रकाश शर्मा, राधेरमण त्रिपाठी, देवेंद्र श्रीवास्तव, केदार जैन, मनीष मिश्रा, वेद प्रकाश मिश्रा, रविंद्र राठौर, कल्पना राजौरिया आदि उपस्थित थे।