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Tuesday, August 22, 2119

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    Saturday, January 24, 2026

    माध्यमिक शिक्षा : गणतंत्र दिवस समारोह, 26 जनवरी 2026 को गरिमापूर्ण ढंग से मनाए जाने हेतु आदेश और निर्देश जारी

    माध्यमिक शिक्षा : गणतंत्र दिवस समारोह, 26 जनवरी 2026 को गरिमापूर्ण ढंग से मनाए जाने हेतु आदेश और निर्देश जारी 




    गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाए जाने हेतु उत्तर प्रदेश शासन का आदेश जारी, करें डाउनलोड




    यूपी प्रमाण पोर्टल पर कॉलेजों का रिपोर्ट कार्ड, हर महीने 44 मानकों की कसौटी पर कसेंगे, लापरवाह कॉलेजों के खिलाफ होगी कार्रवाई

    यूपी प्रमाण पोर्टल पर कॉलेजों का रिपोर्ट कार्ड, हर महीने 44 मानकों की कसौटी पर कसेंगे, लापरवाह कॉलेजों के खिलाफ होगी कार्रवाई


    लखनऊ। डिग्री कॉलेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा व उच्च स्तरीय शोध सुनिश्चित करने के लिए यूपी प्रमाण पोर्टल तैयार किया गया है। अब इस पोर्टल के माध्यम से डिग्री कॉलेजों की निगरानी होगी, उनका मूल्यांकन और रैंकिंग की जाएगी। 44 मानकों की कसौटी पर कॉलेजों को कसा जाएगा और फिर रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा। लापरवाह कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहली बार ऐसी व्यवस्था की जा रही है।


    राज्य स्तरीय क्वालिटी एश्योरेंस सेल (एसएलक्यूएसी) के माध्यम से इस पोर्टल पर नजर रखी जाएगी। सभी सरकारी व एडेड डिग्री कॉलेजों को इस पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। सभी डिग्री कॉलेज प्रमाण पोर्टल https://updcs.crispindia.net पर अपना पंजीकरण कराएंगे। जिस पर कॉलेज की पूरी प्रोफाइल के साथ साथ उनकी रैंकिंग भी प्रदर्शित होगी। 

    हर महीने कॉलेजों को 44 मानकों पर अपने प्रदर्शन की रिपोर्ट खुद भरनी होगी। छात्रों व शिक्षकों की बॉयोमीट्रिक उपस्थिति, इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल में पंजीकरण, एनआईआरएफ रैंकिंग, रिसर्च, रिसर्च प्रोजेक्ट, आईएसओ सर्टीफिकेशन, एल्युमिनाई एसोसिएशन, कितने छात्र अप्रेंटिशसिप कर रहे हैं, एकेडमिक कैलेंडर का पालन व वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन और स्वयं पोर्टल के माध्यम से छात्रों को कराए जा रहे ऑनलाइन पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी देनी होगी। 100 अंकों में कॉलेजों का मूल्यांकन किया जाएगा। हर तीन-तीन महीने पर इसका रिपोर्ट कार्ड जारी होगा। लापरवाह कॉलेजों पर कार्रवाई की जाएगी।


    अब ग्रीन कैंपस भी बनाना होगाः डिग्री कॉलेजों ने अपने यहां हरियाली बढ़ाने और ग्रीन कैंपस बनाने के लिए क्या पहल की इसके अंक भी शामिल किए गए हैं यानी कॉलेजों में पेड़-पौधे लगाने और हरा-भरा परिसर बनाने को भी इसके माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा। सभी कॉलेजों को इसके लिए तैयारी करनी होगी वरना वह रैंकिंग में फिसल जाएंगे। उन्हें अधिक से अधिक पौधे लगाने को प्रेरित किया जाएगा।


    साहित्यिक चोरी रोकने के लिए करेंगे उपाय
    शोध कार्यों व प्रोजेक्ट वर्क में साहित्यिक चोरी रोकने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं या नहीं यह भी बताना होगा। अगर वह साहित्यिक चोरी रोकने के लिए उपाय नहीं कर रहे तो आगे उन्हें इसका प्रयोग करना ही होगा। जिससे कॉलेजों के शोध कार्यों व प्रोजेक्ट वर्क में मौलिकता बढ़ेगी। अभी कॉलेजों में इस तरह के उपाय नहीं किए जा रहे। आगे करना होगा।

    ARP के चयन में कई जिले पिछड़े, शैक्षिक गुणवत्ता हो रही प्रभावित, देखें चयन में सबसे अच्छे और फिसड्डी जिलों के नाम

    ARP के चयन में कई जिले पिछड़े, शैक्षिक गुणवत्ता हो रही प्रभावित, देखें चयन में सबसे अच्छे और फिसड्डी जिलों के नाम 

    शिक्षकों को सहयोग और निपुण भारत मिशन को गति देने पर भी असर

    लखनऊ, गोंडा, गोरखपुर समेत एक दर्जन से अधिक जिलों में पद खाली


    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने, शिक्षकों को सहयोग और निपुण भारत मिशन को गति देने के उद्देश्य से एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) का चयन किया जाता है। यह चयन शिक्षकों के बीच से ही परीक्षा के माध्यम से होता है। हालांकि, इस वर्ष आधा सत्र बीत जाने के बावजूद कई जिलों में एआरपी के पद खाली हैं, जिससे शैक्षिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।


    लखनऊ, गोंडा, गोरखपुर जैसे एक दर्जन से अधिक जिलों में 40 फीसदी से अधिक एआरपी के पद खाली हैं। इससे विद्यालयों का पर्यवेक्षण और उनमें सुधार के कार्य बाधित हो रहे हैं। एआरपी के माध्यम से प्रेरणा एप से होने वाली निगरानी, शिक्षक-शिक्षण सामग्री के प्रदर्शन, दीक्षा एप का प्रचार-प्रसार और बच्चों को उपचारात्मक शिक्षण देने जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

    इसके अतिरिक्त शिक्षकों को शिक्षण विधियों में मदद करना, उनकी समस्याओं का समाधान, लर्निंग गैप को पूरा करना, डिजिटल संसाधनों का प्रचार, अभिभावकों व स्कूल प्रबंधन समितियों से सुझाव लेना, शैक्षिक वीडियो बनाना, कार्यशालाएं आयोजित करना व प्रशिक्षण देना भी इन रिक्तियों के कारण प्रभावित हो रहा है।


    चयन में दस अच्छे जिले
    कुछ जिलों ने एआरपी चयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। गौतमबुद्धनगर और कौशांबी में शत-प्रतिशत पद भरे हुए हैं। वहीं, बस्ती (95%), सिद्धार्थनगर (94%), बाराबंकी (93%), गाजियाबाद (92%), रामपुर और वाराणसी (91%), अंबेडकरनगर और फतेहपुर (90-90%) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में पद भरे गए हैं। बांदा, बागपत, उन्नाव, औरैया और देवरिया में भी एआरपी भ्रमण की स्थिति बेहतर पाई गई है।

    चयन में खराब दस जिले
    इसके विपरीत, कई जिले चयन में पिछड़ गए हैं। मथुरा में 62 फीसदी, हरदोई में 59 फीसदी, कासगंज में 57 फीसदी, मऊ में 52 फीसदी, गोंडा में 49 फीसदी, मेरठ में 48 फीसदी, बरेली में 45 फीसदी, तथा लखनऊ, गोरखपुर और हमीरपुर में 43 फीसदी एआरपी पद अभी भी खाली हैं। कानपुर, हापुड़ और फर्रुखाबाद में भी एआरपी भ्रमण की स्थिति अपेक्षाकृत खराब मिली है।

    अपर मुख्य सचिव ने जताई थी नाराजगी
    हाल ही में हुई एक समीक्षा बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने 10 फरवरी तक एआरपी चयन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उन्होंने शिक्षकों को एआरपी चयन के लिए अधिक से अधिक आवेदन करने हेतु प्रोत्साहित करने और अच्छा प्रदर्शन करने वाले एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर को सम्मानित करने पर भी जोर दिया।

    Friday, January 23, 2026

    छुट्टियों में नहीं हुआ तबादला तो बेसिक शिक्षक विरोध में जुटे, प्रादेशिक स्थानांतरण समिति का गठन कर सोशल मीडिया से लेकर ज्ञापन देने का चलाएंगे अभियान

    छुट्टियों में नहीं हुआ तबादला तो बेसिक शिक्षक विरोध में जुटे, प्रादेशिक स्थानांतरण समिति का गठन कर सोशल मीडिया से लेकर ज्ञापन देने का चलाएंगे अभियान


    लखनऊ। प्रदेश में इस साल जाड़े की छुट्टियों में जिले के अंदर और एक से दूसरे जिले में तबादला नहीं किया गया। इसे लेकर अब तक उम्मीद लगाए बेसिक के शिक्षक अब विरोध में जुट गए हैं। उन्होंने प्रादेशिक स्थानांतरण समिति का गठन करते हुए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। यह आंदोलन शुक्रवार से शुरू हो रहा है।


    शिक्षकों ने कहा कि विभाग ने पूर्व में जारी शासनादेश में खुद कहा है कि वह गर्मी व जाड़े की छुट्टियों में जिले के अंदर और एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादला करेगा। इसके बाद भी इस जाड़े की छुट्टियों में कोई प्रक्रिया नहीं की गई। जबकि शिक्षकों ने इसके लिए विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन भी दिया था। ऐसे में अब उनके सामने विरोध-प्रदर्शन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।


    प्रादेशिक स्थानांतरण समिति के राजीव गौड़ ने बताया कि तबादले के लिए चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत पहले चरण में शिक्षक 23 जनवरी को ट्वीटर व फेसबुक के माध्यम से डिजिटल अभियान चलाएंगे। दूसरे चरण में संबंधित अधिकारियों से संवाद और ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद भी मांग न पूरी हुई तो बेसिक शिक्षा मंत्री आवास व निदेशालय पर धरना दिया जाएगा।


    कैशलेस चिकित्सा की जल्द मिले सुविधाः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर की गई घोषणा के चार महीने बाद भी शिक्षकों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को कैशलेस चिकित्सा की सुविधा नहीं मिली है। इसे लेकर शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जताते हुए इसे जल्द लागू करने की मांग की है। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने इसके साथ ही शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता मामले में जल्द राहत देने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि इस पर अब तक कोई सकारात्मक निर्णय न होने से देश व प्रदेश के शिक्षकों में नाराजगी है।

    Thursday, January 22, 2026

    परिवार पर विपदा सदस्य की उम्र देखकर नहीं आती, अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को लचीला बनाएं – हाईकोर्ट

    परिवार पर विपदा सदस्य की उम्र देखकर नहीं आती, अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को लचीला बनाएं

    हाईकोर्ट ने कहा-परिवार आर्थिक तंगी में है तो केवल अधिक आयु के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य अचानक आए आर्थिक संकट से परिवार को उबारना है। परिवार पर विपदा सदस्य की उम्र देखकर नहीं आती है। भर्ती नियमों की कठोरता को इसके उद्देश्यों को विफल करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसकी नियुक्ति में आयु सीमा की बाधा को दूर करें और नियमों को लचीला बनाएं।

    यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की अनुकंपा नियुक्ति समिति की एकल पीठ के खिलाफ दायर विशेष अपील पर की। कोर्ट ने समिति को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता की आयु में छूट के अनुरोध पर एक महीने के भीतर विचार करे।

    प्रतिवादी/याची एन. शांगबनाबी देवी की बहन की 2015 में बीएचयू में सेवा के दौरान मौत हो गई थी। उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, जिसे विवि ने खारिज कर दिया। कहा कि उनकी आयु घटना के समय 37 वर्ष थी, जो ओबीसी श्रेणी के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा (33 वर्ष) से अधिक थी। इसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी तो एकल पीठ ने उनके पक्ष में आदेश दिया। 

    इस पर बीएचयू ने एकल पीठ के पांच फरवरी 2025 के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में विशेष अपील दायर की। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बीएचयू की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कार्यकारी परिषद ने केवल विधवाओं या तलाकशुदा महिलाओं को आयु में छूट देने का प्रस्ताव पारित किया है। कहा कि जब तक मूल अनुकंपा नियमों में संशोधन नहीं होता, तब तक ऐसे प्रशासनिक प्रस्ताव किसी अन्य आश्रित (जैसे वहन) के अधिकार को कम नहीं कर सकते। 

    कोर्ट ने कहा कि परिवार वास्तव में आर्थिक तंगी में है तो केवल अधिक आयु के आधार पर उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। मुकदमेबाजी के दौरान हुई देरी को भी नजरअंदाज करने का निर्देश दिया है।





    बीएचयू को याची की नियुक्ति के संबंध में विचार कर एक महीने में निर्णय लेने का निर्देश

    भर्ती नियमों के तहत सीमित नहीं की जा सकती अनुकंपा नियुक्ति – हाईकोर्ट 


    प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति सामान्य भर्ती प्रक्रिया का अपवाद है और इसे भर्ती नियमों से आच्छादित मानकर अस्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह तथा न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने सुश्री नामीराकपन शांगबनाश्री देवी की नियुक्ति मामले में विचार करने संबंधी एकलपीठ के आदेश के खिलाफ दायर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) वाराणसी की विशेष अपील निस्तारित करते हुए यह टिप्पणी की है।

    कोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए मूल याची के दावे पर विचार करने से पहले देरी के मुद्दे की जांच करना आवश्यक है। कोर्ट ने बीएचयू की अनुकंपा नियुक्ति समिति को निर्देश दिया है कि वह पहले मूल याची की उम्र में छूट के अनुरोध पर विचार करे, वह भर्ती नियमों के अनुसार नहीं, बल्कि अनुकंपा नियमों के अनुसार। इसके बाद उसके दावे पर विचार किया जाए, जिसमें पारिवारिक सदस्यों की निर्भरता, वित्तीय कठिनाई और अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों को ध्यान रखा जाए। यह निर्णय एक महीने में के भीतर करने का निर्देश दिया गया है।

    कोर्ट ने कहा है कि भर्ती नियम संविधान के अनुच्छेद 16 की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हैं, जबकि अनुकंपा नियुक्ति नियम इसके अपवाद हैं और इनका उद्देश्य वित्तीय संकट में आए पीड़ित परिवार को तात्कालिक सहायता प्रदान करना है। अनुकंपा नियुक्ति नियमों को भर्ती नियमों के तहत सीमित नहीं किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई आवेदक भर्ती नियमों की कुछ शर्तों को पूरा नहीं करता है तो भी उसकी अनुकंपा नियुक्ति के लिए बिचार किया जा सकता है बशर्ते उसके परिवार को सहायता मिलती हो। 

    हाई कोर्ट की एकलपीठ के पांच फरवरी 2025 के उस आदेश को इस अपील में चुनौती दी गई थी, जिसमें बीएचयू का नौ मार्च 2018 का अनुकंपा नियुक्ति देने से इन्कार करने वाला आदेश रद कर दिया गया था। एकल न्यायाधीश ने यह भी कहा था कि भर्ती नियम अनुकंपा नियुक्ति पर लागू नहीं होते। विश्वविद्यालय का तर्क था कि अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में भर्ती नियमों के अनुसार पात्रता शर्तें शामिल हैं। मृतक की बहन की उम्र 37 वर्ष थी, जो अधिकतम आयु सीमा से चार वर्ष अधिक है। 

    यूनिवर्सिटी के कार्यकारी परिषद ने एक अन्य मामले में फैसला दिया था कि उम्र में छूट भर्ती नियमों के अनुसार ही दी जाएगी। याची की तरफ से कहा गया है कि अनुकंपा नियमों में उम्र में छूट का प्रविधान है और कार्यकारणी परिषद का फैसला इन नियमों को ओवरराइड नहीं कर सकता। भर्ती नियम केवल अन्य पात्रता शर्तों पर लागू होते हैं, न कि उम्र पर।

    अटल आवासीय विद्यालय के छात्रों को भी मिलेगा कौशल प्रशिक्षण, 18 आवासीय विद्यालयों के 9 से 11 के छात्रों को मिलेगा लाभ

    अटल आवासीय विद्यालय के छात्रों को भी मिलेगा कौशल प्रशिक्षण, 18 आवासीय विद्यालयों के 9 से 11 के छात्रों को मिलेगा लाभ

    कौशल विकास मिशन की बैठक में लिया गया निर्णय


    लखनऊ। प्रदेश में प्रोजेक्ट प्रवीण का विस्तार करते हुए अब अटल आवासीय विद्यालयों के छात्रों को भी कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। कौशल विकास मिशन की बुधवार को हुई बैठक में तय किया गया कि अटल आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक व कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।


    इस नई पहल के तहत सभी 18 अटल आवासीय विद्यालयों के कक्षा 9, 10 और 11 के छात्रों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य सेवा, ब्यूटी एवं वेलनेस, फूड प्रोसेसिंग, आईटी एवं आईटीईएस और परिधान क्षेत्र में दिया जाएगा। हर कक्षा के 140 छात्रों का सर्वे किया जाएगा। ताकि वे अपनी पसंद के ट्रेड का चयन कर सकें। इससे उन्हें व्यक्तिगत और भविष्य की जरूरत के अनुरूप कौशल विकास का रास्ता मिलेगा। 


    मिशन निदेशक पुलकित खरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रशिक्षण की कार्य योजना, पाठ्यक्रम, प्रशिक्षकों की उपलब्धता व प्रशिक्षण की गुणवत्ता मानकों पर चर्चा की गई। बैठक में पूजा यादव, अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह, संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार आदि उपस्थित थे। 

    विवाहित पुत्री भी मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पाने की हकदारः हाईकोर्ट

    विवाहित पुत्री भी मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पाने की हकदारः हाईकोर्ट

    कोर्ट ने सिद्धार्थनगर के बीएसए को दो माह में आदेश पारित करने का दिया निर्देश


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि विवाहित पुत्री भी नियुक्ति पाने की पात्र है। कोर्ट ने सिद्धार्थनगर के बीएसए को निर्देश दिया है कि वह परिवार की आर्थिक स्थिति और आश्रितों की संख्या को ध्यान में रखते हुए दो माह में निर्णय लेकर आदेश पारित करें। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने नीतू अनिता देवी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।


    अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के पिता सिद्धार्थनगर के इटवा गौरा में प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान आठ जनवरी 2020 को उनका निधन हो गया। परिवार में केवल बेटी थी, जिसने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति के लिए आवेदन किया। निर्णय न होने पर याची ने हाईकोर्ट में अपील की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने पहले ही बीएसए को आदेश पारित करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बाद बीएसए ने यह कहते हुए नियुक्ति से इन्कार कर दिया कि विवाहित पुत्री परिवार की सदस्य नहीं है।

    इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याची ने दलील दी कि विमला श्रीवास्तव सहित कई मामलों में हाईकोर्ट पहले ही विवाहिता बेटी को परिवार का सदस्य मान चुका है। साथ ही 12 नवंबर 2021 की अधिसूचना के जरिये सरकार ने नियमावली से अविवाहित शब्द हटा दिया है। कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को दो माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।

    Wednesday, January 21, 2026

    जूनियर एडेड प्रधानाध्यापक भर्ती में अनुभव प्रमाणपत्र से छूट की मांग को लेकर अभ्यर्थियों में बने दो गुट

    जूनियर एडेड प्रधानाध्यापक भर्ती में अनुभव प्रमाणपत्र से छूट की मांग को लेकर अभ्यर्थियों में बने दो गुट

    प्रयागराजअशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूल की वर्ष 2021 की शिक्षक भर्ती में प्रधानाध्यापक पद के अनुभव प्रमाणपत्र को लेकर अभ्यर्थियों में दो गुट बन गए हैं। कटआफ सूची में रिक्त पदों के सापेक्ष जारी क्रमांक में ऊपरी क्रम के अभ्यर्थी विद्यालय द्वारा अनुमोदन नहीं लिए जाने के कारण अनुभव प्रमाणपत्र से राहत की मांग कर रहे हैं तो नीचे क्रम के अभ्यर्थी अनुभव प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को सही बता रहे हैं। 

    प्रधानाध्यापक के 253 पदों पर चयन के लिए काउंसलिंग कराई जा चुकी है, जिसमें करीब 100 अभ्यर्थियों ने बीएसए द्वारा जारी अनुभव प्रमाणपत्र लगाए हैं। इसके आधार पर चयन किए जाने पर शेष बचे पदों के लिए द्वितीय काउंसलिंग में निचले क्रम के अनुभव प्रमाणपत्रधारी अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने की उम्मीद है।

    प्रधानाध्यापक पद के लिए 15, 16, 17 व 19 जनवरी को काउंसलिंग कराई गई। 253 पदों के सापेक्ष 506 अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था। ज्यादा संख्या में अभ्यर्थियों ने अनुभव प्रमाणपत्र नहीं लगाए गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन का अनुमोदन कराने की जिम्मेदारी संबंधित वित्तविहीन विद्यालयों की थी, लेकिन न तो विद्यालयों ने ध्यान दिया और न ही विभाग और शासन ने। 

    ऐसे में पांच वर्ष से ज्यादा समय तक वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ाने वालों की कोई गलती नहीं है। कुछ ऐसे वित्तविहीन विद्यालय हैं, जिन्होने विज्ञापन जारी कर आवेदन लेकर चयन प्रक्रिया पूरी की और उसका अनुमोदन बीएसए से कराया, जिसके कारण उन्हें अनुभव प्रमाणपत्र जारी किया गया है। अभ्यर्थियों का दावा है कि करीब 100 अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग के समय अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए हैं। ऐसे में मांग की गई है कि रिक्त रह जाने वाले पदों पर नियुक्ति के लिए नीचे के क्रम के अनुभव प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों का चयन काउंसलिंग के माध्यम से किया जाए।



    एडेड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती में विवाद, विशेष वर्गों में आरक्षण की अनदेखी पर हाईकोर्ट पहुंचे बेरोजगार

    2021 की जानेयर एडेड शिक्षक भर्ती में क्षैतिज आरक्षण का पालन न करने से नाराज

    शिक्षा निदेशालय में अफर शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन

    प्रयागराज । सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1262 पदों पर भर्ती में आरक्षण की अनदेखी के खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों के 1262 पदों में से 1051 पद (83 फीसदी) अनारक्षित वर्ग के है। 115 पद ओबीसी और 96 एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 

    भूतपूर्व सैनिक नागेन्द्र पांडेय और 17 अन्य की ओर से दायर याचिका में 12 जनवरी को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का समय देते हुए, 27 जनवरी को अगली सुनवाई की तारीख तय की है। ओबीसी, एससी के साथ ही विशेष आरक्षण वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके साथ अन्याय हुआ है।

    इंडब्ल्यूएस, एसटी और क्षैतिज आरक्षण (पूर्व सैनिक, दिव्यांग एवं स्वतंत्रता सेनानी आश्रित) का आरक्षण एकदम शून्य घोषित कर दिया गया है। वहीं ओबीसी और अनुसूचित जातियों का आरक्षण एकदम कम दिखाया जा रहा है। अफसरों का तर्क है कि स्कूल को इकाई मानने के कारण कई वर्गों का आरक्षण नहीं मिल पा रहा है वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में भी स्कूल को इकाई मानने के बावजूद सभी वर्ग को आरक्षण मिलता है। 

    जब एक ही माध्यमिक शिक्षा विभाग में कक्षा नौ से 12 तक के स्कूलों में आरक्षण नियमों का पालन हो रहा है तो बेसिक शिक्षा विभाग के एडेड जूनियर हाईस्कूलों में आरक्षण की अनदेखी समझ से परे है। 19 सितंबर को जारी संयुक्त सचिव के आदेश में भी वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही आरक्षण देने की बात कही गई थी।


    भूतपूर्व सैनिकों व स्वतंत्रता सेनानी आश्रितों ने मांगा शिक्षक भर्ती में आरक्षण

    प्रयागराज ।  जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती-2021 में सैन्ज अरक्ष्य नहीं देर जाने से भूतपूर्व सैनिक, स्वत्त्रत संग्राम सेनानी के अश्रिले व दिव्यांग अभ्यर्थियों का आरक्षण शून्य हो गय है। भर्ती के लिए जाउसलिंग प्रक्रिन्य चल रही है, लेकिन क्षैतिज आरक्षन के मन्कों का पालन की किए जाने लाभ से बचेत अभ्यर्थियों ने सेम्बर ओ शक्ष निदेशालय प्रयागरज में अपर शेक्ष निदेशक (बेसिक) के कार्यात्रय ने बाहर प्रदर्शन कर मोर की कि क्षैतिज आरक्षन का उन्हें भी लाम देया जाए।

    नेदेशल्य में प्रदर्शन जरने पहुंचे रहुल पासवान, पूर्व सैनेक विजय शंकर नष्डेय, पूर्व सैन्कि कृष्ण रजभर, सुनीता यादव, प्रियंका पुरवर, उपेंद्र सिंह, पूर्णिमा चौरसिय, शिकुमार आदि ने अरो लगया कि इस भर्ती में अरक्षण नियमों को अवहेलना में गई है। इस भर्ती में सहायक अध्यापक के कुल 1362 पद दिए जा रहे हैं। इसमें ऊर्जाकार (बर्टकल) आरक्षण में अनारक्षिर के 1051 पद, 115 ओबेंसी, इन्ची के 95 पद सृजित है, जबकि टी व इंडज्यूएस के न्द शून्य हो ग हैं इसके अलब क्षैरिज (होरेजेंटल) आरक्षण के ननक का पालन नहीं किए जाने से भूतपूर्व सैनिक, स्वतंत्रता संग्राम सेनन के अधित्व दिल्यांग के पद शून्य हे गए है इसके विपरीत वर्तमान अरक्षण नियनों के अनुसार क्षेतेज आरक्षण में भूतपूर्व सैनिक के पांच प्रतिशत आरक्षण के अनुपात में भूतपूर्व सैनिक के 53 नद. स्वतंत्रता संगमनाने के आश्रितों में 25 पद तथ देयांन के चार प्रतिश्त आरक्षण के अनुपात में 50 पद होने चाहिए। अभ्यर्देयों ने आरक्षण में नियनानुसार नेर्धारित हेने वाले पदों के विवरन के साथ पंचायते राज था अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर को में नत्र भेजकर अनुन्य आरक्षण देलार जाने के मंर को है। नामले पर जूनैयर एडेड शिक्षक भर्ती संघ के प्रदेश अब्यअ नगेंद्र पाप्डेय ने कहा कि आरक्षण निर्धारण में नियमों की अनदेखी कर अभ्यर्थियों के साथ अन्याय क्रिय ग्या है। उन्होंने आरक्षण क निर्धारण न हिरे से कर न्याय दिलाए जाने के मांग की है

    शिक्षा निदेशालय में पीड़ितों ने किया प्रदर्शन

    एडेड जूनियर शिक्षक भर्ती में आरक्षण की अनदेखी पर पीड़ित अभ्यर्थियों ने सोमवार को शिक्षा निदेशालय में अपर शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर नियमानुसार आरक्षण देने की मांग की। कृष्णा कुमार राजभर, जितेन्द्र कुमार शुक्ला, राहुल, पूर्णिमा चौरसिया, विजय सिंह यादव, रोमन कुमार, कृपा शंकर, विपिन कुमार आदि ने चेतावनी दी कि नियमानुसार आरक्षण मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


    अनुभव प्रमाणपत्र के लिए सीएम से लगाई गुहार

    प्रयागराज। जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती 2021 के तहत प्रधानाध्यापक के 253 पदो पर नियुक्ति में अनुभव प्रमाणपत्र का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया है। अभ्यर्थी ज्ञानवेन्द्र सिंह बंटी ने सोमवार को मुख्यमंत्री से लखनऊ में मुलाकात कर समस्या बताई। कहा कि लगभग 99 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने वित्तविहीन विद्यालय में पांच साल या अधिक वर्ष तक सहायक अध्यापक के रूप में शिक्षण कार्य किया है और वे प्रधानाध्यापक पद के लिए अनुभव की योग्यता रखते हैं। अब जब इस भर्ती की काउंसिलिंग कराई जा रही है तब कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारी यह कहते हुए अनुभव प्रमाणपत्र निरस्त कर रहे है कि उस पद के सापेक्ष अनुमोदन नहीं लिया गया था। 

    यह तब है जबकि अभ्यर्थियों का नाम यू-डायस पोर्टल पर पांच साल या अधिक समय से मौजूद है। सभी योग्यता पूरी करने के बावजूद हमारे अनुभव प्रमाणपत्र पर संकट मंडरा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने यूपी में जुलाई 2011 में आरटीई लागू होने के 14 साल में कभी अनुमोदन नहीं दिया और अब परेशान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

    यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों के शैक्षिक विवरण की त्रुटि में संशोधन का अंतिम अवसर, संशोधन के लिए साक्ष्य के साथ क्षेत्रीय कार्यालय को 31 जनवरी तक आवेदन भेजने के निर्देश

    2026 में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को यूपी बोर्ड ने शैक्षिक प्रपत्रों में सुधार का दिया आखिरी मौका

    लखनऊ। यूपी बोर्ड की परीक्षा 2026 में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को बोर्ड ने शैक्षिक प्रपत्रों में सुधार का आखिरी मौका दिया है। इस अवसर के अन्तर्गत छात्र-छात्राएं नाम, जन्मतिथि, माता पिता के नाम में संशोधन करा सकेंगे। जेंडर व जाति में यदि कोई गलती की आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को पत्र जारी किया है। इसमें 25 जनवरी तक सभी स्कूलों प्रधानाचार्यों को डीआईओएस कार्यालय में छात्र का शुद्ध आवेदन पत्र जमा कराना होगा।

    माध्यमिक शिक्षा परिषद से पत्र जारी होने के डीआईओएस ने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्य को पत्र भेजते हुए तय तिथि में कार्यालय को आवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं करने पर स्कूल और छात्र अपने गलत शैक्षिक प्रपत्र के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे।



    यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों के शैक्षिक विवरण की त्रुटि में संशोधन का अंतिम अवसर, संशोधन के लिए साक्ष्य के साथ क्षेत्रीय कार्यालय को 31 जनवरी तक आवेदन भेजने के निर्देश

    प्रयागराज । हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में सम्मिलित होने वाले परीक्षार्थियों के विवरण बार-बार पोर्टल खोलने के बाद भी संशोधित नहीं किए जाने पर बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने नाराजगी जताई है। साथ ही परीक्षार्थियों के हित में उनके विवरण में संशोधन का अंतिम अवसर दिया है। जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे संशोधन संबंधी सभी आवश्यक प्रपत्र के साथ प्रधानाचार्य से 25 जनवरी तक आवेदनपत्र लेकर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को 31 जनवरी तक भेजना सुनिश्चित करें, ताकि संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

    बोर्ड सचिव ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे पत्र में कहा है कि कई जनपदों से प्रधानाचार्य एवं परीक्षार्थियों ने जानकारी दी है कि उनके कई विवरण में त्रुटियां संशोधित नहीं हुई हैं। इससे स्पष्ट है कि कुछ प्रधानाचार्यों ने अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरतते हुए अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया, जिसके कारण परीक्षार्थियों को परेशानी हो रही है। 


    अब अंतिम अवसर देते हुए सचिव ने भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि शैक्षिक विवरण में किस-किस स्तर की त्रुटियां ठीक की जाएंगी। इनमें विद्यार्थी का विवरण रिस्टोर किया जाएगा, विद्यार्थी का विवरण डिलीट किया जाएगा, उनके नाम अथवा माता-पिता के नाम में वर्तनी त्रुटि ठीक की जा सकेगी। साथ ही विषय वर्ग में संशोधन, विद्यार्थी की जन्मतिथि, जेंडर एवं जाति में संशोधन किया जा सकेगा, लेकिन संशोधन के संबंध में साक्ष्य अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने होंगे। संशोधन के लिए आवश्यक प्रपत्र संलग्न कर उसका भलीभांति परीक्षण करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक अपनी संस्तुति के साथ आवेदन पत्र क्षेत्रीय कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर 25 जनवरी के बाद प्राप्त आवेदन पत्र मान्य नहीं किए जाएंगे।


    Tuesday, January 20, 2026

    यूपी : समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सर्वोदय विद्यालयों में प्रवेश के लिए 20 फरवरी तक मांगे गए आवेदन

    यूपी : समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सर्वोदय विद्यालयों में प्रवेश के लिए 20 फरवरी तक मांगे गए आवेदन


    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के प्रदेश में चल रहे 103 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होगी। इसके तहत कक्षा 6, 7, 8 और 9 की खाली सीटों पर अभ्यर्थियों का चयन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। इच्छुक अभ्यर्थी 20 फरवरी तक https://ats.upsdc.gov.in वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।


    समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह ने परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है। कक्षा 6 से 9 तक की प्रवेश परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड 10 मार्च को जारी किए जाएंगे। वहीं, प्रवेश परीक्षा का आयोजन 15 मार्च को किया जाएगा, जबकि परीक्षा परिणाम 23 मार्च को घोषित किया जाएगा। इसी के साथ प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

     उप निदेशक जे राम ने बताया कि सर्वोदय विद्यालयों से निकलने वाले विद्यार्थी शिक्षा, खेल और विभिन्न प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदेश भर में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र-छात्राओं के लिए कक्षा 6 से 12 तक आवासीय सुविधा से युक्त 103 सर्वोदय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में गुणवत्तापरक शिक्षा के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क कोचिंग की सुविधा भी दी जाती है। 


    ये हैं पात्रता की शर्तेंः प्रवेश के लिए वही अभ्यर्थी पात्र होंगे, जो उत्तर प्रदेश के निवासी हों और जिनके परिवार की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्रों में 46080 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 56460 रुपये से अधिक न हो। प्रवेश प्रक्रिया में 60 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, 25 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग और 15 प्रतिशत सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होंगी। 

    मान्यता न होना किसी मदरसे को बंद करने का आधार नहीं : हाईकोर्ट, श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घंटे में हटाने के आदेश, देखें हाईकोर्ट ऑर्डर

    मान्यता न होना किसी मदरसे को बंद करने का आधार नहीं : हाईकोर्ट

    श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घंटे में हटाने के आदेश, देखें हाईकोर्ट ऑर्डर


    लखनऊइलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बिना मान्यता संचालित मदरसों को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ मान्यता न होने के आधार पर किसी मदरसे को बंद करने का कोई वैधानिक प्रविधान नहीं है। इसी के साथ न्यायालय ने श्रावस्ती के मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रजा पर लगी सील को 24 घंटे में हटाने का आदेश भी दिया है।

    यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने उक्त मदरसा प्रबंधन की याचिका पर दिया। याचिका में श्रावस्ती के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के एक मई 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उन्होंने मदरसा को बंद करने का आदेश दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि बिना मान्यता के मदरसा चलने से विद्यार्थियों को भविष्य में शैक्षिक लाभ मिलने में कठिनाई हो सकती है। 

    हालांकि न्यायालय ने कहा कि संबंधित नियमावली में ऐसा कोई प्रविधान नहीं है, जिसके तहत केवल मान्यता के अभाव में मदरसे का संचालन रोका जा सके। न्यायालय ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का मदरसा बंद करने का आदेश निरस्त कर दिया। 

    हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक मदरसे को मान्यता  प्राप्त नहीं होगी, तब तक वह किसी भी प्रकार की सरकारी अनुदान राशि का दावा नहीं कर सकेगा और न ही मदरसा शिक्षा बोर्ड उसके छात्रों को बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के लिए बाध्य होगा। इसके साथ ही ऐसे मदरसे से प्राप्त योग्यता का उपयोग राज्य सरकार से संबंधित किसी भी लाभ के लिए नहीं किया जा सकेगा।

    देखें हाईकोर्ट ऑर्डर 👇 

    प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन 3.0 पर आगे की कार्यवाही पर 2 फरवरी तक रोक बढ़ी, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया जवाब दाखिल करने का समय

    प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन 3.0 पर आगे की कार्यवाही पर 2 फरवरी तक रोक बढ़ी, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया जवाब दाखिल करने का समय

    प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया आदेश

    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में आगे किसी भी प्रकार की कार्यवाही। पर लगी रोक को 19 जनवरी से बढ़ाकर 2 फरवरी तक कर दिया है। साथ ही राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है।

    याची शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता मीनाक्षी सिंह परिहार ने बताया कि कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 फरवरी को निर्धारित करते हुए अंतरिम आदेश दिया है कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 के संबंध में आगे की कार्यवाही नहीं करेंगे। 

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश का लाभ इस याचिका से संबद्ध अन्य याचिकाओं के याची शिक्षकों को भी मिलेगा। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया है। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश बाराबंकी की संगीता पाल सहित 29 प्राथमिक शिक्षकों द्वारा दाखिल याचिका पर पारित किया।

    याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण संबंधी शासनादेश को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई है। याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने नियम 21 का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षक की सहमति के बिना समायोजन नहीं किया जा सकता। मामले में राज्य सरकार की ओर से भी अधिवक्ता उपस्थित हुए। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक याचियों को मिली अंतरिम राहत को बढ़ाते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है। 



    मध्य सत्र में बेसिक शिक्षकों के समायोजन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

    प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार से प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और सहायक अध्यापकों का मध्य सत्र में स्थानांतरण और समायोजन करने के मामले में जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि इस दौरान अध्यापकों के विरुद्ध कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अरुण प्रताप व 37 अन्य अध्यापकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 

    कोर्ट ने जवाब के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। याचिका के अनुसार याची चित्रकूट के प्राथमिक विद्यालयों में हेड मास्टर और सहायक अध्यापक हैं। उन्हें उन विद्यालयों में समायोजित किया जा रहा है, जहां या कोई अध्यापक नहीं है या फिर बंद हो चुके हैं। याचियों का कहना है कि मध्य सत्र में समायोजन का कोई औचित्य नहीं है जबकि सत्र अप्रैल में प्रारंभ होता है। यह यूपी आरटीई एक्ट 2011 के नियम 21 का उल्लंघन भी है। याचियों को शीघ्र पदन करने का निर्देश दिया गया है।


    अमेठी, बाराबंकी और श्रावस्ती में भी समायोजन 3.0 पर लगी रोक, पुरानी  याचिकाओं के साथ कनेक्ट करते हुए 19 जनवरी को होगी अगली सुनवाई, देखें कोर्ट ऑर्डर 





    शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक अंतरिम रोक

    लखनऊ । हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में समायोजन के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए याची शिक्षकों के समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा है कि 19 जनवरी को वह मामले पर अंतिम सुनवाई करेगी।

    यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने शिक्षकों की ओर से दाखिल 12 अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया है। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि याची शिक्षकों के संबंध में कोई अग्रिम कार्यवाही न की जाए। याचिकाओं में तीसरे चरण के समायोजन में नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है।

    कहा गया है कि पहले चरण के समायोजन में विभिन्न जिलों के तमाम स्कूल एकल हो गए थे, उसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन तो हुआ लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हो सकी तथा मनमाने तरीके से कुछ जिलों में वरिष्ठ तो कुछ में कनिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया।



    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन 3.0 में आगे की कार्यवाही पर 19 तक हाईकोर्ट की रोक, अगली सुनवाई 19 जनवरी को, देखें कोर्ट ऑर्डर 

    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में किसी भी आगे की कार्रवाई पर 19 जनवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी निर्धारित की और अंतरिम आदेश दिया कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 मामले में कोई कदम नहीं उठाएंगे।

    कोर्ट ने यह अंतरिम राहत इस याचिका से जुड़ी 11 अन्य याचिकाओं के याचियों को भी उपलब्ध कराई है। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3.0 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने बाराबंकी की संगीता पाल समेत 29 शिक्षकों की याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी समायोजन/स्थानांतरण के शासनादेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

    याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने कहा कि यह शासनादेश आरटीई अधिनियम और बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1981 के नियमों का उल्लंघन करता है। नियम 21 के तहत शिक्षक की सहमति के बिना उन्हें समायोजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस समायोजन से शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही है और अन्य विसंगतियां भी उत्पन्न हो रही हैं। 



    Monday, January 19, 2026

    छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखेंगे शिक्षण संस्थान, यूजीसी ने बनाई नीति, संस्थानों में होगा मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र

    छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखेंगे शिक्षण संस्थान, यूजीसी ने बनाई नीति, संस्थानों में होगा मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र

    इन केंद्रों में तैनात होंगे प्रोफेशनल विशेषज्ञ सौ छात्रों पर एक सहायक छात्र की तैनाती


    नई दिल्ली: उच्च शिक्षण संस्थान अब छात्रों की पढ़ाई के साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी परखेंगे। किसी छात्र की मानसिक स्थिति ठीक नहीं दिखी तो तुरंत इसे संस्थान में स्थापित मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र में भेंजेंगे, जहां पेशेवर विशेषज्ञ जांच व उपचार करेंगे। इसके लिए देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र स्थापित करने के लिए कहा गया है।


    संस्थानों में छात्रों के आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं व मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में वृद्धि को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एकीकृत नीति तैयार की है। पिछले दिनों यूजीसी बोर्ड ने इसे मंजूरी दे दी। नीति के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र बनाना होगा। इनमें प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को तैनात करने होंगे। प्रत्येक पांच सौ छात्रों पर एक वरिष्ठ शिक्षक को बतौर

    मॅटर एवं प्रत्येक सौ छात्रों पर एक सहायक छात्र की तैनाती करने को कहा है। यूजीसी ने संस्थानों को एक हेल्पलाइन नंबर भी स्थापित करने को कहा है। जहां छात्रों को चौबीसो घंटे मदद मिल सके। यूजीसी ने आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए संस्थानों को कार्ययोजना भी बनाने को कहा है। जिसमें अवसाद में दिखने पर या उससे ग्रसित होने की सूचना पर तुरंत प्रभावी कदम उठाए जा सकें। संस्थान के कर्मचारियों, शिक्षकों और छात्रों को प्रशिक्षित करने के भी सुझाव दिए हैं। यूजीसी ने संस्थानों को नीति पर तुरंत अमल करने एवं उससे जुड़े सुझाव देने को कहा है।


    इसलिए कदम उठाने की पड़ी आवश्यकता

    देश में 10.6% लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित

    18 से 29 वर्ष के 7.3% युवा गंभीर समस्या से घिरे

    देश में आत्महत्याओं में 7.6 प्रतिशत मामले छात्रों से जुड़े

    Sunday, January 18, 2026

    AD बेसिक के खिलाफ महिला आयोग पहुंची निलंबित BEO, जानिए पूरा मामला

    AD बेसिक के खिलाफ महिला आयोग पहुंची निलंबित BEO,  जानिए पूरा मामला 

    दो कार्यक्रम एक में ही मर्ज करने के आरोप में सस्पेंड हैं वंदना सैनी

    मुरादाबाद । डॉ. वंदना सैनी BEO ने एडी बेसिक की महिला आयोग में शिकायत की है। मुरादाबाद नगर क्षेत्र में खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात रही BEO डॉ.वंदना सैनी ने मुरादाबाद के पूर्व बीएसए और वर्तमान में मुरादाबाद मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक (AD) बुद्ध प्रिय सिंह पर उत्पीड़न समेत गंभीर आरोप लगाते हुए महिला आयोग में शिकायत की है।

    महिला अधिकारी की शिकायत पर महिला आयोग ने मुरादाबाद पुलिस से 8 दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। सिविल लाइंस सर्किल के सीओ पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं। महिला अधिकारी ने अपनी शिकायत में विभागीय भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाते हुए साक्ष्य संलग्न करने का भी दावा किया है। फिलहाल महिला अधिकारी की शिकायत के बाद से विभाग में खलबली मची है। 

    बुद्ध प्रिय मुरादाबाद में लंबे समय से तैनात महिला अधिकारी ने जिस अधिकारी पर आरोप लगाए हैं वो (AD बेसिक) मुरादाबाद में लंबे समय से तैनात हैं। बुद्ध प्रिय सिंह करीब 3 साल तक मुरादाबाद जिले के बीएसए रहे। इसके बाद प्रमोट होकर यहीं पर सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) बन गए। एडी बेसिक होने के साथ-साथ उन पर मुरादाबाद और संभल जिले के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डॉयट) का भी चार्ज है।


    2 प्रोग्राम एक में ही मर्ज करने के आरोप में सस्पेंड हैं वंदना सैनी

    वहीं आरोप लगाने वाली डॉ. वंदना सैनी भी मुरादाबाद नगर क्षेत्र में बीईओ रही हैं। उन दिनों बुद्ध प्रिय सिंह मुरादाबाद के बीएसए हुआ करते थे। पिछले दिनों वंदना सैनी को बुद्ध प्रिय की एक रिपोर्ट पर सस्पेंड किया गया है। जिसमें वंदना पर आरोप था कि उन्होंने दो सरकारी आयोजन एक ही समय में कर दिए और भुगतान दो अलग-अलग आयोजनों का प्राप्त कर लिया।

    एडी बेसिक बोले- आरोप सरासर बेबुनियाद वंदना सैनी के आरोपों पर एडी बेसिक बुद्ध प्रिय सिंह ने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप सरासर बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि वंदना सैनी को उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबित किया गया है। इसलिए वंदना सैनी उनके ऊपर झूठे आरोप लगा रही हैं।


    महिला आयोग को भेजी गई शिकायत के प्रमुख अंश

    चार महीने में कालेजों-विश्वविद्यालयों में भरें टीचिंग और नान टीचिंग के सभी खाली पद – सुप्रीम कोर्ट

    चार महीने में कालेजों-विश्वविद्यालयों में भरें टीचिंग और नान टीचिंग के सभी खाली पद – सुप्रीम कोर्ट

    इसमें वंचित वर्ग, दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित पदों को प्राथमिकता दी जाए

    छात्र को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाना चाहिए

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपरिहार्य प्रशासनिक विलंब के मामलों में भी उच्च शिक्षण संस्थानों को नीतिगत रूप से छात्रवृत्ति प्राप्तकर्ताओं को उनके पैसे के भुगतान या निपटान के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराना चाहिए। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाना चाहिए, छात्रावास से नहीं निकाला जाना चाहिए, कक्षाओं में भाग लेने से नहीं रोका जाना चाहिए या छात्रवृत्ति के वितरण में देरी के कारण उनकी मार्कशीट और डिग्री को रोककर नहीं रखा जाना चाहिए। ऐसी किसी भी संस्थागत नीति की सख्ती से जांच की जानी चाहिए।


    नई दिल्ली: उच्च शिक्षण संस्थानों, कालेजों, विश्वविद्यालयों में खाली पड़े पदों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने तय समय में खाली पदों को भरने का आदेश देते हुए कहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में खाली पड़े सभी शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक पदों को चार महीने में भरा जाए। 


    साथ ही यह भी कहा कि कुलपति और रजिस्ट्रार जैसे प्रशासनिक पदों को रिक्त होने के एक महीने के भीतर भरा जाए। यह आदेश गुरुवार को न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और आर महादेवन की पीठ ने उच्च शिक्षण संस्थाओं के छात्रों द्वारा आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं से संबंधित मामले में दिए। कोर्ट ने कहा कि सरकारी और निजी विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि फैकल्टी (संकाय) के सभी रिक्त पदों (शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक दोनों) को चार महीने की अवधि में भरा जाए। इसमें वंचित वर्ग के लोगों और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित पदों को प्राथमिकता दी जाए, जिसमें दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं।


    शीर्ष अदालत ने कहा कि फैकल्टी भर्ती के लिए विशेष भर्ती अभियान आयोजित किए जा सकते हैं जो केंद्र और राज्यों के नियमों के अनुसार विभिन्न प्रकार के आरक्षण के अंतर्गत आते हैं। कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य महत्वपूर्ण संस्थागत प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति और रिक्तियों को चार महीने के भीतर किया जाना चाहिए। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों में सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए इन पदों को रिक्त होने की तिथि से एक महीने के भीतर भरा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि चूंकि सेवानिवृत्ति की तिथि पहले से पता होती है इसलिए, भर्ती प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसे पद एक महीने से ज्यादा समय तक रिक्त न रहें। 


    कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी उच्च शिक्षण संस्थान केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों को सालाना रिपोर्ट देंगे, जिसमें यह बताया जाएगा कि कितने आरक्षित पद रिक्त हैं, कितने भरे गए, न भरने के कारण और कितना समय लगा। कोर्ट ने छात्रवृत्तियों के भुगतान में देरी और कई बार छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोकने आदि की घटनाओं पर भी संज्ञान लिया है। आदेश दिया कि सभी लंबित छात्रवृत्तियों का बकाया भुगतान संबंधित केंद्रीय और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा चार माह के भीतर किया जाए। 

    Saturday, January 17, 2026

    विश्वविद्यालयों में नहीं होगा किसी तरह का भेदभाव, यूजीसी के निर्देश पर होगी समान अवसर केंद्र की स्थापना

    विश्वविद्यालयों में नहीं होगा किसी तरह का भेदभाव, यूजीसी के निर्देश पर होगी समान अवसर केंद्र की स्थापना

    लखनऊ। देश के सरकारी, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों में अब जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देशों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर केंद्र और समता समिति की स्थापना अनिवार्य की जा रही है। इसके लिए प्रदेशों के विश्वविद्यालयों में भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

    यूजीसी ने हाल ही में समता के लिए संवर्धन विनियम-2026 जारी किए हैं। इनके तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग छात्रों व कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हर विवि और कॉलेज में समान अवसर केंद्र वंचित वर्ग के छात्रों और कर्मचारियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही समता समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें शिक्षक, कर्मचारी और छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। यूजीसी ने शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन और ऑनलाइन व्यवस्था शुरू करना भी अनिवार्य किया है। 









    एसआईआर व पंचायत चुनाव में फंसे यूपी के परिषदीय शिक्षक, 24 जनवरी से द्वितीय सत्र परीक्षा, 27 जनवरी से निपुण मूल्यांकन

    एसआईआर व पंचायत चुनाव में फंसे यूपी के परिषदीय शिक्षक, 24 जनवरी से द्वितीय सत्र परीक्षा, 27 जनवरी से निपुण मूल्यांकन

    लखनऊ। सूबे के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत कई शिक्षकों की ड्यूटी एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) और पंचायत चुनाव में लगाए जाने से बेसिक शिक्षा व्यवस्था पर संकट गहरा गया है। 24 जनवरी से द्वितीय सत्र परीक्षा और 27 जनवरी से निपुण मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू होनी है लेकिन शिक्षकों की भारी कमी के चलते पढ़ाई, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन कार्य प्रभावित होने की आशंका है।

    बीते दो माह से सूबे में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। इसी बीच पंचायत चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारियां भी शिक्षकों को सौंप दी गई हैं। चुनावी कार्यों में लगे शिक्षकों के स्कूलों से दूर रहने के कारण नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। कई विद्यालयों में कक्षाएं सुचारू रूप से नहीं चल पा रही हैं।



    गुरुजी पढाएंगे तो ही तो निपुण बनेंगे बच्चे, 27 जनवरी से होगा निपुण एसेसमेंट और शिक्षक एसआईआर व बीएलओ की ड्यूटी कर रहे

    लखनऊ। प्राइमरी स्कूलों अधिसंख्य शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक नवम्बर से एसआईआर और पंचायत बीएलओ के काम में लगे हैं। एक शिक्षक के भरोसे किसी तरह 10 से 16 दिसम्बर की बीच अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं हुईं। तब से अब तक सिर्फ नौ दिन स्कूल खुले हैं। शीतलहर व सर्दी के चलते 29 दिसम्बर से स्कूलों में लगातार अवकाश है। अब स्कूल 16 जनवरी को खुलेंगे।

    शिक्षकों के अनुसार इस दौरान कक्षाएं नहीं चलने से बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ है। न ही बच्चों को निपुण एसेसमेंट के लिये भाषा व गणित की तैयारी कराई गई है। 24 जनवरी से द्वितीय सत्र परीक्षा और 27 जनवरी से निपुण एसेसमेंट कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसको लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश है।

    प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में पहली से पांचवी के बच्चों की हिन्दी और गणित की दक्षता जांचने के लिए निपुण एसेसमेंट इसी माह होना है। डीएलएड प्रशिक्षु 27 जनवरी से स्कूलों में जाकर बच्चों निपुण लक्ष्य ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आकलन करेंगे। लखनऊ के 1249 प्राइमरी स्कूलों में निपुण निपुण एसेसमेंट होना है।


    बिना पाठ्यक्रम पूरा हुए 24 जनवरी से सत्र परीक्षा
    प्राइमरी स्कूलों में 24 से 31 जनवरी के बीच द्वितीय सत्र परीक्षा होनी है। परीक्षा कार्यक्रम बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने आठ जनवरी को जारी किया था। शिक्षकों का कहना है कि अर्द्ध परीक्षा खत्म होने के बाद सिर्फ नौ दिन स्कूल खुले हैं लेकिन शिक्षकों के एसआईआर में लगे होने से पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ।

    "नवम्बर से अधिकांश शिक्षक एसआईआर और पंचायत बीएलओ के काम में लगे हैं। दिसम्बर में अर्धवार्षिक परीक्षा खत्म हुई। फिर अवकाश, स्कूल खुलने के बाद सत्र परीक्षा, निपुण आकलन इत्यादि, बिना बच्चों की नियमित पढ़ाई के कैसे होगा? इस विषय पर विभाग को जरूर सोचना चाहिए।
    - विनय सिंह, प्रान्तीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन


     


    जाड़े की छुट्टियों के बाद आज से खुलेंगे परिषदीय स्कूल, सत्र परीक्षा व निपुण आकलन में जुटेंगे

    जाड़े की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर 24 से सत्रीय परीक्षाएं होंगी शुरू

    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय - विद्यालय जाड़े की छुट्टियों के बाद 16 जनवरी शुक्रवार से खुल रहे हैं। हालांकि प्रयागराज में 20 तक स्कूल - बंद रहेंगे। स्कूल खुलने के साथ ही - एक साथ विद्यालयों में दो महत्वपूर्ण - गतिविधियां सत्रीय परीक्षाएं व विद्यालयों का निपुण आकलन शुरू होना है। हालांकि अभी भी काफी - शिक्षक एसआईआर में फंसे हुए हैं। ऐसे में स्कूलों के लिए एक साथ दोनों काम कराना चुनौतीपूर्ण होगा।

    प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक जाड़े की छुट्टियां थीं। जबकि 15 जनवरी को मकर संक्रांति का सार्वजनिक अवकाश घोषित था। इस क्रम में शुक्रवार से विद्यालय खुल रहे हैं। स्कूल खुलने के साथ ही 24 जनवरी से विद्यालयों में सत्रीय परीक्षाएं शुरू होंगी। परीक्षाएं 31 जनवरी तक आयोजित की जाएंगी। इसके लिए बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से विस्तृत निर्देश जारी किया जा चुके हैं।

    हालांकि इसमें यह राहत दी गई है कि परीक्षा दिसंबर तक पढ़ाए गए कोर्स के आधार पर ही आयोजित की जाएगी। इसके लिए विद्यालय स्तर पर पेपर बनाकर परीक्षा कराई जाएगी। जबकि शिक्षकों के एसआईआर के काम में फंसे होने से दिसंबर में भी काफी जगह पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित रही है। इसी बीच शिक्षकों के जिलों में समायोजन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

    शुक्रवार से स्कूल खुलने पर इसका भी असर देखने को मिलेगा। दूसरी तरफ 27 जनवरी से विद्यालयों का निपुण आकलन भी शुरू कर दिया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने फरवरी तक सभी विद्यालयों का डीएलएड प्रशिक्षुओं के माध्यम से निपुण आंकलन कराने का विस्तृत निर्देश जारी कर रखा है। विभाग ने इसके लिए आवश्यक बजट भी जारी कर दिया है। इस तरह जाड़े की छुट्टियों के बाद खुल रहे स्कूलों में काफी हलचल रहेगी।


    शीतकालीन अवकाश के बाद आज से खुलेंगे परिषदीय स्कूल, खुलते ही निपुण आकलन और सत्र परीक्षा का दौर होगा शुरू 

    लखनऊः शीतकालीन अवकाश के बाद शुक्रवार से प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालय खुलेंगे। ठंड को देखते हुए फिलहाल स्कूलों का संचालन सुबह नौ बजे से अपराह्न तीन बजे तक किया जाएगा। स्कूल खुलते ही शिक्षण कार्य के साथ-साथ आगामी परीक्षाओं की तैयारियों पर विशेष जोर दिया जाएगा। हालांकि कुछ जिलों में ठंड के चलते जिला प्रशासन ने अभी अवकाश घोषित किया है।

    परिषदीय और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2025-26 की द्वितीय सत्रीय परीक्षा 24 जनवरी से 31 जनवरी के बीच आयोजित की जाएगी। ऐसे में विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों को परीक्षा के अनुरूप पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति कराई जाए और उनकी तैयारी को अंतिम रूप दिया जाए। सत्रीय परीक्षा के परिणामों के आधार पर जिन छात्र-छात्राओं का अपेक्षित परिणाम नहीं होगा, उनके लिए विशेष शिक्षण व्यवस्था की जाएगी। कक्षा स्तर पर ऐसे बच्चों की पहचान कर विषयवस्तु को सरल तरीके से दोहराया जाएगा, अतिरिक्त अभ्यास कराया जाएगा और उनकी सीखने की कमी को दूर करने पर फोकस किया जाएगा।

     बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा केवल मूल्यांकन का माध्यम नहीं होगी, बल्कि इसके जरिये बच्चों की शैक्षिक स्थिति का आकलन कर गुणवत्ता सुधार की रणनीति पर काम किया जाएगा। शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे कक्षा में व्यक्तिगत ध्यान देते हुए कमजोर विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने का प्रयास करें।

    विद्यालय खुलने के साथ ही उपस्थिति बढ़ाने, नियमित पठन-पाठन सुनिश्चित करने और बच्चों को सुरक्षित व अनुकूल वातावरण देने पर भी जोर दिया गया है। ठंड के मद्देनजर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश भी विद्यालयों को दिए गए हैं।

    यूपी बोर्ड सत्र 2026-27 से 9वीं और 11वीं में व्यावसायिक शिक्षा होगी अनिवार्य

    सत्र 2026-27 से 9वीं और 11वीं में व्यावसायिक शिक्षा होगी अनिवार्य, यूपी बोर्ड में कौशल आधारित शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम, रोजगारपरक होगी पढ़ाई



    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) ने विद्यालयी शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक अहम पहल की है। परिषद द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 एवं कक्षा 11 में व्यवसायिक शिक्षा को अनिवार्य किए जाने का निर्णय लिया है। इस क्रम में आईटी, आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स, एपेरल तथा ब्यूटी एंड वेलनेस विषयों के व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को विषय समितियों द्वारा अनुमोदित कर यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह को सौंप दिया है।


    इन सभी ट्रेड्स के अंतर्गत जॉब रोल आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा कई चरणों में बैठकें आयोजित की गईं। यह कार्य अपर सचिव सत्येंद्र कुमार सिंह, स्कंद शुक्ल के निर्देशन तथा उप-सचिव डॉ. आनंद कुमार त्रिपाठी के संयोजन में संपन्न हुआ। सफलतापूर्वक विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार किए गए इन पाठ्यक्रमों में वर्तमान तकनीकी आवश्यकताओं, उद्योग जगत की अपेक्षाओं और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता को केंद्र में रखा गया है।

    परिषद के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो विद्यार्थियों में कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और व्यावसायिक क्षमता को बढ़ावा देगी। यह कदम विद्यालयी शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ने और छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास माना जा रहा है।

    यूपी बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगे अन्य व्यवसायिक ट्रेड्स के पाठ्यक्रम विकसित करने का कार्य प्रगति पर है, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा का लाभमिल सके।

    इन पाठ्यक्रमों के निर्माण में केंद्रीय व्यवसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल के सहयोग के साथ-साथ विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनमें संजीव कुमार आर्य (वरिष्ठ प्रशिक्षण अधिकारी, राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक संस्थान, नैनी), वीरेंद्र नाथ शुक्ला, डॉ. अदिति गोस्वामी, डॉ. दिलीप सिंह और डॉ. अविनाश पांडेय सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे।

    Friday, January 16, 2026

    परिषदीय शिक्षकों ने प्रथम नियुक्ति से मांगी वरिष्ठता

    परिषदीय शिक्षकों ने प्रथम नियुक्ति से मांगी वरिष्ठता

    स्थानांतरण मिलने पर नए विद्यालय में हो जाते हैं कनिष्ठ।

    इस कारण पदोन्नति मिलने के लाभ से हो जाते हैं वंचित।


    प्रयागराजबेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में दूर-दराज के क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक समय-समय पर जिले के बाहर यानी अंतरजनपदीय स्थानांतरण पाकर घर के नजदीक पहुंचने का मौका तो मिलता है, लेकिन वह वरिष्ठता के लाभ से वंचित हो जाते हैं। स्थानांतरण के क्रम में जिस विद्यालय में वरिष्ठता मिलती है, वहां सबसे कनिष्ठ हो जाते हैं। क्योंकि पदोन्नति मिलने की प्रक्रिया में सबसे नीचे हो जाते हैं। वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति उन्हें मिलेगी जो विद्यालय में सबसे पहले से होंगे।


    शिक्षकों ने मांग उठाई है कि वरिष्ठता का निर्धारण उनकी पहली नियुक्ति तिथि से किया जाए। बड़ी संख्या में ऐसे महिला और पुरुष शिक्षक हैं, जो अध्यापन सेवा में पहले नियुक्त हुए, लेकिन स्थानांतरण लेकर घर के नजदीक आने के कारण कनिष्ठ हो गए। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था से उन शिक्षकों को नुकसान है, जो स्थानांतरण मिलने के बाद दूसरे जिले के विद्यालय में नियुक्त होते हैं।

    नियुक्ति मिलने के समय ही तय हो कि जब नियुक्ति प्रदेश स्तर पर होती है और स्थानांतरण भी प्रदेश स्तर पर मिलता है तो वरिष्ठता भी मौलिक नियुक्ति तिथि से निर्धारित होनी चाहिए, न कि स्थानांतरित होकर दूसरे विद्यालय में जाने की तिथि से।

    बताया गया कि वर्ष 47,000 शिक्षकों का स्थानांतरण उनके पसंद के जनपद में भेजा गया। इसमें एक बार करीब 27,000 तथा एक और बार करीब 20,000 शिक्षकों के स्थानांतरण हुए। यह शिक्षक नए विद्यालय में सबसे कनिष्ठ हो गए। इसके कारण पदोन्नति की प्रक्रिया में सबसे नीचे रहने के कारण लाभ से वंचित हो जाएंगे। इस व्यवस्था को बदलकर पहली नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता निर्धारित किए जाने की मांग सरकार से की गई है।

    हवाई जहाज से वैज्ञानिक संस्थानों के भ्रमण पर जाएंगे मेधावी छात्र, राष्ट्रीय अविष्कार अभियान में 150 बच्चें शिक्षकों के साथ बंगलूर, श्रीहरिकोटा, अहमदाबाद व गांधीनगर का करेंगे भ्रमण

    हवाई जहाज से वैज्ञानिक संस्थानों के भ्रमण पर जाएंगे मेधावी छात्र, राष्ट्रीय अविष्कार अभियान में 150 बच्चें शिक्षकों के साथ बंगलूर, श्रीहरिकोटा, अहमदाबाद व गांधीनगर का करेंगे भ्रमण 


    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के सपनों को ऊंची उड़ान मिलेगी। वे देश के प्रमुख राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों का भ्रमण करेंगे। यहां पर वे अंतरिक्ष विज्ञान, रॉकेट, रोबोटिक्स आदि से जुड़ी चीजों की बारीक जानकारी लेंगे। बच्चे जो चीजें किताबों में पढ़ रहे हैं, उसे पास से देखेंगे और समझेंगे भी। इस बार राष्ट्रीय अविष्कार अभियान के तहत पहली बार वे यात्रा पर हवाई जहाज से जाएंगे।


    बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के चयनित 150 बच्चे व शिक्षक बेंगलुरु, श्रीहरिकोटा, अहमदाबाद, गांधीनगर का चार दिन का भ्रमण करेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार की प्रोजेक्ट एडवाइजरी बोर्ड ने आवश्यक बजट पर मुहर लगाई है। विभाग की ओर से योजना के तहत हर जिले से दो छात्र-छात्रा व उनके साथ शिक्षकों को फरवरीं में इस एक्सपोजर विजिट कराने के निर्देश दिए हैं। इन छात्रों का चयन जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में पहला व दूसरा स्थान पाने वाले मॉडलों के आधार पर किया जाएगा।

    इस यात्रा का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में न सिर्फ वैज्ञानिक जिज्ञासा व अनुभवात्मक शिक्षण को प्रोत्साहित करना है। साथ ही इसके माध्यम से उनमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व गणित का व्यावहारिक अनुभव देना भी है। इसके साथ ही बच्चों को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करना भी है। ताकि वे इस क्षेत्र में भी अपना कॅरियर बनाने के लिए प्रेरित हों।

    महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया है कि यह भ्रमण मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) के समन्वय में होगी। इसमें विज्ञान विषय के शिक्षक, मेंटर व खंड शिक्षा अधिकारी भी शामिल होंगे। इनका चयन मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक करेंगे। 


    मंडलवार होगा बच्चों का चयन

    एडी बेसिक बरेली के तहत 24, एडी बेसिक वाराणसी के तहत 22, एडी बेसिक गोरखपुर के तहत 20, एडी बेसिक मुरादाबाद के तहत 28, एडी बेसिक कानपुर के तहत 24, एडी बेसिक झांसी के तहत 14, एडी बेसिक अयोध्या के तहत 18 कुल 150 छात्र-छात्रा यात्रा में शामिल होंगे। इसमें अलीगढ़, आगरा, बरेली, प्रयागराज, विंध्याचल व वाराणसी के छात्र बंगलूरू, आजमगढ़, गोरखपुर, बस्ती, मुरादाबाद, सहारनपुर व मेरठ के बच्चे श्रीहरिकोटा जाएंगे। जबकि लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अयोध्या वं देवीपाटन के बच्चे अहमदाबाद, गांधीनगर जाएंगे।

    मेरिट आधारित चयन हेतु अधिकारियों/कर्मचारियों की 10 वर्षों की गोपनीय प्रविष्टियाँ मानव सम्पदा पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किये जाने के सम्बन्ध में

    मेरिट आधारित चयन हेतु अधिकारियों/कर्मचारियों की 10 वर्षों की गोपनीय प्रविष्टियाँ मानव सम्पदा पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किये जाने के सम्बन्ध में