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Tuesday, August 22, 2119

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    Monday, June 22, 2026

    तंबाकू मुक्त बनेंगे स्कूल, गुटखा का पाउच मिलने पर मिलेगा नोटिस, स्कूल की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' चिह्नीकरण आवश्यक

    तंबाकू मुक्त बनेंगे स्कूल, गुटखा का पाउच मिलने पर मिलेगा नोटिस, स्कूल की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' चिह्नीकरण आवश्यक

    आसपास की दुकानों पर गुटखा तंबाकू की बिक्री बंद कराने के लिए उठाने होंगे कदम

    प्रयागराज । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वर्ष 2047 तक 'नशा मुक्त भारत' का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत शिक्षा मंत्रालय ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान अभियान चलाने का निर्णय लिया है। यह अभियान प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में भी चलाया जाना है। सभी परिसर तंबाकू मुक्त बनाने का लक्ष्य है। 


    इस दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रत्येक स्कूल परिसर में तंबाकू, गुटखा खाने, बीड़ी, सिगरेट के प्रयोग पर रोक रहेगी। इन सब चीजों के पाउच भी यदि परिसर में मिल गए तो शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, प्रधानाचार्यों से जवाब तलब होगा। परिसर में यदि कहीं पर पूर्व में पान गुटखा की पीक के निशान हों तो उन्हें तत्काल प्रभाव से हटवाने का दायित्व भी प्रधानाध्यापकों या इंचार्ज प्रधानाध्यापकों पर है। 

    ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय खुलने पर अधिकारियों की टीम स्कूलों का निरीक्षण करके वास्तविक स्थिति देखेगी। स्कूलों में हर छह महीने में कम से कम एक तंबाकू नियंत्रण गतिविधि कराई जाएगी। इन गतिविधियों की निगरानी के लिए नोडल नियुक्त करते हुए उनके नाम, मोबाइल नंबर और तंबाकू मुक्त क्षेत्र का बोर्ड लगवाया जाएगा।  सभी शिक्षण संस्थाओं में मुख्य द्वार के पास बोर्ड या वाल पेंटिंग कराई जाए, जिसमें तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान का उल्लेख हो।

     इसकी रोकथाम के लिए नामित नोडल का नाम और मोबाइल नंबर भी अंकित होना आवश्यक है। परिसर के भीतर तंबाकू उपयोग का कोई सबूत नहीं होना चाहिए। परिसर में तंबाकू के नुकसान बताने वाले पोस्टर लगवाने के साथ संस्थान की आचार संहिता का उल्लेख किया जाए। शिक्षण संस्थान की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' का चिह्नीकरण आवश्यक है। इस 100 गज के दायरे में यदि तंबाकू आदि की बिक्री वाली दुकानें हों तो उन्हें हटवाना होगा या फिर दुकानों पर ऐसे पदार्थ की बिक्री बंद करानी होगी। 

    संस्थान के नोडल अपने स्तर पर नियमों के उल्लंघन पर सांकेतिक जुर्माना या सुधारात्मक संदेश देने वाली कोई कार्रवाई कर सकते हैं। इस संबंध में डीआइओएस संतोष कुमार राय का कहना है कि यह सब विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के मन मस्तिष्क को तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाने के लिए किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य के साथ आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरण पर गलत प्रभाव पड़ता है। इसी परिप्रेक्ष में शिक्षा मंत्रालय ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान से जुडे राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है।

    सीबीएसई ने 12वीं के पुनर्मूल्यांकन के नतीजे घोषित किए, पहले चरण में 87 फीसदी से अधिक आवेदनों के नतीजे जारी

    सीबीएसई ने 12वीं के पुनर्मूल्यांकन के नतीजे घोषित किए, पहले चरण में 87 फीसदी से अधिक आवेदनों के नतीजे जारी

    डिजीलॉकर पर चेक करें अंक

    21 जून 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 12वीं की उत्तर-पुस्तिकाओं की दोबारा जांच (पुनर्मूल्यांकन) और सत्यापन के नतीजे जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड ने रविवार को पहले चरण में 87 फीसदी से अधिक आवेदनों के परिणाम घोषित किए गए हैं। शेष आवेदनों के नतीजे भी जल्द जारी कर दिए जाएंगे। छात्र अपने डिजीलॉकर से नई मार्कशीट डाउनलोड कर सकेंगे।

    बोर्ड ने कहा कि प्रत्येक आवेदन की निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर-पुस्तिकाओं की सावधानीपूर्वक और पारदर्शी तरीके से जांच की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन, आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के तकनीकी विशेषज्ञों ने भी सहयोग दिया। जिससे कि अनधिकृत हस्तक्षेप को रोका जा सके। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन विद्यार्थियों के सत्यापन परिणाम में नो-चेंज दर्शाया गया है, उन्हें इच्छा होने पर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में उत्तर पुस्तिका निरीक्षण का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही अलग से समय-सारिणी जारी की जाएगी।

    छात्रों को अफवाहों से दूर रहने की सलाह
    बोर्ड ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से सोशल मीडिया पर प्रसारित अस्पष्ट सूचनाओं और अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है। बोर्ड ने कहा कि सभी आधिकारिक जानकारी केवल उसके अधिकृत माध्यमों से ही जारी की जाएगी। किसी भी प्रकार की सहायता या जानकारी के लिए छात्र संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों अथवा सीबीएसई हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते है।

    ओएसएम प्रणाली को लेकर हुआ विवाद
    सीबीएसई ने 12वीं के नतीजे 13 मई को घोषित किए थे। इसके बाद 19 से 25 मई तक मूल्यांकित उत्तर-पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई गई थी, जबकि 2 से 7 जून के बीच सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इस बार उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बोर्ड ने ओएसएम प्रणाली का उपयोग किया था। इसको लेकर बहुत विवाद हुआ, छात्रों ने नंबर कम आने की शिकायतें कीं। वहीं, उत्तर-पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की आवेदन प्रकिया में भी छात्रों ने आवेदन नहीं होने की शिकायतें की थीं।




    CBSE 12वीं की उत्तरपुस्तिकाओं के सत्यापन व पुनर्मूल्यांकन आवेदन अब सात जून तक

    5 जून 2026
    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक बोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि एक दिन बढ़ाकर सात जून कर दी है। पहले यह समयसीमा छह जून आधी रात तक निर्धारित थी। 

    बोर्ड ने यह निर्णय उन छात्रों की शिकायतों के बाद लिया है, जिन्होंने परिणाम उपरांत सेवाओं (पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज) पोर्टल पर उत्तरपुस्तिकाओं की स्कैन कापी देखने और सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने में तकनीकी दिक्कतों की बात कही थी। यह पोर्टल दो जून से शुरू किया गया था। सीबीएसई ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें अतिरिक्त समय और सुविधा प्रदान करने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने का फैसला किया गया है। बोर्ड ने छात्रों से संशोधित कार्यक्रम के अनुसार आवेदन करने का आग्रह किया है।

    बोर्ड ने मंगलवार को उन छात्रों के लिए आनलाइन सुविधा शुरू की थी जो उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं हैं। इसके तहत छात्र स्कैन कापी में पृष्ठ गायब होने, पूरक उत्तरपुस्तिका संलग्न न होने, नक्शे या ग्राफ के अभाव, धुंधले पन्नों, गलत उत्तरपुस्तिका अपलोड होने या किसी अन्य प्रश्नपत्र सेट के आधार पर मूल्यांकन जैसी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।



    सीबीएसई का पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन हेतु पोर्टल तय समय पर नहीं शुरू हो सका, छात्रों और अभिभावकों में बढ़ रही नाराजगी

    1 जून 2026
    नई दिल्ली। उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन के लिए एक जून से शुरू होने वाला केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का पोर्टल सोमवार को तय समय पर शुरू नहीं हो सका। इससे छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी है।

    सुबह से था इंतजारः हजारों छात्र और अभिभावक सुबह से ही पोर्टल खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन देर शाम तक वेबसाइट का लिंक एक्टिव नहीं हो सका। कॉपियों की स्क्रूटनी और वेरिफिकेशन के लिए महीनों से इंतजार कर रहे लाखों छात्र-छात्राएं लगातार वेबसाइट को रिफ्रेश करते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

    गुस्से में छात्र और अभिभावक : इसके चलते छात्र, अभिभावक दोनों गुस्से में हैं। उन्हें डर है कि कहीं एक और डेट का इंतजार न करना पड़े। सीबीएसई ने दोपहर दो बजे एक्स पर जानकारी दी कि पोर्टल को जल्द शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी शाम 8:30 बजे तक पोर्टल शुरू नहीं हो सका। इससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई।

    सोशल मीडिया पर उठे सवाल
    सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। एक्स यूजर योगेश ने लिखा कि सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गए हैं, बोर्ड को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। एक अन्य यूजर ललित ने लिखा कि बोर्ड स्थिति संभालने में सक्षम नहीं है तो छात्रों को अतिरिक्त अंक देने पर विचार करना चाहिए। देर शाम तक पोर्टल शुरू होने का कोई नया समय घोषित नहीं किया गया था। 

    दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी
    सीबीएसई परीक्षा विवाद मामले में शिक्षा मंत्रालय ने कार्रवाई शुरू की। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सीओईएमपीटी को ठेका देने के मामले में रिपोर्ट तलब की गई है। टेंडर प्रक्रिया का विवरण भी जुटाया गया है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।




    CBSE : 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का सत्यापन व पुनर्मूल्यांकन अब एक जून से

    30 मई 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रकिया अब तीन दिन की देरी से एक जून से शुरू होगी। पहले यह 29 मई से होनी थी। थी। वहीं, अगले साल से बोर्ड परीक्षा के अंकों के साथ स्कैन आंसरशीट (उत्तर पुस्तिकाएं) भी डिजिलॉकर में उपलब्ध करवाएगा।

    अधिकारियों के मुताबिक, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता व डिजिटलीकरण की दिशा में यह फैसला किया गया है। फिलहाल प्राथमिकता, पुनर्मूल्यांकन वाली सभी कॉपियों को दोबारा जांच कर नतीजा जारी करना है, ताकि विद्यार्थी आगे स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकें। देशभर के विश्वविद्यालयों समेत इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेजों में जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना है और नतीजे में देरी से शैक्षणिक सत्र शुरू होने में देरी हो सकती है। 


    ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में हाईकोर्ट ने केंद्र राज्य सरकार और सीबीएसई से मांगा जवाब 

    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की नई ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार, सीबीएसई, परीक्षा नियंत्रक और उत्तर प्रदेश सरकार से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। यह प्रणाली 2025-26 की बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए शुरू की गई है।

    न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एक अधिवक्ता की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर शुक्रवार को यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को जल्दबाजी में लागू किया गया है। इससे देशभर के लाखों छात्रों के मूल्यांकन में प्रणालीगत संस्थागत विफलता हुई है। 



    CBSE : 12वीं में चार लाख से अधिक आए पुनर्मूल्यांकन आवेदन, 11 लाख से अधिक स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं मांगी गईं, पोर्टल दोबारा खोलने पर हो सकता है विचार

    27 मई 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं की परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के चलते पुनर्मूल्यांकन के लिए रिकॉर्ड चार लाख से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं। सीबीएसई के इतिहास में पहली बार किसी परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में पुनर्मूल्यांकन के आवेदन आए हैं।

    मंगलवार को शाम साढ़े चार बजे - तक 4,04,319 विद्यार्थी आवेदन कर चुके थे, जबकि गिनती अभी जारी है। वहीं, हजारों विद्यार्थियों को आंसर-शीट मिल ही नहीं पाई, इस कारण वे फिर से मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं। खास बात यह है कि 11,31,961 स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं मांगी गई हैं। इसमें से अभी तक 8,98,214 उत्तर पुस्तिकाएं दी जा चुकी हैं। 

    अधिकारी भी मानते हैं कि 12वीं के नतीजे आने के 14 दिन बीतने के बाद अभी तक विद्यार्थी परेशान हैं। विद्यार्थियों की दिक्कतों को देखते हुए सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन के लिए विंडो फिर खोलने पर विचार कर सकता है। यदि विंडो खुलती है, तो चार लाख का आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है। उत्तर पुस्तिका की प्रति नहीं मिलने से आवेदन से वंचित रह गए विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक स्कैन कॉपी नहीं मिलेगी, तब तक कैसे पता चलेगा कि उन्हें कम नंबर क्यों मिले हैं? 




    सीबीएसई 12वीं के विद्यार्थियों को लौटाएगा पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में ली गई अतिरिक्त राशि, अब आज रात तक कर सकेंगे आवेदन

    कम नहीं हो रहीं समस्याएं : पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियां

    24 मई 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कहा कि 12वीं के नतीजे के बाद पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों से जिन विद्यार्थियों से अधिक शुल्क वसूला गया, उन्हें अतिरिक्त राशि लौटाई जाएगी। शिक्षा मंत्रालय ने पुनर्मूल्यांकन के दौरान बच्चों व अभिभावकों की तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतों पर सीबीएसई से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।

    सीबीएसई ने रविवार को बताया कि 21-22 मई को मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन करते समय तकनीकी समस्याओं के चलते कुछ मामलों में अधिक राशि वसूली गई, जबकि कुछ में कम शुल्क लिया गया। जिन मामलों में अधिक भुगतान लिया गया, उनमें अतिरिक्त राशि उसी भुगतान माध्यम में वापस की जाएगी, जिससे शुल्क जमा किया गया था। जिन मामलों में कम शुल्क लिया गया है, उनमें जरूरी होने पर विद्यार्थियों को शेष राशि जमा करने के बारे में अलग से सूचित किया जाएगा।

     बोर्ड ने यह भी बताया कि ऐसे सभी मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए दोबारा आवेदन की जरूरत नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने सर्वर डाउन होने, पेमेंट गेटवे में गड़बड़ी और प्रक्रिया के दौरान सामने आई अन्य तकनीकी खामियों पर संज्ञान लिया था। 


    अब आज रात तक कर सकेंगे आवेदन

    सीबीएसई ने 12वीं की उत्तर पुस्तिका की स्कैन प्रति हासिल करने के लिए आवेदन की तिथि एक दिन और बढ़ा दी है। अब 25 मई को रात 11:59 तक आवेदन किए जा सकेंगे।

    डिजिटल मूल्यांकन का आकलन जारी डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर व्यापक विरोध व विद्यार्थियों की बढ़ती चिंता के बीच शिक्षा मंत्रालय 12वीं के नतीजों पर सतर्कता से नजर बनाए हुए है। सीबीएसई को इसमें प्रशासनिक निगरानी भी मुहैया करा रहा है। इस वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के बाद सामने आईं विसंगतियों और पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों के बाद मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया है।

    दाखिले में दिक्कत न आए प्रशासनिक निगरानी का मकसद सुनिश्चित करना है कि तकनीकी बाधाओं के कारण कॉलेज में दाखिले के दौरान विद्यार्थियों को असुविधा न हो।




    CBSE उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कापी लेने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि हुई 24 मई

    23 मई 2026
    नई दिल्लीः सीबीएसई ने 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए उत्तर पुस्तिका की स्कैन कापी लेने की अंतिम तारीख एक दिन के लिए और बढ़ा दी है। पहले अंतिम तिथि 23 मई थी, लेकिन अब विद्यार्थी 24 मई तक इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। वेबसाइट पर आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण यह निर्णय लिया गया है।

    बोर्ड ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वेबसाइट पर अत्यधिक ट्रैफिक और कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण कई विद्यार्थियों को आवेदन करने में परेशानी हो रही थी। इस कारण वे समय पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए यह निर्णय लिया गया है। वहीं, विद्यार्थियों का दावा है कि वेबसाइट हैक हो गई थी, जिस कारण फीस के मूल्य में बदलाव देखने को मिल रहा था।

    सीबीएसई के अनुसार, वेबसाइट पर बढ़े लोड के साथ कुछ तकनीकी हस्तक्षेप के प्रयासों के कारण भी सिस्टम पर असर पड़ा है, जिससे आवेदन प्रक्रिया बाधित हुई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि अब सभी प्रभावित विद्यार्थी अतिरिक्त एक दिन के भीतर आवेदन कर सकते हैं। स्कैन कापी प्राप्त करने के बाद छात्रों को आगे की प्रक्रिया यानी वेरिफिकेशन आफ इश्यूज आब्जर्व्ह और रि-इवैल्यूएशन के लिए भी दो दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा, ताकि वे अपनी उत्तरपुस्तिका को ठीक से देखकर निर्णय ले सकें। बोर्ड ने कहा कि अन्य सभी नियम और शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी।




    ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में कम नंबरों के बाद अब सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन पोर्टल की परेशानी, विद्यार्थियों ने पोर्टल पर लागिन नहीं कर पाने का लगाया आरोप

    कभी वेबसाइट पर ब्लैंक पेज दिखने तो कभी कैप्चा कोड नहीं आने की भी शिकायत

    20 मई 2026
    नई दिल्लीः सीबीएसई की ओर से 12 वीं में कापियों की जांच के लिए आन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम से परिणाम में उम्मीद से कम अंक मिलने की शिकायतें मिली हैं। इसके बाद अब री-इवैल्यूएशन और स्कैन कापी हासिल करने के
     लिए खोले गए पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों से विद्यार्थियों की चिंता और बढ़ गई है। कई विद्यार्थियों का आरोप है कि वे न तो पोर्टल पर लागिन कर पा रहे हैं और न ही आवेदन प्रक्रिया पूरी हो रही है।


    मंगलवार को सीबीएसई ने पोस्ट रिजल्ट (परिणाम के बाद) सुविधा शुरू की है। इसमें विद्यार्थी अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिका की स्कैन कापी लेकर री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन पोर्टल खुलते ही इंटरनेट मीडिया पर शिकायतों की संख्या बढ़‌ने लगी है।


    विद्यार्थियों का कहना है कि कभी वेबसाइट ब्लैंक पेज दिखा रही है, कभी कैप्चा कोड नहीं आ रहा। कई मामलों में भुगतान कटने के बाद भी आवेदन पूरा नहीं हो रहा है। एक छात्र ने बताया कि कई बार कोशिश के बाद भी वह पंजीकरण नहीं कर पाया, क्योंकि बार-बार वेब साइट हैंग हो रही है। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी छात्रों ने स्क्रीनशाट साझा करते हुए बोर्ड की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। एक छात्र ने कहा कि कि रुपये कट गए पर वेरिफिकेशन फेल हो गया। सिस्टम अपग्रेड नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था ही फेल है। हालांकि, इस मामले में सीबीएसई ने किसी बड़ी तकनीकी विफलता से इन्कार किया है।

    बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि उन्हें सुबह कुछ छात्रों के फोन आए थे, जो लागिन नहीं कर पा रहे थे। वैसे इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है। उनके अनुसार कई बार पुराना सेव पेज खुल जाता है, जिसे कंप्यूटर रीस्टार्ट करने से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को कुछ देर बाद दोबारा से लागिन करने की सलाह दी है। बोर्ड ने कहा कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल सही तरीके से काम कर रहा है। वैसे इस बार स्कैन कापी और री-इवैल्यूएशन की फीस भी कम की गई है। स्कैन कापी शुल्क 700 से 100 रुपये, री-इवैल्यूएशन फीस 500 से 100 रुपये और प्रति प्रश्न जांच शुल्क 100 से 25 रुपये किया गया है।

    Sunday, June 21, 2026

    बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों के ब्रिज कोर्स में फंसा पेच, आवेदन के दो महीने बाद भी शुरू नहीं हो सका NIOS ब्रिज कोर्स

    बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों के ब्रिज कोर्स में फंसा पेच, आवेदन के दो महीने बाद भी शुरू नहीं हो सका NIOS ब्रिज कोर्स


     सुप्रीम कोर्ट ने छह माह का प्रशिक्षण कराने के दिए थे आदेश

    ● डीएड विशेष शिक्षा वालों के प्रशिक्षण पर निर्णय नहीं

    ● 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के शिक्षकों का मामला
     

    उत्तर प्रदेश में बीएड के आधार पर परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में चयनित सहायक अध्यापकों के लिए अनिवार्य ब्रिज कोर्स मुकदमेबाजी में फंस गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्य छह माह के विशेष पाठ्यक्रम के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) ने 30 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन लिए थे। देशभर से 67145 शिक्षकों ने आवेदन किया है जिनमें उत्तर प्रदेश के 33992 शिक्षक शामिल हैं।


    यूपी के 33577 शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए राज्य से मंजूरी भी दी जा चुकी है, लेकिन कुछ राज्यों के शिक्षकों ने ब्रिज कोर्स से छूट देने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएं की हैं। यही कारण है कि आवेदन के लगभग दो माह बाद भी कोर्स शुरू नहीं हो सका है। शीर्ष अदालत ने 28 जून 2018 के बाद और 11 अगस्त 2023 से पूर्व प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त बीएड अर्हताधारी सहायक अध्यापकों को ब्रिज कोर्स करवाने के निर्देश दिए थे। इन शिक्षकों को ब्रिज कोर्स शुरू होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर एक बार में ही कोर्स पूरा करना है। कोर्स पूरा न करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति अमान्य हो जाएगी।


    डीएड विशेष शिक्षा वालों के प्रशिक्षण पर निर्णय नहीं

    प्रयागराज । परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में बीएड की तरह बिना ब्रिज कोर्स किए पढ़ा रहे पांच हजार शिक्षकों के प्रशिक्षण पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। इन शिक्षकों को एनआईओएस के ब्रिज कोर्स से बाहर रखा गया है। 68500 और 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के विज्ञापन में बीएड और डीएड (विशेष शिक्षा) धारकों को नियुक्ति के बाद प्रारंभिक शिक्षा में छह माह के विशेष प्रशिक्षण (ब्रिज कोर्स) को अनिवार्य किया गया था। लेकिन नियुक्ति के तकरीबन छह साल बाद भी इनके प्रशिक्षण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    शिक्षक आत्महत्या में बीएसए की गिरफ्तारी के बाद लिपिक ने भी किया सरेंडर, 25 हजार का इनाम संजीव सिंह पर घोषित था, चार माह से चल रही थी तलाश

    शिक्षक आत्महत्या में बीएसए की गिरफ्तारी के बाद लिपिक ने भी किया सरेंडर, 25 हजार का इनाम संजीव सिंह पर घोषित था, चार माह से चल रही थी तलाश

    इसी मामले में निलंबित बीएसए शालिनी 16 जून को दिल्ली से हुई थी गिरफ्तार

    21 जून 2026

    गोरखपुर : शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में वांछित चल रहे देवरिया बीएसए कार्यालय के निलंबित लिपिक संजीव सिंह ने शनिवार को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) अभिषेक चतुर्वेदी की अदालत में हाजिर होने के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। उसकी गिरफ्तारी पर एसएसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। साथ ही उसके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की तैयारी चल रही थी। 


    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या मामले में नामजद आरोपित संजीव सिंह देवरिया जिले के रामनाथ कालोनी का रहने वाला है। 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में दर्ज मुकदमे के बाद से वह फरार चल रहा था। मामला 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़ा है। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर प्रताड़ित करने, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने तथा मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा था कि लगातार प्रताड़ना से आहत होकर कृष्ण मोहन सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह समेत तीन शिक्षकों से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप यह भी था कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को कार्यालय बुलाकर अपमानित किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली।


     पुलिस को उनकी जेब से चार पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें शालिनी श्रीवास्तव और संजीव सिंह को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। इस मामले में मुख्य आरोपित देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को गुलरिहा पुलिस ने 16 जून को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इसी मामले में आरोपित बनाए गए देवरिया, गौरीबाजार के अर्जुनडीहा निवासी पूर्व प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पुलिस ने घटना के 10 दिन बाद ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि फरार चल रहे लिपिक संजीव सिंह के सरेंडर के बाद अब मामले के सभी आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है।



    शिक्षक कृष्ण मोहन की आत्महत्या मामले में अभियुक्त हैं निलंबित बीएसए शालिनी

    गिरफ्तार निलंबित बीएसए को जेल भेजा गया, लिपिक के घर की कुर्की की taiyaari

    नामजद आरोपी लिपिक संजीव सिंह के घर चस्पा हो चुका है नोटिस, अब कुर्की की तैयारी

    जांच के दौरान भ्रष्टाचार का मामला आने पर पूर्व प्रधानाध्यक को भेजा जा चुका है जेल

    19 जून 2026

    गोरखपुर । गुलरिहा इलाके में बर्खास्त शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में नामजद आरोपी व 25 हजार की इनामी देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को बुधवार को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी शालिनी को दिल्ली से गिरफ्तार किया था और फिर ट्रांजिट रिमांड पर लेकर बुधवार को गोरखपुर पहुंची। पूछताछ के बाद बीएसए को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेजा गया। उधर, मामले में नामजद फरार आरोपी निलंबित लिपिक संजीव सिंह के घर की कुर्की की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    शालिनी श्रीवास्तव पत्नी सौरभकुमार सिन्हा मूल रूप से बलिया जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित आनंद नगर, बड़ी काली मंदिर की निवासी हैं। जानकारी के मुताबिक, 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने खुदकुशी कर ली थी। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि दोनों ने शिक्षक को लगातार प्रताड़ित किया, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाया, जिससे आहत होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।

    तहरीर के आधार पर गुलरिहा थाने में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने, धमकी देने, साक्ष्य मिटाने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अपर्णा तिवारी से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को कार्यालय बुलाकर अपमानित भी किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली।

    जांच के दौरान एक रिटायर प्रधानाध्यक अनिरुद्ध का नाम आया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। वहीं, मुकदमा दर्ज होने के बाद से शालिनी व लिपिक संजीव फरार चल रहे थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराने के साथ 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। शालिनी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय की शरण भी ली थी, लेकिन राहत नहीं मिल सकी। अब उन्हें जेल भेजा गया।

    गुलरिहा थाने में दर्ज केस मैं आरोपी निलंबित बीएसए को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया गया। लिपिक की तलाश की जा रही है। उसके खिलाफ कुर्की का नोटिस जारी हो चुका है। अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है। - निमिष पाटील, एसपी सिटी



    शिक्षक की आत्महत्या मामले में देवरिया की फरार निलम्बित बीएसए दिल्ली से गिरफ्तार, लिपिक अभी भी फरार


    शिक्षक आत्महत्या मामले में चल रहीं थीं शालिनी श्रीवास्तव फरार

    16 जून 2026

    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या कांड में चार महीने से फरार चल रहीं बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बीएसए और लिपिक की गिरफ्तारी के लिए 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी जारी था।

    गिरफ्तारी से बचने के लिए बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दी थी लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। वहीं लिपिक संजीव सिंह अभी भी फरार है। कुशीनगर के रहने वाले और देवरिया में तैनात शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की पत्नी गुड़िया सिंह ने 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में केस दर्ज कराया था।



    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

    27 अप्रैल 2026

    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दोनों के अदालत में पेश न होने पर अब पुलिस उन्हें भगोड़ा घोषित कराने के लिए कोर्ट में आवेदन करेगी। भगोड़ा घोषित होने के बाद उनके घर 82 का नोटिस चस्पा किया जाएगा और फिर संपत्ति कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।


    कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरी बाजार स्थित एक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। वेतन बहाल न होने और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने 21 फरवरी को गुलरिहा स्थित अपने आवास में फंदे से लटक आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सरगर्मी मची थी।

    कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट और वीडियो में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बीएसए और लिपिक अब भी फरार हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर पहले 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है।


    देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


    अपडेट 19 मार्च 2026
    निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

    16 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

    पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

    वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

    यह है मामला
    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

    इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



    फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

    09 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

    इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

    बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
    मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



    शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

    देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

    देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



    देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

    गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



    फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

    गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

    पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

    आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


    बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

    उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

    हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

    शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

    किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

    बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



    शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

    देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

    कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

    इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

    जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



    बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

    इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

    इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



    शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


    गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

    तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



    शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

    गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



    विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

    सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

    गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

    16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

    कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

    वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार मामले में सीतापुर जिले की बेहटा ब्लॉक की बीईओ विभा सचान निलंबित

    वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार मामले में सीतापुर जिले की बेहटा ब्लॉक की बीईओ विभा सचान निलंबित

    जांच में असहयोग के आरोप सिद्ध


    सीतापुर। बेहटा की बीईओ विभा सचान को शासन ने भ्रष्टाचार के मामले में शनिवार को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में वह सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध रहेंगी।

    प्रयागराज निवासी विकास कुशवाहा ने विभा सचान पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। शासन ने संस्कृत पाठशाला निरीक्षक प्रयागराज को मामले की जांच सौंपी थी। जांच के दौरान बीईओ ने जांचकर्ता को अभिलेख उपलब्ध कराए। इसमें सामान की खरीदारी के बिल व जीएसटी बिल थे। बहराइच से खरीदे गए सामान के हाथ से बने हुए बिल भी दिए गए। इन पर जीएसटी भी नहीं दिया गया था। इससे भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई।

    इसके बाद निरीक्षक ने भ्रष्टाचार करने वाले विद्यालयों की जांच की। कंपोजिट विद्यालय शाहपुर में 12 मई को पांच शिक्षक, एक अनुदेशक व एक शिक्षामित्र अनुपस्थित मिले। जूनियर हाईस्कूल शेखनापुर 10.55 बजे पर बंद मिला। प्रधानाध्यापक व अध्यापक गैरहाजिर मिले। विद्यालय देखकर ऐसा लगा कि यहां पढ़ाई होती ही नहीं है।

    प्राथमिक विद्यालय चंदीभानपुर की मिड डे मील पंजिका का किसी अधिकारी ने अवलोकन तक नहीं किया। इन विद्यालयों के शिक्षक स्कूल से नदारद थे लेकिन वह बीआरसी में बीईओ के आसपास टहलते मिले। इससे शिकायत की पुष्टि हुई। इस संबंध में बीईओ को नोटिस दिया गया। इसके बाद भी बीईओ ने कोई जवाब नहीं दिया। शासन ने इस मामले में बीईओ की संलिप्तता उजागर होने पर निलंबित कर दिया है।

    बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने बताया कि बीईओ विभा सचान को निलंबित कर दिया गया है। जल्द ही वहां पर नए बीईओ की तैनाती की जाएगी।


    यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम में भी उपलब्ध एनसीईआरटी की पुस्तकें कराएगा, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के 36 विषयों की पुस्तकें हिंदी के साथ अंग्रेजी माध्यम में भी होंगी मुद्रित

    यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम में भी उपलब्ध एनसीईआरटी की पुस्तकें कराएगा, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के 36 विषयों की पुस्तकें हिंदी के साथ अंग्रेजी माध्यम में भी होंगी मुद्रित

    21 जून 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शैक्षिक सत्र 2027-28 से विद्यार्थियों को बड़ी सुविधा देने का निर्णय लिया है। अब हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के विभिन्न विषयों की एनसीईआरटी व परिषद की तरफ से विकसित पुस्तकें हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम में भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

    सचिव भगवती सिंह ने जारी आदेश में कहा है कि हाईस्कूल (कक्षा नौ व 10) के अंग्रेजी, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान व इंटरमीडिएट (कक्षा 11 व 12) के अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान और गृहविज्ञान समेत कुल 36 विषयों की 70 एनसीईआरटी आधारित और 12 परिषद विकसित पुस्तकों को प्रदेश के विद्यालयों में उपलब्ध कराया जाएगा।

    अब तक परिषद की पुस्तकें मुख्य रूप से हिंदी माध्यम में ही मुद्रित होती थीं। इस वजह से अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को अध्ययन सामग्री के लिए बाजार से महंगी पुस्तकें खरीदनी पड़ती थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों को भी सस्ती दरों पर पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी।

    परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगामी शैक्षिक सत्र के लिए पुस्तक विक्रेताओं व संस्थाओं को निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत डीलरशिप प्रदान की जाएगी, जिससे पुस्तकों की उपलब्धता प्रदेशभर में सुनिश्चित की जा सके।




    अब अंग्रेजी में भी मिलेंगी यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी की किताबें, प्रदेश के लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

    21 मई 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत देने की तैयारी की है। लंबे समय बाद यूपी बोर्ड अब अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के लिए एनसीईआरटी आधारित पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन अंग्रेजी भाषा में कराने जा रहा है। इस फैसले से प्रदेश के करीब ढाई लाख विद्यार्थियों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।


    अब तक यूपी बोर्ड में अंग्रेजी माध्यम से अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के दौरान सबसे बड़ी समस्या अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों की उपलब्धता को लेकर होती थी। विद्यालयों में पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से होती थी, लेकिन किताबें प्रायः हिंदी माध्यम में ही उपलब्ध कराई जाती थीं। ऐसे में विद्यार्थियों को बाजार से महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदनी पड़ती थीं।

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थियों को कम कीमत पर अंग्रेजी माध्यम की एनसीईआरटी पुस्तकें आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। हर वर्ष 50 से 52 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकरण कराते हैं। इनमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करते हैं। परिषद ने इन्हीं छात्रों की जरूरत को देखते हुए शैक्षिक सत्र 2026-27 से अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों के प्रकाशन की तैयारी शुरू की है।

    परिषद के अनुसार कक्षा नौ, 10, 11 और 12 के विभिन्न विषयों की एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। खास बात यह है कि ये पुस्तकें बाजार में उपलब्ध निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की तुलना में काफी सस्ती होंगी।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। अभी तक सीबीएसई पैटर्न की अंग्रेजी माध्यम की किताबें निजी बाजार में महंगे दामों पर मिलती थीं, जिसके कारण कई छात्र पूरी पुस्तकें खरीदने में सक्षम नहीं हो पाते थे। यूपी बोर्ड की ओर से कम कीमत पर पुस्तकें उपलब्ध कराए जाने से छात्रों का आर्थिक बोझ कम होगा।


    अभी तक हिंदी माध्यम की पुस्तकों का ही प्रकाशन कराया जाता था, लेकिन अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की समस्याओं को देखते हुए अब अंग्रेजी भाषा में भी एनसीईआरटी पुस्तकों का प्रकाशन कराया जाएगा। इससे छात्रों को अध्ययन सामग्री प्राप्त करने में काफी सुविधा होगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। -भगवती सिंह, सचिव, उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद

    Saturday, June 20, 2026

    यूपी बोर्ड : नौवीं और 11वीं के अग्रिम पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित, छह से 20 सितंबर तक किया जा सकेगा विवरणों में संशोधन

    यूपी बोर्ड: पांच अगस्त तक कक्षा 9 व 11 में होगा प्रवेश, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किया पंजीकरण कार्यक्रम

    यूपी बोर्ड : नौवीं और 11वीं के अग्रिम पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित,  छह से 20 सितंबर तक किया जा सकेगा विवरणों में संशोधन


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौवीं और 11वीं के अग्रिम पंजीकरण की समय-सारिणी जारी की है। इसके साथ ही वर्ष 2027 की कृषि भाग-एक परीक्षा में शामिल होने वाले 11वीं के छात्रों का भी पंजीकरण किया जाएगा। यह प्रक्रिया परिषद की वेबसाइट upmsp.edu.in पर ऑनलाइन पूरी की जाएगी।

    कक्षा नौवीं और 11वीं में प्रवेश की अंतिम तिथि पांच अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। हाईस्कूल कंपार्टमेंट या पुनरीक्षण परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के लिए 11वीं में प्रवेश की अंतिम तिथि 20 अगस्त 2026 नियत है। संस्था को 25 अगस्त तक छात्रों का अग्रिम पंजीकरण शुल्क (प्रति छात्र 40 रुपये) कोषागार में जमा करना होगा। जमा शुल्क की जानकारी और छात्रों का शैक्षिक विवरण भी इसी तिथि तक वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।

    वेबसाइट पर अपलोड किए गए विवरणों की जांच के लिए 26 अगस्त से पांच सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। इस अवधि में कोई नया विवरण अपलोड नहीं किया जा सकेगा। विवरणों में छह सितंबर से 20 सितंबर, 2026 तक संशोधन किया जा सकता है। इस संशोधन अवधि में भी नए छात्रों का विवरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंजीकरण शुल्क और प्रक्रिया पंजीकरण शुल्क प्रति छात्र चालीस रुपये निर्धारित है। यह शुल्क चालान के माध्यम से कोषागार में एकमुश्त जमा करना होगा।  संस्था के प्रधानों को जमा शुल्क की सूचना और छात्रों के शैक्षिक विवरण वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे। यह कार्य 25 अगस्त, 2026 की मध्यरात्रि तक पूरा करना अनिवार्य है। 


    विवरणों की शुद्धता और अंतिम जमा : छात्रों के शैक्षिक विवरणों जैसे नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, लिंग, विषय और फोटो की जांच महत्वपूर्ण है। कक्षाध्यापक और प्रधानाचार्य को विद्यालय के अभिलेखों के अनुसार इनकी भली-भांति जांच करनी होगी।

    किसी भी त्रुटि या विसंगति के लिए कक्षाध्यापक या प्रधानाचार्य ही उत्तरदायी होंगे। पंजीकृत अभ्यर्थियों की फोटोयुक्त नामावली और कोषपत्र की एक प्रति 30 सितंबर, 2026 तक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करनी होगी। यह प्रतियां परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजी जाएंगी।


    लेखपाल व अन्य नौकरी संग किया डीएलएड-बीटीसी प्रमाणपत्र निरस्त, शिकायत पर कराई गई जांच के बाद PNP ने उठाए सख्त कदम

    लेखपाल व अन्य नौकरी संग किया डीएलएड-बीटीसी प्रमाणपत्र निरस्त, शिकायत पर कराई गई जांच के बाद PNP ने उठाए सख्त कदम


    प्रयागराज : प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए आवश्यक डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) / बीटीसी प्रशिक्षण के साथ कहीं और रेगुलर पढ़ाई या कोई नौकरी नहीं की जा सकती, लेकिन छह जिलों में ऐसा किए जाने का मामला सामने आया है। ऐसे अभ्यर्थियों को प्रदान किया गया डीएलएड/बीटीसी प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने शिकायत की जांच कराने के बाद निरस्त कर दिया है।


    डीएलएड प्रशिक्षण दो वर्षीय रेगुलर पढ़ाई का डिप्लोमा कार्यक्रम है। इसमें अभ्यर्थियों की निर्धारित प्रशिक्षण संस्थान (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट/निजी प्रशिक्षण संस्थान) में नियमित उपस्थिति अनिवार्य है। इसके विपरीत कुछ अभ्यर्थियों ने सरकारी कार्यालयों में किसी न किसी पद पर सेवा देते हुए डीएलएड/बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूर्ण हो जाने के कई वर्ष बाद कुछ अभ्यर्थियों के विरुद्ध पीएनपी कार्यालय में अलग-अलग शिकायतें की गईं, जिसकी तत्कालीन पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने जांच कराई। इसमें एक प्रकरण एटा जिले का है। 


    एटा के अभ्यर्थी ने लेखपाल के पद पर कार्यरत रहते हुए वर्ष 2014 बैच में बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसी तरह वर्ष 2013 के बैच में बीटीसी प्रशिक्षण के समय गाजीपुर के एक अभ्यर्थी अनुदेशक के रूप में कार्यरत रहे। इसके अतिरिक्त चंदौली के अभ्यर्थी ने बीटीसी प्रशिक्षण बैच 2015 के दौरान चिकित्सा विभाग में डाटा आपरेटर के पद पर ड्यूटी की, जबकि कौशांबी के अभ्यर्थी ने पंचायत सहायक के रूप में कार्यरत रहने के दौरान डीएलएड प्रशिक्षण बैच-2022 पूरा किया। मेरठ और कासगंज में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। शिकायत सही मिलने पर पीएनपी ने इनके प्रमाणपत्र निरस्त कर सूचना संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों को भेजी है।

    हरदोई BSA पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप पर FIR दर्ज, जानिए पूरा मामला

    हरदोई BSA पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप पर FIR दर्ज, जानिए पूरा मामला  


    हरदोई ।  बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजीत सिंह पर शुक्रवार रात 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि अजीत सिंह ने एजुकेटर भर्ती से जुड़ी एक संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर 5 लाख रुपए की मांग की थी। संस्था अध्यक्ष ने 2 लाख रुपए ले भी लिए थे। 

    हालांकि बीएसए ने आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा- डीएम अनुनय झा ने जाल बिछाकर मुझे फंसाया है। वह मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, लेकिन साबित नहीं कर पाए। 


    एक दिन पहले 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल दस्तावेज गायब मिले थे। डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

    जानिए पूरा मामला 
    गोंडा के तरबगंज स्थित उज्ज्वला सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी की शिकायत पर बीएसए डॉ. अजित सिंह के खिलाफ हरदोई में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ओम प्रकाश तिवारी ने बताया- यूपी के कई जिलों में ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर के 210 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के लिए हमारी संस्था को अधिकृत किया गया था।

    उनका दावा है कि उसने सेवायोजन पोर्टल से मिले 4,590 आवेदनों में से जिला चयन समिति द्वारा किए गए रैंडमाइजेशन के माध्यम से 630 अभ्यर्थियों का चयन संबंधी डेटा प्राप्त कर लिया था। इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया। अनुबंध के लगभग 6 महीने बाद जब उन्होंने कार्य को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क किया तो बीएसए ने उन्हें कार्यालय बुलाया और 5 लाख रुपए रिश्वत मांगी।

    आरोप है कि रुपए न देने पर संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और जमानत राशि जब्त कराने की धमकी दी। संस्था अध्यक्ष का यह भी आरोप है कि दबाव में आकर उन्होंने 2 लाख रुपए दे दिए, लेकिन इसके बाद भी बाकी रुपए मांगे जाते रहे। लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा।


    बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने बताया- यह जिलाधिकारी का ट्रैप है, जिसमें मुझे फंसाया गया है। वह लगातार मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे। मैंने उनसे कहा था कि यदि कोई भ्रष्टाचार हुआ है तो उसे साबित करें। इसके बाद मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। मुझे अपशब्द कहे गए और यहां तक कहा गया कि मैं जिले में न रहूं और यहां से चला जाऊं।

    एडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने भी मुझे प्रताड़ित किया। मेरे कार्यालय के दो बाबुओं को अपने यहां अटैच कर लिया गया और अपने यहां के दो बाबुओं को मेरे कार्यालय में भेज दिया गया, ताकि मेरी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।

    एजुकेटर भर्ती परीक्षा से संबंधित जो भी कार्रवाई हुई, वह जिलाधिकारी के निर्देशों पर की गई। पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में संपन्न हुई। इसके बावजूद अब मुझे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। बैठकों में मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया गया और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। जिलाधिकारी ने फर्म संचालक को बुलाकर मेरे खिलाफ षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

    यदि मैंने किसी प्रकार का भ्रष्टाचार किया है तो एजुकेटर पदों पर भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों से पूछताछ कर ली जाए। यह पता कर लिया जाए कि क्या मैंने किसी से कोई धनराशि मांगी है या किसी प्रकार की अवैध मांग की है। यह मेरे खिलाफ रची गई एक सुनियोजित साजिश है। मैं इसका कानूनी तरीके से सामना करूंगा। इस साजिश में एडीएम की भी भूमिका है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूं।


    डीएम के निर्देश पर टीम ने आकर की जांच बेसिक शिक्षा विभाग में 29 हजार शिक्षक भर्ती से संबंधित 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां गायब मिली थीं। विवाद बढ़ने के बाद डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

    जांच के दौरान कुछ जरूरी पत्रावलियां रिकॉर्ड से गायब मिलीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    जांच में नहीं मिले 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख जांच में यह भी सामने आया कि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया का दायित्व भी उनके पास था।

    Friday, June 19, 2026

    राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ व हरित विद्यालयों की रैंकिंग जारी, यूपी के 11 स्कूलों में छह परिषदीय दो केजीबीवी, दो अन्य श्रेणी और एक निजी विद्यालय को मिला स्थान, देखें नाम

    स्वच्छ व हरित विद्यालयों की राष्ट्रीय सूची में छाए यूपी के परिषदीय विद्यालय,  बेसिक शिक्षा विभाग के 9 स्कूलों ने बनाई पहचान

    19 जून 2026
    लखनऊ। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के लिए गौरव का विषय है कि विभाग द्वारा संचालित नौ परिषदीय विद्यालयों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। विभिन्न शैक्षिक मानकों, नवाचारों, सामुदायिक सहभागिता, विद्यालयी वातावरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के आधार पर तैयार राष्ट्रीय सूची में इन विद्यालयों को स्थान मिला है। इस उपलब्धि को प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में हो रहे सकारात्मक बदलाव और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है। 

    राष्ट्रीय सूची में शामिल विद्यालयों में जनपद संभल का प्राथमिक विद्यालय इटायला माफी (रैंक 12), पीलीभीत का प्राथमिक विद्यालय चौखापुर (रैंक 25), चित्रकूट का पीएमश्री कन्या गढ़छपा (रैंक 27), बरेली का प्राथमिक विद्यालय सहजनी (रैंक 29), रायबरेली का प्राथमिक विद्यालय दौलरा, महाराजगंज (रैंक 51), बदायूं का कम्पोजिट विद्यालय आमगांव (रैंक 36), सहारनपुर का उच्च प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर लबदौला (रैंक 55), श्रावस्ती की केजीबीवी हरिहरपुर रानी (रैंक 9) तथा जालौन की केजीबीवी कोंच (रैंक 14) शामिल हैं।

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह सफलता निपुण भारत मिशन, पीएमश्री विद्यालयों की पहल, बेहतर अधिगम परिणाम, डिजिटल नवाचार तथा विद्यालयों में विकसित सकारात्मक शैक्षिक वातावरण का प्रतिफल है। प्रदेश सरकार द्वारा विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं, स्मार्ट कक्षाओं, पुस्तकालयों और शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका असर अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगा है। 

    शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने इसे परिषदीय विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सामूहिक सफलता बताया है। माना जा रहा है कि इन विद्यालयों की उपलब्धियां अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेंगी और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा को नई दिशा देंगी।



    राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ व हरित विद्यालयों की रैंकिंग जारी, यूपी के 11 स्कूलों में छह परिषदीय दो केजीबीवी, दो अन्य श्रेणी और एक निजी विद्यालय को मिला स्थान, देखें नाम 

    17 जून 2026
    लखनऊ। केंद्रीय स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा संचालित स्वच्छ व हरित विद्यालय रेटिंग (एसएचवीआर) 2025-26 में यूपी के 11 विद्यालयों को जगह मिली है। इनमें 6 परिषदीय विद्यालय और 2 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त रैंकिंग में दो अन्य श्रेणी के विद्यालय और एक निजी विद्यालय को भी जगह मिली है।


    प्रदेश के बेसिक विद्यालयों ने स्वच्छता, हरित परिसर और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि पाई है। साथ ही देश भर के निजी स्कूलों को भी कड़ी टक्कर दी है। प्रतियोगिता के तहत राज्य स्तर पर चयनित शीर्ष 20 विद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन के लिए भेजा गया था। इनमें से 11 विद्यालयों ने राष्ट्रीय सूची में स्थान बनाया।

    प्रतियोगिता में देशभर से कुल 191 विद्यालयों का चयन किया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 विद्यालयों को जल्द सम्मानित करने का निर्णय लिया है। ताकि अन्य विद्यालय भी स्वच्छता और हरित परिसर के क्षेत्र में प्रेरणा ले सकें।

    अपर निदेशक बेसिक श्याम किशोर तिवारी ने कहा कि यह सफलता प्रदेश के शिक्षकों, विद्यार्थियों, विद्यालय प्रबंधन समितियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। विद्यालयों में स्वच्छता, हरियाली और आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।


    राष्ट्रीय रैंकिंग में इन विद्यालयों को मिली जगह

    संभल का प्राथमिक विद्यालय इटालिया माफी (रैंक 12), पीलीभीत का प्राथमिक विद्यालय चोखापुर (रैंक 25), चित्रकूट का पीएमश्री कन्या गंछापा (रैंक 27), बरेली का प्राथमिक विद्यालय सहजनी (रैंक 29), बदायूं का कंपोजिट विद्यालय आमगांव (रैंक 36) और सहारनपुर का उच्च प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर लबदौला (रैंक 55) शामिल है। वहीं, श्रावस्ती का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हरिहरपुर रानी (रैंक 9) व जालौन का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कोंच (रैंक 14) को भी जगह मिली है। रैंकिंग में प्रयागराज का एयरफोर्स स्कूल मनौरी (रैंक 31) और वाराणसी का जवाहर नवोदय विद्यालय, गजोखर (रैंक 46) भी है। वहीं, निजी विद्यालय श्रेणी में मेरठ के दयावती मोदी अकादमी-1 (रैंक 4) ने स्थान पाया है।


    परिषदीय विद्यालयों में हो रहा संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल :

    एसएचवीआर रेटिंग में विद्यालयों का मूल्यांकन स्वच्छता, जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन, हरित परिसर और सामुदायिक सहभागिता जैसे मानकों पर किया गया है। इनमें परिषदीय विद्यालयों ने संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल और जनभागीदारी के बल पर उत्कृष्ट परिणाम हासिल किया है। इन विद्यालयों में स्वच्छता अभियान, पौधरोपण, जल संरक्षण और कायाकल्प जैसी पहल का सकारात्मक प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर दिखा है। इससे विभाग भी उत्साहित है।

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक / शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण के संबंध में विभागीय आदेश जारी

    सर्टिफिकेट ने फंसा दिया राजकीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों का तबादला, आवेदन की तारीख 21 जून तक बढ़ी 

    ◾ गुरुवार को खत्म हो रही आवेदन तिथि को बढ़ाया 
    ◾ डीआईओएस व प्राचार्य नहीं बढ़ा रहे आवेदन फॉर्म


    19 जून 2026
    लखनऊ । यूपी में राजकीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों का तबादला सर्टिफिकेट के फेर में फंस गया है। प्राचार्यों से सर्टिफकेट मांगा जा रहा है कि शिक्षक के तबादले से पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। ऐसे में प्राचार्य व जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) तबादला फॉर्म आगे नहीं बढ़ा रहे। जिसके कारण अब आवेदन की तारीख 21 जून तक बढ़ा दी गई है।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से सभी जिलों के डीआईओएस को पत्र लिखकर नाराजगी जताई गई है कि आखिर स्थानांतरण के लिए आवेदन करने वाले राजकीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के फॉर्म आगे क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। अब निदेशक की ओर से नई ईमेल directorsecondaryeducation2026@gmail.com निर्धारित की गई है। राजकीय शिक्षक संघ के संरक्षक रामेश्वर पांडेय का कहना है कि शिक्षकों को स्थानांतरण के लिए परेशान किया जा रहा है।




    माध्यमिक विद्यालयों के सरप्लस शिक्षकों की सूची 12 जून को आएगी, जून 18 तक शिक्षक डीआईओएस कार्यालय में तबादले के लिए करेंगे आवेदन

    सरप्लस वाले शिक्षकों को खुद आवेदन पर मिल सकेगा बेहतर विकल्प

    लखनऊ। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया 12 जून से शुरू होगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें सरप्लस के लिए स्वतः आवेदन करने वाले शिक्षकों को बेहतर विकल्प मिल सकेगा।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से जारी निर्देश के अनुसार 12 जून तक डीआईओएस एनआईसी की वेबसाइट पर सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी करेंगे। शिक्षक 18 जून तक डीआईओएस ऑफिस में ऑनलाइन आवेदन करेंगे। डीआईओएस 25 जून तक आवेदन पत्रों का परीक्षण कर अनुमोदन माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भेजेंगे। 30 जून तक शिक्षकों को कार्यमुक्त व कार्यभार ग्रहण कराया जाएगा।

    उन्होंने कहा है कि सरप्लस शिक्षकों से मिले विकल्पों पर तैनाती के लिए तय मानक के आधार पर वरीयता क्रम में रखा जाएगा। वहीं सरप्लस शिक्षक यदि अपनी नई तैनाती के लिए खुद आवेदन नहीं करते हैं तो खाली पद के सापेक्ष उन्हें किसी भी विद्यालय में समायोजित या स्थानांतरित कर दें। सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए सबसे आखिर में आने वाले शिक्षकों को सबसे पहले तबादला होगा। उन्हें सरप्लस माना जाएगा। 

    निदेशक ने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि जोन एक में जिले की नगरीय सीमा या जिला मुख्यालय से आठ किमी की दूरी मानी जाएगी। जोन दो में जिले में तहसील मुख्यालय से दो किमी की दूरी मानी जाएगी। जोन तीन में उपरोक्त से अतिरिक्त क्षेत्र के विद्यालय आएंगे। शासन ने जोन वाइज शिक्षकों के लिए मानक तय किए हैं।

    निदेशक ने सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए भी विस्तृत मानक की व्याख्यान की है। उन्होंने कहा है कि नई नियुक्ति-तैनाती में जोन तीन में सबसे पहले नियुक्ति-तैनाती की जाएगी। इसकी न्यूनतम अवधि तीन साल की होगी। पहले चरण में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित श्रेणी के शिक्षकों को तबादले का विकल्प दिया जाएगा।



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक / शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण के संबंध में विभागीय आदेश जारी 
     




    राजकीय माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के जून अंत तक होंगे तबादले, शासन ने जारी किया शासनादेश, संवर्ग में 20 फीसदी से अधिक नहीं किए जाएंगे तबादले


    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादले को शासन ने हरी झंडी दे दी है। इसके तहत जून में पहले सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। बाद में सामान्य तबादले होंगे। संवर्ग की संख्या के 20 फीसदी तक तबादले किए जाएंगे।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की सचिव किंजल सिंह ने निर्देश जारी किया। कहा, राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों में पहले चरण में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। इसमें कार्यरत विद्यालय में बाद में कार्यभार संभालने वाले को पहले सरप्लस माना जाएगा। वहीं, सेना से जुड़े लोगों के पति-पत्नी, कैंसर आदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिनकी आयु 30 जून को 58 साल पूरी हो रही है, राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक को इसमें यथासंभव शामिल नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा है कि इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। दूसरे चरण में चार श्रेणी के शिक्षकों को निर्धारित मानक पर तबादला दिया जाएगा। इसमें सेना से जुड़े लोगों के पति-पत्नी, कैंसर आदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिनकी आयु 30 जून को 58 साल पूरी हो रही है, यदि पति-पत्नी दोनों शासकीय सेवा में अलग-अलग जिले में तैनात हैं। तीसरे चरण में शेष शिक्षकों का तबादला किया जाएगा।

    सचिव ने कहा है कि संवर्ग की संख्या के 20 प्रतिशत सीमा तक तबादले होंगे। इसे बढ़ाने का अधिकार विभागीय मंत्री के पास होगा। आवेदन से लेकर तबादला प्रक्रिया जून में ही पूरी की जाएगी। ताकि विद्यालय खुलने से पहले शिक्षकों की तैनाती हो सके। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी भी शिक्षक को उसकी मूल तैनाती के स्थान से अलग संबद्ध नहीं किया जाएगा। किसी भी विद्यालय में मानक से अधिक शिक्षक तैनात नहीं किए जाएंगे। उन्होंने महानिदेशक स्कूल शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा निदेशक को इसे पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।


    सरप्लस शिक्षकों के लिए मानक

    ◾खुद के दिव्यांग होने पर 10 से 20 नंबर

    ◾पत्नी-पति, बच्चे के दिव्यांग होने पर 10 नंबर

    ◾राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक होने पर 10 नंबर

    ◾विधवा-तलाकशुदा महिला शिक्षिका को 10 नंबर

    ◾आश्रित बच्चों की देखभाल वाले पुरुष शिक्षकों को 10 नंबर

    ◾महिला शिक्षिका होने पर 10 नंबर

    ◾जोन 3 में तैनात शिक्षक को अधिकतम 10 नंबर

    ◾जोन 2 में तैनात शिक्षक को अधिकतम 10 नंबर

    ◾शिक्षक की आयु के अनुसार हर साल के लिए एक नंबर



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक/शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी