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Tuesday, August 22, 2119

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    Saturday, October 31, 2026

    वर्षों तक संविदा पर कम मानदेय में काम कराना जबरन श्रम के समान- हाईकोर्ट, सभी कस्तूरबा शिक्षकों को मिलेगा 17 हजार मासिक मानदेय का लाभ

    कस्तूरबा शिक्षकों को मिलेगा 17 हजार रुपये मासिक मानदेय, चार माह में नियमितीकरण पर करे विचार

    हाई कोर्ट ने चार माह में पद सृजित कर नियमित शिक्षकों के समान सेवा शर्ते लागू करने का दिया निर्देश

    वर्षों तक संविदा पर कम मानदेय में काम कराना जबरन श्रम के समान- हाईकोर्ट, सभी कस्तूरबा शिक्षकों को मिलेगा 17 हजार मासिक मानदेय का लाभ

    31 अक्टूबर 2026

    लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने प्रदेश सरकार को चार माह के भीतर शिक्षकों के पद स्वीकृत अथवा सृजित करने और उनकी सेवा शर्तें नियमित शिक्षकों के समान बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने नियमितीकरण के दावों पर भी शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता और सेवा अवधि के आधार पर कानून के अनुसार विचार करने को कहा है। अर्चना बूध व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि जब तक सरकार आवश्यक कदम नहीं उठा लेती, तब तक सभी केजीबीवी शिक्षकों को निर्णय की तारीख से 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। उन्हें निश्शुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 24(2) के तहत सेवा संबंधी संरक्षण भी मिलेगा।

    न्यायमूर्ति ने कहा कि शिक्षकों को वर्षों तक संविदा पर रखकर, पद सृजित किए बिना और नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान दिए बिना काम कराना संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत निषिद्ध जबरन श्रम के समान है। शिक्षकों को दिया जा रहा मानदेय अर्द्धकुशल श्रमिकों के निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम है। अदालत ने इसे मानदेय कहना क्रूर मजाक करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की सेवा शर्तें इंटरमीडिएट स्तर तक के नियमित शिक्षकों के समान होनी चाहिए। यह व्यवस्था केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी केजीबीवी शिक्षकों पर लागू होगी। मानदेय और वेतन में समय-समय पर संशोधन कर उन्हें सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन एवं परिलब्धियों के अनुरूप लाने का भी निर्देश दिया गया है।

    अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार को सहमति के अनुसार खर्च में अपना हिस्सा देना होगा। हालांकि, केंद्र से धनराशि स्वीकृत नहीं होने का बहाना बनाकर राज्य सरकार आदेश के पालन से इन्कार नहीं कर सकती। राज्य सरकार पहले भुगतान कर बाद में केंद्र से उसका हिस्सा वसूल सकती है।

    न्यायालय ने कहा कि वंचित वर्गों की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाली योजना में शिक्षकों को लंबे समय तक अपर्याप्त वेतन और असुरक्षित सेवा में रखना संवैधानिक प्रविधानों के अनुरूप नहीं है।


    कस्तूरबा  गांधी स्कूलों के संविदा शिक्षकों को मिलेगा  17000₹ मानदेय, हाईकोर्ट ने दिए जा रहे मानदेय को अर्धकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम बताया

    30 अक्टूबर 2026

    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) के संविदा शिक्षकों को 17000 रुपये मासिक मानदेय देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने चार महीने में शिक्षकों के नियमितिकरण पर विचार करने का आदेश भी दिया है। अदालत ने कहा कि वर्षों तक संविदा पर रखकर उचित वेतन और सेवा सुरक्षा से वंचित रखना जबरन श्रम कराने के समान है। शिक्षकों को दिया जा रहा मानदेय अर्धकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित पारिश्रमिक से भी कम है।


     न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने अर्चना बोध व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। यह व्यवस्था केवल याचियों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि प्रदेश के सभी केजीबीवी शिक्षकों पर लागू होगी।

    वित्तविहीन स्कूल संस्कृत बोर्ड परीक्षा में नहीं बनेंगे परीक्षा केंद्र, 100 से कम और 500 से अधिक परीक्षार्थी नहीं होंगे आवंटित

    वित्तविहीन स्कूल संस्कृत बोर्ड परीक्षा में नहीं बनेंगे परीक्षा केंद्र, 100 से कम और 500 से अधिक परीक्षार्थी नहीं होंगे आवंटित 

     लखनऊ : उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की वर्ष 2027 की परीक्षाओं में वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र नहीं बनाया जाएगा। किसी भी केंद्र पर 100 से कम और 500 से अधिक परीक्षार्थी आवंटित नहीं किए जाएंगे। परीक्षा की शुचिता और नकल पर अंकुश लगाने के लिए परिषद ने केंद्र निर्धारण की नई नीति जारी की है। इसके तहत सरकारी और सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के साथ राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी।


    शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) एवं परिषद के अध्यक्ष प्रताप सिंह बघेल ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को केंद्र निर्धारण के निर्देश जारी किए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक या उनके अधीन राजपत्रित अधिकारियों की टीम विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं और संसाधनों का सत्यापन करेगी। सीसी कैमरे, वायस रिकार्डर, डीवीआर, राउटर, मानीटर और हाईस्पीड इंटरनेट का चालू होना अनिवार्य है। 

    माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए पहले से केंद्र बनाए गए विद्यालयों को संस्कृत बोर्ड की परीक्षा का केंद्र नहीं बनाया जाएगा। प्रश्नपत्र लीक होने, चोरी, गोपनीयता भंग होने या उत्तर पुस्तिकाएं केंद्र के बाहर लिखे जाने के मामले सामने आने वाले विद्यालयों को भी केंद्र नहीं बनाया जाएगा। परीक्षार्थियों को यथासंभव 12 किलोमीटर के दायरे में केंद्र आवंटित किया जाएगा। एक ही प्रबंधक के विद्यालयों के विद्यार्थियों को आपस में केंद्र नहीं दिया जाएगा। निर्धारित केंद्र के अलावा कहीं और परीक्षा देने पर परिणाम निरस्त होगा और संबंधित केंद्र को तीन वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा।

    शिक्षक राजनीति पर दलों का कब्जा, संगठनों की साख पर उठ रहे सवाल, विधान परिषद चुनाव में शून्य पर सिमटे शिक्षक संगठन

    शिक्षक राजनीति पर दलों का कब्जा, संगठनों की साख पर उठ रहे सवाल, विधान परिषद चुनाव में शून्य पर सिमटे शिक्षक संगठन

    पूर्व एमएलसी बोले, बदल देना चाहिए चुनाव का नाम

    31 अक्टूबर 2026

    लखनऊः प्रदेश में शिक्षक राजनीति का परंपरागत समीकरण बदलता दिख रहा है। शिक्षक संगठनों की जगह राजनीतिक दलों का प्रभाव बढ़ने से शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व की प्रकृति पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विधान परिषद चुनाव में शिक्षक संगठनों के प्रत्याशियों की हार  को इसी बदलाव का संकेत है। पूर्व शिक्षक विधायकों को आशंका है कि राजनीतिक दलों के समर्थन से सदन में पहुंचे प्रतिनिधियों के सामने शिक्षकों की मांगों और दलगत प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। सवाल सिर्फ चुनाव जीतने का नहीं, बल्कि शिक्षकों की स्वतंत्र आवाज और उनके मुद्दों की धार बनाए रखने का भी है।

    विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में शिक्षक संगठन शून्य पर सिमट गए। छह सीटों में से चार भाजपा और दो सपा ने जीती हैं। चुनाव का दिलचस्प पहलू यह है कि शिक्षक राजनीति में सक्रिय रहे चेहरे अब राजनीतिक दलों के साथ हैं। आगरा शिक्षक सीट पर डा. आकाश अग्रवाल ने सपा के टिकट पर और गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने भाजपा के समर्थन से जीत दर्ज की, जबकि पिछली बार दोनों निर्दलीय जीते थे।

    साफ़ है कि शिक्षक मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए राजनीतिक अपने संगठन, चुनाव प्रबंधन और संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिक्षक भी राजनीतिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षक संगठनों के सामने अपनी ताकत बनाए रखने की भी चुनौती है। पुरानी पेंशन, सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय, वेतन विसंगतियां आदि मुद्दे लंबे समय से शिक्षक राजनीति के केंद्र में रहे हैं। पूर्व शिक्षक विधायकों की चिंता है कि यदि शिक्षक संगठनों का स्वतंत्र राजनीतिक दबाव कमजोर होता है तो शिक्षकों की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की क्षमता भी प्रभावित होगी।

    पूर्व शिक्षक विधायक जगवीर किशोर जैन राजनीतिक दलों का प्रभाव बढ़ने से मुद्दों के कमजोर पड़ने की आशंका जताते हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक दल, शिक्षक राजनीति पर हावी हैं। इस चुनाव में मुकाबला सीधे भाजपा और सपा में था, शिक्षकों के मुद्दे कहीं नहीं थे। ऐसे में अब इसे शिक्षक निर्वाचन कहना ही सही नहीं, इसका नाम बदल देना चाहिए। शिक्षक संगठनों के राजनीतिकरण और वित्तविहीन शिक्षकों के अपने मुद्दों के बजाय राजनीतिक प्रभाव में मतदान से यह स्थिति बनी है। जो लोग वित्तविहीन शिक्षकों के वोट से जीत रहे हैं, वो भी उनकी आवाज नहीं उठा रहे।

    वहीं पूर्व शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी कहते हैं कि शिक्षकों के बहुत से संगठन बन गए हैं। इससे शिक्षकों की एकजुटता पहले जैसी नहीं रही। जो प्रतिनिधि राजनीतिक दलों से चुनकर जाएंगे, उनके सामने अपने दल की रीति-नीति के हिसाब से चलने की मजबूरी होगी। शिक्षक नेताओं का कहना है कि संगठनों को अपने मुद्दे और हितों की लड़ाई, आंदोलनों संघर्ष आदि से जारी रखनी होगी। इससे भी जरूरी, छोटे संगठनों में बंटने के बजाय एकजुटता के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे।


    विधान परिषद में अब शिक्षक संगठनों के एकमात्र प्रतिनिधि बचे, समस्याओं पर आवाज उठाने के लिए अब राजनीतिक दलों पर निर्भर होंगे शिक्षक


    निर्दल समूह के राज बहादुर चंदेल ही शिक्षक संघ से संबंधित

    इसके अलावा अन्य सदस्य किसी न किसी दल से जुड़े होंगे

    30 अक्टूबर 2026
    लखनऊ। प्रदेश के उच्च सदन विधान परिषद में अब शिक्षक - संगठनों के एकमात्र प्रतिनिधि ही बचे हैं। हाल में हुए एमएलसी चुनाव के बाद सदन में माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के संरक्षक राजबहादुर चंदेल ही शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि बचे हैं। कहने के लिए तो प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक खंड शिक्षक निर्वाचन की सीटें हैं, लेकिन शिक्षक संगठनों से ही वहां पर आवाज उठाने का काम अब राजनीतिक दलों पर निर्भर होगा।

    उच्च सदन में एक समय ऐसा भी था जब आधा दर्जन से अधिक प्रतिनिधि शिक्षक संगठनों के थे। दो खंड स्नातक की सीटों पर भी शिक्षक प्रतिनिधि हुआ करते थे। इसमें माध्यमिक शिक्षकों के शर्मा गुट का दबदबा होता था। राजबहादुर चंदेल 1992, 1998 व 2004 में शर्मा गुट से ही तीन बार कानपुर-उन्नाव खंड शिक्षक सीट से एमएलसी रहे हैं।

    शर्मा गुट से जब उनका टिकट काटा गया तो उन्होंने निर्दल समूह बनाते हुए 2010 में चुनाव लड़ा और जीते। वर्ष 2017 और 2023 में भी चुने गए। उनका कार्यकाल फरवरी 2029 तक है। उन्होंने माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) का नेतृत्व भी किया। वर्तमान में वे संगठन के संरक्षक हैं।

    बता दें कि वर्तमान सदन में उनके साथ ही सदस्य रहे ध्रुव कुमार त्रिपाठी व निर्दल समूह के डॉ. आकाश अग्रवाल भी शिक्षक संगठनों से ही जुड़े थे। दोनों इस चुनाव में सदस्य के रूप में तो सदन में वापस लौटे हैं, लेकिन वे भाजपा और सपा के बैनर से चुनकर पहुंचे हैं। ऐसे में सदन में अब राजबहादुर सिंह चंदेल ही सिर्फ शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रहेंगे। अन्य सदस्य किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े होंगे।

    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आरपी मिश्रा कहते हैं कि पहली बार ऐसा होगा कि हमारे संगठन का सदन में प्रतिनिधित्व नहीं होगा। प्रदेश में आठ खंड स्नातक और आठ खंड शिक्षक की सीटें इसीलिए बनाई गई थीं ताकि उनके हित की बात हो सके। पहले राजनीतिक दल इसमें शामिल नहीं होते थे, लेकिन 2020 से धीरे-धीरे इसमें राजनीतिक दल आना शुरू हुए। आज यह स्थिति हुई कि एकमात्र शिक्षक संगठन के प्रतिनिधि हैं। ऐसे में सदन में शिक्षकों की आवाज उठाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।

    शिक्षक-कर्मचारी प्रतिनिधि तीसरे नंबर पर
    खंड शिक्षक निर्वाचन के साथ ही प्रदेश में पांच सीटों पर खंड स्नातक सीटों पर भी चुनाव हुए। इसमें लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन में शिक्षक-कर्मचारियों के नेता व अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु भी मैदान में उतरे थे। वे चुनाव तो नहीं जीत सके, लेकिन 10832 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।



    शिक्षकों के चुनाव में शिक्षक संगठनों का ही डब्बा गोल, माध्यमिक शिक्षकों के चार संगठन मैदान में, एक भी सीट नहीं जीते

    सिर्फ गोरखपुर सीट पर लड़ाई में दिखे शिक्षकों के प्रतिनिधि

    29 अक्टूबर 2026
    लखनऊ। प्रदेश में शिक्षकों के चुनाव (एमएलसी) में ही शिक्षक संगठनों का डब्बा गोल हो गया है। प्रदेश में यूं तो शिक्षकों के नेतृत्व का दावा करने वाले कई शिक्षक संगठन अलग-अलग नामों से चल रहे हैं लेकिन खंड शिक्षक की आधा दर्जन सीटों पर हुए चुनाव में शिक्षक संगठनों का खाता भी नहीं खुल सका है। एक सीट को छोड़कर किसी भी सीट पर कोई शिक्षक संगठन प्रत्याशी नंबर दो की लड़ाई में भी नहीं रहा।

    प्रदेश में 11 सीटों पर हुए एमएलसी चुनाव में माध्यमिक शिक्षक संघ के चार बड़े गुट खंड शिक्षक की छह सीटों पर चुनाव मैदान में उतरे थे। माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के प्रदेश अध्यक्ष चेतनारायण सिंह वाराणसी खंड शिक्षक सीट से चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें महज 3,471 वोट मिले। लखनऊ सीट पर माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा को 1,940 मत ही मिले। इसी गुट के महामंत्री राजीव यादव ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर कुछ चरणों में बढ़त बनाई और अंत तक कांटे की टक्कर दी। उन्हें 14,580 वोट मिले, लेकिन जीत नहीं सके। आगरा सीट पर रणविजय सिंह मुकाबले से बाहर रहे।

    माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जीतेंद्र कुमार पटेल वाराणसी सीट से लड़े और 1,088 वोटों पर सिमट गए। इस गुट ने लखनऊ और गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर भी प्रत्याशी उतारे, लेकिन कहीं प्रभाव नहीं छोड़ सका। चंदेल गुट ने भी छह सीटों पर किस्मत आजमाई, मगर सफलता नहीं मिली।


    शर्मा गुट का पांच दशक पुराना दबदबा खत्म

    शिक्षक राजनीति में इस बार सबसे बड़ा झटका शर्मा गुट को लगा। करीब पांच दशक तक सदन में प्रभाव रखने वाले इस संगठन का प्रतिनिधित्व करने वाले ध्रुव कुमार त्रिपाठी चुनाव से ठीक पहले भाजपा प्रत्याशी बन गए। गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर शर्मा गुट ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। संगठन के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा भी वाराणसी सीट से भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे, लेकिन 6,060 मत पाकर हार गए। शर्मा गुट ने मेरठ, बरेली-मुरादाबाद, आगरा और लखनऊ सीटों पर प्रत्याशी उतारे। मेरठ से डॉ. सुशील कुमार पुंडीर को 1,579 और लखनऊ से जगजीवन प्रसाद शुक्ला को 1,279 वोट मिले। अन्य दो सीटों पर भी संगठन का प्रदर्शन कमजोर रहा। इस तरह लगभग 48 साल तक एमएलसी रहे ओमप्रकाश शर्मा के नेतृत्व वाला शिक्षक संगठन सदन में शून्य हो गया।

    विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग पर आयोग से परीक्षा कार्यक्रम तलब, मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को

    विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग पर आयोग से परीक्षा कार्यक्रम तलब, मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को

    हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से आगामी परीक्षाओं का मांगा ब्योरा


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग से जुड़ी विशेष अपील पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से आगामी सामान्य टीईटी परीक्षाओं का प्रस्तावित कार्यक्रम हलफनामे पर मांगा है।

    न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद सहित 221 शिक्षामित्रों की ओर से दाखिल विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी।


    याचिकाकर्ताओं ने दो सितंबर 2026 के शासनादेश और तीन सितंबर को जारी विज्ञापन को चुनौती देते हुए विशेष टीईटी में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि वे निर्धारित शैक्षिक और प्रशिक्षण योग्यताएं रखते हैं। संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर देना और शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।

    इससे पहले न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने एक अक्तूबर को उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ विशेष अपील दाखिल की गई है। अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि टीईटी केवल पात्रता परीक्षा है। इसे पास करने से स्वतः नियुक्ति का अधिकार नहीं मिलता, इसलिए शिक्षामित्रों को इससे वंचित रखने का औचित्य नहीं है।

    वहीं, आयोग की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार प्रत्येक वर्ष कम से कम एक और प्राथमिकता से दो टीईटी परीक्षाएं कराई जानी हैं। इस पर खंडपीठ ने वर्ष 2026 की दूसरी सामान्य टीईटी और अगले दो वर्षों की परीक्षाओं का कार्यक्रम मांगा है।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीटीईटी-2026 के दो विवादित प्रश्नों को मूल्यांकन से बाहर करने के लिए कहा, 148 प्रश्नों के आधार पर अंक निर्धारित कर परिणाम करें संशोधित, नए सिरे से जारी करें यूपीटीईटी का रिजल्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीटीईटी-2026 के दो विवादित प्रश्नों को मूल्यांकन से बाहर करने के लिए कहा, 148 प्रश्नों के आधार पर अंक निर्धारित कर परिणाम करें संशोधित,  नए सिरे से जारी करें यूपीटीईटी का रिजल्ट


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी-2026) के मास्टर सेट के दो विवादित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 36 व 37) को मूल्यांकन से बाहर करने और 148 प्रश्नों के आधार पर नए सिरे से अंक निर्धारित कर परिणाम संशोधित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने विजय सोनकर व तीन अन्य अभ्यर्थियों की याचिका का निस्तारण करते हुए दिया है।


    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा गत तीन जुलाई को प्राथमिक स्तर की यूपीटीईटी-2026 परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद जारी अंतिम उत्तर कुंजी में आयोग ने मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 व 37 में दो-दो विकल्पों को सही मान लिया। आयोग ने मूल्यांकन के दौरान केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अंक दिए, जिन्होंने उन दो मान्य विकल्पों में से किसी एक को चुना था। अन्य विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों को कोई अंक नहीं मिला। 

    गत 26 अगस्त को घोषित परिणाम में सामान्य/ओबीसी कट ऑफ (82 अंक) से मामूली अंतर (जैसे 80 से 81.39 अंक) से अनुत्तीर्ण रहने वाले अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचियों की ओर से दलील दी गई कि बहुविकल्पीय परीक्षा में किसी प्रश्न के दो उत्तर सही हैं तो वह प्रश्न त्रुटिपूर्ण माना जाना चाहिए और उसे पूरी तरह हटाया जाना चाहिए या सभी अभ्यर्थियों को समान लाभ मिलना चाहिए।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार विकल्पों में से एक विकल्प चुनने वाली वस्तुनिष्ठ परीक्षा में यदि चयन संस्था स्वयं दो विकल्पों को सही मान लेती है तो वह प्रश्न अपनी मूल्यांकन क्षमता खो देता है। यह प्रश्न योग्य और अयोग्य अभ्यर्थी के बीच भेद करने में असमर्थ हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि चयन आयोग ने इसी प्रश्नपत्र के प्रश्न संख्या 38 को पहले ही मूल्यांकन से बाहर किया था। ऐसे में दो सही उत्तर वाले प्रश्नों के साथ अलग व्यवहार करने का कोई तार्किक आधार नहीं है। 

    कोर्ट ने माना कि केवल उन अभ्यर्थियों को अंक देना जिन्होंने बाद में मान्य किए गए दो विकल्पों में से किसी एक को चुना था, कानूनी रूप से सही नहीं है। प्रश्न को हटाने से सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यव्हार सुनिश्चित होता है। कोर्ट ने कहा किमास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर किया जाए। इन दो प्रश्नों के हटने के बाद प्रश्नपत्र को 148 प्रश्नों का माना जाएगा और निर्धारित प्रतिशत के अनुसार ही अर्हता अंक की गणना की जाए।

     सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के आधार पर इस संशोधन का लाभ सभी समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को निष्पक्ष रूप से दिया जाए। आयोग को निर्देश दिया गया है कियाचियों के अंकों की पुनः गणना करे और उनके परिणाम व स्कोरकार्ड को उसके अनुसार संशोधित करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश से प्राप्त पात्रता केवल यूपीटीईटी-2026 के संशोधित परिणाम और अहर्ता स्थिति तक सीमित रहेगी। यह स्वतः ही किसी भावी भर्ती प्रक्रिया में सीधे चयन या नियुक्ति का अधिकार नहीं देगी।

    विशेष विभागीय टीईटी परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी, तीन नवंबर को छह मंडल मुख्यालयों में 131 केंद्रों पर होगी परीक्षा, डायरेक्ट लिंक से करें डाउनलोड

    विशेष विभागीय टीईटी परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी, 

    तीन नवंबर को छह मंडल मुख्यालयों में 131 केंद्रों पर होगी परीक्षा, डायरेक्ट लिंक से करें डाउनलोड 👇





    केवल 6 मंडलों में विशेष टीईटी के परीक्षा केंद्र बनाए जाने से वरिष्ठ शिक्षकों को करनी पड़ेगी लंबी यात्रा , शिक्षकों ने मांगा विशेष अवकाश

    29 अक्टूबर 2026
    प्रयागराजः उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग तीन नवंबर को बेसिक स्कूलों के शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने जा रहा है। सभी 18 मंडलों के शिक्षकों ने इसमें आवेदन किया है, बावजूद इसके परीक्षा के लिए छह मंडलों प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और आगरा में परीक्षा केंद्र बनाए हैं।

    इस परीक्षा में बड़ी संख्या में उम्रदराज शिक्षक शामिल होंगे। वे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में अपनी सेवा को संरक्षित करने के लिए स्पेशल टेट दे रहे हैं। न्यायालय ने शिक्षकों के लिए टेट उत्तीर्ण करने की समय सीमा 31 अगस्त, 2028 तक निर्धारित की है। ऐसे में इन शिक्षकों के पास टेट में शामिल होने के लिए सीमित विकल्प हैं। प्रत्येक मंडल व जनपद में परीक्षा केंद्र न बनाए जाने से परीक्षार्थियों को करीब 200 से 300 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ सकती है। बहुत से अभ्यर्थी परीक्षा से वंचित हो सकते हैं। 

    उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ और जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि परीक्षा के दिन अर्थात तीन नवंबर को स्पेशल टेट देने वाले शिक्षकों के लिए अवकाश स्वीकृत किया जाए।


    स्पेशल टीईटी की लिखित परीक्षा तीन नवंबर को प्रदेश के छ प्रमुख मंडल मुख्यालयों में होगी,  31 अक्टूबर से डाउनलोड कर सकेंगे प्रवेश पत्र 

    25 अक्टूबर 2026

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शुक्रवार देर रात 'विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा' (विशेष टीईटी) की परीक्षा तिथि और दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि स्पेशल टीईटी की लिखित परीक्षा आगामी तीन नवंबर को प्रदेश के 6 प्रमुख मंडल मुख्यालयों में होगी।


    परीक्षा प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और आगरा के निर्धारित केंद्रों पर दो पालियों में संपन्न होगी। प्रथम पाली सुबह 09:30 से 12 बजे तक और द्वितीय पाली दोपहर 02:30 से पांच बजे तक आयोजित होगी। आयोग की ओर से परीक्षा के लिए आधिकारिक विज्ञापन पांच सितंबर को प्रकाशित किया गया था।

    आयोग के उपसचिव संजय कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा और समयबद्ध यात्रा प्रबंधन के दृष्टिगत आवंटित परीक्षा जनपद का विवरण आयोग की अधिकृत वेबसाइट http://upessc.up.gov.in/ पर प्रदर्शित कर दिया गया है।


    Friday, October 30, 2026

    SIET UP के द्वारा 13 प्रार्थना गीत वीडियो जारी, देखें यूट्यूब लिंक, अब विद्यालयों की प्रार्थना सभा में गूंजेंगे संगीतमयी प्रेरणादायी गीत

    स्कूलों की प्रार्थना सभाएं 13 रोचक वीडियों से बनेगी खास, सभी सरकारी व निजी स्कूल कर सकेंगे उपयोग लेकिन व्यावसायिक उपयोग पर रहेगी रोक  

    30 अक्टूबर 2026
    लखनऊ । यूपी की प्रार्थना सभाओं को खास बनाने के लिए राज्य शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (एसआईईटी) ने 13 रोचक वीडियो तैयार किए हैं। जिसकी मदद से बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के विद्यालयों में यह प्रार्थना सभाएं आयोजित होंगी।

    बुधवार को इन 13 चयनित प्रार्थना गीतों के आकर्षक दृश्यांकन और एनीमेशन युक्त वीडियो को जारी किया गया। फिलहाल इन प्रार्थना के वीडियो के किसी भी तरह के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाई गई है। 

    बुधवार को राजधानी स्थित एसआईईटी परिसर में अपर मुख्य सचिव, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से इसे रिलीज किया गया। विद्यालयों में प्रार्थना सभाओं को अधिक प्रभावशाली, प्रेरणादायी व संस्कारपरक बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। सभी सरकारी व निजी स्कूल इन 13 प्रार्थना गीतों का उपयोग कर सकेंगे लेकिन इनके किसी भी तरह के व्यावसायिक उपयोग पर रोक रहेगी।

    वीडियो संकलन में हम होंगे कामयाब, बादल पे पांव है, तेरी है जमीन तेरा आसमान, इतनी शक्ति हमें देना दाता, हमको मन की शक्ति देना, तुम ही हो माता, इंसाफ की डगर पे, आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं, नेकी की राह, ज्योति से ज्योति जगाते चलो, तेरी पनाह में रखना और ऐ मालिक तेरे बंदे हम जैसे 13 प्रार्थना गीत शामिल हैं। प्रत्येक गीत का अलग वीडियो तैयार किया गया है।



    SIET UP के द्वारा 13 प्रार्थना गीत वीडियो जारी, देखें यूट्यूब लिंक, अब विद्यालयों की प्रार्थना सभा में गूंजेंगे संगीतमयी प्रेरणादायी गीत

    29 अक्टूबर 2026
    उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में प्रार्थना सभा को अधिक प्रेरणादायी और रोचक बनाने के उद्देश्य से SIET, उत्तर प्रदेश द्वारा 13 संगीतमय प्रार्थना गीतों के वीडियो तैयार किए गए हैं। उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार, इन वीडियो का विमोचन 28 अक्टूबर 2026 को अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा द्वारा किया गया।

    खास बात यह है कि इन गीतों का गायन प्रदेश के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा किया गया है। इन गीतों के माध्यम से बच्चों को प्रेरणा देने, उनमें सकारात्मक विचार विकसित करने और विद्यालय की प्रार्थना सभा को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है।


    🎵 सभी 13 प्रार्थना गीतों के वीडियो लिंक

    नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके सभी प्रार्थना गीतों को YouTube पर सुन सकते हैं। विद्यालयों में इनका उपयोग प्रार्थना सभा एवं अन्य उपयुक्त शैक्षिक गतिविधियों में किया जा सकता है।

    1. 1
      हमको मन की शक्ति देना▶ वीडियो देखें
    2. 2
      हम होंगे कामयाब▶ वीडियो देखें
    3. 3
      आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिंदुस्तान की▶ वीडियो देखें
    4. 4
      तू प्यार का सागर है▶ वीडियो देखें
    5. 5
      ज्योत से ज्योत जगाते चलो▶ वीडियो देखें
    6. 6
      ऐ मालिक तेरे बंदे हम▶ वीडियो देखें
    7. 7
      इतनी शक्ति हमें देना दाता▶ वीडियो देखें
    8. 8
      इंसाफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के▶ वीडियो देखें
    9. 9
      तेरी है ज़मीं, तेरा आसमान▶ वीडियो देखें
    10. 10
      तेरी पनाह में हमें रखना▶ वीडियो देखें
    11. 11
      ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे▶ वीडियो देखें
    12. 12
      तुम्हीं हो माता-पिता तुम्हीं हो▶ वीडियो देखें
    13. 13
      बादल पे पाँव है▶ वीडियो देखें

    📺 SIET / NIPUN UP का आधिकारिक YouTube चैनल

    अन्य शैक्षिक वीडियो और उपलब्ध सामग्री देखने के लिए NIPUN UP के YouTube चैनल पर जाएँ।

    ▶ NIPUN UP YouTube चैनल देखें




    यूपी के बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में बदलेगा सुबह की प्रार्थना का सुर-ताल, अब मोबाइल और स्मार्ट स्क्रीन पर बजेंगी 12 खास प्रार्थनाएं

    मोबाइल से भी सुन सकेंगे विद्यार्थी, विभाग के डिजिटल मंचों पर मिलेगी सामग्री

    23 अक्टूबर 2026
    लखनऊ । बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों की प्रार्थना सभा अब नए सुर-ताल से सजेगी। राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान ने विद्यार्थियों के लिए 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं के संगीतबद्ध वीडियो तैयार की हैं। जल्द ही विद्यालय इन्हें नियमित प्रार्थना सभा में उपयोग कर सकेंगे।

    बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य विद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण और उपयोगी डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराना है। इसके लिए 12 चयनित प्रार्थनाओं को बेहतर गायन, संगीत संयोजन और दृश्य प्रस्तुति के साथ वीडियो रूप दिया गया है।


    इन्हें विभाग और संस्थान के डिजिटल मंचों पर उपलब्ध कराया जाएगा। यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत अन्य डिजिटल माध्यमों पर वीडियो जारी होने के बाद शिक्षक अपनी सुविधा के अनुसार इनका उपयोग कर सकेंगे।

    मोबाइल, कंप्यूटर या स्मार्ट स्क्रीन के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रार्थनाएं सुनाई और दिखाई जा सकेंगी। इससे विद्यालयों को प्रार्थना सभा के लिए अलग से संगीत या प्रस्तुति तैयार कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    साथ ही विद्यार्थियों को नियमित रूप से सामूहिक गायन और गुणवत्तापूर्ण प्रस्तुति का अवसर मिलेगा। जिला विधालय निरीक्षक अंजलि अग्रवाल ने बताया कि संगीत और सामूहिक प्रार्थना विद्यार्थियों में अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक वातावरण विकसित करने में सहायक होती है। जल्द ही विद्यालय अपनी आवश्यकता के अनुसार एसआईईटी की डिजिटल सामग्री का उपयोग कर सकेंगे।


    प्रार्थना सभा में दिखेगा नया अंदाज
    संगीतबद्ध वीडियो उपलब्ध होने से विद्यालयों को प्रार्थना सभा के लिए तैयार सामग्री मिल जाएगी। सामूहिक गायन, बेहतर संगीत संयोजन और दृश्य प्रस्तुति से सुबह की सभा अधिक प्रभावी और आकर्षक बनेगी।

    मोबाइल से भी सुनाई जा सकेंगी प्रार्थनाएं
    डिजिटल मंचों पर वीडियो उपलब्ध होने के बाद शिक्षक मोबाइल फोन के माध्यम से भी विद्यार्थियों को प्रार्थनाएं सुना और दिखा सकेंगे। इससे विद्यालयों में प्रार्थना सभा के लिए सुर-ताल का इंतजाम आसान हो जाएगा।




    बेसिक-माध्यमिक विद्यालयों में गूंजेगी संगीतमय प्रार्थना,  SIET में 12 प्रार्थनाओं की शूटिंग, रिकॉर्डिंग व संपादन होगा

    17 सितंबर 2026
    लखनऊ। प्रदेश के बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों की प्रार्थना सभा को अधिक प्रभावी, संगीतमय और व्यवस्थित स्वरूप देने की पहल राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) की ओर से की गई है। संस्थान 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं की संगीतबद्ध वीडियो सामग्री तैयार कराएगा। बुधवार को एसआईईटी में संगीत शिक्षकों व छात्राओं की कार्यशाला आयोजित की गई।


    इसमें संगीत शिक्षकों व छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इस दौरान प्रार्थनाओं के गायन, सामूहिक प्रस्तुति, संगीत संयोजन व स्टूडियो में रिकॉर्डिंग से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। एसआईईटी निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने कहा कि बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के मार्गदर्शन में यह पहल शुरू की गई है।


    डिजिटल मंचों पर भी उपलब्ध कराया जाएगा

    संस्थान और विभाग के यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित अन्य डिजिटल माध्यमों पर इसे उपलब्ध कराया जाएगा ताकि विद्यालय और शिक्षक अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका प्रयोग प्रार्थना सभा में कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि सभी 12 प्रार्थनाओं को प्रस्तुति के आधार पर तैयार किया जाएगा। इससे विद्यालयों को प्रार्थना सभा के लिए एक व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण संगीतमय सामग्री मिल सकेगी।


    12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं की होगी रिकॉर्डिंग

    इसके तहत इतनी शक्ति हमें देना दाता, हमको मन की शक्ति देना, ऐ मालिक तेरे बंदे हम, तेरी है जमीन तेरा आसमान, ओ पालनहारे, तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं हो, तू प्यार का सागर है, ज्योति से ज्योति जगाते चलो, बादल पे पांव है, इंसाफ की डगर पे, हम होंगे कामयाब और आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं जैसी 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं को वीडियो रूप में तैयार किया जाएगा।

    यूपी में पीईटी परीक्षा के चलते 60 जिलों में आज 12वीं तक के स्कूल रहेंगे बंद

    यूपी में पीईटी परीक्षा के चलते 60 जिलों में आज 12वीं तक के स्कूल रहेंगे बंद

    लखनऊ। यूपी में शुक्रवार को होने वाली उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) के मद्देनजर शुक्रवार को प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा और वाराणसी समेत 60 जिलों में 12वीं तक के सभी बोर्ड के स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे।

    आयोग के अध्यक्ष डॉ. एसएन साबत ने बताया कि परीक्षा के दौरान शहरों में अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों की भारी भीड़ को देखते हुए यह फैसला किया गया है। शासन की ओर से संबंधित जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्कूलों में छुट्टी कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। 


    सहायक अध्यापक भर्ती के लिए अब चार नवंबर तक आवेदन, विशेष शिक्षा में डिप्लोमा बीएलएड भी किया शामिल, उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बढ़ाई तिथि

    सहायक अध्यापक भर्ती के लिए अब चार नवंबर तक आवेदन, विशेष शिक्षा में डिप्लोमा बीएलएड भी किया शामिल, उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बढ़ाई तिथि

    सहायक शिक्षक भर्ती में विशेष डिप्लोमा और बीएलएड डिग्रीधारकों को भी मौका, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अर्हताओं में किया संशोधन, आवेदन तिथि बढ़ाई गई

    28 अक्टूबर 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 897 पदों पर सहायक अध्यापकों की भर्ती की शैक्षिक अर्हता में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब विशेष शिक्षा में द्विवर्षीय डिप्लोमा और बीएलएड डिग्रीधारी भी इस पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। साथ ही ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर चार नवंबर कर दी गई है।

    यह निर्णय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 24 अक्तूबर के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भी इस पर अपनी सहमति दी है। आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने इस संबंध में जानकारी दी है।

    दरअसल यह भर्ती बेसिक शिक्षा विभाग के तहत प्राथमिक शहरी विद्यालयों व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में भी सहायक अध्यापक पदों के लिए है। विज्ञापन संख्या 05/2026 के तहत सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की जाएगी।

    मान्य अर्हताओं में भारतीय पुनर्वास परिषद की ओर से अनुमोदित शिक्षा शास्त्र में द्विवर्षीय डिप्लोमा (विशेष शिक्षा) को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त चार वर्षीय प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में स्नातक (बीएलएड) योग्यता को भी मान्यता दी गई है।

    दरअसल, चयन आयोग ने 18 सितंबर से आवेदन मांगे थे। इसमें सहायक अध्यापक संबद्ध प्राइमरी (अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों) के 897 पद व बेसिक शिक्षा के सहायक अध्यापक (शहरी) के लिए 11,508 पदों पर भर्ती होनी है।

    आयोग के उप सचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि अर्हताओं के विस्तार के कारण आवेदन की तिथियां बढ़ाई गई हैं। सहायक अध्यापक (संबद्ध प्राइमरी) पद के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि पहले 28 अक्तूबर 2026 निर्धारित थी। एक सप्ताह के लिए विस्तारित किया गया है। अब इच्छुक अभ्यर्थी चार नवंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    परीक्षा की तारीख में नहीं है कोई संशोधन
    अभ्यर्थियों को अपने भरे हुए ऑनलाइन आवेदन-पत्र में त्रुटि सुधार या संशोधन करने का अवसर भी दिया गया है। यह सुविधा सात नवंबर तक उपलब्ध रहेगी। लिखित परीक्षा के पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत तीन और चार दिसंबर को ही होगी।




    बीएलएड अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, 897 पदों पर आवेदन का रास्ता साफ, काम-वेतन समान होने पर भी योग्यता में भिन्नता पर उठा था सवाल

    26 अक्टूबर 2026
    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती के 897 पदों पर बीएलएड डिग्री और दो वर्षीय विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को भी शामिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 11 सितंबर को जारी नोटिफिकेशन को एनसीटीई एक्ट और 23 अगस्त 2010 के नोटिफिकेशन के विपरीत मानते हुए रद कर दिया है। यह आदेश महेश कुमार और 18 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने दिया है।

    याचियों की ओर से अधिवक्ता राहुल मिश्र व सौरभ कुमार भार्गव ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज ने शहरी क्षेत्र के 11,508 सहायक अध्यापक पदों और संबद्ध प्राइमरी स्कूलों के 897 पदों के लिए भर्ती

    निकाली है। विज्ञापन के क्लाज 7.1 में दो वर्षीय डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन और चार वर्षीय बीएलएड डिग्री को 11,508 अर्बन एरिया पदों के लिए मान्य किया गया, लेकिन 897 एडेड प्राइमरी स्कूल पदों से बाहर रखा गया। याचिका में कहा

    गया कि सहायक अध्यापक के लिए सीनियर सेकेंडरी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ चार वर्षीय बीएलएड वैध न्यूनतम योग्यता है। दोनों तरह के स्कूलों में काम और वेतन समान होने पर योग्यता अलग रखने पर भी सवाल उठाया गया।

    याचियों के अनुसार स्कूल बेसिक शिक्षा परिषद के हों या माध्यमिक शिक्षा के, योग्यता तय करने का अधिकार केंद्र की एनसीटीई के पास है। कोर्ट ने कहा कि दोनों नोटिफिकेशन अधिनियम और 23 अगस्त 2010 के नोटिफिकेशन के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए उन्हें उस सीमा तक निरस्त किया जाता है, जहां बीएलएड और विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को 897 पदों से बाहर रखा गया है। कोर्ट ने विज्ञापन सुधार कर जारी करने का आदेश दिया, ताकि इन योग्यताओं वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकें। याचियों और समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को आवेदन का उचित अवसर देने तथा जरूरत पड़ने पर अंतिम तिथि बढ़ाने का निर्देश भी दिया गया है।



    897 सहायक अध्यापक के पदों पर बीएलएड और विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को मिला मौका, हाईकोर्ट ने अधिसूचना रद्द कर आवेदन का अवसर देने का दिया आदेश, देखें कोर्ट ऑर्डर 


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक भर्ती में बीएलएड डिग्री धारकों और विशेष शिक्षा में दो वर्षीय डिप्लोमा प्राप्त अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 897 पदों पर होने वाली भर्ती से इन अभ्यर्थियों को बाहर रखने संबंधी अधिसूचना को नियमों के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया है।

    साथ ही भर्ती विज्ञापन में तत्काल संशोधन जारी कर इन्हें आवेदन का अवसर देने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने महेश कुमार व 18 अन्य की याचिका पर दिया।

    याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 11,508 सहायक अध्यापक पदों के साथ एडेड प्राथमिक विद्यालयों के लिए 897 पद विज्ञापित किए हैं। इसके क्लॉज 7.1 में विशेष शिक्षा के दो वर्षीय डिप्लोमा और चार वर्षीय बीएलएड डिग्री को केवल 11,508 पदों के लिए ही मान्य किया गया है जबकि 897 पदों की भर्ती से इन अभ्यर्थियों को बाहर रखा गया।

    याचिका में सवाल उठाया गया कि जब दोनों प्रकार के विद्यालयों में शिक्षकों के कार्य व वेतन समान हैं तो शैक्षणिक अर्हता (योग्यता) अलग-अलग क्यों रखी गई है। कोर्ट ने 11 सितंबर को जारी दोनों नोटिफिकेशन को एनसीटीई अधिनियम और 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के अनुरूप नहीं माना।

    कोर्ट ने विज्ञापन संख्या 5/2026 में तत्काल संशोधन कर अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देने और जरूरत पड़ने पर अंतिम तिथि बढ़ाने का आदेश दिया है। 


    Thursday, October 29, 2026

    लखनऊ में 4 से 10 जनवरी तक होगा ‘सीतापुर कप 2027’, 29 जनपदों की 32 टीमें लेंगी हिस्सा, बेसिक टीचर्स क्रिकेट यूनियन उत्तर प्रदेश कराएगा लेदर बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता

    लखनऊ में 4 से 10 जनवरी तक होगा ‘सीतापुर कप 2027’,  29 जनपदों की 32 टीमें लेंगी हिस्सा, बेसिक टीचर्स क्रिकेट यूनियन उत्तर प्रदेश कराएगा लेदर बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता, विजेता को 52,500 और उपविजेता को मिलेंगे 30,000 रुपये

    लखनऊ । बेसिक टीचर्स क्रिकेट यूनियन उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में ‘सीतापुर कप 2027’ का आयोजन 4 से 10 जनवरी 2027 तक लखनऊ के लेदर बॉल क्रिकेट मैदानों पर किया जाएगा। प्रदेश स्तरीय इस प्रतियोगिता में बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत कार्मिक अपने-अपने कार्यरत जनपद की टीम से प्रतिभाग करेंगे। प्रतियोगिता में कुल 32 टीमें हिस्सा लेंगी, जिनका प्रतिनिधित्व प्रदेश के 29 जनपद करेंगे।


    आयोजन समिति की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, प्रतियोगिता में लीग मुकाबलों के बाद नॉकआउट चरण के मैच खेले जाएंगे। इस आयोजन के माध्यम से बेसिक शिक्षा विभाग के कार्मिकों को क्रिकेट के जरिए अपनी खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने और विभिन्न जनपदों के खिलाड़ियों के बीच आपसी समन्वय बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

    29 जनपदों से उतरेंगी 32 टीमें
    प्रतियोगिता में एटा, बाराबंकी, औरैया, जौनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अलीगढ़, झांसी, संभल, फर्रुखाबाद, उन्नाव, जालौन, मिर्जापुर, अमरोहा, बदायूं, आगरा, गोंडा, अमेठी, मैनपुरी, मथुरा, सीतापुर, गाजीपुर, रायबरेली, अयोध्या, इटावा, प्रयागराज और बलिया सहित कुल 29 जनपदों की टीमें शामिल होंगी।

    इनमें सीतापुर, उन्नाव और अलीगढ़ जनपद से दो-दो टीमें प्रतिभाग करेंगी। इस प्रकार 29 जनपदों की भागीदारी से कुल 32 टीमों के बीच मुकाबले होंगे।

    टीम गठन और पंजीकरण की समयसीमा तय
    आयोजन के लिए प्रत्येक जनपदीय टीम का चयन संबंधित जनपद के निर्धारित क्रिकेट टीम प्रमुख द्वारा किया जाएगा। टीम के कप्तान का निर्धारण 10 नवंबर 2026 तक तथा टीम का नाम 20 नवंबर 2026 तक तय किया जाना है। प्रत्येक टीम के अंतिम 14 खिलाड़ियों की सूची निर्धारित प्रारूप में 10 दिसंबर 2026 तक आयोजन समिति को उपलब्ध करानी होगी।

    प्रतियोगिता में बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत कार्मिक ही भाग ले सकेंगे। प्रत्येक प्रतिभागी के लिए विभाग का EHRMS कोड अनिवार्य होगा। प्रत्येक टीम का पंजीकरण शुल्क 19,000 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे तीन चरणों में जमा करना होगा।

    तीन लीग मैचों के बाद आगे बढ़ेंगी शीर्ष टीमें
    प्रतियोगिता के प्रारंभिक चरण में प्रत्येक टीम को तीन लीग मैच खेलने का अवसर मिलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, लीग मैच 4, 5 और 6 जनवरी 2027 को आयोजित किए जाएंगे। लीग चरण के बाद अंक तालिका में शीर्ष दो स्थान प्राप्त करने वाली टीमें अगले चरण में प्रवेश करेंगी।

    जारी समय-सारिणी के अनुसार, प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले 7 जनवरी, क्वार्टर फाइनल 8 जनवरी, सेमीफाइनल 9 जनवरी और फाइनल मुकाबला 10 जनवरी 2027 को खेला जाएगा।

    आयोजन समिति के अनुसार, लखनऊ के आसपास स्थित तथा उपलब्ध जनपदों की टीमों के लीग मैच 25 दिसंबर 2026 से 3 जनवरी 2027 के बीच अवकाश के दिनों में भी कराए जा सकते हैं।

    20 ओवर के होंगे मुकाबले, लागू होंगे अंतरराष्ट्रीय नियम
    प्रतियोगिता में प्रत्येक टीम को एक दिन में 20 ओवर का एक मैच खेलना होगा। मैचों का संचालन क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार किया जाएगा। आयोजन से संबंधित अन्य शर्तें और प्रावधान समिति की ओर से जारी विस्तृत नियमावली तथा निर्धारित प्रपत्र के अनुसार लागू होंगे।

    विजेता को 52,500 और उपविजेता को 30,000 रुपये
    ‘सीतापुर कप 2027’ की विजेता टीम को 52,500 रुपये तथा उपविजेता टीम को 30,000 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। पुरस्कारों का वितरण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।

    प्रतियोगिता से संबंधित जानकारी तथा जनपदीय टीमों के प्रमुखों के संपर्क विवरण के लिए बेसिक टीचर्स क्रिकेट यूनियन उत्तर प्रदेश ने मोबाइल नंबर 8853271303 पर व्हाट्सऐप के माध्यम से संपर्क करने की व्यवस्था की है। प्रतियोगिता का आयोजन बेसिक टीचर्स क्रिकेट यूनियन उत्तर प्रदेश द्वारा किया जा रहा है।



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                  "सीतापुर कप 2027"
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            बेसिक टीचर्स क्रिकेट यूनियन उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में दिनांक 04 जनवरी 2027 से 10 जनवरी 2027 के मध्य "सीतापुर कप 2027" का "लखनऊ शहर" के लेदर बॉल क्रिकेट मैदानो में आयोजन होगा।

         जिसके मुख्य बिंदु निम्नवत है:-

    01. बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत समस्त कार्मिक उक्त आयोजन में अपने कार्यरत जनपद की टीम से प्रतिभाग कर सकेंगे।(बेसिक विभाग की EHRMS कोड अनिवार्य) कुल प्रतिभागी टीम 32

    02. प्रत्येक जनपदीय टीम हेतु पंजीकरण शुल्क 19,000/- रुपए तीन चक्रों में जमा करना होगा।

    03. प्रत्येक जनपदीय टीम चयन उस जनपद का निर्धारित क्रिकेट टीम मुखिया करेगा।

    04. प्रत्येक जनपद के टीम मुखिया निम्नवत है :-
    टीम(जनपद) टीम मुखिया

    प्रतिभागी जनपद
    01.एटा_नागेन्द्र प्रताप सिंह
    02.बाराबंकी_सत्यप्रकाश_रिक्की भट्ट
    03.औरैया_हर्ष पाण्डेय
    04.जौनपुर_अजय सिंह यादव
    05.मुरादाबाद_डॉ कपिल सिरोही
    06.बिजनौर_मुकुल सैनी
    07.सुल्तानपुर_आलोक पाठक_शरद त्रिपाठी
    08.प्रतापगढ़_सुरजीत यादव_आशीष द्विवेदी
    09.अलीगढ़_अशोक शर्मा
    10.झांसी_डॉ देवेंद्र यादव_मनोज यादव
    11.संभल_मनीष बेनीवाल
    12.फर्रुखाबाद_विकास सिंह सोलंकी_शिवम श्रीवास्तव
    13.उन्नाव_अखिलेश सिंह
    14.जालौन_अभिषेक द्विवेदी_दीपेश यादव
    15.मिर्जापुर_मनोज सिंह_सुजीत कुमार
    16.अमरोहा_पुलकित सिरोही
    17.बदायूं_मुकेश यादव
    18.आगरा_अधीर हिनवर 
    19.गोण्डा_पवन सिंह
    20.अमेठी_आशीष पांडेय
    21.मैनपुरी_नितिन मुकेश
    22.मथुरा_हरेंद्र_कर्मवीर सिंह
    23.सीतापुर_नित्यानंद_दीपक वर्मा
    24.गाज़ीपुर_अखिलेश सिंह
    25.रायबरेली_दुर्गेश यादव_विनीत सिंह
    26 अयोध्या_प्रवीण सिंह
    27 इटावा_विपिन ठाकुर
    28 प्रयागराज_दिनेश प्रताप सिंह(कमल)
    29.सीतापुर (एहतिशाम आलम)_नित्यानंद_एहतिशाम आलम
    30.उन्नाव (BEO सर)_मनींद्र कुमार
    31.बलिया (संतोष_संतराज यादव)_संतोष शर्मा_संतराज यादव
    32.अलीगढ़ (आशीष यादव)_आशीष यादव 

    (किसी जनपद के क्रिकेट मुखिया का मोबाइल नंबर जानने हेतु 08853271303 पर WhatsApp करें)


    05. प्रत्येक टीम हेतु कप्तान का निर्धारण जनपदीय क्रिकेट मुखिया करेगा।
    अंतिम तिथि 10 नवंबर 2026

    06. प्रत्येक टीम का नाम जनपदीय क्रिकेट मुखिया तय करेगा।
    अंतिम तिथि 20 नवंबर 2026

    07. प्रत्येक जनपदीय टीम हेतु अंतिम 14 का चयन करके जनपदीय टीम मुखिया/कप्तान आयोजन समिति को निर्धारित फॉर्मेट पर उपलब्ध कराएगा।
    अंतिम तिथि 10 दिसंबर 2026

    08. प्रत्येक टीम को एक दिन में 20 ओवर का एक मैच खेलने होगा।

    09. प्रत्येक टीम को कुल 03 लीग मैच खेलने को मिलेगे।

    10. लीग मैचों के उपरांत टेबल टॉप 02 टीम अगले चरण (प्री क्वाटर फाइनल) में प्रवेश करेगी।

    11. क्रिकेट के सभी अंतरराष्ट्रीय नियम लागू होंगे।

    12. विजेता टीम को 52,500/- एवं उपविजेता टीम को 30,000/- इनामी राशि निर्धारित नियमों अनुसार पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जाएगी।

    13. आयोजन हेतु जारी प्रपत्र में लिखित शेष नियमों के अंतर्गत सीतापुर कप 2027 का आयोजन किया जाएगा।


    📢 समय सारिणी (प्रत्येक टीम हेतु)
    प्रथम लीग मैच 04 Jan 2027 (प्रत्येक टीम)
    द्वितीय लीग मैच 05 Jan 2027 (प्रत्येक टीम)
    तृतीय लीग मैच 06 Jan 2027 (प्रत्येक टीम)

    प्री क्वार्टर फाइनल (प्रथम से अष्टम) 07 Jan 2027

    क्वार्टर फाइनल (प्रथम से चतुर्थ) 08 Jan 2027

    सेमीफाइनल (प्रथम एवं द्वितीय) 09 Jan 2027

    फाइनल 10 Jan 2027

    (नोट:- लखनऊ के आस पास एवं उपलब्ध जनपदों के लीग मैच 25 दिसंबर 2026 से 03 जनवरी 2027 के मध्य भी अवकाश के दिनों में कराए जा सकेंगें)

    आयोजक :-
    बेसिक टीचर्स क्रिकेट यूनियन उत्तर प्रदेश
    Mob 8853271303

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    UP D.El.Ed / BTC प्रमाणपत्रों का होगा ऑनलाइन सत्यापन, परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने शुरू की तैयारी, नवंबर से शुरू हो सकती है सत्यापन प्रक्रिया

    UP D.El.Ed / BTC प्रमाणपत्रों का होगा ऑनलाइन सत्यापन, परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने शुरू की तैयारी, नवंबर से शुरू हो सकती है सत्यापन प्रक्रिया


    प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में D.El.Ed (BTC) के प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया को ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय प्रमाणपत्रों के सत्यापन और प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए कदम उठा रहा है।


    रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रमाणपत्रों के सत्यापन में पारदर्शिता बढ़ाना और प्रक्रिया को सुगम बनाना है। इसके तहत ऑनलाइन सत्यापन व्यवस्था विकसित करने तथा संबंधित प्रक्रिया को लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

    प्रमाणपत्रों के ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया नवंबर से शुरू की जा सकती है। हालांकि, इसके लिए संबंधित विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आदेश और विस्तृत दिशा-निर्देश देखना आवश्यक होगा।

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने किया यू-ट्यूब संवाद, बोर्ड परीक्षा, नवाचार व तनाव प्रबंधन पर दिए टिप्स

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने किया यू-ट्यूब संवाद, बोर्ड परीक्षा, नवाचार व तनाव प्रबंधन पर दिए टिप्स

    बोर्ड परीक्षाओं की मॉक टेस्ट से कराएं तैयारी : पार्थ सारथी

    शिक्षण कार्य के बाद समय का सदुपयोग करें शिक्षक 

    एनसीटीई मानकों के अनुसार होंगी भर्तियां

    29 अक्टूबर 2026
    लखनऊ। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शिक्षकों से शिक्षण कार्य के बाद बचे समय में विद्यार्थियों के सीखने का स्तर सुधारने का प्रयास करने को कहा है। उन्होंने सरकारी और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मॉक टेस्ट के माध्यम से यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं की तैयारी कराने के निर्देश दिए। बुधवार को यू-ट्यूब संवाद में उन्होंने शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों से बातचीत की।

    उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव और जनगणना के कारण बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए कम समय बचा है। पांच फरवरी 2027 से परीक्षाएं शुरू होंगी। ऐसे में महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम पूरा करने और समय रहते रिवीजन कराने पर ध्यान दिया जाए।

    निपुण भारत मिशन के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान के लक्ष्य कक्षा पांच तक विस्तारित किए गए हैं। ऐसा करने वाला यूपी देश का पहला राज्य है। पहला निपुण आकलन 20 दिसंबर और दूसरा चरण 20 जनवरी से शुरू होगा। कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था की गई है।

    कमजोर विद्यार्थियों के लिए रोजाना एक घंटे तक उपचारात्मक शिक्षण विभाग ने 12 विषयों पर 22-22 बिंदुओं वाली कैचअप कार्ययोजनाएं तैयार की हैं। शिक्षकों को नियमित आकलन से बच्चों की कठिनाइयां पहचानकर प्रतिदिन आधे से एक घंटे तक उपचारात्मक शिक्षण कराने का सुझाव दिया गया। नवाचार साझा करने के लिए उद्गम पोर्टल बनाया गया है। भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए नवंबर-दिसंबर में उत्कृष्ट रसोइयों की प्रतियोगिता कराकर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।

    अपर मुख्य सचिव ने बताया कि न्यायालय के आदेशानुसार एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन हो रहा है। नगर क्षेत्र में 11,000 शिक्षकों और माध्यमिक व एडेड विद्यालयों में 17,000 से अधिक टीजीटी, पीजीटी व प्रधानाध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। भर्तियां एनसीटीई मानकों के अनुसार होंगी। हर वर्ष एक अप्रैल को रिक्तियों का आकलन कर 31 मई तक आयोगों को अधियाचन भेजना अनिवार्य है।



    परीक्षा की तैयारी और अधिगम स्तर में सुधार को लेकर आज होगा यूट्यूब सेशन के जरिए शिक्षकों से संवाद 
    28 अक्टूबर 2026


    28 अक्टूबर को शिक्षकों का ऑनलाइन सेशन, कक्षा 1 से 12 तक की परीक्षा तैयारी और अकादमिक रणनीति पर होगी चर्चा
    25 अक्टूबर 2026


    ऑनलाइन यू-ट्यूब सेशन में कक्षा एक से 12 तक के विद्यार्थियों की आगामी परीक्षाओं की तैयारी पर होगा फोकस, अपर मुख्य सचिव 28 अक्टूबर को करेंगे विशेष चर्चा

    लखनऊ। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से 28 अक्तूबर को ऑनलाइन गोष्ठी (यू-ट्यूब सेशन) का आयोजन किया जाएगा। इसमें कक्षा एक से 12 तक के विद्यार्थियों की आगामी परीक्षाओं की तैयारी, शैक्षिक सत्र 2026-27 की अकादमिक रणनीति और छात्रों के अधिगम स्तर में सुधार पर चर्चा होगी।


    गोष्ठी की अध्यक्षता बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा करेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया कि इसमें विभागीय प्राथमिकताओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति को बेहतर बनाने के प्रयासों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    उन्होंने सभी प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, शिक्षक संकुल, एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटर्स, जिला समन्वयकों, बीएसए और डीआईओएस को गोष्ठी में शामिल होने के निर्देश दिए हैं। छात्र-छात्राएं व अभिभावक भी स्वेच्छा से शामिल हो सकते हैं।


    Wednesday, October 28, 2026

    ग्रामीण संवर्ग में सहायक अध्यापकों के 48,883 पदों का आंकड़ा आया सामने, भर्ती के विज्ञापन का शुरू हुआ इंतजार

    ग्रामीण संवर्ग में सहायक अध्यापकों के 48,883 पदों का आंकड़ा आया सामने, भर्ती के विज्ञापन का शुरू हुआ इंतजार


    नौ वर्ष में 23 प्रतिशत डीएलएड प्रशिक्षु बन पाये शिक्षक

    नौ वर्ष में प्रदेश में 5,79,967 डीएलएड प्रशिक्षु निकले

    अब तक 126,371 प्रशिक्षुओं को मिली नियुक्ति


    प्रयागराज : परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से पिछले नौ वर्ष में पांच लाख 35 हजार 389 प्रशिक्षुओं को डीएलएड प्रशिक्षण प्रदेशभर में कराया गया। इनमें से एक लाख 26 हजार 371 प्रशिक्षत अभ्यर्थियों को शिक्षक पद पर नियुक्ति दी गई है। अर्थात करीब 23 प्रतिशत अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्राप्त कर ली है। यह आंकड़ा मार्च 2026 तक का है। यह जानकारी विधान सभा के तृतीय सत्र में सपा नेता अनिल प्रधान की ओर से पूछे गए प्रश्न के जवाब में राज्य मंत्री संदीप सिंह ने दी।



    यह भी बताया गया कि सहायक अध्यापक के 48,883 पद ग्रामीण संवर्ग के और नगर क्षेत्र के 12075 पद सीधी भर्ती से भरे जाने हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने विज्ञापन संख्या 05/2026 के तहत बेसिक शिक्षा विभाग में 12,405 पदों पर सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। इसमें शहरी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 11,508 पद हैं जबकि अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में सहायक अध्यापक (संबद्ध प्राइमरी) के 897 पद हैं।

    चुनावी वर्ष में नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने की कवायद तेजी से चल रही है। सत्ताधारी दल रोजगार के पर्याप्त अवसर देने का दावा कर रहा है, जबकि विपक्ष बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों के न विज्ञापित होने का आरोप लगा रहा है। इन सब के बीच विधान सभा के तृतीय सत्र में सपा नेता अनिल प्रधान की ओर से पूछे गए प्रश्न के जवाब महत्वपूर्ण हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को अब भी ग्रामीण संवर्ग के 48,883 सहायक अध्यापकों की भर्ती के विज्ञापन का इंतजार बना हुआ है।

    पीएनपी सचिव राजेंद्र प्रताप के अनुसार प्रदेश में कुल 3423 डीएलएड कालेज हैं। इनमें 67 डायट, 253 अल्पसंख्यक संस्थान और 3103 निजी क्षेत्र के कालेज हैं। कुल 2,39,500 सीटें हैं। मार्च 2026 के बाद पीएनपी ने दो परीक्षा परिणाम घोषित किए। मई 2026 में एक लाख 24 हजार 909 और सितंबर-अक्टूबर की परीक्षा में 19,669 नए डीएलएड प्रशिक्षु निकले।

    वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षा के लिये समस्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों का डेटा पोर्टल पर अपलोड/अपडेट कराये जाने के सम्बन्ध में

    यूपी बोर्ड ने बोर्ड परीक्षा के दृष्टिगत माध्यमिक शिक्षकों का पोर्टल पर मांगा मांगा डाटा

    प्रयागराज। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कार्मिकों का डाटा यूपी बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया वर्ष-2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में परीक्षकों की ड्यूटी के लिए कंप्यूटरीकृत पहचानपत्र बनाने के लिए शुरू की गई है। 

    सभी प्रधानाचार्यों को 15 नवंबर तक विवरण upmsp.edu.in पर अपलोड करना होगा। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा पांच फरवरी से शुरू हो रही है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह की ओर से प्रधानाचार्यों को विवरणों की गहनता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

    किसी भी शिक्षक की गलत विषय में परीक्षक के रूप में नियुक्ति न हो, इसका ध्यान रखते हुए डाटा अपलोड करने को कहा गया है। यदि प्रधानाचार्यों की ओर से पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारी गलत पाई जाती है, इसके लिए वे जिम्मेदार होंगे। 


    वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षा के लिये समस्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों का डेटा पोर्टल पर अपलोड/अपडेट कराये जाने के सम्बन्ध में



    शिक्षा सेवा अधिकरण विधेयक केंद्र से वापस लेगी सरकार, विधेयक में दूर की जाएंगी कानूनी अड़चनें व विसंगतियां

    शिक्षा सेवा अधिकरण विधेयक केंद्र से वापस लेगी सरकार, विधेयक में दूर की जाएंगी कानूनी अड़चनें व विसंगतियां

    लखनऊ : शिक्षकों और कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों का जल्द निस्तारण करने के लिए प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा अधिकरण विधेयक-2021 में बदलाव करेगी। विधानमंडल से पारित इस विधेयक को केंद्र सरकार से वापस लेने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंगलवार को स्वीकृति दे दी है।


    विधेयक के कुछ प्रविधानों और संवैधानिक व्यवस्था के बीच तालमेल नहीं होने के कारण इसमें संशोधन की जरूरत महसूस की गई है। यह विधेयक फिलहाल केंद्र सरकार के पास लंबित है। इसके माध्यम से अशासकीय सहायताप्राप्त महाविद्यालयों, माध्यमिक व संस्कृत शिक्षण संस्थानों, सहायताप्राप्त प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों व बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों का तेजी से निस्तारण करना है।

    विधेयक को लेकर प्रमुख सवाल हाईकोर्ट के न्यायिक अधिकारों से भी जुड़ा था। संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत हाईकोर्ट को रिट जारी करने और न्यायिक संस्थाओं की निगरानी का अधिकार है। विधेयक में अधिकरण के सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और सेवा शर्तों को लेकर भी केंद्रीय नियमों के अनुरूप व्यवस्था करने की जरूरत बताई गई थी। इसके अलावा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ और खंडपीठ प्रयागराज में बनाने के प्रस्ताव पर दोनों शहरों के वकीलों ने विरोध जताया था।

    मामला कोर्ट तक पहुंचा था। अब सरकार विधेयक को केंद्र से वापस लेकर इसमें जरूरी संशोधन करेगी। इसके बाद इसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी ताकि शिक्षकों और कर्मचारियों के सेवा विवादों का प्रभावी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।

    बेसिक-माध्यमिक के 1.70 लाख कार्मिकों को कैशलेस चिकित्सा के लिए कैबिनेट की मंजूरी, एडेड, वित्तविहीन, संस्कृत विद्यालयों व समग्र शिक्षा के कर्मचारियों को भी लाभ

    बेसिक-माध्यमिक के 1.70 लाख कार्मिकों को कैशलेस चिकित्सा के लिए कैबिनेट की मंजूरी,  एडेड, वित्तविहीन, संस्कृत विद्यालयों व समग्र शिक्षा के कर्मचारियों को भी लाभ


    लखनऊ। प्रदेश में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग और समग्र शिक्षा योजना के 1.70 लाख से अधिक कर्मचारियों व उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। इसके तहत वे पांच लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज करा सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे पहले शिक्षकों के लिए यह सुविधा शुरू की जा चुकी है।


    योजना के तहत बेसिक शिक्षा परिषद, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों, वित्तविहीन विद्यालयों, संस्कृत विद्यालयों और समग्र शिक्षा परियोजना में सेवारत कर्मचारी व उनके आश्रित सरकारी व संबद्ध निजी चिकित्सालयों में कैशलेस चिकित्सा का लाभ ले सकेंगे।


    प्राथमिक व उच्च प्राथमिक के 122304 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को लाभ
    वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों, वित्त विहीन विद्यालयों व समग्र शिक्षा परियोजना में कार्यरत 122304 शिक्षणेत्तर कर्मचारी इससे लाभांवित होंगे। इस पर प्रति कार्मिक 3000 रुपये सालाना प्रीमियम की दर से लगभग 36.69 करोड़ का वित्तीय भार सरकार वहन करेगी।


    माध्यमिक के 48062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को लाभ
    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत महाविद्यालयों तथा वित्तविहीन संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के 48062 शिक्षणेत्तर कर्मचारी योजना से लाभांवित होंगे। इसके लिए 3000 रुपये प्रति कार्मिक सालाना प्रीमियम की दर से सरकार 14.4186 करोड़ का वित्तीय व्यय वहन करेगी।


    सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ इंपैनल्ड निजी अस्पतालों में सुविधा
    योजना के तहत सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ इंपैनल्ड निजी अस्पतालों में इनडोर उपचार कैशलेस होगा। योजना का क्रियान्वयन आयुष्मान भारत की अधिकृत दरों पर स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से शत-प्रतिशत डिजिटल और कैशलेस रूप में प्रबंधित किया जाएगा।

    Tuesday, October 27, 2026

    यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रस्तावित केंद्रों की सूची जारी, प्रदेश के 7526 इंटर कॉलेजों को बनाया गया है केंद्र, 245 स्कूल डिबार

    2027 की यूपी बोर्ड हाईस्कूल-इंटर बोर्ड परीक्षा से 245 स्कूल डिबार

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड ने 2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा से 245 स्कूलों को डिबार कर दिया है। इनमें से 36 स्कूल ऐसे हैं जिन्हें 2026 की बोर्ड परीक्षा के दौरान गड़बड़ी के कारण डिबार किया गया है, जबकि 209 स्कूल पूर्व के वर्षों में डिबार किए गए थे। इन 209 स्कूलों में कई आजीवन डिबार हैं। पिछले साल बोर्ड ने 254 स्कूलों को डिबार करते हुए केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया से बाहर कर दिया था। डिबार करने के पीछे कई कारण हैं। मुख्य रूप से अनर्ह छात्रों के आवेदन पत्र और हाईस्कूल-इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थियों को शामिल करवाने के आरोप

    फर्जी और अनर्ह छात्रों के आवेदन पत्रों को भी किया अग्रसारित
    व्यक्तिगत परीक्षा के कूटरचित आवेदन पत्र अग्रसारित करने, गलत प्रश्नपत्र वितरित करने, बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केन्द्र पर मिली अनियमितता और परीक्षा केन्द्र पर जानबूझकर छद्म (फर्जी) परीक्षार्थियों के सम्मिलित कराने के आरोप हैं। इसके अलावा एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए राजस्व लेखपाल एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल माफियाओं के मोबाइल डाटा विश्लेषण पर परीक्षा समिति ने कई स्कूलों को आजीवन डिबार किया है।

    सैकड़ों स्कूलों को किया गया प्रतिबंधित
    बोर्ड ने ऐसे सैकड़ों स्कूलों को प्रतिबंधित किया है जो हर साल केंद्र तो बनते हैं लेकिन अवस्थापना सुविधाओं या अन्य कारणों से जिले स्तर पर उन्हें काट दिया जाता है। इनमें बड़ी संख्या में राजकीय माध्यमिक विद्यालय भी शामिल हैं। बोर्ड ने केंद्र निर्धारण से पहले ही इन्हें प्रतिबंधित कर दिया था।



    यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रस्तावित केंद्रों की सूची जारी, प्रदेश के 7526 इंटर कॉलेजों को बनाया गया है केंद्र

    862 राजकीय, 3276 सहायता प्राप्त माध्यमिक और 3388 वित्त विहीन स्कूल बने केंद्र


    यूपी बोर्ड : परीक्षाओं के लिए प्रस्तावित केंद्रों की सूची जारी
    प्रदेश के 7526 इंटर कॉलेजों को बनाया गया है केंद्र 
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रस्तावित परीक्षा केंद्रों की सूची जारी कर दी है। बोर्ड के सचिव भगवती सिंह की ओर से सोमवार देर शाम सूची भी जारी कर दी गई।

    जारी सूची के अनुसार प्रदेश में कुल 7,526 परीक्षा केंद्रों का चयन किया गया है। सबसे ज्यादा स्ववित्तपोषित कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है जिनकी संख्या 3,388 है। इसी तरह 862 राजकीय कॉलेज व 3,276 अशासकीय सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों के नाम भी परीक्षा केंद्रों की सूची में शामिल हैं। जनपद के सभी केंद्रों की सूची upmsp.edu.in पर अपलोड कर दी गई है। अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जनपदीय केंद्र



    निर्धारण समिति के परीक्षण व अनुमोदन के बाद फाइनल सूची जारी की जाएगी।

    सचिव भगवती सिंह ने बताया है कि ऑनलाइन स्तर से चयनित परीक्षा केंद्रों के संबंध में यदि कोई आपत्ति या शिकायत हो तो विद्यालय के छात्र, अभिभावक, प्रधानाचार्य व प्रबंधक कारण व साक्ष्य के साथ ऑनलाइन प्रत्यावेदन परिषद के पोर्टल पर कर सकते हैं। इसके लिए 28 अक्तूबर तक का समय तय किया गया है।

    इसके बाद सभी जिला विद्यालय निरीक्षक शिकायतों व सुझावों का परीक्षण कर उनका निस्तारण करते हुए जनपदीय केंद्र निर्धारण समिति से अनुमोदन के बाद छह नवंबर तक परिषद के पोर्टल पर अपलोड करेंगे।


    प्रयागराज में सबसे ज्यादा तो महोबा में सबसे कम परीक्षा केंद्र
    पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा परीक्षा केंद्र प्रयागराज में तो सबसे कम केंद्र महोबा जनपद में बनाए गए हैं। प्रयागराज में 269 केंद्र तो महोबा में महज 29 केंद्र बनाए गए हैं। गोरखपुर में 175, आगरा में 161, बदायूं, शाहजहांपुर व अलीगढ़ में 127-127 केंद्र बनाए गए हैं। बुलंदशहर में 111, मुरादाबाद में 105, बिजनौर में 111, बरेली में 130, मथुरा में 126, लखनऊ में 127, कानपुर नगर में 116, जौनपुर में 181 और वाराणसी में 117 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसी तरह अन्य सभी जनपदों में प्रस्तावित केंद्रों की सूची बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड की गई है।


    अभिलेखों में नियुक्ति का अनुमोदन आदेश नहीं मिलना धोखाधड़ी नहीं - हाईकोर्ट, मऊ के सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों का मामला

    अभिलेखों में नियुक्ति का अनुमोदन आदेश नहीं मिलना धोखाधड़ी नहीं - हाईकोर्ट,  मऊ के सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों का मामला


    प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय अभिलेखों में नियुक्ति का अनुमोदन आदेश नहीं मिलना धोखाधड़ी का सबूत नहीं है।  इस आधार पर नहीं माना जा सकता कि कर्मचारी ने हेराफेरी से नौकरी हासिल की है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने मऊ के 15 सहायक अध्यापकों के याचिकाओं पर की।


    कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी के आरोप पर सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि याची शिक्षकों ने क्या गलत तथ्य पेश किया और कौन से दस्तावेज जाली है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मामला वर्ष 2010 से 2016 के बीच समाज कल्याण विभाग से अनुदान प्राप्त निजी प्रबंधन वाले बेसिक विद्यालयों में हुई शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा है। मामले में वर्ष 2018 में जांच के बाद गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट दी। इस आधार पर राज्य सरकार ने 24 जुलाई 2019 को चार शिक्षकों की नियुक्तियों का अनुमोदन रद्द कर दिया।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने विभिन्न पत्रों में बताया कि नियुक्तियों के अनुमोदन संबंधी आदेश कार्यालय के रिकॉर्ड में नहीं मिल रहे हैं। इस आधार पर शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। उनका वेतन भुगतान भी रोक दिया गया।

    शिक्षकों ने दलील दी कि पहले उनकी नियुक्तियों की जांच हो चुकी थी। संबंधित अधिकारियों ने अनुमोदन आदेश जारी होने की पुष्टि भी की। इसके बावजूद उन्हें सुनवाई का अवसर दिए बिना उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। 


    विधानसभा में सवाल उठना दोष का प्रमाण नहीं: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधानसभा में किसी नियुक्ति को लेकर सवाल उठने से जांच शुरू करने का आधार मिल सकता है लेकिन आरोप कर्मचारियों के दोषी होने का प्रमाण नहीं हैं। यदि कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है तो पहले यह जांचना चाहिए कि वह कहां गया और उसकी सकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी। रिकॉर्ड की अनुपलब्धता के लिए सीधे कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।


    वेतन के दावे पर दोबारा निर्णय लेने का आदेश: कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि शिक्षकों के वेतन संबंधी दावों पर दोबारा विचार किया जाए। जिस अवधि में शिक्षकों ने वास्तव में काम किया उस अवधि के वेतन के दावे पर रद्द की गई रिपोर्टों के निष्कर्षों से प्रभावित हुए बिना निर्णय लिया जाए।

    तमिलनाडु : स्कूलों को मान्यता और मंजूरी देने में 100 करोड़ की घूस, पूर्व स्कूल शिक्षामंत्री गिरफ्तार

    तमिलनाडु : स्कूलों को मान्यता और मंजूरी देने में 100 करोड़ की घूस, पूर्व स्कूल शिक्षामंत्री गिरफ्तार


    चेन्नई। तमिलनाडु के डीएमके नेता एवं पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री ए महेश पोय्यामोझी को निजी स्कूलों को मान्यता और जरूरी सरकारी मंजूरी देने के नाम पर 100 करोड़ रुपये वसूली के किया गया है। मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने सोमवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। याचिका खारिज होते ही ग्रेटर चेन्नई पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।


    तमिलनाडु सरकार ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए इसे वित्तीय आतंकवाद करार दिया। महेश 2021-26 के बीच डीएमके सरकार में स्कूली शिक्षा मंत्री थे। सीसीबी और ईडी ने इस मामले में केस दर्ज किया है।

    Monday, October 26, 2026

    डीएलएड की सेमेस्टर परीक्षा में 9798 अभ्यर्थी फेल, परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर जारी किया गया द्वितीय व चतुर्थ सेमेस्टर का परिणाम

    डीएलएड की सेमेस्टर परीक्षा में 9798 अभ्यर्थी फेल, परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर जारी किया गया द्वितीय व चतुर्थ सेमेस्टर का परिणाम

    25 अक्टूबर 2026
    प्रयागराज। डीएलएड द्विवर्षीय पाठ्यक्रम परीक्षा अक्तूबर-2026 के द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इसमें प्रदेश से 41,671 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 40,640 की उपस्थिति रही।

    इसमें 30,690 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इनका पास प्रतिशत 75.52 रहा। 1031 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। 152 अभ्यर्थियों का परिणाम अपूर्ण रहा जबकि 9798 अभ्यर्थी इस परीक्षा में फेल हो गए हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से परिणाम घोषित किया गया है।

    द्वितीय सेमेस्टर में 17,437 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 16925 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। द्वितीय सेमेस्टर में 12789 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। इसका पास प्रतिशत 75.56 रहा। चतुर्थ सेमेस्टर में 24234 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। 23715 अभ्यर्थी परीक्षा में उपस्थित हुए। चतुर्थ सेमेस्टर में 17901 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। इसका पास प्रतिशत 75.48 रहा।

    द्वितीय सेमेस्टर के आंकड़े
    डीएलएड 2019 बैच के द्वितीय सेमेस्टर में दो अभ्यर्थी पंजीकृत थे जो अनुपस्थित रहे। 2021 बैच में 293 में से 115 अभ्यर्थी (45.10 फीसदी) पास हुए। 2022 बैच में 1178 में से 789 अभ्यर्थी (78.59 फीसदी) उत्तीर्ण हुए। 2023 बैच में 15964 में से 11885 अभ्यर्थी (75.87 फीसदी) सफल रहे।

    चतुर्थ सेमेस्टर का विवरण
    डीएलएड 2019 बैच के चतुर्थ सेमेस्टर में 138 में से 90 अभ्यर्थी (76.27 फीसदी) उत्तीर्ण हुए। 2021 बैच में 1016 में से 585 अभ्यर्थी (58.91 फीसदी) पास हुए। 2022 बैच में 4587 में से 3268 अभ्यर्थी (76.66 फीसदी) सफल रहे। 2023 बैच में 18493 में से 13958 अभ्यर्थी (76.10 फीसदी) उत्तीर्ण हुए। परीक्षार्थी अपना परिणाम वेबसाइट btcexam.in और updeledinfo.in पर देख सकते हैं।






     तृतीय सेमेस्टर में 8644 अनुत्तीर्ण, डीएलएड द्विवार्षिक पाठ्यक्रम के परीक्षा परिणाम घोषित

    16 अक्टूबर 2026
    प्रयागराज । सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने डीएलएड द्विवार्षिक पाठ्यक्रम के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। इनमें सत्र 2018, 2019, 2021, 2022, 2023 के साथ सितंबर 2026 के नतीजे शामिल हैं। डीएलएड 2023 बैच के तृतीय सेमेस्टर में 8644 प्रशिक्षु अनुत्तीर्ण घोषित हुए हैं जबकि 36181 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। 1541 अभ्यर्थियों के परीक्षा परिणाम अधूरे हैं। 370 अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी थी। उत्तीर्ण घोषित होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या 25996 है।

    डीएलएड 2023 प्रथम सेमेस्टर में पंजीकृत 11830 प्रशिक्षुओं में से 296 अनुपस्थित रहे और 154 का परिणाम अपूर्ण है। 2517 फेल हो गए जबकि 9151 ने परीक्षा पास कर ली है। डीएलएड 2022 तृतीय सेमेस्टर में पंजीकृत 4200 प्रशिक्षुओं में से 312 अनुपस्थित, 32 का परिणाम अपूर्ण, 983 अनुत्तीर्ण और 3183 उत्तीर्ण हैं। डीएलएड 2021 तृतीय सेमेस्टर में 1302 प्रशिक्षुओं में से 38 अनुपस्थित रहे 113 का परिणाम अपूर्ण है।

    Sunday, October 25, 2026

    अब 9वीं-12वीं तक के छात्र पढ़ेंगे AI, एनसीईआरटी ने तैयार किया नया मॉड्यूल

    अब 9वीं-12वीं तक के छात्र पढ़ेंगे AI, एनसीईआरटी ने तैयार किया नया मॉड्यूल

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने डिजिटल क्रांति के दौर में स्कूली बच्चों को तैयार करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एनसीईआरटी ने 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल (सीटी) थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का आसान मॉड्यूल तैयार किया है।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से 109 पेज के पांच भागों में तैयार मॉड्यूल की खासियत यह है कि इसकी पढ़ाई के लिए छात्रों को पहले से कोडिंग या तकनीकी विषय की जानकारी होना जरूरी नहीं है।

    एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश सकलानी ने बताया, एआई के बारे में छात्रों को जानना बेहद जरूरी है। इसी मकसद से इस मॉड्यूल को शामिल किया जा रहा है। इसमें एआई सिर्फ तकनीकी विषय या कोडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को अपने आसपास की घटनाओं को देखने, पैटर्न पहचानने, सवाल पूछने, गलतियों की जांच करने और अपने विवेक से निर्णय लेना सिखाने की भी कोशिश की गई है।

    सबसे पहले छात्रों को बताया जाएगा कि एआई हमारे जीवन में आ चुका है, इसमें मशीन कैसे उदाहरण के साथ समझाती हैं, एआई से कैसे निजी जिंदगी में खतरा है, अपनी निजी जानकारियों, जिम्मेदारी और अधिकार, आम जिंदगी में एआई टूल से काम करना आदि के बारे में उदाहरण सहित बताया गया है।


    बताएंगे... एआई पर भरोसा कब करें:
    नए मॉड्यूल का मकसद छात्रों को केवल एआई टूल का इस्तेमाल करना सिखाना नहीं, बल्कि यह समझाना भी है कि ये तकनीकें कैसे काम करती हैं। यह भी सिखाया जाएगा कि एआई जवाबों पर कब भरोसा करना चाहिए और इनका सुरक्षित व जिम्मेदार इस्तेमाल कैसे किया जाए।

    बढ़ेगी सीखने की क्षमता:
    एआई कोर्स के छात्रों को सिखाया जाएगा कि रोजमर्रा के जीवन की बड़ी समस्याओं को वैज्ञानिक तरीके से कैसे हल किया जाता है। इससे बच्चों के दिमाग के विकास के साथ-साथ उनके सोचने-समझने व कुछ नया करने की क्षमता को बल मिलेगा।

    जहां डिजिटल पहुंच नहीं, वहां के छात्रों को भी मिलेगा फायदा:
    इस मॉड्यूल को इस तरह तैयार किया गया है कि चाहे हाई-टेक प्राइवेट स्कूल हो या दूरदराज का ग्रामीण सरकारी स्कूल जहां कंप्यूटर और डिजिटल साधन उपलब्ध नहीं हैं, दोनों स्थानों के बच्चों को इसका लाभमिल सके। इसका उद्देश्य रटने के बजाय खेल-खेल में सीखने पर है। इसमें बच्चे आपस में परिचर्चा, मजेदार प्रयोगों, एक्टिविटी और खुद सोच-विचार करके एआई के मूल नियमों को आसानी से समझ सकेंगे।

    प्रवेश के समय सही जन्मतिथि दर्ज करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग जल्द से जल्द विस्तृत दिशा निर्देश जारी करे - हाईकोर्ट

    आयु प्रमाणपत्रों में विसंगतियों के कारण पॉक्सो एक्ट के जाल में फंस रही युवा पीढ़ी - हाईकोर्ट

    प्रवेश के समय सही जन्मतिथि दर्ज करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग जल्द से जल्द विस्तृत दिशा निर्देश जारी करे - हाईकोर्ट 

    बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में हुए पेश


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट स्कूलों में छात्रों की जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि आयु प्रमाणपत्रों में विसंगतियों के कारण युवा पीढ़ी पॉक्सो एक्ट के जाल में फंस रही है। लिहाजा, स्कूलों में प्रवेश के समय सही जन्मतिथि दर्ज करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग जल्द से जल्द विस्तृत दिशा निर्देश जारी करे।


    सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को प्रस्तावित गाइडलाइन की जानकारी दी।


    प्रवेश के समय चार दस्तावेजों में से एक होगा जरूरी
    अपर मुख्य सचिव ने कोर्ट को बताया कि 17 सितंबर व 21 अक्तूबर को हुई बैठकों में स्कूलों में बच्चों की जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए गाइडलाइन का प्रारूप तैयार किया गया। इसमें जन्म व मृत्यु पंजीकरण से संबंधित प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं होने पर उत्तर प्रदेश निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली, 2011 के नियम-9 के अनुसार निर्धारित चार दस्तावेजों में से किसी एक को आयु प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का प्रस्ताव है।

    इनमें अस्पताल या सहायक नर्स एवं मिडवाइफ के अभिलेख, आंगनबाड़ी का रिकॉर्ड, जन्म एवं मृत्यु संबंधी ग्राम पंजीयन व माता-पिता या अभिभावक की ओर से शपथपत्र के माध्यम से उम्र की घोषणा शामिल है। स्कूल में प्रवेश के समय छात्र की जन्मतिथि के साथ यह भी दर्ज किया जाएगा कि चार निर्धारित विकल्पों में से कौन-सा दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है। संबंधित कॉलम के सामने कक्षा अध्यापक के हस्ताक्षर होंगे। यह व्यवस्था कक्षा एक के साथ अन्य कक्षाओं में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर भी लागू करने का प्रस्ताव है।


    सीएम बालिका विद्यालय में होंगी अत्याधुनिक लैब व खेल सुविधाएं, शहर की तरह पिछड़े क्षेत्रों में भी बेटियों को मिलेगी आधुनिक शिक्षा व्यवस्था

    सीएम बालिका विद्यालय में होंगी अत्याधुनिक लैब व खेल सुविधाएं, शहर की तरह पिछड़े क्षेत्रों में भी बेटियों को मिलेगी आधुनिक शिक्षा व्यवस्था

    128 विद्यालयों का होना है निर्माण, 210 छात्राओं की क्षमता होगी प्रत्येक की

    लखनऊ। प्रदेश सरकार शैक्षणिक रूप से पिछड़े विकास खंडों में 128 सीएम आवासीय बालिका विद्यालयों का निर्माण कराएगी। इन विद्यालयों में कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई होगी। हर विद्यालय का निर्माण 24.23 करोड़ से होगा। खास यह कि इन विद्यालयों में आवासीय सुविधा के साथ ही कई अत्याधुनिक लैब, खेलकूद आदि की पूरी सुविधाएं भी मिलेंगी।

    हाल ही में बेसिक शिक्षा विभाग ने पहले चरण में 31 विद्यालयों के लिए 751 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। अब इनके निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें प्रत्येक विद्यालय 210 छात्राओं की क्षमता का होगा। यहां

    विज्ञान वर्ग में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान लैब, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, लर्निंग बाई डुइंग लैब, एक्टिविटी हॉल, मीटिंग, प्राचार्य व स्टाफ कक्ष आदि की सुविधा मिलेगी।

    अकादमिक ब्लॉक के साथ ही छात्रावास की भी सुविधा होगी। इसमें छात्राओं के लिए कमरे, विजिटर रूम, चिकित्सा कक्ष, वार्डेन कक्ष, गार्ड रूम, कॉमन रूम आदि की व्यवस्था होगी। खेलने के लिए बैडमिंटन कोर्ट, वॉलीबॉल कोर्ट, खो-खो ग्राउंड, इंडोर गेम हॉल और भोजन के लिए अत्याधुनिक किचन व डायनिंग हॉल होगा।



    ग्रामीण इलाकों की बेटियों को मिलेगी मुफ्त आवासीय शिक्षा, पिछड़े ब्लॉकों में बनाए जाएंगे 128 सीएम आवासीय बालिका विद्यालय

    पहले चरण में 31 विद्यालयों के लिए 751 करोड़ का बजट जारी

    लखनऊ। प्रदेश के शैक्षणिक रूप से पिछड़े विकास खंडों में 128 आवासीय बालिका विद्यालयों का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने सीएम आवासीय बालिका विद्यालयों के निर्माण का निर्णय लिया गया है। हर विद्यालय का निर्माण 24.23 करोड़ की लागत से होगा। पहले चरण में 31 के भवनों के निर्माण के लिए 751 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं।

    मुख्यमंत्री आवासीय बालिका विद्यालयों में गरीब परिवार की बेटियों को निशुल्क आवसीय शिक्षा दी जाएगी। जिन 31 ब्लॉकों में विद्यालय बनाने के लिए बजट जारी किया गया है उसमें आगरा के एत्मादपुर, औरैया का अजीतमल, बागपत का बिनोली व खेकरा, फतेहपुर का देवमई व खजुहा, गोरखपुर के भरोहिया, हाथरस का हाथरस शामिल है।

    कानपुर देहात का अकबरपुर, मालसा, राजपुर, रसूलाबाद, कानपुर नगर का भीतरगांव, घाटमपुर, कल्याणपुर, पतरा, सरसौल, शिवराजपुर व बिल्हौर, मैनपुरी का जागीर, कुरावली व मैनपुरी, संतकबीर नगर का पौली, उन्नाव का बीघापुर, सिकंदरपुर कर्ण और वाराणसी के काशी विद्यापीठ ब्लॉक में यह विद्यालय बनेगा।

    यहां छात्राओं को कक्षा छह से प्रवेश होगा और कक्षा 12 तक पढ़ाई होगी। बेसिक शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव लालमणि यादव ने राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा को जारी बजट के अनुसार आवश्यक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है। साथ ही अन्य विकासखंडों में मानक के अनुसार भूमि प्राप्त कर शासन को जल्द प्रस्ताव उपलब्ध कराएं।