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Tuesday, August 22, 2119

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    Wednesday, January 7, 2026

    शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को जल्द मिलेगा कैशलेश इलाज, मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती; बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा- नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें, कदम से कदम मिलाकर साथ चलें, हर दिक्कत का होगा समाधान

    शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को जल्द मिलेगा कैशलेश इलाज, मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती; बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा- नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें, कदम से कदम मिलाकर साथ चलें, हर दिक्कत का होगा समाधान



    शिक्षामित्रों को जल्द मिलेगा कैशलेस इलाजः बेसिक शिक्षामंत्री

    लखनऊ । बेसिक शिक्षामंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षामित्र संघ का प्रान्तीय सम्मेलन में कहा कि सरकार जल्द शिक्षामित्रों को कैशलेस इलाज और बढ़ा हुआ मानदेय देगी। शिक्षामंत्री ने शिक्षामित्रों की लंबित मांगों के निस्तारण का आश्वासन दिया। मंगलवार को लोक निर्माण विभाग के विश्वसरैया सभागार में आयोजित प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रान्तीय सम्मेलन में शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों ने बेसिक शिक्षा मंत्री का स्वागत किया। सभी ने प्रदेश सरकार के शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों को कैसलेस चिकित्सा में शामिल करने एवं शिक्षामित्र को मूल विद्यालय वापसी की कार्रवाई शुरू किये जाने पर शिक्षामंत्री का स्वागत कर मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद ज्ञापित किया।



    शिक्षामित्रों की मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती

    लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने कहा है कि शिक्षामित्रों को जल्द ही उनके घर के पास, मनचाहे विद्यालयों में तैनाती दी जाएगी। राजधानी में मंगलवार को आयोजित उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रांतीय सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि इस दिशा में कार्य तेजी से चल रहा है और शीघ्र ही इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

    राज्यमंत्री ने शिक्षामित्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार उनकी सभी आवश्यक मांगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपील की कि शिक्षामित्र नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें और सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षामित्र किसी भी तरह से समस्या नहीं, बल्कि वे बेसिक शिक्षा के अभिन्न अंग हैं।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एमएलसी श्रीचंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षामित्रों की मांगों को मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है और उचित समय पर इसकी औपचारिक घोषणा भी की जाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा में एडेड और वित्तविहीन विद्यालयों के सभी शिक्षकों को शामिल करने का निर्णय लिया है। इसी कारण इसमें कुछ समय लग रहा है।

    सम्मेलन में एमएलसी व विधायक श्रीचंद्र शर्मा, वीरेंद्र सिंह लोधी, देवेंद्र सिंह लोधी, देवेंद्र सिंह राजपूत, उमेश द्विवेदी, हरिओम वर्मा, अवनीश सिंह, मानवेंद्र सिंह सहित प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला, महामंत्री सुशील कुमार, संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह तथा अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित रहे। 


    सरकार विरोधी छवि सुधारनी होगी

    शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने कहा कि शिक्षामित्रों को अपनी सरकार विरोधी छवि सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार शिक्षामित्रों के साथ खड़ी है और हर स्तर पर सहयोग करेगी। एमएलसी मानवेंद्र सिंह ने शिक्षामित्रों को बेसिक शिक्षा की रीढ़ बताते हुए कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में उनका नुकसान नहीं होने देगी। वहीं, एमएलसी अवनीश सिंह ने कहा कि शिक्षामित्र अपने कर्तव्यों का निष्ठा से निर्वहन करें, उनके अधिकारों की लड़ाई जनप्रतिनिधि पूरी मजबूती से लड़ते रहेंगे।


    Tuesday, January 6, 2026

    शिक्षा मंत्रालय के लीडरशिप प्रोग्राम "शिक्षोदय योजना" में यूपी की पांच डायट चयनित

    शिक्षा मंत्रालय के लीडरशिप प्रोग्राम "शिक्षोदय योजना" में यूपी की पांच डायट चयनित


    लखनऊ। शिक्षा मंत्रालय की ओर से देश भर के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) को न सिर्फ अपग्रेड किया जा रहा है बल्कि यहां के प्राचार्यों, शिक्षकों आदि को भी आईआईटी-आईआईएम में लीडरशिप का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में शिक्षा मंत्रालय की ओर से प्रदेश की पांच को विशेष लीडरशिप प्रोग्राम के लिए चुना गया है। 


    प्रदेश की आगरा, बाराबंकी, कानपुर देहात, कुशीनगर व प्रयागराज को इस विशेष लीडरशिप प्रोग्राम के लिए चुना गया है। यहां के प्राचार्यों को गुजरात इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, गांधीनगर में सात से नौ जनवरी तक तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

    यह प्राचार्य आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीक जानकारी लेकर इसे अपने यहां भी स्कूलों में लागू करेंगे। शिक्षा मंत्रालय के उप सचिव अजय कुमार की ओर से जारी पत्र के अनुसार इस प्रशिक्षण में यूपी के साथ ही ओडिशा, उत्तराखंड व अंडमान निकोबार के डायट प्राचार्य भी शिरकत करेंगे। 

    इस शिक्षोदय योजना के तहत डायट प्राचार्यों को 21वीं शताब्दी की जरूरत की शिक्षा के लिए तैयार किया जाएगा। इसमें यह प्राचार्य न सिर्फ खुद में नेतृत्व क्षमता का विकास करेंगे बल्कि अपने संस्थान को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अपने सेंटर को भी एक्सीलेंस के रूप में बनाएंगे। 

    जिला परियोजना कार्यालय एवं ब्लॉक रिसोर्स सेंटर पर खाली पड़े पद बेसिक शिक्षकों के काम के अतिरिक्त बोझ को और बढ़ा रहे

    जिला परियोजना कार्यालय एवं  ब्लॉक रिसोर्स सेंटर पर खाली पड़े पद बेसिक शिक्षकों के काम के अतिरिक्त बोझ को और बढ़ा रहे

    04 हजार से अधिक पद डीपीओ और बीआरसी पर सृजित

    लखनऊ। डीपीओ (जिला परियोजना कार्यालय) एवं बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) के खाली पड़े पद प्राइमरी शिक्षकों के काम के अतिरिक्त बोझ को और बढ़ा रहा है। नतीजा, शिक्षक संगठन अब शिक्षकों के रिक्त पदों को भरे जाने के साथ-साथ डीपीओ एवं बीआरसी के भी रिक्त पदों को भरने की मांग करने लगे हैं। सबसे खराब स्थिति बहराइच जिले की है, जहां के डीपीओ में 13 पद सृजित है जबकि सभी बीआरसी को मिलाकर कुल 60 पद सृजित हैं।

    इस प्रकार से इस जिले की दोनों संस्थाओं में कुल 73 सृजित पदों में से मात्र 4 पद ही भरे हुए हैं, शेष सभी खाली हैं। यही स्थिति ज्यादातर जिलों की हैं।


    सृजित पदों में से आधे से अधिक रिक्त पड़े 

    प्रदेश में डीपीओ और बीआरसी पर कुल मिलाकर स्वीकृत पदों की संख्या 4,279 है, जिनमें से आधे से अधिक पद रिक्त हैं। बीते पांच वर्षों के दौरान प्राइमरी स्कूलों में जिस प्रकार से अलग अलग क्षेत्रों के ऑनलाइन कार्यों में बढ़ोत्तरी हुई है, उसमें सहयोग के लिए डीपीओ और बीआरसी की स्थापना की गईहै, जिसके लिए दोनों स्तरों पर पर्याप्त संख्या में पदों का सृजन किया गया है।

    कर्मचारियों के अभाव में यह कार्य शिक्षकों व प्रधानाचार्यों को करना पड़ता है। नतीजा, कार्यदिवसों में शिक्षकों का काफी समय शिक्षण कार्य की जगह डाटा फिडिंग में व्यतीत हो जाता है।


    10 शीर्ष जिलों के डीपीओ एवं बीआरसी पर रिक्त पद


    (एक डीपीओ पर सृजित पदों की संख्या 13 है जबकि एक बीआरसी पर सृजित पदों की संख्या 4)

    यूपी बोर्ड इण्टरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षा वर्ष-2026 के आयोजन के सम्बन्ध में।

    यूपी बोर्ड ने इंटरमीडिएट के प्रायोगिक परीक्षा के परीक्षकों को दिए निर्देश, पहली बार तय की समयसीमा, मांगने पर उपलब्ध कराना होगा एक साल सुरक्षित रखनी होगी प्रैक्टिकल की कॉपी 

    प्रयागराज । 24 जनवरी से नौ फरवरी तक प्रस्तावित यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट प्रायोगिक परीक्षा की कॉपियों को एक साल तक सुरक्षित रखना होगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने 31 दिसंबर को सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को प्रयोगात्मक परीक्षा के संबंध में निर्देश भेजे हैं। परीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि कॉपियों को अपने पास एक साल तक संरक्षित रखें जिसे मांगने पर उपलब्ध कराना होगा। इससे पहले सुरक्षित कॉपियां रखने की कोई समयसीमा नहीं थी।

    इंटरमीडिएट में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, कंप्यूटर, गृह विज्ञान आदि विषयों में अलग अलग दो प्रैक्टिकल करने होते हैं। छात्र-छात्राओं को किए गए प्रयोग की कॉपी भी लिखनी होती है। 

    परीक्षा की उत्तरपुस्तिका पर उपलब्ध टेबल पर, मौखिक और प्रोजेक्ट सत्र कार्य (आंतरिक व वाहा) का अलग अलग नंबर होता है। ये कॉपियां स्कूल वाले ही छपवाकर उपलब्ध कराते हैं और परीक्षक उसी पर प्रायोगिक परीक्षा लेते हैं। प्रत्येक जिले में प्रयोगात्मक परीक्षा आयोजित कराने वाले विद्यालयों के सापेक्ष रैंडम आधार पर लगभग दो प्रतिशत तक विद्यालयों का ऑडिट भी बोर्ड मुख्यालय की ओर से कराया जाएगा। शिवचरणदास कन्हैयालाल इंटर कॉलेज अतरसुइया के कंप्यूटर शिक्षक विश्वनाथ मिश्र ने बताया कि बोर्ड ने एक साल तक कॉपियां सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। 

    प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए एक दिन में अधिकतम दो बैच बनाए जाएंगे और प्रत्येक वैच में विद्यार्थियों की संख्या 40 से अधिक नहीं होगी। एक दिन में अधिकतम 80 विद्यार्थियों के प्राप्तांक ही ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। प्रयोगात्मक परीक्षक को धमकी, लालच, बाधा या बल प्रयोग से प्रैक्टिकल प्रभावित करने या प्रयास करने वाले पर उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें इसमें आजीवन कारावास का प्रावधान है।

    नई व्यवस्था : स्क्रूटनी तक रखते हैं लिखित परीक्षा की कॉपियां
    प्रयोगात्मक प्रायोगिक परीक्षा की कॉपियां भले ही सालभर रखने के निर्देश परीक्षकों को दिए गए है लेकिन हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तरपुस्तिकाएं स्क्रूटनी तक ही सुरक्षित रखी जाती है। स्क्रूटनी का परिणाम घोषित होने के बाद लिखित परीक्षा की कॉपियां नष्ट कर दी जाती है।



    यूपी बोर्ड इण्टरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षा वर्ष-2026 के आयोजन के सम्बन्ध में।


    यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए हेल्प डेस्क शुरु, समस्याओं का होगा समाधान, इन नंबरों के जरिये हेल्प डेस्क से करें संपर्क

    यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए हेल्प डेस्क शुरु, समस्याओं का होगा समाधान, इन नंबरों के जरिये हेल्प डेस्क से करें संपर्क


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सोमवार से हेल्प डेस्क सेवा शुरू कर दी है। यह व्यवस्था बोर्ड मुख्यालय प्रयागराज समेत प्रदेश के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में लागू की गई है ताकि छात्र-छात्राएं लिखित व प्रयोगात्मक परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं, विषयगत शंकाओं, परीक्षा भय, तनाव और जिज्ञासाओं का समय पर समाधान प्राप्त कर सकें।


    माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि हेल्प डेस्क के माध्यम से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों को प्रयोगात्मक परीक्षाओं के साथ लिखित परीक्षाओं से संबंधित हर प्रकार की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए मोबाइल नंबर और ई-मेल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

    उन्होंने बताया कि मेरठ, बरेली, वाराणसी, गोरखपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ-साथ यूपी बोर्ड निदेशालय में भी हेल्प डेस्क स्थापित की गई है जहां विशेषज्ञ छात्र-छात्राओं की समस्याओं का समाधान करेंगे।

    बोर्ड अधिकारियों ने परीक्षार्थियों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की शंका, समस्या या तनाव की स्थिति में हेल्प डेस्क से संपर्क कर समय रहते जानकारी प्राप्त करें ताकि परीक्षा की तैयारी बिना किसी दबाव के कर सकें।


    इन नंबरों के जरिये हेल्प डेस्क से करें संपर्क

    जनवरी माह में भी डीएलएड के चालू सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई, पटरी से उतरा सत्र नहीं हो पा रहा नियमित, 2.40 लाख सीटों के सापेक्ष मात्र 1.60 लाख आवेदन

    जनवरी माह में भी डीएलएड के चालू सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई, पटरी से उतरा सत्र नहीं हो पा रहा नियमित, 2.40 लाख सीटों के सापेक्ष मात्र 1.60 लाख आवेदन

    05 जनवरी 2026
    लखनऊ। प्रदेश में डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) में प्रवेश की पटरी से उतरी गाड़ी अब तक लाइन पर नहीं आ सकी है। हालात यह हैं कि जनवरी माह में भी चालू सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है, जबकि सत्र समाप्त होने में कुछ ही महीने शेष हैं। विभाग अब भी छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन की तिथि बढ़ाने की तैयारी में जुटा है।

    प्रदेश के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में डीएलएड कोर्स में प्रवेश लिया जाता है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद अभ्यर्थी परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक पद पर भर्ती के लिए योग्य हो जाते हैं। बीते कुछ वर्षों से इस कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। साथ ही डीएलएड का शैक्षिक सत्र भी लंबे समय से अनियमित चल रहा है। पिछले वर्ष डीएलएड की अर्हता को लेकर इंटर और स्नातक के बीच काफी विवाद रहा। अंततः न्यायालय ने प्रवेश के लिए स्नातक को ही अर्हता बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके चलते न केवल पिछले सत्र के प्रवेश फरवरी 2025 तक खिंच गए, बल्कि चालू सत्र की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।

    इस वर्ष पहले अर्हता का मामला हाईकोर्ट में चला, जिसका निस्तारण अक्तूबर में हुआ। इसके बाद प्रवेश के लिए आवेदन लिए गए, जिनकी प्रक्रिया दिसंबर में समाप्त हुई। हालांकि अब तक न तो मेरिट सूची जारी हुई है और न ही प्रवेश की आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकी है। प्रदेश में डीएलएड की कुल 2.40 लाख सीटों के सापेक्ष मात्र 1.60 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। ये अभ्यर्थी भी डायट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के चक्कर काटने को मजबूर हैं। प्रवेश में हो रही देरी का असर इस बार भी सीटें भरने पर पड़ने की आशंका है।


    डीएलएड की जगह बीएलएड की भी तैयारी

    शिक्षा मंत्रालय की ओर से देशभर के डायट संस्थानों को अपग्रेड करने की कवायद चल रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले कुछ वर्षों में डीएलएड की जगह बीएलएड कोर्स शुरू करने की तैयारी है। डीएलएड जहां दो वर्षीय कोर्स है और इसके लिए प्रवेश अर्हता स्नातक है, वहीं बीएलएड चार वर्षीय होगा और इसकी अर्हता इंटरमीडिएट निर्धारित की जाएगी। बीएलएड करने के बाद अभ्यर्थी बेसिक और माध्यमिक दोनों स्तरों की शिक्षक भर्ती के लिए योग्य होंगे।

    सीटों के सापेक्ष कम आवेदन आए हैं। कॉलेजों की भी मांग थी, इसे देखते हुए रजिस्ट्रेशन की तिथि बढ़ाने का प्रस्ताव शासन में भेजा गया है। वहां से होने वाले निर्णय पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सत्र अगली बार से नियमित करने का प्रयास भी किया जाएगा। - अनिल भूषण चतुर्वेदी परीक्षा नियामक प्राधिकारी




    बेसिक शिक्षा में शिक्षक भर्ती का पता नहीं, डीएलएड से मोह घटा, एक लाख से ज्यादा सीटें रिक्त रहना निश्चित

    52000 पद रिक्त होने के सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे से बीच के दो वर्षों में बढ़े थे प्रवेश

    अब शिक्षक छात्र समानुपात बताए जाने पर एक लाख से ज्यादा सीटें रिक्त रहना निश्चित

    20 दिसंबर 2025
    प्रयागराज । बेसिक शिक्षा में सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए अनिवार्य योग्यता डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षण तो हर साल प्रवेश लेकर कराया जा रहा है, लेकिन सात साल से कोई शिक्षक भर्ती नहीं आने से छात्र-छात्राओं का  रुझान इससे घट रहा है। सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से दिए गए हलफनामे में करीब 52,000 पद - रिक्त बताए जाने पर पिछले दो वर्ष में प्रवेश लेने वालों की संख्या बढ़ - गई थी, लेकिन अब विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात समान बताए - जाने पर प्रवेश को लेकर इस बार ग्राफ फिर गिर गया है। 


    सत्र 2025 में डीएलएड में प्रवेश के लिए उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने आनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण कराई। प्रदेश के कुल 3,371 डीएलएड संस्थानों की 2,39,500 सीटों के सापेक्ष केवल 1,38,857 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराए। इसके सापेक्ष शुल्क केवल 1,25,333 ने ही जमा किए। इस तरह एक लाख से ज्यादा सीटें रिक्त रहना तय है। 


    शिक्षक भर्ती की स्थिति यह है कि बेसिक शिक्षा में 2018 के बाद से भर्ती नहीं आई। कुछ माह पहले सदन में बेसिक शिक्षा मंत्री ने एक प्रश्न के जवाब में कहा था कि विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात समान है। इस तरह जल्दी भर्ती की उम्मीद भी नहीं है। यह भर्ती परीक्षा अब तक पीएनपी कराता रहा है, लेकिन यह दायित्व अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को दे दिया है। इस तरह इस भर्ती को लेकर अभी नियमावली ही नहीं बनी है, इसलिए पद रिक्त होने पर भी भर्ती में देरी तय है।।





    स्कूलों को अनुदान देना नीतिगत मामला, हस्तक्षेप नहीं कर सकते, हाईकोर्ट ने कहा – वित्तीय सहायता प्राप्त करना मूल अधिकार नहीं

    स्कूलों को अनुदान देना नीतिगत मामला, हस्तक्षेप नहीं कर सकते, हाईकोर्ट ने कहा – वित्तीय सहायता प्राप्त करना मूल अधिकार नहीं

    एकल पीठ के निर्णय के खिलाफ दायर विशेष अपीलें स्वीकार, 35 याचियों को लगा झटका याचिकाएं खारिज


    प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि राज्य सरकार निजी प्राथमिक विद्यालयों को अनुदान देने के लिए बाध्य नहीं है भले ही वे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हों। अनुदान प्राप्त करना किसी संस्था का मूल अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सरकार द्वारा विद्यालय को 2024 में अनुदान देने के फैसले पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया किंतु कहा कि अध्यापकों को वेतन भुगतान का आदेश नहीं दिया जा सकता। यह सरकार पर है कि वह अध्यापकों की योग्यता नियमानुसार नियुक्ति पाने की दशा में उचित निर्णय ले। यह फैसला न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील पर दिया है।


    राज्य सरकार का तर्क था कि उसने अपना वैधानिक दायित्व पूरा किया है और हर किलोमीटर पर एक प्राथमिक विद्यालय और प्रत्येक तीन किलोमीटर पर एक जूनियर हाई स्कूल स्थापित किया है। कोर्ट ने कहा कि निजी विद्यालयों को अनुदान देने का निर्णय राज्य सरकार का नीतिगत मामला है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने राज्य सरकार व तीन अन्य की उन विशेष अपीलों को स्वीकार कर लिया है जिसमें एकलपीठ के दिसंबर 2022 के आदेश को चुनौती दी गई थी। इससे 35 याची लाभान्वित हए थे। उन्हें वेतन देने का आदेश दिया गया था।

     रमेश कुमार व 13 अन्य, श्री शिवमंगल चौधरी प्राइमरी विद्यालय, किरण यादव व तीन अन्य, छोटेलाल यादव व चार अन्य तथा घनश्याम व 10 अन्य के खिलाफ सरकार की तरफ से विशेष अपील दायर की गई थीं। विपक्षी की याचिकाओं में एकल पीठ ने सरकार को आगे निर्देश दिया कि वे उचित आदेश पारित करके याचिकाकर्ता संस्थान के शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को वेतन भुगतान के लिए उचित आदेश पारित कर अनुदान को मंजूरी दे और जारी करें। विशेष अपीलें प्रमुख सचिव, समाज कल्याण विभाग, और अन्य के माध्यम से दायर की गई। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने कहा कि याचिकाएं हैं।

    सुनवाई योग्य नहीं थीं। समाज कल्याण विभाग द्वारा, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों को शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहन के रूप में, निजी प्रबंधन द्वारा चलाए जा रहे प्राइमरी स्कूलों को आवर्ती अनुदान प्रदान करने की पिछली नीति पांच अक्टूबर 2006 को वापस ले ली गई थी, इसलिए याचीगण का दावा पोषणीय नहीं है। 

    खंडपीठ ने कहा, राज्य सरकार ने स्कूलों को नियमित ग्रांट देने का कोई आश्वासन नहीं दिया था। शिक्षकों की सैलरी और दूसरे खर्च मैनेजमेंट को अपने फंड से पूरे करने थे। मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने की राज्य की जिम्मेदारी, जिसे अब मौलिक अधिकार बना दिया गया है, उसे ऐसे स्कूलों के जरिए लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा, महामना मालवीय अनुसूचित जाति प्राथमिक पाठशाला, जाकरीया, रसरा, बलिया को अनुदान देने का फैसला सरकार का है और इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अन्य शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को वेतन देने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि उनके नियुक्ति और योग्यता के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सरकार केवल उन शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन दें, जो नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता और प्रक्रिया का पालन करते हुए नियुक्त किए गए हैं।

    Monday, January 5, 2026

    यूपी बोर्ड के कैलेंडर में निर्देश आदर्शों भरे, हकीकत में पूछ नहीं, वर्षभर गैर शैक्षणिक के बोझ से शैक्षिक पंचांग का पीछे छूटना तय

    यूपी बोर्ड के कैलेंडर में निर्देश आदर्शों भरे, हकीकत में पूछ नहीं, वर्षभर गैर शैक्षणिक के बोझ से शैक्षिक पंचांग का पीछे छूटना तय


    प्रयागराज, यूपी बोर्ड से जुड़े कक्षा नौ से 12 तक के 29 हजार से अधिक स्कूलों के लिए हर साल जारी होने वाले शैक्षणिक कैलेंडर में निर्देश तो आदशों से भरे होते हैं लेकिन हकीकत में बहुत कम निर्देशों का अनुपालन ही होता है। 


    उदाहरण के तौर पर 2025-26 सत्र के लिए जारी कैलेंडर में विद्यार्थियों को करियर के प्रति जागरूक करने के लिए प्रत्येक स्कूल में महीने में दो बार स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर, बैंक के अधिकारी, सेवायोजन अधिकारी, न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी, उद्यमियों एवं अन्य प्रतिष्ठित महानुभावों को सम्बोधित करने आमंत्रित करने की सलाह दी गई थी। ये अलग बात है कि पूरे प्रदेश में इक्का-दुक्का स्कूल ही होगा जहां करियर गाइडेंस संबंधित नियमित सत्र आयोजित किए गए हों। 


    इसी प्रकार यूपी बोर्ड के पूर्व सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने 'नए सत्र में नया सवेरा' कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके तहत अप्रैल के प्रत्येक सप्ताह में दो दिन शिक्षाधिकारियों को विद्यालयों की प्रातःकालीन सभाओं में विद्यार्थियों से जीवन मूल्यों, अनुशासन, करियर, नियमित दिनचर्या आदि प्रासंगिक विषयों पर प्रेरक संवाद करने को कहा गया था। इस कार्यक्रम में यथासंभव विद्यालयों के पुरा छात्रों एवं विभिन्न क्षेत्रों में सफल व्यक्तियों को भी आमंत्रित करने की बात कही गई थी। हालांकि यह निर्देश भी सिर्फ कैलेंडर तक सीमित रह गया। 

    हैंड्स ऑन एक्टीविटीज एवं एक्सपीरिएन्शियल लर्निंग विधा को गणित एवं विज्ञान विषय के शिक्षण में शामिल करने की बात हो या विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उनका स्वास्थ्य कार्ड बनवाना हो या फिर लैंगिक समानता पर विद्यार्थियों के बीच परिचर्चा, इन सभी निर्देशों की हकीकत में किसी स्कूल में पूछ नहीं है। 


    माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी कहते हैं कि वर्षभर सरकार और विभाग की ओर से प्रधानाचार्य और शिक्षकों को दूसरे इतने काम सौंपे जा रहे हैं कि शैक्षिक पंचांग को पीछे छूटना ही है। दूसरा अफसरों की ओर से बनाया जा रहा शैक्षिक पंचांग कई पहलुओं से अव्यावहारिक है। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में क्षेत्रीय विविधता और स्वायत्तता को नष्ट कर रहा है।

    बिना कार्यमुक्त, कार्यभार ग्रहण कराए यू-डायस पर बदल दिए विद्यालय, अनियमिताओं का आरोप लगाते हुए तीसरे चरण के समायोजन को रद्द करने की RSM की मांग

    बिना कार्यमुक्त, कार्यभार ग्रहण कराए यू-डायस पर बदल दिए विद्यालय, अनियमिताओं का आरोप लगाते हुए तीसरे चरण के समायोजन को रद्द करने की RSM की मांग

    महासंघ ने शिक्षकों के समायोजन में लगाया अनियमितता का आरोप, अफसरों को भेजा ज्ञापन 


    लखनऊ। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्राथमिक संवर्ग ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के तीसरे चरण के समायोजन में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। साथ ही इन समायोजन को निरस्त करने की मांग की है।

    प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने बताया कि बेसिक के विद्यालयों में शिक्षकों के शैक्षिक सत्र 2025-26 में तीसरे चरण के समायोजन में शिक्षकविहीन व एकल विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों को समायोजित करने का आदेश शासन ने दिया था। इस क्रम में जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा समायोजन की कार्यवाही 30 दिसंबर तक की जानी थी। लेकिन, जिला स्तर पर समायोजन में काफी गड़बड़ी की गई हैं।

    उन्होंने कहा है कि जिला स्तर पर सरप्लस शिक्षकों का निर्धारण व विद्यालय आवंटन में एकरूपता न होकर अलग-अलग मानक अपनाए गए हैं। कई जिलों में वरिष्ठ तथा कई में कनिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस मानकर समायोजित कर दिया गया है। इसमें शिक्षामित्रों व अनुदेशकों की गणना शिक्षक के रूप में की गई है, जो पूर्व में जारी विभागीय आदेशों के विरुद्ध है। वहीं कुछ जिलों में सरप्लस शिक्षकों से विकल्प लेकर विद्यालय आवंटित किये गए हैं, तो कुछ में बिना विकल्प लिए ही शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में समायोजित कर दिया गया है।

    प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने बताया कि प्रदेश के कुछ जिलों में बंद विद्यालयों को खोलने के लिए दूसरे विद्यालय को एकल कर शिक्षक भेज दिया गया। जबकि अन्य विद्यालयों में संख्या पर्याप्त थी। वहां से शिक्षक नहीं लिया गया। समायोजित शिक्षकों को विद्यालय से कार्यमुक्त/कार्यभार ग्रहण कराये बिना ही यू-डायस पोर्टल पर उनके विद्यालय बदल दिये गए हैं।

    प्रदेशीय मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन ने जिला स्तर पर किये गए समायोजन को निरस्त करने और कमियों को दूर कराकर एक समान पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, बेसिक शिक्षा निदेशक व सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को ज्ञापन भेजा गया है। 




    अनियमितताओं के चलते जिला स्तर पर किए गए तीसरे चरण के समायोजन को निरस्त करने की RSM की मांग 

    राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने उच्चाधिकारियों को भेजा ज्ञापन


    लखनऊ । राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (प्राथमिक संवर्ग) ने शिक्षकों के तीसरे चरण के समायोजन में की गई अनियमितता उजागर करते हुए इसे निरस्त करने की मांग उठाई है। प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा के अध्यापकों के शैक्षिक सत्र 2025-26 में तीसरे चरण के समायोजन में शिक्षक विहीन व एकल विद्यालयों में सरप्लस अध्यापकों को समायोजित करने के आदेश शासन द्वारा दिये गए थे जिसके क्रम में जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण/समायोजन की कार्यवाही 30 दिसंबर तक सम्पन्न की जानी थी, परन्तु जनपद स्तर पर समायोजन में भारी अनितामितायें की गयी हैं। 

    जनपद स्तर पर सरप्लस शिक्षकों का निर्धारण एवं विद्यालय आवंटन में एकरूपता न होकर मनमाने तरीके से अलग-अलग मानक अपनाये गए हैं, जिससे कई जनपदों में वरिष्ठ शिक्षक तथा कई जनपदों में कनिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस मानकर समायोजित किया गया है। प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने बताया कि प्रदेश के कुछ जनपदों एक बंद विद्यालयों को खोलने के लिए दूसरे विद्यालय को एकल कर में शिक्षक भेज दिया गया, जबकि अन्य विद्यालयों में संख्या पर्याप्त थी, वहाँ से शिक्षक नहीं लिया गया। 

    समायोजित शिक्षकों को विद्यालय से कार्यमुक्त/कार्यभार ग्रहण कराये बिना ही यू-डायस पोर्टल पर उनके विद्यालय बदल दिये गए हैं, जो कि बेसिक शिक्षा परिषद में स्थापित विभागीय व्यवस्था के एकदम विपरीत है। प्रदेशीय मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन द्वारा जनपद स्तर पर किये गए नियमविरुद्ध समायोजन को निरस्त करने और त्रुटियों को दूर कराकर एक समान पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के उपरान्त ही समायोजन की कार्यवाही करने की मांग अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, बेसिक शिक्षा निदेशक व सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को ज्ञापन भेजकर की गई है।







    तीसरे समायोजन में हो रही व्यापक अनियमितताओं तथा SIR में लगे BLO को शीत अवकाश का प्रतिकर अवकाश दिए जाने के सम्बंध में की मांग 


    Sunday, January 4, 2026

    विवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन देने का हाईकोर्ट का निर्देश

    विवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन देने का हाईकोर्ट का निर्देश

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 वर्ष से अधिक आयु की विवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन नहीं देने का बीएसए फर्रुखाबाद का आदेश रद्द कर दिया है। साथ ही याची को पारिवारिक पेंशन देने पर निर्णय लेने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने अनुराधा अहिरवार की याचिका पर दिया है। 


    उच्च प्राथमिक विद्यालय फ़र्रुखाबाद में प्रधानाध्यापिका पद पर कार्यरत याची की मां दुर्गा अहिरवार की मृत्यु वर्ष 2013 में हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद याची ने पारिवारिक पेंशन के लिए अनुरोध किया लेकिन बीएसए फ़र्रुखाबाद ने 1989 के शासनादेश को आधार मानते हुए याची के पारिवारिक पेंशन के दावे को अमान्य कर दिया।

     कहा गया कि याची 33 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी है और शासनादेश के अनुरूप पारिवारिक पेंशन अधिकतम 25 वर्ष आयु या विवाह होने तक मान्य है। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने हसीना बी केस के निर्णय और 2008 एवं 2012 के शासनादेश को आधार मानते हुए बीएसए का आदेश निरस्त कर दिया। 

    उत्तर प्रदेश में संस्कृत का अध्ययन कर रहे कक्षा छह से परास्नातक के विद्यार्थी अब छात्रवृत्ति के लिए 10 जनवरी तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन

    उत्तर प्रदेश में संस्कृत का अध्ययन कर रहे कक्षा छह से परास्नातक के विद्यार्थी अब छात्रवृत्ति के लिए 10 जनवरी तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन 

    छह से परास्नातक तक के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अंतिम तिथि बढ़ाई


    प्रयागराज । उत्तर प्रदेश में संस्कृत का अध्ययन कर रहे कक्षा छह से परास्नातक के विद्यार्थी अब छात्रवृत्ति के लिए 10 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने पहले आवेदन करने और उसकी हार्ड कॉपी विद्यालय में जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित की थी जो अब बढ़ाकर 10 जनवरी कर दी गई है। 


    संबंधित प्रधानाचार्य 11 और 12 जनवरी को आवेदनों का सत्यापन और उसे अपलोड करेंगे। सत्यापन की हार्डकॉपी 13 जनवरी तक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करनी होगी और डीआईओएस 15 जनवरी तक सत्यापन करेंगे।

    जिला समिति के समक्ष अनुमोदन के लिए 16 जनवरी तक आवेदन प्रस्तुत किए जाएंगे और डीआईओएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से लाभार्थियों का विवरण 20 जनवरी तक भेजेंगे। पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन पत्रों की समीक्षा 21 जनवरी तक होगी और 28 जनवरी तक लाभार्थियों के खाते में छात्रवृत्ति की धनराशि भेजी जाएगी। 

    प्रदेश के 403 सहायता प्राप्त संस्कृत महाविद्यालय और 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में कक्षा छह से परास्नातक तक में अध्ययनरत लगभग सवा लाख विद्यार्थियों में से अब तक 28 हजार से अधिक ने ही आवेदन किया है।

    नियम न कानून और परिषदीय शिक्षकों का कर दिया मनमाना तबादला, समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक का कोई तय मानक, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक

    नियम न कानून और परिषदीय शिक्षकों का कर दिया मनमाना तबादला, समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक का कोई तय मानक, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक


    यू-डायस पोर्टल पर 31 दिसम्बर को ही स्थानान्तरित पर अभी तक सूची जारी नहीं हुई

    ● शिक्षकों से विकल्प लिए बगैर कर दिया मनमाना स्थानान्तरण 
    ● जिलों में बीएसए की मनमानी के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक


    03 जनवरी 2026
    प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों के समायोजन में अफसरों पर मनमानी के आरोप लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि अफसरों ने मनमानी की सीमा पार कर दी है। यू-डायस पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर हुए समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक को ही देखा गया। जहां जिस बेसिक शिक्षा अधिकारी को जो समझ में आया, तबादला आदेश जारी कर दिया। आक्रोशित शिक्षक हाईकोर्ट खुलने पर समायोजन आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

    जिन जिलों में कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हुआ है उनमें अमेठी, मथुरा, रायबरेली, बदायूं, हरदोई, देवरिया, हाथरस, उन्नाव, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, बागपत और पीलीभीत आदि शामिल हैं। वहीं, जिन जिलों में वरिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हुआ है उनमें अमरोहा, हापुड़, वाराणसी, चित्रकूट, बरेली, रामपुर, आगरा, गोरखपुर, फर्रुखाबाद, कुशीनगर, संत कबीर नगर, फिरोजाबाद, फतेहपुर और सीतापुर आदि शामिल हैं।

    शिक्षक नेता निर्भय सिंह का कहना है कि कई जिलों जैसे बाराबंकी, लखनऊ आदि में यू-डायस पोर्टल पर शिक्षकों को 31 दिसम्बर को ही स्कूल से स्थानान्तरित कर दिया गया है। अभी तक सूची जारी नहीं हुई कि किसे किस स्कूल भेजा गया है। इसे लेकर शिक्षक परेशान हैं।

    प्रयागराज में समायोजन में मनमानी का आरोप
    आरोप है कि संदीप कुमार तिवारी का समायोजन मेजा के कंपोजिट विद्यालय नेवढ़िया से उच्च प्राथमिक विद्यालय महुलीकलां में हुआ जो कि 40 किलोमीटर दूर है जबकि दो किमी दूर बगल का स्कूल एकल था। संदीप कुमार जुलाई-अगस्त 2025 में समायोजन के दौरान प्रधानाध्यापक बिसाहिजन खुर्द से नेवढ़िया गए थे। आरोप है कि स्वेच्छा से समायोजन लेने के छह महीने के अंदर दोबारा जबरदस्ती समायोजन कर दिया गया। उनसे वरिष्ठ दो शिक्षक हैं जिनका समायोजन नहीं हुआ। उच्च प्राथमिक विद्यालय शृंग्वेरपुर से हिंदी की अकेली शिक्षक सुनीता चौरसिया का समायोजन मादूपुर कर दिया गया। जबकि उनके स्कूल में एक विषय में दो शिक्षिकाएं हैं, उनमें से किसी का समायोजन नहीं हुआ। कई स्कूल ऐसे हैं जिसमें वरिष्ठ और कनिष्ठ को छोड़कर अन्य शिक्षकों का समायोजन हो गया है।

    प्राइमरी हेड को जूनियर में किया समायोजित
    जौनपुर और कासगंज समेत कुछ जिलों में प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को उच्च प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर दिया गया है। जबकि इसे लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। सैकड़ों शिक्षकों ने प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में समायोजन या पदोन्नति में टीईटी लागू करने के लिए हाईकोर्ट में याचिकाएं कर रखी है।




    समायोजन में एक नीति न होने पर बेसिक शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी, प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर बढ़ रही नाराजगी

    30 दिसम्बर 2025
    लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ ने कहा है कि शिक्षकों के समायोजन में कोई एक नीति नहीं है। कहीं वरिष्ठ तो कहीं जूनियर शिक्षकों का मनमाना तबादला किया जा रहा है। 

    संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा एक प्रयोगशाला बन गई है। कभी स्कूलों की पेयरिंग, कभी टीईटी अनिवार्यता तो कभी ऑनलाइन हाजिरी की वजह से शिक्षक परेशान रहे हैं। अब सरप्लस शिक्षकों के समायोजन में उनके सामने नई मुसीबत खड़ी है। जिन स्कूलों में मानक से अधिक शिक्षक हैं, उन्हें एकल व बंद स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।

    उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने बताया है कि जिले में सरप्लस की जो सूची बनाई जा रही है, उसमें कुछ जगह जूनियर का तबादला किया जा रहा है। वहीं, कुछ जिलों में वरिष्ठ के तबादले का विकल्प दे रहे हैं। कुछ जगह बिना विकल्प के ही जबरन समायोजन की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि हर जिले में अलग-अलग नीति से शिक्षकों में काफी नाराजगी है।



    कहीं सीनियर तो कहीं जूनियर शिक्षक का कर दिया जा रहा तबादला, परिषदीय शिक्षकों के अंत:जनपदीय तबादलों में मनमानी

    लखनऊ: हाथरस के बीएसए में खंड शिक्षाधिकारियों को आदेश दिया है कि शिक्षक विहीन और एकल विद्यालय में जूनियर शिक्षक कर तबादला समायोजन कर दिया जाए। आदेश में यह भी लिखा है कि शिक्षकों से बिना विकल्प लिए तबादला किया जाए। वहीं, हमीरपुर के बीएमए लिखते हैं कि विकल्प लेकर  शिक्षक का तबादला कर दिया जाए। कई तरह की ऐसी असमानताएं केवल  मामला इन दो जिलों का ही नहीं,  पूरे प्रदेश का पही हाल है।

    कुछ बीएसए सीनियर शिक्षक का तबादला कर रहे हैं तो कुछ जिलों में जूनियर का तबादला कर दे रहे। इतना ही नहीं, कुछ बीएसए ने विकल्प लेकर तबादला करने की बात लिखी है तो कुछ बिना विकल्प तबादले को कह रहे। वहीं कुछ जिले ऐसे भी है, जहां जूनियर का कोई निक ही नहीं किया गया है। ऐसे में किसी भी शिक्षक का तबादला किया जा सकता है। जिलों  में अलग-अलग नीति अपनाए जाने से शिक्षक परेशान हैं। उनका कहना है कि बिना किसी नियम के जिस शिक्षक को चाहेंगे, तबादला कर दिया जाएगा। कोई विकल्प नहीं भरता है, तो उसका तबादला जबरन करने की बात भी कई जिलों के बीएसए कर रहे हैं। 


    कहां कैसे हो रहे तबादले?

    शासनादेश में कह स्पष्ट नहीं किया गया कि तबादला जूनियर का होगा या सीनियर का। सीतापुर के बीएसए ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया कि किस शिक्षक का पहले तबादला होगा। कुशीनगर के बीएसए ने यह तो लिखा है कि पहले दिव्यांग सरप्लस, फिर महिला सरप्लस और फिर पुरुष सरप्लस का तबादला होगा। लेकिन उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया कि इनमें भी पहले जूनियर का किया जाएगा या फिर सीनियर का। हमीरपुर के बीएसए ने पहले दिव्यांग महिला, फिर दिव्यांग पुरुष, उसके बाद बरिष्ठ महिला और फिर वरिष्ठ पुरुष अध्यापक का तबादला करने के लिए लिखा है। 

    शासन और निदेशक स्तर से जारी आदेश 19 दिसंबर को जो पत्र लिखा है, उसके अनुसार दिव्यांग, महिला, पुरुष विषया और विधुर के साथ ही वरिष्ठता के आधार पा तबादला होगा। वहीं, 26 दिसंबर को बिना किसी विकल्प के जूनियर शिक्षक तबादला करने के लिए लिखा है। 


    बड़े अफसरों ने साधा मौन
    इस बारे में अपर मुख्य सचिन पार्थ सारथी सेन शर्मा, डीजी स्कूल शिक्षा मोनिका रानी, निदेशक बेसिक शिक्षा से बात करने के लिए फोन किया गया। उनका पक्ष जानने के लिए मेसेज भी किया। अपर मुख्य सचिव ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बाकी अधिकारियों ने भी कोई जवाब नहीं दिया।


    क्या है असल वजह?
    इसके पहले भी बेसिक शिक्षकों के तबादले होते रहे है। प्रदेश स्वर में ऑनलाइन चुनते थे। इस बार तबादला करने के लिए बीएसए पर छोड दिया गया है। वे अपने स्तर से अलग-अलग़ निर्णय ले रहे है। जानकारों के अनुसार इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि इसस पहले एक बार सीनियर और एक बार जूनियर का नियम था। तब भी कुछ शिवक कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने ना सिरे से नही बनाने के लिए कहा गया। यही वजह है कि जिला स्तर से कैसे भी तबादला प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है। अभी कोर्ट बंद है। ऐसे में शिक्षक अभी कोर्ट भी नहीं सकते।

    Saturday, January 3, 2026

    यूपी बोर्ड: वर्ष 2028 से 10वीं में सात विषयों और वर्ष 2030 में इंटरमीडिएट में छह विषयों की होगी बोर्ड परीक्षा

    हर परीक्षार्थी के लिए अनिवार्य विषय होगा 'जाब रोल'

    व्यावसायिक कौशल विकसित करने के लिए अंकपत्र में अंकित होगा व्यावसायिक विषय का अंक, इंटरमीडिएट मानविकी, विज्ञान, वाणिज्य वर्ग में छह और कृषि वर्ग में सात विषय की होगी परीक्षा

    प्रयागराज । यूपी बोर्ड के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं में व्यावसायिक कौशल विकसित करने के लिए बड़ी पहल की गई है। इसके लिए हर वर्ग यानी मानविकी, विज्ञान, वाणिज्य व कृषि वर्ग के छात्र-छात्राओं को व्यावसायिक धाराओं (ट्रेड्स) के 24 क्षेत्रों में से किसी एक जब रोल को चुनना अनिवार्य होगा। इंटरमीडिएट के अंकपत्र व प्रमाणपत्र में इसके अंक अंकित किए जाएंगे, जबकि हाईस्कूल में ग्रेड दिए जाएंगे। इस तरह परीक्षा वर्ष 2028 में हाईस्कूल में सात और इंटरमीडिएट में कृषि वर्ग में सात व अन्य वर्गों में छह विषयों में छात्र छात्राओं को परीक्षा देनी होगी। अभी हाईस्कूल में छह व इंटरमीडिएट में पांच विषयों की परीक्षा देनी होती है।

    इंटरमीडिएट परीक्षा के मनविकी वर्ग, विज्ञान वर्ग, वाणिज्य वर्ग व कृषि वर्ग के छात्र-छात्राओं को अंतिम अनिवार्य विषय के रूप में जीवन कौशल (नैतिक, योग, खेल व शारीरिक शिक्षा) विषय अथवा व्यावसायिक कौशल विकास के लिए व्यावसायिक शिक्षा के किसी एक सेक्टर से एक जाब रोल में प्रशिक्षण प्राप्त किया जा सकेगा। परीक्षार्थियों का 50 अंकों का केवल एक प्रश्नपत्र होगा। इसके अतिरिक्त 50 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा अन्य विषयों के प्रयेगात्मक परीक्षाओं की भांति कराई जाएगी। कक्षा नौ व 11 की परीक्षा विद्यालय स्तर पर व कक्षा 10 व 12 की सार्वजनिक परीक्षा होगी। 

    प्रत्येक परीक्षार्थों को नैतिक, योग, खेल व शारीरिक शिक्षा विषय अथवा व्यावसानिक शिक्षा के किसी एक सेक्टर के एक जाब रोल की परीक्षा में न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 प्रतिशत पाना अनिवार्य होगा। इंटरमीडिएट स्तर पर कक्षा 11 व 12 का पाठ्यक्रम अलग-अलग निधर्धारित है। इसके अंतर्गत ट्रेड (सेक्टर/जाब रोल्स) का निर्धारण संस्था स्तर पर किया जाएगा। संस्था द्वारा चयनित सेक्टर स्वतः मान्य मने जाएंगे। शैक्षिक सत्र 2026-2027 से कक्षा नौ व 11 में प्रवेश लिए जाएंगे

    इंटरमीडिएट में यह हैं व्यवसायिक क्षेत्र एयरोस्पेस एंड एविएशन, (कृषि) एग्रीकल्चर, परिधान (अपेरल्स), आटोमोटिव, बैंकिंग फाइनेंस सर्विस एंड इंश्योरेंश (बोएफएसआइ), ब्यूटी एंड वेलनेस, कैपिटल गुइस, कांस्ट्रक्सन, डोमेस्टिक वर्कसं. इलेक्ट्रानिक्स, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर, आइटी, लाजिस्टिक्स, मीडिया एंड इंटरटेनमेंट, फिजिकल एजुकेशन, प्लंबिंग, पावर, प्राइवेट सिक्योरिटी, श्री डी प्रिंटिंग आपरेटर (रबर), स्किल काउंसिल फार ग्रीन जाब्स, स्पोर्ट्स, टेलीकाम, टूरिज्म एंड हास्पिटैलिटो।

    हाईस्कूल में इंटरमीडिएट के यह क्षेत्र नहीं होंगे एयरोस्पेस एंड एविएशन, बैंकिंग फाइनेंस सर्विस एंड इंश्योरेंश (बीएफएसआइ), कैपिटल गुड्स, कांस्ट्रक्सन, डोमेस्टिक वर्कर्स, फूड प्रोसेसिंग, रबर एवं स्पोर्ट्स। शेष क्षेत्र में पढ़ाई हो सकेगी।




    यूपी बोर्ड: वर्ष 2028 से 10वीं में सात विषयों और वर्ष
     2030 में इंटरमीडिएट में छह विषयों की होगी बोर्ड परीक्षा 

    2026-27 सत्र से व्यावसायिक पाठ्यक्रम होगा अनिवार्य

    प्रत्येक छात्र-छात्रा को एक व्यवसायिक विषय लेना होगा


    प्रयागराज। एक अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रहे 2026-27 शैक्षणिक सत्र से यूपी बोर्ड अपने पाठ्यक्रम में बहुत बड़ा बदलाव करने जा रहा है। इस सत्र से कक्षा नौ से व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य किया जा रहा है। मतलब नए सत्र में जो भी विद्यार्थी यूपी बोर्ड के स्कूल में कक्षा नौ में प्रवेश लेगा उसे व्यावसायिक शिक्षा के तहत एक विषय अनिवार्य रूप से लेना होगा। इस प्रकार 2028 में हाईस्कूल के छह की बजाय सात विषयों की बोर्ड परीक्षा होगी।


    परीक्षा कराई जाएगी। कक्षा नौ में एक विषय हिंदी अथवा प्रारंभिक हिंदी, दूसरे विषय के रूप में एक आधुनिक भारतीय भाषा या अंग्रेजी या शास्त्रीय भाषा संस्कृत, पाली, अरबी या फारसी और तीसरे विषय के रूप में गणित या गृह विज्ञान (केवल बालिकाओं के लिए), चौथे विषय के रूप में विज्ञान, पांचवें विषय के रूप में सामाजिक विज्ञान लेना होगा।

     छठवें विषय के रूप में एक भाषा जो पहले न ली हो या संगीत गायन/वादन, वाणिज्य, चित्रकला, कृषि, सिलाई, रंजन कला, कंप्यूटर, मानव विज्ञान, हेल्थ केयर, रिटेल ट्रेडिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी/आईटीईएस, प्लम्बर, इलेक्ट्रीशियन, सोलर सिस्टम रिपेयर या मोबाइल रिपेयर आदि पहले से संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रम में से कोई एक लेना होगा। 

    सातवें विषय के रूप में जीवन कौशल (नैतिक, योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा, समाजोपयोगी, उत्पादक एवं समाज सेवा कार्य) या व्यावसायिक कौशल विकास के लिए व्यावसायिक शिक्षा के 16 में से किसी एक सेक्टर से एक जॉब रोल में प्रशिक्षण प्राप्त किया जा सकता है।

    Friday, January 2, 2026

    प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी एवं दुर्घटनाओं से मृतकों की संख्या में कमी लायें जाने हेतु सभी सम्बन्धित विभागों द्वारा दिनांक 01.01.2026 से 31.01.2026 तक राष्ट्रीय सुरक्षा माह आयोजित किये जाने के सम्बन्ध में।

    प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी एवं दुर्घटनाओं से मृतकों की संख्या में कमी लायें जाने हेतु सभी सम्बन्धित विभागों द्वारा दिनांक 01.01.2026 से 31.01.2026 तक राष्ट्रीय सुरक्षा माह आयोजित किये जाने के सम्बन्ध में।


    कीमत बढ़ी पर एनसीईआरटी से सस्ती यूपी बोर्ड की किताबें, जनवरी अंत तक बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी अधिकृत पुस्तकें

    कीमत बढ़ी पर एनसीईआरटी से सस्ती यूपी बोर्ड की किताबें, जनवरी अंत तक बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी अधिकृत पुस्तकें

    नौ साल में पहली बार सत्र के दो महीने पहले आ जाएंगी किताबें


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की ओर से 2026-27 सत्र के लिए छपवाई जा रही किताबों के दाम बढ़ने के बावजूद एनसीईआरटी किताबों से कम हैं। बोर्ड ने किताबों के प्रकाशन का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है और इस महीने के अंत तक सभी 75 जिलों में किताबें पहुंच जाएंगी। इसका सबसे अधिक फायदा यूपी बोर्ड से जुड़े 29 हजार से अधिक स्कूलों के कक्षा नौ से 12 तक के एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को होने जा रहा है।


    पिछले नौ साल में पहली बार यूपी बोर्ड के स्कूलों में पढ़ने वाले मध्यम और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को सस्ती और अधिकृत किताबें समय से उपलब्ध हो सकेंगी। इससे पहले हर साल जुलाई में किताबें बाजार पहुंचती थी जबकि शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल शुरू होने के 16 दिन में ही शिक्षकों के दबाव में बच्चे कई गुना महंगी और अनाधिकृत किताबें खरीद लेते थे। इसी बात का ध्यान रखते हुए बोर्ड ने इस साल पहले ही प्रकाशन की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इस साल यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी किताबें बेचने पर फुटकर विक्रेताओं को 20 प्रतिशत कमिशन भी मिलेगा। इसका फायदा यह होगा कि फुटकर विक्रेता किताबें बेचने में रुचि लेंगे।


     पिछले सालों में प्रकाशक किताबें तो छापते थे लेकिन मार्जिन बहुत कम होने के कारण जिलों तक किताब नहीं पहुंचाते थे। जिलों के फुटकर दुकानदार दूसरे जिलों के प्रकाशकों से किताबें नहीं लेने जाते थे, इसलिए इस साल प्रकाशकों को ही सभी 75 जिलों में किताबें उपलब्ध कराना होगा। यूपी बोर्ड ने एनसीईआरटी की 36 विषयों की 70 किताबों और हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की 12 पाठ्यपुस्तकों का वर्कऑर्डर जारी किया है।


    किताबों की विषयवस्तु एनसीईआरटी की

    यूपी बोर्ड भले ही एनसीईआरटी की विषयवस्तु प्रकाशित करवाता है लेकिन उसकी किताबें सस्ती हैं। जैसे एनसीईआरटी की कक्षा 12 भौतिक विज्ञान की किताब 310 रुपये में मिलती है लेकिन यूपी बोर्ड यही किताब 110 रुपये में उपलब्ध करवा रहा है। कक्षा 11 की एनसीईआरटी की गणित 180 रुपये में है जबकि यूपी बोर्ड 87 रुपये में उपलब्ध करा रहा है। कक्षा 12 जीव विज्ञान की एनसीईआरटी किताब 170 और गणित की दो किताबें 245 रुपये में मिलती है वहीं यूपी बोर्ड जीव विज्ञान 73 रुपये और गणित की दोनों किताबें 100 रुपये में उपलब्ध कराने जा रहा है।


    439 रुपये में कक्षा नौ की किताबों का पूरा सेट

    इस साल किताबों का जो रेट तय हुआ है उसके मुताबिक कक्षा नौ की 12 किताबों का पूरा सेट 485 रुपये में मिलेगा। इसमें अंग्रेजी की तीन, सामाजिक विज्ञान की चार, गणित, विज्ञान, हिंदी व संस्कृत/उर्दू की किताबें शामिल है। इसी प्रकार कक्षा दस की 11 किताबों का सेट 474 रुपये में मिलेगा। उर्दू लेने वालों को 482 रुपये में सेट मिलेगा। कक्षा 11 में विज्ञान वर्ग लेने वालों को 458 रुपये में पूरी किताबें मिल जाएंगी। इसी प्रकार कक्षा 12 में गणित विषय के साथ विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को 439 रुपये में पूरा सेट मिलेगा।

    राज्य शिक्षा संस्थान ने प्रदेश के संदर्भ में कस्टमाइज की गई पुस्तकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को भेजा

    राज्य शिक्षा संस्थान ने प्रदेश के संदर्भ में कस्टमाइज की गई पुस्तकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को भेजा

    कक्षा चार के उर्दू विषय में जुड़ा नया पाठ 'बेगम हजरत महल

    प्रयागराज । प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में चरणबद्ध ढंग से लागू किए जाने के क्रम में अब कक्षा चार में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। इसके लिए राज्य शिक्षा संस्थान ने एनसीईआरटी आधारित कक्षा चार के पाठ्यक्रम को उत्तर प्रदेश के संदर्भ में विषयवार कस्टमाइज किया है। इसमें भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन, संस्कृत, कला, उर्दू एवं अंग्रेजी विषय की पाठ्य पुस्तकें शामिल हैं।


    उर्दू विषय की पाठ्यपुस्तक 'सितार' में 'नज्म शाम' के स्थान पर 'सोने वाले जागो नज्म' और 'बहादुर रूपा' की जगह 'बेगम हजरत महल' पाठ जोड़ा गया है। इसमें उनका संक्षिप्त इतिहास पढ़ाया जाएगा।

    राज्य सरकार कक्षा तीन तक में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू कर चुकी है। वर्ष 2026 से कक्षा चार में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किए जाने की तैयारी है। राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य राजेन्द्र प्रताप ने प्रदेश के संदर्भ में कस्टमाइज की गई पुस्तकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को भेज दिया है। उर्दू विषय चार के विद्यार्थी जंग-ए-आजादी में बेगम हजरत महल के योगदान को पढ़ेंगे। 

    इसी तरह गणित की पाठ्यपुस्तक 'गणित मेला' में कनर्नाटक के जैन मंदिर के चित्र व संबंधित अभ्यास प्रश्न की जगह राम मंदिर (अयोध्या) का चित्र एवं संबंधित अभ्यास प्रश्न शामिल किया गया है। डेजी और लाऊ मेघालय के शिलांग को नाम परिवर्तित करके वैभव और बबली प्रदेश के प्रयागराज, पुसाव (व्यंजन) की जगह केक वकांडा गांव के सामुदायिक पुस्तकालय का नाम बदलकर प्रयागराज जनपद के राजकीय पुस्तकालय नाम कर प्रदेश के स्थानीय परिवेश व विशेषताओं के आधार पर कस्टमाइज किया गया है। 

    इसके अलावा कला विषय की बांसुरी पाठ्यपुस्तक में बनारस घराना में पं. छन्नूलाल मिश्र एवं उप शास्त्रीय गायन की विदुषी गिरिजा देवी का चित्र, कजरी (पारंपरिक लोकगीत वर्षा गीत एवं संबंधित चित्र) के साथ प्रदेश की विशेषता को ध्यान में रखकर कुछ और बदलाव के साथ एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में कस्टमाइज किया गया है।



    2026-27 शैक्षिक सत्र से लागू होगी कक्षा चार की नई किताबें, यूपी के संदर्भ में एनसीईआरटी की पुस्तक में किया बदलाव

    कक्षा चार की किताब में जोड़ी अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तस्वीर

    कला विषय में छात्र-छात्राएं पढ़ेंगे कजरी, लोरी और गंगा गीत

    हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, कला, पर्यावरण की किताब में संशोधन


    प्रयागराज। यूपी के के एक एक लाख से अधिक परिषदीय स्कूलों के कक्षा चार में 2026-27 शैक्षिक सत्र से लागू हो रही एनसीईआरटी की गणित, हिन्दी, पर्यावरण और कला की किताबों में कई अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव गणित मेला पाठ्यपुस्तक के 'हमारे आसपास हजारों की संख्या' शीर्षक चौथे पाठ में हुआ है जिसमें कर्नाटक के जैन मंदिर के चित्र व संबंधित अभ्यास प्रश्न की जगह अयोध्या के प्रभु श्रीराम मंदिर का चित्र एवं संबंधित अभ्यास प्रश्न जोड़ा गया है। 

    राज्य शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों ने दक्षिण भारतीय व्यक्तियों के नाम जैसे गुड़प्पा के स्थान पर गणेश, वृक्षों में नारियल के स्थान पर आंवला, मुनिअम्मा के स्थान पर मीना कर दिया गया है। कक्षा चार हिंदी की पाठ्यपुस्तक वीणा में आसामान गिरा पाठ के स्थान पर बेसिक शिक्षा परिषद की पाठ्यपुस्तक फुलवारी से हौसला, एक पृष्ठीय गोलगप्पा के स्थान पर डेजी की डायरी, एक पृष्ठीय हवा और धूल के स्थान पर सत्य की जीत (सत्यवादी हरिशचन्द्र) जोड़ा गया है।

    छन्नू लाल मिश्र एवं गिरिजा देवी का चित्र जोड़ाः कला की पाठ्यपुस्तक बांसुरी में दक्षिण भारतीय कोलम की जानकारी देने के साथ-साथ हमारे प्रदेश में शुभ अवसरों पर चौक पूरना क्यों और कैसे बनाया जाता है? तथा चित्रकूट, वाराणसी, मिर्जापुर और सहारनपुर लकड़ी के खिलौने क्यों प्रसिद्ध है, के बारे में बताया गया है।

     एनसीईआरटी की पुस्तक में दक्षिण भारत के स्थान चन्नापाटना (कर्नाटक) का उल्लेख है। वरिसाई के स्थान पर उत्तर भारतीय संगीत में उपयोग में आने वाले अलंकार अथवा पलटा शब्द जोड़ा गया है। बनारस घराना में पं. छन्नू लाल मिश्र एवं उपशास्त्रीय गायन की विदुषी गिरिजा देवी का चित्र, कन्नड़ गीत आदोना बन्नी के स्थान पर कजरी (पारंपरिक लोकगीत वर्षा गीत एवं संबंधित चित्र), तमिल भाषा में लिखी लोरी को परिवर्तित करके हिन्दी अवधी भोजपुरी मिश्रित पारंपरिक लोरी शामिल की गई है। इसके अतिरिक्त कुमाऊंनी गीत (उत्तराखंड) के स्थान पर प्रदेश के प्रचलित बारहमासा गीत, मिजोरम लोकगीत के स्थान पर गंगा गीत और संबंधित चित्र दर्शाया गया है।

    मट्ठा-आलू, तहरी, पूरी-सब्जी को किया शामिल

    पर्यावरण की पाठ्यपुस्तक 'हमारा अद्भुत संसार' में उत्तर प्रदेश का राजकीय पुष्प, प्रचलित भोजन (मठ्ठा-आलू, तहरी, पूरी-सब्जी), श्री अन्न जैसे कोदो, रागी (मडुआ) के नाम, अनाज उगाने में सूर्य के प्रकाश का महत्व, प्रबोधनी एकादशी (पर्व), कागज निर्माण के प्रसिद्ध केन्द्र एवं अनुसंधान जालौन एवं सहारनपुर आदि विषयवस्तु भी जोड़ी गई है।

    कक्षा चार की की पाठ्यपुस्तकों के परीक्षण एवं कस्टमाइजेशन का काम उत्तर प्रदेश की शैक्षिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं एवं परिवेश के परिप्रेक्ष्य किया गया है। निश्चित रूप से इसका लाभ बच्चों को होगा। – राजेन्द्र प्रताप, प्राचार्य, राज्य शिक्षा संस्थान




    उत्तर प्रदेश के संदर्भ में विकसित की गई एनसीईआरटी की कक्षा 4 की किताबों को मिली मंजूरी, अगले सत्र से होंगी लागू 

    कक्षा चार की अंग्रेजी किताब में अब रानी लक्ष्मीबाई भी

    एनसीईआरटी की किताब में ईएलटीआई ने किया बदलाव, संगीतकार रवींद्र जैन भी शामिल


    प्रयागराज । कक्षा चार की अंग्रेजी की किताब में बच्चों को अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाली रानी लक्ष्मीबाई और मशहूर गायक, गीतकार और संगीतकार पद्मश्री रवीन्द्र जैन के बारे में भी संक्षेप में पढ़ाया जाएगा। 2026-27 सत्र से प्रदेश के एक लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में कक्षा चार में एनसीईआरटी की किताबें लागू होने जा रही हैं। अंग्रेजी की किताब संतूर को आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान (ईएलटीआई) एलनगंज के विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश के संदर्भ में विकसित किया है।


    महारानी अहिल्याबाई होल्कर के राज्य महेश्वर पर आधारित पाठ में रानी लक्ष्मीबाई के बारे में भी बताया गया है। लिखा है कि उन्होंने 1957 में झांसी किले की रक्षा के लिए अंग्रेजों से बहादुरी से लड़ाई की थी। अलीगढ़ में जन्मे और टीवी धारावाहिक रामायण के जरिए घर-घर में मशहूर हुए दिवंगत रवीन्द्र जैन के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। यूपी के लिए खासतौर से किताब में कई छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर नागालैंड के पारंपरिक खेल हेक्को पर आधारित पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि हेक्को और कबड्डी लगभग एक ही जैसे खेल हैं। जैसे लगौरी/सतोलिया को बताया गया कि वह खेल पिट्ठ है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में उपयोग में आने वाले शब्द चिन्ना को भी समझाया गया है। जैसे तमिल में चिन्ना का अर्थ छोटा जबकि कन्नड़ में चिन्ना का मतलब सोना होता है।

    ईएलटीआई के प्राचार्य डॉ. स्कंद शुक्ल ने बताया कि अंग्रेजी की किताब में हिंदी में शब्दार्थ दिए गए हैं जिससे कि किताबें बच्चों और शिक्षकों को भी पढ़ने-पढ़ाने में ज्यादा समस्या न आए। इसके अतिरिक्त छोटी-छोटी चीजें जोड़ी गई हैं। किसी अन्य प्रदेश के संदर्भ में दी गई विषयवस्तु में प्रयुक्त अपरिचित शब्दों के हिंदी अर्थ भी दिए गए हैं, जिससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप बच्चों में अन्य भारतीय भाषाओं में भी रुचि पैदा हो सके।


    अंग्रेजी की किताब में जोड़ा हिंदी का शब्दकोष

    ईएलटीआई के विशेषज्ञों ने कक्षा चार की अंग्रेजी की किताब में कठिन शब्दों का हिंदी में अर्थ भी दिया है। साथ ही उन शब्दों का उच्चारण करना भी बताया गया है। ग्रामीण परिवेश के जिन बच्चों को अंग्रेजी समझने में कठिनाई होती है, उन्हें कठिन शब्द समझने में आसानी होगी।

    बीएड प्रवेश परीक्षा फार्म भरने में गलती हुई तो सचेत करेगा AI, दस्तावेज व फोटो अपलोड करते ही जरूरत के हिसाब से हो जाएगी छोटी

    बीएड प्रवेश परीक्षा फार्म भरने में गलती हुई तो सचेत करेगा एआई, दस्तावेज व फोटो अपलोड करते ही जरूरत के हिसाब से हो जाएगी छोटी


    झांसी। संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा फार्म भरने में पहली बार एआई (ऑर्टीफिशियल इंटेलीजेंस) अभ्यर्थियों की मदद करेगा। ऑनलाइन आवेदन भरते समय कोई गलती हुई तो एआई सचेत करेगा। फोटो अपलोड होते ही जरूरत के हिसाब से छोटी हो जाएगी। यदि कोई जानकारी भरने से छूटी है या गलत हुई हैं तो अलर्ट करेगा। पंजीकरण करने वालों को समय-समय पर फार्म भरने का मैसेज मिलेगा। ये जानकारी बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने दी।


    कुलपति ने बताया कि बृहस्पतिवार को प्रवेश परीक्षा को लेकर समीक्षा बैठक की गई। इसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने बताया कि 10 फरवरी से परीक्षा फार्म भरना शुरू होगा। अभी तक तकनीकी खामी अथवा दिक्कतों की वजह से काफी अभ्यर्थी पंजीकरण करने के बाद फार्म नहीं भर पाते थे। इस वजह से हजारों अभ्यर्थी फार्म भरने से वंचित होते थे। चूंकि इस बार एआई का प्रयोग किया जा रहा है, इसलिए इस बार ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए। फार्म भरते समय की गईं शाब्दिक गलतियों को भी सही करने के लिए इंगित किया जाएगा।

    उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं 19 फरवरी से

    उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं 19 फरवरी से


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं 19 फरवरी से आयोजित की जाएंगी। 28 फरवरी तक आयोजित होने वाली परीक्षा में 56 हजार से ज्यादा छात्र-छात्रा शामिल होंगे। इसके लिए परिषद की ओर से केंद्र निर्धारण किया जा रहा है। लगभग 250 परीक्षा केंद्र प्रदेश भर में बनाए जाएंगे। 


    परिषद के अनुसार परीक्षा में प्रदेश भर के 1102 संस्कृत विद्यालयों के छात्र शामिल होंगे। इसमें कक्षा 10 (पूर्व मध्यमा द्वितीय) के 21906, कक्षा 11 (उत्तर मध्यमा प्रथम) के 19751, कक्षा 12वीं (उत्तर मध्यमा द्वितीय) के 14145 और डिप्लोमा के 556 कुल 56358 छात्र शामिल हो रहे हैं। 


    परीक्षा दो पालियों में सुबह 8.30 से 11.45 बजे तक और दूसरी पाली में दो से 5.15 बजे तक आयोजित की जाएंगी। परिषद की ओर से जारी परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार 19 फरवरी को अनिवार्य संस्कृत का पेपर होगा। इस दिन परीक्षा में सर्वाधिक छात्र शामिल होंगे। 

    पारस्परिक स्थानांतरण का आदेश जारी नहीं और जाड़े की छुट्टियां शुरू, बेसिक शिक्षा विभाग में शासनादेश का नहीं हो रहा अनुपालन

    पारस्परिक स्थानांतरण का आदेश जारी नहीं और जाड़े की छुट्टियां शुरू, बेसिक शिक्षा विभाग में शासनादेश का नहीं हो रहा अनुपालन

     
    लखनऊ: बेसिक शिक्षा विभाग में परिषदीय शिक्षकों के लिए गर्मी और जाडे की छुट्टियों में जिले के भीतर (अंतःजनपदीय) और जिले के बाहर (अंतरजनपदीय) पारस्परिक स्थानांतरण की व्यवस्था है। ठंड की छुट्टियां गुरुवार से शुरू हो चुकी हैं, लेकिन अब तक पारस्परिक स्थानांतरण को लेकर कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षकों में काफी असंतोष है। 


    उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने इस मुद्दे को लेकर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह से हस्तक्षेप की मांग की है। कहा है कि जाड़े की छुट्टियों में पारस्परिक स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी करने का कार्यक्रम तत्काल जारी किया जाए, ताकि शिक्षक अपने घर के नजदीक पहुंच सकें। संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि यदि जल्द आदेश जारी नहीं किए गए तो शीतकालीन अवकाश में पारस्परिक स्थानांतरण मिलना कठिन हो जाएगा। आदेश जारी होने के बाद भी पेयर बनाने, आवेदन, सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं में समय लगता है। ऐसे में देरी होने पर पूरी प्रक्रिया अधूरी रह सकती है।

    बदले हुए समय के अनुसार आज से खुल जाएंगे सूबे के माध्यमिक विद्यालय

    बदले हुए समय के अनुसार आज से खुल जाएंगे सूबे के माध्यमिक विद्यालय

    लखनऊ। प्रदेश में माध्यमिक विद्यालय दो जनवरी से खुल जाएंगे। विद्यालय बदले हुए समय के अनुसार सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक खुलेंगे। सर्दी को देखते हुए विद्यालयों के समय को एक घंटा कम किया गया है। पहले इनका समय सुबह 9.30 से 3.30 बजे तक का था। हालांकि, तीन जनवरी को हजरत अली के जन्मदिवस की छुट्टी रहेगी। बता दें, सीएम ने प्रदेश में भीषण शीतलहर को देखते हुए 29 दिसंबर से एक जनवरी तक कक्षा 12 तक के बच्चों के लिए अवकाश घोषित किया था। 


    भीषण ठंड के चलते माध्यमिक विद्यालय का समय बदला

    लखनऊ। प्रदेश में भीषण ठंड को देखते हुए माध्यमिक विद्यालयों का समय बदल दिया गया है। आगे बदले हुए समय पर विद्यालय खुलेंगे। विद्यालय अब सुबह दस बजे से शाम तीन बजे तक चलेंगे। पहले यह समय साढ़े नौ बजे से साढ़े तीन बजे तक था। इस तरह विद्यालयों का समय एक घंटे कम हो गया है। 

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी आदेश प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालय पर लागू होगा। निदेशक ने सभी डीआईओएस को अगले आदेश तक यही समय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। 


    शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों का प्रवेश लिये जाने हेतु मानक संचालन प्रकिया (SOP) के संबंध में


    अटल आवासीय विद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू, 31 जनवरी तक जमा किए जाएंगे फॉर्म, 22 फरवरी को होगी प्रवेश परीक्षा




    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से संचालित अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए ऑफलाइन व ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया  शुरू हो गई है।

    आवेदन पत्र पूर्ण रूप से भरकर जमा करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी (शाम पांच बजे तक) और प्रवेश पत्र प्राप्त करने की अंतिम तिथि सात फरवरी है। प्रवेश परीक्षा 22 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन upbocw.in के माध्यम से या समिति कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर किया जा सकता है।

    ऑफलाइन आवेदन पत्रों का वितरण जिलों के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, खंड विकास अधिकारी कार्यालय, बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय और जनपदीय श्रम कार्यालय व जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के द्वारा किया जा रहा है। सुबह 10 से शाम पांच बजे तक इन कार्यालयों से फॉर्म प्राप्त करके वहीं जमा किए जा सकते हैं। छात्र व छात्राओं को 50-50 फीसदी सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। 



    शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों का प्रवेश लिये जाने हेतु मानक संचालन प्रकिया (SOP) के संबंध में



    कृपया उपर्युक्त विषयक उ०प्र० शासन, श्रम अनुभाग-02 के पत्र संख्या-1/1186369/2025-1703264 दिनांक 24.12.2025 का सन्दर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जिसके माध्यम से आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों का प्रवेश लिये जाने हेतु मानक संचालन प्रकिया (S.O.P) पर अनुमोदन प्रदान किया गया है।


    उपर्युक्त के क्रम में मा० मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश परीक्षा "मण्डल स्तरीय अनुश्रवण समिति" के माध्यम से कराये जाने के क्रम में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 की प्रवेश परीक्षा की मानक संचालन प्रकिया (S.O.P) पत्र के साथ संलग्न कर इस अनुरोध के साथ प्रेषित है कि कृपया प्रवेश परीक्षा के सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही कराने का कष्ट करें। 


    Thursday, January 1, 2026

    राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025 के आवेदकों के साक्षात्कार / प्रस्तुतीकरण के संबंध में

    राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025 के आवेदकों के साक्षात्कार / प्रस्तुतीकरण के संबंध में

    Wednesday, December 31, 2025

    यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए 8033 परीक्षा केंद्र फाइनल, अंतिम सूची जारी

    यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए 8033 परीक्षा केंद्र फाइनल, अंतिम सूची जारी, देखें और करें डाउनलोड 


    प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची जारी कर दी है। परीक्षा प्रदेश के 8033 केंद्रों पर होगी। परिषदीय केंद्र निर्धारण समिति की 24 दिसंबर को हुई बैठक में अनुमोदन के बाद राज्यभर में 8033 परीक्षा केंद्र अंतिम रूप से निर्धारित किए गए हैं। इसको लेकर परिषद के सचिव भगवती सिंह द्वारा पत्र जारी कर दिया गया है।

    पहले चरण में प्रदेशभर में 7448 परीक्षा केंद्र प्रस्तावित किए गए थे। इन पर विभिन्न स्तरों से 3053 आपत्तियां प्राप्त हुईं। जिला स्तरीय समितियों ने इन आपत्तियों की जांच की और उनका समाधान किया।

    ज्यादातर केंद्रों का समाधान दूर बनाए गए केंद्र और क्षमता से अधिक परीक्षार्थियों के आवंटन जैसे प्रकरणों पर हुआ। जारी सूची में न केंद्र बढ़ाए गए और न ही काटे गए हैं। अंतिम रूप से तय किए गए परीक्षा केंद्रों की सूची परिषद की आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ परिषद के एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट और फेसबुक अकाउंट पर भी अपलोड कर दी गई है।

    यूपी बोर्ड परीक्षा 18 फरवरी से प्रारंभ होकर 12 मार्च तक आयोजित की जाएगी। इस वर्ष हाईस्कूल परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए 27,50,945 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया है, जबकि इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए 24,79,352 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इस प्रकार कुल 52,30,297 छात्र-छात्राएं यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में शामिल होंगे।



    यूपी बोर्ड को मिलीं तीन हजार से अधिक शिकायतें, 28 दिसंबर तक इनका निस्तारण कर 30 दिसंबर को परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची जारी करने की तैयारी

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए कई जिलों में परीक्षा केंद्र बीस से लेकर 49 किमी दूर तक भेज दिया है। इसके अलावा अधिक छात्र आवंटित करने, छात्रों की कम संख्या देने, परीक्षा केंद्र न बनाए जाने की तीन हजार से अधिक शिकायतें माध्यमिक शिक्षा परिषद को प्राप्त हुई हैं।

    इनका निस्तारण 28 दिसंबर तक करने के बाद 30 दिसंबर को परीक्षा केंद्रों की फाइनल सूची जारी करने की तैयारी में यूपी बोर्ड जुट गया है। यूपी बोर्ड ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए 7448 विद्यालयों को ऑनलाइन परीक्षा केंद्र घोषित किया था। इनमें 910 राजकीय, 3484 एडेड और 3054 वित्त विहीन विद्यालय शामिल थे। छात्रों की कुल संख्या 52,30,297 है।

    उधर, जनपदीय समितियों ने ऑनलाइन बनाए गए केंद्रों की संख्या बढ़ा कर 8033 कर दी जिसमें 910 राजकीय स्कूलों की संख्या कम कर 596, एडेड 3484 स्कूलों की संख्या कम कर 3453 कर दी। जबकि, 3054 वित्त विहीन स्कूलों की संख्या बढ़ाकर 3984 कर दी गई।

    माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश संरक्षक हरि प्रकाश यादव का कहना है कि प्रयागराज में परीक्षा केंद्र बनाए गए एडेड स्कूलों को बिना किसी कारण के काट कर वित्त विहीन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि छात्र संख्या एडेड स्कूलों में कम कर वित्त विहीन में बढ़ाने का खेल हुआ है।


    परीक्षा केंद्र बनाए जाने, लंबी दूरी पर केंद्र भेजे जाने, छात्र संख्या कम करने सहित प्रदेश भर से 3053 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। प्रयास है कि 28 दिसंबर तक इनका निस्तारण कर 30 दिसंबर को केंद्रों की अंतिम सूची जारी कर दी जाए। –भगवती सिंह, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद


    केस एक 
    प्रदेश के लगभग हर जिले से लंबी दूरी पर सेंटर भेजे जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। हालांकि, इसमें एक जिले में इंटरमीडिएट कॉलेज के छात्रों का सेंटर 49 किमी दूर भेजे जाने की शिकायत आई है। आरोप है कि तीन किमी की दूरी पर परीक्षा केंद्र होने के बावजूद भी इतनी दूर केंद्र बना दिया गया है। यह माध्यमिक शिक्षा परिषद के मानकों के विपरीत है।

    केस दो
    प्रयागराज जिले में ऑनलाइन केंद्रों के निर्धारण में एडेड स्कूल परीक्षा केंद्र बनाए गए। इसमें 15 से अधिक स्कूल ऐसे हैं जिन्हें बिना किसी कारण के दूसरी सूची में हटाकर वित्त विहीन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया। इसकी शिकायत माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के नेताओं ने की है।

    केस तीन
     प्रयागराज जिले में ऑनलाइन सेंटर निर्धारण में एडेड स्कूलों में छात्र संख्या को दूसरी सूची में कम कर वित्त विहीन स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ा दी गई। चर्चा है कि ऐसा विभागीय अधिकारियों व वित्त विहीन स्कूलों के प्रबंधकों की साठगांठ की वजह से हुआ है। इसकी शिकायत भी प्राप्त हुई है।

    केस चार
     गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया जिलों से परीक्षा केंद्र न बनाए जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। कोई अधिक छात्र आवंटित होने की शिकायत कर रहा है तो कोई इस बार विद्यालय को परीक्षा केंद्र न बनाए जाने का मुद्दा उठा रहा है। शिकायत करने वालों में अधिकतर वित्त विहीन स्कूलों के प्रधानाचार्य शामिल हैं।




    यूपी बोर्ड परीक्षा: जनपदीय समितियों ने केंद्र की सूची में बढ़ा दिए 930 वित्तविहीन स्कूल

    बोर्ड परीक्षा में छात्रों की संख्या दो लाख कम होने के बावजूद भी 585 केंद्रों की बढ़ोतरी

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 के लिए ऑनलाइन बनाए गए 7448 केंद्रों के लिए 8707 आपत्तियां दर्ज की गई हैं। डीएम की अध्यक्षता में जनपदीय परीक्षा निर्धारण समितियों ने आपत्तियों के निस्तारण के बहाने 314 राजकीय और 31 एडेड स्कूलों के केंद्रों की संख्या कम कर 930 वित्तविहीन अन्य स्कूलों की संख्या बढ़ा दी हैं। ऐसे में वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा में छात्रों की संख्या दो लाख कम होने के बावजूद भी 585 केंद्र बढ़ गए हैं।

    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए 7448 विद्यालयों को केंद्र घोषित किया है। इनमें 910 राजकीय, 3484 एडेड तथा 3054 वित्त-विहीन स्कूल शामिल थे। छात्रों की संख्या 52,30,297 हैं।

    वर्ष 2025 के 54,37,174 विद्यार्थी होने के बावजूद भी 7,657 ही सेंटर बनाए गए थे। इसमें 940 राजकीय, 3,512 एडेड और 3,205 वित्तविहीन स्कूलों की संख्या शामिल हैं। इस बार छात्रों की संख्या कम होने के बावजूद भी केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर जनपदीय समितियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    केंद्रों की संशोधित सूची बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड हो चुकी है। 22 दिसंबर तक विद्यालयों, छात्रों, अभिभावकों, प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों को दोबारा आपत्तियां दर्ज करने का अवसर परिषद ने दिया है।

    सचिव भगवती सिंह ने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद 30 दिसंबर को अंतिम केंद्रों की फाइनल सूची जारी कर दी जाएगी।




    8033 केंद्रों पर होगी यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा

    हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के लिए 8033 केंद्र बनाए गए हैं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद जिलों से 585 केंद्र बढ़ा दिए गए हैं। यही नहीं ऑफलाइन माध्यम से सर्वाधिक निजी स्कूलों के केंद्र बढ़े हैं।

    यूपी बोर्ड ने 30 नवंबर को जारी ऑनलाइन सूची में 7448 केंद्र बनाए थे जिनमें 910 राजकीय, 3484 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय और 3054 वित्तविहीन स्कूल शामिल थे। इन ऑनलाइन केंद्रों पर छात्रों, प्रधानाचार्यों, अभिभावकों और प्रबंधकों से आपत्तियां मांगी गई थी। सभी 75 जिलों से आठ हजार से अधिक आपत्तियां मिली थी। इनके निस्तारण के लिए बोर्ड ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति को अधिकृत करते हुए केंद्र बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। 


    जिला समितियों से आपत्तियां निस्तारण के बाद केंद्रों की संख्या 8033 हो गई है जिसमें 596 राजकीय, 3453 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय और 3984 वित्तविहीन स्कूल शामिल हैं। साफ है कि सबसे अधिक राजकीय विद्यालयों के केंद्रों में कटौती की गई है। बोर्ड ने 910 राजकीय विद्यालयों को केंद्र बनाया था जबकि जिलों ने 314 स्कूलों का केंद्र खत्म करते हुए वित्तविहीन स्कूलों को सेंटर बना दिया है। 31 एडेड कॉलेजों के केंद्र भी काट दिए गए हैं। 

    बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से बुधवार देर रात जारी सूचना के मुताबिक ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तावित परीक्षा केन्द्रों (विद्यालय छात्र आवंटन सहित) की सूची जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जनपदीय केन्द्र निर्धारण समिति के अनुमोदन के बाद वेबसाइट upmsp.edu.in पर अपलोड कर दी गई है। इन परीक्षा केन्द्रों (विद्यालय छात्र आवंटन सहित) के संबंध में यदि कोई आपत्ति या शिकायत हो तो छात्र, अविभावक, प्रधानाचार्य या प्रबंधक साक्ष्यों के साथ संबंधित विद्यालय की आईडी से अपना ऑनलाइन प्रत्यावेदन पोर्टल upmsp.edu.in पर 22 दिसंबर तक भेज सकते हैं। परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची 30 दिसंबर तक अपलोड की जाएगी।


    पिछले साल से कम हो गए 107 परीक्षा केंद्र

    पिछले साल की तुलना में परीक्षा केंद्रों की संख्या में 107 की कमी आई है। 2025 की परीक्षा के लिए यूपी बोर्ड ने ऑनलाइन 7657 केंद्र तय किए थे। आपत्तियों के निस्तारण के बाद 8140 स्कूलों को केंद्र बनाना पड़ा था। 2026 की परीक्षा के लिए बोर्ड ने 7446 केंद्र बनाए थे जो बढ़कर 8033 हो गए हैं। 2024 में ऑनलाइन 7864 केंद्र बने थे जो आपत्तियां निस्तारण के बाद 8265 हो गए थे। पिछले लगभग एक दशक से यूपी बोर्ड ऑनलाइन माध्यम से केंद्र निर्धारित करते हुए सूची जारी करता है।