- सेहत, शिक्षा और संस्कार के साथ नए सत्र से परिषदीय विद्यालयों में आएगा बड़ा बदलाव
- बच्चों की होगी बल्ले-बल्ले, शिक्षकों पर कसेगा शिकंजा
कानपुर। नए सत्र से परिषदीय विद्यालयों में बड़े बदलाव की तैयारी
है। बच्चे खादी की ड्रेस में आएंगे। मिड डे मील के साथ फल मिलेंगे। बैग
में रखी किताबें विशेष चिकने कागज पर होंगी। परीक्षा में पेपर और कॉपी
दोनों मिला करेगी। बच्चे स्कूल में दतून करेंगे। दादी मां के नुस्खे
जानेंगे। एसएमएस और एण्ड्रॉयड मोबाइल से सेल्फी के माध्यम से बच्चों और
शिक्षकों की हाजिरी होगी। शिक्षकों और अभिभावकों की सुनवाई के लिए हेल्प
लाइन जारी की जाएगी।
सरकार चाहती है कि परिषदीय विद्यालयों को पब्लिक स्कूलों के समान बना दिया जाए। यहां पढ़ने वाले बच्चे सिर्फ यहीं तक सीमित न रहें। वे आगे की कक्षाओं में बराबरी के साथ बढ़ें। इसके लिए इन बच्चों को मुफ्त मिलने वाली सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। अगर अब तक प्रस्तावित योजनाएं व्यवहारिकता में शुरू हो जाती हैं तो इससे परिषदीय शिक्षा में बदलाव आ सकता है।
खादी की ड्रेस : खादी की ड्रेस पहनाने की मंशा केन्द्र सरकार की है। वह चाहती है कि सभी सरकारी स्कूलों में बच्चे खादी की ड्रेस पहनें। इससे खादी को बढ़ावा मिलेगा और इनके अन्दर स्वदेश प्रेम की भावना और बढ़ेगी। मानव संसाधन मंत्रलय ने यह राज्य सरकार पर छोड़ा है कि वह से लागू करती है या नहीं।
एमडीएम में फल : मिड डे मील (एमडीएम) के इतर राज्य सरकार अपने स्तर पर एक योजना तैयार कर रही है जिसमें प्रति छात्र तीन रुपए सरकार अतिरिक्त खर्च करेगी। शेष मिड डे मील की सामग्री जारी रहेगी। इसके लिए 178 करोड़ का बजट मांगा गया है। एमडीएम की व्यवस्था में बदलाव संभव है। प्रधानों की भूमिका समाप्त कर अभिभावक कमेटी को सौंपा जा सकता है।
सरकार चाहती है कि परिषदीय विद्यालयों को पब्लिक स्कूलों के समान बना दिया जाए। यहां पढ़ने वाले बच्चे सिर्फ यहीं तक सीमित न रहें। वे आगे की कक्षाओं में बराबरी के साथ बढ़ें। इसके लिए इन बच्चों को मुफ्त मिलने वाली सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। अगर अब तक प्रस्तावित योजनाएं व्यवहारिकता में शुरू हो जाती हैं तो इससे परिषदीय शिक्षा में बदलाव आ सकता है।
खादी की ड्रेस : खादी की ड्रेस पहनाने की मंशा केन्द्र सरकार की है। वह चाहती है कि सभी सरकारी स्कूलों में बच्चे खादी की ड्रेस पहनें। इससे खादी को बढ़ावा मिलेगा और इनके अन्दर स्वदेश प्रेम की भावना और बढ़ेगी। मानव संसाधन मंत्रलय ने यह राज्य सरकार पर छोड़ा है कि वह से लागू करती है या नहीं।
एमडीएम में फल : मिड डे मील (एमडीएम) के इतर राज्य सरकार अपने स्तर पर एक योजना तैयार कर रही है जिसमें प्रति छात्र तीन रुपए सरकार अतिरिक्त खर्च करेगी। शेष मिड डे मील की सामग्री जारी रहेगी। इसके लिए 178 करोड़ का बजट मांगा गया है। एमडीएम की व्यवस्था में बदलाव संभव है। प्रधानों की भूमिका समाप्त कर अभिभावक कमेटी को सौंपा जा सकता है।
किताबों
का कागज बदलेगा : किताबों का कागज अब ऐसा होगा जिससे बच्चों में पढ़ने की
रुचि बढ़ेगी। किताबों में अब तक जो कागज इस्तेमाल हो रहा है वह डल होता है।
अब ग्लेज पेपर सरीखा चमकीला कागज इस्तेमाल किया जाएगा।
हेल्पलाइन
बनाई जाएगी : शिक्षकों और अभिभावकों की समस्याओं को हल कराने के लिए बेसिक
शिक्षा अधिकारी के स्तर पर हेल्प लाइन जारी की जाएगी। बेसिक शिक्षा मंत्री
ने इसके लिए निर्देश दिए गए हैं।
करेंगे
बच्चे : नए सत्र से बच्चों को स्कूल में दातून का इस्तेमाल और हाथ धोने पर
जोर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त स्वस्थ्य रहने के लिए दादी मां के नुस्खे
भी बताए जाएंगे।
एसएमएस से हाजिरी : एसएमएस
के माध्यम से बच्चों की हाजिरी ब्लॉक स्तर पर या सीधे परिषद की एजेंसी को
भेजनी होगी।
सेल्फी से उपस्थति : शिक्षकों को अपनी उपस्थति सेल्फी के
माध्यम से भेजनी होगी। इसका खाका तैयार किया जा रहा है।
पेपर-कॉपी मिलेगी : अभी तक परीक्षा के लिए बच्चों को न तो पेपर मिल पाते हैं और न ही लिखने के लिए कॉपी। अगर मिलती भी है तो इसे शिक्षक अपने खर्च से उपलब्ध कराते हैं। पर अब ऐसा नहीं है। नए सत्र में इन्हें स्कूल पेपर और कॉपी उपलब्ध कराएगा।
पेपर-कॉपी मिलेगी : अभी तक परीक्षा के लिए बच्चों को न तो पेपर मिल पाते हैं और न ही लिखने के लिए कॉपी। अगर मिलती भी है तो इसे शिक्षक अपने खर्च से उपलब्ध कराते हैं। पर अब ऐसा नहीं है। नए सत्र में इन्हें स्कूल पेपर और कॉपी उपलब्ध कराएगा।
इनका कहना है:-
कई बदलाव प्रस्तावित हैं। अगर यह लागू होते हैं तो इससे स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ सकती है। इसके लिए शिक्षकों को भी मेहनत करनी होगी। योजनाओं में व्यवहारिकता बनी रहे तो ही सफलता मिलेगी।
-हाफिज अब्दुल कुद्दूस, शिक्षक, कटरी का कान्वेंट
खबर साभार : हिन्दुस्तान

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