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Sunday, March 20, 2016

सिद्धार्थनगर : मिड-डे मिल योजना लागू होने से स्कूलों में बढ़ा खतरा,अधिकांश विद्यालयों में पकता है चूल्हे पर भोजन, विद्यालयों में आग से बचाव की व्यवस्था नदारद

जागरण संवाददाता, खेसरहा, बांसी, सिद्धार्थनगर : आगजनी की दृष्टि से गर्मी का मौसम काफी संवेदनशील माना जाता है। प्रशासन भी इससे निपटने के तमाम इंतजाम करता है व आवश्यक दिशा निर्देश देता रहता है। मिड -डे मिल योजना लागू होने से स्कूलों में अग्निकांड की संभावना बढ़ी तो प्रशासन ने इन्हें भी अग्नि सुरक्षा के इंतजामों से मुस्तैद रहने का निर्देश दे दिया, पर विद्यालयों में इस आदेश की हवा ही निकलते दिखाई पड़ रही है। इससे निपटने के लिए सभी इंतजाम विद्यालयों के जिम्मेदारों ने सिर्फ कागजों में ही कर रखा है। अभी अधिकांश विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाला भोजन लकड़ी के चुल्हों पर ही पकता है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेलवालगुनही, गैडाखोर, मरवटिया, बेलहरी, गेंगटा, भलुहा व खेसरहा आदि दो दर्जन पूर्व माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां किचेन शेड तक नहीं है। विकास खंड के पूर्व व प्राथमिक के 212 विद्यालय स्थापित हैं पर पांच के पास ही गैस चूल्हा है। बाकी सभी विद्यालय मिड -डे मिल का भोजन लकड़ी पर ही पका रहे हैं। इस व्यवस्था पर आग लगी की घटनाओं से कैसे इंकार किया जा सकता है? स्कूलों में अग्नि शमन यंत्रों के इंतजाम किए जाए इसके लिए शासन स्तर से वर्ष 2009 में ही सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया था। आदेश के बाद विद्यालयों ने इसका अमल सिर्फ कागजी ही किया। दनियापार, पड़री, बिरपजोत, रिवान, बटुलहा व भरोली आदि विद्यालयों ने इस पर अमल किया भी तो वह आज तक अधूरा ही है। वैसे कार्रवाई से बचने के लिए कागजों में हर विद्यालयों ने अग्निशमन यंत्र की खरीददारी कर ली थी ,पर यह विद्यालय में कहां लगा है ,किसी की निगाह उसे खोज नहीं सकती। इस ओर विद्यालय के प्रधानाध्यापकों व विभाग के अधिकारियों का भी ध्यान नहीं हैं। अधिकांश विद्यालयों में खुले में बाहर ही मिड -डे मिल पक रहा है।खाना बनाते वक्त छोटी सी चिंगारी भी यदि आग बन गई तो यहां पढ़ने वाले नौनिहालों व अध्यापकों की सुरक्षा एक बड़ा सवाल बन जायेगा। बावजूद विभाग व जिम्मेदार इससे पूरी तरह बेफिक्र हैं। मिड-डे मिल योजना लागू होने से स्कूलों में बढ़ा खतरा अधिकांश विद्यालयों में पकता है चूल्हे पर भोजनगर्मी में अग्निकांड की घटनाओं में इजाफा हो जाता है। इसको देखते हुए हमने सभी प्रधानाध्यापकों से विद्यालयों में अग्नि शमन यंत्रों को ठीक कराने की हिदायत दे दह है। इसके बाद भी यदि जांच के दौरान वह नहीं मिले तो संबंधित पर कार्रवाई की जायेगी।

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