इसे बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही कहेंगे या भूल कि दुर्लभ आय वर्ग के बच्चों के दाखिला पत्र की सूची बिना सही और पूर्ण पते के ही जारी कर दी गई। गंभीर बात यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई स्कूलों की सूची में कुछ स्कूल तो अस्तित्व में ही नहीं हैं। विभाग की इस कारस्तानी का खामियाजा सीधे तौर पर बच्चों के अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है। वहीं शिकायतों के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग की नींद नहीं टूट रही। आरटीई के तहत दुर्लभ आय वर्ग (एक लाख से कम आय वर्ग के अभिभावकों)के बच्चों को कक्षा एक में निशुल्क दाखिले की व्यवस्था है। इसके तहत लगभग जिले के निजी विद्यालयों की एक लाख सीटों के सापेक्ष 25 प्रतिशत सीटें इस वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं। बेसिक शिक्षा विभाग को ऐसे बच्चों के दाखिले का दायित्व दिया गया। लेकिन विभाग ने नौनिहालों के दाखिले की प्रक्रिया का जमकर मखौल उड़ाया गया। विभाग की ओर से जारी दाखिला सूची में विद्यालयों के बिना पूर्ण पते के ही जारी कर दिए गए। जिसे शायद खुद विभाग को भी ढूंढ़ना मुश्किल होगा। बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी कहते हैं कि घर के आसपास एक किमी के दायरे में आने वाले निजी स्कूलों में निश्शुल्क दाखिला गरीब विद्यार्थियों को मिलना है। हमारे रिकार्ड में जो पता है उसी के अनुसार सूची बनाई है। अगर दिक्कत है तो उसे हल किया जाएगा। 1क्या कहते हैं निजी कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मधुसूदन दीक्षित का कहना है कि विभाग की ओर से जारी सूची में किसी विद्यालय का पूरा पता अंकित नहीं किया गया। यहीं कारण है कि किसी विद्यालय को अब तक दाखिले के संबंध में कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ।
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